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Maa Sharda Maihar Live Darshan: माँ शारदा देवी मैहर-शक्तिपीठ के लाइव दर्शन कैसे करे | Sharda Mata Maihar today pic

Maa Sharda Live Darshan- माँ शारदा माता- मंदिर की खोज के बाद आल्हा ने इस मंदिर में 12 साल तक तपस्या कर देवी को प्रसन्न किया. भक्त की तपस्या से खुश होकर मां ने आल्हा को अमरता का वरदान दे दिया. मां शारदा के मंदिर प्रांगण में फूलमती माता का मंदिर आल्हा की कुल देवी का है. आस्था है कि हर दिन ब्रह्म मुहुर्त में खुद आल्हा द्वारा मां की पूजा-अर्चना की जाती है. 

मां के मंदिर की तलहटी में आज भी आल्हा देव के अवशेष हैं, उनकी तलवार और खड़ाऊ आम भक्तों के दर्शन के लिए रखी गई है. यहां आल्हा तालाब भी है, जिसे प्रशासन ने संरक्षित कर रखा है. सूचना बोर्ड में इस तालाब के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्त्व का वर्णन किया गया है, यहां आल्हा-उदल अखाड़ा भी है. 

देशभर में शारदीय नवरात्र की शुरुआत हो चुकी है . मां दुर्गा के 51 शक्तिपीठों में से एक मध्य प्रदेश के सतना जिले में भी स्थित है मैहर , मैहर में पहाड़ों पर बसे इस शक्तिपीठ में हर नवरात्रि के अवसर पर मेला लगता है, इस दौरान लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं. हर सुबह 4 बजे माता की आरती होती है इसमें लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं .आज हम आप को माँ शारदा माता मैहर (मैहर शक्तिपीठ) के इतिहास से जुडी जानकरी दे रहे हैं , अतः आप सभी से अनुरोध है कि आर्टिकल को पूरा पढ़े |

Maa Sharda Live Darshan Live Darshan :

Maa Sharda Live Darshan

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मैहर :

मैहर  मध्य प्रदेश की एक तहसील है । यह एक प्रसिद्ध  हिन्दू तीर्थ स्थल है। यह सतना जिले में है| मैहर में शारदा माँ का प्रसिद्ध मन्दिर है जो नैसर्गिक रूप से समृद्ध कैमूर तथा विंध्य की पर्वत श्रेणियों की गोद में अठखेलियां करती तमसा के तट पर त्रिकूट पर्वत की पर्वत मालाओं के मध्य 600 फुट की ऊंचाई पर स्थित है।

यह ऐतिहासिक मंदिर 108 शक्ति पीठो में से एक है। यह पीठ सतयुग के प्रमुख अवतार नृसिंह भगवान के नाम पर ‘नरसिंह पीठ’ के नाम से भी विख्यात है। ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर  आल्हखंड के नायक  आल्हा  व  दोनों भाई मां शारदा के अनन्य उपासक थे। पर्वत की तलहटी में आल्हा का तालाब व अखाड़ा आज भी विद्यमान है।

यहाँ प्रतिदिन हजारों दर्शनार्थी आते हैं किंतु वर्ष में दोनों नवरात्रो में यहां मेला लगता है जिसमें लाखों दर्शनार्थी मैहर आते हैं। मां शारदा के बगल में प्रतिष्ठापित नरसिंहदेव जी की पाषाण मूर्ति आज से लगभग 1500 वर्ष पूर्व की है। देवी शारदा का यह प्रसिद्ध शक्तिपीठ स्थल देश के लाखों भक्तों के आस्था का केंद्र है माता का यह मंदिर धार्मिक तथा ऐतिहासिक है। वर्तमान में यहां पर आर्थिक दृष्टि से सीमेंट की तीन फैक्ट्रियां कार्यरत हैं। के जे एस के पास इच्छापूर्ति मंदिर पर्यटकों का दर्शनीय स्थल है ।

मैहर में लगता है हर साल मेला :

मैहर में मां शारदा का मंदिर है, यहां हर साल शारदीय नवरात्रि और चैत्र नवरात्रि में मेला लगता है. देश-विदेश से मां के भक्त अपनी इच्छाएं लेकर मंदिर पहुंचते हैं. मां शारदा उन देवियों में से हैं, जिन्होंने कलयुग में भी अपने भक्त आल्हा की तपस्या से प्रसन्न होकर उसे अमरता का वरदान दिया था. माना जाता है कि नवरात्रि में आज भी देवी मां की पहली पूजा आल्हा देव ही करते हैं |

विंध्य की पर्वत श्रेणियों में बसा है माँ शारदा का मंदिर : माँ शारदा माता

आदि शक्ति मां शारदा देवी का मंदिर मैहर नगर के पास विंध्य पर्वत श्रेणियों के बीच त्रिकूट पर्वत पर स्थित है. मां भवानी के 51 शक्तिपीठों में से एक इस मंदिर में मान्यता है कि यहां मां शारदा की पहली पूजा आदि गुरु शंकराचार्य ने की थी. मैहर स्थित पर्वत का नाम प्राचीन धर्म ग्रंथों में भी मिलता है, इसका उल्लेख भारत के अन्य पर्वतों के साथ ही पुराणों में भी कई बार आया है. माता के इस मंदिर तक जाने के लिए भक्तों को 1063 सीढ़ियां चढ़कर जाना पड़ता है, हर दिन यहां हजारों श्रद्धालु आते हैं|

इस कारण बना मैहर शक्तिपीठ :

माँ शारदा माता, मैहर

माँ शारदा के लाइव दर्शन करने के लिए यहाँ क्लिक करे|

माता के इस मंदिर तक जाने के लिए भक्तों को 1063 सीढ़ियां चढ़कर जाना पड़ता है, हर दिन यहां हजारों श्रद्धालु आते हैं. मंदिर के बारे माना जाता है कि दक्ष प्रजापति की पुत्री सती भगवान शिव से विवाह करना चाहती थी. लेकिन राजा दक्ष को यह इच्छा मंजूर नहीं थी, बावजूद इसके माता सती ने जिद कर भगवान शिव से विवाह कर लिया |

माता सती ने किया था देह त्याग

माता सती और भगवान शिव के विवाह के बाद राजा दक्ष ने एक यज्ञ करवाया, जिसमें उन्होंने ब्रह्मा, विष्णु, इंद्र और अन्य देवी-देवताओं को आमंत्रित किया. भगवान शिव को नहीं बुलाया गया, यज्ञ स्थल पर सती ने अपने पिता दक्ष से शंकर जी को आमंत्रित ना करने का कारण पूछा, इस पर राजा दक्ष ने भगवान शंकर को अपशब्द कह दिए. इस अपमान से दुखी होकर माता सती ने यज्ञ अग्नि कुंड में कूद कर अपने प्राण त्याग दिए|

‘माई का हार’ बन गया ‘मैहर’

सती के देह त्याग के बारे में भगवान शिव को पता चलते ही क्रोध में आकर उनका तीसरा नेत्र खुल गया, माना जाता है कि ब्रह्मांड की भलाई के लिए भगवान विष्णु ने सती के शरीर को 51 भागों में विभाजित कर दिया. जहां भी सती के अंग गिरे वहां शक्तिपीठों का निर्माण हुआ, माना जाता है कि सतना के पास माता सती का हार गिरा था, जिस कारण जगह का नाम ‘माई का हार’ पड़ गया लेकिन अपभ्रंश होकर इसका नाम मैहर हो गया, इसी कारण इसे भी शक्तिपीठ माना गया |

आल्हाखंड ने ढूंढ निकाला मंदिर :

त्रिकूट पर्वत की चोटी पर स्थित यह मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र बन चुका है. देश-विदेश से पर्यटक यहां सिर्फ मां शारदा की एक झलक देखने के लिए पहुंचते हैं. मंदिर का ऐतिहासिक महत्व भी है, बताया जाता है कि आल्हाखंड के नायक दो सगे भाई आल्हा और उदल मां शारदा के अनन्य उपासक थे. आल्हा-उदल ने ही सबसे पहले जंगल के बीच मां शारदा देवी के इस मंदिर की खोज की थी |

मां ने आल्हा को दे दिया अमरता का आशीर्वाद :

मंदिर की खोज के बाद आल्हा ने इस मंदिर में 12 वर्ष तक तपस्या कर माँ शारदा देवी को प्रसन्न किया, भक्त की तपस्या से खुश होकर मां ने आल्हा को अमरता का वरदान दे दिया. मां शारदा के मंदिर प्रांगण में फूलमती माता का मंदिर आल्हा की कुल देवी का है. आस्था है कि हर दिन ब्रह्म मुहुर्त में खुद आल्हा द्वारा मां की पूजा-अर्चना की जाती है. 

मां के मंदिर की तलहटी में आज भी आल्हा देव के अवशेष हैं, उनकी तलवार और खड़ाऊ आम भक्तों के दर्शन के लिए रखी गई है. यहां आल्हा तालाब भी है, जिसे प्रशासन ने संरक्षित कर रखा है. सूचना बोर्ड में इस तालाब के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्त्व का वर्णन किया गया है, यहां आल्हा-उदल अखाड़ा भी है. 

कौन थे आल्हा?

आल्हा और ऊदल दो भाई थे. ये बुन्देलखण्ड के महोबा के वीर योद्धा और परमार के सामंत थे. कालिंजर के राजा परमार के दरबार में जगनिक नाम के एक कवि ने आल्हा खण्ड नामक एक काव्य रचा था. उसमें इन वीरों की गाथा वर्णित है. इस ग्रंथ में दों वीरों की 52 लड़ाइयों का रोमांचकारी वर्णन है. आखरी लड़ाई उन्होंने पृथ्‍वीराज चौहान के साथ लड़ी थी. मां शारदा माई के भक्त आल्हा आज भी मां की पूजा और आरती करते हैं. 

आल्हाखण्ड ग्रंथ :

आल्हाखण्ड में गाया जाता है कि इन दोनों भाइयों का युद्ध दिल्ली के तत्कालीन शासक पृथ्वीराज चौहान से हुआ था. पृथ्‍वीराज चौहान को युद्ध में हारना पड़ा था लेकिन इसके पश्चात आल्हा के मन में वैराग्य आ गया और उन्होंने संन्यास ले लिया था. कहते हैं कि इस युद्ध में उनका भाई वीरगति को प्राप्त हो गया था. गुरु गोरखनाथ के आदेश से आल्हा ने पृथ्वीराज को जीवनदान दे दिया था. पृथ्वीराज चौहान के साथ उनकी यह आखरी लड़ाई थी. मान्यता है कि मां के परम भक्त आल्हा को मां शारदा का आशीर्वाद प्राप्त था, लिहाजा पृथ्वीराज चौहान की सेना को पीछे हटना पड़ा था. मां के आदेशानुसार आल्हा ने अपनी साग (हथियार) शारदा मंदिर पर चढ़ाकर नोक टेढ़ी कर दी थी. जिसे आज तक कोई सीधा नहीं कर पाया है. मंदिर परिसर में ही तमाम ऐतिहासिक महत्व के अवशेष अभी भी आल्हा व पृथ्वीराज चौहान की जंग की गवाही देते हैं.

मंदिर के रहस्यों को वैज्ञानिक भी नहीं सुलझा पाए :

मध्यप्रदेश के सतना जिले में मैहर तहसील के पास त्रिकूट पर्वत पर स्थित माता के इस मंदिर को मैहर देवी का शक्तिपीठ कहा जाता है. मैहर का मतलब है मां का हार. माना जाता है कि यहां मां सती का हार गिरा था| माँ शारदा के इस मंदिर की ऐसी मान्यता है कि शाम की आरती होने के बाद जब मंदिर के कपाट बंद करके सभी पुजारी नीचे आ जाते हैं, तब देर रात्रि यहां मंदिर के अंदर से घंटी और पूजा करने की आवाज आती है. लोग कहते है कि मां के भक्त ”आल्हा” अभी भी पूजा करने आते हैं. अक्सर सुबह की आरती वे ही करते हैं, और रोज जब मंदिर के पट खुलते है तब कुछ न कुछ रहस्यमय अजूबे के दर्शन होते है. कभी मन्दिर के गर्भगृह रोशनी से सरोबार रहता है तो कभी अद्भुत खुशबू से. अक्सर मन्दिर के गर्भगृह में मां शारदा के ऊपर अद्भुत फूल चढ़ा मिलता है. मैहर माता के मंदिर में लोग अपनी मनमांगी मुरादे पाने के लिए साल भर आते है. ऐसी मान्यता है कि शारदा माता इंसान को अमर होने का वर प्रदान करती है.

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माँ शारदा मंदिर का इतिहास :

विन्ध्य पर्वत श्रेणियों के मध्य त्रिकूट पर्वत पर स्थित इस मंदिर के बारे मान्यता है कि मां शारदा की प्रथम पूजा आदिगुरु शंकराचार्य द्वारा की गई थी. मैहर पर्वत का नाम प्राचीन धर्मग्रंथ ”महेन्द्र” में मिलता है. इसका उल्लेख भारत के अन्य पर्वतों के साथ पुराणों में भी आया है. मां शारदा की प्रतिमा के ठीक नीचे के न पढ़े जा सके शिलालेख भी कई पहेलियों को समेटे हुए हैं. सन्‌ 1922 में जैन दर्शनार्थियों की प्रेरणा से तत्कालीन महाराजा ब्रजनाथ सिंह जूदेव ने शारदा मंदिर परिसर में जीव बलि को प्रतिबंधित कर दिया था.

पिरामिडाकार त्रिकूट पर्वत में विराजीं मां शारदा का यह मंदिर 522 ईसा पूर्व का है. कहते हैं कि 522 ईसा पूर्व चतुर्दशी के दिन नृपल देव ने यहां सामवेदी की स्थापना की थी, तभी से त्रिकूट पर्वत में पूजा-अर्चना का दौर शुरू हुआ. ऐतिहासिक दस्तावेजों में इस तथ्य का प्रमाण प्राप्त होता है कि सन्‌ 539 (522 ईपू) चैत्र कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नृपलदेव ने सामवेदी देवी की स्थापना की थी|

कैसे पहुंचे माँ शारदा माता, मैहर :

वायु मार्ग:

मैहर तक पहुंचने के लिए निकटतम हवाई अड्डा, जबलपुर, खजुराहो और इलाहाबाद है। इन हवाई अड्डों से आप ट्रेन, बस या टैक्सी से आसानी से मैहर तक पहुंच सकते हैं। जबलपुर से मैहर दूरी 150 किलोमीटर खजुराहो से मैहर दूरी 130 किलोमीटर इलाहाबाद से मैहर दूरी 200 किलोमीटर |

ट्रेन द्वारा

आम तौर पर सभी ट्रेनों में मैहर स्टेशन पर रोक नहीं होती है, लेकिन नवरात्र उत्सवों के दौरान ज्यादातर ट्रेनें मैहर पर रुकती हैं। सभी ट्रेनों के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन जंक्शन – सतना स्टेशन से मैहर स्टेशन की दूरी 36 किलोमीटर है मैहर स्टेशन से कटनी स्टेशन की दूरी 55 किलोमीटर है|

सड़क मार्ग

मैहर शहर अच्छी तरह से राष्ट्रीय राजमार्ग 7 के साथ सड़क से जुड़ा हुआ है . आप आसानी से निकटतम प्रमुख शहरों से मैहर शहर के लिये नियमित बसें पा सकते हैं।

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Shardiya Navratri 2022: Happy Navratri Wishes in Hindi, Download WhatsApp Status 2022

Navratri 2022

हिंदी पंचाग के अनुसार साल में नवरात्रि 4 बार मनाई जाती है. दो बार गुप्त नवरात्रि और दो नवरात्रि को मुख्य रूप से मनाया जाता है | इसमें चैत्र और शारदीय मुख्य नवरात्रि हैं, जिसे देशभर में पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है | नवरात्रि का मतलब है नौ रातें. नौ दिन तक चलने वाले शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है |

देवी मां के पावन 9 दिन का पर्व शारदीय नवरात्रि आश्विन मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को  26 सितम्बर 2022 से आरंभ होगा | 4 अक्टूबर तक चलने वाले इन दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है | 5 अक्टूबर को धूमधाम के साथ विजयदशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा | इसी दिन दुर्गा विसर्जन भी किया जाएगा | शास्त्रों में मां दुर्गा के नौ रूपों का बखान किया गया है | नवरात्र के दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने से विशेष पुण्य मिलता है | मान्यता है कि मां दुर्गा अपने भक्तों के हर कष्ट हर लेती हैं |

नवरात्रि मां दूर्गा की उपासना का त्योहार है, जहां हिंदू धर्म में इसे नवरात्रि कहा जाता है, वहीं बंगाली धर्म में ये नौ दिन दूर्गा जी की पूजा की जाती है | प्रथम दिन उनकी स्थापना और समापन पर विसर्जन किया जाता है | हर साल श्राद्ध के बाद ही नवरात्रि की शुरुआत होती है | सब जगह वातावरण भक्तिमय हो जाता है | नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में हर दिन अलग-अलग देवी को समर्पित है |

शुरुआत के तीन दिनों में मां दुर्गा की शक्ति और ऊर्जा की पूजा की जाती है | इसके बाद के तीन दिन यानी चौथा, पांचवा और छठे दिन जीवन में शांति देने वाली माता लक्ष्मी जी को पूजा जाती है | सातवें दिन कला और ज्ञान की देवी को पूजा जाता है | वहीं आठवां दिन देवी महागौरी को समर्पित होता है | इस दिन महागौरी की पूजा की जाती है | आखिरी दिन यानी नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री देवी की पूजा की जाती है |

आज हम आपके लिए ले कर आये हैं, Best Happy navratri wishes in hindi जिनको की आप अपने दोस्तों और परिवार वालों के साथ शेयर कर सकते हैं, और उन्हें भी Happy navratri 2021 की बधाई दे सकते हैं। नवरात्रि के इस पावन मौके पर आप अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को बेहतरीन कोट्स और मैसेज भेजकर विश कर सकते हैं और उन्हें ढेर सारी शुभकामनाएं भी दे सकते हैं |

Happy Navratri Wishes 2022 in Hindi Download images

पग-पग में आपके फूल खिलें;

ख़ुशी आप सबको इतनी मिले;

कभी ना हो दुखों का सामना;

यही है आपको हमारी तरफ से नवरात्रि की शुभकामना।

मां की दुआओं में इतना असर हो जाए ,

कि कोरोना का कहर खत्म हो जाए।।

आपको हमारी तरफ से नवरात्रि की शुभकामना।

शेर पर सवार होकर,

खुशियों का वरदान लेकर,

हर घर में विराजी अंबे माँ,

हम सबकी जगदंबे माँ।।

नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं!

Happy Navratri  2021Wishes in Hindi, Download WhatsApp Status 2020

रूठी है तो मना लेंगे

पास अपने बुला लेंगे,

मइया है वो दिल की भोली

बातों में उसे रिझा लेंगे,

Navratri 2021 Ki Hardik shubhkamnaye

सारा जहान है जिसकी शरण में

नमन है उस मां के चरण में,

हम हैं मां के चरणों की धूल

आओ मां को चढ़ाएं श्रद्धा के फूल

हैप्‍पी नवरात्रि 2021

तेरी दुनिया में भय से जब सिमट जाऊं,

चारों ओर अंधेरा ही अँधेरा घना पाऊं,

बन के रोशनी तुम राह दिखा देना।।

आपको सहपरिवार नवरात्रि की शुभकामनाएं!

गौर वर्ण और वृषभ सवारी,

अक्षय पुण्यों की हे अधिकारी,

शस्त्र त्रिशूल माँ श्वेताम्बरी,

ऐश्वर्य प्रदायिनी जय माँ महागौरी।

Happy Navratri images in Hindi, Download WhatsApp Status 2021

हो जाओ तैयार, माँ अम्बे आने वाली हैं,

सजा लो दरबार माँ अम्बे आने वाली हैं।

तन, मन और जीवन हो जायेगा पावन,

माँ के कदमो की आहट से, गूँज उठेगा आँगन।

शुभ नवरात्री

हे मां तुमसे विश्वास ना उठने देना
बन के रोशनी तुम राह दिखा देना,
और बिगड़े काम बना देना
नवरात्रि 2021 की शुभकामनाएं

सारा जहां है जिसकी शरण में,
नमन है उस माँ के चरण में,
हम है उस माँ के चरणों की धूल,
आओ मिलकर माँ को चढ़ाएं श्रद्धा के फूल।।
आपको एवं आपके समस्त परिजनों को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं!

सारा जहां है जिसकी शरण में,

नमन है उस माँ के चरण में,

हम है उस माँ के चरणों की धूल,

आओ मिलकर माँ को चढ़ाएं श्रद्धा के फूल।।

शुभ नवरात्रि, Happy Navratri 2021

Happy Navratri Wishes in Hindi, Download WhatsApp Status 2021

सारा जहां है जिसकी शरण में,

नमन है उस मां के चरण में,

हम हैं उस मां के चरणों की धूल,

आओ मिलकर मां को चढ़ाएं श्रद्धा के फूल!

शुभ नवरात्रि

खुशी आप सबको इतनी मिले
कभी ना हो दुखों का सामना,
यही है हमारी तरफ से
आपको नवरात्रि की शुभकामना…
हैप्‍पी नवरात्रि 2021

तुम्ही दुर्गा, तुम्ही लक्ष्मी, तुम्ही महाकाली हो,

इस सम्पूर्ण सृष्टि का संचालन करने वाली हो,

शुम्भ,निशुम्भ मारे तुमने रक्तबीज संहारे है,

विक्राल रूप अपना धरकर महिसासुर भी उद्धारे हैं,

आज सम्स्त सृष्टि पाप के बोझ तले चीख रही है,

हे काली खप्पर भर लो,आस बस तेरी दीख रही है..!

Happy Navratri Wishes 2021 in Hindi, Download WhatsApp Status 2021

हो जाओ तैयार, मां अंबे आने वाली हैं,

सजा लो दरबार मां अंबे आने वाली हैं,

तन,मन और जीवन हो जाएगा पावन,

मां के कदमो की आहट से गूंज उठेगा आंगन..

हम पर अपनी कृपा बरसाओ माँ

एक बार फिर दर अपने बुलाओ माँ ।

जयकारे फिर गूंजे, बजे ढोल मंजीरे,

विपदा बड़ी है, चमत्कार दिखाओ माँ

तेरी शक्ति अपरंपार, तू जीवनदायिनी,

अपने आँचल में हमको छुपाओ माँ ।

करके सिंह सवारी, धरती पर आओ माँ

तेरी जय जय कार करें हम,

आपदा से बचाओ माँ ।

माँ दुर्गा के आशीर्वाद से आपका और

आपके परिवार का जीवन सदा हँसता और मुस्कुराता रहे,

प्रेम से बोलो जय माता दी।

नवरात्री की हार्दिक शुभकामनाएं।

Happy Navratri Wishes 2021

हमको था इंतजार वो घड़ी आ गई;

होकर सिंह पर सवार माता रानी आ गई;

होगी अब मन की हर मुराद पूरी;

हरने सारे दुख माता अपने द्वार आ गई..

नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं!

सजा हे दरबार, एक ज्योति जगमगाई है,

सुना हे नवरात्रि का त्योहार आया हैं,

वो देखो मंदिर में मेरी माता मुस्करायी है… जय माँ दुर्गा..

पहले माँ की पूजा, उसके बाद कोई काम दूजा,

आए हैं शुभ दिन मेरी माँ के, माँ ने मेरी हर मनोकामना पूरी की हैं..!

कुमकुम भरे कदमों से आए मां दुर्गा आपके द्वार,
सुख संपत्ति मिले आपको अपार,मेरी तरफ से नवरात्रि की एडवांस में शुभकामनाएं करें स्वीकार….

हाथ कमल और जप की माला,

गोद में जिसके शिव के लल्ला,

स्कन्द की माता,हे चेतना दाता,

कमल आसन,चतुर्हस्त माता,

जय शिव संगिनी स्कन्दमाता ।

Happy Navratri

नव दीप जले;

नव फूल खिले;

नित नयी बहार मिले;

नवरात्रि के इस पावन अवसर पर

आपको माता रानी का आशीर्वाद मिले.

हैप्पी नवरात्रि!

किस दिन कौन सी देवी की होगी पूजा
किस दिन कौन सी देवी की होगी पूजा Navratri 2020

माता का जब पर्व आता है,

ढेरों खुशियां लाता है,

इस बार मां आपको वो सब कुछ दे,

जो आपका दिल चाहता हैं.

नवरात्र की ढेर सारी शुभकामनाएं

वर्णों को रचने वाली,

१०८ नामो वाली।

श्री मंगला भद्रकाली दुखो को हरने वाली।

पापो का नाश करने वाली शक्ति दो मां कालिका काली।

चंड – मुंड विनाशिनी,

हैं!! महिषासुर घातिनी।

रक्षम रक्षम रक्षा करो मां रक्षा – रक्षा रक्षा करो मां खप्पर वाली।

Happy Navratri

हमको था जिसका इंतजार वो घड़ी आ गई,
होकर सिंह पर सवार माता रानी आ गई
शारदीय नवरात्रि की पावन शुभकामनाएं…

वो जग को चलाने वाली है,हम सबकी पालनहारी है,

कोई कहता है दुर्गा उसको, कोई कहता उसको काली है,

एक बेटी बनकर जन्म लिया, माँ-बाप कि राजदुलारी है,

एक बेटी बनकर इस घर के, आँगन की शान बढ़ा रही है,

अब निकल पड़ी है डोली उसकी, पहचान भी उसकी बदल रही है,

पापा की लाडो थी जो कभी,ये नया घर अब उसकी जिम्मेदारी है,

यू काट दिया जीवन उसने,सोचा की यही तकदीर हमारी है,

जग ने हराना चाहा हरकदम उसे, हर घडी वजूद बचा रही है,

वो जग को चलाने वाली है, वो सबला ही ये नारी है!

शुभ-नवरात्रि

Shardiya Navratri 2022 Day 6: नवरात्रि के छठवें दिन मां कात्यायनी की पूजा कैसे करें ?

Shardiya Navratri 2022 Day 6

नवरात्रि के छठवें दिन मां कात्यायनी की पूजा कैसे करें- हिंदी पंचाग के अनुसार साल में नवरात्रि 4 बार मनाई जाती है | दो बार गुप्त नवरात्रि और दो नवरात्रि को मुख्य रूप से मनाया जाता है | इसमें चैत्र और शारदीय मुख्य नवरात्रि हैं, जिसे देशभर में पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है | नवरात्रि का मतलब है नौ रातें | नौ दिन तक चलने वाले शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है |

देवी मां के पावन 9 दिन का पर्व शारदीय नवरात्रि आश्विन मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को 26 सितम्बर 2022 से आरंभ होगा |4 अक्टूबर तक चलने वाले इन दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है | 5 अक्टूबर को धूमधाम के साथ विजयदशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा | इसी दिन दुर्गा विसर्जन भी किया जाएगा | शास्त्रों में मां दुर्गा के नौ रूपों का बखान किया गया है | नवरात्र के दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने से विशेष पुण्य मिलता है | मान्यता है कि मां दुर्गा अपने भक्तों के हर कष्ट हर लेती हैं |

नवरात्र के छठे दिन कात्यायनी देवी की पूरे श्रद्धा भाव से पूजा की जाती है | कात्यायनी देवी दुर्गा जी का छठा अवतार हैं | शास्त्रों के अनुसार देवी ने कात्यायन ऋषि के घर उनकी पुत्री के रूप में जन्म लिया, इस कारण इनका नाम कात्यायनी पड़ गया | मां कात्यायनी अमोघ फलदायिनी मानी गई हैं | शिक्षा प्राप्ति के क्षेत्र में प्रयासरत भक्तों को माता की अवश्य उपासना करनी चाहिए |

देवी कात्यायनी को महिषासुर मर्दनी के नाम से भी जाना जाता है | यह देवी का कन्या स्वरूप है, जो अपने भक्त ऋषि कात्यायन की मुराद पूरी करने के लिए पुत्री रूप में प्रकट हुई थीं | नवरात्र में देवी कात्यायनी की पूजा के साथ ही नवरात्र का उत्सव जोर पकड़ने लगता है |

पूजा पंडालों में इस दिन से विशेष पूजा का आरंभ हो जाता है | पूजा पंडालों में नवरात्र की छठी तिथि को शाम के समय गाजे बाजे के साथ माता की डोली निकलती है और जिस बेल के वृक्ष में दो बेल एक साथ लगे होते हैं |

उनकी पूजा करके उनको पूजा में आमंत्रित किया जाता है | नवरात्र के सातवें दिन सुबह इस बेल को डोली में बैठाकर लाया जाता है और इसी बेल की पूजा करके देवी के नेत्रों में ज्योति का संचार किया जाता है | इस विधि के बाद पूजा पंडालों में देवी के मुख पर लगा आवरण हटा दिया जाता है और भक्त माता के रूप को निहार कर धन्य होते हैं |

मां कात्‍यायनी का रूप:- नवरात्रि के छठवें दिन मां कात्यायनी की पूजा कैसे करें?

मां कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत चमकीला और भव्य है | इनकी चार भुजाएं हैं | मां कात्यायनी के दाहिनी तरफ का ऊपर वाला हाथ अभय मुद्रा में और नीचे वाला वरमुद्रा में है | बाईं तरफ के ऊपरवाले हाथ में तलवार और नीचे वाले हाथ में कमल-पुष्प सुशोभित है |

मां कात्‍यायनी सिंह की सवारी करती हैं | मां कात्‍यायनी को पसंदीदा रंग लाल है | मान्‍यता है कि शहद का भोग पाकर वह बेहद प्रसन्‍न होती हैं | नवरात्रि के छठे दिन पूजा करते वक्‍त मां कात्‍यायनी को शहद का भोग लगाना शुभ माना जाता है |

नवरात्रि के छठवें दिन मां कात्यायनी की पूजा

मां कात्यायनी की पौराणिक कथा:-

पंडितजी का कहना है कि इनके नाम से जुड़ी कथा है कि एक समय कत नाम के प्रसिद्ध ऋषि थे | उनके पुत्र ऋषि कात्य हुए, उन्हीं के नाम से प्रसिद्ध कात्य गोत्र से, विश्वप्रसिद्ध ऋषि कात्यायन उत्पन्न हुए | उन्होंने भगवती पराम्बरा की उपासना करते हुए कठिन तपस्या की |

उनकी इच्छा थी कि भगवती उनके घर में पुत्री के रूप में जन्म लें | माता ने उनकी यह प्रार्थना स्वीकार कर ली | कुछ समय के पश्चात जब महिषासुर नामक राक्षस का अत्याचार बहुत बढ़ गया था, तब उसका विनाश करने के लिए ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने अपने अपने तेज़ और प्रताप का अंश देकर देवी को उत्पन्न किया था | महर्षि कात्यायन ने इनकी पूजा की इसी कारण से यह देवी कात्यायनी कहलायीं |

माँ दुर्गा के कात्यायनी स्वरूप की पूजा विधि:- नवरात्रि के छठवें दिन मां कात्यायनी की पूजा कैसे करें?

सर्वप्रथम कलश और उसमें उपस्थित देवी देवता की पूजा करें फिर माता के परिवार में शामिल देवी देवता की पूजा करें | इनकी पूजा के पश्चात देवी कात्यायनी जी की पूजा कि जाती है | पूजा की विधि शुरू करने पर हाथों में फूल लेकर देवी को प्रणाम कर देवी के मंत्र का ध्यान किया जाता है |

देवी की पूजा के पश्चात महादेव और परम पिता की पूजा करनी चाहिए | श्री हरि की पूजा देवी लक्ष्मी के साथ ही करनी चाहिए | मां कात्यायनी का स्वरूप अत्यन्त दिव्य और स्वर्ण के समान चमकीला है | यह अपनी प्रिय सवारी सिंह पर विराजमान रहती हैं | इनकी चार भुजायें भक्तों को वरदान देती हैं, इनका एक हाथ अभय मुद्रा में है, तो दूसरा हाथ वरदमुद्रा में है अन्य हाथों में तलवार तथा कमल का फूल है |

ध्यान:-

वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा कात्यायनी यशस्वनीम्॥
स्वर्णाआज्ञा चक्र स्थितां षष्टम दुर्गा त्रिनेत्राम्।
वराभीत करां षगपदधरां कात्यायनसुतां भजामि॥
पटाम्बर परिधानां स्मेरमुखी नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥
प्रसन्नवदना पञ्वाधरां कांतकपोला तुंग कुचाम्।
कमनीयां लावण्यां त्रिवलीविभूषित निम्न नाभिम॥

स्तोत्र पाठ:-

कंचनाभा वराभयं पद्मधरा मुकटोज्जवलां।
स्मेरमुखीं शिवपत्नी कात्यायनेसुते नमोअस्तुते॥
पटाम्बर परिधानां नानालंकार भूषितां।
सिंहस्थितां पदमहस्तां कात्यायनसुते नमोअस्तुते॥
परमांवदमयी देवि परब्रह्म परमात्मा।
परमशक्ति, परमभक्ति,कात्यायनसुते नमोअस्तुते॥

Shardiya Navratri 2022 का छठवा दिन : मां कात्यायनी की कैसे करें पूजा

मां कात्यायनी

नवरात्र के छठे दिन कात्यायनी देवी की पूरे श्रद्धा भाव से पूजा की जाती है | कात्यायनी देवी दुर्गा जी का छठा अवतार हैं | शास्त्रों के अनुसार देवी ने कात्यायन ऋषि के घर उनकी पुत्री के रूप में जन्म लिया, इस कारण इनका नाम कात्यायनी पड़ गया | मां कात्यायनी अमोघ फलदायिनी मानी गई हैं | शिक्षा प्राप्ति के क्षेत्र में प्रयासरत भक्तों को माता की अवश्य उपासना करनी चाहिए |

हिंदी पंचाग के अनुसार साल में नवरात्रि 4 बार मनाई जाती है | दो बार गुप्त नवरात्रि और दो नवरात्रि को मुख्य रूप से मनाया जाता है | इसमें चैत्र और शारदीय मुख्य नवरात्रि हैं, जिसे देशभर में पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है | नवरात्रि का मतलब है नौ रातें | नौ दिन तक चलने वाले शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है |

देवी मां के पावन दिन का पर्व शारदीय नवरात्रि आश्विन मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को 26 सितम्बर 2022 से आरंभ होगा | अक्टूबर तक चलने वाले इन दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है | अक्टूबर को धूमधाम के साथ विजयदशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा | इसी दिन दुर्गा विसर्जन भी किया जाएगा | शास्त्रों में मां दुर्गा के नौ रूपों का बखान किया गया है | नवरात्र के दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने से विशेष पुण्य मिलता है | मान्यता है कि मां दुर्गा अपने भक्तों के हर कष्ट हर लेती हैं |

देवी कात्यायनी को महिषासुर मर्दनी के नाम से भी जाना जाता है | यह देवी का कन्या स्वरूप है, जो अपने भक्त ऋषि कात्यायन की मुराद पूरी करने के लिए पुत्री रूप में प्रकट हुई थीं | नवरात्र में देवी कात्यायनी की पूजा के साथ ही नवरात्र का उत्सव जोर पकड़ने लगता है |

पूजा पंडालों में इस दिन से विशेष पूजा का आरंभ हो जाता है | पूजा पंडालों में नवरात्र की छठी तिथि को शाम के समय गाजे बाजे के साथ माता की डोली निकलती है और जिस बेल के वृक्ष में दो बेल एक साथ लगे होते हैं |

उनकी पूजा करके उनको पूजा में आमंत्रित किया जाता है | नवरात्र के सातवें दिन सुबह इस बेल को डोली में बैठाकर लाया जाता है और इसी बेल की पूजा करके देवी के नेत्रों में ज्योति का संचार किया जाता है | इस विधि के बाद पूजा पंडालों में देवी के मुख पर लगा आवरण हटा दिया जाता है और भक्त माता के रूप को निहार कर धन्य होते हैं |

मां कात्‍यायनी का रूप:-

मां कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत चमकीला और भव्य है | इनकी चार भुजाएं हैं | मां कात्यायनी के दाहिनी तरफ का ऊपर वाला हाथ अभय मुद्रा में और नीचे वाला वरमुद्रा में है | बाईं तरफ के ऊपरवाले हाथ में तलवार और नीचे वाले हाथ में कमल-पुष्प सुशोभित है |

मां कात्‍यायनी सिंह की सवारी करती हैं | मां कात्‍यायनी को पसंदीदा रंग लाल है | मान्‍यता है कि शहद का भोग पाकर वह बेहद प्रसन्‍न होती हैं | नवरात्रि के छठे दिन पूजा करते वक्‍त मां कात्‍यायनी को शहद का भोग लगाना शुभ माना जाता है |

मां कात्यायनी

मां कात्यायनी की पौराणिक कथा:-

पंडितजी का कहना है कि इनके नाम से जुड़ी कथा है कि एक समय कत नाम के प्रसिद्ध ऋषि थे | उनके पुत्र ऋषि कात्य हुए, उन्हीं के नाम से प्रसिद्ध कात्य गोत्र से, विश्वप्रसिद्ध ऋषि कात्यायन उत्पन्न हुए | उन्होंने भगवती पराम्बरा की उपासना करते हुए कठिन तपस्या की |

उनकी इच्छा थी कि भगवती उनके घर में पुत्री के रूप में जन्म लें | माता ने उनकी यह प्रार्थना स्वीकार कर ली | कुछ समय के पश्चात जब महिषासुर नामक राक्षस का अत्याचार बहुत बढ़ गया था, तब उसका विनाश करने के लिए ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने अपने अपने तेज़ और प्रताप का अंश देकर देवी को उत्पन्न किया था | महर्षि कात्यायन ने इनकी पूजा की इसी कारण से यह देवी कात्यायनी कहलायीं |

माँ दुर्गा के कात्यायनी स्वरूप की पूजा विधि:-

सर्वप्रथम कलश और उसमें उपस्थित देवी देवता की पूजा करें फिर माता के परिवार में शामिल देवी देवता की पूजा करें | इनकी पूजा के पश्चात देवी कात्यायनी जी की पूजा कि जाती है | पूजा की विधि शुरू करने पर हाथों में फूल लेकर देवी को प्रणाम कर देवी के मंत्र का ध्यान किया जाता है |

देवी की पूजा के पश्चात महादेव और परम पिता की पूजा करनी चाहिए | श्री हरि की पूजा देवी लक्ष्मी के साथ ही करनी चाहिए | मां कात्यायनी का स्वरूप अत्यन्त दिव्य और स्वर्ण के समान चमकीला है | यह अपनी प्रिय सवारी सिंह पर विराजमान रहती हैं | इनकी चार भुजायें भक्तों को वरदान देती हैं, इनका एक हाथ अभय मुद्रा में है, तो दूसरा हाथ वरदमुद्रा में है अन्य हाथों में तलवार तथा कमल का फूल है |

ध्यान:-

वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा कात्यायनी यशस्वनीम्॥
स्वर्णाआज्ञा चक्र स्थितां षष्टम दुर्गा त्रिनेत्राम्।
वराभीत करां षगपदधरां कात्यायनसुतां भजामि॥
पटाम्बर परिधानां स्मेरमुखी नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥
प्रसन्नवदना पञ्वाधरां कांतकपोला तुंग कुचाम्।
कमनीयां लावण्यां त्रिवलीविभूषित निम्न नाभिम॥

स्तोत्र पाठ:-

कंचनाभा वराभयं पद्मधरा मुकटोज्जवलां।
स्मेरमुखीं शिवपत्नी कात्यायनेसुते नमोअस्तुते॥
पटाम्बर परिधानां नानालंकार भूषितां।
सिंहस्थितां पदमहस्तां कात्यायनसुते नमोअस्तुते॥
परमांवदमयी देवि परब्रह्म परमात्मा।
परमशक्ति, परमभक्ति,कात्यायनसुते नमोअस्तुते॥

Dhanteras 2022: जानिए धनतेरस से जुड़ी पौराणिक कथाओं के बारे में, क्यों मनाया जाता है धनतेरस का पर्व?

धनतेरस से जुडी पौराणिक कथाएं 2022:-

भारतीय संस्कृति में स्वास्थ्य को धन से ऊपर माना गया है | एक प्राचीन कहावत है जो आज भी प्रचलित है कि ‘पहला सुख निरोगी काया, दूजा सुख घर में माया‘ | धनतेरस का दिन धन्वन्तरि त्रयोदशी या धन्वन्तरि जयन्ती, जो कि आयुर्वेद के देवता का जन्म दिवस है, के रूप में भी मनाया जाता है, धनतेरस से जुडी पौराणिक कथाएं |

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान धन्वंतरि विष्णु के अंशावतार माने जाते हैं | संसार में चिकित्सा विज्ञान के विस्तार और प्रसार के लिए ही भगवान विष्णु ने ये अवतार लिया था। भगवान धन्वंतरि के प्रकट होने के उपलक्ष्य में ही धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है |

धनतेरस से जुडी पौराणिक कथाएं:-

समुद्र मंथन के दौरान, अमृत का कलश लेकर भगवान् धनवंतरी प्रकट हुए थे | इस कारण इस दिन को धनतेरस के रूप में मनाया जाने लगा | धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, धनवंतरी के प्रकट होने के ठीक दो दिन बाद मां लक्ष्मी प्रकट हुईं थीं | यही कारण है कि हर बार दिवाली से दो दिन पहले ही धनतेरस मनाया जाता है |

इस दिन स्वास्थ्य रक्षा के लिए धनवंतरी देव की उपासना की जाती है | इस दिन को कुबेर का दिन भी माना जाता है और धन संपन्नता के लिए कुबेर की पूजा की जाती है |

धनतेरस से जुडी पौराणिक कथाएं

लक्ष्मी चंचला हैं:-

एक कथा के अनुसार एक बार भगवान विष्णु मृत्युलोक में विचरण करने आ रहे थे | तब लक्ष्मीजी ने भी उनके साथ चलने का आग्रह किया | विष्णु जी ने कहा ठीक है पर मैं आपसे जो कहूं वह आप मानेंगी तो आप मेरे साथ चल सकती हैं | लक्ष्मीजी उनकी बात मान गईं और भगवान विष्णु के साथ धरती पर आ गईं |

कुछ देर बाद एक स्थान पर पहुंच कर भगवान विष्णु ने लक्ष्मीजी से कहा कि जब तक मैं न आऊं तुम यहां ठहरो | मैं दक्षिण दिशा की ओर जा रहा हूं, तुम उधर मत आना | विष्णुजी के जाने पर लक्ष्मी के मन में कौतुहल जागा कि आखिर दक्षिण दिशा में ऐसा क्या रहस्य है, जो मुझे मना किया गया है और भगवान स्वयं चले गए |

लक्ष्मीजी से रहा नहीं गया और जैसे ही भगवान आगे बढ़े लक्ष्मी भी पीछे-पीछे चल पड़ीं | कुछ ही आगे जाने पर उन्हें सरसों का एक खेत दिखाई दिया जिसमें खूब फूल लगे थे | सरसों की शोभा देखकर वह मंत्रमुग्ध हो गईं और फूल तोड़कर अपना श्रृंगार करने के बाद आगे बढ़ीं | आगे जाने पर एक गन्ने के खेत से लक्ष्मीजी गन्ने तोड़कर रस चूसने लगीं |

उसी क्षण विष्णु जी आ गए और यह देख लक्ष्मीजी पर नाराज होकर उन्हें शाप दे दिया कि जब मैंने तुम्हें इधर आने को मना किया था, पर तुम न मानी और किसान के खेत में चोरी का अपराध कर बैठी | अब तुम इस अपराध के जुर्म में इस किसान की 12 वर्ष तक सेवा करो | ऐसा कहकर भगवान उन्हें छोड़कर क्षीरसागर चले गए | लक्ष्मीजी उस गरीब किसान के घर रहने लगीं |

एक दिन लक्ष्मीजी ने उस किसान की पत्नी से कहा कि तुम स्नान कर पहले मेरी बनाई गई इस देवी लक्ष्मी का पूजन करो, फिर रसोई बनाना, तब तुम जो मांगोगी मिलेगा | किसान की पत्नी ने ऐसा ही किया | पूजा के प्रभाव और लक्ष्मी की कृपा से किसान का घर दूसरे ही दिन से अन्न, धन, रत्न, स्वर्ण आदि से भर गया | लक्ष्मी ने किसान को धन-धान्य से पूर्ण कर दिया |

किसान के 12 वर्ष बड़े आनंद से कट गए | फिर 12 वर्ष के बाद लक्ष्मीजी जाने के लिए तैयार हुईं | विष्णुजी लक्ष्मीजी को लेने आए तो किसान ने उन्हें भेजने से इंकार कर दिया | तब भगवान ने किसान से कहा कि इन्हें कौन जाने देता है, यह तो चंचला हैं, कहीं नहीं ठहरतीं | इनको बड़े-बड़े नहीं रोक सके | इनको मेरा शाप था इसलिए 12 वर्ष से तुम्हारी सेवा कर रही थीं | तुम्हारी 12 वर्ष सेवा का समय पूरा हो चुका है |

धनतेरस से जुडी पौराणिक कथाएं

राजा बलि से जुडी एक कथा:-

राजा बलि के भय से देवताओं को मुक्ति दिलाने के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया था | राजा बलि एक दानवीर राजा थे | स्वर्ग पर विजय पाने के लिए वह यज्ञ कर रहे थे | उस यज्ञ स्थल पर भगवान विष्णु वामन अवतार में जा पहुंचे |

लेकिन असुरों के गुरु शुक्राचार्य पहचान गए कि वामन के रूप में भगवान विष्णु ही हैं | इसलिए उन्होंने राजा बलि से कहा कि वामन जो भी मांगे वो उन्हें ना दिया जाए | साथ ही उन्होंने कहा कि वामन के रूप में भगवान विष्णु हैं, जो देवताओं की सहायता करने के लिए यहां आए हैं |

लेकिन राजा बलि ने शुक्राचार्य की बात नहीं सुनी और वामन भगवान द्वारा मांगी गई तीन पग भूमि दान करने के लिए तैयार हो गए | लेकिन शुक्राचार्य ऐसा नहीं चाहते थे, इसलिए राजा बलि को दान करने से रोकने के लिए शुक्राचार्य ने उनके कमंडल में लघु रूप धारण करके प्रवेश कर लिया था |

लेकिन भगवान वामन भी शुक्राचार्य के छल को समझ गए थे, जिसके बाद उन्होंने अपने हाथों में मौजूद कुशा को कमंडल में इस तरह रखा कि शुक्राचार्य की एक आंख फूट गई |

कहा जाता है कि इसके बाद भगवान द्वारा मांगी गई तीन पग भूमि को बलि ने दान करने का निर्णय ले लिया | उस समय भगवान वामन ने अपने एक पैर से पूरी धरती को नापा और दूसरे पैर से अंतरिक्ष को नाप लिया | लेकिन तीसरा पैर रखने के लिए कुछ स्थान नहीं बचा था, जिसके बाद बलि ने वामन भगवान के चरणों में अपना सिर रख दिया था |

देवताओं को बलि के भय से इस तरह मुक्ति मिल गई थी | इसी जीत की खुशी में धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है |

राजा हिमा के पुत्र से जुडी कथा:-

राजा हिमा के बड़े बेटे के बारे में भविष्य वाणी हुई थी की वह अपने शादी के चौथे दिन एक सांप के काटने से मर जाएगा। उसकी शादी के चौथे दिन उसकी पत्नी ने कमरे और दरवाजे पर सोने चांदी के सिक्के रख दिये |

पूरे घर को दिये से सजा दिया। अपने पति को सुलाने के लिए कहानियां और गाने गाने लगी | जब यम देवता सांप के रूप में आए तो सिक्के और दिये की तेज रोशनी से अंदर नहीं जा सके बाहर बैठ कर गाने सुनते रहे और सुबह होते ही चले गए | इसलिए ये धनतेरस मनाई जाती है |

Happy Dhanteras 2022 Wish in Hindi

Happy Dhanteras 2022

धनत्रयोदशी जिसे धनतेरस के रूप में भी जाना जाता है, पांच दिवसीय दिवाली उत्सव का पहला दिन है | धनतेरस हिंदू त्योहार दिवाली की शुरुआत का प्रतीक है | धनतेरस पूरे भारत और पड़ोसी देश नेपाल में भी मनाया जाता है | धनतेरस शब्द संस्कृत के दो शब्दों ‘धन’ और ‘तेरस’ से मिलकर बना है (Happy Dhanteras 2020 Wish)|

‘धन’ का अर्थ है वैभव (Wealth) और ‘तेरस’ का तात्पर्य चंद्रमा के चक्र में तेरहवें दिन से है | हिंदू मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस के दिन सोना, चांदी और कीमती सामान खरीदना बेहद शुभ माना जाता है | धनतेरस के दिन, भक्त देवी लक्ष्मी से प्रार्थना करते हैं जो धन, भाग्य और समृद्धि की देवी हैं |

happy laxmi mata image 2022

एक पौराणिक कथा के अनुसार धनत्रयोदशी के दिन, दूधिया सागर के मंथन के दौरान देवी लक्ष्मी समुद्र से बाहर आईं | इसलिए, भगवान कुबेर के साथ धन की देवी, देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है, जो त्रयोदशी के शुभ दिन होती है | हालांकि, धनत्रयोदशी के दो दिनों के बाद अमावस्या पर लक्ष्मी पूजा को अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है |

Happy Dhanteras 2022 Quotes :-

इस धनतेरस अपने करीबियों को अपने परिवार वालों को अपने चाहने वालों को इन संदेशों से धनतेरस की शुभकामनाएं दें:-

आज से ही आपके यहाँ धन की बरसात हो, माँ लक्ष्मी का वास हो, संकटों का नाश हो; उन्नति का सर पर ताज हो और घर में शांति का वास हो। Happy Dhanteras !

घनर घनर बरसे जैसे घटा, वैसे ही हो धन की वर्षा; मंगलमय हो यह त्यौहार, भेंट में आये उपहार ही उपहार। Happy Dhanteras !

Happy Dhanteras 2022

ये धनतेरस कुछ खास हो, दिलों में खुशियां, घर में सुख का वास हो; हीरे मोती पर आपका राज हो, मिटे दूरियां, सब आपके पास हो। Happy Dhanteras !

सोने का रथ, चांदनी की पालकी, बैठकर जिसमें माँ लक्ष्मी आई; देने आपको और आपके पुरे परिवार को, धनतेरस की बधाई।

लक्ष्मी माता का नूर आप पर बरसे, हर कोई आपसे लोन लेने को तरसे; भगवान आपको दे इतना धन, की आप चिल्लर को तरसे। धनतेरस की हार्दिक बधाई।

दीप जले तो रोशन आपका जहान हो, पूरा आपका हर एक अरमान हो। माँ लक्ष्मी जी की कृपा बनी रहे आप पर, इस धनतेरस पर आप बहुत धनवान हो। Happy Dhanteras !

Happy Dhanteras 2022 whatsapp status

धन की ज्योत का प्रकाश, पुलकित धरती, जगमग आकाश; आज ये प्रार्थना है, आप के लिए ख़ास, धनतेरस के शुभ दिन, पूरी हो हर आस। धनतेरस की शुभकामना।

दिनों दिन बढ़ता जाए आपका कारोबार, परिवार में बना रहे स्नेह और प्यार; होती रहे सदा आप पर धन की बौछार, ऐसा हो आपका धनतेरस का त्यौहार। Happy Dhanteras !

आपके घर में धन की बरसात हो, लक्ष्मी का वास हो; संकटों का नाश हो, शान्ति का वास हो। हैप्पी धनतेरस।

Happy Dhanteras 2022

धन धान्य भरी है धनतेरस, धनतेरस का दिन है बड़ा ही मुबारक; माता लक्ष्मी है इस दिन की संचालक, आओ मिल करें पूजन उनका जो है जीवन की उद्धारक। Happy Dhanteras !

धनतेरस का ये प्यारा त्यौहार, जीवन में लाये खुशियां अपार; माता लक्ष्मी विराजे आपके द्वार, सभी कामना करे आपकी स्वीकार। Happy Dhanteras !

dhanteras 2022

धन की बरसात हो,
खुशियों का आगाज हो,
आपको जीवन का हर सुख प्राप्त हो
माता लक्ष्मी का आपके घर वास हो.

धन धन्य भरी है धनतेरस.. धनतेरस का दिन है बड़ा ही मुबारक, माता लक्ष्मी है ये दिन की संचालक.. चलो मिलकर करे पूजा उनकी.. क्यों के लक्ष्मी जी ही तो है जीवन की उद्धारक. Happy Dhanteras 2020

सोने का रथ, चांदी की पालकी,बैठकर जिसमें है लक्ष्मी मां है आयी
देने आपके परिवार को धनतेरस की बधाई धनतेरस की हार्दिक बधाई।

खूब मीठे मीठे पकवान खाए,
सेहत में चार चाँद लगाये,
लोग तो सिर्फ चाँद तक गए हैं,
आप उस से भी ऊपर जाये.
शुभ धनतेरस की आप सब को बधाईयाँ

आज से आप के यहाँ धन की बरसात हो,
माँ लक्ष्मी का निवास हो,
संकट का नाश हो
सर पर उन्नति का ताज हो.
*** इस धनतेरस की खूब शुभकामनाएं **

दीप जले तो रोशन आपका जहान हो,
पूरा आपका हर एक अरमान हो।
माँ लक्ष्मी जी की कृपा बनी रहे आप पर,
इस धनतेरस पर आप बहुत धनवान हों

Happy Dhanteras 2022

आज से ही आपके यहाँ धन की बरसात हो
माँ लक्ष्मी का वास हो, संकटों का नाश हो।
हर दिल पर आपका राज हो;उन्नति का सर पर ताज हो
और घर में शांति का वास हो! शुभ धनतेरस

लक्ष्मी देवी का नूर आप पर बरसे, हर कोई आपसे मिलने को तरसे,
भगवान आपको दे इतने पैसे, कि आप चिल्लर पाने को तरसें.!

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Chhath Puja क्यों मनाई जाती है? 2022 में छठ पूजा कब है यहाँ जाने

Chhath Puja- हेलो दोस्तों आज हम इस आर्टिकल के माध्यम से जानेगे की छठ पूजा क्यों मनाई जाती है? छठ पूजा क्या है और यह पूजा कौन करता है? हो सकता है आप लोगों को छठ पूजा के बारे में पहले से ही जानकारी हो। लेकिन अभी भी बहुत से लोग यह नहीं जानते हैं कि छठ पूजा क्यों मनाई जाती है?

अगर आप भी नहीं जानते हैं तो आज का यह आर्टिकल के माध्यम से जान जायेगे , तो बने रहिये हमारे साथ।  दोस्तों Chhath Puja हिंदू धर्म के लोगों द्वारा मनाया जाने वाला एक बहुत बड़ा त्योहार है, जो लगातार चार दिनों तक मनाया जाता है। छठ पर्व को छठ पूजा, छठ, डाला छठ, छठ माई, छठ माई, षष्ठी सूर्य और षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है।

यह त्योहार मुख्य रूप से भारत के बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है, जबकि अन्य देशों की बात करें तो यह त्योहार नेपाल के तराई क्षेत्रों में भी मनाया जाता है। Chhath Puja सूर्य को समर्पित है। पौराणिक मान्यता के अनुसार छठी माता भगवान सूर्य की बहन हैं। छठ पूजा का त्योहार खासकर बिहार में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। बिहार के लोग इसे अपना सबसे बड़ा त्योहार मानते हैं और एक तरह से यह त्योहार उनकी संस्कृति बन गया है. अब बात आती है छठ पूजा क्यों मनाई जाती है?

छठ पूजा 2022 में कब है?

दोस्तों 2022 में 30 अक्टूबर, रविवार को छठ पूजा है।

छठ पूजा क्यों मनाते हैं? (Chhath Puja)

छठ पूजा उत्तर भारत में एक महत्वपूर्ण त्योहार है। छठ पूजा उत्तर भारत में एक महत्वपूर्ण त्योहार है, मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है। भक्त इन चार दिनों के दौरान हिंदू सूर्य देव, सूर्य देव की पूजा करते हैं। छठ पूजा मनाने के लिए महिलाएं 36 घंटे का निर्जला व्रत रखती हैं।

यह त्योहार सूर्य देव (भगवान सूर्य) और छठी मैया (सूर्य देव की बहन) को समर्पित है, जिनकी इस दिन पूजा की जाती है। कुछ विश्वासियों का कहना है कि छठ पूजा भी भगवान सूर्य के पुत्र और अंग देश के राजा कर्ण द्वारा की गई थी, जो बिहार में आधुनिक भागलपुर है।

एक अन्य किंवदंती के अनुसार, पांडवों और द्रौपदी ने भी पूजा की थी भगवान राम ने 14 साल के वनवास के बाद अयोध्या लौटने पर भगवान सूर्य की पूजा की थी। आमतौर पर छठ पूजा के दौरान महिलाएं व्रत रखती हैं और दिवाली के बाद त्योहार की तैयारी शुरू हो जाती है

छठ पूजा कैसे मनाई जाती है?

Chhath Puja का त्योहार मुख्य रूप से बिहार में मनाया जाता है। बिहार में यह पर्व बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। छठ पूजा उत्सव का मुख्य भाग छठ व्रत है।

छठ व्रत में भोजन के बिना भोजन और पानी रखना, कमर तक पानी में खड़े रहना, सूर्य को अर्घ्य देना, एकांत में प्रसाद ग्रहण करना, स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना आदि जैसे सख्त नियम शामिल हैं। इस दिन सूर्य उषा की दोनों पत्नियां यानी सूर्योदय और प्रत्यूषा यानी सूर्यास्त की भी पूजा की जाती है।

षष्ठी माता के लोकगीत बिहार में बहुत लोकप्रिय हैं। छठ पूजा की शुरुआत के साथ ही घरों और मंदिरों से छठ माता लोक गीतों की गूँज सुनाई देती है। छठ पूजा बिहार की परंपरा बन गई है।

छठ पूजा करते समय अनुष्ठान –

छठ पूजा के पहले दिन को नहाय खाये के नाम से जाना जाता है। पहले दिन सुबह स्नान किया जाता है और उसके बाद नए कपड़े पहनकर प्रार्थना की जाती है। इसके बाद, भक्त प्रसाद के रूप में चावल और चने की दाल का सेवन करते हैं।

दूसरे दिन को छठ खरना कहा जाता है। इस दिन रात के समय गुड़ से बना खीर प्रसाद खाया जाता है। हलवा मिट्टी के चूल्हे पर बनाया जाता है। सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद महिलाएं प्रसाद का सेवन करती हैं और 36 घंटे तक व्रत रखती हैं।

तीसरे दिन को संध्या अर्घ्य कहा जाता है। इस दिन महिलाएं नए कपड़े पहनती हैं और डूबते सूरज को अर्घ्य देने के लिए नदी या तालाब में जाती हैं। उपवास तीसरे दिन की पूरी रात तक चलता है।

छठ के चौथे और अंतिम दिन को उषा अर्घ्य के नाम से जाना जाता है। इस दिन व्रत रखने वाली महिलाएं जल में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देती हैं। इसके बाद महिलाएं प्रसाद के साथ 36 घंटे का उपवास तोड़ती हैं।

छठ पूजा का महत्व

छठ पूजा का महत्व न केवल पौराणिक दृष्टिकोण से बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी माना गया है। छठ पूजा पर भगवान सूर्य की विशेष पूजा की जाती है। सूर्य की किरणें अत्यंत लाभकारी मानी जाती हैं।

छठ पूजा के त्योहार में प्राकृतिक चीजों का ही प्रयोग किया जाता है जैसे बांस, प्राकृतिक फल और फूल, गन्ने का रस आदि। छठ पूजा व्रत प्राकृतिक सुंदरता और स्वास्थ्य लाभ के लिए रखा जाता है।

ऐसा माना जाता है कि महिलाएं पुत्र रत्न की प्राप्ति और पुत्र की भलाई की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं। छठ व्रत का पालन करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी यह दिन विशेष माना जाता है।

निष्कर्ष –

दोस्तों उम्मीद करता हूँ आज इस आर्टिकल के माध्यम से आप लोगों को छठ पूजा क्यों मनाई जाती है? छठ पूजा क्या है और यह पूजा कौन करता है? इन सभी सवालो के बारे में सारी जानकारी मिल गई होगी। दोस्तों फिर भी, अगर आप हमसे इस आर्टिकल से जुड़े कुछ सवाल हमसे पूछना चाहते हैं तो नीचे कमेंट करके पूछ सकते हैं हमारी टीम आपका जवाब जरूर देगी , कृपया अपने दोस्तों के साथ जरूर इस आर्टिकल को साझा करे ताकि उनको भी यह जानकारी मिल सके धन्यवाद।

Chhath Puja 2022: कौन हैं छठ मैया ? जानिए भगवान सूर्य और छठ मैया की पूजा क्यों महत्वपूर्ण है

Chhath Puja 2022:-

छठ सूर्य और छठी माता की उपासना का पर्व है | हिन्दू आस्था का यह एक ऐसा पर्व है जिसमें मूर्ति पूजा शामिल नहीं है | इस पूजा में छठी मईया के लिए व्रत किया जाता है | यह व्रत कठिन व्रतों में से एक माना जाता है | इसलिए छठ पूजा के दौरान कई बातों का ध्यान रखा जाता है |

छठ पूजा का प्रारंभ दो दिन पूर्व चतुर्थी तिथि को नहाय खाय से होता है, फिर पंचमी को लोहंडा और खरना होता है | उसके बाद षष्ठी तिथि को छठ पूजा होती है, जिसमें सूर्य देव को शाम का अर्घ्य अर्पित किया जाता है | इसके बाद अगले दिन सप्तमी को सूर्योदय के समय में उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं और फिर पारण करके व्रत को पूरा किया जाता है | तिथि के अनुसार, छठ पूजा 4 दिनों की होती है |

छठ पर्व पर क्यों की जाती है सूर्य की आराधना:-

सूर्य को ग्रंथों में प्रत्यक्ष देवता यानी ऐसा भगवान माना है जिसे हम खुद देख सकते हैं | सूर्य ऊर्जा का स्रोत है और इसकी किरणों से विटामिन डी जैसे तत्व शरीर को मिलते हैं | दूसरा, सूर्य मौसम चक्र को चलाने वाला ग्रह है | ज्योतिष के नजरिए से देखा जाए तो सूर्य आत्मा का ग्रह माना गया है | सूर्य पूजा आत्मविश्वास जगाने के लिए की जाती है |

पुराणों के नजरिए से देखें तो सूर्य को पंचदेवों में से एक माना गया है, ये पंच देव हैं ब्रह्मा, विष्णु, शिव, दुर्गा और सूर्य | किसी भी शुभ काम की शुरुआत में सूर्य की पूजा अनिवार्य रूप से की जाती है | शादी करते समय भी सूर्य की स्थिति खासतौर पर देखी जाती है | भविष्य पुराण से ब्राह्म पर्व में श्रीकृष्ण ने अपने पुत्र सांब को सूर्य पूजा का महत्व बताया है | बिहार में मान्यता प्रचलित है कि पुराने समय में सीता, कुंती और द्रोपदी ने भी ये व्रत किया था |

सूर्य की ही बहन हैं छठ माता:-

माना जाता है कि छठ माता सूर्यदेव की बहन हैं | जो लोग इस तिथि पर छठ माता के भाई सूर्य को जल चढ़ाते हैं, उनकी मनोकामनाएं छठ माता पूरी करती हैं | छठ माता बच्चों की रक्षा करने वाली देवी हैं | इस व्रत को करने से संतान को लंबी आयु का वरदान मिलता है | मार्कण्डेय पुराण में इस बात का उल्लेख मिलता है कि प्रकृति ने अपने आप को छह भागों में विभाजित किया है | इनके छठे अंश को सर्वश्रेष्ठ मातृ देवी के रूप में जाना जाता है, जो ब्रह्मा की मानस पुत्री हैं | माना ये भी जाता है कि देवी दुर्गा का छठवां रूप कात्यायनी ही छठ मैया हैं |

छठ व्रत की कथा:-

कथा सतयुग की है | उस समय शर्याति नाम के राजा थे | राजा की कई पत्नियां थीं, लेकिन बेटी एक ही थी | उसका नाम था सुकन्या | एक दिन राजा शिकार खेलने गए | साथ में सुकन्या भी थीं | जंगल में च्यवन नाम के ऋषि तपस्या कर रहे थे | ऋषि काफी समय से तपस्या कर रहे थे, इस वजह से उनके शरीर के आसपास दीमकों ने घर बना लिए थे | सुकन्या ने खेलते हुई दीमक की बांबी में सूखी घास के कुछ तिनके डाल दिए | उस जगह पर ऋषि की आंखें थीं | तिनकों से ऋषि की आंखें फूट गईं | इससे ऋषि गुस्सा हो गए, उनकी तपस्या टूट गई |

जब ये बात राजा को मालूम हुई तो वे माफी मांगने के लिए ऋषि के पास पहुंचे | राजा ने ऋषि को अपनी बेटी सुकन्या सेवा के लिए सौंप दी | इसके बाद सुकन्या ऋषि च्यवन की सेवा करने लगी | कार्तिक मास में एक दिन सुकन्या पानी भरने जा रही थी, तभी उसे एक नागकन्या मिली | नागकन्या ने कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को सूर्य पूजा और व्रत करने के लिए कहा | सुकन्या ने पूरे विधि-विधान और सच्चे मन से छठ का व्रत किया | व्रत के प्रभाव से च्यवन मुनि की आंखें ठीक हो गईं | तभी से हर साल छठ पूजा का पर्व मनाया जाने लगा |

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Happy Dhanteras 2022

धनत्रयोदशी जिसे धनतेरस के रूप में भी जाना जाता है, पांच दिवसीय दिवाली उत्सव का पहला दिन है | धनतेरस हिंदू त्योहार दिवाली की शुरुआत का प्रतीक है | धनतेरस पूरे भारत और पड़ोसी देश नेपाल में भी मनाया जाता है | धनतेरस शब्द संस्कृत के दो शब्दों ‘धन’ और ‘तेरस’ से मिलकर बना है (Happy Dhanteras 2022 Wish)|

‘धन’ का अर्थ है वैभव (Wealth) और ‘तेरस’ का तात्पर्य चंद्रमा के चक्र में तेरहवें दिन से है | हिंदू मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस के दिन सोना, चांदी और कीमती सामान खरीदना बेहद शुभ माना जाता है | धनतेरस के दिन, भक्त देवी लक्ष्मी से प्रार्थना करते हैं जो धन, भाग्य और समृद्धि की देवी हैं |

happy laxmi mata image

एक पौराणिक कथा के अनुसार धनत्रयोदशी के दिन, दूधिया सागर के मंथन के दौरान देवी लक्ष्मी समुद्र से बाहर आईं | इसलिए, भगवान कुबेर के साथ धन की देवी, देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है, जो त्रयोदशी के शुभ दिन होती है | हालांकि, धनत्रयोदशी के दो दिनों के बाद अमावस्या पर लक्ष्मी पूजा को अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है |

Happy Dhanteras 2022 Quotes :-

इस धनतेरस अपने करीबियों को अपने परिवार वालों को अपने चाहने वालों को इन संदेशों से धनतेरस की शुभकामनाएं दें:-

आज से ही आपके यहाँ धन की बरसात हो, माँ लक्ष्मी का वास हो, संकटों का नाश हो; उन्नति का सर पर ताज हो और घर में शांति का वास हो। Happy Dhanteras !

घनर घनर बरसे जैसे घटा, वैसे ही हो धन की वर्षा; मंगलमय हो यह त्यौहार, भेंट में आये उपहार ही उपहार। Happy Dhanteras !

Happy Dhanteras 2022

ये धनतेरस कुछ खास हो, दिलों में खुशियां, घर में सुख का वास हो; हीरे मोती पर आपका राज हो, मिटे दूरियां, सब आपके पास हो। Happy Dhanteras !

सोने का रथ, चांदनी की पालकी, बैठकर जिसमें माँ लक्ष्मी आई; देने आपको और आपके पुरे परिवार को, धनतेरस की बधाई।

लक्ष्मी माता का नूर आप पर बरसे, हर कोई आपसे लोन लेने को तरसे; भगवान आपको दे इतना धन, की आप चिल्लर को तरसे। धनतेरस की हार्दिक बधाई।

Happy Dhanteras 2022

दीप जले तो रोशन आपका जहान हो, पूरा आपका हर एक अरमान हो। माँ लक्ष्मी जी की कृपा बनी रहे आप पर, इस धनतेरस पर आप बहुत धनवान हो। Happy Dhanteras !

धन की ज्योत का प्रकाश, पुलकित धरती, जगमग आकाश; आज ये प्रार्थना है, आप के लिए ख़ास, धनतेरस के शुभ दिन, पूरी हो हर आस। धनतेरस की शुभकामना।

दिनों दिन बढ़ता जाए आपका कारोबार, परिवार में बना रहे स्नेह और प्यार; होती रहे सदा आप पर धन की बौछार, ऐसा हो आपका धनतेरस का त्यौहार। Happy Dhanteras !

आपके घर में धन की बरसात हो, लक्ष्मी का वास हो; संकटों का नाश हो, शान्ति का वास हो। हैप्पी धनतेरस।

धन धान्य भरी है धनतेरस, धनतेरस का दिन है बड़ा ही मुबारक; माता लक्ष्मी है इस दिन की संचालक, आओ मिल करें पूजन उनका जो है जीवन की उद्धारक। Happy Dhanteras !

Happy Dhanteras 2022

धनतेरस का ये प्यारा त्यौहार, जीवन में लाये खुशियां अपार; माता लक्ष्मी विराजे आपके द्वार, सभी कामना करे आपकी स्वीकार। Happy Dhanteras !

धन की बरसात हो,
खुशियों का आगाज हो,
आपको जीवन का हर सुख प्राप्त हो
माता लक्ष्मी का आपके घर वास हो.

धन धन्य भरी है धनतेरस.. धनतेरस का दिन है बड़ा ही मुबारक, माता लक्ष्मी है ये दिन की संचालक.. चलो मिलकर करे पूजा उनकी.. क्यों के लक्ष्मी जी ही तो है जीवन की उद्धारक. Happy Dhanteras 2020

सोने का रथ, चांदी की पालकी,बैठकर जिसमें है लक्ष्मी मां है आयी
देने आपके परिवार को धनतेरस की बधाई धनतेरस की हार्दिक बधाई।

खूब मीठे मीठे पकवान खाए,
सेहत में चार चाँद लगाये,
लोग तो सिर्फ चाँद तक गए हैं,
आप उस से भी ऊपर जाये.
शुभ धनतेरस की आप सब को बधाईयाँ

आज से आप के यहाँ धन की बरसात हो,
माँ लक्ष्मी का निवास हो,
संकट का नाश हो
सर पर उन्नति का ताज हो.
*** इस धनतेरस की खूब शुभकामनाएं **

दीप जले तो रोशन आपका जहान हो,
पूरा आपका हर एक अरमान हो।
माँ लक्ष्मी जी की कृपा बनी रहे आप पर,
इस धनतेरस पर आप बहुत धनवान हों

आज से ही आपके यहाँ धन की बरसात हो
माँ लक्ष्मी का वास हो, संकटों का नाश हो।
हर दिल पर आपका राज हो;उन्नति का सर पर ताज हो
और घर में शांति का वास हो! शुभ धनतेरस

लक्ष्मी देवी का नूर आप पर बरसे, हर कोई आपसे मिलने को तरसे,
भगवान आपको दे इतने पैसे, कि आप चिल्लर पाने को तरसें.!

Dhanteras 2022: धन तेरस कब है, पूजा विधि, पौराणिक कथाएं जाने यहाँ

Dhanteras 2022:-

धनतेरस का त्योहार दीपावली की शुरूआत माना जाता है | धनतेरस के दिन मां लक्ष्मी, कुबेर और धनवंतरी का पूजन किया जाता है | हिंदू धर्म में धनतेरस का दिन खरीदारी करने के लिए साल भर में सबसे शुभ दिन माना जाता है | इस दिन झाडू, बर्तन, गहना, सोना-चांदी आदि खरीदने का रिवाज है | नाम के अनुरूप धनतेरस का पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है | इस दिन से दीपावली के पांच दिन के उत्सव की शुरूआत मानी जाती है | इस साल 2022 धनतेरस का त्योहार 23 अक्टूबर, दिन रविवार को मनया जाएगा |

भारतीय संस्कृति में स्वास्थ्य को धन से ऊपर माना गया है | एक प्राचीन कहावत है जो आज भी प्रचलित है कि ‘पहला सुख निरोगी काया, दूजा सुख घर में माया‘ | धनतेरस का दिन धन्वन्तरि त्रयोदशी या धन्वन्तरि जयन्ती, जो कि आयुर्वेद के देवता का जन्म दिवस है, के रूप में भी मनाया जाता है, धनतेरस से जुडी पौराणिक कथाएं |

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान धन्वंतरि विष्णु के अंशावतार माने जाते हैं | संसार में चिकित्सा विज्ञान के विस्तार और प्रसार के लिए ही भगवान विष्णु ने ये अवतार लिया था। भगवान धन्वंतरि के प्रकट होने के उपलक्ष्य में ही धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है |

2022 में धनतेरस कब मनाया जाएगा ?

2022 में धनतेरस 23 अक्टूबर रविवार को है। हिंदी कैलेंडर के अनुसार हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन धनतेरस का पर्व मनाया जाता है. इस दिन को दीपावली से दो दिन पहले कहा जाता है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन समुद्र मंथन के समय भगवान धन्वंतरि हाथ में कलश लेकर प्रकट हुए थे और मान्यता है कि इसी दिन समुद्र से माता लक्ष्मी भी प्रकट हुई थीं।

धनतेरस पूजा विधि

धनतेरस के दिन शाम के समय पूजा करने का अधिक महत्व है। धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि और भगवान कुबेर की मूर्ति को उत्तर दिशा की ओर पूजा स्थल में स्थापित करना चाहिए, साथ ही भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करने का भी प्रावधान है। वहीं ऐसी मान्यता है कि इस दिन दक्षिण दिशा में दीपक जलाने से अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है. ऐसा माना जाता है कि भगवान धन्वंतरि को पीली चीजें और कुबेर को सफेद पसंद है, इसलिए भगवान धन्वंतरि को पीली मिठाई और भगवान कुबेर को सफेद मिठाई का भोग लगाना चाहिए। कहा जाता है कि पूजा में चावल, दाल, रोली, चंदन, धूप और फल और फूलों का प्रयोग करना लाभकारी होता है. धनतेरस के दिन यमराज को भी श्रद्धा से प्रणाम करना चाहिए और उनके नाम का दीपक भी जलाना चाहिए।

धनतेरस से जुडी पौराणिक कथाएं:-

समुद्र मंथन के दौरान, अमृत का कलश लेकर भगवान् धनवंतरी प्रकट हुए थे | इस कारण इस दिन को धनतेरस के रूप में मनाया जाने लगा | धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, धनवंतरी के प्रकट होने के ठीक दो दिन बाद मां लक्ष्मी प्रकट हुईं थीं | यही कारण है कि हर बार दिवाली से दो दिन पहले ही धनतेरस मनाया जाता है |

इस दिन स्वास्थ्य रक्षा के लिए धनवंतरी देव की उपासना की जाती है | इस दिन को कुबेर का दिन भी माना जाता है और धन संपन्नता के लिए कुबेर की पूजा की जाती है |

लक्ष्मी चंचला हैं:-

एक कथा के अनुसार एक बार भगवान विष्णु मृत्युलोक में विचरण करने आ रहे थे | तब लक्ष्मीजी ने भी उनके साथ चलने का आग्रह किया | विष्णु जी ने कहा ठीक है पर मैं आपसे जो कहूं वह आप मानेंगी तो आप मेरे साथ चल सकती हैं | लक्ष्मीजी उनकी बात मान गईं और भगवान विष्णु के साथ धरती पर आ गईं |

कुछ देर बाद एक स्थान पर पहुंच कर भगवान विष्णु ने लक्ष्मीजी से कहा कि जब तक मैं न आऊं तुम यहां ठहरो | मैं दक्षिण दिशा की ओर जा रहा हूं, तुम उधर मत आना | विष्णुजी के जाने पर लक्ष्मी के मन में कौतुहल जागा कि आखिर दक्षिण दिशा में ऐसा क्या रहस्य है, जो मुझे मना किया गया है और भगवान स्वयं चले गए |

लक्ष्मीजी से रहा नहीं गया और जैसे ही भगवान आगे बढ़े लक्ष्मी भी पीछे-पीछे चल पड़ीं | कुछ ही आगे जाने पर उन्हें सरसों का एक खेत दिखाई दिया जिसमें खूब फूल लगे थे | सरसों की शोभा देखकर वह मंत्रमुग्ध हो गईं और फूल तोड़कर अपना श्रृंगार करने के बाद आगे बढ़ीं | आगे जाने पर एक गन्ने के खेत से लक्ष्मीजी गन्ने तोड़कर रस चूसने लगीं |

उसी क्षण विष्णु जी आ गए और यह देख लक्ष्मीजी पर नाराज होकर उन्हें शाप दे दिया कि जब मैंने तुम्हें इधर आने को मना किया था, पर तुम न मानी और किसान के खेत में चोरी का अपराध कर बैठी | अब तुम इस अपराध के जुर्म में इस किसान की 12 वर्ष तक सेवा करो | ऐसा कहकर भगवान उन्हें छोड़कर क्षीरसागर चले गए | लक्ष्मीजी उस गरीब किसान के घर रहने लगीं |

एक दिन लक्ष्मीजी ने उस किसान की पत्नी से कहा कि तुम स्नान कर पहले मेरी बनाई गई इस देवी लक्ष्मी का पूजन करो, फिर रसोई बनाना, तब तुम जो मांगोगी मिलेगा | किसान की पत्नी ने ऐसा ही किया | पूजा के प्रभाव और लक्ष्मी की कृपा से किसान का घर दूसरे ही दिन से अन्न, धन, रत्न, स्वर्ण आदि से भर गया | लक्ष्मी ने किसान को धन-धान्य से पूर्ण कर दिया |

किसान के 12 वर्ष बड़े आनंद से कट गए | फिर 12 वर्ष के बाद लक्ष्मीजी जाने के लिए तैयार हुईं | विष्णुजी लक्ष्मीजी को लेने आए तो किसान ने उन्हें भेजने से इंकार कर दिया | तब भगवान ने किसान से कहा कि इन्हें कौन जाने देता है, यह तो चंचला हैं, कहीं नहीं ठहरतीं | इनको बड़े-बड़े नहीं रोक सके | इनको मेरा शाप था इसलिए 12 वर्ष से तुम्हारी सेवा कर रही थीं | तुम्हारी 12 वर्ष सेवा का समय पूरा हो चुका है |

धनतेरस से जुडी पौराणिक कथाएं

राजा बलि से जुडी एक कथा:-

राजा बलि के भय से देवताओं को मुक्ति दिलाने के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया था | राजा बलि एक दानवीर राजा थे | स्वर्ग पर विजय पाने के लिए वह यज्ञ कर रहे थे | उस यज्ञ स्थल पर भगवान विष्णु वामन अवतार में जा पहुंचे |

लेकिन असुरों के गुरु शुक्राचार्य पहचान गए कि वामन के रूप में भगवान विष्णु ही हैं | इसलिए उन्होंने राजा बलि से कहा कि वामन जो भी मांगे वो उन्हें ना दिया जाए | साथ ही उन्होंने कहा कि वामन के रूप में भगवान विष्णु हैं, जो देवताओं की सहायता करने के लिए यहां आए हैं |

लेकिन राजा बलि ने शुक्राचार्य की बात नहीं सुनी और वामन भगवान द्वारा मांगी गई तीन पग भूमि दान करने के लिए तैयार हो गए | लेकिन शुक्राचार्य ऐसा नहीं चाहते थे, इसलिए राजा बलि को दान करने से रोकने के लिए शुक्राचार्य ने उनके कमंडल में लघु रूप धारण करके प्रवेश कर लिया था |

लेकिन भगवान वामन भी शुक्राचार्य के छल को समझ गए थे, जिसके बाद उन्होंने अपने हाथों में मौजूद कुशा को कमंडल में इस तरह रखा कि शुक्राचार्य की एक आंख फूट गई |

कहा जाता है कि इसके बाद भगवान द्वारा मांगी गई तीन पग भूमि को बलि ने दान करने का निर्णय ले लिया | उस समय भगवान वामन ने अपने एक पैर से पूरी धरती को नापा और दूसरे पैर से अंतरिक्ष को नाप लिया | लेकिन तीसरा पैर रखने के लिए कुछ स्थान नहीं बचा था, जिसके बाद बलि ने वामन भगवान के चरणों में अपना सिर रख दिया था |

देवताओं को बलि के भय से इस तरह मुक्ति मिल गई थी | इसी जीत की खुशी में धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है |

राजा हिमा के पुत्र से जुडी कथा:-

राजा हिमा के बड़े बेटे के बारे में भविष्य वाणी हुई थी की वह अपने शादी के चौथे दिन एक सांप के काटने से मर जाएगा। उसकी शादी के चौथे दिन उसकी पत्नी ने कमरे और दरवाजे पर सोने चांदी के सिक्के रख दिये |

पूरे घर को दिये से सजा दिया। अपने पति को सुलाने के लिए कहानियां और गाने गाने लगी | जब यम देवता सांप के रूप में आए तो सिक्के और दिये की तेज रोशनी से अंदर नहीं जा सके बाहर बैठ कर गाने सुनते रहे और सुबह होते ही चले गए | इसलिए ये धनतेरस मनाई जाती है |

Dussehra 2022 Totke: दशहरे के दिन किए जाने वाले चमत्कारी टोटके और उनकी रोचक कहानियां

Dussehra 2022 Totke:-

धर्म की अधर्म पर विजय का त्यौहार जिसे हम जानते है विजया दशमी (Vijayadashami) के नाम से, जिसे हम दशहरा (Dussehra) भी करते है | इस दिन का भारत में बहुत ज्यादा महत्त्व है, इस दिन भगवान राम ने लंका पति रावण पर अपनी विजय हासिल की थी |

बुराई पर अच्‍छाई की जीत के पर्व दशहरा को बहुत शुभ और सर्वसिद्ध मुहूर्त माना जाता है | उसका कारण है इस दिन माँ पृथ्वी लोक छोड़ स्वर्ग की तरफ चली जाती है, इसी दिन रावण का भी वध हुआ था, और इतना ही नहीं ये वही दिन है जिस दिन कुबेर देवता ने धरती वासियों के लिए धन की वर्षा कर, पृथ्वी वासियों को धन -धान्य से परिपूर्ण किया था |

इस दिन को लेकर देश के विभिन्‍न राज्‍यों में अलग-अलग परंपराएं हैं | जैसे- महाराष्‍ट्र में दशहरा के दिन सोना या चांदी की पत्ती खरीदी जाती है ताकि पूरे साल संपन्‍नता बनी रही | वहीं इस दिन को यात्रा के लिए भी बेहद शुभ माना जाता है क्‍योंकि इस दिन मां दुर्गा (Maa Durga) धरती से वापस अपने लोक में प्रस्‍थान करती हैं |ज्‍योतिष और तंत्र-मंत्र के लिहाज से भी दशहरा को उपाय (Dussehra Remedies) और टोटके (Dussehra Totke) करने के लिए उत्तम दिन माना गया है | इस दिन किए गए उपाय और टोटकों का कई गुना ज्‍यादा फल मिलता है |

लोग सदियों से दशहरे पर अपने परिवार और अपने आप को धन-धान्य से पारी पूर्ण करने और अपने जीवन को खुशहाली से भरने के लिए लोग अलग -अलग उपाय करते है, जिन्हें भारतीय संस्कृति में सदियों से मान्यता मिली हुई है | इन्हें उपायों को हम टोटको (Dussehra Totke) के नाम से भी जानते है | भारत में दशहरा के दिन कुछ ख़ास प्रकार के टोटके किये जाते है, जिनके बारे में ऐसा कहा जाता है कि इन्हें करने से आपके जीवन में खुशियाँ लोट आती है | कुछ समय में ही आपका भाग्य अचानक से बदल जाता है | इसीलिए कुछ इसी प्रकार के टोटके (Dussehra Totke) जिनको करने के बाद आप अपने सोए भाग्य का उदय कर सकते है |

दशहरे पर किए जाने वाले चमत्कारी टोटके:-

धन की कमी दूर करने के लिए:-

दशहरे के दिन शमी के पेड़ की पूजा का बहुत महत्त्व माना जाता है, शमी को पेड़ को लेकर ऐसा कहा जाता है, दशहरा के दिन कुबेर ने राजा रघु को स्वर्ण मुद्राएं देने के लिए शमी के पत्तों को सोने का बना दिया था | इसीलिए दशहरे के दिन सोने की पत्ती खरीदी जाती है | उसी दिन से शमी के पेड़ को सोना देने वाला पेड़ माना जाता है | इसलिए इस दिन घर में शमी का पेड़ जरुर लगाए और रोज वहां दीपक भी लगाएं |

इसके अलावा नीले कंठ वाले पक्षी को देखना भी उतना ही शुभ माना जाता है | यदि आपको दशहरे वाले दिन नीलकंठ पक्षी के दर्शन हो जाते है तो आपको धन-धान्य की प्राप्ति होती है |

दशहरे के दिन से लगातार 51 दिनों तक हर रोज गाय व कुत्ते को बेसन का लड्डू खिलाए तो यह भी काफी शुभ माना जाता है | मान्यता है कि ऐसा करने से धन संबंधित समस्या दूर हो जाती है लेकिन ध्यान रहे कि कुत्ते को हर रोज लड्डू खिलाए, भूले नही |

मनोकामना की पूर्ति लिए:-

दशहरे के दिन सुबह-सवेरे स्‍नान-ध्‍यान के बाद हनुमान जी एक मुट्ठी साबुत उड़द हनुमान जी की प्रतिमा के चरणों में रखकर ग्यारह बार परिक्रमा करें | ऐसा करने से हर तरह के दुखों से मुक्ति मिल जाती है | स्कंद पुराण में बताया गया है इस दिन पुण्यसलिला नदियों में स्नान करने से व्यक्ति दस पापों से मुक्त हो जाता है |

बुरी नजर से बचने के लिए:-

ऐसा कहा जाता है कि जब श्री राम ने लंकापति रावण का विनाश किया था, तब रावण के अंतिम संस्कार के बाद वानर सेना रावण की राख साथ ले आई थी, उसी दिन से रावण को जलाने के बाद उसकी राख घर लाने का चलन शुरू हुआ | ऐसी मान्यता है, रावण को जलाने के बाद उसकी राख घर में लाने के बाद घर और घर के लोग बुरी नज़र और बुरी बला से दूर रहते है और घर में समृद्धि आती है | मान्यता है कि ऐसा करने से घर के सदस्यों के बीच आपसी प्रेम बना रहता है और नकारात्मक ऊर्जा खत्म होकर सकारात्मक ऊर्जा में बदल जाती है | इससे नकारात्मक शक्तियां घर में प्रवेश नहीं करती है |

यात्रा के लिए:-

दशहरे के दिन थोड़ी दूरी की ही सही लेकिन यात्रा जरूर करें | इससे पूरे साल यात्रा करने में बाधा नहीं आती है |

व्यापार लाभ के लिए:- 

यदि आपको आपके व्यापार में लगातार घाटे का सामना करना पड़ रहा है तो, दशहरे के दिन सवा मीटर लाल कपड़े में नारियल, जनेऊ और सवा किलो मिष्ठान रखकर उस लाल कपड़े को बांधकर किसी भी आस-पास के राम मंदिर में भगवान के चरणों में चढ़ा दें, आपको कुछ ही दिनों में व्यापार में असर दिखने लगेगा, आपका व्यापार अचानक से चल निकलेगा |

इस उपाय से भाग्य का मिलता है पूरा साथ:-

दशहरे के दिन अपने हाथ में एक फिटकरी का टुकड़ा लें और उसे लेकर किसी सुनसान जगह पर लेकर चले जाएं | इसके बाद अपने इष्ट देवों का ध्यान करते हुए अपने ऊपर से सात बार उबारकर पीठ के पीछे फेंक दें | फेंकने के बाद बिना मुड़े घर आ जाएं और भगवान के सामने घी का दीपक जलाएं | ध्यान रहे यह उपाय करते समय कोई आपको देखे न | ऐसा करने से भाग्य का पूरा साथ मिलता है और जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिलती है |

इस उपाय से नौकरी में होती है उन्नति:-

दशहरा के दिन मां दुर्गा की पूजा करते हुए ‘ओम विजयायै नम:’ मंत्र का जप करते हुए 10 फल चढ़ाएं और फिर उनको प्रसाद में बांट दें | इस पूजा को आप दोपहर के समय करें | माना जाता है कि रावण को परास्त करने के लिए भगवान राम ने भी दोपहर के समय ही पूजा की थी | इसके बाद एक झाड़ू लें और शाम के समय में उसको मंदिर में दान कर दें | इस उपाय के करने से धन संबंधित समस्या खत्म होती है और नौकरी व व्यापार में उन्नति होती है |

India vs South Africa Dream 11 Prediction Team, IND vs SA Team Prediction, Fantasy Cricket Tips

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MatchIndia vs South Africa (IND vs SA)
LeagueIndia vs South Africa T20I
DateWednesday, 28th sep 2022
Match Venue: Greenfield International Stadium, Thiruvananthapuram, India
Time07:00 PM (IST) – 01:30 PM (GMT)

India vs South Africa T20 का मुकाबला Greenfield International Stadium, Thiruvananthapuram, India में  07:00 PM (IST) – 01:30 PM (GMT) में खेला जाएगा।

आप टीवी पर India vs South Africa T20 का मुकाबला कहां देख सकते हैं?

स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क – स्टार स्पोर्ट्स 1 और स्टार स्पोर्ट्स 1HD, स्टार स्पोर्ट्स सेलेक्ट 1 और स्टार स्पोर्ट्स सेलेक्ट 1HD।

आप India vs South Africa T20 का मुकाबला ऑनलाइन कहां देख सकते हैं?

Hotstar

India vs South Africa Dream 11 Prediction Update-

India :

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आखिरी मैच में भारत की रोमांचक जीत हुई है। सूर्यकुमार यादव और विराट कोहली ने अर्धशतक बनाया, इससे पहले हार्दिक पांड्या ने 16 रन की नाबाद 25 रन की पारी खेली, क्योंकि भारत ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीसरे टी 20 आई में तनावपूर्ण अंत में जीतकर श्रृंखला 2-1 से जीती थी अफ्रीका के साथ यह एक अलग चुनौती होगी क्योंकि भारत नहीं करता है घरेलू परिस्थितियों में उनके खिलाफ अच्छा रिकॉर्ड है। रोहित शर्मा और लोकेश राहुल पारी की शुरुआत करेंगे। विराट कोहली वन-डाउन पोजीशन पर बल्लेबाजी करेंगे। वह बल्लेबाजी करने वाली टीम की रीढ़ हैं। सूर्यकुमार यादव और ऋषभ पंत मध्यक्रम की बल्लेबाजी संभालेंगे। बतौर कप्तान भारत की कप्तानी रोहित शर्मा करेंगे। वह एक अच्छे बल्लेबाज भी हैं ऋषभ पंत भारत के लिए विकेट कीपिंग करेंगे। अक्षर पटेल और युजवेंद्र चहल अपनी टीम की स्पिन गेंदबाजी की कमान संभालेंगे। जसप्रीत बुमराह और हर्षल पटेल उनकी टीम के पेस अटैक की अगुवाई करेंगे।

South Africa :

दक्षिण अफ्रीका सकारात्मक शुरुआत की उम्मीद कर रहा होगा क्योंकि उसका सामना पहले टी 20 में भारत से होगा। रस्सी वान डेर डूसन चोट के कारण बाहर हो जाएंगे और यह निश्चित रूप से उनके मध्य क्रम को थोड़ा कमजोर बनाता है। रीजा हेंड्रिक्स और क्विंटन डी कॉक शायद पारी की शुरुआत करेंगे। टेम्बा बावुमा वन-डाउन स्थान पर बल्लेबाजी करेंगे। मध्यक्रम की बल्लेबाजी एडेन मार्कराम और ट्रिस्टन स्टब्स संभालेंगे। दक्षिण अफ्रीका की कप्तानी टेम्बा बावुमा करेंगे। वह एक अच्छे बल्लेबाज भी हैं क्विंटन डी कॉक दक्षिण अफ्रीका के लिए विकेट कीपिंग करेंगे। एडेन मार्कराम और तबरेज शम्सी अपनी टीम की स्पिन गेंदबाजी की कमान संभालेंगे। उनकी टीम के पेस अटैक की अगुवाई कगिसो रबाडा और एनरिक नॉर्टजे करेंगे।

क्विंटन डी कॉक और टेम्बा बावुमा शायद पारी की शुरुआत करेंगे। ड्वेन प्रिटोरियस वन-डाउन पोजीशन पर बल्लेबाजी करेंगे। डेविड मिलर और रस्सी वैन डेर-डूसन मध्यक्रम की बल्लेबाजी को संभालेंगे। इस शृंखला में रस्सी वान डेर-डूसन के शीर्ष फंतासी अंक हैं। टेम्बा बावुमा बतौर कप्तान दक्षिण अफ्रीका की कप्तानी करेंगे। वह एक अच्छे बल्लेबाज भी हैं दक्षिण अफ्रीका के लिए क्विंटन डी कॉक विकेट कीपिंग करेंगे। केशव महाराज और तबरेज शम्सी अपनी टीम की स्पिन गेंदबाजी की कमान संभालेंगे। उनकी टीम के तेज आक्रमण की अगुवाई एनरिक नॉर्टजे और कगिसो रबाडा करेंगे।

पिच रिपोर्ट :

तिरुवनंतपुरम के ग्रीनफील्ड स्टेडियम में अब तक इतने मैच नहीं खेले गए हैं। आपको बता दें कि इस मैदान पर अब तक सिर्फ दो टी20 और एक वनडे ही खेला गया है. वहीं, टी20 मैच की बात करें तो भारत ने खेले गए 2 मैचों में से एक में जीत हासिल की है। जबकि एक को हार का भी सामना करना पड़ा है। इस मैदान पर वेस्टइंडीज ने सबसे ज्यादा 173 रन बनाए हैं।

मौसम की रिपोर्ट :

भारत और दक्षिण अफ्रीका (IND vs SA) के बीच तिरुवनंतपुरम में खेले जाने वाले T20I सीरीज के पहले मैच में मौसम की बात करें तो मैच के दौरान मौसम थोड़ा ठंडा रहने वाला है। आसमान में बादल छाए भी देखे जा सकते हैं। वहीं मैदान में सुहावना मौसम और ठंडी हवा चलने की पूरी उम्मीद है। मैच भारतीय समयानुसार शाम 7:00 बजे शुरू होगा

IND vs SA Fantasy Tips :

पिच के व्यवहार को देखते हुए, शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों को चुनना यहां महत्वपूर्ण होगा। गेंदबाजों का डेथ ओवर आपकी फैंटेसी टीम में इस तरह की सतह पर होना चाहिए, कगिसो रबाडा, हर्षल पटेल का होना जरूरी है। विकेट कीपिंग में क्विंटन डी कॉक बेहतरीन विकल्प हैं। मैच में एक बार फिर बल्लेबाजों के दबदबे की संभावना है।

IND vs SA Squads

South Africa Squad:

Quinton de Kock(w), Temba Bavuma(c), Rilee Rossouw, Aiden Markram, David Miller, Tristan Stubbs, Dwaine Pretorius, Wayne Parnell, Kagiso Rabada, Anrich Nortje, Tabraiz Shamsi, Reeza Hendricks, Lungi Ngidi, Keshav Maharaj, Heinrich Klaasen

India Squad:

Rohit Sharma(c), KL Rahul, Virat Kohli, Suryakumar Yadav, Rishabh Pant(w), Axar Patel, Dinesh Karthik, Deepak Chahar, Arshdeep Singh, Jasprit Bumrah, Yuzvendra Chahal, Harshal Patel, Ravichandran Ashwin, Mohammed Shami, Deepak Hooda

India vs South Africa Playing 11

India Possible Playing 11

1.Rohit Sharma(C), 2.Lokesh Rahul/Shreyas Iyer, 3.Virat Kohli, 4.Suryakumar Yadav, 5.Rishabh Pant(WK), 6.Dinesh Karthik(WK), 7.Axar Patel, 8.Harshal Patel, 9.Jasprit Bumrah, 10.Arshdeep Singh, 11.Yuzvendra Chahal

South Africa Possible Playing 11

1.Reeza Hendricks, 2.Quinton de Kock(WK), 3.Temba Bavuma(C), 4.Aiden Markram, 5.Tristan Stubbs, 6.David Miller, 7.Dwaine Pretorius, 8.Keshav Maharaj, 9.Kagiso Rabada, 10.Anrich Nortje, 11.Tabraiz Shamsi

ऑपरेशन ऑक्टोपस क्या है? यहाँ जानिये | Operation Octopus in Hindi

नमस्कार दोस्तों, आप सभी ने ऑपरेशन ऑक्टोपस का नाम तो सुना ही होगा और साथ ही आपके मन में यह सवाल जरूर आया होगा कि ऑपरेशन ऑक्टोपस क्या है? दोस्तों तो आप आज बिल्कुल सही जगह पर आए हैं, आज इस लेख के माध्यम से हम आपको बताएंगे कि ऑपरेशन ऑक्टोपस क्या है? इसके अलावा और भी महत्वपूर्ण जानकारी के साथ शुरू करते हैं इस आर्टिकल को।

Operation Octopus

ऑपरेशन ऑक्टोपस (Operation Octopus ) क्या है ?

दोस्तों राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के सूत्रों ने बताया है कि इस हफ्ते की शुरुआत में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के परिसरों पर छापेमारी को ‘ऑपरेशन ऑक्टोपस’ नाम दिया गया है। आपको बता दें की ऑपरेशन में लगे सभी 300 अधिकारियों को छापेमारी के दौरान चुप रहने को कहा गया. एजेंसियां पीएफआई के पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करना चाहती हैं। दोस्तों ‘ऑपरेशन ऑक्टोपस’ के तहत 100 से अधिक PFI सदस्यों को गिरफ्तार किया गया और लगभग 200 को हिरासत में लिया गया। ईडी और एनआईए ने जांच के दौरान पाया है कि पीएफआई के सदस्य देश विरोधी गतिविधियों में शामिल थे।

ऑपरेशन ऑक्टोपस में खुलासे (Revelations in Operation Octopus )-

दोस्तों आपको बता दें की इस ऑपरेशन के दौरान यह भी खुलासा हुआ है कि पिछले कुछ सालों में पीएफआई और उससे जुड़े संगठनों के खातों में 120 करोड़ रुपये से ज्यादा जमा किए गए हैं.दोस्तों  इसमें से अधिकांश नकद में जमा किया गया था जो अज्ञात और संदिग्ध स्रोतों से था। विदेशों से भी पैसा जमा किया गया। इस फंड से अवैध गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है।

NIA ने कहा PFI ने फैलाई भारत के प्रति नफरत –

दोस्तों आपको बता दें की एनआईए ने दावा किया है कि पीएफआई और उसके नेताओं के कार्यालयों पर देशव्यापी छापेमारी के दौरान जब्त किए गए दस्तावेजों में अत्यधिक संवेदनशील सामग्री मिली है, जिसमें एक खास समुदाय के प्रमुख नेताओं को निशाना बनाया गया है.

दोस्तों आपको बता दें की कोच्चि की विशेष एनआईए अदालत को सौंपी गई रिमांड रिपोर्ट में, जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि चरमपंथी इस्लामी संगठन ने युवाओं को लश्कर-ए-तैयबा और इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (आईएसआईएस) जैसे आतंकवादी समूहों में शामिल होने के लिए धोखा दिया।

जांच में क्या निकला

ईडी की छापेमारी के बाद पीएफआई सदस्य मोहम्मद अहमद बेग को यूपी एटीएस ने लखनऊ से गिरफ्तार किया है. ईडी की जांच में पता चला है कि पीएफआई ने विदेशों में पैसा इकट्ठा किया और उन्हें अवैध रूप से भारत भेजा, ताकि वह विदेशी फंडिंग से जुड़े कानून से बच सके।

पीएफआई के सदस्य दूसरे राज्यों से आ रहे थे और मध्य प्रदेश में बड़ी संख्या में लोगों को जोड़ने का काम कर रहे थे। प्रदेश में सक्रिय पीएफआई के सदस्य लोगों को भ्रमित कर राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के लिए उकसा रहे थे। लखनऊ से गिरफ्तार वसीम अहमद के पास से एक लैपटॉप, तीन मोबाइल फोन, एक डायरी, बैंक पासबुक आदि बरामद किया गया है. लैपटॉप से कई जानकारियां ली गई हैं।

NIA Kya Hai? यहाँ जानिए NIA का Full Form क्या है?

मुंबई में 2008 के आतंकवादी हमले के बाद, जिसमें एक मजबूत जांच ढांचे की आवश्यकता पर जोर दिया गया था, भारत सरकार ने एक ऐसी एजेंसी के लिए एक समाधान का प्रस्ताव रखा जो विशिष्ट अनुमोदन की आवश्यकता के बिना राज्यों में आतंक से संबंधित अपराधों से निपटने में सक्षम हो। इसलिए, केंद्रीय गृह मंत्री और राष्ट्रपति के समर्थन से संसद में राष्ट्रीय जांच एजेंसी की स्थापना की गई।

NIA Kya Hai

NIA का फुल फॉर्म क्या है?

NIA का फुल फॉर्म National Investigation Agency है, जिसे हिंदी में राष्ट्रीय जांच एजेंसी कहा जाता है।

NIA (National Investigation Agency) क्याहै?

NIA आतंकवाद विरोधी कानून प्रवर्तन एजेंसी के रूप में, राष्ट्रीय जांच एजेंसी प्रभारी है। एजेंसी राज्यों की विशेष अनुमति के बिना देश भर में किसी भी आतंकी घटना की जांच कर सकती है। यह संयुक्त राष्ट्र, इसकी एजेंसियों और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों की अंतरराष्ट्रीय संधियों, सम्मेलनों, समझौतों और प्रस्तावों को पूरा करता है। इसका लक्ष्य भारत में आतंकवाद से लड़ना भी है।

NIA अधिकार क्षेत्र –

एजेंसी को एनआईए अधिनियम की अनुसूची पुस्तक में निर्दिष्ट विभिन्न अधिनियमों के तहत जांच करने के लिए सभी शक्तियों और विशेषाधिकारों के साथ अधिकार दिया गया है। राज्य सरकार के अधिकारी एनआईए अधिनियम के तहत निर्दिष्ट कानून की सीमा के भीतर केंद्र सरकार के अनुमोदन पर एनआईए द्वारा जांच का अनुरोध कर सकते हैं। केंद्र सरकार भारत में कहीं भी जांच के लिए मामलों को एनआईए को सौंप सकती है और इन मामलों को संभालने में शामिल अधिकारी आईपीएस और आईआरएस कैडर से हैं।

NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) क्षेत्रीय कार्यालय –

  • NIA हैदराबाद
  • NIA गुवाहाटी
  • NIA कोच्चि
  • NIA लखनऊ
  • NIA मुंबई
  • NIA कोलकाता
  • NIA रायपुर
  • NIA जम्मू

NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) के अधिकार –

  • अधिकारियों के पास किसी भी अपराध की जांच करने के लिए पुलिस अधिकारियों के समान सभी शक्तियां और दायित्व हैं
  • जब किसी पुलिस स्टेशन के किसी अधिकारी को किसी अपराध की रिपोर्ट मिलती है, तो उन्हें इसे संघीय सरकार को बताना होगा, फिर इसे केंद्र को भेजना होगा।
  • अपराधों की जांच केंद्र की पूर्व सहमति से राज्य सरकार को हस्तांतरित करने का भी प्रावधान है
  • सरकार को आतंकवाद से संबंधित अपराधों की जांच में एनआईए को सभी आवश्यक सहायता प्रदान करनी चाहिए
  • अधिनियम के जांच प्रावधानों का राज्य सरकार की किसी भी आतंकवादी अपराध या अन्य अपराध की जांच और मुकदमा चलाने की क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ता है।
  • अधिनियम के तहत किसी भी अपराध की सुनवाई के लिए, एक विशेष अदालत के लिए दंड प्रक्रिया संहिता के तहत सत्र न्यायालय की सभी शक्तियों का प्रावधान है।
  • विशेष अदालत में खड़े किसी भी विषय को न्यायिक शाखा द्वारा त्वरित और निष्पक्ष परीक्षण के लिए उसी या अलग राज्य के साथ उस अन्य विशेष अधिकार क्षेत्र में स्थानांतरित किया जा सकता है। उच्च न्यायालय द्वारा निष्पक्ष सुनवाई के लिए ऐसे मामलों को केवल राज्य के भीतर किसी अन्य विशेष अदालत में स्थानांतरित किया जा सकता है
  • एनआईए राज्यों से अनुमति लिए बिना देश भर में आतंकी मामलों की जांच कर सकती है।
  • एजेंसी आतंकवादी अपराधों, देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने, परमाणु सुविधाओं पर अपराध आदि की जांच करती है।

NIA अधिनियम 2008 –

यह अधिनियम राष्ट्रीय जांच एजेंसी को देश की एकमात्र पूरी तरह से संघीय एजेंसी के रूप में स्थापित करता है, जो संयुक्त राज्य में एफबीआई की तुलना में और सीबीआई से अधिक शक्तिशाली है। यह राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को भारत के किसी भी हिस्से में आतंकी अभियानों का संज्ञान लेने और राज्य सरकार की मंजूरी के बिना मामला दर्ज करने और किसी भी राज्य में प्रवेश करने, जांच करने और संदिग्धों को गिरफ्तार करने का अधिकार देता है।

NIA विशेष न्यायालय –

भारत की राष्ट्रीय सरकार ने कई विशेष न्यायालयों की घोषणा की है। संघीय सरकार इन अदालतों के अधिकार क्षेत्र के किसी भी मुद्दे पर निर्णय लेती है। उस क्षेत्र में उच्च न्यायालय प्राधिकरण के मुख्य न्यायाधीश के आश्वासन पर, सरकार इन पर सेवा करने के लिए एक न्यायाधीश नियुक्त करती है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय को भी राज्य के भीतर या बाहर, एक अदालत से दूसरी अदालत में मामलों को फिर से सौंपने का अधिकार दिया गया है

निष्कर्ष-

आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) बेहतरीन काम कर रही है। एनआईए एक लक्ष्य-उन्मुख और पेशेवर संगठन के रूप में विकसित हो रहा है जो मानव अधिकारों और गरिमा पर जोर देते हुए भारतीय संविधान और राष्ट्रीय कानून को कायम रखता है। शायद यही वजह है कि असैन्य इलाकों में ज्यादा आतंकी हमले नहीं होते। दोस्तों अगर आप हमसे इस आर्टिकल से जुड़े कुछ सवाल हमसे पूछना चाहते हैं तो नीचे कमेंट करके पूछ सकते हैं हमारी टीम आपका जवाब जरूर देगी , कृपया अपने दोस्तों के साथ जरूर इस आर्टिकल को साझा करे ताकि उनको भी यह जानकारी मिल सके धन्यवाद।

Congress President Election: कांग्रेस पार्टी नए अध्यक्ष का चुनाव कैसे करती है?

Congress president election: 23 से अधिक वर्षों में पहली बार, कांग्रेस पार्टी में एक अध्यक्ष हो सकता है जो गांधी परिवार से नहीं है। ग्रैंड ओल्ड पार्टी 17 अक्टूबर को एक नए अध्यक्ष का चुनाव करने के लिए मतदान करेगी, जिसके परिणाम 19 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे। हालाँकि, चुनाव अपने हिस्से के नाटक के बिना नहीं है। एक कोने में त्रिवेंद्रम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा है कि वह पार्टी अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ेंगे।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि वह भी इस पद के लिए दौड़ेंगे। ऐसा होने पर थरूर समेत पांच सांसदों ने मतदाता सूची/मतदाता सूची को सार्वजनिक करने की मांग की है. तो, 135 साल से अधिक समय से मौजूद पार्टी नए अध्यक्ष का चुनाव कैसे करती है?

Congress President Election

कांग्रेस नए अध्यक्ष का चुनाव कैसे करती है?

एक नए पार्टी अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया उसी पाठ के अनुच्छेद XVIII में शामिल है जो कांग्रेस के सभी कार्यों को नियंत्रित करती है – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का संविधान और नियम। चुनाव के लिए रिटर्निंग ऑफिसर यानी चुनाव की देखरेख करने वाला व्यक्ति केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण (सीईए) का अध्यक्ष होगा। इस मामले में वह कांग्रेस के सीईए अध्यक्ष मधुसूदन मिस्त्री हैं।

अनुच्छेद XVIII में कहा गया है कि राष्ट्रपति का चुनाव पार्टी के प्रदेश कांग्रेस समितियों (पीसीसी) के प्रतिनिधियों द्वारा किया जाएगा। पीसीसी में प्रतिनिधि व्यक्तिगत ब्लॉक समितियों के प्रतिनिधि होते हैं, जिन्हें प्रत्येक ब्लॉक एक गुप्त मतदान के माध्यम से एक पीसीसी के लिए चुनता है। अब, कांग्रेस के संविधान का अनुच्छेद III पार्टी को निम्नलिखित उप-समितियों में विभाजित करता है:

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी

कार्य समिति

प्रदेश कांग्रेस कमेटी

जिला/नगर कांग्रेस समितियां

उप-समितियां, जैसे कि ब्लॉक या निर्वाचन क्षेत्र कांग्रेस कमेटी

यदि राष्ट्रपति पद के लिए दो उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं, तो प्रतिनिधि गुप्त मतदान द्वारा एक के लिए अपने वोट का संकेत देंगे। यदि केवल एक ही उम्मीदवार होता है, तो उसे उसी लेख के तहत अगले कांग्रेस सत्र के अध्यक्ष के रूप में निर्वाचित घोषित कर दिया जाता है।

यदि दो से अधिक उम्मीदवार हैं, तो प्रतिनिधि अपने नाम के आगे 1 और 2 लिखकर दो उम्मीदवारों के लिए अपनी वरीयता का संकेत देंगे। दो से अधिक चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के मामले में, दो से कम वरीयता वाले किसी भी वोटिंग पेपर को अमान्य माना जाएगा। कोई भी 10 प्रतिनिधि राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में अपने एक साथी का नाम प्रस्तावित करने के लिए एक साथ आ सकते हैं। दरअसल, प्रतिनिधियों की मतदाता सूची को सार्वजनिक करने की मांग कांग्रेस के पांच सांसद मनीष तिवारी, शशि थरूर, कार्ति चिदंबरम, प्रद्युत बोरदोलोई और अब्दुल खालिक की सितंबर 2022 में की गई मांगों में से एक थी.

कांग्रेस पार्टी के नए अध्यक्ष का चुनाव कब होगा?

सीईए के मुताबिक, उम्मीदवारों के नाम जमा करने की आखिरी तारीख 24 सितंबर शनिवार है. एक बार यह हो जाने के बाद, रिटर्निंग ऑफिसर मधुसूदन मिस्त्री उम्मीदवारों के नाम प्रकाशित करेंगे और उन्हें अपनी उम्मीदवारी वापस लेने के लिए सात दिन तक का समय देंगे।

उम्मीदवार जो अपनी उम्मीदवारी वापस लेना चाहते हैं, उन्हें सात दिनों की अवधि के भीतर अपनी वापसी बताते हुए रिटर्निंग ऑफिसर को लिखना होगा। एक बार उम्मीदवारों की अंतिम सूची सार्वजनिक हो जाने के बाद, कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) चुनाव की तारीख तय करेगी, जो आमतौर पर उम्मीदवारों की सूची सार्वजनिक होने के सात दिनों से अधिक नहीं होती है।

कांग्रेस पार्टी में चुनावों का एक संक्षिप्त इतिहास

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भारत की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी है, जो 1885 से चली आ रही है। इस समय में, पार्टी ने 97 बार अध्यक्ष चुने या नियुक्त किए हैं। लेकिन हम पार्टी के चुनाव में इसके संस्थापक और पहले अध्यक्ष व्योमेश चंद्र बनर्जी के पास वापस नहीं जाएंगे। हम पार्टी के पिछले कुछ चुनावों पर एक संक्षिप्त नज़र डालेंगे और इसका प्रदर्शन कैसा रहा है।

कांग्रेस को हर पांच साल में संगठनात्मक चुनाव कराने की आवश्यकता होती है। पार्टी ने आखिरी बार 2017 में अध्यक्ष पद के लिए चुनाव किया था जब राहुल गांधी को पार्टी के अध्यक्ष के रूप में निर्विरोध नियुक्त किया गया था।

पार्टी अध्यक्ष के लिए इन चुनावों में क्या होने की संभावना है?

एआईसीसी के सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में, कांग्रेस के पास पूरे भारत में विभिन्न प्रदेश कांग्रेस समितियों के 9,000 से अधिक प्रतिनिधि हैं। वर्तमान चुनाव में दो उम्मीदवार हैं:

त्रिवेंद्रम के सांसद शशि थरूर, जिन्होंने कहा कि उन्हें अध्यक्ष पद के लिए सोनिया गांधी की मंजूरी मिल गई है, और राजस्थान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत।