आज प्रदेश का 21वां स्थापना दिवस है | आज ही के दिन 1 नवम्बर 2000 को मध्यप्रदेश से अलग हो कर यह अस्तित्व में आया | वर्ष 2000 से पूर्व छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश का हिस्सा हुआ करता था | लेकिन अब स्वयं एक राज्य के रूप में पहचाना जाने लगा है | जिसकी राजधानी रायपुर है | इस दौरान पूरे प्रदेश में हर जगह अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे |
जानकारी के अनुसार तीन दिन तक चलने वाले छत्तीसगढ़ राज्योत्सव समारोह में प्रदेश की लोक संस्कृति और लोक कलाओं का मंचन होगा | जीई रोड स्थित साइंस कॉलेज मैदान में शाम सात बजे से राज्योत्सव का रंगारंग आगाज होगा। मौजूदा सरकार ने राज्योत्सव का थीम ‘गढ़बो नवा छत्तीसगढ़” रखा है। इस कारण समारोह में बाहर के किसी भी कलाकार को नहीं बुलाया गया है |
इस बार राज्योत्सव के मंच पर बस्तर, सरगुजा और मध्य क्षेत्र के लोक नृत्य, लोक गाथा और अन्य कलाएं देखने को मिलेंगी | सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के लिए विभिन्न् विभागों के स्टॉल लगे होंगे | मतलब, राज्योत्सव पूरी तरह से छत्तीसगढ़ी रंग में रंगा होगा |
क्यों मिला छत्तीसगढ़ को यह नाम:-
राज्य का पौराणिक नाम तो कौशल राज्य है, जो भगवान श्रीराम की ननिहाल कहा जाता है | लगभग 300 साल पहले गोंड जनजाति के शासनकाल के दौरान इस राज्य को छत्तीसगढ़ नाम मिला था | छत्तीसगढ़ के नाम को लेकर कई कहानियां प्रचलित हैं पर असल कारण था गोंड राजाओं के 36 किले | जसे किलों को गढ़ भी कहा जाता था | इसी कारण इस क्षेत्र का नाम छत्तीसगढ़ पड़ा |
ज्यादातर इतिहासकारों का मानना है कि कल्चुरी राजाओं द्वारा 36 किले या कई गांवों को मिलाकर गढ़ बनाए गए थे | इस इलाके को कोसल या दक्षिण कोसल के तौर पर जाना जाता था | यह उस समय की बात है जब रामायण काल से सत्रहवीं शताब्दी का दौर चल रहा था | कल्चुरी राजाओं के समय में छत्तीसगढ़ की राजधानी आज के समय के बिलासपुर के पास स्थित शहर रतनपुर, हुआ करता था |
शिवनाथ नदी के उत्तर में कल्चुरियों की रतनपुर शाखा के अंतर्गत 18 गढ़ और दक्षिण में रायपुर शाखा के अंतर्गत 18 गढ़ बनाए गए थे |
आज प्रदेश का 66वां मध्यप्रदेश स्थापना दिवस दिवस है | आज ही के दिन 1 नवम्बर 1956 को यह अस्तित्व में आया | मध्य प्रदेश कभी मध्य भारत में आता था | लेकिन अब स्वयं एक राज्य के रूप में पहचाना जाने लगा है | जिसकी राजधानी भोपाल है | इस दौरान पूरे प्रदेश में हर जगह अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे |
इस दौरान राजधानी भोपाल के ऐतिहासिक लाल परेड मैदान में होने वाले राज्य स्तरीय समारोह के पहले दिन मुंबई के अमित त्रिवेदी के गानों से शाम सजेगी | साथ ही नई दिल्ली के गुलाम साबिर निजामी बन्धुओं की सूफी कव्वाली भी होगी | वहीं प्रदेशभर में अलग-अलग अंदाज में कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा | साथ ही, प्रदेश की कई सरकारी और गैर सरकारी इमारतों को इस दिन के जश्न के रूप में दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है |
मध्य प्रदेश अस्तित्व में क्यों आया:-
मध्यभारत प्रांत का गठन 28 मई 1948 को किया गया था, जिसमें ग्वालियर और मालवा का क्षेत्र शामिल था | मध्यभारत प्रांत के पहले राजप्रमुख ग्वालियर रियासत के महाराजा जीवाजी राव सिंधिया थे | प्रांत की दो राजधानियां थीं ग्वालियर को शीत राजधानी तो वहीं इंदौर को ग्रीष्म राजधानी का रूतबा हासिल था |
भारत की आजादी के बाद 26 जनवरी 1950 को कुछ चुनिंदा इलाकों को छोड़कर देशभर में संविधान लागू हुआ | इसके बाद सन् 1951-1952 में देश में पहली बार आम चुनाव कराए गए | जिसके कारण संसद और विधान मंडल कार्यशील हुए | प्रशासन की दृष्टि से इन्हें श्रेणियों में विभाजित किया गया | सन् 1956 में राज्यों के पुर्नगठन के फलस्वरूप 1 नवंबर, 1956 को नए राज्य के रूप में मध्य प्रदेश की स्थापना की गई | इस राज्य का पुर्नगठन भाषीय आधार पर किया गया |
इसके घटक राज्य मध्य प्रदेश, मध्य भारत, विन्ध्य प्रदेश एवं भोपाल थे जिनकी अपनी विधानसभाएं थीं | इस राज्य का निर्माण तत्कालीन सीपी एंड बरार, मध्य भारत, विंध्य प्रदेश और भोपाल राज्य को मिलाकर हुआ | डॉ. पटटाभि सीतारामैया मध्यप्रदेश के पहले राज्यपाल हुए | जबकि पहले मुख्यमंत्री के रूप में पंडित रविशंकर शुक्ल ने शपथ ली थी | वहीं पंडित कुंजी लाल दुबे को मध्यप्रदेश का पहला अध्यक्ष बनाया गया |
भोपाल को ही राजधानी क्यों चुना गया:-
1 नवंबर 1956 को प्रदेश के गठन के साथ ही इसकी राजधानी और विधानसभा का चयन भी कर लिया गया | भोपाल को राजधानी बनाए जाने में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. शंकर दयाल शर्मा, भोपाल के आखिरी नवाब हमीदुल्ला खान और पं. जवाहर लाल नेहरू की महत्वपूर्ण भूमिका रही | और लंबी कशमकश के बाद आखिरकार देश-प्रदेश का दिल कहे जाने वाले भोपाल शहर को प्रदेश की राजधानी के रूप में चुन लिया गया |
उस समय भोपाल को जिला घोषित नहीं किया गया था | इसे साल 1972 में जिला घोषित किया गया | इससे पहले भोपाल सीहोर जिले में आता था | मध्य प्रदेश के गठन के समय प्रदेश में कुल 43 जिले ही बनाए गए थे | लेकिन, वर्तमान में बढ़ती आबादी के कारण व्यवस्थाओं को सुचारू ढंग से चलाने के लिए अब तक मध्य प्रदेश में कुल 52 जिले बनाए जा चुके हैं |
CM Rise School Principal recruitment : मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने आमंत्रित किए सीएम राइस स्कूलों के लिए प्राचार्य के आवेदन|
सी. एम. राइज विद्यालय योजना: CM Rise School Principal recruitment
मध्य प्रदेश की महत्वाकांछी योजना सी. एम. राइज विद्यालय शैक्षणिक सत्र 2021 -22 से प्रारम्भ की जा रही है | इस योजना के अंतर्गत स्कूल शिक्षा विभाग के 276 विद्यालयों को सर्वसुविधा युक्त विद्यलयो में विकसित किया जा रहा है | इन विद्यालयों की प्रमुख विशेषताएं निम्नानुसार है :-
विद्यालय के वृहद तथा सर्वसुविधा युक्त केम्पस में कक्षाये KG से 12 वी तक संचालित होंगी|
हिंदी तथा अंग्रेजी माध्यम में शिक्षण व्यवस्था |
सभी संकायों में अध्यापन की व्यवस्था |
विद्यार्थियों के लिए कंप्यूटर /योग / खेल/ म्यूजिक/ नृत्य की शिक्षा की व्यवस्था|
विद्यार्थियों के लिए परिवहन की व्यवस्था|
CM Rise School Principal recruitment 2021-2022:
मध्य प्रदेश सरकार ने विद्यालयों हेतु शासकीय हाई स्कूल / हायर सेकेंडरी स्कूलों (स्कूल शिक्षा/ जन जातीय कार्य विभाग) में कार्यरत प्राचार्यो से आवेदन आमंत्रित किये गए हैं| यदि आप भी शिक्षा के क्षेत्र में उच्चतम आयाम स्थापित करने की चुनौती को स्वीकार करने की इच्छाशक्ति रखते है तो यह अवसर आप के लिए है | विस्तृत विज्ञापन तथा शर्ते, आवेदन करने की प्रकिया http://www.educationportal.mp.gov.in/ तथा https://www.vimarsh.mp.gov.in/ पर उपलब्ध है | ऑनलाइन आवेदन विमर्श पोर्टल पर दिनांक 10 नवम्बर 2021 तक किये जा सकेंगे| चयनित स्कूलों में पूर्व से कार्यरत प्राचार्यो को शाला में बने रहने के लिए चयन प्रक्रिया में आवेदन करना अनिवार्य होगा |
नोट : स्कूल शिक्षा / जन जातीय कार्य विभाग के अंतर्गत हाई स्कूल/ हायर सेकेंडरी स्कूलों में कार्यरत नियमित प्राचार्य आवेदन हेतु पात्र है
सर्व संसाधन संपन्न – सी. एम. राइज विद्यालयों में प्राचार्यो की चयन प्रक्रिया:
मध्य प्रदेश की महत्वाकांछी योजना सी. एम. राइज विद्यालय शैक्षणिक सत्र 2021 -22 से प्रारम्भ की जा रही है | इस योजना के अंतर्गत स्कूल शिक्षा विभाग के 276 विद्यालयों को सर्वसुविधा युक्त विद्यलयो में ऊर्जावान तथा इनोवेटिव प्राचार्य पद हेतु हाई / हायर सेकेंडरी स्कूलों में कार्य रत प्राचार्यो से आवेदन आमंत्रित किये गए हैं :
चयनित स्कूलों में शतप्रतिशत रिक्तिया मानकर कार्यवाही की जाएगी अर्थात इन शालाओं में पूर्व से कार्यरत प्राचार्यो को भी चयन प्रक्रिया के माध्यम से आना होगा|
आयु सीमा दिनांक 01.01.2021 की स्थिति में 57 वर्ष से अधिक न हो|
चयनित अमले का कार्यकाल न्यूनतम 5 वर्ष रहेगा| 5 वर्ष उपरांत सम्बंधित के कार्य के मूल्यांकन के आधार पर अवधि में वृद्धि की जा सकेगी| अपरिहार्य परिस्थितियों, कार्य में अक्षमता की स्थिति में ही न्यूनतम अवधि के पूर्व भी स्थानांतरण किया जा सकेगा|
आवेदक वर्तमान में विकासखंड का प्राथमिकता क्रम चुन सकेंगे| न्यूनतम 01 विकासखंड की प्राथमिकता क्रम में चयनित किया जा सकेगा | चयन उपरांत पदस्थापना हेतु शालाओं का प्राथमिकता क्रम (Choice Filling) की सुविधा दी जाएगी |
सी. एम. राइज विद्यालयों में पदस्थापना नियमित प्राचार्यो से की जा रही है | इन विद्यालयों में किसी प्रकार की नवीन नियुक्ति नहीं की जा रही है, इस लिए आरक्षण की आवश्यकता नहीं है |
1. स्कूल शिक्षा अथवा जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत हाई /हायर सेकेंडरी स्कूलों में वर्तमान में कार्यरत नियमित प्राचार्य 2. प्रतिनयुक्ति पर वर्तमान में स्कूल शिक्षा अथवा जनजातीय कार्य विभाग में कार्य रत प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी/ जिला परियोजना समन्वयक/ प्रभारी सहायक संचालक/ ए.डी.पी.सी.
7.1 जनजातीय कार्य विभाग के अभ्यर्थी को विभाग का एन.ओ. सी. प्रदान करना होगा |
8. विभागीय जांच / लोकायुक्त में शिकायत लंबित न हो
प्राचार्य पद हेतु चयन साक्षात्कार के माध्यम से किया जायेगा
सीएम राइस स्कूलों के लिए प्राचार्य के आवेदन करने के लिए यहाँ क्लिक करे |
सीएम राइस स्कूलों के लिए प्राचार्य के आवेदन से सम्बंधित नोटिफिकेशन डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करे|
भारतीय नौसेना (नौसेना भारती) ने हाल ही में एमआर अप्रैल 2022 (300 पोस्ट) भर्ती 2021 के पद के लिए ऑनलाइन आवेदन पत्र आमंत्रित किये है। वे उम्मीदवार सभी जो इस रिक्ति पद के लिए इच्छुक हैं और सभी पात्रता मानदंड रखते हैं, वे सभी लोग ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और साथ ही वे ऑनलाइन आवेदन करने से पहले पूर्ण अधिसूचना पढ़ सकते हैं। नौसेना भर्ती के लिए योग्य और इच्छुक उम्मीदवार 02 November 2021 तक अंतिम तिथि से पहले ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। उम्मीदवार Indian Navy MR Recruitment 2021 in Hindi की तिथियाँ, योग्यता, आयु सीमा, फीस, ऑनलाइन आवेदन और अन्य जानकारी प्राप्त करने के लिए इस आर्टिकल को अंत तक पढ़ें।
Important Dates For Indian Navy MR April 2022 Online Form :
ऑनलाइन आवेदन प्रारम्भ तिथि
29/10/2021
ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि
02/11/2021
परीक्षा तिथि
जल्द घोषित
एडमिट कार्ड जारी होने की तिथि
इसकी घोषणा अभी तक नहीं की गई है
Fees Detail For Indian Navy MR April 2022 Online Form :
सामान्य / ओबीसी
0 /-
एससी / एसटी
0 /-
Fees Payment Mode For Indian Navy MR April 2022 Online Form :
किसी भी श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए कोई आवेदन शुल्क नहीं, केवल ऑनलाइन आवेदन पत्र भरें।
Age Limit For Indian Navy MR April 2022 Online Form :
जन्म: 01/04/2002 से 31/03/2005
Vacancy Detail Of Indian Navy MR April 2022 Online Form :
Post Name
Eligibility
Chef
भारत के किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय से कक्षा 10 उत्तीर्ण
Stewards
भारत के किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय से कक्षा 10 उत्तीर्ण
Hygienist
भारत के किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय से कक्षा 10 उत्तीर्ण
Physical Eligibility Details Of Indian Navy MR April Online Form :
लंबाई
157 सेंटीमीटर
फिजिकल फिटनेस टेस्ट (PFT)
7 मिनट में 1.6 किलोमीटर की दौड़,20 स्कैट्स यानी उठक-बैठक और 10 पुश-अप्स लगाना होगा|
Selection Process Of Indian Navy MR April Online Form :
इंडियन नेवी में एमआर की कुल 300 रिक्तियों के लिए लगभग 1500 उम्मीदवारों को आवेदन के आधार पर लिखित परीक्षा के लिए बुलाया जाएगा।
लिखित परीक्षा और पीएफटी के लिए उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्टिंग क्वालिफाइंग एग्जामिनेशन (10वीं परीक्षा) के प्रतिशत के आधार पर की जाएगी।
कट ऑफ अंक एक राज्य से दूसरे राज्य में भिन्न हो सकते हैं क्योंकि वैकेंसी को राज्यवार तरीके से आवंटित किया गया है।
Important Notice For Indian Navy MR April Online Form :
लिखित परीक्षा के समय उम्मीदवारों द्वारा सरकार / ICMR मान्यता प्राप्त लैब से कोविड -19 की एक निगेटिव आरटी-पीसीआर रिपोर्ट पेश करना अनिवार्य है। (रिपोर्ट रिपोर्टिंग तिथि से अधिकतम 72 घंटे पहले की जानी चाहिए)
Apply Online Form :
Indian Navy MR Online Form Apply Online (Registration)
खेल पुरस्कार 2021- भारत सरकार की ओर से इस साल के लिए खेल पुरस्कारों (National Sports Award) का ऐलान कर दिया गया है | टोक्यो ओलिंपिक 2021 (Tokyo Olympics 2021) में जैवलिन का गोल्ड मेडल जीतने वाले नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) समेत कुल 11 एथलीटों को सर्वोच्च खेल सम्मान मेजर ध्यानचंद खेल रत्न (Major Dhyanchand Khel Ratna Award) के लिए चुना गया है |
वहीं 35 खिलाड़ियों को दूसरे प्रमुख सम्मान, अर्जुन अवॉर्ड (Arjun Award 2021) के लिए चुना गया है | इनमें टोक्यो ओलिंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली पुरुष हॉकी टीम के सदस्यों के अलावा, दिग्गज भारतीय क्रिकेटर शिखर धवन (Shikhar Dhawan) और टोक्यो पैरालिंपिक में मेडल जीतने वाले सुहास एलवाई (Suhas LY) और भाविना पटेल (Bhavina Patel) शामिल हैं | इस बार के खेल पुरस्कारों में टोक्यो ओलिंपिक और पैरालिंपिक में देश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों का दबदबा रहा | ओलिंपिक और पैरालिंपिक के कारण ही खेल पुरस्कारों के नामांकन और चयन प्रक्रिया में देरी हुई |
खेल पुरस्कारओं के चयन के लिए बनाई गई समिति ने खेल मंत्रालय को अपनी ओर से नाम भेजे, जिसमें अर्जुन पुरस्कार के लिए 35 खिलाड़ियों को चुना गया, जो एक नया रिकॉर्ड है | इससे पहले पिछले साल ही अर्जुन पुरस्कार के लिए 27 खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया था | हालांकि, इस बार अधिक संख्या होने का बड़ा कारण भारतीय पुरुष हॉकी टीम ब्रॉन्ज मेडल जीतकर 41 साल का सूखा खत्म करने वाली भारतीय हॉकी टीम के गोलकीपर पीआर श्रीजेश को छोड़कर लगभग सभी सदस्यों को अर्जुन पुरस्कार के लिए चुना गया है | श्रीजेश को ओलिंपिक मेडल के अलावा हॉकी में करीब डेढ़ दशक की सेवाओं के लिए खेल रत्न के लिए चुना गया है |
वहीं भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के सीनियर बल्लेबाज शिखर धवन को भी इस अवॉर्ड के लिए चुना गया है | पिछले करीब एक दशक से भारतीय टीम के लिए ओपनर की भूमिका निभा रहे शिखर का नाम BCCI की ओर से सुझाया गया था | धवन ने भारत के लिए 10 हजार से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय रन बनाए हैं | वहीं टोक्यो पैरालिंपिक में टेबल टेनिस का सिल्वर जीतकर इतिहास रचने वाली भाविना पटेल को भी चुना गया है | पैरालिंपिक में ही बैडमिंटन का सिल्वर जीतने वाले सुहास यथिराज और ऊंची कूद का सिल्वर जीतने वाले निषाद कुमार भी अर्जुन पुरस्कार के लिए चुने गए खिलाड़ियों में शामिल हैं |
खेल पुरस्कार 2021 पाने वाले सारे खिलाड़ियों की सूची:-
National Education Day, राष्ट्रीय शिक्षा दिवस 2021:
देश भर में 11 नवंबर को प्रत्येक साल राष्ट्रीय शिक्षा दिवस मनाया जाता है | यह दिवस स्वतंत्रता सेनानी एवं भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती के अवसर मनाया जाता है | मौलाना अबुल कलाम का जन्म 11 नवंबर 1888 को हुआ था |
शिक्षा दिवस के मौके पर भारत शिक्षा के क्षेत्र में अबुल कलाम कलाम द्वारा किए गए कार्यों को याद करता है | मौलाना अबुल कलाम का मानना था कि स्कूल प्रोयगशालाएं हैं जहां भावी नागरिकों का उत्पादन किया जाता है | इस दिन, शिक्षा के बारे में जागरूकता फैलाने और प्रत्येक व्यक्ति को साक्षर बनाने हेतु विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है | मानव संसाधन विकास मंत्रालय (MHRD) ने साल 2008 में मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाया जाने की घोषणा की |
मौलाना अबुल कलाम आज़ाद कौन थे:-
मौलाना अबुल कलाम एक विद्वान, कार्यकर्ता और कांग्रेस पार्टी के नेता थे | उन्होंने ग्यारह वर्षों तक शिक्षा मंत्री के रूप में कार्य किया | एक स्वतंत्रता सेनानी के रूप में, आजाद खिलाफत आंदोलन के नेता थे और 1919 में असहयोग आंदोलन को व्यवस्थित करने में मदद की | आजाद गांधीवादी दर्शन के अनुयायी थे | उन्होंने 1923 में और फिर 1940 से 1945 तक कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया | मौलाना ने इंडिया विन्स फ्रीडम और घुबर-ए-खतिर सहित कई किताबें लिखी हैं |
अबुल कलाम ने 1947 से 1958 तक स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री के रूप में कार्य किया | उनका मानना था कि मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा दी जानी चाहिए | उन्होंने न केवल महिलाओं की शिक्षा पर जोर दिया बल्कि उन्होंने 14 साल की आयु तक सभी बच्चों के लिए निशुल्क सार्वभौमिक प्राथमिक शिक्षा के साथ-साथ व्यावसायिक प्रशिक्षण और तकनीकी शिक्षा की वकालत की |
मौलाना अबुल कलाम का भारत में शिक्षा के क्षेत्र में योगदान:-
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में जामिया मिलिया इस्लामिया के संस्थापक सदस्यों में से एक के रूप में, उन्होंने 1934 में विश्वविद्यालय के परिसर को अलीगढ़ से नई दिल्ली स्थानांतरित करने में मदद की |
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की शक्ति में दृढ़ विश्वास रखने वाले मौलाना अबुल कलाम ने 28 दिसंबर, 1953 को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की स्थापना में मदद की | शिक्षा मंत्री के रूप में, उन्हें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) की स्थापना का श्रेय दिया जाता है | उन्होंने देश में शिक्षा और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए आईआईएससी और स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर एंड प्लानिंग, संगीत नाटक अकादमी (1953), साहित्य अकादमी (1954) और ललित कला अकादमी (1954) की स्थापना में भी मदद की |
11 सितंबर, 2008 को मानव संसाधन विकास मंत्रालय (MHRD) ने 11 नवंबर को सालाना राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया | एमएचआरडी अल्पसंख्यक समुदायों के छात्रों को एम फिल और पीएचडी करने के लिए वित्तीय सहायता के रूप में मौलाना अबुल कलाम आजाद राष्ट्रीय फैलोशिप भी देता है |
मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के बारे में:-
मौलाना अबुल कलाम आज़ाद एक प्रसिद्ध भारतीय मुस्लिम विद्वान थे. वे कवि, लेखक, पत्रकार और भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थे |
वे महात्मा गांधी के सिद्धांतो का समर्थन करते थे | वे आजादी के बाद भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के रामपुर जिले से साल 1952 में सांसद चुने गए |
उन्होंने बचपन से शिक्षा को अपने जीवन का श्रेय बनाया था |
उन्होंने केवल तेरह साल की उम्र में अपनी शिक्षा पूर्ण करके अपने से बडी कक्षा व उम्र के विद्यार्थियों को पढ़ाना प्रारम्भ किया | उन्होंने ना केवल महिलाओं की शिक्षा पर जोर दिया बल्कि 14 साल की आयु तक सभी बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने की भी वकालत की थी |
उन्होंने इसके अतिरिक्त प्राथमिक शिक्षा के साथ व्यावसायिक प्रशिक्षण और तकनीकी शिक्षा की ओर भी सबका ध्यान आकर्षित करवाया |
Institutes named after Maulana Abul Azad Kalam:-
Maulana Azad Medical College in New Delhi
Maulana Azad National Institute of Technology in Bhopal
Maulana Azad National Urdu University in Hyderabad
Maulana Azad Centre for Elementary and Social Education
Maulana Azad College
Maulana Abul Kalam Azad Institute of Asian Studies
Kolkata’s Maulana Abul Kalam Azad University of TechnologyA Central (Minority) University in New Delhi
Maulana Azad library in the Aligarh Muslim University
Sardar Vallabhbhai Patel- भारत के ‘लौह पुरुष‘ वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर, 1875 को हुआ था | स्वतंत्र भारत के वास्तुकार के रूप में प्रसिद्ध, सरदार पटेल ने भारत गणराज्य का निर्माण करने के लिए 562 रियासतों को एकजुट किया |
भारत के प्रथम उप प्रधान मंत्री और गृह मंत्री, वल्लभभाई पटेल को दुनिया भर में कई निर्णय लेने के लिए कई सुधारों के लिए प्रशंसित किया गया है | उनमें से एक जूनागढ़ मुद्दे को UNO को संदर्भित करने के लिए लॉर्ड माउंटबेटन की सलाह पर विचार नहीं कर रहा है और भारत सरकार को जूनागढ़ राज्य के परिग्रहण को स्वीकार करने के लिए आश्वस्त कर रहा है |
सरदार वल्लभभाई पटेल की 143 वीं जयंती पर, गुजरात में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी एक प्रतिमा का अनावरण किया, जिसे ‘Statue Of Unity‘ कहा गया | यह दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है जिसकी ऊंचाई 182 मीटर है | प्रतिमा में सरदार पटेल, भारत के पहले गृह मंत्री और उप प्रधान मंत्री, नर्मदा नदी के ऊपर एक धोती और एक शॉल में दर्शाया गया है |
31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती मनाने के लिए, हमने उन सर्वश्रेष्ठ उद्धरणों को सूचीबद्ध करने का निर्णय लिया है जो छात्रों को शिक्षाविदों में उत्कृष्टता प्राप्त करने और उनके करियर में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं |
National Unity Day: Wishes, Slogan, Quotes, SMS, Whatsapp Status:-
It is in my nature to be a friend of the friendless.
Religion is a matter between the man and his Maker.
Manpower without Unity is not a strength unless it is harmonized and united properly, then it becomes a spiritual power.
Ours is a non-violent war, It is Dharma YUDDHA.
Every citizen of India must remember that he is an Indian and he has every right in this country but with certain duties.
Today we must remove distinctions of high and low, rich and poor, caste or creed.
Faith is of no avail in absence of strength. Faith and strength, both are essential to accomplish any great work.
There is something unique in this soil, which despite many obstacles has always remained the abode of great souls.
Caste, community will rapidly disappear. We have to speedily forget all these things. Such boundaries hamper our growth.
Even if we lose the wealth of thousands, and our life is sacrificed, we should keep smiling and be cheerful keeping our faith in God and Truth.
It is the prime responsibility of every citizen to feel that his country is free and to defend its freedom is his duty.
Tell Churchill to save England first before saving India.
In a domestic Government unity and co-operation are essential requisites.
My only desire is that India should be a good producer and no one should be hungry, shedding tears for food in the country.
It is only so long as a man can retain the child in him that life can be free from those dark shadows which leave inevitable furrows on a man92s forehead.
Satyagraha is not a creed for the weak or the cowardly.
Your goodness is impediment in your way, so let your eyes be red with anger, and try to fight the injustice with a firm hand.
The main task before India today is to consolidate herself into a well-knit and united power…
Non-violence has to be observed in thought, word and deed. The measure of our non-violence will be the measure of our success.
By common endeavor we can raise the country to a new greatness, while a lack of unity will expose us to fresh calamities
A war based on Satyagraha is always of two kinds. One is the war we wage against injustice, and the other we fight our won weaknesses
राष्ट्रीय एकता दिवस जिसे National Unity day2021 के रूप में भी जाना जाता है हर साल 31 अक्टूबर को पूरे भारत के लोगों द्वारा मनाया जाता है | सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है जिन्होंने वास्तव में देश को एकजुट किया था | राष्ट्रीय एकता दिवस भारत सरकार द्वारा वर्ष 2014 में 31 अक्टूबर को हर साल इस कार्यक्रम को मनाने के उद्देश्य से पेश किया गया था |
इस आयोजन को शुरू करने का उद्देश्य देश के महान व्यक्ति सरदार वल्लभभाई पटेल जिन्होंने भारत को एकजुट रखने में वास्तव में कड़ी मेहनत की उनकी जयंती पर उनके असाधारण कार्यों को याद करके उन्हें श्रद्धांजलि देना है | पूरे भारत में लोगों द्वारा गुरुवार, 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस 2021 मनाया जाएगा | इसे सरदार वल्लभभाई पटेल की 146वीं जयंती के रूप में मनाया जाएगा |
National Unity dayक्यों मनाया जाता है:-
राष्ट्रीय एकता दिवस को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के रूप में मनाया जाता है, जो भारत को एकजुट करने वाले एक प्रसिद्ध व्यक्तित्व वाले व्यक्ति हैं | यह दिन वर्ष 2014 में नई दिल्ली में भारत की केंद्र सरकार द्वारा तय किया गया था और तब से हर साल पटेल की जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है | इसका उद्देश्य भारत को एकजुट करने के उनके महान प्रयासों के लिए उन्हें श्रद्धांजलि देना था |
इस दिन का शुभारंभ वर्ष 2014 में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सरदार पटेल की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करके और नई दिल्ली में “Run For Unity” के रूप में ज्ञात कार्यक्रम को हरी झंडी दिखाकर किया गया था | इस अवसर का जश्न प्रतिवर्ष देश के युवाओं को जागरूक करने में मदद करता है और सभी को राष्ट्र की अभिन्न शक्ति को बनाए रखने का अवसर प्रदान करता है |
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के नर्मदा जिले के केवडिया में दुनिया की सबसे ऊंची “Statue of Unity” राष्ट्र को समर्पित की | प्रधान मंत्री ने “Wall of Unity” का भी अनावरण किया, एक दीवार जो देश भर के विभिन्न राज्यों से एकत्र किए गए पृथ्वी के नमूनों के साथ बनाई गई है |
Statue of Unity प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक ड्रीम प्रोजेक्ट है | इस परियोजना की घोषणा 31 अक्टूबर, 2013 को नरेंद्र मोदी द्वारा की गई थी, जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे |
परियोजना के विकास के लिए, नरेंद्र मोदी ने Statue of Unity बनाने के लिए लोहे को इकट्ठा करने के लिए एक देशव्यापी अभियान चलाया और पूरे देश में लगभग सात लाख गांवों से लोहा एकत्र किया गया |
यह प्रतिमा 182 मीटर ऊंची है जो न्यूयॉर्क की स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी (93 मीटर) के आकार से दोगुनी है और चीन में स्प्रिंग टेम्पल बुद्धा की ऊंचाई (153 मीटर) से अधिक है |
परियोजना में सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन पर एक प्रदर्शनी हॉल और ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति शामिल है |
मुख्य संरचना 1345 करोड़ रुपये की लागत से पूरी होगी, जो परियोजना के लिए आवंटित कुल राशि 2979 करोड़ रुपये का एक हिस्सा है |
शेष लागत में से, प्रदर्शनी हॉल और कन्वेंशन सेंटर के निर्माण पर 235 करोड़ रुपये खर्च किए गए है | स्मारक को मुख्य भूमि से जोड़ने के लिए पुल पर 83 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं | और अगले 15 वर्षों तक संरचना को बनाए रखने के लिए 657 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं |
लगभग 75000 घन मीटर कंक्रीट, 5700 मीट्रिक टन स्टील संरचना, 18500 स्टील की छड़ें और 22500 मीट्रिक टन कांस्य का उपयोग इस परियोजना के लिए किया गया है|
https://youtube.com/shorts/jls956y6JEg
सरदार वल्लभभाई पटेल के बारे में:-
31 अक्टूबर, 1875 को जन्मे सरदार पटेल पेशे से वकील थे |
वह भारत गणराज्य के संस्थापक पिता और आधुनिक राजनीतिक भारत के वास्तुकार में से एक थे |
लौह पुरुष के रूप में लोकप्रिय, पटेल को ‘सरदार’ के रूप में संबोधित किया गया, जिसका अर्थ है प्रमुख या नेता |
1946 में, कांग्रेस चुनावों के दौरान 16 राज्यों में से 13 ने स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की तुलना में सरदार पटेल को अपना अध्यक्ष चुना | हालाँकि, महात्मा गांधी के कहने पर उन्होंने एक उम्मीदवार के रूप में कदम रखा और जवाहरलाल नेहरू का समर्थन किया |
आखिरकार, सरदार पटेल 1947 में भारत के पहले उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री बने |
उन्हें स्वतंत्र भारतीय संघ में 500 से अधिक रियासतों के राजनीतिक एकीकरण के लिए जाना जाता है | उन्होंने 565 रियासतों को भारत का हिस्सा बनने के लिए एकजुट किया |
1991 में, सरदार वल्लभभाई पटेल को मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया |
बॉलीवुड के अभिनेता शाहरुख खान ने अपने बेटे की रिहाई के लिए मुंबई के बड़े-बड़े वकीलों को लगा लिया है, लेकिन को भी आर्यन खान की रिहाई नहीं करवा पाया | अब उन्होंने इस काम की जिम्मेदारी देश के पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी (Mukul Rohatgi) को सौंपी है, जो भारत के दिग्गज वकील माने जाते हैं | माना जा रहा है कि रोहतगी की मौजूदगी से इस मुकदमे में आर्यन की जमानत के लिए पहले से दलीलें पेश कर रहे वरिष्ठ वकीलों का हौसला बढ़ेगा | यह आर्यन के वकीलों की टीम की अगुवाई करेंगे | रोहतगी इससे पहले भी देश के कई चर्चित मुकदमों में पैरवी कर चुके हैं |
आर्यन खान को क्रूज ड्रग्स केस में मुंबई के आर्थर रोड जेल से निकलवाने के लिए मुंबई के मशहूर वकील सतीश मानशिंदे और अमित देसाई काफी हाथ-पैर मार चुके हैं, लेकिन स्पेशल एनडीपीएस कोर्ट और सेशंस कोर्ट दोनों जगहों से उन्हें राहत नहीं मिल पाई | अब बॉम्बे हाई कोर्ट में शाहरुख खान के बेटे की जमानत की पैरवी के लिए खुद भारत के पूर्व अटॉर्नी जनरल (AGI) मुकुल रोहतगी को लगाया गया है | आर्यन खान को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने 3 अक्टूबर को मुंबई के पास समंदर से क्रूज-शिप से गिरफ्तार किया था | वे फिलहाल मायानगरी के आर्थर रोड जेल में बंद हैं | यदि उन्हें आज बॉम्बे हाई कोर्ट से जमानत नहीं मिलती है तो फिर उन्हें कम से कम 30 अक्टूबर तक जेल की रोटियां ही तोड़नी पड़ेगी |
कौन हैं मुकुल रोहतगी:-
मुकुल रोहतगी भारत के 14वें अटॉर्नी जनरल (AGI) थे और उनके बाद केके वेणुगोपाल देश के सबसे बडे़ लॉ ऑफिसर का पद संभाल रहे हैं | 66 साल के रोहतगी सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील हैं और पहले एडिश्नल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया (ASGI) भी रह चुके हैं | एजीआई के पद पर वह भाजपा सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान 2014 से लेकर 2017 तक रहे | इस केस में वह आर्यन खान के वकीलों सतीश मानशिंदे और अमित देसाई की टीम की अगुवाई कर रहे हैं |
जूनियर वकील बन शुरू किया करियर:-
मुकुल रोहतगी के पिता अवध बिहारी रोहतगी दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस थे | मुकुल रोहतगी ने अपनी लॉ की पढ़ाई मुंबई के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से की है | कॉलेज से निकलने के बाद मुकुल उस समय के मशहूर लॉयर योगेश कुमार सभरवाल के जूनियर बनकर अपनी प्रैक्टिस शुरू की | बता दें, योगेश कुमार सभरवाल 2005-2007 तक देश के 36वें चीफ जस्टिस बने थे | मुकुल ने जस्टिस योगेश कुमार सभरवाल के साथ हाई कोर्ट में अपनी प्रैक्टिस शुरू की थी | 1993 में दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें सीनियर काउंसिल का दर्जा दिया, और उसके बाद 1999 में मुकुल को एडिशनल सॉलिसिटर जनरल बनाया गया था |
किन बड़े मुकदमों में पैरवी कर चुके हैं मुकुल रोहतगी:-
मुकुल रोहतगी अदालत में जिन बड़े और चर्चित मुकदमों की पैरवी कर चुके हैं, उनमें 2002 का गुजरात दंगा केस भी शामिल है और वह गुजरात सरकार की ओर से दलीलें रख चुके हैं | मुकुल रोहतगी की फीस को लेकर कई मिडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि वह अपनी एक सुनवाई के लिए लगभग 10 लाख रुपए की फीस चार्ज करते हैं | एएसजी रहते हुए उन्होंने नेशनल जुडिशियल अपॉइंटमेंट कमीशन में भी सरकार का पक्ष रख चुके हैं, जिसमें सर्वोच्च अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया था | सीबीआई के स्पेशल जज बीएच लोया की मौत से जुड़े हाई-प्रोफाइल केस में भी उन्हें महाराष्ट्र सरकार ने स्पेशल प्रोसेक्यूटर नियुक्त किया गया था | इस केस में उन्हें महाराष्ट्र सरकार ने 1.20 करोड़ रुपये बतौर फीस दी थी | सुप्रीम कोर्ट ने इस मौत की जांच की मांग खारिज कर दी थी और रोहतगी ने अदालत के फैसले का स्वागत किया था |
अंबानी और RSS से जुड़ी कथित फाइलों को लेकर सनसनीखेज दावे करने वाले मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक इन दिनों सुर्खियों में हैं | अंबानी और आरएसएस से जुड़े एक शख्स की दो फाइलों को मंजूरी देने के बदले 300 करोड़ की रिश्वत के ऑफर वाले दावों से सत्यपाल मलिक ने यूटर्न ले लिया है | बयान पर विवाद होने के बाद सत्यपाल मलिक ने RSS वाले बयान पर सफाई दी है और कहा कि जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल रहते 300 करोड़ रुपए की रिश्वत ऑफर किए जाने के मामले का आरएसएस से कोई मतलब नहीं | उन्होंने इसके लिए माफी भी मांग ली है |
मोदी सरकार के स्टैंड से उलट सत्यपाल मलिक ने पहले तीन केंद्रीय कृषि कानूनों की वापसी का भी समर्थन किया तो अब जम्मू-कश्मीर में डील और गोवा में भ्रष्टचार तक के मुद्दों को लेकर वो मुखर हैं | बीजेपी से लेकर आरएसएस के नेता को भी वो अपने निशाने पर ले रहे हैं | सत्यपाल मलिक ने पिछले काफी दिनों से बीजेपी सरकार के विपरीत रुख अख्तियार कर रखा है |
कौन हैं सत्यपाल मलिक:-
सत्य पाल मलिक (जन्म 24 जुलाई 1946) एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं जो मेघालय के 21वें और वर्तमान राज्यपाल के रूप में कार्यरत हैं | वे गोवा के 18वें राज्यपाल थे | मलिक तत्कालीन जम्मू और कश्मीर राज्य के राज्यपाल भी थे | वह अगस्त 2018 से अक्टूबर 2019 तक जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल रहे | और यह उनके कार्यकाल के दौरान था कि जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को निरस्त करने का संवैधानिक निर्णय 5 अगस्त 2019 को लिया गया था |
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के हिसावदा गांव में 24 जुलाई, 1946 को सत्यपाल मलिक का जन्म हुआ | उनके पिता बुध सिंह किसान थे और सत्यपाल जब दो वर्ष के थे तभी पिता का निधन हो गया | बुध सिंह के निधन के बाद सतपाल मलिक का पालन पोषण उनकी माता जगबीरी देवी ने किया था | पड़ोस के प्राथमिक विद्यालय से उनकी पढ़ाई शुरू हुई और इसके बाद ढिकौली गांव के इंटर कालेज से माध्यमिक शिक्षा पूरी कर वह मेरठ कॉलेज पहुंचे | उन्होंने मेरठ कॉलेज से बीएससी और कानून की पढ़ाई की | यहीं से एक समाजवादी छात्र नेता के तौर पर राम मनोहर लोहिया से प्रेरणा लेकर उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी |
सत्यपाल मलिक का राजनीतिक सफर:-
सत्यपाल मलिक ने पहली बार 1968 में छात्र संघ का चुनाव लड़ा और वह मेरठ कॉलेज के पहले अध्यक्ष चुने गए थे | मेरठ कॉलेज में वह दो बार छात्र संघ के अध्यक्ष रहे हैं | बीकेडी के टिकट पर बागपत से साल 1974 में चुनाव लड़ा और चरण सिंह के भारतीय क्रांति दल से जनता ने उन्हें विधायक के रूप में चुना | इस दौरान समाजवादी नेता के तौर पर सत्यपाल मलिक ने किसान मुद्दों को प्रमुखता से उठाया |
इसके बाद वह सन् 1980-86 और सन् 1986-1992 के दो कार्यकाल के दौरान उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के सदस्य रहे | वह साल 1989 में जनता दल के टिकट पर अलीगढ़ से संसद सदस्य रहे | उन्हें कुल वोटों में से 2,33,465 (51.5 प्रतिशत) वोट मिले | उन्हें प्रतिद्वंद्वी आईएनसी उम्मीदवार उषा रानी तोमर ने 77,958 वोटों के अंतर से हराया, जिन्होंने 1,55,507 (34.2 प्रतिशत) वोट प्राप्त किए | उन्होंने फिर से समाजवादी पार्टी टिकट पर 1996 में अलीगढ़ से चुनाव लड़ा, लेकिन केवल 40,789 वोट हासिल कर चौथा स्थान प्राप्त किया |
सन् 1984 में वह कांग्रेस में शामिल हो गए थे | हालांकि तीन साल तक पार्टी के राज्यसभा सांसद बने रहे। बताया जाता है कि बोफार्स घोटाले के मामले के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया | इसके बाद 1988 में जनता दल में शामिल हो गए और 1989 में अलीगढ़ से सांसद बने | सन् 1990 से 1990 तक केंद्रीय पर्यटन एवं संसदीय राज्यमंत्री रह चुके हैं |
साल 2004 में भाजपा में शामिल हो गए और लोकसभा के लिए चुनाव लड़ा लेकिन इसमें उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के बेटे अजीत सिंह से हार का सामना करना पड़ा था | 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया | इससे पहले राजस्थान के विधानसभा चुनाव की जिम्मेदारी भी उन्हें दी गई थी | वर्ष 2017 को बिहार के राज्यपाल का पद संभालने के पहले वह भाजपा के किसान मोर्चा के प्रभारी थे |
सत्यपाल मलिक के विवादित बयान:-
पटना में कश्मीर से ज्यादामर्डर होते हैं:
तारीख थी 7 जनवरी 2019… तब सत्यपाल मलिक जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल थे | इसी दिन सत्यपाल मलिक ने बयान दिया कि ‘जम्मू-कश्मीर में कानून व्यवस्था किसी भी अन्य राज्य से अच्छी है | उन्होंने जम्मू-कश्मीर के लॉ एंड ऑर्डर की तुलना बिहार की राजधानी पटना से की | उन्होंने कहा है कि पटना में एक दिन में जितनी हत्याएं हो जाती हैं, उतनी हत्याएं कश्मीर में एक सप्ताह में होती हैं |’
पत्रकार दुर्ग सिंह केस:
पटना… साल 2018… तब बाड़मेर के पत्रकार दुर्ग सिंह राजपुरोहित को एससीएसटी केस में गिरफ्तार कर पटना ले आया गया था | तब ये चर्चा सरेआम थी कि दुर्ग सिंह को सत्यपाल मलिक की भतीजी से भिड़ना महंगा पड़ गया | तब इस पूरे प्रकरण में स्थानीय पत्रकार और सत्यपाल मलिक की भतीजी के विरोधियों ने ये आरोप लगाया था कि मलिक के प्रभाव का इस्तेमाल कर दुर्ग सिंह राजपुरोहित को फर्जी एसएसीएसटी केस में फंसाया गया | इस मामले ने इतना तूल पकड़ लिया था कि सीधे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जांच के आदेश देने पड़े थे |
किसान आंदोलन के समर्थक:
सत्यपाल मलिक फिलहाल मेघालय के राज्यपाल हैं और केंद्र के कृषि कानूनों (Agriculture Law) के खिलाफ चल रहे किसानों के आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं | उन्होंने कहा कि यदि किसानों का प्रदर्शन जारी रहा तो वह अपने पद से इस्तीफा देकर उनके साथ खड़े होने के लिये तैयार हैं |
झुंझनू में किया बड़ा दावा:
मलिक ने राजस्थान के झुंझनू में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, ”कश्मीर जाने के बाद मेरे सामने दो फाइलें (मंजूरी के लिये) लाई गईं | एक अंबानी और दूसरी आरएसएस से संबद्ध व्यक्ति की थी, जो महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व वाली तत्कालीन (पीडीपी-भाजपा) सरकार में मंत्री थे | उनके प्रधानमंत्री के बहुत करीबी होने का दावा किया गया था |”
उन्होंने कहा, ”दोनो विभागों के सचिवों ने मुझे बताया था कि उनमें अनैतिक कामकाज जुड़ा हुआ है, लिहाजा दोनों सौदे रद्द कर दिये गए | सचिवों ने मुझसे कहा था कि ‘आपको प्रत्येक फाइल को मंजूरी देने के लिये 150-150 करोड़ रुपये मिलेंगे’, लेकिन मैंने उनसे कहा कि मैं पांच जोड़ी कुर्ता-पायजामा लेकर आया था और केवल उन्हें ही वापस लेकर जाऊंगा |” उनके भाषण का एक वीडियो सोशल मीडिया पर देखा गया |
बच्चों की संज्ञानात्मक क्षमताओं और सीखने की शैली में भिन्नता होती है तभी तो वे अलग ढंग से सोचते और व्यवहार करते हैं, विश्लेषण भी अलग ढंग से करते है और उसी के अनुसार निर्णय लेते हैं। इन सभी बातों की समझ बच्चों को सीखने के अनुभव प्रदान करने से पहले उनकी सीखने की जरूरतों को जानने में शिक्षक की मदद करती है। इसी बात को ध्यान में रखकर इस कोर्स को तैयार किया गया है।
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67वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (67th National Film Awards) आज दिए गए | उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू के हाथों विजेताओं को पुरस्कार दिए गए | हिंदी सिनेमा कैटेगरी में इस बार एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की फिल्म ‘छिछोरे‘ बेस्ट हिंदी फिल्म चुनी गई है | इस फिल्म में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बात की गई थी | वहीं, कंगना रनौत को दो फिल्मों के लिए बेस्ट एक्ट्रेस के अवॉर्ड से सम्मानित किया गया | 67वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के निर्णायक मंडल (ज्युरी) ने 22 मार्च 2021 को साल 2019 के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा की थी | आज सुबह 11 बजे विज्ञान भवन में पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया |
कंगना को ‘मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी‘ और फिल्म ‘पंगा‘ के लिए ये पुरस्कार दिया गया | इसके अलावा, अक्षय कुमार की फिल्म ‘केसरी‘ के गाने ‘तेरी मिट्टी‘ के लिए बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर का अवॉर्ड बी प्राक को मिला | सुपरस्टार रजनीकांत को दादा साहब फाल्के पुरस्कार से नवाजा जाएगा | वहीं, मनोज वाजपेयी को ‘भोंसले‘ और धनुष को ‘असुरन‘ के लिए बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड जॉइंट तौर पर दिया गया है |
विजेताओं की पूरी लिस्ट:-
कैटेगरी
विजेता
अन्य
बेस्ट फीचर फिल्म (हिंदी)
छिछोरे
डायरेक्टर- नितेश तिवारी
बेस्ट एक्ट्रेस
कंगना रनोट
फिल्म- मणिकर्णिका, पंगा
बेस्ट एक्टर
मनोज बाजपेयी, धनुष (तेलुगु)
फिल्में क्रमशः भोंसले, असुरन (तेलुगु)
बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर
विजय सेतुपति
फिल्म- सुपर डीलक्स
बेस्ट सिंगर
बी प्राक
गीत- तेरी मिटटी (केसरी)
बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस
पल्लवी जोशी
फिल्म- द ताशकंद फाइल्स
बेस्ट एडिटिंग
फिल्म- जर्सी (तेलुगु)
बेस्ट ऑटोबायोग्राफी
लेवदुह
खासी
बेस्ट स्क्रीनप्ले अडॉप्टेड
गुमनामी
बेस्ट सिनेमैटोग्राफी
जलीकट्टू
बेस्ट फीमेल सिंगर
सावनी रविन्द्र
गीत- बार्दो (मराठी)
बेस्ट फिल्म क्रिटिक
सोहिनी चट्टोपाध्याय
मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट
सिक्किम
बेस्ट नॉन फीचर फिल्म
वाइल्ड कर्नाटक
बेस्ट डायरेक्शन
संजय पूरण सिंह चौहान
फिल्म- बहत्तर हूरें
बेस्ट चिल्ड्रेन फिल्म
कस्तूरी (हिंदी)
बेस्ट डायलॉग्स राइटर
फिल्म- द ताशकंद फाइल्स
बेस्ट ओरिजिनल स्क्रीनप्ले
फिल्म- ज्येष्ठोपुत्री (बांग्ला)
बेस्ट कोरियोग्राफी
फिल्म- महर्षि (तेलुगु)
बेस्ट स्टंट
फिल्म- अवाने श्रीमाननारायण (कन्नड़)
बेस्ट बुक ऑन सिनेमा
अ गांधियन अफेयर : इंडियाज क्यूरियस पोर्ट्रेयल ऑफ लव इन सिनेमा
ये अवॉर्ड्स एक साल की देरी से घोषित हुए हैं, क्योंकि पिछले साल कोरोना महामारी के चलते ऐसा नहीं हो सका था | ये अवॉर्ड्स केंद्र सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले फिल्म फेस्टिवल निदेशालय द्वारा दिए जाते हैं |
अलग-अलग भाषाओं में इन फिल्मों को मिले बेस्ट फिल्मों के अवॉर्ड:-
उत्तर प्रदेश सरकार ने एक नई उत्तरप्रदेश फ्री स्कूल यूनिफॉर्म योजना 2021 (UP Free School Uniform Scheme 2021) शुरू करने का फैसला किया है | फ्री स्कूल ड्रेस योजना शुरू करने का यह फैसला 22 अक्टूबर 2021 को हुई कैबिनेट की बैठक में लिया गया है | सीएम योगी आदित्यनाथ ने कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता की जिसमें वर्दी, स्वेटर, जूते और स्कूल बैग की खरीद के लिए नकद सहायता हस्तांतरित करने का निर्णय लिया गया | यूपी फ्री स्कूल शिक्षा योजना (UP Free School Uniform Scheme) के तहत राशि वास्तविक छात्रों के माता-पिता के बैंक खातों में सीधे जमा की जा रही है | यूपी मुफ्त स्कूल बैग/वर्दी योजना में सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा 1 से 8 तक के छात्र पात्र होंगे |
यूपी फ्री स्कूल यूनिफॉर्म स्कीम 2021 (UP Free School Uniform Scheme 2021) राज्य सरकार की एक नई पहल है, जहां सरकार लाभार्थियों को वर्दी, स्वेटर, स्कूल बैग, जूते और मोज़ा खरीदने में सक्षम बनाने के लिए धन हस्तांतरित करेंगे | यूपी नि:शुल्क स्कूल बैग/वर्दी/स्वेटर/जूता योजना के तहत पहली से आठवीं कक्षा के छात्रों के अभिभावकों के खाते में राशि जमा की जाएगी | यूपी फ्री स्कूल स्कीम के पैसे का भुगतान लाभार्थी छात्रों के माता-पिता को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) मोड के माध्यम से यानी सीधे उनके बैंक खातों में किया जाएगा |
UP Free School Uniform Scheme के लिए पात्रता मानदंड:-
आवेदक उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना चाहिए | वह / वह एक छात्र होना चाहिए | आवेदक को यूपी राज्य के किसी भी सरकारी या सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल में कक्षा 1 से 8वीं में पढ़ना चाहिए |
UP Free School Uniform Scheme के लाभ:-
यूपी फ्री स्कूल यूनिफॉर्म योजना से स्कूल यूनिफॉर्म, स्वेटर, जूते और स्कूल बैग के लिए सहायता वितरण की पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित होगी | यह स्थानीय स्तर पर स्कूल ड्रेस, स्वेटर, जूते, बैग के लिए बाजार विकसित करेगा | यूपी नि:शुल्क वर्दी/स्वेटर/जूते/स्कूल बैग योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर पैदा होंगे | छात्रों को समय पर समुचित सुविधाएं उपलब्ध होने से उनकी उपस्थिति में सुधार होगा। यूपी फ्री स्कूल ड्रेस योजना लागू होने से पढ़ाई-लिखाई का माहौल भी सुधरेगा |
इस व्यवस्था से राज्य, जिला एवं प्रखंड स्तर के प्रशासनिक अधिकारी उपार्जन प्रक्रिया से मुक्त होकर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार पर अधिक ध्यान देने की स्थिति में होंगे | वर्तमान में, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कक्षा 1 से 8 के छात्रों को मुफ्त वर्दी प्रदान की जाती है। जो विभिन्न प्रक्रियाओं के माध्यम से व्यवस्थित होते हैं | इससे वर्दी की समय पर आपूर्ति एक चुनौती बनी हुई है और कभी-कभी गुणवत्ता को लेकर शिकायतें भी प्राप्त होती हैं |
Overview of UP Free School Dress Scheme:-
वर्दी, जूते, मोजे, स्वेटर और स्कूल बैग के लिए सरकारी प्राथमिक और सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों के माता-पिता को सीधे उनके खातों में पैसा दिया जाएगा | इस पर लगभग 1,800 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे | वर्तमान में छात्रों को गणवेश, जूते, स्कूल बैग स्कूलों के माध्यम से निःशुल्क उपलब्ध कराये जाते हैं | योजना को आगे बढ़ाने के लिए, 1.6 करोड़ छात्रों के माता-पिता को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से लगभग 1,800 करोड़ रुपये की कुल राशि प्रदान की जाएगी |
Karva Chauth Katha, सुहागिन महिलाओं के लिए साल का सबसे बड़ा पर्व करवा चौथ व्रत है | इस दिन का वे पूरे साल इंतजार करती हैं | करवा चौथ व्रत का हिंदू धर्म में भी विशेष महत्व है | इस व्रत को पति की लंबी उम्र की कामना से रखा जाता है |
कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करवा चौथ का व्रत करने का विधान है | सौभाग्यवती महिलाएं इस दिन अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं | इस व्रत की शुरुआत सरगी से होती है | इस दिन घर की बड़ी महिलाएं अपनी बहू को सरगी, साड़ी सुबह सवेरे देती हैं | सुबह चार बजे तक सरगी खाकर व्रत को शुरू किया जाता है, सरगी में फैनी, मट्ठी आदि होती हैं |
हिंदी पंचांग के अनुसार करवा चौथ का व्रत हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है | पंचांग के मुताबिक साल 2021 में चतुर्थी तिथि 24 अक्टूबर दिन रविवार को प्रातः काल तड़के 03 बजकर 01 मिनट पर प्रारंभ होगी | यह चतुर्थी तिथि अगले दिन 25 अक्टूबर दिन सोमवार को सुबह 05 बजकर 43 मिनट तक रहेगी | इसके बाद पंचमी तिथि शुरू होगी | व्रत रखने के नियमानुसार करवा चौथ का व्रत चन्द्रोदयव्यापिनी मुहूर्त में रखा जाना चाहिए | पंचांग के अनुसार, चन्द्रोदयव्यापिनी मुहूर्त 24 अक्टूबर को प्राप्त हो रही है | इसलिए अपना संशय दूर करते हुए करवा चौथ का व्रत 24 अक्टूबर को रखें |
करवा चौथ व्रत सुहाहिन महिलाओं के लिए बहुत महत्व रखता है | करवा चौथ के दिन महिलाएं पूरे दिन उपवास रखती हैं और रात को चांद के निकलने का इंतजार करती हैं | चांद के निकलने पर पूजा और जल देकर अपने पति के हाथों से जल ग्रहण करती हैं | करवा चौथ में आसपास की सभी सुहागिन महिलाएं एक जगह पर एकत्रित होकर करवा माता की पूजा के साथ कथा सुनती हैं | करवा चौथ पूजा में कुछ चीजों का विशेष महत्व होता है |
करवा चौथ का शुभ मुहूर्त:-
24 अक्टूबर, रविवार को सुबह 03.01 बजे से चतुर्थी तिथि शुरू होगी जो 25 अक्टूबर 2021 को सुबह 05.43 बजे तक रहेगी | इस दौरान करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त 24 अक्टूबर को शाम 5.43 से 6.59 तक रहेगा | इस साल करवा चौथ पर एक विशेष संयोग बन रहा है जो कि बेहद शुभफलदायी है | इस बार करवा चौथ का चांद रोहिणी नक्षत्र में निकलेगा, जो कि बेहद शुभ माना जाता है | चंद्र दर्शन रात को करीब 08.07 पर हो सकता है | इसके बाद ही व्रती महिलाओं को पारण करना चाहिए |
करवा चौथ का धार्मिक महत्व:-
धार्मिक मान्यता के अनुसार, करवा चौथ के दिन इस दिन मां पार्वती, भगवान शिव कार्तिकेय और गणेश जी का पूजन किया जाता है। इस व्रत में मां पार्वती से सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। इस दिन करवे में जल भरकर कथा सुनने का विधान है। महिलाएं सुबह सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखती हैं और चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोलती हैं |
करवा चौथ व्रत की पूजन विधि:- Karwa Chauth Puja Vidhi
सौभाग्यवती (सुहागिन) सुबह सूयोर्दय से पहले स्नान आदि करके पूजा घर की सफाई करें फिर सास द्वारा दिया हुआ भोजन करें और भगवान की पूजा करके निर्जला व्रत का संकल्प लें,यह व्रत उनको संध्या में सूरज अस्त होने के बाद चन्द्रमा के दर्शन करके ही खोलना चाहिए और बीच में जल भी नहीं पीना चाहिए।
संध्या के समय एक मिट्टी की वेदी पर सभी देवताओं की स्थापना करें। इसमें 10 से 13 करवे (करवा चौथ के लिए खास मिट्टी के कलश) रखें,पूजन-सामग्री में धूप, दीप, चन्दन, रोली, सिन्दूर आदि थाली में रखें। दीपक में पयार्प्त मात्रा में घी रहना चाहिए, जिससे वह पूरे समय तक जलता रहे,चन्द्रमा निकलने से लगभग एक घंटे पहले पूजा शुरू की जानी चाहिए |
NHM UP Staff Nurse Vacancy 2021 (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तर प्रदेश (एनएचएम, यूपी):
प्रिय साथियो http://enterhindi.com/ में आप का स्वागत है आज हम आप के साथ एक नयी जानकारी साझा कर रहे है जो कि उत्तर प्रदेश (UP): राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन स्टाफ नर्स भर्ती 2021 से सम्बंधित है राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तर प्रदेश के द्वारा UPNHM Staff Nurse Recruitment के लिए नोटिफिकेशन जारी किया गया है।
जो भी उम्मीदवार सरकारी नौकरी पाना चाहते है यह उनके लिए सुनहरा अवसर है इसके साथ ही UPNHM Staff Nurse Recruitment Notification 2021 की पीडीऍफ़ भी जारी कर दी गयी है | इस सरकारी नौकरी के लिए योग्य और इच्छुक उम्मीदवार 09 November 2021 तक अंतिम तिथि से पहले ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। उम्मीदवार UPNHM Staff Nurse Recruitment 2021 in Hindi की तिथियाँ, योग्यता, आयु सीमा, फीस, ऑनलाइन आवेदन और अन्य जानकारी प्राप्त करने के लिए इस आर्टिकल को अंत तक पढ़ें।
उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन स्टाफ नर्स भर्ती 2021 के लिए महत्वपूर्ण तिथियां :
ऑनलाइन आवेदन प्रारम्भ तिथि
21/10/2021
ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि
10/11/2021
परीक्षा तिथि
जल्द ही अधिसूचित
प्रवेश पत्र की उपलब्धता तिथि
जल्द ही अधिसूचित
उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन स्टाफ नर्स भर्ती 2021 के लिए रिक्तिया (POST) :
UPNHM Staff Nurse Jobs 2021 Vacancy Details Total : 2445 Post
Post Name
Total Post
UP NHM Staff Nurse 2021 Eligibility
NHM UP Staff Nurse
2445
* B.SC Nursing OR Diploma / Certificate in Nursing. * Registration in State Nursing Counsel.
NHM UP Staff Nurse 2021 Job Program Wise Vacancy Details
Program
Position
Total Post
CHILD HEALTH
STAFF NURSE-(SNCU/KMC)
189
CHILD HEALTH
STAFF NURSE-NBSU
320
CHILD HEALTH
STAFF NURSE-NRC
54
CHILD HEALTH
STAFF NURSE-SNCU
36
Community Process
STAFF NURSE – MHCP
500
Maternal Health
STAFF NURSE
900
National Program
STAFF NURSE
384
NUHM
STAFF NURSE/UPHC
34
NUHM
STAFF NURSE/UPHC
10
NUHM
STAFF NURSE/UPHC
18
उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन स्टाफ नर्स भर्ती 2021 के लिए आवेदन शुल्क :
सामान्य/ओबीसी/ईडब्ल्यूएस: 0/-
एससी / एसटी / पीएच: 0/-
ऑनलाइन पंजीकृत सभी उम्मीदवारों के लिए कोई आवेदन शुल्क नहीं।
उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन स्टाफ नर्स भर्ती 2021 के लिए आयु सीमा :
न्यूनतम आयु
18 वर्ष
अधिकतम आयु
40 वर्ष
यूपी राज्य स्वास्थ्य एनएचएम स्टाफ नर्स 2021 भर्ती नियमों के अनुसार आयु में छूट अतिरिक्त।
उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन स्टाफ नर्स भर्ती 2021 के लिए चयन प्रक्रिया :
आवेदकों का चयन इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन स्टाफ नर्स भर्ती 2021 के लिए आवेदन कैसे करे :
उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एनएचएम, यूपी स्टाफ नर्स संपर्क भर्ती 2021 के लिए नए आवेदन के लिए प्रक्रिया करें उम्मीदवार 20/10/2021 से 09/11/2021 के बीच आवेदन कर सकते हैं।
उम्मीदवार उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग में नवीनतम भर्ती आवेदन पत्र को लागू करने से पहले अधिसूचना पढ़ें। 2400+ पोस्ट स्टाफ नर्स भर्ती 2021।
कृपया सभी दस्तावेजों की जांच करें और एकत्र करें – पात्रता, आईडी प्रमाण, पता विवरण, मूल विवरण।
कृपया भर्ती फॉर्म से संबंधित स्कैन दस्तावेज़ तैयार करें – फोटो, साइन, आईडी प्रूफ, आदि।
आवेदन पत्र जमा करने से पहले पूर्वावलोकन और सभी कॉलम को ध्यान से देखना चाहिए।
यदि उम्मीदवार को आवेदन शुल्क का भुगतान करना आवश्यक है तो जमा करना होगा। यदि आपके पास आवश्यक आवेदन शुल्क नहीं है तो आपका फॉर्म पूरा नहीं हुआ है।
अंतिम जमा किए गए फॉर्म का प्रिंट आउट लें
उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन स्टाफ नर्स भर्ती 2021 के लिए ऑनलाइन आवेदन :