1 नवम्बर 2021: मध्यप्रदेश मना रहा है 66वां स्थापना दिवस

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मध्यप्रदेश स्थापना दिवस:-

आज प्रदेश का 66वां मध्यप्रदेश स्थापना दिवस दिवस है | आज ही के दिन 1 नवम्बर 1956 को यह अस्तित्व में आया | मध्य प्रदेश कभी मध्य भारत में आता था | लेकिन अब स्वयं एक राज्य के रूप में पहचाना जाने लगा है | जिसकी राजधानी भोपाल है | इस दौरान पूरे प्रदेश में हर जगह अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे |

इस दौरान राजधानी भोपाल के ऐतिहासिक लाल परेड मैदान में होने वाले राज्य स्तरीय समारोह के पहले दिन मुंबई के अमित त्रिवेदी के गानों से शाम सजेगी | साथ ही नई दिल्ली के गुलाम साबिर निजामी बन्धुओं की सूफी कव्वाली भी होगी | वहीं प्रदेशभर में अलग-अलग अंदाज में कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा | साथ ही, प्रदेश की कई सरकारी और गैर सरकारी इमारतों को इस दिन के जश्न के रूप में दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है |

मध्य प्रदेश अस्तित्व में क्यों आया:-

मध्यभारत प्रांत का गठन 28 मई 1948 को किया गया था, जिसमें ग्वालियर और मालवा का क्षेत्र शामिल था | मध्यभारत प्रांत के पहले राजप्रमुख ग्वालियर रियासत के महाराजा जीवाजी राव सिंधिया थे | प्रांत की दो राजधानियां थीं ग्वालियर को शीत राजधानी तो वहीं इंदौर को ग्रीष्म राजधानी का रूतबा हासिल था |

भारत की आजादी के बाद 26 जनवरी 1950 को कुछ चुनिंदा इलाकों को छोड़कर देशभर में संविधान लागू हुआ | इसके बाद सन् 1951-1952 में देश में पहली बार आम चुनाव कराए गए | जिसके कारण संसद और विधान मंडल कार्यशील हुए | प्रशासन की दृष्टि से इन्हें श्रेणियों में विभाजित किया गया | सन् 1956 में राज्यों के पुर्नगठन के फलस्वरूप 1 नवंबर, 1956 को नए राज्य के रूप में मध्य प्रदेश की स्थापना की गई | इस राज्य का पुर्नगठन भाषीय आधार पर किया गया |

इसके घटक राज्य मध्य प्रदेश, मध्य भारत, विन्ध्य प्रदेश एवं भोपाल थे जिनकी अपनी विधानसभाएं थीं | इस राज्य का निर्माण तत्कालीन सीपी एंड बरार, मध्य भारत, विंध्य प्रदेश और भोपाल राज्य को मिलाकर हुआ | डॉ. पटटाभि सीतारामैया मध्यप्रदेश के पहले राज्यपाल हुए | जबकि पहले मुख्यमंत्री के रूप में पंडित रविशंकर शुक्ल ने शपथ ली थी | वहीं पंडित कुंजी लाल दुबे को मध्यप्रदेश का पहला अध्यक्ष बनाया गया |

मध्यप्रदेश स्थापना दिवस

भोपाल को ही राजधानी क्यों चुना गया:-

1 नवंबर 1956 को प्रदेश के गठन के साथ ही इसकी राजधानी और विधानसभा का चयन भी कर लिया गया | भोपाल को राजधानी बनाए जाने में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. शंकर दयाल शर्मा, भोपाल के आखिरी नवाब हमीदुल्ला खान और पं. जवाहर लाल नेहरू की महत्वपूर्ण भूमिका रही | और लंबी कशमकश के बाद आखिरकार देश-प्रदेश का दिल कहे जाने वाले भोपाल शहर को प्रदेश की राजधानी के रूप में चुन लिया गया |

उस समय भोपाल को जिला घोषित नहीं किया गया था | इसे साल 1972 में जिला घोषित किया गया | इससे पहले भोपाल सीहोर जिले में आता था | मध्य प्रदेश के गठन के समय प्रदेश में कुल 43 जिले ही बनाए गए थे | लेकिन, वर्तमान में बढ़ती आबादी के कारण व्यवस्थाओं को सुचारू ढंग से चलाने के लिए अब तक मध्य प्रदेश में कुल 52 जिले बनाए जा चुके हैं |

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