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Chhath Puja क्यों मनाई जाती है? 2022 में छठ पूजा कब है यहाँ जाने

Chhath Puja- हेलो दोस्तों आज हम इस आर्टिकल के माध्यम से जानेगे की छठ पूजा क्यों मनाई जाती है? छठ पूजा क्या है और यह पूजा कौन करता है? हो सकता है आप लोगों को छठ पूजा के बारे में पहले से ही जानकारी हो। लेकिन अभी भी बहुत से लोग यह नहीं जानते हैं कि छठ पूजा क्यों मनाई जाती है?

अगर आप भी नहीं जानते हैं तो आज का यह आर्टिकल के माध्यम से जान जायेगे , तो बने रहिये हमारे साथ।  दोस्तों Chhath Puja हिंदू धर्म के लोगों द्वारा मनाया जाने वाला एक बहुत बड़ा त्योहार है, जो लगातार चार दिनों तक मनाया जाता है। छठ पर्व को छठ पूजा, छठ, डाला छठ, छठ माई, छठ माई, षष्ठी सूर्य और षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है।

यह त्योहार मुख्य रूप से भारत के बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है, जबकि अन्य देशों की बात करें तो यह त्योहार नेपाल के तराई क्षेत्रों में भी मनाया जाता है। Chhath Puja सूर्य को समर्पित है। पौराणिक मान्यता के अनुसार छठी माता भगवान सूर्य की बहन हैं। छठ पूजा का त्योहार खासकर बिहार में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। बिहार के लोग इसे अपना सबसे बड़ा त्योहार मानते हैं और एक तरह से यह त्योहार उनकी संस्कृति बन गया है. अब बात आती है छठ पूजा क्यों मनाई जाती है?

छठ पूजा 2022 में कब है?

दोस्तों 2022 में 30 अक्टूबर, रविवार को छठ पूजा है।

छठ पूजा क्यों मनाते हैं? (Chhath Puja)

छठ पूजा उत्तर भारत में एक महत्वपूर्ण त्योहार है। छठ पूजा उत्तर भारत में एक महत्वपूर्ण त्योहार है, मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है। भक्त इन चार दिनों के दौरान हिंदू सूर्य देव, सूर्य देव की पूजा करते हैं। छठ पूजा मनाने के लिए महिलाएं 36 घंटे का निर्जला व्रत रखती हैं।

यह त्योहार सूर्य देव (भगवान सूर्य) और छठी मैया (सूर्य देव की बहन) को समर्पित है, जिनकी इस दिन पूजा की जाती है। कुछ विश्वासियों का कहना है कि छठ पूजा भी भगवान सूर्य के पुत्र और अंग देश के राजा कर्ण द्वारा की गई थी, जो बिहार में आधुनिक भागलपुर है।

एक अन्य किंवदंती के अनुसार, पांडवों और द्रौपदी ने भी पूजा की थी भगवान राम ने 14 साल के वनवास के बाद अयोध्या लौटने पर भगवान सूर्य की पूजा की थी। आमतौर पर छठ पूजा के दौरान महिलाएं व्रत रखती हैं और दिवाली के बाद त्योहार की तैयारी शुरू हो जाती है

छठ पूजा कैसे मनाई जाती है?

Chhath Puja का त्योहार मुख्य रूप से बिहार में मनाया जाता है। बिहार में यह पर्व बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। छठ पूजा उत्सव का मुख्य भाग छठ व्रत है।

छठ व्रत में भोजन के बिना भोजन और पानी रखना, कमर तक पानी में खड़े रहना, सूर्य को अर्घ्य देना, एकांत में प्रसाद ग्रहण करना, स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना आदि जैसे सख्त नियम शामिल हैं। इस दिन सूर्य उषा की दोनों पत्नियां यानी सूर्योदय और प्रत्यूषा यानी सूर्यास्त की भी पूजा की जाती है।

षष्ठी माता के लोकगीत बिहार में बहुत लोकप्रिय हैं। छठ पूजा की शुरुआत के साथ ही घरों और मंदिरों से छठ माता लोक गीतों की गूँज सुनाई देती है। छठ पूजा बिहार की परंपरा बन गई है।

छठ पूजा करते समय अनुष्ठान –

छठ पूजा के पहले दिन को नहाय खाये के नाम से जाना जाता है। पहले दिन सुबह स्नान किया जाता है और उसके बाद नए कपड़े पहनकर प्रार्थना की जाती है। इसके बाद, भक्त प्रसाद के रूप में चावल और चने की दाल का सेवन करते हैं।

दूसरे दिन को छठ खरना कहा जाता है। इस दिन रात के समय गुड़ से बना खीर प्रसाद खाया जाता है। हलवा मिट्टी के चूल्हे पर बनाया जाता है। सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद महिलाएं प्रसाद का सेवन करती हैं और 36 घंटे तक व्रत रखती हैं।

तीसरे दिन को संध्या अर्घ्य कहा जाता है। इस दिन महिलाएं नए कपड़े पहनती हैं और डूबते सूरज को अर्घ्य देने के लिए नदी या तालाब में जाती हैं। उपवास तीसरे दिन की पूरी रात तक चलता है।

छठ के चौथे और अंतिम दिन को उषा अर्घ्य के नाम से जाना जाता है। इस दिन व्रत रखने वाली महिलाएं जल में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देती हैं। इसके बाद महिलाएं प्रसाद के साथ 36 घंटे का उपवास तोड़ती हैं।

छठ पूजा का महत्व

छठ पूजा का महत्व न केवल पौराणिक दृष्टिकोण से बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी माना गया है। छठ पूजा पर भगवान सूर्य की विशेष पूजा की जाती है। सूर्य की किरणें अत्यंत लाभकारी मानी जाती हैं।

छठ पूजा के त्योहार में प्राकृतिक चीजों का ही प्रयोग किया जाता है जैसे बांस, प्राकृतिक फल और फूल, गन्ने का रस आदि। छठ पूजा व्रत प्राकृतिक सुंदरता और स्वास्थ्य लाभ के लिए रखा जाता है।

ऐसा माना जाता है कि महिलाएं पुत्र रत्न की प्राप्ति और पुत्र की भलाई की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं। छठ व्रत का पालन करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी यह दिन विशेष माना जाता है।

निष्कर्ष –

दोस्तों उम्मीद करता हूँ आज इस आर्टिकल के माध्यम से आप लोगों को छठ पूजा क्यों मनाई जाती है? छठ पूजा क्या है और यह पूजा कौन करता है? इन सभी सवालो के बारे में सारी जानकारी मिल गई होगी। दोस्तों फिर भी, अगर आप हमसे इस आर्टिकल से जुड़े कुछ सवाल हमसे पूछना चाहते हैं तो नीचे कमेंट करके पूछ सकते हैं हमारी टीम आपका जवाब जरूर देगी , कृपया अपने दोस्तों के साथ जरूर इस आर्टिकल को साझा करे ताकि उनको भी यह जानकारी मिल सके धन्यवाद।

Chhath Puja 2022: कौन हैं छठ मैया ? जानिए भगवान सूर्य और छठ मैया की पूजा क्यों महत्वपूर्ण है

Chhath Puja 2022:-

छठ सूर्य और छठी माता की उपासना का पर्व है | हिन्दू आस्था का यह एक ऐसा पर्व है जिसमें मूर्ति पूजा शामिल नहीं है | इस पूजा में छठी मईया के लिए व्रत किया जाता है | यह व्रत कठिन व्रतों में से एक माना जाता है | इसलिए छठ पूजा के दौरान कई बातों का ध्यान रखा जाता है |

छठ पूजा का प्रारंभ दो दिन पूर्व चतुर्थी तिथि को नहाय खाय से होता है, फिर पंचमी को लोहंडा और खरना होता है | उसके बाद षष्ठी तिथि को छठ पूजा होती है, जिसमें सूर्य देव को शाम का अर्घ्य अर्पित किया जाता है | इसके बाद अगले दिन सप्तमी को सूर्योदय के समय में उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं और फिर पारण करके व्रत को पूरा किया जाता है | तिथि के अनुसार, छठ पूजा 4 दिनों की होती है |

छठ पर्व पर क्यों की जाती है सूर्य की आराधना:-

सूर्य को ग्रंथों में प्रत्यक्ष देवता यानी ऐसा भगवान माना है जिसे हम खुद देख सकते हैं | सूर्य ऊर्जा का स्रोत है और इसकी किरणों से विटामिन डी जैसे तत्व शरीर को मिलते हैं | दूसरा, सूर्य मौसम चक्र को चलाने वाला ग्रह है | ज्योतिष के नजरिए से देखा जाए तो सूर्य आत्मा का ग्रह माना गया है | सूर्य पूजा आत्मविश्वास जगाने के लिए की जाती है |

पुराणों के नजरिए से देखें तो सूर्य को पंचदेवों में से एक माना गया है, ये पंच देव हैं ब्रह्मा, विष्णु, शिव, दुर्गा और सूर्य | किसी भी शुभ काम की शुरुआत में सूर्य की पूजा अनिवार्य रूप से की जाती है | शादी करते समय भी सूर्य की स्थिति खासतौर पर देखी जाती है | भविष्य पुराण से ब्राह्म पर्व में श्रीकृष्ण ने अपने पुत्र सांब को सूर्य पूजा का महत्व बताया है | बिहार में मान्यता प्रचलित है कि पुराने समय में सीता, कुंती और द्रोपदी ने भी ये व्रत किया था |

सूर्य की ही बहन हैं छठ माता:-

माना जाता है कि छठ माता सूर्यदेव की बहन हैं | जो लोग इस तिथि पर छठ माता के भाई सूर्य को जल चढ़ाते हैं, उनकी मनोकामनाएं छठ माता पूरी करती हैं | छठ माता बच्चों की रक्षा करने वाली देवी हैं | इस व्रत को करने से संतान को लंबी आयु का वरदान मिलता है | मार्कण्डेय पुराण में इस बात का उल्लेख मिलता है कि प्रकृति ने अपने आप को छह भागों में विभाजित किया है | इनके छठे अंश को सर्वश्रेष्ठ मातृ देवी के रूप में जाना जाता है, जो ब्रह्मा की मानस पुत्री हैं | माना ये भी जाता है कि देवी दुर्गा का छठवां रूप कात्यायनी ही छठ मैया हैं |

छठ व्रत की कथा:-

कथा सतयुग की है | उस समय शर्याति नाम के राजा थे | राजा की कई पत्नियां थीं, लेकिन बेटी एक ही थी | उसका नाम था सुकन्या | एक दिन राजा शिकार खेलने गए | साथ में सुकन्या भी थीं | जंगल में च्यवन नाम के ऋषि तपस्या कर रहे थे | ऋषि काफी समय से तपस्या कर रहे थे, इस वजह से उनके शरीर के आसपास दीमकों ने घर बना लिए थे | सुकन्या ने खेलते हुई दीमक की बांबी में सूखी घास के कुछ तिनके डाल दिए | उस जगह पर ऋषि की आंखें थीं | तिनकों से ऋषि की आंखें फूट गईं | इससे ऋषि गुस्सा हो गए, उनकी तपस्या टूट गई |

जब ये बात राजा को मालूम हुई तो वे माफी मांगने के लिए ऋषि के पास पहुंचे | राजा ने ऋषि को अपनी बेटी सुकन्या सेवा के लिए सौंप दी | इसके बाद सुकन्या ऋषि च्यवन की सेवा करने लगी | कार्तिक मास में एक दिन सुकन्या पानी भरने जा रही थी, तभी उसे एक नागकन्या मिली | नागकन्या ने कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को सूर्य पूजा और व्रत करने के लिए कहा | सुकन्या ने पूरे विधि-विधान और सच्चे मन से छठ का व्रत किया | व्रत के प्रभाव से च्यवन मुनि की आंखें ठीक हो गईं | तभी से हर साल छठ पूजा का पर्व मनाया जाने लगा |

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Happy Dhanteras 2022

धनत्रयोदशी जिसे धनतेरस के रूप में भी जाना जाता है, पांच दिवसीय दिवाली उत्सव का पहला दिन है | धनतेरस हिंदू त्योहार दिवाली की शुरुआत का प्रतीक है | धनतेरस पूरे भारत और पड़ोसी देश नेपाल में भी मनाया जाता है | धनतेरस शब्द संस्कृत के दो शब्दों ‘धन’ और ‘तेरस’ से मिलकर बना है (Happy Dhanteras 2022 Wish)|

‘धन’ का अर्थ है वैभव (Wealth) और ‘तेरस’ का तात्पर्य चंद्रमा के चक्र में तेरहवें दिन से है | हिंदू मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस के दिन सोना, चांदी और कीमती सामान खरीदना बेहद शुभ माना जाता है | धनतेरस के दिन, भक्त देवी लक्ष्मी से प्रार्थना करते हैं जो धन, भाग्य और समृद्धि की देवी हैं |

happy laxmi mata image

एक पौराणिक कथा के अनुसार धनत्रयोदशी के दिन, दूधिया सागर के मंथन के दौरान देवी लक्ष्मी समुद्र से बाहर आईं | इसलिए, भगवान कुबेर के साथ धन की देवी, देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है, जो त्रयोदशी के शुभ दिन होती है | हालांकि, धनत्रयोदशी के दो दिनों के बाद अमावस्या पर लक्ष्मी पूजा को अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है |

Happy Dhanteras 2022 Quotes :-

इस धनतेरस अपने करीबियों को अपने परिवार वालों को अपने चाहने वालों को इन संदेशों से धनतेरस की शुभकामनाएं दें:-

आज से ही आपके यहाँ धन की बरसात हो, माँ लक्ष्मी का वास हो, संकटों का नाश हो; उन्नति का सर पर ताज हो और घर में शांति का वास हो। Happy Dhanteras !

घनर घनर बरसे जैसे घटा, वैसे ही हो धन की वर्षा; मंगलमय हो यह त्यौहार, भेंट में आये उपहार ही उपहार। Happy Dhanteras !

Happy Dhanteras 2022

ये धनतेरस कुछ खास हो, दिलों में खुशियां, घर में सुख का वास हो; हीरे मोती पर आपका राज हो, मिटे दूरियां, सब आपके पास हो। Happy Dhanteras !

सोने का रथ, चांदनी की पालकी, बैठकर जिसमें माँ लक्ष्मी आई; देने आपको और आपके पुरे परिवार को, धनतेरस की बधाई।

लक्ष्मी माता का नूर आप पर बरसे, हर कोई आपसे लोन लेने को तरसे; भगवान आपको दे इतना धन, की आप चिल्लर को तरसे। धनतेरस की हार्दिक बधाई।

Happy Dhanteras 2022

दीप जले तो रोशन आपका जहान हो, पूरा आपका हर एक अरमान हो। माँ लक्ष्मी जी की कृपा बनी रहे आप पर, इस धनतेरस पर आप बहुत धनवान हो। Happy Dhanteras !

धन की ज्योत का प्रकाश, पुलकित धरती, जगमग आकाश; आज ये प्रार्थना है, आप के लिए ख़ास, धनतेरस के शुभ दिन, पूरी हो हर आस। धनतेरस की शुभकामना।

दिनों दिन बढ़ता जाए आपका कारोबार, परिवार में बना रहे स्नेह और प्यार; होती रहे सदा आप पर धन की बौछार, ऐसा हो आपका धनतेरस का त्यौहार। Happy Dhanteras !

आपके घर में धन की बरसात हो, लक्ष्मी का वास हो; संकटों का नाश हो, शान्ति का वास हो। हैप्पी धनतेरस।

धन धान्य भरी है धनतेरस, धनतेरस का दिन है बड़ा ही मुबारक; माता लक्ष्मी है इस दिन की संचालक, आओ मिल करें पूजन उनका जो है जीवन की उद्धारक। Happy Dhanteras !

Happy Dhanteras 2022

धनतेरस का ये प्यारा त्यौहार, जीवन में लाये खुशियां अपार; माता लक्ष्मी विराजे आपके द्वार, सभी कामना करे आपकी स्वीकार। Happy Dhanteras !

धन की बरसात हो,
खुशियों का आगाज हो,
आपको जीवन का हर सुख प्राप्त हो
माता लक्ष्मी का आपके घर वास हो.

धन धन्य भरी है धनतेरस.. धनतेरस का दिन है बड़ा ही मुबारक, माता लक्ष्मी है ये दिन की संचालक.. चलो मिलकर करे पूजा उनकी.. क्यों के लक्ष्मी जी ही तो है जीवन की उद्धारक. Happy Dhanteras 2020

सोने का रथ, चांदी की पालकी,बैठकर जिसमें है लक्ष्मी मां है आयी
देने आपके परिवार को धनतेरस की बधाई धनतेरस की हार्दिक बधाई।

खूब मीठे मीठे पकवान खाए,
सेहत में चार चाँद लगाये,
लोग तो सिर्फ चाँद तक गए हैं,
आप उस से भी ऊपर जाये.
शुभ धनतेरस की आप सब को बधाईयाँ

आज से आप के यहाँ धन की बरसात हो,
माँ लक्ष्मी का निवास हो,
संकट का नाश हो
सर पर उन्नति का ताज हो.
*** इस धनतेरस की खूब शुभकामनाएं **

दीप जले तो रोशन आपका जहान हो,
पूरा आपका हर एक अरमान हो।
माँ लक्ष्मी जी की कृपा बनी रहे आप पर,
इस धनतेरस पर आप बहुत धनवान हों

आज से ही आपके यहाँ धन की बरसात हो
माँ लक्ष्मी का वास हो, संकटों का नाश हो।
हर दिल पर आपका राज हो;उन्नति का सर पर ताज हो
और घर में शांति का वास हो! शुभ धनतेरस

लक्ष्मी देवी का नूर आप पर बरसे, हर कोई आपसे मिलने को तरसे,
भगवान आपको दे इतने पैसे, कि आप चिल्लर पाने को तरसें.!

Dhanteras 2022: धन तेरस कब है, पूजा विधि, पौराणिक कथाएं जाने यहाँ

Dhanteras 2022:-

धनतेरस का त्योहार दीपावली की शुरूआत माना जाता है | धनतेरस के दिन मां लक्ष्मी, कुबेर और धनवंतरी का पूजन किया जाता है | हिंदू धर्म में धनतेरस का दिन खरीदारी करने के लिए साल भर में सबसे शुभ दिन माना जाता है | इस दिन झाडू, बर्तन, गहना, सोना-चांदी आदि खरीदने का रिवाज है | नाम के अनुरूप धनतेरस का पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है | इस दिन से दीपावली के पांच दिन के उत्सव की शुरूआत मानी जाती है | इस साल 2022 धनतेरस का त्योहार 23 अक्टूबर, दिन रविवार को मनया जाएगा |

भारतीय संस्कृति में स्वास्थ्य को धन से ऊपर माना गया है | एक प्राचीन कहावत है जो आज भी प्रचलित है कि ‘पहला सुख निरोगी काया, दूजा सुख घर में माया‘ | धनतेरस का दिन धन्वन्तरि त्रयोदशी या धन्वन्तरि जयन्ती, जो कि आयुर्वेद के देवता का जन्म दिवस है, के रूप में भी मनाया जाता है, धनतेरस से जुडी पौराणिक कथाएं |

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान धन्वंतरि विष्णु के अंशावतार माने जाते हैं | संसार में चिकित्सा विज्ञान के विस्तार और प्रसार के लिए ही भगवान विष्णु ने ये अवतार लिया था। भगवान धन्वंतरि के प्रकट होने के उपलक्ष्य में ही धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है |

2022 में धनतेरस कब मनाया जाएगा ?

2022 में धनतेरस 23 अक्टूबर रविवार को है। हिंदी कैलेंडर के अनुसार हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन धनतेरस का पर्व मनाया जाता है. इस दिन को दीपावली से दो दिन पहले कहा जाता है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन समुद्र मंथन के समय भगवान धन्वंतरि हाथ में कलश लेकर प्रकट हुए थे और मान्यता है कि इसी दिन समुद्र से माता लक्ष्मी भी प्रकट हुई थीं।

धनतेरस पूजा विधि

धनतेरस के दिन शाम के समय पूजा करने का अधिक महत्व है। धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि और भगवान कुबेर की मूर्ति को उत्तर दिशा की ओर पूजा स्थल में स्थापित करना चाहिए, साथ ही भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करने का भी प्रावधान है। वहीं ऐसी मान्यता है कि इस दिन दक्षिण दिशा में दीपक जलाने से अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है. ऐसा माना जाता है कि भगवान धन्वंतरि को पीली चीजें और कुबेर को सफेद पसंद है, इसलिए भगवान धन्वंतरि को पीली मिठाई और भगवान कुबेर को सफेद मिठाई का भोग लगाना चाहिए। कहा जाता है कि पूजा में चावल, दाल, रोली, चंदन, धूप और फल और फूलों का प्रयोग करना लाभकारी होता है. धनतेरस के दिन यमराज को भी श्रद्धा से प्रणाम करना चाहिए और उनके नाम का दीपक भी जलाना चाहिए।

धनतेरस से जुडी पौराणिक कथाएं:-

समुद्र मंथन के दौरान, अमृत का कलश लेकर भगवान् धनवंतरी प्रकट हुए थे | इस कारण इस दिन को धनतेरस के रूप में मनाया जाने लगा | धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, धनवंतरी के प्रकट होने के ठीक दो दिन बाद मां लक्ष्मी प्रकट हुईं थीं | यही कारण है कि हर बार दिवाली से दो दिन पहले ही धनतेरस मनाया जाता है |

इस दिन स्वास्थ्य रक्षा के लिए धनवंतरी देव की उपासना की जाती है | इस दिन को कुबेर का दिन भी माना जाता है और धन संपन्नता के लिए कुबेर की पूजा की जाती है |

लक्ष्मी चंचला हैं:-

एक कथा के अनुसार एक बार भगवान विष्णु मृत्युलोक में विचरण करने आ रहे थे | तब लक्ष्मीजी ने भी उनके साथ चलने का आग्रह किया | विष्णु जी ने कहा ठीक है पर मैं आपसे जो कहूं वह आप मानेंगी तो आप मेरे साथ चल सकती हैं | लक्ष्मीजी उनकी बात मान गईं और भगवान विष्णु के साथ धरती पर आ गईं |

कुछ देर बाद एक स्थान पर पहुंच कर भगवान विष्णु ने लक्ष्मीजी से कहा कि जब तक मैं न आऊं तुम यहां ठहरो | मैं दक्षिण दिशा की ओर जा रहा हूं, तुम उधर मत आना | विष्णुजी के जाने पर लक्ष्मी के मन में कौतुहल जागा कि आखिर दक्षिण दिशा में ऐसा क्या रहस्य है, जो मुझे मना किया गया है और भगवान स्वयं चले गए |

लक्ष्मीजी से रहा नहीं गया और जैसे ही भगवान आगे बढ़े लक्ष्मी भी पीछे-पीछे चल पड़ीं | कुछ ही आगे जाने पर उन्हें सरसों का एक खेत दिखाई दिया जिसमें खूब फूल लगे थे | सरसों की शोभा देखकर वह मंत्रमुग्ध हो गईं और फूल तोड़कर अपना श्रृंगार करने के बाद आगे बढ़ीं | आगे जाने पर एक गन्ने के खेत से लक्ष्मीजी गन्ने तोड़कर रस चूसने लगीं |

उसी क्षण विष्णु जी आ गए और यह देख लक्ष्मीजी पर नाराज होकर उन्हें शाप दे दिया कि जब मैंने तुम्हें इधर आने को मना किया था, पर तुम न मानी और किसान के खेत में चोरी का अपराध कर बैठी | अब तुम इस अपराध के जुर्म में इस किसान की 12 वर्ष तक सेवा करो | ऐसा कहकर भगवान उन्हें छोड़कर क्षीरसागर चले गए | लक्ष्मीजी उस गरीब किसान के घर रहने लगीं |

एक दिन लक्ष्मीजी ने उस किसान की पत्नी से कहा कि तुम स्नान कर पहले मेरी बनाई गई इस देवी लक्ष्मी का पूजन करो, फिर रसोई बनाना, तब तुम जो मांगोगी मिलेगा | किसान की पत्नी ने ऐसा ही किया | पूजा के प्रभाव और लक्ष्मी की कृपा से किसान का घर दूसरे ही दिन से अन्न, धन, रत्न, स्वर्ण आदि से भर गया | लक्ष्मी ने किसान को धन-धान्य से पूर्ण कर दिया |

किसान के 12 वर्ष बड़े आनंद से कट गए | फिर 12 वर्ष के बाद लक्ष्मीजी जाने के लिए तैयार हुईं | विष्णुजी लक्ष्मीजी को लेने आए तो किसान ने उन्हें भेजने से इंकार कर दिया | तब भगवान ने किसान से कहा कि इन्हें कौन जाने देता है, यह तो चंचला हैं, कहीं नहीं ठहरतीं | इनको बड़े-बड़े नहीं रोक सके | इनको मेरा शाप था इसलिए 12 वर्ष से तुम्हारी सेवा कर रही थीं | तुम्हारी 12 वर्ष सेवा का समय पूरा हो चुका है |

धनतेरस से जुडी पौराणिक कथाएं

राजा बलि से जुडी एक कथा:-

राजा बलि के भय से देवताओं को मुक्ति दिलाने के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया था | राजा बलि एक दानवीर राजा थे | स्वर्ग पर विजय पाने के लिए वह यज्ञ कर रहे थे | उस यज्ञ स्थल पर भगवान विष्णु वामन अवतार में जा पहुंचे |

लेकिन असुरों के गुरु शुक्राचार्य पहचान गए कि वामन के रूप में भगवान विष्णु ही हैं | इसलिए उन्होंने राजा बलि से कहा कि वामन जो भी मांगे वो उन्हें ना दिया जाए | साथ ही उन्होंने कहा कि वामन के रूप में भगवान विष्णु हैं, जो देवताओं की सहायता करने के लिए यहां आए हैं |

लेकिन राजा बलि ने शुक्राचार्य की बात नहीं सुनी और वामन भगवान द्वारा मांगी गई तीन पग भूमि दान करने के लिए तैयार हो गए | लेकिन शुक्राचार्य ऐसा नहीं चाहते थे, इसलिए राजा बलि को दान करने से रोकने के लिए शुक्राचार्य ने उनके कमंडल में लघु रूप धारण करके प्रवेश कर लिया था |

लेकिन भगवान वामन भी शुक्राचार्य के छल को समझ गए थे, जिसके बाद उन्होंने अपने हाथों में मौजूद कुशा को कमंडल में इस तरह रखा कि शुक्राचार्य की एक आंख फूट गई |

कहा जाता है कि इसके बाद भगवान द्वारा मांगी गई तीन पग भूमि को बलि ने दान करने का निर्णय ले लिया | उस समय भगवान वामन ने अपने एक पैर से पूरी धरती को नापा और दूसरे पैर से अंतरिक्ष को नाप लिया | लेकिन तीसरा पैर रखने के लिए कुछ स्थान नहीं बचा था, जिसके बाद बलि ने वामन भगवान के चरणों में अपना सिर रख दिया था |

देवताओं को बलि के भय से इस तरह मुक्ति मिल गई थी | इसी जीत की खुशी में धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है |

राजा हिमा के पुत्र से जुडी कथा:-

राजा हिमा के बड़े बेटे के बारे में भविष्य वाणी हुई थी की वह अपने शादी के चौथे दिन एक सांप के काटने से मर जाएगा। उसकी शादी के चौथे दिन उसकी पत्नी ने कमरे और दरवाजे पर सोने चांदी के सिक्के रख दिये |

पूरे घर को दिये से सजा दिया। अपने पति को सुलाने के लिए कहानियां और गाने गाने लगी | जब यम देवता सांप के रूप में आए तो सिक्के और दिये की तेज रोशनी से अंदर नहीं जा सके बाहर बैठ कर गाने सुनते रहे और सुबह होते ही चले गए | इसलिए ये धनतेरस मनाई जाती है |

Dussehra 2022 Totke: दशहरे के दिन किए जाने वाले चमत्कारी टोटके और उनकी रोचक कहानियां

Dussehra 2022 Totke:-

धर्म की अधर्म पर विजय का त्यौहार जिसे हम जानते है विजया दशमी (Vijayadashami) के नाम से, जिसे हम दशहरा (Dussehra) भी करते है | इस दिन का भारत में बहुत ज्यादा महत्त्व है, इस दिन भगवान राम ने लंका पति रावण पर अपनी विजय हासिल की थी |

बुराई पर अच्‍छाई की जीत के पर्व दशहरा को बहुत शुभ और सर्वसिद्ध मुहूर्त माना जाता है | उसका कारण है इस दिन माँ पृथ्वी लोक छोड़ स्वर्ग की तरफ चली जाती है, इसी दिन रावण का भी वध हुआ था, और इतना ही नहीं ये वही दिन है जिस दिन कुबेर देवता ने धरती वासियों के लिए धन की वर्षा कर, पृथ्वी वासियों को धन -धान्य से परिपूर्ण किया था |

इस दिन को लेकर देश के विभिन्‍न राज्‍यों में अलग-अलग परंपराएं हैं | जैसे- महाराष्‍ट्र में दशहरा के दिन सोना या चांदी की पत्ती खरीदी जाती है ताकि पूरे साल संपन्‍नता बनी रही | वहीं इस दिन को यात्रा के लिए भी बेहद शुभ माना जाता है क्‍योंकि इस दिन मां दुर्गा (Maa Durga) धरती से वापस अपने लोक में प्रस्‍थान करती हैं |ज्‍योतिष और तंत्र-मंत्र के लिहाज से भी दशहरा को उपाय (Dussehra Remedies) और टोटके (Dussehra Totke) करने के लिए उत्तम दिन माना गया है | इस दिन किए गए उपाय और टोटकों का कई गुना ज्‍यादा फल मिलता है |

लोग सदियों से दशहरे पर अपने परिवार और अपने आप को धन-धान्य से पारी पूर्ण करने और अपने जीवन को खुशहाली से भरने के लिए लोग अलग -अलग उपाय करते है, जिन्हें भारतीय संस्कृति में सदियों से मान्यता मिली हुई है | इन्हें उपायों को हम टोटको (Dussehra Totke) के नाम से भी जानते है | भारत में दशहरा के दिन कुछ ख़ास प्रकार के टोटके किये जाते है, जिनके बारे में ऐसा कहा जाता है कि इन्हें करने से आपके जीवन में खुशियाँ लोट आती है | कुछ समय में ही आपका भाग्य अचानक से बदल जाता है | इसीलिए कुछ इसी प्रकार के टोटके (Dussehra Totke) जिनको करने के बाद आप अपने सोए भाग्य का उदय कर सकते है |

दशहरे पर किए जाने वाले चमत्कारी टोटके:-

धन की कमी दूर करने के लिए:-

दशहरे के दिन शमी के पेड़ की पूजा का बहुत महत्त्व माना जाता है, शमी को पेड़ को लेकर ऐसा कहा जाता है, दशहरा के दिन कुबेर ने राजा रघु को स्वर्ण मुद्राएं देने के लिए शमी के पत्तों को सोने का बना दिया था | इसीलिए दशहरे के दिन सोने की पत्ती खरीदी जाती है | उसी दिन से शमी के पेड़ को सोना देने वाला पेड़ माना जाता है | इसलिए इस दिन घर में शमी का पेड़ जरुर लगाए और रोज वहां दीपक भी लगाएं |

इसके अलावा नीले कंठ वाले पक्षी को देखना भी उतना ही शुभ माना जाता है | यदि आपको दशहरे वाले दिन नीलकंठ पक्षी के दर्शन हो जाते है तो आपको धन-धान्य की प्राप्ति होती है |

दशहरे के दिन से लगातार 51 दिनों तक हर रोज गाय व कुत्ते को बेसन का लड्डू खिलाए तो यह भी काफी शुभ माना जाता है | मान्यता है कि ऐसा करने से धन संबंधित समस्या दूर हो जाती है लेकिन ध्यान रहे कि कुत्ते को हर रोज लड्डू खिलाए, भूले नही |

मनोकामना की पूर्ति लिए:-

दशहरे के दिन सुबह-सवेरे स्‍नान-ध्‍यान के बाद हनुमान जी एक मुट्ठी साबुत उड़द हनुमान जी की प्रतिमा के चरणों में रखकर ग्यारह बार परिक्रमा करें | ऐसा करने से हर तरह के दुखों से मुक्ति मिल जाती है | स्कंद पुराण में बताया गया है इस दिन पुण्यसलिला नदियों में स्नान करने से व्यक्ति दस पापों से मुक्त हो जाता है |

बुरी नजर से बचने के लिए:-

ऐसा कहा जाता है कि जब श्री राम ने लंकापति रावण का विनाश किया था, तब रावण के अंतिम संस्कार के बाद वानर सेना रावण की राख साथ ले आई थी, उसी दिन से रावण को जलाने के बाद उसकी राख घर लाने का चलन शुरू हुआ | ऐसी मान्यता है, रावण को जलाने के बाद उसकी राख घर में लाने के बाद घर और घर के लोग बुरी नज़र और बुरी बला से दूर रहते है और घर में समृद्धि आती है | मान्यता है कि ऐसा करने से घर के सदस्यों के बीच आपसी प्रेम बना रहता है और नकारात्मक ऊर्जा खत्म होकर सकारात्मक ऊर्जा में बदल जाती है | इससे नकारात्मक शक्तियां घर में प्रवेश नहीं करती है |

यात्रा के लिए:-

दशहरे के दिन थोड़ी दूरी की ही सही लेकिन यात्रा जरूर करें | इससे पूरे साल यात्रा करने में बाधा नहीं आती है |

व्यापार लाभ के लिए:- 

यदि आपको आपके व्यापार में लगातार घाटे का सामना करना पड़ रहा है तो, दशहरे के दिन सवा मीटर लाल कपड़े में नारियल, जनेऊ और सवा किलो मिष्ठान रखकर उस लाल कपड़े को बांधकर किसी भी आस-पास के राम मंदिर में भगवान के चरणों में चढ़ा दें, आपको कुछ ही दिनों में व्यापार में असर दिखने लगेगा, आपका व्यापार अचानक से चल निकलेगा |

इस उपाय से भाग्य का मिलता है पूरा साथ:-

दशहरे के दिन अपने हाथ में एक फिटकरी का टुकड़ा लें और उसे लेकर किसी सुनसान जगह पर लेकर चले जाएं | इसके बाद अपने इष्ट देवों का ध्यान करते हुए अपने ऊपर से सात बार उबारकर पीठ के पीछे फेंक दें | फेंकने के बाद बिना मुड़े घर आ जाएं और भगवान के सामने घी का दीपक जलाएं | ध्यान रहे यह उपाय करते समय कोई आपको देखे न | ऐसा करने से भाग्य का पूरा साथ मिलता है और जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिलती है |

इस उपाय से नौकरी में होती है उन्नति:-

दशहरा के दिन मां दुर्गा की पूजा करते हुए ‘ओम विजयायै नम:’ मंत्र का जप करते हुए 10 फल चढ़ाएं और फिर उनको प्रसाद में बांट दें | इस पूजा को आप दोपहर के समय करें | माना जाता है कि रावण को परास्त करने के लिए भगवान राम ने भी दोपहर के समय ही पूजा की थी | इसके बाद एक झाड़ू लें और शाम के समय में उसको मंदिर में दान कर दें | इस उपाय के करने से धन संबंधित समस्या खत्म होती है और नौकरी व व्यापार में उन्नति होती है |

India vs South Africa Dream 11 Prediction Team, IND vs SA Team Prediction, Fantasy Cricket Tips

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MatchIndia vs South Africa (IND vs SA)
LeagueIndia vs South Africa T20I
DateWednesday, 28th sep 2022
Match Venue: Greenfield International Stadium, Thiruvananthapuram, India
Time07:00 PM (IST) – 01:30 PM (GMT)

India vs South Africa T20 का मुकाबला Greenfield International Stadium, Thiruvananthapuram, India में  07:00 PM (IST) – 01:30 PM (GMT) में खेला जाएगा।

आप टीवी पर India vs South Africa T20 का मुकाबला कहां देख सकते हैं?

स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क – स्टार स्पोर्ट्स 1 और स्टार स्पोर्ट्स 1HD, स्टार स्पोर्ट्स सेलेक्ट 1 और स्टार स्पोर्ट्स सेलेक्ट 1HD।

आप India vs South Africa T20 का मुकाबला ऑनलाइन कहां देख सकते हैं?

Hotstar

India vs South Africa Dream 11 Prediction Update-

India :

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आखिरी मैच में भारत की रोमांचक जीत हुई है। सूर्यकुमार यादव और विराट कोहली ने अर्धशतक बनाया, इससे पहले हार्दिक पांड्या ने 16 रन की नाबाद 25 रन की पारी खेली, क्योंकि भारत ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीसरे टी 20 आई में तनावपूर्ण अंत में जीतकर श्रृंखला 2-1 से जीती थी अफ्रीका के साथ यह एक अलग चुनौती होगी क्योंकि भारत नहीं करता है घरेलू परिस्थितियों में उनके खिलाफ अच्छा रिकॉर्ड है। रोहित शर्मा और लोकेश राहुल पारी की शुरुआत करेंगे। विराट कोहली वन-डाउन पोजीशन पर बल्लेबाजी करेंगे। वह बल्लेबाजी करने वाली टीम की रीढ़ हैं। सूर्यकुमार यादव और ऋषभ पंत मध्यक्रम की बल्लेबाजी संभालेंगे। बतौर कप्तान भारत की कप्तानी रोहित शर्मा करेंगे। वह एक अच्छे बल्लेबाज भी हैं ऋषभ पंत भारत के लिए विकेट कीपिंग करेंगे। अक्षर पटेल और युजवेंद्र चहल अपनी टीम की स्पिन गेंदबाजी की कमान संभालेंगे। जसप्रीत बुमराह और हर्षल पटेल उनकी टीम के पेस अटैक की अगुवाई करेंगे।

South Africa :

दक्षिण अफ्रीका सकारात्मक शुरुआत की उम्मीद कर रहा होगा क्योंकि उसका सामना पहले टी 20 में भारत से होगा। रस्सी वान डेर डूसन चोट के कारण बाहर हो जाएंगे और यह निश्चित रूप से उनके मध्य क्रम को थोड़ा कमजोर बनाता है। रीजा हेंड्रिक्स और क्विंटन डी कॉक शायद पारी की शुरुआत करेंगे। टेम्बा बावुमा वन-डाउन स्थान पर बल्लेबाजी करेंगे। मध्यक्रम की बल्लेबाजी एडेन मार्कराम और ट्रिस्टन स्टब्स संभालेंगे। दक्षिण अफ्रीका की कप्तानी टेम्बा बावुमा करेंगे। वह एक अच्छे बल्लेबाज भी हैं क्विंटन डी कॉक दक्षिण अफ्रीका के लिए विकेट कीपिंग करेंगे। एडेन मार्कराम और तबरेज शम्सी अपनी टीम की स्पिन गेंदबाजी की कमान संभालेंगे। उनकी टीम के पेस अटैक की अगुवाई कगिसो रबाडा और एनरिक नॉर्टजे करेंगे।

क्विंटन डी कॉक और टेम्बा बावुमा शायद पारी की शुरुआत करेंगे। ड्वेन प्रिटोरियस वन-डाउन पोजीशन पर बल्लेबाजी करेंगे। डेविड मिलर और रस्सी वैन डेर-डूसन मध्यक्रम की बल्लेबाजी को संभालेंगे। इस शृंखला में रस्सी वान डेर-डूसन के शीर्ष फंतासी अंक हैं। टेम्बा बावुमा बतौर कप्तान दक्षिण अफ्रीका की कप्तानी करेंगे। वह एक अच्छे बल्लेबाज भी हैं दक्षिण अफ्रीका के लिए क्विंटन डी कॉक विकेट कीपिंग करेंगे। केशव महाराज और तबरेज शम्सी अपनी टीम की स्पिन गेंदबाजी की कमान संभालेंगे। उनकी टीम के तेज आक्रमण की अगुवाई एनरिक नॉर्टजे और कगिसो रबाडा करेंगे।

पिच रिपोर्ट :

तिरुवनंतपुरम के ग्रीनफील्ड स्टेडियम में अब तक इतने मैच नहीं खेले गए हैं। आपको बता दें कि इस मैदान पर अब तक सिर्फ दो टी20 और एक वनडे ही खेला गया है. वहीं, टी20 मैच की बात करें तो भारत ने खेले गए 2 मैचों में से एक में जीत हासिल की है। जबकि एक को हार का भी सामना करना पड़ा है। इस मैदान पर वेस्टइंडीज ने सबसे ज्यादा 173 रन बनाए हैं।

मौसम की रिपोर्ट :

भारत और दक्षिण अफ्रीका (IND vs SA) के बीच तिरुवनंतपुरम में खेले जाने वाले T20I सीरीज के पहले मैच में मौसम की बात करें तो मैच के दौरान मौसम थोड़ा ठंडा रहने वाला है। आसमान में बादल छाए भी देखे जा सकते हैं। वहीं मैदान में सुहावना मौसम और ठंडी हवा चलने की पूरी उम्मीद है। मैच भारतीय समयानुसार शाम 7:00 बजे शुरू होगा

IND vs SA Fantasy Tips :

पिच के व्यवहार को देखते हुए, शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों को चुनना यहां महत्वपूर्ण होगा। गेंदबाजों का डेथ ओवर आपकी फैंटेसी टीम में इस तरह की सतह पर होना चाहिए, कगिसो रबाडा, हर्षल पटेल का होना जरूरी है। विकेट कीपिंग में क्विंटन डी कॉक बेहतरीन विकल्प हैं। मैच में एक बार फिर बल्लेबाजों के दबदबे की संभावना है।

IND vs SA Squads

South Africa Squad:

Quinton de Kock(w), Temba Bavuma(c), Rilee Rossouw, Aiden Markram, David Miller, Tristan Stubbs, Dwaine Pretorius, Wayne Parnell, Kagiso Rabada, Anrich Nortje, Tabraiz Shamsi, Reeza Hendricks, Lungi Ngidi, Keshav Maharaj, Heinrich Klaasen

India Squad:

Rohit Sharma(c), KL Rahul, Virat Kohli, Suryakumar Yadav, Rishabh Pant(w), Axar Patel, Dinesh Karthik, Deepak Chahar, Arshdeep Singh, Jasprit Bumrah, Yuzvendra Chahal, Harshal Patel, Ravichandran Ashwin, Mohammed Shami, Deepak Hooda

India vs South Africa Playing 11

India Possible Playing 11

1.Rohit Sharma(C), 2.Lokesh Rahul/Shreyas Iyer, 3.Virat Kohli, 4.Suryakumar Yadav, 5.Rishabh Pant(WK), 6.Dinesh Karthik(WK), 7.Axar Patel, 8.Harshal Patel, 9.Jasprit Bumrah, 10.Arshdeep Singh, 11.Yuzvendra Chahal

South Africa Possible Playing 11

1.Reeza Hendricks, 2.Quinton de Kock(WK), 3.Temba Bavuma(C), 4.Aiden Markram, 5.Tristan Stubbs, 6.David Miller, 7.Dwaine Pretorius, 8.Keshav Maharaj, 9.Kagiso Rabada, 10.Anrich Nortje, 11.Tabraiz Shamsi

ऑपरेशन ऑक्टोपस क्या है? यहाँ जानिये | Operation Octopus in Hindi

नमस्कार दोस्तों, आप सभी ने ऑपरेशन ऑक्टोपस का नाम तो सुना ही होगा और साथ ही आपके मन में यह सवाल जरूर आया होगा कि ऑपरेशन ऑक्टोपस क्या है? दोस्तों तो आप आज बिल्कुल सही जगह पर आए हैं, आज इस लेख के माध्यम से हम आपको बताएंगे कि ऑपरेशन ऑक्टोपस क्या है? इसके अलावा और भी महत्वपूर्ण जानकारी के साथ शुरू करते हैं इस आर्टिकल को।

Operation Octopus

ऑपरेशन ऑक्टोपस (Operation Octopus ) क्या है ?

दोस्तों राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के सूत्रों ने बताया है कि इस हफ्ते की शुरुआत में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के परिसरों पर छापेमारी को ‘ऑपरेशन ऑक्टोपस’ नाम दिया गया है। आपको बता दें की ऑपरेशन में लगे सभी 300 अधिकारियों को छापेमारी के दौरान चुप रहने को कहा गया. एजेंसियां पीएफआई के पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करना चाहती हैं। दोस्तों ‘ऑपरेशन ऑक्टोपस’ के तहत 100 से अधिक PFI सदस्यों को गिरफ्तार किया गया और लगभग 200 को हिरासत में लिया गया। ईडी और एनआईए ने जांच के दौरान पाया है कि पीएफआई के सदस्य देश विरोधी गतिविधियों में शामिल थे।

ऑपरेशन ऑक्टोपस में खुलासे (Revelations in Operation Octopus )-

दोस्तों आपको बता दें की इस ऑपरेशन के दौरान यह भी खुलासा हुआ है कि पिछले कुछ सालों में पीएफआई और उससे जुड़े संगठनों के खातों में 120 करोड़ रुपये से ज्यादा जमा किए गए हैं.दोस्तों  इसमें से अधिकांश नकद में जमा किया गया था जो अज्ञात और संदिग्ध स्रोतों से था। विदेशों से भी पैसा जमा किया गया। इस फंड से अवैध गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है।

NIA ने कहा PFI ने फैलाई भारत के प्रति नफरत –

दोस्तों आपको बता दें की एनआईए ने दावा किया है कि पीएफआई और उसके नेताओं के कार्यालयों पर देशव्यापी छापेमारी के दौरान जब्त किए गए दस्तावेजों में अत्यधिक संवेदनशील सामग्री मिली है, जिसमें एक खास समुदाय के प्रमुख नेताओं को निशाना बनाया गया है.

दोस्तों आपको बता दें की कोच्चि की विशेष एनआईए अदालत को सौंपी गई रिमांड रिपोर्ट में, जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि चरमपंथी इस्लामी संगठन ने युवाओं को लश्कर-ए-तैयबा और इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (आईएसआईएस) जैसे आतंकवादी समूहों में शामिल होने के लिए धोखा दिया।

जांच में क्या निकला

ईडी की छापेमारी के बाद पीएफआई सदस्य मोहम्मद अहमद बेग को यूपी एटीएस ने लखनऊ से गिरफ्तार किया है. ईडी की जांच में पता चला है कि पीएफआई ने विदेशों में पैसा इकट्ठा किया और उन्हें अवैध रूप से भारत भेजा, ताकि वह विदेशी फंडिंग से जुड़े कानून से बच सके।

पीएफआई के सदस्य दूसरे राज्यों से आ रहे थे और मध्य प्रदेश में बड़ी संख्या में लोगों को जोड़ने का काम कर रहे थे। प्रदेश में सक्रिय पीएफआई के सदस्य लोगों को भ्रमित कर राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के लिए उकसा रहे थे। लखनऊ से गिरफ्तार वसीम अहमद के पास से एक लैपटॉप, तीन मोबाइल फोन, एक डायरी, बैंक पासबुक आदि बरामद किया गया है. लैपटॉप से कई जानकारियां ली गई हैं।

NIA Kya Hai? यहाँ जानिए NIA का Full Form क्या है?

मुंबई में 2008 के आतंकवादी हमले के बाद, जिसमें एक मजबूत जांच ढांचे की आवश्यकता पर जोर दिया गया था, भारत सरकार ने एक ऐसी एजेंसी के लिए एक समाधान का प्रस्ताव रखा जो विशिष्ट अनुमोदन की आवश्यकता के बिना राज्यों में आतंक से संबंधित अपराधों से निपटने में सक्षम हो। इसलिए, केंद्रीय गृह मंत्री और राष्ट्रपति के समर्थन से संसद में राष्ट्रीय जांच एजेंसी की स्थापना की गई।

NIA Kya Hai

NIA का फुल फॉर्म क्या है?

NIA का फुल फॉर्म National Investigation Agency है, जिसे हिंदी में राष्ट्रीय जांच एजेंसी कहा जाता है।

NIA (National Investigation Agency) क्याहै?

NIA आतंकवाद विरोधी कानून प्रवर्तन एजेंसी के रूप में, राष्ट्रीय जांच एजेंसी प्रभारी है। एजेंसी राज्यों की विशेष अनुमति के बिना देश भर में किसी भी आतंकी घटना की जांच कर सकती है। यह संयुक्त राष्ट्र, इसकी एजेंसियों और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों की अंतरराष्ट्रीय संधियों, सम्मेलनों, समझौतों और प्रस्तावों को पूरा करता है। इसका लक्ष्य भारत में आतंकवाद से लड़ना भी है।

NIA अधिकार क्षेत्र –

एजेंसी को एनआईए अधिनियम की अनुसूची पुस्तक में निर्दिष्ट विभिन्न अधिनियमों के तहत जांच करने के लिए सभी शक्तियों और विशेषाधिकारों के साथ अधिकार दिया गया है। राज्य सरकार के अधिकारी एनआईए अधिनियम के तहत निर्दिष्ट कानून की सीमा के भीतर केंद्र सरकार के अनुमोदन पर एनआईए द्वारा जांच का अनुरोध कर सकते हैं। केंद्र सरकार भारत में कहीं भी जांच के लिए मामलों को एनआईए को सौंप सकती है और इन मामलों को संभालने में शामिल अधिकारी आईपीएस और आईआरएस कैडर से हैं।

NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) क्षेत्रीय कार्यालय –

  • NIA हैदराबाद
  • NIA गुवाहाटी
  • NIA कोच्चि
  • NIA लखनऊ
  • NIA मुंबई
  • NIA कोलकाता
  • NIA रायपुर
  • NIA जम्मू

NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) के अधिकार –

  • अधिकारियों के पास किसी भी अपराध की जांच करने के लिए पुलिस अधिकारियों के समान सभी शक्तियां और दायित्व हैं
  • जब किसी पुलिस स्टेशन के किसी अधिकारी को किसी अपराध की रिपोर्ट मिलती है, तो उन्हें इसे संघीय सरकार को बताना होगा, फिर इसे केंद्र को भेजना होगा।
  • अपराधों की जांच केंद्र की पूर्व सहमति से राज्य सरकार को हस्तांतरित करने का भी प्रावधान है
  • सरकार को आतंकवाद से संबंधित अपराधों की जांच में एनआईए को सभी आवश्यक सहायता प्रदान करनी चाहिए
  • अधिनियम के जांच प्रावधानों का राज्य सरकार की किसी भी आतंकवादी अपराध या अन्य अपराध की जांच और मुकदमा चलाने की क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ता है।
  • अधिनियम के तहत किसी भी अपराध की सुनवाई के लिए, एक विशेष अदालत के लिए दंड प्रक्रिया संहिता के तहत सत्र न्यायालय की सभी शक्तियों का प्रावधान है।
  • विशेष अदालत में खड़े किसी भी विषय को न्यायिक शाखा द्वारा त्वरित और निष्पक्ष परीक्षण के लिए उसी या अलग राज्य के साथ उस अन्य विशेष अधिकार क्षेत्र में स्थानांतरित किया जा सकता है। उच्च न्यायालय द्वारा निष्पक्ष सुनवाई के लिए ऐसे मामलों को केवल राज्य के भीतर किसी अन्य विशेष अदालत में स्थानांतरित किया जा सकता है
  • एनआईए राज्यों से अनुमति लिए बिना देश भर में आतंकी मामलों की जांच कर सकती है।
  • एजेंसी आतंकवादी अपराधों, देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने, परमाणु सुविधाओं पर अपराध आदि की जांच करती है।

NIA अधिनियम 2008 –

यह अधिनियम राष्ट्रीय जांच एजेंसी को देश की एकमात्र पूरी तरह से संघीय एजेंसी के रूप में स्थापित करता है, जो संयुक्त राज्य में एफबीआई की तुलना में और सीबीआई से अधिक शक्तिशाली है। यह राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को भारत के किसी भी हिस्से में आतंकी अभियानों का संज्ञान लेने और राज्य सरकार की मंजूरी के बिना मामला दर्ज करने और किसी भी राज्य में प्रवेश करने, जांच करने और संदिग्धों को गिरफ्तार करने का अधिकार देता है।

NIA विशेष न्यायालय –

भारत की राष्ट्रीय सरकार ने कई विशेष न्यायालयों की घोषणा की है। संघीय सरकार इन अदालतों के अधिकार क्षेत्र के किसी भी मुद्दे पर निर्णय लेती है। उस क्षेत्र में उच्च न्यायालय प्राधिकरण के मुख्य न्यायाधीश के आश्वासन पर, सरकार इन पर सेवा करने के लिए एक न्यायाधीश नियुक्त करती है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय को भी राज्य के भीतर या बाहर, एक अदालत से दूसरी अदालत में मामलों को फिर से सौंपने का अधिकार दिया गया है

निष्कर्ष-

आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) बेहतरीन काम कर रही है। एनआईए एक लक्ष्य-उन्मुख और पेशेवर संगठन के रूप में विकसित हो रहा है जो मानव अधिकारों और गरिमा पर जोर देते हुए भारतीय संविधान और राष्ट्रीय कानून को कायम रखता है। शायद यही वजह है कि असैन्य इलाकों में ज्यादा आतंकी हमले नहीं होते। दोस्तों अगर आप हमसे इस आर्टिकल से जुड़े कुछ सवाल हमसे पूछना चाहते हैं तो नीचे कमेंट करके पूछ सकते हैं हमारी टीम आपका जवाब जरूर देगी , कृपया अपने दोस्तों के साथ जरूर इस आर्टिकल को साझा करे ताकि उनको भी यह जानकारी मिल सके धन्यवाद।

Congress President Election: कांग्रेस पार्टी नए अध्यक्ष का चुनाव कैसे करती है?

Congress president election: 23 से अधिक वर्षों में पहली बार, कांग्रेस पार्टी में एक अध्यक्ष हो सकता है जो गांधी परिवार से नहीं है। ग्रैंड ओल्ड पार्टी 17 अक्टूबर को एक नए अध्यक्ष का चुनाव करने के लिए मतदान करेगी, जिसके परिणाम 19 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे। हालाँकि, चुनाव अपने हिस्से के नाटक के बिना नहीं है। एक कोने में त्रिवेंद्रम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा है कि वह पार्टी अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ेंगे।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि वह भी इस पद के लिए दौड़ेंगे। ऐसा होने पर थरूर समेत पांच सांसदों ने मतदाता सूची/मतदाता सूची को सार्वजनिक करने की मांग की है. तो, 135 साल से अधिक समय से मौजूद पार्टी नए अध्यक्ष का चुनाव कैसे करती है?

Congress President Election

कांग्रेस नए अध्यक्ष का चुनाव कैसे करती है?

एक नए पार्टी अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया उसी पाठ के अनुच्छेद XVIII में शामिल है जो कांग्रेस के सभी कार्यों को नियंत्रित करती है – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का संविधान और नियम। चुनाव के लिए रिटर्निंग ऑफिसर यानी चुनाव की देखरेख करने वाला व्यक्ति केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण (सीईए) का अध्यक्ष होगा। इस मामले में वह कांग्रेस के सीईए अध्यक्ष मधुसूदन मिस्त्री हैं।

अनुच्छेद XVIII में कहा गया है कि राष्ट्रपति का चुनाव पार्टी के प्रदेश कांग्रेस समितियों (पीसीसी) के प्रतिनिधियों द्वारा किया जाएगा। पीसीसी में प्रतिनिधि व्यक्तिगत ब्लॉक समितियों के प्रतिनिधि होते हैं, जिन्हें प्रत्येक ब्लॉक एक गुप्त मतदान के माध्यम से एक पीसीसी के लिए चुनता है। अब, कांग्रेस के संविधान का अनुच्छेद III पार्टी को निम्नलिखित उप-समितियों में विभाजित करता है:

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी

कार्य समिति

प्रदेश कांग्रेस कमेटी

जिला/नगर कांग्रेस समितियां

उप-समितियां, जैसे कि ब्लॉक या निर्वाचन क्षेत्र कांग्रेस कमेटी

यदि राष्ट्रपति पद के लिए दो उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं, तो प्रतिनिधि गुप्त मतदान द्वारा एक के लिए अपने वोट का संकेत देंगे। यदि केवल एक ही उम्मीदवार होता है, तो उसे उसी लेख के तहत अगले कांग्रेस सत्र के अध्यक्ष के रूप में निर्वाचित घोषित कर दिया जाता है।

यदि दो से अधिक उम्मीदवार हैं, तो प्रतिनिधि अपने नाम के आगे 1 और 2 लिखकर दो उम्मीदवारों के लिए अपनी वरीयता का संकेत देंगे। दो से अधिक चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के मामले में, दो से कम वरीयता वाले किसी भी वोटिंग पेपर को अमान्य माना जाएगा। कोई भी 10 प्रतिनिधि राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में अपने एक साथी का नाम प्रस्तावित करने के लिए एक साथ आ सकते हैं। दरअसल, प्रतिनिधियों की मतदाता सूची को सार्वजनिक करने की मांग कांग्रेस के पांच सांसद मनीष तिवारी, शशि थरूर, कार्ति चिदंबरम, प्रद्युत बोरदोलोई और अब्दुल खालिक की सितंबर 2022 में की गई मांगों में से एक थी.

कांग्रेस पार्टी के नए अध्यक्ष का चुनाव कब होगा?

सीईए के मुताबिक, उम्मीदवारों के नाम जमा करने की आखिरी तारीख 24 सितंबर शनिवार है. एक बार यह हो जाने के बाद, रिटर्निंग ऑफिसर मधुसूदन मिस्त्री उम्मीदवारों के नाम प्रकाशित करेंगे और उन्हें अपनी उम्मीदवारी वापस लेने के लिए सात दिन तक का समय देंगे।

उम्मीदवार जो अपनी उम्मीदवारी वापस लेना चाहते हैं, उन्हें सात दिनों की अवधि के भीतर अपनी वापसी बताते हुए रिटर्निंग ऑफिसर को लिखना होगा। एक बार उम्मीदवारों की अंतिम सूची सार्वजनिक हो जाने के बाद, कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) चुनाव की तारीख तय करेगी, जो आमतौर पर उम्मीदवारों की सूची सार्वजनिक होने के सात दिनों से अधिक नहीं होती है।

कांग्रेस पार्टी में चुनावों का एक संक्षिप्त इतिहास

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भारत की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी है, जो 1885 से चली आ रही है। इस समय में, पार्टी ने 97 बार अध्यक्ष चुने या नियुक्त किए हैं। लेकिन हम पार्टी के चुनाव में इसके संस्थापक और पहले अध्यक्ष व्योमेश चंद्र बनर्जी के पास वापस नहीं जाएंगे। हम पार्टी के पिछले कुछ चुनावों पर एक संक्षिप्त नज़र डालेंगे और इसका प्रदर्शन कैसा रहा है।

कांग्रेस को हर पांच साल में संगठनात्मक चुनाव कराने की आवश्यकता होती है। पार्टी ने आखिरी बार 2017 में अध्यक्ष पद के लिए चुनाव किया था जब राहुल गांधी को पार्टी के अध्यक्ष के रूप में निर्विरोध नियुक्त किया गया था।

पार्टी अध्यक्ष के लिए इन चुनावों में क्या होने की संभावना है?

एआईसीसी के सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में, कांग्रेस के पास पूरे भारत में विभिन्न प्रदेश कांग्रेस समितियों के 9,000 से अधिक प्रतिनिधि हैं। वर्तमान चुनाव में दो उम्मीदवार हैं:

त्रिवेंद्रम के सांसद शशि थरूर, जिन्होंने कहा कि उन्हें अध्यक्ष पद के लिए सोनिया गांधी की मंजूरी मिल गई है, और राजस्थान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत।

Navratri 2022: नवरात्रि के लिए पूजा सामग्री

Navratri 2022

हिंदी पंचाग के अनुसार साल में नवरात्रि 4 बार मनाई जाती है | दो बार गुप्त नवरात्रि और दो नवरात्रि को मुख्य रूप से मनाया जाता है | इसमें चैत्र और शारदीय मुख्य नवरात्रि हैं, जिसे देशभर में पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है | नवरात्रि का मतलब है नौ रातें | नौ दिन तक चलने वाले शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है | दे

वी मां के पावन दिन का पर्व शारदीय नवरात्रि आश्विन मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को 26 सितम्बर 2022 से आरंभ होगा | अक्टूबर तक चलने वाले इन दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है | अक्टूबर को धूमधाम के साथ विजयदशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा | इसी दिन दुर्गा विसर्जन भी किया जाएगा | शास्त्रों में मां दुर्गा के नौ रूपों का बखान किया गया है | नवरात्र के दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने से विशेष पुण्य मिलता है | मान्यता है कि मां दुर्गा अपने भक्तों के हर कष्ट हर लेती हैं |

इस समय अधिक मास चल रहा है | अधिक मास का समय आधे से अधिक समाप्त हो चुका है | अधिकमास लगने के कारण इस साल शारदीय नवरात्रि एक महीने की देरी से शुरू होगी | हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष पितृपक्ष के समाप्ति के बाद अगले दिन से ही शारदीय नवरात्रि शुरू होना चाहिए, लेकिन इस बार अधिक मास होने के कारण पितरों की विदाई के बाद नवरात्रि का त्योहार शुरू नहीं हो सका |

नवरात्रि के लिए पूजा सामग्री:- Navratri 2022

  • मां दुर्गा की प्रतिमा अथवा चित्र
  • लाल चुनरी
  • आम की पत्तियां
  • चावल
  • दुर्गा सप्तशती की किताब
  • लाल कलावा
  • गंगा जल
  • चंदन
  • नारियल
  • कपूर
  • जौ के बीच
  • मिट्टी का बर्तन
  • गुलाल
  • सुपारी
  • पान के पत्ते
  • लौंग
  • इलायची पूजा थाली में जरूर रखें |
Navratri 2020

नवरात्रि में नौ रंगों का महत्व:-

नवरात्रि के समय हर दिन का एक रंग तय होता है | मान्यता है कि इन रंगों का उपयोग करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है:

  • प्रतिपदा- पीला
  • द्वितीया- हरा
  • तृतीया- भूरा
  • चतुर्थी- नारंगी
  • पंचमी- सफेद
  • षष्टी- लाल
  • सप्तमी- नीला
  • अष्टमी- गुलाबी
  • नवमी- बैंगनी

घट स्थापना की विधि:-

नवरात्रि के प्रथम दिन ही घटस्थापना की जाती है, इसे कलश स्थापना भी कहा जाता है | इसके लिए कुछ सामग्रियों की आवश्यकता होती है | आइए जानते है घटस्थापना के समय किन सामग्रियों की जरूरत पड़ेगी |

  • जल से भरा हुआ पीतल
  • चांदी, तांबा या मिट्टी का कलश
  • पानी वाला नारियल
  • रोली या कुमकुम, आम के 5 पत्ते
  • नारियल पर लपेटने के लिए लाल कपडा या चुनरी
  • लाल सूत्र/मौली
  • साबुत सुपारी, साबुत चावल और सिक्के

मां दुर्गा के धरती पर आगमन का विशेष महत्व:-

नवरात्रि पर मां दुर्गा के धरती पर आगमन का विशेष महत्व होता है | देवीभागवत पुराण के अनुसार नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा का आगमन भविष्य में होने वाली घटनाओं के संकेत के रूप में भी देखा जाता है | हर वर्ष नवरात्रि में देवी दुर्गा का आगमन अलग-अलग वाहनों में सवार होकर आती हैं और उसका अलग-अलग महत्व होता है |

माँ विंध्यवासिनी की कहानी: आस्था का चमत्कारी धाम, मिर्जापुर

विंध्यवासिनी या योगमाया माँ दुर्गा  के एक परोपकारी स्वरूप का नाम है। उनकी पहचान आदि पराशक्ति के रूप में की जाती है। उनका मंदिर उत्तर प्रदेश में गंगा नदी के किनारे मिर्जापुर  से 8 किमी दूर विंध्याचल में स्थित है। एक तीर्थस्थल  हिमांचल प्रदेश  में स्थित है, जिसे बंदला माता मंदिर भी कहा जाता है। माँ विन्ध्यासिनी त्रिकोण यन्त्र पर स्थित तीन रूपों को धारण करती हैं जो की   महालक्ष्मी , महासरस्वती और महाकाली हैं। मान्यता अनुसार सृष्टि आरंभ होने से पूर्व और प्रलय के बाद भी इस क्षेत्र का अस्तित्व कभी समाप्त नहीं हो सकता।

माँ विंध्यवासिनी देवी को उनका नाम विंध्य पर्वत से मिला और विंध्यवासिनी नाम का शाब्दिक अर्थ है, वह विंध्य में निवास करती हैं। जैसा कि माना जाता है कि धरती पर शक्तिपीठों का निर्माण हुआ, जहां सती के शरीर के अंग गिरे थे, लेकिन विंध्याचल  वह स्थान और शक्तिपीठ है, जहां देवी ने अपने जन्म के बाद निवास करने के लिए चुना था।

माँ विंध्यवासिनी का जन्म :

श्रीमद्भागवत पुराण की कथा अनुसार  देवकी के आठवें गर्भ से जन्में श्री कृष्ण को वसुदेवजी ने कंस से बचाने के लिए रातोंरात यमुना नदी  को पार कर गोकुल में नंदजी  के घर पहुंचा दिया था तथा वहां यशोदा  के गर्भ से पुत्री के रूप में जन्मीं आदि पराशक्ति योगमाया को चुपचाप वे मथुरा के जेल में ले आए थे। बाद में जब कंस को देवकी की आठवीं संतान के जन्म का समाचार मिला तो वह कारागार में पहुंचा। उसने उस नवजात कन्या को पत्थर पर पटककर जैसे ही मारना चाहा, वह कन्या अचानक कंस के हाथों से छूटकर आकाश में पहुंच गई और उसने अपना दिव्य स्वरूप प्रदर्शित कर कंस के वध की भविष्यवाणी की और अंत में वह भगवती विन्ध्याचल वापस लौट गई।

पौराणिक मान्यताएँ :

भगवती विंध्यवासिनी आद्या महाशक्ति हैं। विन्ध्याचल सदा से उनका निवास-स्थान रहा है। जगदम्बा की नित्य उपस्थिति ने विंध्यगिरिको जाग्रत शक्तिपीठ बना दिया है। महाभारत  के विराट पर्व में धर्मराज युधिष्ठिर देवी की स्तुति करते हुए कहते हैं- विन्ध्येचैवनग-श्रेष्ठे तवस्थानंहि शाश्वतम्। हे माता! पर्वतों में श्रेष्ठ विंध्याचल पर आप सदैव विराजमान रहती हैं।पद्यपुराण  में विंध्याचल-निवासिनी इन महाशक्ति को विंध्यवासिनी के नाम से संबंधित किया गया है- विन्ध्येविन्ध्याधिवासिनी।

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श्रीमद्भागवत के दशम स्कन्ध में कथा आती है, सृष्टिकर्ता ब्रम्हाजी ने जब सबसे पहले अपने मन से स्वायम्भुवमनु और शतरूपा को उत्पन्न किया। तब विवाह करने के उपरान्त स्वायम्भुव मनु ने अपने हाथों से देवी की मूर्ति बनाकर सौ वर्षो तक कठोर तप किया। उनकी तपस्या से संतुष्ट होकर भगवती ने उन्हें निष्कण्टक राज्य, वंश-वृद्धि एवं परम पद पाने का आशीर्वाद दिया। वर देने के बाद महादेवी विंध्याचलपर्वत पर चली गई। इससे यह स्पष्ट होता है कि सृष्टि के प्रारंभ से ही विंध्यवासिनी की पूजा होती रही है। सृष्टि का विस्तार उनके ही शुभाशीषसे हुआ।

शास्त्रों में मां विंध्यवासिनी के ऐतिहासिक महात्म्य का अलग-अलग वर्णन मिलता है। शिव पुराण  में मां विंध्यवासिनी को सती माना गया है तो श्रीमद्भागवत में नंदजा देवी (नन्द बाबा  की पुत्री) कहा गया है। मां के अन्य नाम कृष्णानुजा, वनदुर्गा भी शास्त्रों में वर्णित हैं । इस महाशक्तिपीठ में वैदिक तथा वाम मार्ग विधि से पूजन होता है। शास्त्रों में इस बात का भी उल्लेख मिलता है कि आदिशक्ति  देवी कहीं भी पूर्णरूप में विराजमान नहीं हैं, विंध्याचल ही ऐसा स्थान है जहां देवी के पूरे विग्रह के दर्शन होते हैं। शास्त्रों के अनुसार, अन्य शक्तिपीठों में देवी के अलग-अलग अंगों की प्रतीक रूप में पूजा होती है|

मिर्जापुर:

भारत को मंदिरों का देश कहा जाता है. इस देश में कई मंदिर ऐसे हैं जो अपनी भव्यता और सुंदरता के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं. इनमें से कई मंदिर तो सदियों पुराने हैं. शासक बदले, साम्राज्य बदला पर ये मंदिर उसी स्थान पर पूरी भव्यता के साथ खड़े रहे . इन्हीं में से एक है यूपी के मिर्जापुर में बना मां विंध्यवासिनी का मंदिर |

विंध्याचल की पहाड़ियों में बना है मां विंध्यवासिनी का मंदिर :

माँ विंध्यवासिनी की कहानी

पूर्वांचल में गंगा नदी के किनारे बसे मिर्ज़ापुर से 8 किमी दूर विंध्याचल की पहाड़ियों में मां विंध्यवासिनी का मंदिर है. मां विंध्यवासिनी का दरबार 51 शक्तिपीठों में से एक है

विंध्यवासिनी मंदिर को जागृत पीठ भी कहा गया है:

उत्तर प्रदेश का विंध्यवासिनी मंदिर, जिसे जागृत शक्तिपीठ भी माना जाता है. शिव पुराण में मां विंध्यवासिनी को सती माना गया है तो श्रीमद्भागवत में नंदजा देवी कहा गया है. मां के अन्य नाम कृष्णानुजा, वनदुर्गा भी शास्त्रों में वर्णित हैं. शास्त्रों में इस बात का भी उल्लेख मिलता है कि आदिशक्ति देवी कहीं भी पूर्णरूप में विराजमान नहीं हैं. विंध्याचल ही ऐसा स्थान है जहां देवी के पूरे विग्रह के दर्शन होते हैं . शास्त्रों के अनुसार, अन्य शक्तिपीठों में देवी के अलग-अलग अंगों की प्रतीक रूप में पूजा होती है.

धर्मग्रंथों में दर्ज है मां विंध्यवासिनी की महिमा :

यहां साल के दोनों नवरात्रों में देश के कोने-कोने से यहां लाखों श्रद्धालु आते हैं. विध्यवासिनी मां की महिमा का उल्लेख धर्म ग्रंथों में मिलता है. जो त्रिकोण यन्त्र पर स्थित तीन रूपों को धारण करती हैं जो की महालक्ष्मी, महासरस्वती और महाकाली हैं. मिर्जापुर के विंध्‍य पर्वत पर बसी मां विंध्‍यवासिनी के दरबार की महिमा अपरंपार है. महाभारत हो या पद्मपुराण,  हर जगह मां के इस स्वरूप का वर्णन मिलता है. मान्यता है कि मां के ही आर्शीवाद से इस सृष्टि का विस्तार हुआ है. आदिशक्ति जगत जननी मां विन्ध्यवासिनी चमत्कार की ढेरों कहानियां अपने अंदर समेटे हुए हैं |

भक्तों को तीन रूपों में मिलता है दर्शन :

मां विन्ध्यवासिनी  एक-दो नहीं, बल्कि तीन रुपों में भक्तों को दर्शन देती हैं. पहला मां विन्ध्यवासिनी, दूसरा मां काली और तीसरा मां सरस्वती, जिन्हें अष्टभुजा के रुप में भी जाना जाता है. खास बात यह है कि मां के तीनों रुप एक त्रिकोण पर विराजमान है, जिनकी परिक्रमा  व विधि-विधान से पूजा कर लेने मात्र से भक्त न सिर्फ मोक्ष को प्राप्त होता है बल्कि लौकिक व अलौकिक सुखों को भोगता है. मंदिर पसिसर में ही स्थित हवन कुंड बारहों महीने अखंड ज्योति के रुप में जलता रहता है. मान्यता है कि यहां आने वाले लोगों के असंभव कार्य भी मां विंध्यवासिनी के दर्शन से पूरे हो जाते हैं. 

मां विंध्यवासिनी के दरबार में होती हैं 4 आरतियां :

विंध्याचल में मां विध्यावासनी की चार आरती सभी भक्तों की हर मनोकामना को पूर्ण करती है. माना जाता है कि बारह शक्ति पीठ में मां विन्ध्वासनी की चार आरती होती है. जबकि अन्य सभी पीठ में तीन आरती ही होती है. कहा जाता है मां विंध्यवासनी की होने वाली चारों आरती का अपना अलग ही महत्व है.. मां के इस चारों आरती के दर्शन करते ही सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है.  मां की होने वाली चारों आरती का स्वरूप अलग -अलग होता है. जिसमें मंगला आरती, दरबार आरती, राजश्री आरती और देव आरती है. इन चारों आरती के दर्शन करने के अलग-अलग महत्व है. आरती के समय मंदिर के कपाट बंद होने के कारण भक्तों को इसका दर्शन नहीं हो पाता |

कैसे पहुंचें यहाँ :

बाय एयर :

सबसे निकटतम हवाई अड्डा लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है, बाबतपुर में, वाराणसी, उत्तर प्रदेश, जो लगभग माही विंध्यवासिनी मंदिर, विंध्याचल से लगभग 72 किलोमीटर हैं।

ट्रेन द्वारा :

नजदीकी रेलवे स्टेशन ‘विंध्याचल’ (भारतीय रेलवे कोड-बीडीएल) है, लगभग एक किलोमीटर मा विंध्यवासिनी मंदिर, विंध्याचल से है। ‘विंध्याचल’ रेलवे स्टेशन बहुत व्यस्त दिल्ली-हावड़ा मार्ग और मुंबई-हावड़ा मार्ग पर स्थित है। हालांकि सभी नहीं, लेकिन उचित ट्रेनों की संख्या ‘विंध्याचल’ रेलवे स्टेशन पर रुकती है। ट्रेनों के अधिक विकल्पों के लिए, रेलवे स्टेशन ‘मिर्जापुर’ (भारतीय रेलवे कोड-एमजेडपी) चुनें, मा विंध्यवासिनी मंदिर, विंध्याचल से लगभग नौ किलोमीटर।

सड़क के द्वारा :

सड़क से विंध्याचल तक पहुंचने का सबसे सुविधाजनक तरीका राष्ट्रीय राजमार्ग 2 (एनएच 2) के माध्यम से है, जिसे दिल्ली-कोलकाता रोड के रूप में जाना जाता है। नेशनल हाईवे 2 (एनएच 2) रोड पर, जो एशियाई राजमार्ग 1 (एएच 1) का संयोग है, गोपीगंज या औरई में, इलाहाबाद और वाराणसी के बीच दोनों जगहों पर, पवित्र नदी गंगा पार करने के बाद, शास्त्री पुल के माध्यम से, राज्य राजमार्ग 5 के माध्यम से, आप आसानी से विंध्याचल तक पहुंच सकते हैं

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Ashok Gehlot कौन हैं? यहाँ जाने कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए लड़ने वाले अशोक गहलोत के बारे में (Congress presidential election 2022)

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने घोषणा की कि वह कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव लड़ेंगे, पार्टी कार्यकर्ता और सचिन पायलट के निर्वाचन क्षेत्र टोंक के लोग उत्साहित हैं कि उन्हें राज्य का नेतृत्व करने के लिए उनका लंबा इंतजार जल्द ही एक वास्तविकता होगी। दूसरी ओर, गहलोत के गृहनगर जोधपुर में कई लोग चाहते हैं कि वह कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद भी मुख्यमंत्री बने रहें। पार्टी अध्यक्ष का चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा के बीच यह घटनाक्रम सामने आया है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने राजस्थान के प्रभारी महासचिव अजय माकन के साथ मल्लिकार्जुन खड़गे को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है।अशोक गहलोत दिसंबर 1998 से 2003 और 2008 से 2013 तक और फिर 17 दिसंबर, 2018 तक इस पद पर रहे। वह राजस्थान विधान सभा के सदस्य के रूप में जोधपुर के सरदारपुरा निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। वह मार्च 2018 से 23 जनवरी, 2019 तक संगठनों और प्रशिक्षण के प्रभारी कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव थे। 2017 के गुजरात विधानसभा चुनावों के दौरान उन्हें गुजरात राज्य का प्रभारी भी बनाया गया था।

Ashok Gehlot

अशोक गहलोत कौन हैं –

अशोक गहलोत का जन्म 3 मई 1951 को राजस्थान के जोधपुर में एक हिंदू परिवार में हुआ था। जहां तक अशोक गहलोत की जाति का सवाल है तो बता दें कि अशोक गहलोत माली जाति से संबंध रखते हैं, जिनका राजस्थान की राजनीति में ज्यादा दबदबा नहीं है। इसके बावजूद अशोक गहलोत ने जाति की राजनीति के मिथक को तोड़ा और 3 बार राजस्थान के मुख्यमंत्री बने। अशोक गहलोत के परिवार में अशोक गहलोत के पिता का नाम लक्ष्मण सिंह गहलोत था। अशोक गहलोत की पत्नी का नाम सुनीता गहलोत है। अशोक गहलोत और सुनीता गहलोत की शादी 27 नवंबर 1977 को हुई थी। अशोक गहलोत के बेटे का नाम वैभव गहलोत है। वैभव भी राजनीति में हैं। अशोक गहलोत की बेटी का नाम सोनिया है।
अशोक गहलोत ने अपनी शिक्षा राजस्थान के जोधपुर विश्वविद्यालय से पूरी की है। अशोक गहलोत ने स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद विज्ञान और कानून में स्नातक किया। इसके बाद अशोक गहलोत ने अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की शिक्षा ली है।

उन्होंने कई बार केंद्रीय मंत्री के रूप में भी कार्य किया हैं | वह जोधपुर संसदीय क्षेत्र से वर्ष 1980 में 7वीं लोकसभा के लिए पहली बार चुने गए थे | उन्होंने 8वीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं लोकसभा में जोधपुर संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया | वर्ष 1999 में उन्हें सरदारपुरा (जोधपुर) विधानसभा क्षेत्र से विधायक के रूप में निर्वाचित किया गया था | उन्होंने लगातार तीन विधानसभा चुनावों में जीत हासिल की थी |वर्ष 1971 में बांग्लादेश के मुक्ति युद्ध के दौरान, गेहलोत ने बंगाल और पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिलों, सहित कई स्थानों पर शरणार्थी शिविरों में सेवा की | वह सेवाग्राम, इंदौर, औरंगाबाद, और वर्धा में तरुण शांति सेना द्वारा आयोजित शिविरों में सक्रिय पार्टी सिपेंट थे | 

अशोक गहलोत को राजनीति का जादूगर क्यों कहा जाता है?

दरअसल अशोक गहलोत के पिता लक्ष्मण सिंह एक महान जादूगर थे। वह देश भर में घूम-घूम कर जादू दिखाता था। अशोक गहलोत भी अपने पिता के साथ घूमते रहे और कई चरणों में जादू भी दिखाया। राजनीति में आने के बाद अशोक गहलोत ने जिस तरह से सफलता हासिल की, उसे देखकर उन्हें राजनीति का जादूगर कहा जाने लगा।

अशोक गेहलोत का राजनीतिक सफर

  • वर्ष 1979 में, उन्हें जोधपुर शहर से जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था |
  • वर्ष 1980 में वह जोधपुर संसदीय क्षेत्र से 7वीं लोकसभा के लिए चुने गए और 8वीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं लोकसभा में जोधपुर निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था |
  • वर्ष 1980 में, उन्हें लोक लेखा समिति के सदस्य के रूप में चुना गया था |
  • वर्ष 1982 में, उन्हें राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव के रूप में नियुक्त किया गया था |
  • वर्ष 1982 में, उन्हें केंद्रीय उप मंत्री, पर्यटन विभाग के रूप में नियुक्त किया गया था |
  • वर्ष 1983 में, उन्हें पर्यटन और नागरिक उड्डयन विभाग के केंद्रीय उप मंत्री के रूप में चुना गया था  |
  • वर्ष 1984 में, उन्हें खेल विभाग के केंद्रीय उप मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया था |
  • वर्ष 1985, 1994, 1997 में, उन्हें राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष
    के रूप में चुना गया था  |
  • वर्ष 1991 में, उन्हें संचार (लोकसभा) की परामर्श समिति के सदस्य के रूप में चुना गया 
    था  |
  • वर्ष 1991 में, वह रेलवे (10वीं और 11वीं लोकसभा) की स्थायी समिति के सदस्य बने |
  • वर्ष 1998 में, वह पहली बार राजस्थान के मुख्यमंत्री बने |
  • वर्ष 1999 में, उन्हें सरदारपुरा (जोधपुर) विधानसभा क्षेत्र से विधायक के रूप में चुना गया |
  • वर्ष 2008 में, वह दूसरी बार राजस्थान के मुख्यमंत्री बने |
  • वर्ष 2017 में, उन्हें अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव के रूप में नियुक्त किया गया

अशोक गेहलोत से जुड़े विवाद

वर्ष 2017 में, वह विवादों में तब आए जब उनका नाम paradise paper घोटाले में आया, जिसकी जाँच International consortium द्वारा की जा रही थी | हालांकि, उन्हें बाद में आरोपों से मुक्त कर दिया गया, क्योंकि उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिल पाया था | वर्ष 2011 में, अशोक गहलोत को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा जब राजस्थान सरकार ने अशोक के परिवार के सदस्यों की वित्तीय संबंध रखने वाली firms को कथित रूप से ₹11,000 करोड़ की संपत्ति और अनुबंध होने के कारण |

अशोक गेहलोत से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

Interesting facts of Ashok Gehlot
  • वह महात्मा गांधी जी के आदर्शों से बहुत प्रेरित हैं |
  • वर्ष 1971 में, उन्होंने बांग्लादेश के मुक्ति युद्ध के दौरान शरणार्थी शिविरों में बहुत सेवा की |
  • अपने कॉलेज के दिनों से ही वह राजनीति में सक्रिय रहे हैं | वर्ष 1973 से 1979 तक वह कांग्रेस पार्टी, NSUI के युवा wing के अध्यक्ष भी रहे हैं |
  • इंदिरा गांधी ने गहलोत के संगठनात्मक कौशल को देख कर ही उन्हें राष्ट्रीय छात्र संघ के पहले राज्य अध्यक्ष नियुक्त करने का फैसला किया था |
  • उन्होंने इंदौर, सेवाग्राम, औरंगाबाद और वर्धा में तरुण शांति सेना द्वारा आयोजित शिविरों में भी काम किया है |
  • वह राजस्थान विधानसभा के सदस्य के रूप में जोधपुर के सरदारपुरा निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं |
  • वर्ष 1989 में कुछ समय के लिए उन्होंने राजस्थान के गृहमंत्री के रूप में भी कार्यभार संभाला |
  • वर्ष 1998 से 2003 तक पहली बार अशोक गहलोत राजस्थान के मुख्यमंत्री बने और मुख्यमंत्री के ररूप में उनका दूसरा कार्यकाल वर्ष 2008 से 2013 तक रहा |
  • ने भारत सेवा संस्थान की स्थापना की, जो Rajiv Gandhi Memorial book bank के माध्यम से मुफ्त पुस्तकें प्रदान करता है और ambulence सेवाएं भी प्रदान करता है |

EPFO: PF Withdrawal के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे करें|

  • PF Withdrawal के लिए ऑनलाइन आवेदन- EPF अकाउंट से पैसा निकालने के लिए आवेदन तभी किया जा सकता है जब आप बेरोज़गार हो जाएं या रिटायर हो जाएं। बेरोज़गार होने के 1 महीने बाद EPF अकाउंट से 75% पैसा निकाला जा सकता है और उसके 1 महीने बाद बाकि का 25% भी। आप पैसा निकालने के लिए क्लेम ऑनलाइन EPF विथड्रौल फॉर्म भर कर सकते हैं। लेकिन आप ऑनलाइन आवेदन तभी कर सकते हैं जब आपका आधार आपके UAN के साथ लिंक होगा।

What is UAN (Universal Account Number)?

UAN का पूरा नाम Universal Account Number .यह एक यूनिक नंबर है जिसकी सहायता से कोई भी व्यक्ति अपने EPF Account को ऑनलाइन संचालित कर सकते है और EPF में UAN लॉगिन कर सकते है | यूनिवर्सल एकाउंट नंबर (UAN) नौकरी करने वाले सभी लोगों को ईपीएफओ (EPFO) द्वारा जारी किया जाता है. यह 12 डिजिट का कॉमन नंबर होता है. इस एकाउंट नंबर (Account Number) द्वारा कर्मचारियों को प्रॉविडेंट फंड (PF) के बारे में जानकारी मिलती है.

ईपीएफ (EPF) के सभी मेंबर्स को उनकी सेवाओं के दौरान यूएएन (UAN) जारी किया जाता है. यूएएन 12 अंको का होता है जो ईपीएफओ द्वारा जारी किया जाता है. आप चाहे जितनी ही नौकरियां बदलें, लेकिन यूएएन वही रहता है. ईपीएएफओ का नया मेंबर बनने पर सभी को यूएएन नंबर जारी किया जाता है.

UAN (Universal Account Number) Activate होना क्यों ज़रूरी है?

UAN activate नहीं होने से कर्मचारी को बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है जैसे क़ि आपके खाते में कितने पैसे है इसकी जानकारी नहीं मिल पाती है।
जो लोग कम्पनियो ,हॉस्पिटल्स ,,स्कूल आदि में काम करते है तो कर्मचारी भविष्य निधि के तहत उनकी महीने की आय में से कुछ हिस्से को भविष्य के लिए सुरक्षित रखा जाता है | यह काम कंपनी के HR डिपार्टमेंट का होता है HR Department आपका EPF Account खोलेगा और UAN नंबर और पासवर्ड आपको प्रदान करेगा | आज के समय में यह पूरे भारत में लागू कर दिया गया है |
UAN NUMBER के ज़रिये आप अपनी EPF की राशि की भी जानकारी प्राप्त कर सकते है और आपके खाते में कितने पैसे है इसका भी पता कर सकते है जिसके लिए UAN का activate होना बहुत ही आवश्यक है

PF Withdrawal के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?

PF Withdrawal के लिए ऑनलाइन आवेदन करने के लिए नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करना होगा| अतः आप सभी लोग आर्टिकल को अंत तक पूरा पढ़े|

STEP 1: सर्वप्रथम आप को मेंबर पोर्टल की ऑफिसियल वेबसाइट पर जाना होगा|

PF Withdrawal के लिए ऑनलाइन आवेदन

STEP 2: UAN नंबर और पासवर्ड की मदद से UAN सदस्य पोर्टल पर लॉग-इन करें

STEP 3: फिर ‘Online Services’ टैब पर क्लिक करें और ड्रॉप डाउन मेन्यू से ‘Claim (Form-31, 19 & 10C)’ को चुनें|

PF Withdrawal के लिए ऑनलाइन आवेदन

STEP 4: सदस्य की जानकारी स्क्रीन पर आ जाएगी। अपने बैंक अकाउंट नंबर एंटर करे और ‘Verify’ पर क्लिक करें|

PF Withdrawal के लिए ऑनलाइन आवेदन

STEP 5: इसे आगे बढ़ाने के लिए ‘Yes’ पर क्लिक करें

STEP 6: अब ‘Proceed For Online Claim’ विकल्प पर क्लिक करें |

PF Withdrawal के लिए ऑनलाइन आवेदन

STEP 7: यहाँ से फॉर्म का नया भाग खुलेगा जहां आपको ये जानकारी देनी होगी, उद्देश्य जिसके लिए पैसा निकाला जा रहा है, कितना अमाउंट निकालना है और साथ ही कर्मचारी का पता भी एंटर करे |

STEP 8: सर्टिफिकेशन पर टिक करें और आवेदन जमा करें|

STEP 9: आप पैसे निकालने के लिए जो उद्देश्य बताएंगें उस से सम्बंधित स्कैन दस्तावेज आपको जमा करने होंगें और साथ ही बैंक पासबुक को भी स्कैन करके अपलोड करना होगा|

STEP 10: EPFO में रजिस्टर्ड आपके मोबाइल नंबर पर एक सूचना भेजी जाएगी। जब आवेदन की प्रकिर्या पूरी हो जाएगी, तो पैसा आपके बैंक अकाउंट में आ जाएगा। आमतौर पर पैसा 15 से 20 दिनों में बैंक अकाउंट में आ जाता है, हालाँकि, EPFO ने अपनी और से कोई समय सीमा नहीं दी हुई है।

PF खाते से राशि निकलने के लिए शर्तें :

  • पैसा सिर्फ रिटायर्मेंट के बाद निकाला जा सकता है। EPFO रिटायर्मेंट तभी मानता है जब व्यक्ति की उम्र 55 वर्ष से ज़्यादा हो जाए।
  • EPF खाते से राशि निकालने की अनुमति केवल मेडिकल आपातकाल, घर खरीदने या निर्माण या उच्च शिक्षा के मामले में है|
  • EPFO रिटायर्मेंट से 1 वर्ष पहले 90% राशि निकालने की अनुमति देता है|
  • EPF खाते से पूरी राशि निकाली जा सकती है अगर कर्मचारी रिटायर्मेंट से पहले बेरोज़गारी का सामना करता है|
  • नए नियम के अनुसार, बेरोज़गारी के 1 महीने के बाद केवल 75% फण्ड को निकाला जा सकता है। शेष को रोज़गार प्राप्त करने के बाद नए EPF खाते में ट्रान्सफर कर दिया जाएगा|

ऑनलाइन क्लेम करते समय, आपके पास होना चाहिए:

  • एक्टिव UAN नंबर और पासवर्ड
  • बैंक जानकारी जो UAN के साथ जुड़ा हुआ है
  • पैन और आधार जानकारी जो EPF डेटाबेस में शामिल हो|

EPF विथड्रौल फॉर्म :

पैसा निकालने के लिए ऑनलाइन आवेदन करते समय, आपको तीन EPF विथड्रौल फॉर्म मिलेंगें।

  • PF एडवांस (फॉर्म- 31)
  • ऑनली PF विथड्रौल- फॉर्म 19
  • ऑनली पेंशन विथड्रौल- फॉर्म 10सी

EPF क्लेम स्टेटस :

EPF अकाउंट से पैसा निकालने के आवेदन की स्तिथि EPF मेंबर पोर्टल पर देख सकते हैं। आपको पोर्टल पर लॉग-इन करना होगा और  ‘Online Services’ सेक्शन में ‘Track Claim Status’ को चुनना होगा। आपको इसके लिए कोई अन्य नंबर नहीं देना होगा। स्तिथि स्वतः डिस्प्ले होंगे लगेगी।

EPFO - MEMBER e-SEWA की Official वेबसाइट में जाने के लिए यहाँ क्लिक करे।
EPFO की ऑफिसियल वेबसाइट में जाने के लिए क्लिक करे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न :

1. अगर यूएएन पोर्टल पर Claim Settled दिखाई दे रहा है, इसका क्या मतलब है?

जब आप अपने बैंक अकाउंट में पीएफ राशि जमा करने या पीएफ खाते से पैसे अपने बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करने के लिए क्लेम फॉर्म के ज़रिए क्लेम कर सकते हैं, तो पीएफ ऑफिसर क्लेम को चेक करता है, उसे मंज़ूर करता है और उसके बाद ही पैसा जमा किया जाता है

2. पीएफ का पासवर्ड कैसे निकाले?

स्टेप 1: UAN Portal खोलिए। …
Sign In बटन के नीचे मौजूद Forgot Password लिंक पर क्लिक करिए
स्टेप 2: स्क्रीन पर दिख रहे खाली बॉक्सों में अपना UAN नंबर और कैप्चा (Captcha) भरिए
स्टेप 3: अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर OTP (वन टाइम पासवर्ड) मंगाइए।

3. नौकरी छोड़ने के बाद पीएफ कैसे निकाले?

मौजूदा नियमों के तहत अगर कर्मचारी 55 साल की उम्र में रिटायर (Retirement) होता है और उसके 36 महीने के भीतर जमा रकम निकालने के लिए आवेदन नहीं करता है तो पीएफ अकाउंट निष्क्रिय होगा. आसान शब्‍दों में समझें तो कंपनी छोड़ने के बाद भी पीएफ अकाउंट पर ब्याज मिलता रहेगा और 55 साल की उम्र तक निष्क्रिय नहीं होगा

3. PF पर कितना ब्याज मिलता है?

कंपनी/ नियोक्ता भी कर्मचारी के अकाउंट में 12% का ही योगदान करता है जिसका 8.33% हिस्सा ईपीएस में और 3.67% हिस्सा ईपीएफ में जाता है। EPF अकाउंट में जमा राशि पर ब्याज मिलता है, इस लेख में हम बताएंगें कि वो ब्याज कितना है और कैसे कैलकुलेट होता है। ये भी पढ़ें: EPF अकाउंट से पैसे कैसे निकालें?

4. कर्मचारी पेंशन योजना क्या है?

जब कोई कर्मचारी कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) का सदस्य बन जाता है, तो वह भी EPS का सदस्य बन जाता है. … लेकिन, नियोक्ता के योगदान का एक हिस्सा ईपीएस यानी कर्मचारी पेंशन योजना में जमा होता है. ईपीएस में मूल वेतन का योगदान 8.33% है. हालांकि, पेंशन योग्य वेतन की अधिकतम सीमा 15,000 रुपये है|

5. नौकरी छोड़ने के कितने दिन बाद पीएफ का पैसा निकाल सकते हैं?

दरअसल, ऐसा तय अवधि तक ही होता है. बता दें कि नौकरी छोड़ने के बाद पहले 36 महीने तक कोई सहयोग राशि (Contribution) जमा नहीं होने पर ईपीएफ अकाउंट निष्क्रिय खाते (In Operative Account) की श्रेणी में डाल दिया जाता है. ऐसे में आपको अपना खाता एक्टिव रखने के लिए कुछ रकम 3 साल से पहले निकाल लेनी चाहिए

6. पेंशन में कितनी बढ़ोतरी हुई?

यह बढ़ी हुई पेंशन पहली दिसम्बर 2021 से लागू होगी। इन लाभार्थियों के बैंक खातों में हर तिमाही पेंशन की राशि भेजी जाती है। इसके साथ ही कुष्ठ रोगियों की पेंशन में भी पांच सौ रुपये की बढ़ोत्तरी की गयी है। अब उन्हें 2500 रुपये मासिक के बजाए 3000 रुपये पेंशन मिलेगी।

7. पीएफ विद्ड्रॉल के लिए कैसे भरें ऑनलाइन फॉर्म?

https://unifiedportal-mem.epfindia.gov.in/memberinterface/ ,यहां अपना UAN और पासवर्ड डालकर लॉग इन करें। स्टेप 2: इसके बाद ऑनलाइन सर्विसेज ऑप्शन पर क्लिक करें.

अधिक जानकारी प्राप्त करने कि लिए आवेदक हमारी वेबसाइट http://enterhindi.com/की मदद ले सकते है |

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Shardiya Navratri 2022 Day 1: नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा कैसे करें ?

Shardiya Navratri 2022 Day 1

हिंदी पंचाग के अनुसार साल में नवरात्रि 4 बार मनाई जाती है | दो बार गुप्त नवरात्रि और दो नवरात्रि को मुख्य रूप से मनाया जाता है | इसमें चैत्र और शारदीय मुख्य नवरात्रि हैं, जिसे देशभर में पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है | नवरात्रि का मतलब है नौ रातें | नौ दिन तक चलने वाले शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है | दे

वी मां के पावन 9 दिन का पर्व शारदीय नवरात्रि आश्विन मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को 26 सितम्बर 2022 से आरंभ होगा | 4 अक्टूबर तक चलने वाले इन दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है | 5 अक्टूबर को धूमधाम के साथ विजयदशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा | इसी दिन दुर्गा विसर्जन भी किया जाएगा | शास्त्रों में मां दुर्गा के नौ रूपों का बखान किया गया है | नवरात्र के दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने से विशेष पुण्य मिलता है | मान्यता है कि मां दुर्गा अपने भक्तों के हर कष्ट हर लेती हैं |

नवरात्र के नौ दिनों में मां के अलग-अलग स्वरूप की पूजा की जाती है | पहला दिन माता शैलपुत्री को समर्पित होता है | इसके बाद क्रमशः ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री की आराधना होती है | नवरात्रि का पहला दिन देवी शैलपुत्री की उपासना का दिन है | देवी, पर्वतों के राजा शैल की सुपुत्री थीं इसलिए इनको शैलपुत्री नाम दिया गया | माता प्रकृति की देवी हैं इसलिए नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है | मां शैलपुत्री को देवी पार्वती का अवतार माना जाता हैं | पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण इनका नाम ‘शैलपुत्री’ पड़ा | नवरात्र-पूजन में प्रथम दिवस इन्हीं की पूजा और उपासना की जाती है |

नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री का विधिवत पूजन किया जाता है | इसी दिन से हिन्दू नववर्ष यानी नए संवत्सर की शुरुआत होती है | पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री के रूप में उत्पन्न होने के कारण मां दुर्गा जी का नाम शैलपुत्री पड़ा. मां शैलपुत्री नंदी नाम के वृषभ पर सवार पर सवार होती हैं और उनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का पुष्प होता है | मां शैलपुत्री के पूजन से जीवन में स्थिरता और दृढ़ता आती है | खासतौर पर महिलाओं को मां शैलपुत्री के पूजन से विशेष लाभ होता है | महिलाओं की पारिवारिक स्थिति, दांपत्य जीवन, कष्ट क्लेश और बीमारियां मां शैलपुत्री की कृपा से दूर होते हैं |

शारदीय नवरात्रि का पहला दिन – पहले नवरात्र की व्रत कथा

एक बार प्रजापति दक्ष ने एक बहुत बड़ा यज्ञ किया | इसमें उन्होंने सारे  देवताओं को अपना-अपना यज्ञ-भाग प्राप्त करने के लिए निमंत्रित किया, किन्तु शंकर जी को उन्होंने इस यज्ञ में निमंत्रित नहीं किया | सती ने जब सुना कि उनके पिता एक अत्यंत विशाल यज्ञ का अनुष्ठान कर रहे हैं, तब वहाँ जाने के लिए उनका मन विकल हो उठा |

अपनी यह इच्छा उन्होंने शंकरजी को बताई | सारी बातों पर विचार करने के बाद उन्होंने कहा- प्रजापति दक्ष किसी कारणवश हमसे रुष्ट हैं | अपने यज्ञ में उन्होंने सारे देवताओं को निमंत्रित किया है | उनके यज्ञ-भाग भी उन्हें समर्पित किए हैं, किन्तु हमें जान-बूझकर नहीं बुलाया है | कोई सूचना तक नहीं भेजी है | ऐसी स्थिति में तुम्हारा वहाँ जाना किसी प्रकार भी श्रेयस्कर नहीं होगा |’

शंकर जी के इस उपदेश से सती का प्रबोध नहीं हुआ | पिता का यज्ञ देखने, वहाँ जाकर माता और बहनों से मिलने की उनकी व्यग्रता किसी प्रकार भी कम न हो सकी | उनका प्रबल आग्रह देखकर भगवान शंकरजी ने उन्हें वहाँ जाने की अनुमति दे दी |

सती ने पिता के घर पहुँचकर देखा कि कोई भी उनसे आदर और प्रेम के साथ बातचीत नहीं कर रहा है | सारे लोग मुँह फेरे हुए हैं | केवल उनकी माता ने स्नेह से उन्हें गले लगाया | बहनों की बातों में व्यंग्य और उपहास के भाव भरे हुए थे |

परिजनों के इस व्यवहार से उनके मन को बहुत क्लेश पहुँचा | उन्होंने यह भी देखा कि वहाँ चतुर्दिक भगवान शंकरजी के प्रति तिरस्कार का भाव भरा हुआ है | दक्ष ने उनके प्रति कुछ अपमानजनक वचन भी कहे | यह सब देखकर सती का हृदय क्षोभ, ग्लानि और क्रोध से संतप्त हो उठा | उन्होंने सोचा भगवान शंकर जी की बात न मान, यहाँ आकर मैंने बहुत बड़ी गलती की है |

वे अपने पति भगवान शंकर के इस अपमान को सह न सकीं | उन्होंने अपने उस रूप को तत्क्षण वहीं योगाग्नि द्वारा जलाकर भस्म कर दिया | वज्रपात के समान इस दारुण-दुःखद घटना को सुनकर शंकर जी ने क्रुद्ध हो अपने गणों को भेजकर दक्ष के उस यज्ञ का पूर्णतः विध्वंस करा दिया |

सती ने योगाग्नि द्वारा अपने शरीर को भस्म कर अगले जन्म में शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया | इस बार वे ‘शैलपुत्री’ नाम से विख्यात हुर्ईं | पार्वती, हैमवती भी उन्हीं के नाम हैं | उपनिषद् की एक कथा के अनुसार इन्हीं ने हैमवती स्वरूप से देवताओं का गर्व-भंजन किया था |

शारदीय नवरात्रि का पहला दिन

देवी वाहन बैल है:-

मां शैलपुत्री के दाएं हाथ में डमरू और बाएं हाथ में त्रिशूल है | देवी का वाहन बैल है | मां शैलपुत्री के मस्तक पर अर्ध चंद्र विराजित है | माता शैलपुत्री मूलाधार चक्र की देवी मानी जाती हैं | माता शैलपुत्री योग की शक्ति द्वारा जागृत कर मां से शक्ति पाई जा सकती है | दुर्गा के पहले स्वरूप में शैलपुत्री मानव के मन पर नियंत्रण रखती हैं | चंद्रमा पर नियंत्रण रखने वाली शैलपुत्री उस नवजात शिशु की अवस्था को संबोधित करतीं हैं जो निश्चल और निर्मल है और संसार की सभी मोह-माया से परे है |

पूजा विधि:-

सबसे पहले मां शैलपुत्री की तस्वीर स्थापित करें और उसके नीचे लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं | इसके ऊपर केशर से ‘शं’ लिखें और उसके ऊपर मनोकामना पूर्ति गुटिका रखें | तत्पश्चात् हाथ में लाल पुष्प लेकर शैलपुत्री देवी का ध्यान करें |

मंत्र इस प्रकार है-

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे ॐ शैलपुत्री देव्यै नम:।

मंत्र के साथ ही हाथ के पुष्प मनोकामना गुटिका एवं मां के तस्वीर के ऊपर छोड़ दें | इसके बाद प्रसाद अर्पित करें तथा मां शैलपुत्री के मंत्र का जाप करें | इस मंत्र का जप कम से कम 108 करें |

मंत्र – ॐ शं शैलपुत्री देव्यै: नम:।

मंत्र संख्या पूर्ण होने के बाद मां दुर्गा के चरणों में अपनी मनोकामना व्यक्त करके मां से प्रार्थना करें तथा आरती एवं कीर्तन करें | मंत्र के साथ ही हाथ के पुष्प मनोकामना गुटिका एवं मां के तस्वीर के ऊपर छोड़ दें | इसके बाद भोग अर्पित करें तथा मां शैलपुत्री के मंत्र का जाप करें | यह जप कम से कम 108 होना चाहिए |

ABHA Card: ABHA (आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट) कैसे बनवाये? जाने यहाँ पर…

ABHA Card: केंद्र सरकार ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत डिजिटल हेल्थ कार्ड 2022, यानी ABHA (आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट ) की शुरुआत की है। National Health Authority (NHA) ने ट्विटर पर इसको लेकर कई ट्वीट भी किए।

डिजिटल हेल्थ कार्ड यानी ABHA Card :

यह एक तरह का ID कार्ड है, जो आपका डिजिटल पहचान पत्र भी है। इसमें आपके मेडिकल रिकॉर्ड सेव रहेंगे। यानी एक ही जगह पर आपकी पूरी मेडिकल हिस्ट्री डिजिटली इसमें सेव हो जाएगी।

अक्सर लोगों के पुराने मेडिकल रिपोर्ट्स या ट्रीटमेंट से रिलेटेड डॉक्युमेंट्स गुम जाते हैं या घर से निकलते वक्त वो इसे ले जाना भूल जाते हैं। ऐसे में उनकी पूरी रिपोर्ट और मेडिकल हिस्ट्री डिजिटल तरीके से सेव रहेगी, जो जरूरत के वक्त उनके काम आएगी।

डिजिटल हेल्थ कार्ड यानी ABHA Card बनवाने के फायदे :

डिजिटल हेल्थ कार्ड यानी ABHA Card बनवाने के आवश्यक दस्तावेज :

  • आधार कार्ड
  • बैंक पासबुक
  • राशन कार्ड
  • स्थाई निवास प्रमाण पत्र
  • मोबाइल नंबर
  • पासपोर्ट साइज फोटो

ABHA Card कैसे बना सकते हैं?

इसके लिए नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करें

स्टेप1: सबसे पहले आयुष्मान डिजिटल हेल्थ मिशन (Ayushman Digital Health Mission की वेबसाइट पर जाएं।

स्टेप2. अब होम पेज पर Create Your ABHA Number के ऑप्शन पर क्लिक करें।

स्टेप3. ABHA Number जनरेट करने के लिए दो ऑप्शन दिखाई देंगे, जिसमें कंफर्टेबल हैं, उसे चुनें।

स्टेप4. आधार नंबर या ड्राइविंग लाइसेंस पर क्लिक करें और अगले पेज पर उसका नंबर डालकर सबमिट करें।

स्टेप5. रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक OTP आएगा। इसे डालकर आप ABHA Card का एप्लिकेशन भरें।

स्टेप6. एप्लिकेशन में पूछी गई जानकारी देने के बाद उसे सबमिट कर दें। इसके बाद अपनी फोटो अपलोड करें।

स्टेप 7. इसके लिए My Account पर क्लिक करें। दिए गए ऑप्शन में से Edit Profile पर क्लिक करें और फोटो अपलोड करें।

स्टेप8. अब सबमिट पर क्लिक कर दें। आपका ABHA Card बन जाएगा।

स्टेप9. इसे डाउनलोड करें और प्रिंट आउट निकाल लें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न :

1. ABHA Card बनवाने के लिए कौन अप्लाई कर सकता है?

जो लोग अपना मेडिकल रिकॉर्ड इलेक्ट्रॉनिक तरीके से सुरक्षित रखना चाहते हैं, वो सभी लोग इसके लिए अप्लाई कर सकते हैं।

2. ये कार्ड सिर्फ सरकारी अस्पताल में काम आएगा या प्राइवेट में भी?

ये कार्ड सरकारी और प्राइवेट दोनों अस्पताल में काम आएगा। इतना ही नहीं इसका इस्तेमाल किसी भी डॉक्टर के निजी क्लीनिक में भी किया जा सकेगा।

3. डॉक्टर्स या हेल्थ प्रोफेशनल बिना पेशेंट की सहमति के उसका मेडिकल डेटा देख सकते हैं?

नहीं, आपका मेडिकल डेटा देखने के लिए उन्हें आपकी सहमति की जरूरत पड़ेगी। इसके लिए उन्हें ABHA Card या फिर OTP की जरूरत होगी, जिसे व्यक्ति की सहमति पर ही देखा जा सकेगा। ताकि पेशेंट की प्राइवेसी बनी रहे।

4. ABHA Card से आपकी मेडिकल हिस्ट्री कैसे रीड की जा सकती है?

ABHA Card बनाने पर आपको 14 अंकों का ID नंबर मिलेगा। साथ ही इसमें एक QR कोड होगा। इसे स्कैन करके आपकी मेडिकल जानकारी रीड की जा सकती है।

5. इस कार्ड से रिलेटेड कोई ऐप है या नहीं?

बिल्कुल है। आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट यानी ABHA ऐप प्ले स्टोर पर मौजूद है, जिसे पहले NDHM हेल्थ रिकॉर्ड्स ऐप के नाम से जाता था।

6. बहुत लोगों के मन में ये सवाल होगा कि ABHA Card यानी आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट और आयुष्मान कार्ड एक ही है या अलग-अलग? आखिर इन दोनों में क्या अंतर है?

आयुष्मान कार्ड
1.यह एक हेल्थ इंश्योरेंस कार्ड है।
2.आयुष्मान कार्ड सिर्फ गरीब लोगों के लिए है।
3.यह इलाज के वक्त फाइनेंशियली मदद करता है।
4.इस कार्ड में शहरी और ग्रामीण लोगों के लिए अलग-अलग क्राइटेरिया है।
ABHA Card
1.यह एक डिजिटल हेल्थ अकाउंट कार्ड है।
2.कोई भी भारतीय नागरिक इसे बना या बनवा सकता है।
3.मेडिकल या हेल्थ डेटा देखने और शेयर करने के काम आता है।
4.इस कार्ड के लिए कोई क्राइटेरिया तय नहीं है।