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NAS राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वे दिनांक 12 /11 /2021 को शाला संचालन के सम्बन्ध में

NAS राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वे- लोक शिक्षण संचालनालय मध्य प्रदेश के पत्र क्रमांक /NAS-21 /सर्वे /2021/2822 भोपाल दिनांक 08/11/2021 के आदेशानुसार राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वे-21 दिनांक 12 नवम्बर को नियत है अतः समस्त सैंपल (शासकीय, अशासकीय, अनुदान प्राप्त तथा CBSE द्वारा संचालित शालाओ के शाला प्रमुखों को यह निदेशित किया गया है की वे दिनांक 12 .11 .21 को निम्नानुसार कार्यवाही अनिवार्यतः सुनिश्चित करेंगे |

  • दिनांक 12 .11 .21 को विद्यालय आवश्यक रूप से खुले रहे|
  • विद्यालय प्रातः 7.00 बजे खुलेंगे |
  • शाला प्रमिख प्रातः 7.00 बजे से आवश्यक स्टाफ के साथ उपस्थित रहेंगे तथा सर्वे टीम को आवश्यक सहयोग प्रदान करेंगे |
  • शेष समस्त स्टाफ भी 9.00 बजे से विद्यालय में अनिवार्यतः उपस्थित रहेंगे
  • जिस ग्रेड का सर्वे हो रहा है, उस ग्रेड के समस्त विद्यार्थी विद्यालय में उपस्थित रहे| इस हेतु उन्हें पूर्व से सूचित किया जाये|
  • जिस ग्रेड (3/5/8/10) के विद्यार्थयों का सर्वे हो रहा है वे सर्वे दिवस को आवश्यक रूप से 9.30 बजे तक शाला में उपस्थित हो जाये |
  • सैंपल शाला में इस दिन अन्य कोई गतिविधिया जैसे खेलकूद, सांस्कृतिक कार्यक्रम वार्षिक उत्सव आदि का आयोजन न किया जाये |

NAS Exam 2021 की तैयारी की प्रैक्टिस हेतु रूपरेखा

NAS EXAM 2021: FI व Observers अपना Appointment Letter कैसे डाउनलोड करे

NAS राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वे सर्वे से सम्बंधित पीडीऍफ़ नीचे दी गयी लिंक से डाउनलोड कर सकते है

Procedure for handling exceptional situations – NAS 2021 – 08/11/2021

Urgent Notification from Ministry of Education, GoI – 05/11/2021

Appointment of Independent Observers, DO Letter from Ministry of Education, GoI – 05/11/2021

Blank LOA for Observer and FI for Local Deployment – 07/11/2021

Sampling Design Note – NAS 2021

Technical Note on Assessment Framework – NAS 2021

यह भी पढ़े :

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NAS EXAM 2021: CBSE -National Achievement Survey (NAS 2021)- Appointment of Observers

NAS (National Achievement Survey) 2021 के संचालन हेतु अभ्यास प्रश्न बैंक, प्रैटिक्स टेस्ट पेपर,…

NAS:राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वे (NAS )2021 की फ्रेमवर्क

MP EDUCATION: NAS (National Achievement Survey)

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CG NHM Chhattisgarh Community Health Officer CHO Online Form 2021

CG NHM एनएचएम छत्तीसगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी सीएचओ ऑनलाइन फॉर्म 2021 :

  • CG NHMराष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, छत्तीसगढ़ ने 2700 पदों के लिए सीएचओ भर्ती का विज्ञापन जारी किया है। भर्ती की प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन होगी, इस भर्ती के इच्छुक जो भी योग्य उम्मीदवार इस भर्ती में रुचि रखते हैं, वे 05 नवंबर 2021 से 25 नवंबर 2021 को शाम 5 बजे तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। छत्तीसगढ़ राज्य सीएचओ भर्ती इस भर्ती में चयनित होने वाले उम्मीदवारों के लिए संभाग के अनुसार होगी. 15000/- से 16500/- प्रतिमाह दिया जाएगा। अन्य जानकारी जैसे चयन प्रक्रिया / पाठ्यक्रम / वेतनमान संबंधी विवरण विज्ञापन में उपलब्ध हैं।

Important Dates for CG NHM Chhattisgarh Community Health Officer CHO Online Form 2021:

ऑनलाइन आवेदन शुरू:05/11/2021
ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि:25/11/2021 केवल शाम 05 बजे तक
भुगतान परीक्षा शुल्क अंतिम तिथि25/11/2021
परीक्षा तिथिजल्द ही अधिसूचित
प्रवेश पत्र उपलब्धजल्द ही अधिसूचित

Application Fee for NHM Chhattisgarh Community Health Officer CHO Online Form 2021:

सामान्य उम्मीदवार 300/-
ओबीसी उम्मीदवार 200/-
एससी / एसटी / पीएच उम्मीदवार 100/-
सभी श्रेणी महिला उम्मीदवार 100/-
परीक्षा शुल्क का भुगतानकेवल डेबिट कार्ड / क्रेडिट कार्ड / नेट बैंकिंग के माध्यम से करें।

एनएचएम सीजी सीएचओ 2021 आयु सीमा 01/01/2021 के अनुसार :

न्यूनतम आयु21 वर्ष
अधिकतम आयु35 वर्ष
आयु में छूट अतिरिक्तछत्तीसगढ़ राज्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य एनएचएम सीजी भर्ती नियमों के अनुसार

Chhattisgarh CHO NHM Vacancy Details Total : 2700 Post

Post NameTotalNHM CHO Chhattisgarh Eligibility
CG NHM Community Health Mission CHO2700* Bachelor Degree B.Sc Nursing / B.SC Nursing Integrated Course.Registration in State Nursing Counsel.
* Registration in State Nursing Counsel.

Division Wise Chhattisgarh NHM Vacancy Details 2021:

DivisionGeneralSTSCOBCTotal
Raipur248766363500
Bilaspur27715810788700
Durg246745260480
Bastar723021463500
Sarguja1222572366520
Grand Total9658672593402700

How to Chhattisgarh Fill NHM CHO Online Form 2021:

  • छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एनएचएम, सीजी सीएचओ भर्ती 2021 के लिए नए आवेदन के लिए उम्मीदवार 05/11/2021 से 25/11/2021 के बीच आवेदन कर सकते हैं।
  • छत्तीसगढ़ नवीनतम सरकार में भर्ती आवेदन पत्र को लागू करने से पहले उम्मीदवार अधिसूचना पढ़ें
  • कृपया सभी दस्तावेजों की जांच करें और एकत्र करें – पात्रता, आईडी प्रमाण, पता विवरण, मूल विवरण।
  • कृपया भर्ती फॉर्म से संबंधित स्कैन दस्तावेज़ तैयार करें – फोटो, साइन, आईडी प्रूफ, आदि।
  • आवेदन पत्र जमा करने से पहले पूर्वावलोकन और सभी कॉलम को ध्यान से देखना चाहिए।
  • यदि उम्मीदवार को आवेदन शुल्क का भुगतान करना आवश्यक है तो जमा करना होगा। यदि आपके पास आवश्यक आवेदन शुल्क जमा नहीं किया है तो आपका फॉर्म पूरा नहीं हुआ है।
  • अंतिम जमा किए गए फॉर्म का प्रिंट आउट लें।

Apply Online Form :

Apply OnlineClick Here
Download NotificationClick Here
CG NHM Official WebsiteClick Here

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Google Doodle Today: कौन थीं डॉक्टर कमल रणदिवे, क्यों बनाया है गूगल ने आज उनका डूडल

Google Doodle Dr Kamal Ranadive: Google आज डूडल बनाकर भारतीय सेल जीवविज्ञानी डॉ कमल रणदिवे का 104 वां जन्मदिन मना रहा है। रणदिवे को उनके अभूतपूर्व कैंसर अनुसंधान और विज्ञान और शिक्षा के माध्यम से एक अधिक न्यायसंगत समाज बनाने के लिए जाना जाता है। आज का डूडल भारत के गेस्ट आर्टिस्ट इब्राहिम रयिन्ताकथ द्वारा बनाया गया है।

कमल समरथ, जिन्हें डॉक्टर कमल रणदिवे के नाम से जाना जाता है, का जन्म आज ही के दिन 1917 में पुणे, भारत में हुआ था। उनके पिता ने मेडिकल एजुकेशन के लिए उन्हें प्ररित किया। कमल के पिता दिनकर पुणे के फर्गसन कॉलेज में एक जीवविज्ञान के प्रोफेसर हुआ करते थे। उनका उद्देश्य था कि घर के सभी बच्चों को अच्छी से अच्छी शिक्षा मिले खासकर बेटियों को। कमल अपने पिता की उमीदों पर एकदम खरी उतरीं। उन्होंने जीवन की हर परीक्षा अच्छे अंकों से पास की। कमल हमेशा कुछ नया सीखती और उसमें अच्छा कर के दिखातीं। वह भारतीय महिला वैज्ञानिक संघ (IWSA) की प्रमुख संस्थापक सदस्य भी थीं। डॉ कमल जयसिंह रणदिवे को पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया था।

1917 में जन्मी थी डॉ. कमल रणदिवे :

कमल रणदिवे का मूल नाम कमल समरथ था, लेकिन उन्हें डॉ. कमल रणदिवे के नाम से भी जाना जाता था। आज ही के दिन 8 नवंबर 1917 में पुणे में डॉ. कमल रणदिवे का जन्म हुआ था। डॉ. कमल के पिता ने मेडिकल एजुकेशन के लिए उन्हें प्रेरित किया। कमल के पिता दिनकर पुणे के फर्गसन कॉलेज में एक जीव विज्ञान के प्रोफेसर हुआ करते थे।

रिसर्चर्स ने की थी पुष्टि:

डॉ. कमल रणदिवे ने कैंसर पर कई शोध किए। स्तन कैंसर की घटना और आनुवंशिकता के बीच संबंध का प्रस्ताव रखने वाली वह पहली शख्स थीं। बाद के वर्षों में भी इसकी पुष्टि कई शोधकर्ताओं ने की थी।

डॉ. कमल रणदिवे ने स्थापित की थी पहली टिशू कल्चर लैब:

भारतीय कैंसर अनुसंधान केंद्र (ICRC) में एक शोधकर्ता के रूप में काम करते हुए डॉ. कमल रणदिवे ने कोशिका विज्ञान, कोशिकाओं के अध्ययन में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। बाल्टीमोर, मैरीलैंड, यूएसए में जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय में फेलोशिप के बाद वह मुंबई लौट आई और फिर देश में पहली टिशू कल्चर लैब की स्थापना 1949 में डॉ. कमल रणदिवे ने ही की थी।

पिता ने बेटी डॉ. कमल रणदिवे को किया किया प्रेरित:

डॉ. कमल रणदिवे के पिता का उद्देश्य था कि घर के सभी बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले, विशेषकर बेटियों को। ऐसे में कमल भी अपने पिता की उम्मीदों पर खरी उतरी और हर परीक्षा अच्छे अंकों से पास की। कमल हमेशा कुछ नया सीखती और उसमें अच्छा करके दिखातीं। डॉ. कमल रणदिवे भारतीय महिला वैज्ञानिक संघ (IWSA) की प्रमुख संस्थापक सदस्य भी थीं। डॉ कमल जयसिंह रणदिवे को पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया था।

मेडिकल की जगह बायलॉजी:

कमल के पिता चाहते थे कि वे चिकित्सा के क्षेत्र में पढ़ाई करें और उनकी शादी एक डॉक्टर से हो, लेकिन कमल ने फर्ग्यूसन कॉलेज में ही जीवविज्ञान के लिए बीएससी की पढाई डिस्टिंक्शन के साथ पूरी की. इसके बाद उन्होंने पूणे के कृषि कॉलेज में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने जेटी रणदिवे से विवाह किया जो पेशे से गणितज्ञ थे जिन्होंने उनकी पोस्ट ग्रोजुएशन की पढ़ाई में बहुत सहायता की थी.

बचपन से पढ़ाई में तेज :

डॉ रणदिवे का जन्म 8 नवंबर 1917 को पुणे में हुआ था. उनके पिता दिनकर दत्तात्रेय समर्थ बायोलॉजिस्ट थे और पूणे के फर्ग्यूसन कॉलेज में पढ़ाया करते थे. पिता ने कमल की पढ़ाई पर विशेष ध्यान दिया और कमल खुद पढ़ाई में बहुत कुशाग्र थीं. उनकी आरंभिक शिक्षा पुणे में हुजूरपागा के गर्ल्स स्कूल में हुई थी.

IWSA के भारत में 11 चेप्टर :

IWSA के अब भारत में 11 चेप्टर हैं और यह विज्ञान में महिलाओं के लिए छात्रवृत्ति और चाइल्डकैयर विकल्प प्रदान करता है। स्वास्थ्य न्याय और शिक्षा के प्रति डॉ. रणदिवे का समर्पण उनके छात्रों के लिए प्रभावशाली है जो आज वैज्ञानिकों के रूप में काम करते हैं।

इन्होंने की थी पहली टिशू कल्चर लैब की स्थापना:

1949 में, उन्होंने भारतीय कैंसर अनुसंधान केंद्र (ICRC) में एक शोधकर्ता के रूप में काम करते हुए, कोशिका विज्ञान, कोशिकाओं के अध्ययन में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। बाल्टीमोर, मैरीलैंड, यूएसए में जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय में फेलोशिप के बाद, वह मुंबई (तब बॉम्बे) और आईसीआरसी लौट आई, जहां उन्होंने देश की पहली टिशू कल्चर लैब की स्थापना की।

ऐसा करने वाली पहली महिला थीं :

कमल रणदिवे ने शुरुआती दौर में कैंसर पर कई शोध किए। वास्तव में, स्तन कैंसर की घटना और आनुवंशिकता के बीच संबंध का प्रस्ताव रखने वाली वह पहली शख्स थीं। इस बात की पुष्टि बाद में कई शोधकर्ताओं ने भी की।

Padma Award 2020: राष्ट्रपति ने पद्म अवॉर्ड विजेताओं को किया सम्मानित, देखें पूरी सूची

Padma Award 2020:-

देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों में से एक पद्म पुरस्कार तीन श्रेणियों, पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री में प्रदान किया जाता है | ये पुरस्कार विभिन्न विषयों/गतिविधियों के क्षेत्रों, अर्थात- कला, सामाजिक कार्य, सार्वजनिक मामले, विज्ञान एवं इंजीनियरिंग, व्यापार एवं उद्योग, चिकित्सा, साहित्य और शिक्षा, खेल, नागरिक सेवा आदि में प्रदान किए जाते हैं | ‘पद्म विभूषण’ असाधारण और विशिष्ट सेवा के लिए, ‘पद्म भूषण’ उच्च क्रम की विशिष्ट सेवा के लिए और ‘पद्मश्री’ किसी क्षेत्र में विशिष्ट सेवा के लिए प्रदान किए जाते हैं। यह पुरस्कार हर साल गणतंत्र दिवस के अवसर पर घोषित किए जाते हैं |

राष्‍ट्रपति द्वारा ये पुरस्कार राष्ट्रपति भवन में आमतौर पर हर साल मार्च/अप्रैल के आसपास आयोजित एक समारोह में प्रदान किए जाते है | इस वर्ष राष्ट्रपति ने 4 युगल मामलों (एक युगल मामलों का मतलब एक पुरस्‍कार) सहित नीचे दी गई सूची के अनुसार 141 पद्म पुरस्कार प्रदान करने को मंजूरी दी है | इस सूची में 7 पद्म विभूषण, 16 पद्म भूषण और 118 पद्मश्री पुरस्कार शामिल हैं | पुरस्कार पाने वालों में 33 महिलाएं हैं | इस सूची में विदेशियों की श्रेणी के 18 व्यक्तियों/एनआरआई/पीआईओ/ओसीआई और 12 मरणोपरांत पुरस्कार पाने वाले भी शामिल हैं |

पद्मश्री 2020 अवॉर्ड समारोह आज राष्ट्रपति भवन में हो रहा है | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली और सुषण स्वराज को मरणोपरांत पद्म विभूषण दिया गया | एक्ट्रेस कंगना रनोट और सिंगर अदनान सामी को पद्मश्री से सम्मानित किया किया |

पद्म विभूषण (7)

क्रम संख्‍यानामक्षेत्रराज्‍य/देश
1श्री जॉर्ज फर्नांडिज (मरणोपरांत)राजनीतिबिहार
2श्री अरुण जेटली (मरणोपरांत)राजनीतिदिल्‍ली
3श्री अनिरुद्ध जगन्‍नाथ जीसीएसकेराजनीतिमॉरीशस
4श्रीमती एम सी मैरीकॉमखेलमणिपुर
5श्री छन्‍नू लाल मिश्रकलाउत्‍तर प्रदेश
6श्रीमती सुषमा स्‍वराज (मरणोपरांत)राजनीतिदिल्‍ली
7श्री विश्‍वेशतीर्थ स्‍वामीजी श्री पजवरा अधोखज मठ उडुपी (मरणोपरांत)अन्‍य-आध्‍यात्मिकताकर्नाटक

पद्म भूषण (16)

क्रम संख्‍यानामक्षेत्रराज्‍य/देश
8श्री एम. मुमताज अली (श्री एम)अन्‍य-आध्‍यात्मिकताकेरल
9श्री सैय्यद मुअज्‍़ज़ीम अली (मरणोपरांत)राजनीतिबांग्‍लादेश
10श्री मुज़फ्फर हुसैन बेगराजनीतिजम्‍मू एवं कश्‍मीर
11श्री अजॉय चक्रवर्तीकलापश्चिम बंगाल
12श्री मनोज दाससाहित्‍य एवं शिक्षापुदुचेरी
13श्री बालकृष्‍ण दोशीअन्‍य वास्‍तुकलागुजरात
14सुश्री कृष्‍णम्‍मल जगन्‍नाथनसामाजिक कार्यतमिलनाडु
15श्री एस.सी. जमीरराजनीतिनगालैंड
16श्री अनिल प्रकाश जोशीसामाजिक कार्यउत्‍तराखंड
17डा. त्‍सेरिंग लेंडोलचिकित्‍सालद्दाख
18श्री आनन्‍द महिन्‍द्राव्‍यापार एवं उद्योगमहाराष्‍ट्र
19श्री नीलकण्‍ठ रामकृष्‍ण माधव मेनन (मरणोपरांत)राजनीतिकेरल
20श्री मनोहर गोपालकृष्‍ण प्रभु पर्रिकर (मरणोपरांत)राजनीतिगोवा
21प्रो. जगदीश सेठसाहित्‍य एवं शिक्षाअमेरिका
22सुश्री पी वी सिंधूखेलतेलंगाना
23श्री वेणु श्रीनिवासनव्‍यापार एवं उद्योगतमिलनाडु

पद्मश्री (118)

क्रम संख्‍यानामक्षेत्रराज्‍य/देश
24गुरु शशाधर आचार्यकलाझारखंड
25डॉ. योगी एरॉनचिकित्‍साउत्‍तराखंड
26श्री जयप्रकाश अग्रवालव्‍यापार एवं उद्योगदिल्‍ली
27श्री जगदीश लाल आहूजासामाजिक कार्यपंजाब
28श्री काज़ी मासूम अख्‍तरसाहित्‍य एवं शिक्षापश्चिम बंगाल
29सुश्री ग्‍लौरिया अरिएैरासाहित्‍य एवं शिक्षाब्राजील
30श्री खान जहीर खान बख्तियार खानखेलमहाराष्‍ट्र
31डा. पद्मावति बंदोपाध्‍यायचिकित्‍साउत्‍तर प्रदेश
32डा. सुशोवन बनर्जीचिकित्‍सापश्चिम बंगाल
33डा. दिगम्‍बर बेहराचिकित्‍साचंडिगढ़
34डा. दमयंती बेसरासाहित्‍य एवं शिक्षाओडिशा
35श्री पवार पोपटराव भगुजीसामाजिक कार्यमहाराष्‍ट्र
36श्री हिम्‍मत राम भंभुसामाजिक कार्यराजस्‍थान
37श्री संजीव भीखचंदानीव्‍यापार एवं उद्योगउत्‍तर प्रदेश
38श्री गफूर भाई एम. बिलाखियाव्‍यापार एवं उद्योगगुजरात
39श्री बॉब ब्‍लैकमेनराजनीतिब्रिटेन
40सुश्री इंदिरा पी. पी. बोराकलाअसम
41श्री मदन सिंह चौहानकलाछत्‍तीसगढ़़
42सुश्री ऊषा चौमारसामाजिक कार्यराजस्‍थान
43श्री लील बहादुर छेत्रीसाहित्‍य एवं शिक्षाअसम
44सुश्री ललीता एवं सुश्री सरोज चिदम्‍बरम (युगल)*कलातमिलनाडु
45डा. वजीरा चित्रसेनकलाश्रीलंका
46डा. पुरुषोत्‍तम दधीचकलामध्‍य प्रदेश
47श्री उत्‍सव चरणदासकलाओडिशा
48प्रो. इंदिरा दासनायके (मरणोपरांत)साहित्‍य एवं शिक्षाश्रीलंका
49श्री एच.एम. देसाईसाहित्‍य एवं शिक्षागुजरात
50श्री मनोहर देवदासकलातमिलनाडु
51सुश्री ओइनाम बेमबिम देवीखेलमणिपुर
52सुश्री लिया दिसकिनसामाजिक कार्यब्राजील
53श्री ए.पी. गणेशखेलकर्नाटक
54डा. बंगलोर गंगाधरचिकित्‍साकर्नाटक
55डा. रमण गंगाखेडकरविज्ञान एवं इंजीनियरिंगमहाराष्‍ट्र
56श्री बेरी गार्डिनरराजनीतिब्रिटेन
57श्री चेवांग मोनुप गोबाव्‍यापार एवं उद्योगलद्दाख
58श्री भरत गोयनकाव्‍यापार एवं उद्योगकर्नाटक
59श्री यादला गोपालरावकलाआंध्र प्रदेश
60श्री मित्रभानु गोंटियाकलाओडिशा
61सुश्री तुलसी गौडासामाजिक कार्यकर्नाटक
62श्री सुजॉय के. गुहाविज्ञान एवं इंजीनियरिंगबिहार
63श्री हरिकला हजब्‍बासामाजिक कार्यकर्नाटक
64श्री इनामुल हकअन्‍य-पुरातत्‍वबांग्‍लादेश
65श्री मधु मंसूरी हसमुखकलाझारखंड
66श्री अब्‍दुल जब्‍बार (मरणोपरांत)सामाजिक कार्यमध्‍य प्रदेश
67श्री बिमल कुमार जैनसामाजिक कार्यबिहार
68सुश्री मीनाक्षी जैनसाहित्‍य एवं शिक्षादिल्‍ली
69श्री नेमनाथ जैनव्‍यापार एवं उद्योगमध्‍य प्रदेश
70सुश्री शांति जैनकलाबिहार
71श्री सुधीर जैनविज्ञान एवं इंजीनियरिंगगुजरात
72श्री बेनीचंद्र जमातियासाहित्‍य एवं शिक्षात्रिपुरा
73श्री के. वी. संपथ कुमार एवं सुश्री विदुषी जयलक्ष्‍मी के. एस. (युगल)*साहित्‍य एवं शिक्षा – पत्रकारिताकर्नाटक
74श्री करण जौहरकलामहाराष्‍ट्र
75डा. लीला जोशीचिकित्‍सामध्‍य प्रदेश
76सुश्री सरिता जोशीकलामहाराष्‍ट्र
77श्री सी कमलोआसाहित्‍य एवं शिक्षामिजोरम
78डा. रवि कन्‍नन आर.चिकित्‍साअसम
79सुश्री एकता कपूरकलामहाराष्‍ट्र
80श्री याज़दी नाओश्रीवान करंजियाकलागुजरात
81श्री नारायण जे. जोशी करायलसाहित्‍य एवं शिक्षागुजरात
82डा. नरिन्‍दर नाथ खन्‍नाचिकित्‍साउत्‍तर प्रदेश
83श्री नवीन खन्‍नाविज्ञान एवं इंजीनियरिंगदिल्‍ली
84श्री एस. पी. कोठारीसाहित्‍य एवं शिक्षाअमरीका
85श्री वी.के. मनुसामी कृष्‍णा पख्‍़तहरकलापुदुचेरी
86श्री एम. के. कुंजोलसामाजिक कार्यकेरल
87श्री मनमोहन महापात्रा (मरणोपरांत)कलाओडिशा
88उस्‍ताद अनवर खान मंगनियारकलाराजस्‍थान
89श्री कट्टुंगल सुब्रमण्‍यम मनिलालविज्ञान एवं इंजीनियरिंगकेरल
90श्री मुन्‍ना मास्‍टरकलाराजस्‍थान
91प्रो. अभिराज राजेन्‍द्र मिश्रसाहित्‍य एवं शिक्षाहिमाचल प्रदेश
92सुश्री बीनापाणि मोहंतीसाहित्‍य एवं शिक्षाओडिशा
93डॉ. अरुणोदय मंडलचिकित्‍सापश्चिम बंगाल
94डा. पृथविन्‍द्र मुखर्जीसाहित्‍य एवं शिक्षाफ्रांस
95श्री सत्‍यनाराण मुंडयूरसामाजिक कार्यअरुणाचल प्रदेश
96श्री मणिलाल नागकलापश्चिम बंगाल
97श्री एन. चन्‍द्रशेखरण नायरसाहित्‍य एवं शिक्षाकेरल
98डा. तेत्‍सू नकामूरा (मरणोपरांत)सामाजिक कार्यअफगानिस्‍तान
99श्री शिवदत्‍त निर्मोहीसाहित्‍य एवं शिक्षाजम्‍मू एवं कश्‍मीर
100श्री पु. ललबियाकथंगा पचुआऊसाहित्‍य एवं शिक्षा-पत्रकारितामिजोरम
101सुश्री मुझिक्‍कल पंकजाक्षीकलाकेरल
102डा. प्रसंत कुमार पटनायकसाहित्‍य एवं शिक्षाअमरीका
103श्री जोगेन्‍द्र नाथ फुकनसाहित्‍य एवं शिक्षाअसम
104सुश्री रहिबाई सोम पोपेरेअन्‍य-कृषिमहाराष्‍ट्र
105श्री योगेश प्रवीणसाहित्‍य एवं शिक्षाउत्‍तर प्रदेश
106श्री जीतू रायखेलउत्‍तर प्रदेश
107श्री तरुणदीप रायखेलसिक्किम
108श्री एस. रामाकृष्‍णनसामाजिक कार्यतमिलनाडु
109सुश्री रानी रामपालखेलहरियाणा
110सुश्री कंगना रनौतकलामहाराष्‍ट्र
111श्री दलवई चलापतिरावकलाआंध्र प्रदेश
112श्री शाहबुद्दीन राठौरसाहित्‍य एवं शिक्षागुजरात
113श्री कल्‍याण सिंह रावतसामाजिक कार्यउत्‍तराखंड
114श्री चिंतला वेंकट रेड्डीअन्‍य-कृषितेलंगाना
115श्रीमती डा. शांति रायचिकित्‍साबिहार
116श्री राधममोहन एवं सुश्री सबरमती (युगल)*अन्‍य-कृषिओडिशा
117श्री बताकृष्‍णा साहूअन्‍य-पशुपालनओडिशा
118सुश्री त्रिनिति साईऊअन्‍य-कृषिमेघालय
119श्री अदनान सामीकलामहाराष्‍ट्र
120श्री विजय संकेश्‍वरव्‍यापार एवं उद्योगकर्नाटक
121डा. कुशल कुंवर सर्माचिकित्‍साअसम
122श्री सैय्यद महबूब शाह कादरी ऊर्फ सैय्यद भाईसामाजिक कार्यमहाराष्‍ट्र
123श्री मोहम्‍मद शरीफसामाजिक कार्यउत्‍तर प्रदेश
124श्री श्‍याम सुंदर शर्माकलाबिहार
125डा. गुरदीप सिंहचिकित्‍सागुजरात
126श्री रामजी सिंहसामाजिक कार्यबिहार
127श्री वशिष्‍ठ नारायण सिंह (मरणोपरांत)विज्ञान एवं इंजीनियरिंगबिहार
128श्री दया प्रकाश सिन्‍हाकलाउत्‍तर प्रदेश
129डॉ. सान्‍द्र देसा सौजाचिकित्‍सामहाराष्‍ट्र
130श्री विजयसारथी श्रीभाष्‍यम साहित्‍य एवं शिक्षातेलंगाना
131श्रीमती कली शाबी महबूब एवं श्री शेक महबूब सुबानी (युगल)*कलातमिलनाडु
132श्री जावेद अहमद टॉकसामाजिक कार्यजम्‍मू एवं कश्‍मीर
133श्री प्रदीप थलाप्पिलविज्ञान एवं इंजीनियरिंगतमिलनाडु
134श्री येशे दोरजी थॉन्‍गचीसाहित्‍य एवं शिक्षाअरुणाचल प्रदेश
135श्री रॉबर्ट थर्मनसाहित्‍य एवं शिक्षाअमेरिका
136श्री अगस इंद्रा उद्यनसामाजिक कार्यइंडोनेशिया
137श्री हरीश चंद्र वर्माविज्ञान एवं इंजीनियरिंगउत्‍तर प्रदेश
138श्री सुंदरम वर्मासामाजिक कार्यराजस्‍थान
139डा. रोमेश टेकचंद वाधवानीव्‍यापार एवं उद्योगअमेरिका
140श्री सुरेश वाडकरकलामहाराष्‍ट्र
141श्री प्रेम वत्‍सव्‍यापार एवं उद्योगकनाडा

Lal Krishna Advani Biography: लाल कृष्ण आडवाणी का जीवन परिचय

लाल कृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani):-

भाजपा के भीष्म पितामह कहे जाने वाले लालकृष्ण आडवाणी से मुलाकात के लिए पीएम नरेंद्र मोदी 8 नवम्बर 2021 सोमवार को उनके आवास पर पहुंचे | यह मौका लालकृष्ण आडवाणी के जन्मदिन का था | पीएम नरेंद्र मोदी के साथ ही होम मिनिस्टर अमित शाह, डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह और उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू भी मौजूद थे | इस दौरान पीएम नरेंद्र मोदी और आडवाणी के बीच काफी गर्मजोशी नजर आई | पीएम नरेंद्र मोदी ने वरिष्ठ नेता को पुष्पगुच्छ भेंट किया और फिर उनका हाथ थामकर चलते नजर आए | इसके बाद एलके आडवाणी के घर पर ही पीएम नरेंद्र मोदी, वेंकैया नायडू और राजनाथ सिंह समेत कई नेता उनके साथ बैठे नजर आए |

भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) का जाना माना एवं चर्चित चेहरा है | भारतीय जनता पार्टी को हम अटल बिहारी वाजपेयी तथा लालकृष्ण आडवाणी के बिना नहीं सोच सकते | सबसे पहले भारतीय जनता पार्टी की नींव रखने में इन दो व्यक्तियों का विशेष योगदान रहा है | लालकृष्ण आडवाणी 1951 से अब तक भारतीय जनता पार्टी में एक सक्रिय राजनेता की भूमिका निभा रहे हैं |

लाल कृष्ण अडवाणी के जीवन की जानकारी:-

Lal Krishna Advani Biography in Hindi

इनका जन्म सिंधी हिन्दू समाज मे, 8 सन् 1927 को कराची (वर्तमान मे पाकिस्तान का एक बड़ा शहर) मे हुआ था | इनके परिवार मे सभी शिक्षित होने की वजह से बचपन से इनको वैसा ही माहोल मिला | यह शुरू से एक मेधावी छात्र रहे थे | इन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सेंट पैट्रिक हाई स्कूल, कराची से की थी यह एक नामी-ग्रामी स्कूल था | बाद मे इन्होने हैदराबाद (सिंध) नेशनल कोलीजीऐट बोर्ड तथा गवर्नमेंट लॉ कॉलेज, बॉम्बे से अपनी वकालत की शिक्षा हासिल करी |

लाल कृष्ण आडवाणी के जीवन की संपूर्ण जानकारी संक्षिप्त में :

नाम (Name)लाल कृष्ण आडवाणी
जन्म तारीख(Date of birth)8 नवंबर 1927
जन्म स्थान(Place)कराची (पाकिस्तान)
उम्र( Age)91 वर्ष
पता (Address)30, पृथ्वीराज रोड़ , नई दिल्ली
स्कूल (School)सेंट पैट्रिक हाई स्कूल
कॉलेज(College)नेशनल कोलीजीऐट बोर्ड तथा गवर्नमेंट लॉ कॉलेज
ओक्यूपेशन(Occupation)भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता
कुल संपत्ति (Total Assets) 7.59 करोड़ लगभग
भाषा(Languages)हिंदी , इंग्लिश, सिंधी
नागरिकता(Nationality)इंडियन
खास दोस्त (Best Friend’s)अटल बिहारी वाजपेयी
दिलचस्पी (Activities)पढ़ना, मूवी देखना

लाल कृष्ण आडवाणी की पारिवारिक की जानकारी:-

आडवाणी जी  एक बहुत ही संपन्न परिवार से थे. इनका बड़ा संयुक्त परिवार था जिसमे इनके दादा-दादी, माता-पिता तथा पिता के भाई और उनके बच्चे साथ रहते थे. इनके दादा जी उस समय मे संस्कृत के विद्वान तथा सरकारी स्कूल के प्राचार्य थे. परिवार का हर एक सदस्य किसी ना किसी पद या व्यापार मे कार्यरत थे. एक इंटरव्यू के दौरान इन्होंने कहा था इनके कुल काका-ताऊ के मिलाकर 24 भाई-बहन है जिनके साथ रह कर यह बड़े हुए है. इनके बचपन की बहुत सारी यादे है क्यों कि इनके जन्म के समय देश का विभाजन नही हुआ था पर जब भारत और पाकिस्तान का विभाजन हुआ तो इनके परिवार के दो हिस्से हो गये जिनमे कुछ पाकिस्तान मे रह गये तथा कुछ भारत मे. विभाजन के कारण इनको अपने परिवार से बिछड़ना पड़ा जों इनके लिए एक क्षति के सामान ही था. परिवार जरुर विभाजित हुआ था पर इनके दिल से अपने परिवार की यादें नही गई थी. इनका पच्चीस फरवरी सन् उन्नीस सौ पैसठ में विवाह हुआ था, इस विवाह से इनके दो बच्चे है.

पिता का नामकिशनचंद आडवाणी
माता का नामज्ञानदेवी अडवाणी
पत्नी का नामकमला अडवाणी
पुत्रजयंत अडवाणी
पुत्रीप्रतिभा अडवाणी

लाल कृष्ण अडवाणी का राजनीति जीवन:-

इन्होंने मात्र पन्द्रह वर्ष की उम्र मे सबसे पहली बार सन् 1942 मे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य के रूप मे कार्य शुरू किया | इन्होंने पूरे जोश के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मे अपना योगदान दिया तथा जगह-जगह इसके केन्द्र खुले तथा लोगों को इससे जोड़ा | इन्होंने शुरुवाती दौर से ही बहुत अच्छा कार्य किया जिससे राजनीति मे भी इनकी छवि बहुत अच्छी बनी तथा साल दर साल इन्होंने राजनीति जैसे क्षेत्र मे काम कर एक अलग मुकाम हासिल किया | इनके राजनीतिक जीवन का संक्षिप्त ब्यौरा इस प्रकार है –

कार्यकालराजनीति जीवन की संक्षिप्त जानकारी
1947वर्तमान में पाकिस्तान का हिस्सा कराची से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सचिव का पद मिला |
1951श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने इनको भारतीय जनसंघ का सदस्य बनाया |
1996-1967जनसंघ के सदस्य के रूप मे कार्यरत रहे |
1970-1976दिल्ली राज्यसभा के सदस्य के रूप मे चुने गये |
1976-1982सन् 1973 मे इनको भारतीय जनसंघ का अध्यक्ष के रूप मे मनोनीत किया गया, इसके कुछ वर्ष पश्चात सन् 1977  मे गुजरात राज्यसभा के सदस्य के रूप मे चुने गये | सन् 1977 मे जब लोकसभा के चुनाव हुए तब मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने तथा उनके कार्यकाल मे इनको सूचना एवं प्रसारण मंत्री बनाया गया | सन् 1976 से  सन् 1978 तक इन्होने गुजरात राज्यसभा के सदस्य के रूप मे कार्य किया | सन् 1980 मे कुछ महीनों के लिये यह राज्यसभा मे विपक्ष के नेता के रूप मे रहे | बाद मे सन् 1980 मे इनको भारतीय जनता पार्टी का महासचिव बनाया गया यह पद उन्होंने लगभग सात साल तक संभाला | इसी के साथ तीसरी बार सन् 1982 मे राज्यसभा के सदस्य के रूप मे चुने गये |
1986इस साल मे इन्होंने सबसे पहली बार भारतीय जनता पार्टी का अध्यक्ष का पद ग्रहण किया तथा सन् 1991 तक यह उस पद पर रहे |
1988यहाँ एक बार फिर चौथी बार इनको राज्यसभा के सदस्य के रूप मे चुना गया |
19899 लोकसभा मे, लोकसभा सदस्य के रूप मे इनको चुना गया |
1991सन् 1991 तक लोकसभा मे भारतीय जनता पार्टी के संसदीय पार्टी के नेता रहे, सन् 1991 से सन् 1993 विपक्ष के नेता रहे |
1993सन् 1993 से सन् 1998 तक बीजेपी के अध्यक्ष रहे |
19981998 मे बारहवी लोकसभा के सदस्य रहे |
1999इस साल मे तेरहवी बार यह लोकसभा के सदस्य बने,सन् 1999 से सन् 2004 तक केन्द्रीय केबिनेट मंत्री रहे |
2002जुलाई 2002 से अगस्त 2002 तक प्रेसोंनेल, पेंशन एंड पब्लिक ग्रेवियेंस (अडिशनल चार्ज) के केबिनेट मंत्री रहे | इसी के साथ मई 2002 से  अगस्त 2004 तक इन्होंने उपप्रधानमंत्री का पद संभाला |
20042004 मे चौदहवीं लोकसभा मे मनोनीत किया गया तथा एक बार फिर यह प्रतिपक्ष के नेता बने |
2006 सन् 2006 से सन् 2009 तक ग्रह मामलों मे समिति के सदस्य रहे |
2009यह एक बार फिर पन्द्रहवी लोकसभा के सदस्य बने, इसी साल मे मई से दिसंबर तक यह विपक्ष के नेता रहे. सन् 2009 मे एक बार पुनः ग्रह मामलों मे इनको समिति का सदस्य बनाया गया |
2013जून 2013 मे जब नरेन्द्र मोदी ने पार्टी मे सभी महत्वपूर्ण पद घोषित किये तब उससे यह संतुष्ट नही हुए तथा इन्होंने एक बड़ा निर्णय लिया जिसके चलते उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया तथा कहा कि भारतीय जनता पार्टी अब आदर्शवादी पार्टी नही रही | तब राजनाथ सिंह ने इनसे सभी मुदों पर चर्चा करी तथा आश्वासन दिया, फिर इन्होंने अपना इस्तीफा वापस लिया तथा पार्टी मे वापस आये |

लाल कृष्ण अडवाणी की रथ यात्रा की जानकारी:-

रथ यात्रा जिसकी शुरुआत सबसे पहले आडवाणी जी ने की थी, यह यात्रा कोई साधारण यात्रा नही हुआ करती थी इस यात्रा की लहर पूरे देश मे होती थी इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय धर्म और संस्कृति को बढ़ावा देना तथा लोगों को अपने धर्म के प्रति जागरूक करना होता था | इन्होंने जों मुददे उठाये वह सही भी थे और आमजनता तक उनको पहुचना बहुत बड़ी बात थी | इन्होंने जितनी यात्राओ के जयघोष किये वह सफल भी रही | इससे भारतीय जनता पार्टी को बहुत फायदा हुआ तथा उसकी तरफ लोगों का नजरिया बदला |

यात्रा के नामयात्रा की जानकारी
राम रथ यात्राइसका जयघोष सितम्बर,1990 मे सोमनाथ,गुजरात से हुआ शुरू हुआ तथा अक्टूबर,1990 मे अयोध्या तक पंहुचा | इसमें मुददा अयोध्या राम मंदिर तथा बाबरी मस्जिद का था | इसलिये इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य राम जन्मभूमि,अयोध्या मे राम मंदिर का निर्माण करना था | किसी ने इसे बीजेपी की राजनीतिक चाल समझी तो किसी ने इसको हिन्दुओं का अधिकार, इस मुददे को उत्तरप्रदेश के मंत्री मुलायमसिंह तथा लालूप्रसाद यादव के द्वारा रोक दिया गया था पर इनकी किसी बात का असर नही हुआ क्योंकि तब तक यह मुददा बहुत बड़ गया था और आज की तारीख तक इस पर विवाद चल रहे |     
जनादेश यात्रानाम से साफ समझ मे आ रहा है कि, ऐसा आदेश जों जनता के हित मे हो और यही इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य था जिसमे लोगों के प्रतिनिधित्व के लिये जों विधेयक पास हुआ तथा 80 संविधान संशोधन (80 th Amendment) के खिलाफ लोगों को जनादेश का अधिकार दिलाना | जिसके लिये भारत की चार दिशाओं से 11 सितम्बर 1993 से इस यात्रा का शंखनाद हुआ तथा इसमें इन्होंने मैसूर को संबोधित करते हुए 25 सितम्बर को मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल मे एकत्रित हुये और बहुत बड़ी रैली निकाली गई | यह रैली बहुत ही विशाल रूप मे थी जिसमे भारत के चौदह राज्य तथा दो केन्द्र शासित प्रदेश ने भी हिस्सा लिया |     
स्वर्ण जयंती रथ यात्राइस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत की स्वतंत्रता के पचास साल पूरे होने उसका उत्साह तथा जों महापुरुषों ने देश को आजाद कराया उनको नमन करना था, यह यात्रा मई से जुलाई 1997 तक चली |
भारत उदय यात्रायह यात्रा सन् 2004 मे निकली गई जिसमे यह बताया गया कि भारतीय जनता पार्टी के गठन के बाद देश मे क्या बदलाव हुए तथा भारत ने कैसे उन्नति करी |
भारत सुरक्षा यात्रायह यात्रा 2006 में की गई थी इस यात्रा का नेतृत्व दो लोगों ने किया जिसमे एक अडवाणी जी थे और दूसरे राजनाथसिंह | आडवाणी जी ने दिल्ली से तथा राजनाथ सिंह ने ओडिसा के जगन्नाथपुरी से यात्रा शुरू करी | इसका मुख्य उद्देश्य जगह-जगह हो रहे बम धमाकों से भारत की रक्षा करना तथा भारत मे बाढ़ आतंकवाद, मूल्यों मे वृद्धि, भ्रष्टाचार को रोकना था |     
जन चेतना यात्राइस यात्रा का मुख्य उद्देश्य यूपीए सरकार द्वारा फैल रहे भ्रष्टाचार से जनता को अवगत कराना था. इस यात्रा की उद्घोषणा 11 अक्टूबर 2011 को बिहार के सीताब दीरा से हुई थी |

Chhath Puja 2021: कौन हैं छठ मैया ? जानिए भगवान सूर्य और छठ मैया की पूजा क्यों महत्वपूर्ण है |

Chhath Puja 2021:-

आज से छठ पूजा की शुरुआत हो चुकी है | छठ सूर्य और छठी माता की उपासना का पर्व है | हिन्दू आस्था का यह एक ऐसा पर्व है जिसमें मूर्ति पूजा शामिल नहीं है | इस पूजा में छठी मईया के लिए व्रत किया जाता है | यह व्रत कठिन व्रतों में से एक माना जाता है | इसलिए छठ पूजा के दौरान कई बातों का ध्यान रखा जाता है |

छठ पूजा (Chhath Puja) हर वर्ष का​र्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को होती है | दिवाली के बाद हिंदूओं का छठ सबसे बड़े त्योहारों में गिना गया है | इस बार छठ की पूजा 10 नवंबर यानी बुधवार को है | उत्तर भारत और खासतौर से बिहार,यूपी,झारखंड में इस त्योहार का बेहद खास महत्व होता है | इस त्योहार को बेहद प्यार और उल्लास के साथ मनाया जाता है | हालांकि इस पर भी कोरोना की दस्तक है, लेकिन वाबजूद इसके लोगों के बीच इसको लेकर उत्साह खबी कम नहीं होगा |

छठ पूजा का प्रारंभ दो दिन पूर्व चतुर्थी तिथि को नहाय खाय से होता है, फिर पंचमी को लोहंडा और खरना होता है | उसके बाद षष्ठी तिथि को छठ पूजा होती है, जिसमें सूर्य देव को शाम का अर्घ्य अर्पित किया जाता है | इसके बाद अगले दिन सप्तमी को सूर्योदय के समय में उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं और फिर पारण करके व्रत को पूरा किया जाता है | तिथि के अनुसार, छठ पूजा 4 दिनों की होती है |

छठ पर्व पर क्यों की जाती है सूर्य की आराधना:-

सूर्य को ग्रंथों में प्रत्यक्ष देवता यानी ऐसा भगवान माना है जिसे हम खुद देख सकते हैं | सूर्य ऊर्जा का स्रोत है और इसकी किरणों से विटामिन डी जैसे तत्व शरीर को मिलते हैं | दूसरा, सूर्य मौसम चक्र को चलाने वाला ग्रह है | ज्योतिष के नजरिए से देखा जाए तो सूर्य आत्मा का ग्रह माना गया है | सूर्य पूजा आत्मविश्वास जगाने के लिए की जाती है |

पुराणों के नजरिए से देखें तो सूर्य को पंचदेवों में से एक माना गया है, ये पंच देव हैं ब्रह्मा, विष्णु, शिव, दुर्गा और सूर्य | किसी भी शुभ काम की शुरुआत में सूर्य की पूजा अनिवार्य रूप से की जाती है | शादी करते समय भी सूर्य की स्थिति खासतौर पर देखी जाती है | भविष्य पुराण से ब्राह्म पर्व में श्रीकृष्ण ने अपने पुत्र सांब को सूर्य पूजा का महत्व बताया है | बिहार में मान्यता प्रचलित है कि पुराने समय में सीता, कुंती और द्रोपदी ने भी ये व्रत किया था |

सूर्य की ही बहन हैं छठ माता:-

माना जाता है कि छठ माता सूर्यदेव की बहन हैं | जो लोग इस तिथि पर छठ माता के भाई सूर्य को जल चढ़ाते हैं, उनकी मनोकामनाएं छठ माता पूरी करती हैं | छठ माता बच्चों की रक्षा करने वाली देवी हैं | इस व्रत को करने से संतान को लंबी आयु का वरदान मिलता है | मार्कण्डेय पुराण में इस बात का उल्लेख मिलता है कि प्रकृति ने अपने आप को छह भागों में विभाजित किया है | इनके छठे अंश को सर्वश्रेष्ठ मातृ देवी के रूप में जाना जाता है, जो ब्रह्मा की मानस पुत्री हैं | माना ये भी जाता है कि देवी दुर्गा का छठवां रूप कात्यायनी ही छठ मैया हैं |

छठ व्रत की कथा:-

कथा सतयुग की है | उस समय शर्याति नाम के राजा थे | राजा की कई पत्नियां थीं, लेकिन बेटी एक ही थी | उसका नाम था सुकन्या | एक दिन राजा शिकार खेलने गए | साथ में सुकन्या भी थीं | जंगल में च्यवन नाम के ऋषि तपस्या कर रहे थे | ऋषि काफी समय से तपस्या कर रहे थे, इस वजह से उनके शरीर के आसपास दीमकों ने घर बना लिए थे | सुकन्या ने खेलते हुई दीमक की बांबी में सूखी घास के कुछ तिनके डाल दिए | उस जगह पर ऋषि की आंखें थीं | तिनकों से ऋषि की आंखें फूट गईं | इससे ऋषि गुस्सा हो गए, उनकी तपस्या टूट गई |

जब ये बात राजा को मालूम हुई तो वे माफी मांगने के लिए ऋषि के पास पहुंचे | राजा ने ऋषि को अपनी बेटी सुकन्या सेवा के लिए सौंप दी | इसके बाद सुकन्या ऋषि च्यवन की सेवा करने लगी | कार्तिक मास में एक दिन सुकन्या पानी भरने जा रही थी, तभी उसे एक नागकन्या मिली | नागकन्या ने कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को सूर्य पूजा और व्रत करने के लिए कहा | सुकन्या ने पूरे विधि-विधान और सच्चे मन से छठ का व्रत किया | व्रत के प्रभाव से च्यवन मुनि की आंखें ठीक हो गईं | तभी से हर साल छठ पूजा का पर्व मनाया जाने लगा |

Chhath Puja 2021: नहाय खाय के साथ आज से छठ पर्व शुरू | जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत नियम

Chhath Puja कब है? 2021:-

Chhath Puja कब है- आज से छठ पूजा की शुरुआत हो चुकी है | छठ सूर्य और छठी माता की उपासना का पर्व है | हिन्दू आस्था का यह एक ऐसा पर्व है जिसमें मूर्ति पूजा शामिल नहीं है | इस पूजा में छठी मईया के लिए व्रत किया जाता है | यह व्रत कठिन व्रतों में से एक माना जाता है | इसलिए छठ पूजा के दौरान कई बातों का ध्यान रखा जाता है |

छठ पूजा (Chhath Puja) हर वर्ष का​र्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को होती है | दिवाली के बाद हिंदूओं का छठ सबसे बड़े त्योहारों में गिना गया है | इस बार छठ की पूजा 8 नवंबर यानी सोमवार को है | उत्तर भारत और खासतौर से बिहार,यूपी,झारखंड में इस त्योहार का बेहद खास महत्व होता है | इस त्योहार को बेहद प्यार और उल्लास के साथ मनाया जाता है | हालांकि इस पर भी कोरोना की दस्तक है, लेकिन वाबजूद इसके लोगों के बीच इसको लेकर उत्साह खबी कम नहीं होगा |

छठ पूजा का प्रारंभ दो दिन पूर्व चतुर्थी तिथि को नहाय खाय से होता है, फिर पंचमी को लोहंडा और खरना होता है | उसके बाद षष्ठी तिथि को छठ पूजा होती है, जिसमें सूर्य देव को शाम का अर्घ्य अर्पित किया जाता है | इसके बाद अगले दिन सप्तमी को सूर्योदय के समय में उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं और फिर पारण करके व्रत को पूरा किया जाता है | तिथि के अनुसार, छठ पूजा 4 दिनों की होती है |

चार दिवसीय छठ पर्व:- Chhath Puja कब है?

  • Nov 8: नहाय-खाय (सुबह 06:38 बजे और सूर्योस्त शाम को 05:31 बजे)
  • Nov 9: खरना (सूर्योदय सुबह 06:39 बजे पर होगा और सूर्योस्त शाम को 05:30 बजे)
  • Nov 10: शाम का अर्घ्य (9 नवंबर को रात 09:59 बजे से 10 नवंबर को रात 09:29 बजे तक)
  • Nov 11: सुबह का अर्घ्य (सूर्योदय सुबह 06:41 बजे तथा सूर्योस्त शाम को 05:29 बजे)

पहला दिन- नहाय-खाय:-

छठ पूजा की शुरुआत कार्तिक शुक्ल चतुर्थी तिथि से होती है | यह छठ पूजा का पहला दिन होता है, इस दिन नहाय खाय होता है | इस वर्ष नहाय-खाय 8 नवंबर (सोमवार) को है | इस दिन सूर्योदय 6 बजकर 38 मिनट पर और सूर्यास्त 5 बजकर 31 मिनट पर होगा छठ पूजा की शुरुआत कार्तिक शुक्ल चतुर्थी तिथि से होती है | व्रत रखने महिलाएं स्नान करने के बाद नए वस्त्र धारण करती हैं | शाम को शाकाहारी भोजन होती है |

दूसरा दिन- लोहंडा और खरना:-

लोहंडा और खरना छठ पूजा का दूसरा दिन होता है | यह कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को होता है | इस वर्ष लोहंडा और खरना 9 नवंबर दिन मंगलवार को है | इस दिन सूर्योदय 6 बजकर 39 मिनट पर और सूर्यास्त 5 बजकर 30 मिनट पर होगा | कार्तिक शुक्ल पंचमी को महिलाएं पूरे दिन व्रत रखती हैं और शाम को भोजन करती हैं | शाम को चाव व गुड़ से खीर बनाकर खाई जाती है |

तीसरा दिन- छठ पूजा (सन्ध्या अर्घ्य):-

छठ पूजा का मुख्य दिन कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को होता है | इस दिन ही छठ पूजा होती है | इस दिन शाम को सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है इस वर्ष छठ पूजा 10 नवंबर को है | इस दिन सूर्यादय 6 बजकर 40 मिनट पर और सूर्यास्त 5 बजकर 30 मिनट पर होगा | छठ पूजा के लिए षष्ठी तिथि का प्रारम्भ 9 नवंबर को रात 09:59 बजे से हो रहा है, जो 10 नवंबर को रात 09:29 बजे तक है | इस दिन छठ पर्व का प्रसाद बनाया जाता है | अधिकांश स्थानों पर चावल के लड्डू बनाए जाते हैं | प्रसाद व फल बांस की टोकरी में सजाये जाते हैं | टोकरी की पूजा की जाती है | व्रत रखने वाली महिलाएं सूर्य को अर्ग देने और पूजा के लिए तालाब, नदी या घाट पर जाती हैं | स्नान कर डूबते सूर्य की पूजा की जाती है |

चौथा दिन- सूर्योदय अर्घ्य (पारण का दिन):-

छठ पूजा का अंतिम दिन कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि होती है | इस दिन सूर्योदय के समय सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित किया जाता है | उसके बाद पारण कर व्रत को पूरा किया जाता है | इस वर्ष छठ पूजा का सूर्योदय अर्घ्य तथा पारण 11 नवंबर को होगा | इस दिन सूर्योदय सुबह 06:41 बजे तथा सूर्योस्त शाम को 05:29 बजे होगा | सूर्योदय के समय भी सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है | पूजा के बाद प्रसाद बांट कर छठ पूजा संपन्न की जाती है | छठ पर्व को लेकर श्रद्धालुओं के द्वारा शकरकंद, लौकी एवं गन्ने की खरीदी की जा रही है | वहीं पर्व को देखते हुए बाजार में इनकी आवक बढ़ गई है |

छठ पूजा 2020 : पूजा के मुहूर्त:-

10 नवंबर छठ पर्व की शुरुआत होगी | इस दिन सूर्योदय – 06:40 पर होगा तथा सूर्यास्त – 17:30 पर होगा | वैसे षष्ठी तिथि एक दिन पहले यानी 9 नवंबर को रात 9:58 से शुरू हो जाएगी और 10 नवंबर को रात 9:29 बजे तक रहेगी | इसके अगले दिन सूर्य को सुबह अर्घ्य देने का समय छह बजकर 48 मिनट है |

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Happy Bhai Dooj 2021: Wishes, Messages, Quotes, Images, Photos, WhatsApp status

Bhai Dooj Wishes 2021:-

हिंदुओं के सबसे बड़े पर्व दीपावली को पर्वों की माला कहा जाता है | पांच दिनों तक चलने वाला यह पर्व केवल दीपावली तक ही सीमित नहीं रहता बल्कि यह त्योहार भैयादूज और लोकआस्था का महापर्व छठ पूजा तक चलता है | भैयादूज दीपावली के दूसरे दिन कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को मनाया जाता है | इस दिन बहनें भाई के माथे पर तिलक करके उसकी लंबी आयु और सुख समृद्धि की कामना करती हैं | रक्षाबंधन की ही तरह भाईदूज का भी काफी महत्व है | इस बार भाईदूज का पर्व 6 नवंबर 2021, शनिवार को मनाया जाएगा |

इस दिन बहनें पूजा करती हैं, कथा कर व्रत रखती हैं और भाई को तिलक करती हैं | वहीं, भाई भी बहन की रक्षा का संकल्प लेता है और उन्हें उपहार देता है | भाईदूज को भैया दूज, भाई टीका, यम द्वितीया, भ्रातृ द्वितीया आदि नामों से भी जाना जाता है | भाईदूज के दिन मृत्यु के देवता यमराज का पूजन किया जाता है | पौराणिक कथा के अनुसार मान्यता है कि इस दिन यम देव अपनी बहन यमुना के कहने पर घर पर भोजन करने गए थे |

Bhai Dooj Wishes 2021 in Hindi:-

आया भाई दूज का है प्‍यारा त्यौहार

बहनों की दुआएं भाइयों के लिए हजार,

भाई बहन का यह अनमोल रिश्ता है अटूट

बना रहे यह बंधन हमेशा खूब।

भाई दूज की शुभकामनाएं

बहन लगाती तिलक फिर मिठाई खिलाती है

भाई देता तोहफा और बहन मुस्काती है,

भाई बहन का ये रिश्ता न पड़े कभी लूज,

आपको मुबारक हो आपको भाई दूज

भाई दूज की शुभकामनाएं

Happy Bhai Dooj Wishes 2021

भाई दूज के शुभ अवसर पर

आपके लिए ढेर सारी शुभकामनाएं,

आपके जीवन में सुख-शांति और

समृद्धि हमेशा बनी रहे

भाई दूज की शुभकामनाएं

कामयाबी तुम्हारे कदम चूमे

खुशियां तुम्हारे चारो और हो,

पर भगवान से इतनी प्रार्थना करने के लिए

मुझे कुछ तो कमीशन दे दो भाई

भईया दूज की बधाई

भाई दूज का त्यौहार है, भैया जल्दी आओ,

अपनी प्यारी बहना से तिलक लगवाओ

भाई दूज की शुभकामनाएं

खुशनसीब होती है वो बहन,

जिसके सिर पर भाई का हाथ होता है,

हर परेशानी में उसके साथ होता है

लड़ना-झगड़ृना फिर प्यार से मनाना,

तभी तो इस रिश्ते में इतना प्यार होता है

भाई दूज की शुभकामनाएं

बहन चाहे भाई का प्यार नहीं चाहे महंगे उपहार,

रिश्ता अटूट रहे हमेशा मिले मेरे भाई को खुशियां अपार

भाई दूज की ढेरों बधाईयां

Happy Bhai Dooj Wishes 2021

थाल सजा कर बैठी हूं अंगना

तू आजा अब इंतजार नहीं करना

मत डर तू अब इस दुनिया से

लड़ने खड़ी है तेरी बहन सबसे

भाई दूज की शुभकामनाएं

बहन भाई का करे दुलार,
उसे चाहिए बस भाई का प्यार ,
नहीं करती कोई बड़ी चाहत ,
बस भाई को मिले खुशिया अथाह
भैया दूज की शुभकामनाएं

प्यारी बहन को प्रेम के साथ 
मुबारक हो भाई दूज का त्योहार

Bhai Dooj Wishes and Messages in English:-

Praying for your long life and good health on this Bhai Dooj and always!

You mean the world to me bhai
May the beautiful relationship we share,
strengthen our bond more
Best wishes for Bhai Dooj!

Thinking of the day when we were together on the day of Bhai Dooj…Sending warm wishes on this day!

May this Bhai Dooj add sweetness to your life and bring your endless joy. Best wishes for Bhai Dooj!

May this day strengthen our bond more than ever! And brings joy and prosperity to your life. Happy Bhai Dooj!

On this auspicious day, may you be showered with blessing and success in your life. Happy Bhai Dooj!

Bhai Dooj is just an excuse I have always prayed for you. May all things bright and beautiful come looking out for you! Happy Bhai Dooj

Happy Bhai Dooj to the most handsome and the best brother in the world. May you are blessed with all the happiness.

Bhai Dooj is festival of prayers from sister to brother, brother’s protection for her sister. May this year we all celebrate it with even more love and protection for our sisters and brothers. Best wishes on this Bhai Dooj.

Thank you for always standing up for me and supporting me. You are my best friend that I could ever have. Happy Bhai Dooj!

On this auspicious occasion of Bhai Dooj, I want to thank you my dear sister for everything you have done for me. Thank you for taking care of and supporting me always. You are the best sister one could ask for.

I pray to God for your longevity and success. And I feel proud to have a brother like you. Best Wishes to you.

The memories of our silly flights, craziness, and fun may fade away with time but the love we share will only grow with time. Happy Bhai Dooj!

Bhai Dooj Wishes and Images

Dear brother, you are my best friend. You stand by me when I am alone you make feel happy when I am low. Thanks for being for me always, dear brother. Happy Bhai Dooj.

Bhai Dooj 2021 Greetings in English:-

BHAIYAA, YOU ARE SOMEONE I ADMIRE AND LOOK UP TO, WITH LOTS AND LOTS OF LOVE WISHING YOU HAPPY BHAI DOOJ!

I only pray to the Almighty that be it day or night you stay by my side. I feel proud to have a brother like you. Happy Bhai Dooj!

You never say no, you never say that’s impossible, and you never say you can not. That’s my bro — a superman — who makes things possible and who makes paths smoother. I love you, Bro. Happy Bhai Dooj!

In love and laughter, In pain and happiness, you have been a good companion. May this Bhai Dooj strengthen our bond. Happy Bhai Dooj!

We might be miles apart, praying for your long life and good health. Happy Bhai Dooj.

We laugh and cry, we play and fight. We share moments of happiness and sorrows which made our bond stronger. Happy Bhai Dooj!

It leaves a smile on my face when I think of those trifling fights we had and suddenly used to make up. The memories may fade away with passing time but the love we share will only grow. Happy Bhai Dooj!

Bhai Dooj 2021 WhatsApp and Facebook status:-

It is time to celebrate the bond of love and trust between two souls united by the purest form of friendship. Happy Bhai Dooj to all brothers and sisters!

Bhai, Together we laughed, together we cried, the affection in between is immense. We both make the best team together… Cheers to all the beautiful moments of childhood!!! Happy Bhaiya Dooj!!!

Thanks brother, for making me feel safe and blessed at all times. Happy Bhai Dooj!!!

My Dear Brother….Thanks for spreading smiles everywhere and making life so beautiful, meaningful and happy. Happy Bhai Dooj

You were always my best friend, Looking out for me, making sure The path I travelled on was smooth. Even if I searched the world over, There cannot be a better brother than you. Happy Bhai Dooj!

Wish you the days that bring you happiness infinite and a life that’s prosperous and bright…Happy Bhai Dooj

Bhaiyaa, you are someone I admire and look up to, with lots and lots of love wishing you Happy Bhai Dooj

You mean the world to me bhai May the beautiful relationship we share, strengthen our bond more Best wishes for Bhai Dooj!

My brother is my best friend. You stand by me when I am alone you make feel happy when I am low. Thanks for being for me always Dear Brother. Happy Bhaidooj.

Bhai Dooj 2021: जानें भाई दूज 2021 की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि |

भाई दूज का शुभ मुहूर्त 2021, Bhai Dooj 2021:-

भाई दूज का शुभ मुहूर्त 2021- हिंदुओं के सबसे बड़े पर्व दीपावली को पर्वों की माला कहा जाता है | पांच दिनों तक चलने वाला यह पर्व केवल दीपावली तक ही सीमित नहीं रहता बल्कि यह त्योहार भैयादूज और लोकआस्था का महापर्व छठ पूजा तक चलता है | भैयादूज दीपावली के दूसरे दिन कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को मनाया जाता है | इस दिन बहनें भाई के माथे पर तिलक करके उसकी लंबी आयु और सुख समृद्धि की कामना करती हैं | रक्षाबंधन की ही तरह भाईदूज का भी काफी महत्व है | इस बार भाईदूज का पर्व 6 नवंबर 2021, शनिवार को मनाया जाएगा |

इस दिन बहनें पूजा करती हैं, कथा कर व्रत रखती हैं और भाई को तिलक करती हैं | वहीं, भाई भी बहन की रक्षा का संकल्प लेता है और उन्हें उपहार देता है | भाईदूज को भैया दूज, भाई टीका, यम द्वितीया, भ्रातृ द्वितीया आदि नामों से भी जाना जाता है | भाईदूज के दिन मृत्यु के देवता यमराज का पूजन किया जाता है | पौराणिक कथा के अनुसार मान्यता है कि इस दिन यम देव अपनी बहन यमुना के कहने पर घर पर भोजन करने गए थे |

भाई दूज का शुभ मुहूर्त 2021, भाई दूज तिलक का शुभ मुहूर्त:-

ज्योतिषियों के अनुसार इस साल भाईदूज पर भाई को तिलक करने का शुभ मुहूर्त दोपहर 1:10 से 3:21 बजे तक है | शुभ मुहूर्त की कुल अवधि 2 घंटे और 11 मिनट है | ऐसी मान्यता है कि भाई के दूज के दिन बहनों के घर भोजन करने से भाइयों की उम्र बढ़ती है | इतना ही नहीं, इस दिन यमुना में डुबकी लगाने का भी काफी महत्व बताया गया है |

भाई दूज का शुभ मुहूर्त 2021:-

सनातन हिंदु धर्म में रक्षाबंधन की तरह ही भाईदूज का भी विशेष महत्व होता है | इस दिन बहनें अपने भाई को तिलक लगाती हैं | इस दिन भाई की लंबी उम्र और उज्जवल भविष्य के लिए पहले पूजा की थाली, फल, फूल, दीपक, अक्षत, मिठाई, सुपारी आदि चीजों से सजा लें | इसके बाद घी का दीपक जलाकर भाई की आरती करें और शुभ मुहूर्त देखकर तिलक लगाएं | तिलक लगाने के बाद भाई को पान, मिठाई आदि चीज खिलाएं |

तिलक और आरती के बाद भाई को अपनी बहन की रक्षा का संकल्प लेना चाहिए और उन्हें उपहार गिफ्ट करें | पौराणिक कथाओं के अनुसार भाईदूज के अवसर पर जब बहनें भाई को तिलक लगाती हैं तो भाई के जीवन पर आने वाले हर प्रकार के संकट का नाश हो जाता है और उसके जीवन में सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है | तथा इस दिन बहन के घर भोजन करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है |

भाईदूज की पौराणिक कथा:-

भाईदूज को लेकर एक पौराणिक कथा काफी प्रचलित है | पौराणिक कथाओं के अनुसार सूर्य देव और उनकी पत्नी संज्ञा को संतान की प्राप्ति हुई, पुत्र का नाम यम और पुत्री का नाम यमुना था | संज्ञा भगवान सूर्यदेव का तप सहन नहीं कर पाती थी, ऐसे में वह अपनी छाया उत्पन्न कर पुत्र और पुत्री को उसे सौंपकर मायके चली गई | छाया को अपनी संतानों से कोई मोह नहीं था, लेकिन भाई-बहन में आपस में बहुत प्रेम था | यमुना शादी के बाद हमेशा भाई को भोजन पर अपने घर बुलाया करती थी, लेकिन व्यस्तता के कारण यमराज यमुना की बात को टाल दिया करते थे | क्योंकि उन्हें अपने कार्य से इतना समय नहीं मिल पाता था कि वह अपनी बहन के यहां भोजन के लिए जा सकें | लेकिन बहन के काफी जिद के बाद वह कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया को यमुना से मिलने उनके घर पहुंचे |

यमुना ने उनका स्वागत सत्कार कर माथे पर तिलक लगाकर भोजन करवाया | बहन के आदर सत्कार से प्रसन्न होकर यमदेव ने उनसे कुछ मांगने को कहा, तभी यमुना ने उनसे हर साल इसी दिन घर आने का वरदान मांगा | यमुना के इस निवेदन को स्वीकार करते हुए यम देव ने उन्हें कुछ आभूषण और उपहार दिया | मान्यता है कि इस दिन जो भाई बहन से तिलक करवाता है, उसे कभी अकाल मृत्यु का भय नहीं सताता | इस दिन को यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है |

NAS:राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वे (NAS )2021 की फ्रेमवर्क

टेक्निकल नोट फॉर एसेसमेंट फ्रेमवर्क (NAS) 2021 : NAS FRAMEWORK 2021

कक्षा तीसरी और पांचवी के लिए:

4 सेट बुकलेट होंगे। जिसमें भाषा, गणित एवं पर्यावरण विषय सम्मिलित रहेंगे।
कक्षा 3 में गणित के कुल 17 प्रश्न, ईवीएस /पर्यावरण में 15 और भाषा में 15 प्रश्न होंगे। कुल प्रश्न 47 रहेंगे। प्रत्येक विषय में पांच प्रश्न 2017 नेस में सम्मिलित एंकर प्रश्न के रूप में सम्मिलित रहेंगे।

पांचवी के लिए :

कक्षा पांचवी में गणित के कुल 20 प्रश्न, ईवीएस /पर्यावरण में 18 और भाषा में 15 प्रश्न होंगे। कुल प्रश्न 53 रहेंगे। प्रत्येक विषय में पांच प्रश्न 2017 नेस में सम्मिलित एंकर प्रश्न के रूप में सम्मिलित रहेंगे।

कक्षा आठवीं के लिए:

कक्षा आठवीं के लिए कुल 4 सेट होंगे। जिसमें मॉड्यूलर डिजाइन के अनुसार प्रत्येक सेट में केवल दो सब्जेक्ट सम्मिलित होंगे।
जैसे सेट 1 भाषा और गणित, सेट दो गणित और सामाजिक विज्ञान, सेट 3 विज्ञान और भाषा, सेट 4 सामाजिक विज्ञान और विज्ञान।

सेट में सम्मिलित दोनों विषय के 30-30 प्रश्न सम्मिलित होंगे। कुल 60 प्रश्न होंगे।
जिसमें से 6- 6 प्रश्न दोनों विषय में से 2017 के प्रश्न पत्र में से एंकर प्रश्न सम्मिलित रहेंगे।

कक्षा दसवीं के लिए:

कक्षा दसवीं के लिए कुल 5 सेट होंगे। जिसमें मॉड्यूलर डिजाइन अनुसार प्रत्येक सेट में केवल दो विषय सम्मिलित रहेंगे।
जैसे सेट एक भाषा और गणित, सेट दो गणित और सामाजिक विज्ञान, सेट 3 विज्ञान और अंग्रेजी, सेट 4 सामाजिक विज्ञान और अंग्रेजी, सेट 5 भाषा और विज्ञान।
प्रत्येक सेट में सम्मिलित दोनों विषयों के 35- 35 प्रश्न, कुल 70 प्रश्न रहेंगे। जिसमें से 7- 7 प्रश्न दोनों विषय में से 2017 के प्रश्न पत्र में से एंकर प्रश्न सम्मिलित रहेंगे।

National Achievement Test Sample Paper (Class -3) के लिए यहाँ क्लिक करे |

National Achievement Test Sample Paper (Class -5) के लिए यहाँ क्लिक करे |

National Achievement Test Sample Paper (Class -8) के लिए यहाँ क्लिक करे |

RSK MP : (Rajya Shiksha Kendra MP) : प्राथिमक एवं माध्यमिक कक्षा के लिए RSK ने जारी किये अभ्यास प्रश्न बैंक

Practice Question Bank for PS & MS अभ्यास प्रश्न बैंक : प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में मूल्यांकन को सुदृढ़ बनाने के लिए राज्य शिक्षा केन्द्र (RSK), मध्यप्रदेश द्वारा कक्षा  3 , 5 और कक्षा 8 के मुख्य विषयो के लिए अभ्यास प्रश्न बैंक तैयार कराये गये हैं

Practice Question Bank for PS & MS– प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में मूल्यांकन को सुदृढ़ बनाने के लिए राज्य शिक्षा केन्द्र (RSK), मध्यप्रदेश द्वारा कक्षा  3 , 5 और कक्षा 8 के मुख्य विषयो के लिए अभ्यास प्रश्न बैंक तैयार कराये गये हैं राज्य स्तर से तैयार किए गए ये प्रश्न बैंक राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा MP Education Portal पर अपलोड किये गए हैं.

Practice Question Bank :राज्य शिक्षा केन्द्र (RSK), मध्यप्रदेश द्वारा जारी किए गए विभिन्न विषयों के अभ्यास प्रश्न बैंक (pdf फॉर्मेट में ) आप नीचे दी जा रही लिंक से डाउनलोड कर सकते हैं |

अभ्यास प्रश्न बैंक प्राथिमक कक्षा के लिए

कक्षा – 3 के लिए

विषय –

कक्षा – 5 के लिए

विषय –

अभ्यास प्रश्न बैंक माध्यमिक कक्षा के लिए

कक्षा – 8 के लिए

विषय –

  • हिंदी के लिए – CLICK HERE
  • गणित के लिए – CLICK HERE
  • विज्ञान के लिए – CLICK HERE
  • सामाजिक विज्ञान के लिए –CLICK HERE

Practice Question Bank :राज्य शिक्षा केन्द्र (RSK), मध्यप्रदेश द्वारा जारी किए गए विभिन्न विषयों के अभ्यास प्रश्न बैंक (pdf फॉर्मेट में ) आप ऊपर दी गयी लिंक से डाउनलोड कर सकते हैं |

प्रैटिक्स टेस्ट पेपर प्राथिमक कक्षा के लिए

कक्षा -3 के लिए

सप्ताहविषयपीडीफ डाउनलोड लिंक
प्रथमसभी विषयCLICK HERE
द्वितीयसभी विषयCLICK HERE
तृतीयसभी विषयCLICK HERE
चतुर्थसभी विषयCLICK HERE
पंचमसभी विषयCLICK HERE
षष्ठमसभी विषयCLICK HERE
सप्तमसभी विषयCLICK HERE
अष्टमसभी विषयCLICK HERE
नवमसभी विषयCLICK HERE

कक्षा -5 के लिए

सप्ताहविषयपीडीफ डाउनलोड लिंक
प्रथमसभी विषयCLICK HERE
द्वितीयसभी विषयCLICK HERE
तृतीयसभी विषयCLICK HERE
चतुर्थसभी विषयCLICK HERE
पंचमसभी विषयCLICK HERE
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नवमसभी विषयCLICK HERE

प्रैटिक्स टेस्ट पेपर माध्यमिक कक्षा के लिए

कक्षा –8 के लिए

सप्ताहविषयपीडीफ डाउनलोड लिंक
प्रथमसभी विषयCLICK HERE
द्वितीयसभी विषयCLICK HERE
तृतीयसभी विषयCLICK HERE
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NAS Exam 2021 की तैयारी की प्रैक्टिस हेतु रूपरेखा

प्रैटिक्स टेस्ट पेपर उच्च कक्षा के लिए

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07/09/2021राष्ट्रिय उपलब्धि सर्वे (नेशनल अचीवमेंट सर्वे) – 2021 के संचालन हेतु अभ्यास विषयक |DOWNLOAD

कक्षा –10 के लिए

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SET-1गणितअंग्रेजी माध्यमDOWNLOAD
SET-1विज्ञानअंग्रेजी माध्यमDOWNLOAD
SET-1सामाजिक विज्ञानअंग्रेजी माध्यमDOWNLOAD
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टीचर हैंडबुक :

SETविषयमाध्यमडाउनलोड के लिए क्लिक करें
Teacher HandBookटीचर हैंडबुक – हिंदीहिंदी माध्यमDOWNLOAD
Teacher HandBookटीचर हैंडबुक – अंग्रेजीहिंदी माध्यमDOWNLOAD
Teacher HandBookटीचर हैंडबुक – गणितहिंदी माध्यमDOWNLOAD
Teacher HandBookटीचर हैंडबुक – विज्ञानहिंदी माध्यमDOWNLOAD
Teacher HandBookटीचर हैंडबुक – सामाजिक विज्ञानहिंदी माध्यमDOWNLOAD

Practice Test Paper :राज्य शिक्षा केन्द्र (RSK), मध्यप्रदेश द्वारा जारी किए गए विभिन्न विषयों के प्रैटिक्स टेस्ट पेपर(pdf फॉर्मेट में ) आप ऊपर दी जा रही लिंक से डाउनलोड कर सकते हैं |

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Naraka Chaturdashi 2021: जानें नरक चतुर्दशी कब है? क्या है महत्व और पूजा विधि

Naraka Chaturdashi 2021:-

Naraka Chaturdashi 2021- कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को नरक चतुर्दशी मनाई जाती है | इस वर्ष नरक चतुर्दशी 2021 में 3 नवंबर, बुधवार को मनाई जाएगी | जिसे रूप चौदस (Roop Chaudas) या काली चौदस (Kali Chaudas) भी कहते हैं | कृष्‍ण चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि भी कहते हैं | चतुर्दशी का त्योहार दिवाली से एक दिन पहले मनाया जाता है | इसलिए नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली भी कहते हैं |

इस दिन अभ्यंग स्नान करना बहुत ही शुभ माना जाता है | नरक चतुर्दशी को रूप चौदस, छोटी दिवाली और काली चौदस के नाम से भी जाना जाता है | इस दिन दीप दान करने से अकाल मृत्यु और यमराज के भय से मुक्ति मिलती है | दीपावली के एक दिन पहले सौन्दर्य प्राप्ति और दीर्घायु के लिए नरक चतुर्दशी मनाई जाती है | इस दिन आयु के देवता यमराज की उपासना की जाती है और सौन्दर्य प्राप्ति के लिए पूजा की जाती है |

नरक चतुर्दशी पर भगवान कृष्ण की उपासना भी की जाती है, क्योंकि इसी दिन उन्होंने नरकासुर का वध किया था | कुछ पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, आज ही के दिन हनुमान जी का जन्म भी हुआ था | जीवन में आयु या स्वास्थ्य की अगर समस्या हो तो इस दिन के प्रयोगों से दूर हो जाती है |

नरक चतुर्दशी 2021 तिथि और शुभ मुहूर्त:-

पंचांग के अनुसार 3 नंबर 2021 को प्रात: 09:02 से चतुर्दशी तिथि प्रारंभ होकर 4 नंबर 2021 प्रात: 06:03 पर समाप्त होगी | पंचांग भेद के कारण तिथि में घट-बढ़ हो सकती है | उपरोक्त मान से रूप चौदस या नरक चतुर्दशी 3 तारीख को मनाई जाएगी |

शुभ मुहूर्त :

  • अमृत काल– 01:55 से 03:22 तक
  • ब्रह्म मुहूर्त– 05:02 से 05:50 तक
  • विजय मुहूर्त – दोपहर 01:33 से 02:17 तक
  • गोधूलि मुहूर्त- शाम 05:05 से 05:29 तक
  • सायाह्न संध्या मुहूर्त- शाम 05:16 से 06:33 तक
  • निशिता मुहूर्त- रात्रि 11:16 से 12:07 तक |

दिन का चौघड़िया :

  • लाभ : प्रात: 06:38 से 08:00 तक
  • अमृत : प्रात: 08:00 से 09:21 तक
  • शुभ : प्रात: 10:43 से 12:04 तक
  • लाभ : शाम 04:08 से 05:30 तक |

रात का चौघड़िया :

  • शुभ : शाम 07:09 से 08:47 तक
  • अमृत : 08:47 से 10:26 तक
  • लाभ : 03:22 से 05:00 तक |

नरक चतुर्दशी का महत्व:- Naraka Chaturdashi 2021

दीपावली से एक दिन पहले मनाए जाने वाले पर्व को नरक चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है | नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली, रूप चौदस और काली चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है | मान्यता है कि कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन विधि विधान से पूजा करने वाले व्यक्ति को सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है |

इस दिन शाम के समय दीपदान किया जाता है | ऐसा करने से यमराज का भय समाप्त होता है और साथ ही ऐसा करने वाले व्यक्ति को कभी भी अकाल मृत्यु का भय भी नहीं सताता है | इस दिन अभ्यंग स्नान को भी अधिक महत्व दिया जाता है | इसे करने से नर्क के दोषों से मुक्ति मिलती है |

जो भी व्यक्ति नर्क चतुर्दशी के दिन अभ्यंग स्नान करता है उसके जीवन के सभी पाप समाप्त होते हैं | इतना ही नहीं नर्क चतुर्दशी के दिन तिल के तेल की मालिस भी की जाती है | वहीं इस दिन लेप करने और उबटन करने का भी विधान है | ऐसा करने से रूप और सौंदर्य में वृद्धि होती है | माना जाता है कि नर्क चतुर्दशी के दिन घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाने से यमराज घर में प्रवेश नहीं करते |

नरक चतुर्दशी की कथा:-

पुराणों के अनुसार एक राज्य में रान्तिदेव नाम का राजा राज किया करता था | वह बहुत ही ज्यादा धार्मिक था | जिस समय उसका अंतिम समय आया उस समय उसे लेने के लिए यमदूत आए और उन्होंने राजा से कहा कि अब तुम्हारा नरक जाने का समय आ चुका है | राजा ने जैसे ही यह सुना वह आश्चर्यचकित रह गया |

उसने सोचा कि मैने तो कोई भी पाप नहीं किया फिर ये यमदूत मूझे नरक क्यों ले जा रहे हैं | इस विषय में उस राजा ने यमदूतों से पूछा | इस पर यमदूतों ने कहा कि एक बार तुम्हारे महल में एक निर्धन ब्राह्मण आया था | जो तुम्हारे दरवाजे से भूखा ही लौट गया | यही कारण है कि तुम्हें नर्क जाना पड़ेगा |

यह सुनकर राजा को बहुत दुख हुआ और जब वह यमलोक गया तो उसने अपनी भूल को सुधारने के लिए यमराज से एक वर्ष का समय मांगा | यमराज ने राजा की बात मान ली और उसे एक वर्ष का समय दे दिया |

जिसके बाद वह राजा फिर से धरती लोक पर आया और ऋषियों से इस समस्या के समाधान के बारे मे पूछा | ऋषियों ने उसे अपने भूल सुधारने के लिए उसे एक उपाय बताया | उन्होंने कहा कि कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी का व्रत रखो और ब्राह्मणों को भोजन कराओं | अगर तुम ऐसा करते हो तो तुम्हें नर्क नहीं जाना पड़ेगा | जिसके बाद राजा ने ऐसा ही किया | जिसके बाद उसे नर्क की जगह स्वर्ग की प्राप्ति हुई |

नरक चतुर्दशी पूजा विधि:-

  • नरक चतुर्दशी के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठना चाहिए और शरीर पर तिल के तेल की मालिश करनी चाहिए |
  • इसके बाद औषधिय पौधे को सिर के चारो और तीन बार घूमाना चाहिए |
  • ऐसा करने के बाद ही स्नान करना चाहिए | इस स्नान को अभ्यंग स्नान कहते है | जो नरक चतुर्दशी के दिन अत्यंत ही महत्वपूर्ण माना जाता है |
  • इसके बाद शाम को आपको फिर से स्नान करके साफ वस्त्र धारण करने चाहिए | स्नान करने के बाद दक्षिणा हाथ में रखकर यमराज को याद करें और उनसे अपने पापों के लिए क्षमा याचना करें |
  • इसके बाद एक तेल का दीपक यमराज के नाम से जलाएं और उसे अपने घर के मुख्य द्वार पर रख दें |
  • ऐसा करने के बाद दक्षिण दिशा में खड़े होकर अपने पितरों को याद करें और उनके नाम से भी एक तेल का दीपक जलाएं |
  • नरक चतुर्दशी को रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है | इसलिए इस दिन श्री कृष्ण की पूजा भी अवश्य करें |
  • अंत में किसी निर्धन व्यक्ति को दीपों का दान अवश्य करें |
  • नरक चतुर्दशी के दिन आधी रात में अपने घर का बेकार सामान घर से बाहर फेंक दे ऐसा करने से आपको घर की दरिद्रता दूर हो जाएगी |

नरक चतुर्दशी स्नान विधि:-

  • इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करने का महत्व है | कहते हैं इससे रूप में निखार आ जाता है | स्नान के लिए कार्तिक अहोई अष्टमी के दिन एक तांबे के लौटे में जल भरकर रखा जाता है और उसे स्नान के जल में मिलाकर स्नान किया जाता है | मान्यता के अनुसार ऐसा करने से नरक के भय से मुक्ति मिलती है |
  • स्नान के दौरान तिल के तेल से शरीर की मालिश करें और उसके बाद औधषीय पौधा अपामार्ग अर्थात चिरचिरा को सिर के ऊपर से चारों ओर 3 बार घुमाने का प्रचलन है |
  • स्नान के बाद दक्षिण दिशा की ओर हाथ जोड़कर यमराज से प्रार्थना करें। ऐसा करने से संपूर्ण वर्ष के पापों का नाश हो जाता है |

Nishtha FLN Training Module 3 & 4 प्रशिक्षण लिंक माह नवम्बर

Nishtha FLN Training Module 3 & 4

कक्षा 1 से 5 के शिक्षकों के लिए –

निष्ठा (FLN 3.0) बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान पर आधारित कोर्स शृंखला अब दीक्षा ऐप पर उपलब्ध है।

कोर्स शुरू करने की तिथि –
1 नवंबर 2021
कोर्स समाप्त करने की तिथि –
30 नवंबर 2021

कोर्स पर जाने हेतु कृपया लिंक पर क्लिक करें -👇👇

  1. बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को समझना : बच्चे कैसे सीखते हैं ?
Description : प्रशिक्षण 3 लिंक:  https://bit.ly/3EtJmAC : बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को समझना : बच्चे कैसे सीखते हैं ?
बच्चों की संज्ञानात्मक क्षमताओं और सीखने की शैली में भिन्नता होती है तभी तो वे अलग ढंग से सोचते और व्यवहार करते हैं, विश्लेषण भी अलग ढंग से करते है और उसी के अनुसार निर्णय लेते हैं। इन सभी बातों की समझ बच्चों को सीखने के अनुभव प्रदान करने से पहले उनकी सीखने की जरूरतों को जानने में शिक्षक की मदद करती है। इसी बात को ध्‍यान में रखकर इस कोर्स को तैयार किया गया है।

Nishtha FLN Training Module 3:बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को समझना : बच्चे कैसे सीखते हैं ? प्रश्न्नोतरी

  1. बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान में समुदाय एवं अभिभावकों की सहभागिता
Description : प्रशिक्षण 4 लिंक:  https://bit.ly/3pQTsaz : बुनियादी साक्षरता एवं संख्‍याज्ञान में समुदाय एवं अभिभावकों की सहभागिता
बुनियादी साक्षरता एवं संख्‍याज्ञान मिशन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सामुदायिक सहभागिता महत्वपूर्ण है। य‍ह प्रशि‍क्षण कार्यक्रम विद्यालय, माता – पिता, परिवार और समुदाय के समन्वि‍त प्रयासों से बच्चों की शि‍क्षा को सहज बनाने के लिए विकसित किेया गया है। प्रशि‍क्षण के माध्‍यम से हम समन्वि‍त प्रयासों को सहज बनाने के तरीकों को जानने का प्रयास करेंगे।

Nishtha FLN Training Module 4: NISHTHA FLN_बुनियादी साक्षरता एवं संख्‍याज्ञान में समुदाय एवं अभिभावकों की सहभागिता प्रश्न्नोत्तरी

यह दोनों कोर्स कक्षा 1 से 5 तक पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों के साथ ही जिला अधिकारियों, डाइट फेकल्टी, ब्लॉक अधिकारियों सहित सभी जनशिक्षकों के लिए अनिवार्य हैं।

महत्वपूर्ण बिंदु :

1) कोर्स करने हेतु दीक्षा ऐप पर अपने यूनीक आईडी (जो आप एमशिक्षा मित्र एप पर उपयोग करते है) से ही लॉग इन करें।

2) उक्त दोनों कोर्स राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा निर्देशित समय-सीमा में पूर्ण करना आवश्यक है।

3) प्रत्येक कोर्स को क्रमानुसार ही पूर्ण करें, पहले कोर्स को समझ के साथ पूर्ण करने के बाद ही दूसरा कोर्स शुरू करे।

3) कोर्स में दी गई पोर्टफ़ोलियो गतिविधियों को पूर्ण करें तथा अपने शिक्षक साथियों से साझा करें।

4) प्रत्येक कोर्स के अंत में दी गई मूल्यांकन प्रश्नोत्तरी में न्यूनतम 70% अंक प्राप्त होने पर ही डिजिटल प्रमाण-पत्र प्रदान किये जायेंगे। इस हेतु आपको अधिकतम 3 प्रयास दिए जाएंगे। अतः कोर्स को ध्यानपूर्वक पूर्ण करें।

5) सर्वोच्च महत्वपूर्ण : प्रत्येक कोर्स की सीख को अपनी कक्षा के बच्चों को सिखाने की दिशा में लेकर जाए।

                धन्यवाद।🙏

नवंबर 2021 के लिए सब्सिडी और नॉन-सब्सिडी वाले LPG गैस सिलिंडर के नए दाम चेक करें

LPG gas cylinder prices November 2021:-

LPG gas cylinder prices November 2021:- केंद्र सरकार द्वारा एलपीजी गैस सिलेंडर नई कीमतें नवंबर 2021 जारी की गई हैं | तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) गैस सिलेंडर की कीमत में फिर से बढ़ोतरी हुई | लोग अब दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, मुंबई और अन्य शहरों जैसे शीर्ष मेट्रो शहरों में एलपीजी गैस सिलेंडर नई कीमतें (14.2 किलोग्राम / 19 किलोग्राम सिलेंडर दर) की जांच कर सकते हैं |

दिवाली से पहले कॉमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर के दाम में भारी बढ़ोत्तरी की गई है और आज से इसके दाम 266 रुपये बढ़ा दिए गए हैं | लेकिन फिलहाल राहत की बात ये है कि आज घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ है | बता दें कि 6 अक्टूबर को ही घरेलू एलपीजी के दाम बढ़ाए गए थे | वहीं, एक अक्टूबर को कॉमर्शियल सिलेंडर में 19 किलो वाले सिलेंडर के दाम बढ़ाए गए थे | लेकिन आज कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम में 266 रुपये की बढोत्तरी की गई है |

आज सिलेंडर के दाम में हुई इस बढ़ोतरी के बाद अब दिल्ली में कमर्शियाल सिलेंडर 2000 रुपये के पार पहुंच गया है | इससे पहले यह 1733 रुपये में मिल रहा था | मुंबई में 1683 रुपये में मिलने वाला 19 किलो का सिलेंडर अब 1950 रुपये में मिलेगा तो वहीं, कोलकाता में अब 19 किलो वाला इंडेन गैस सिलेंडर 2073.50 रुपये का हो गया है | वहीं, चेन्नई की बात करें तो यहां अब 19 किलो वाले सिलेंडर के लिए 2133 रुपये चुकाने पड़ेंगे |

नवंबर 2021 महीने में सिलेंडर खरीदने के लिए ग्राहक को कितनी राशि देनी होगी, यह जानने के लिए लोग सब्सिडी वाले और गैर-सब्सिडी वाले घरेलू गैस सिलेंडर दरों की जांच कर सकते हैं | इसके अलावा, लोग सरकार द्वारा अपने बैंक खातों में हस्तांतरित की जाने वाली सब्सिडी राशि की गणना भी कर सकते हैं |

लोग अब पिछले महीनों में LPG गैस सिलेंडर की कीमतों के साथ इन नए सिलेंडर दरों की तुलना कर सकते हैं | नवंबर 2021 महीने में सिलेंडर खरीदने के लिए ग्राहक को कितनी राशि देनी होगी, यह जानने के लिए लोग सब्सिडी वाले और गैर-सब्सिडी वाले घरेलू गैस सिलेंडर दरों की जांच कर सकते हैं | इसके अलावा, लोग सरकार द्वारा उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की जाने वाली सब्सिडी राशि की गणना भी कर सकते हैं |

तेल विपणन कंपनियों (OMC) द्वारा प्रत्येक महीने की पहली तारीख को सब्सिडी वाले और गैर-सब्सिडी वाले एलपीजी गैस सिलेंडर दोनों की कीमतें संशोधित की जाती हैं | केंद्र सरकार केवल प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) योजना के तहत 1 वर्ष में प्रत्येक घर में पहले 12 गैस सिलेंडर पर सब्सिडी प्रदान करता है | LPG गैस सिलेंडर के लिए सभी अतिरिक्त खरीद बाजार दरों पर करनी होगी |

LPG gas cylinder prices October 2021

November 2021 LPG Gas Cylinder Rates:-

मेट्रो शहरों में बिना सब्सिडी के उपभोक्ताओं के लिए घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की प्रभावी लागत 14.2 किलोग्राम और 19 किलोग्राम एलपीजी गैस सिलेंडर इस प्रकार है: – LPG gas cylinder prices November 2021:-

Metro CitiesNon-Subsidized Prices of 14.2 Kg LPG Gas CylindersNon-Subsidized Prices of 19 Kg LPG Gas Cylinders
DelhiRs. 884.50 (+25.00)1736.50 (+43.50)
KolkataRs. 911.00 (+25.00)1805.50 (+35)
MumbaiRs. 884.50 (+25.00)1685.00 (+35.50)
ChennaiRs. 900.50(+25.00)1867.50 (+36.50)

नागरिक https://cx.indianoil.in/webcenter/portal/Customer/pages_productprice लिंक के माध्यम से अन्य शहरों में नवंबर 2021 के लिए 14.2 किलोग्राम / 19 किलोग्राम LPG Subsidized / Non-Subsidized गैस सिलिंडर की कीमतें भी देख सकते हैं |

LPG गैस सिलेंडर की नई दरों की तुलना पिछले महीनों के साथ करें:-

लोग अब पिछले महीनों में दरों के साथ वर्तमान एलपीजी गैस सिलेंडर दरों की तुलना कर सकते हैं: –

बिना सब्सिडी के 14.2 किलोग्राम एलपीजी गैस सिलेंडर की पिछली कीमतों (महीनेवार) की तुलना करें Click Here

बिना सब्सिडी के 19 किलोग्राम एलपीजी गैस सिलेंडर की पिछली कीमतों (महीनेवार) की तुलना करें Click Here

उत्तराखंड सरकार ने मुख्यमंत्री घसियारी कल्याण योजना 2021 की शुरुआत की

उत्तराखंड मुख्यमंत्री घसियारी कल्याण योजना 2021:-

उत्तराखंड सरकार जल्द ही नई मुख्यमंत्री घसियारी कल्याण योजना /Mukhyamantri Ghasiyari Kalyan Yojana (MGKY) 2021 2021 शुरू करने जा रही है | इस मुख्यमंत्री घसियारी कल्याण योजना (Mukhyamantri Ghasiyari Kalyan Yojana) से प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में निवास करने वाली हजारों महिलाओं को लाभ होगा | मुख्यमंत्री घसियारी कल्याण योजनान्तर्गत 7,771 केन्द्रों के माध्यम से पर्वतीय क्षेत्रों के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं के लिए चारे की आपूर्ति की जायेगी | इन क्षेत्रों में पशुपालकों को पैक्ड साइलेज और टोटल मिक्स राशन (TMR) उपलब्ध कराया जाएगा | उत्तराखंड मुख्यमंत्री घसियारी कल्याण योजना (Uttrakhand Mukhyamantri Ghasiyari Kalyan Yojana) उन महिलाओं के लिए एक बड़ी राहत के रूप में आएगी, जिन्हें जंगल से चारा इकट्ठा करते समय कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और खतरों का सामना करना पड़ता है |

उत्तराखंड घसियारी कल्याण योजना को कैबिनेट की मंजूरी:-

पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ने 25 फरवरी 2021 को मुख्यमंत्री घास्यारी कल्याण योजना (Mukhyamantri Ghasyari Kalyan Yojana) को मंजूरी दी है | कैबिनेट बैठक में लिए गए 7 अहम फैसलों में से एक उत्तराखंड में पूर्व सीएम घास्यारी कल्याण योजना को मिली मंजूरी | अब अमित शाह और मौजूदा सीएम पुष्कर सिंह धामी चुनावी राज्य में 1 नवंबर 2021 को घसियारी कल्याण योजना का शुभारंभ करने जा रहे हैं |

उत्तराखंड घसियारी कल्याण योजना का कार्यान्वयन:-

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट ने पहले वित्तीय वर्ष 2021-22 में उत्तराखंड मुख्यमंत्री घासारी कल्याण योजना (MGKY) के लिए 16.78 करोड़ रुपये की राशि को मंजूरी दी थी | राज्य सरकार मक्के की सहकारी खेती, साइलेज और टीएमआर के उत्पादन की सुविधा के साथ-साथ लाभार्थियों को इसकी आपूर्ति की व्यवस्था पहले ही कर चुका है | उत्तराखंड सरकार मवेशियों को इस योजना के तहत 3 रुपये प्रति किलोग्राम में चारे उपलब्ध कराने का इरादा रखती है |

उत्तराखंड मुख्यमंत्री घासियारी कल्याण योजना की मुख्य विशेषताएं:-

  • योजना के तहत महिलाओं को चारपाटी के लिए जंगल नहीं जाना पड़ेगा, जिसके लिए रियायती दरों पर पशुओं का पौष्टिक भोजन दिया जाएगा |
  • उत्तराखंड के सुदूर ग्रामीण पहाड़ी क्षेत्रों के पशुपालकों को उनके घर पर पैकेज्ड साइलेज, टोटल मिक्स्ड राशन टीएमआर दिया जाएगा |
  • इसका उद्देश्य रियायती दरों पर साइलेज और टीएमआर फीड ब्लॉक उपलब्ध कराकर महिलाओं को चारा काटने के कार्य से मुक्त करना है |
  • पशुओं को चारा के लिए जंगल से जंगल नहीं भटकना पड़ेगा |
  • पशुओं के स्वास्थ्य और दुग्ध उत्पादन में होगा दोहरा लाभ |
  • 2,000 से अधिक किसान परिवारों को उनकी 2000 एकड़ से अधिक भूमि पर मक्के की सामूहिक सहकारी खेती से जोड़ा जाएगा | मक्का उत्पादक किसानों को उचित मूल्य दिलाने की व्यवस्था की गई है |
  • मवेशियों को भी उनके पशुओं के लिए पौष्टिक चारा मिलेगा और पहाड़ों में महिलाओं के सिर से बोझ कम होगा |

उत्तराखंड में इस संपूर्ण मुख्यमंत्री घसियारी कल्याण योजना की लागत 19 करोड़ रुपये अनुमानित है |

मध्यप्रदेश स्थापना दिवस – जानें मध्य प्रदेश की स्थापना से जुड़े कुछ अनसुने किस्से

MP Foundation Day मध्यप्रदेश स्थापना दिवस :-

आज प्रदेश का 66वां स्थापना दिवस है | आज ही के दिन 1 नवम्बर 1956 को यह अस्तित्व में आया | मध्य प्रदेश कभी मध्य भारत में आता था | लेकिन अब स्वयं एक राज्य के रूप में पहचाना जाने लगा है | जिसकी राजधानी भोपाल है | इस दौरान पूरे प्रदेश में हर जगह अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे |

इस दौरान राजधानी भोपाल के ऐतिहासिक लाल परेड मैदान में होने वाले राज्य स्तरीय समारोह के पहले दिन मुंबई के अमित त्रिवेदी के गानों से शाम सजेगी | साथ ही नई दिल्ली के गुलाम साबिर निजामी बन्धुओं की सूफी कव्वाली भी होगी | वहीं प्रदेशभर में अलग-अलग अंदाज में कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा | साथ ही, प्रदेश की कई सरकारी और गैर सरकारी इमारतों को इस दिन के जश्न के रूप में दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है |

मध्य प्रदेश से जुड़े किस्से:-

  • 1 नवम्बर 2021 दिन शुक्रवार को मध्यप्रदेश अपना 66वां स्थापना दिवस मना रहा है |
  • मध्य प्रदेश 1 नवंबर, 2000 तक क्षेत्रफल के आधार पर भारत का सबसे बड़ा राज्य था |
  • 1 नवंबर, 2000 को मध्यप्रदेश राज्य से 14 जिले अलग कर छत्तीसगढ़ राज्य छत्तीसगढ़ की स्थापना हुई थी |
  • मध्य प्रदेश की सीमाऐं पांच राज्यों की सीमाओं से मिलती है। इसके उत्तर में उत्तर प्रदेश, पूर्व में छत्तीसगढ़, दक्षिण में महाराष्ट्र, पश्चिम में गुजरात, तथा उत्तर-पश्चिम में राजस्थान है |
MP Foundation Day

मध्य प्रदेश के अस्तित्व से जुड़े किस्से:-

  • 15 अगस्त, 1947 के पूर्व देश में कई छोटी-बड़ी रियासतें और देशी राज्य अस्तित्व में थे |
  • आजादी के बाद उन्हें स्वतंत्र भारत में सम्मिलित और एकीकृत किया गया |
  • 26 जनवरी, 1950 को संविधान लागू होने के बाद देश में सन् 1952 में पहले आम चुनाव हुए, जिसके कारण संसद एवं विधान मण्डल कार्यशील हुए |
  • 1956 में अस्तित्व में आए इस प्रदेश को पहले मध्य भारत कहकर संबोधित किया जाता था |
  • इसका पुनर्गठन भाषायी आधार पर हुआ |
  • प्रशासनिक दृष्टि से इन्हें श्रेणियों में विभाजित किया गया था |
  • सन् 1956 में राज्यों के पुनर्गठन के फलस्वरूप 1 नवंबर, 1956 को नया राज्य मध्यप्रदेश अस्तित्व में आया |
  • 1 नव‍ंबर,1956 को मध्य प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री के तौर पर पं.रविशंकर शुक्ल का पहला भाषण लाल परेड ग्राउंड पर हुआ था |
  • इसके घटक राज्य मध्यप्रदेश, मध्यभारत, विंध्य प्रदेश और भोपाल थे, जिनकी अपनी विधान सभाएं थीं |
  • डॉ. पटटाभि सीतारामैया मध्यप्रदेश के पहले राज्यपाल हुए |
  • पहले मुख्यमंत्री के रूप में पं रविशंकर शुक्ल ने शपथ ली थी |
  • पं कुंजी लाल दुबे को मध्यप्रदेश का पहला अध्यक्ष बनने का गौरव प्राप्त हुआ |
  • शुरुआत में राजधानी के लिए ग्वालियर और इंदौर दावा कर रहे थे पर कुछ समय बाद जबलपुर भी नए राज्य की राजधानी का दावा करने लगा |
  • दूसरी ओर भोपाल के नवाब भारत के साथ संबंध ही नहीं रखना चाहते थे | वे हैदराबाद के निजाम के साथ मिलकर भारत का विरोध कर रहे थे |
  • क्रेंद्र सरकार नहीं चाहती थी कि देश के हृदय स्थल में राष्ट्र विरोधी गतिविधियां बढ़ें | इसके चलते सरदार पटेल ने भोपाल पर पूरी नजर रखने के लिए उसे ही मध्यप्रदेश की राजधानी बनाने का निर्णय लिया |
  • 1 नवंबर 1956 को प्रदेश के गठन के साथ ही इसकी राजधानी और विधानसभा का चयन भी कर लिया गया |
  • मध्यप्रदेश की राजधानी के रूप में भोपाल को चुना गया |