Uttarakhand Post Office GDS Online Registration: उत्तराखंड पोस्टल सर्किल के लिए 581 ग्रामीण डाक सेवक (BRANCH POSTMASTER (BPM), ASSISTANT BRANCH POSTMASTER (ABPM))पदों हेतु भर्ती की अधिसूचना जारी की गयी है इच्छुक एवं पात्र अभ्यर्थी अंतिम तिथि 22 सितंबर 2021 से पहले ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं शैक्षणिक योग्यता एवं विस्तृत जानकारी के लिए जारी अधिसूचना को पढ़ें Click Here
जरुरी डॉक्युमेंट्स और फॉर्म भरने की जानकारी के लिए नीचे बताई गयी प्रक्रिया को फॉलो करें जिससे आप खुद फॉर्म भर सकेंगे |
जरुरी डाक्यूमेंट्स– Uttarakhand Post Office GDS Online Registration
फॉर्म भरने से पहले कुछ जरुरी डाक्यूमेंट्स जिन्हे स्कैन कर के आपको रख लेना चाहिए:-
पासपोर्ट फोटो
हस्ताक्षर
10 मार्कशीट (DOB PROOF)
जाति प्रमाण पत्र
कम्प्यूटर सर्टिफिकेट (यदि हो)
NOTE : ऑनलाइन आवेदन करने के तीन स्टेज हैं पहला रजिस्ट्रेशन दूसरा फीस भुगतान तीसरा आवेदन जिसे हमें स्टेप बाय स्टेप पूरा करना है
STEP 1:REGISTRATION:- ऑनलाइन आवेदन करने के लिए सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट https://appost.in/gdsonline/ जाएँ में मेनू में रजिस्ट्रेशन लिंक पर क्लिक करें |रजिस्ट्रेशन फॉर्म में आवेदक अपनी बेसिक जानकारी भरें फोटो तथा सिग्नेचर संलग्न करें और सबमिट करें सबमिट करते ही रजिस्ट्रेशन नंबर स्क्रीन में आ जायेगा साथ ही मैसेज में प्राप्त हो जायेगा जिसे सेव करके रखें |
STEP 2: FEES PAYMENT :- प्राप्त रजिस्ट्रेशन नंबर की सहायता से फीस का भुगतान करें महिला, अनुसूचित जाति, जनजाति तथा दिव्यांगों हेतु फी में छूट दी गयी है अतः इन्हे भुगतान नहीं करना है सीधे तीसरा स्टेप फॉलो करें।
STEP 3:APPLY:- रजिस्ट्रेशन नंबर और OTP डाल कर फॉर्म में मांगी गयी सभी जानकारी ध्यान से भरें तथा दस्तावेज अपलोड करें
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
रजिस्ट्रेशन करते समय सर्वर चला गया अब दूसरा रजिस्ट्रशन करने पर already registered बता रहा है
इस कंडीशन में आप सबसे पहले अपने मोबाइल मैसेज बॉक्स में चेक करें रजिस्ट्रेशन नंबर आया है की नहीं यदि आया है तो उसी से आगे की प्रक्रिया करें यदि नहीं आया है तो दूसरा मोबाइल नंबर डालकर फिर से रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं|
Employee NOC विकल्प में क्या चयन करें।
यदि आप पहले से गवर्नमेंट नौकरी में हैं तो आपको NOC लेना होगा तो आप YES का ऑप्शन चुनेंगे यदि नहीं हैं तो NO विकल्प का चयन करें
मार्कशीट अपलोड नहीं हो रही हैं एरर आ रहा है
मार्कशीट अपलोड करने से पहले ध्यान रखें सभी डॉक्यूमेंट JPEG फॉर्मेट में और साइज 200KB के अंदर होना चाहिए यदि ऐसा है तो मार्कशीट अपलोड करने में कोई प्रॉब्लम नहीं होगी |
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान साल 2021 की नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क / National Institutional Ranking Framework (NIRF) रैंकिंग जारी कर दी है | कोरोना के चलते पिछले साल की तरह इस साल भी रैंकिग जारी करने का कार्यक्रम ऑनलाइन हुआ | शिक्षा मंत्री द्वारा NIRF Ranking कुल 11 कैटेगरी में जारी किया गया है | इनमें ओवरऑल, यूनिवर्सिटी, मैनेजमेंट, कॉलेज, फार्मेसी, मेडिकल, इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर, ARIIA (अटल रैंकिंग ऑफ इंस्टीट्यूट ऑन इनोवेशन अचीवमेंट्स) और लॉ शामिल हैं |
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मद्रास (IIT मद्रास) राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) रैंकिंग 2021 में शीर्ष रैंक हासिल करते हुए भारत में सर्वश्रेष्ठ संस्थान के रूप में उभरा था | लगातार तीसरे साल, IIT मद्रास ने टॉप रैंक हासिल की है | आईआईटी मद्रास को NIRF Ranking 2021 में ‘ओवरऑल’ और ‘इंजीनियरिंग’ कैटेगरी में भारत में नंबर एक स्थान दिया गया है | आईआईटी ने फिर से लिस्ट में बड़ा स्कोर किया है, जिसमें सात आईआईटी ने लिस्ट में स्थान हासिल किया है |
IISc बेंगलुरु ने देश के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में ओवरऑल रैंकिंग में दूसरे नंबर पर है | टॉप विश्वविद्यालयों की लिस्ट में IIT बॉम्बे ने तीसरा स्थान हासिल किया है | IIT दिल्ली, IIT कानपुर और IIT खड़गपुर को क्रमशः चौथे, पांचवें और छठे स्थान पर रखा गया है | जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय ने नौवीं और दसवीं रैंक हासिल की है |
एनआईआरएफ रैंकिंग 2021 ओवरआल रैंक 1: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, आईआईटी मद्रास रैंक 2:भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु रैंक 3: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बॉम्बे रैंक 4: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली रैंक 5: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर रैंक 6: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खड़गपुर रैंक 7: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रुड़की रैंक 8: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, गुवाहाटी रैंक 9: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली रैंक 10: बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी
NIRF Ranking 2021: Overall Category
आईआईटी मद्रास
आईआईएससी, बेंगलुरु
आईआईटी, बॉम्बे
आईआईटी दिल्ली
आईआईटी कानपुर
आईआईटी खड़गपुर
आईआईटी रुड़की
आईआईटी गुवाहाटी
जेएनयू, दिल्ली
आईआईटी रुड़की
बीएचयू, वाराणसी |
NIRF Ranking 2021: University Category
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बैंगलुरू
जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, वाराणसी
कलकत्ता यूनिवर्सिटी, कोलकाता
अमृता विश्व विद्यापीठ, कोयम्बत्तूर
जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली
मणिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजूकेशन, मणिपाल
जादवपुर यूनिवर्सिटी, कोलकाता
यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद, हैदराबाद
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, अलीगढ़
NIRF Ranking 2021: Engineering College Category
आईआईटी मद्रास
आईआईटी दिल्ली-2
आईआईटी बॉम्बे -3
आईआईटी कानपुर
आईआईटी खड़गपुर
आईआईटी रुड़की
आईआईटी गुवाहाटी
आईआईटी हैदराबाद
एनआईटी तिरुचापल्ली
एनआईटी सुरथकल
NIRF Ranking 2021: MBA College Category
आईआईएम अहमदाबाद रैंक
आईआईएम बैंगलोर रैंक
आईआईएम कलकत्ता रैंक
आईआईएम कोझीकोड रैंक
आईआईटी-दिल्ली रैंक
आईआईएम इंदौर रैंक
आईआईएम लखनऊ रैंक
एक्सएलआरआई झारखंड रैंक
आईआईटी खड़गपुर रैंक
आईआईटी बॉम्बे |
NIRF Ranking 2021: Pharmacy College Category
जामिया हमदर्द, नई दिल्ली
पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़
बिट्स, पिलानी
एनआईपीईआर, मोहाली
रासायनिक प्रौद्योगिकी संस्थान, महाराष्ट्र
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च हैदराबाद,
जेएसएस कॉलेज ऑफ फार्मेसी, तमिलनाडु
मणिपाल कॉलेज ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेज, मणिपाल, कर्नाटक
जेएसएस कॉलेज ऑफ फार्मेसी, कर्नाटक
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च अहमदाबाद, गुजरात
NIRF Ranking 2021: Medical College Category
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली
पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, चंडीगढ़
क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लोर
राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान, बैंगलोर
संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, प्रयाजराज
अमृता इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च, कोच्चि
जवाहरलाल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, पुडुचेरी
कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज, मणिपाल
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ
NIRF Ranking 2021: Dental College Category
मौलाना आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज, दिल्ली कॉलेज ऑफ डेंटल साइंसेज
डॉ डी वाई पाटिल विद्यापीठ
सविता इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड टेक्निकल साइंस, चेन्नई
मणिपाल कॉलेज ऑफ डेंटल साइंसेज, उडुपी
एबीएसएम दंत चिकित्सा विज्ञान संस्थान, मंगलुरु
मणिपाल कॉलेज ऑफ डेंटल साइंसेज, मैंगलोर
श्री रामचंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च, चेन्नई
नायर हॉस्पिटल डेंटल कॉलेज, मुंबई
एसआरएम डेंटल कॉलेज, चेन्नई
जेएसएस डेंटल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, मैसूर
NIRF Ranking 2021: Research College Category
भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर, उत्तर प्रदेश
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की, उत्तराखंड
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, दिल्ली
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गुवाहाटी, असम
टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, महाराष्ट्र
NIRF Ranking 2021: Architecture College Category
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रुड़की
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कालीकट
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खड़गपुर
स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, नई दिल्ली
पर्यावरण योजना और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, अहमदाबाद
योजना और वास्तुकला स्कूल भोपाल, मध्य प्रदेश
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान तिरुचिरापल्ली, तमिलनाडु
योजना और वास्तुकला स्कूल, आंध्र प्रदेश
इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंजीनियरिंग साइंस एंड टेक्नोलॉजी, पश्चिम बंगाल
जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली
NIRF Ranking 2021: Mangement College Category
आईआईएम अहमदाबाद, गुजरात
आईआईएम बैंगलोर, कर्नाटक
आईआईएम कलकत्ता, पश्चिम बंगाल
आईआईएम कोझीकोड, केरल
आईआईटी दिल्ली, नई दिल्ली
आईआईएम इंदौर, मध्य प्रदेश
आईआईएम लखनऊ, उत्तर प्रदेश
एक्सएलआरआई जमशेदपुर, झारखंड
आईआईटी खड़गपुर, पश्चिम बंगाल
आईआईटी बॉम्बे, महाराष्ट्र
NIRF Ranking: Law College Category
नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु
नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, दिल्ली
नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ लॉ, हैदराबाद
पश्चिम बंगाल राष्ट्रीय न्यायिक विज्ञान विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर, पश्चिम बंगाल
गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, गुजरात
जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली
नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, जोधपुर, राजस्थान
सिम्बायोसिस लॉ स्कूल, महाराष्ट्र
कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी, भुवनेश्वर
उत्तर प्रदेश पंचायत मतदाता सूची में अपना नाम कैसे ढूंढे- चुनाव आयोग द्वारा जारी किया जाने वाला पहचान पत्र वोटर आईडी कई मायने में नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण होता है सबसे पहला तो यह पहचान पत्र दर्शाता है की आप उस क्षेत्र के एक महत्वपूर्ण मतदाता हैं जो अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं जनसेवक को चुनने में जो आपके क्षेत्र का विकास कर सके।
आप भी अपने क्षेत्र या पंचायत के मतदाता हैं की नहीं जिस पंजीयत में आप रह रहे हैं वहां की मतदाता सूचि में आप नाम दर्ज है की नहीं यह देखने या पता करने के लिए उत्तर प्रदेश चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट है जहाँ से मतदाता सूचि में दर्ज मतदाताओं की सूचि देखि जा सकती है।
उत्तर प्रदेश पंचायत मतदाता सूची में नाम होने पर ही आप वोट करने के लिए पात्र होते हैं और सूचि में नाम होने के उपरांत ही आप वोटर आईडी के लिए आवेदन करने के पत्र होते हैं। इसलिए अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए मतदान अवश्य करें। इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको बताने जा रहे हैं की कैसे आप आपकी ग्राम पंचायत की मतदाता सूचि और उस सूचि में अपना नाम देख सकते हैं।
उत्तर प्रदेश पंचायत मतदाता सूची में अपना नाम कैसे ढूंढे?
http://sec.up.nic.in/ उत्तर प्रदेश चुनाव आयोग की अधिकारी वेबसाइट में वोटर सर्विस की लिंक के जरिये आप इस सुविधा का लाभ ले सकते हैं। यहाँ पर उत्तर प्रदेश मतदाताओं के लिए चुनाव से सम्बंधित सुविधाएं प्रदान की जाती हैं जैसे की मतदाता सूचि की जानकारी लेना, वोटर आईडी के आवेदन करना, मतदाता पर्ची डाउनलोड करना, मोबाइल नंबर रजिस्टर करना आदि। अब आप मुख्य पृष्ठ में VOTER SERVICE लिंक पे क्लिक करें
2. SEARCH PANCHAYAT VOTERS
जैसा की आप टैब के माध्यम से चुनाव आयोग द्वारा दी जाने वाली सेवाओं के बारे में यहाँ से देख और जानकारी ले सकते हैं। विभिन्न प्रकार के प्रदान की जाने वाली सेवाओं में से सर्च पंचायत वोटर्स का चयन करें|
3. जानकारी भरें
कुछ निर्देश दिए हैं उसे सावधानी से पढ़ें और पालन करते हुए दिए हुए फॉर्म्स में जान करि भरें जिसका भी नाम पंचायत की मतदाता सूचि में देखना चाहते हैं और सर्च बटन पर क्लिक करें
4. मतदाता सूचि
उपरोक्त विकल्प में आपके द्वारा दी जानकारी के अनुसार मतदाता सूचि आपकी स्क्रीन पर आ जाएगी जहा पर आप अपना नाम देख सकते हैं साथ ही मतदाता पर्ची प्रिंट करने एवं मोबाइल नंबर जोड़ने का भी विकल्प दिया गया है।
बिहार पंचायत चुनाव 2021:- बिहार दूसरे चरण के लिए नामांकन शुरू
बिहार दूसरे चरण के लिए नामांकन शुरू- बिहार में पंचायत चुनाव के दूसरे चरण के मतदान के लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है | राज्य में 7 सितम्बर 2021 मंगलवार से शुरू हो गया है | दूसरे दौर के मतदान में 34 जिलों के 48 प्रखंडों में नामांकन वोटिंग होगी | निर्वाचन आयोग ने दूसरे दौर के लिए 13 सितंबर तक नामांकन चलेगा तो 18 सितंबर तक अपना नाम वापस ले सकते हैं |
इसके साथ ही आयोग ने कहा है कि इसी दिन चुनाव चिन्ह भी आवंटित किया जाएगा | इसके अलावा, 29 सितंबर को दूसरे चरण का मतदान होना है और इसके दो दिन बाद कॉउंटिंग होना है | आयोग सचिव मुकेश सिन्हा ने बताया कि उम्मीदवार ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से नामांकन कर सकते हैं |
बिहार में पंचायत चुनाव के दूसरे फेज के लिए जारी अधिसूचना के बीच राज्य के पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी ने यहां सोमवार को कहा कि पंचायतों को मजबूत और सुदृढ़ बनाने को लेकर सरकार प्रयास कर रही है | उन्होंने कहा कि बिहार सरकार प्रत्येक पंचायत में पंचायत भवन बनाएगी |
उन्होंने भरोसा देते हुए कहा कि पंचायतों में RTPGS काउंटर खोला जाएगा, जिससे आमलोगों को छोटे कायरें के लिए प्रखंड मुख्यालय जाने की जरूरत नहीं होगी | इसके साथ ही पंचायती राज मंत्री चौधरी ने भाजपा प्रदेश कार्यालय में सहयोग कार्यक्रम के बाद संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि सभी पंचायतों में पंचायत कार्यपालक सहायक की नियुक्ति होगी |
बिहार पंचायत चुनाव 2021 का शिड्यूल:- बिहार दूसरे चरण के लिए नामांकन शुरू
पहला चरण
सूचना का प्रकाशन
1 सितम्बर 2021
नामांकन की तिथि
2 सितम्बर 2021 to 8 सितम्बर 2021
नामांकन पत्रों की जाँच
11 सितम्बर 2021 तक
नाम वापसी की अंतिम तिथि
13 सितम्बर 2021 तक
चुनाव चिन्ह आवंटन
13 सितंबर 2021
मतदान की तिथि
24 सितंबर 2021
मतगणना की तिथि
26 सितंबर 2021 और 27 सितंबर 2021
दूसरा चरण
सूचना का प्रकाशन
6 सितंबर 2021
नामांकन की तिथि
7 सितंबर 2021 से 13 सितंबर 2021
नामांकन पत्रों की जाँच
16 सितंबर 2021 तक
नाम वापसी की अंतिम तिथि
18 सितंबर 2021 तक
चुनाव चिन्ह आवंटन
18 सितंबर 2021
मतदान की तिथि
29 सितंबर 2021
मतगणना की तिथि
1 अक्टूबर 2021 और 2 अक्टूबर 2021
तीसरा चरण
सूचना का प्रकाशन
15 सितंबर 2021
नामांकन की तिथि
16 सितंबर 2021 से 22 सितंबर 2021 तक
नामांकन पत्रों की जाँच
25 सितंबर 2021 तक
नाम वापसी की अंतिम तिथि
27 सितंबर 2021 तक
चुनाव चिन्ह आवंटन
27 सितंबर 2021
मतदान की तिथि
8 अक्टूबर 2021
मतगणना की तिथि
10 अक्टूबर 2021 और 11 अक्टूबर 2021
चौथा चरण
सूचना का प्रकाशन
24 सितंबर 2021
नामांकन की तिथि
25 सितंबर 2021 से 1 अक्टूबर 2021
नामांकन पत्रों की जाँच
4 अक्टूबर 2021
नाम वापसी की अंतिम तिथि
6 अक्टूबर 2021 तक
चुनाव चिन्ह आवंटन
6 अक्टूबर 2021
मतदान की तिथि
20 अक्टूबर 2021
मतगणना की तिथि
22 अक्टूबर 2021 और 23 अक्टूबर 2021
पाँचवा चरण
सूचना का प्रकाशन
29 सितंबर 2021
नामांकन की तिथि
30 सितंबर 2021 से 6 अक्टूबर 2021
नामांकन पत्रों की जाँच
9 अक्टूबर 2021 तक
नाम वापसी की अंतिम तिथि
11 अक्टूबर 2021 तक
चुनाव चिन्ह आवंटन
11 अक्टूबर 2021
मतदान की तिथि
24 अक्टूबर 2021
मतगणना की तिथि
26 अक्टूबर 2021 और 27 अक्टूबर 2021
छठा चरण
सूचना का प्रकाशन
4 अक्टूबर 2021
नामांकन की तिथि
5 अक्टूबर 2021 से 11 अक्टूबर 2021 तक
नामांकन पत्रों की जाँच
16 अक्टूबर 2021 तक
नाम वापसी की अंतिम तिथि
18 अक्टूबर 2021 तक
चुनाव चिन्ह आवंटन
18 अक्टूबर 2021
मतदान की तिथि
3 नवंबर 2021
मतगणना की तिथि
13 नवंबर 2021 और 14 नवंबर 2021
सातवाँ चरण
सूचना का प्रकाशन
18 अक्टूबर 2021
नामांकन की तिथि
19 अक्टूबर 2021 से 25 अक्टूबर 2021 तक
नामांकन पत्रों की जाँच
28 अक्टूबर 2021 तक
नाम वापसी की अंतिम तिथि
30 अक्टूबर 2021 तक
चुनाव चिन्ह आवंटन
30 अक्टूबर 2021
मतदान की तिथि
15 नवंबर 2021
मतगणना की तिथि
17 नवंबर 2021 और 18 नवंबर 2021
आठवाँ चरण
सूचना का प्रकाशन
20 अक्टूबर 2021
नामांकन की तिथि
21 अक्टूबर 2021 से 27 अक्टूबर 2021 तक
नामांकन पत्रों की जाँच
30 अक्टूबर 2021 तक
नाम वापसी की अंतिम तिथि
1 नवंबर 2021 तक
चुनाव चिन्ह आवंटन
1 नवंबर 2021
मतदान की तिथि
24 नवंबर 2021
मतगणना की तिथि
26 नवंबर 2021 और 27 नवंबर 2021
नौवाँ चरण
सूचना का प्रकाशन
22 अक्टूबर 2021
नामांकन की तिथि
23 अक्टूबर 2021 से 29 अक्टूबर 2021 तक
नामांकन पत्रों की जाँच
1 नवंबर 2021 तक
नाम वापसी की अंतिम तिथि
3 नवंबर 2021 तक
चुनाव चिन्ह आवंटन
3 नवंबर 2021
मतदान की तिथि
29 नवंबर 2021
मतगणना की तिथि
1 दिसंबर 2021 और 2 दिसंबर 2021
दसवाँ चरण
सूचना का प्रकाशन
25 अक्टूबर 2021
नामांकन की तिथि
26 अक्टूबर 2021 से 1 नवंबर 2021 तक
नामांकन पत्रों की जाँच
5 नवंबर 2021 तक
नाम वापसी की अंतिम तिथि
8 नवंबर 2021 तक
चुनाव चिन्ह आवंटन
8 नवंबर 2021
मतदान की तिथि
8 दिसंबर 2021
मतगणना की तिथि
10 दिसंबर 2021 और 11 दिसंबर 2021
ग्यारहवां चरण
सूचना का प्रकाशन
17 नवंबर 2021
नामांकन की तिथि
18 नवंबर 2021 से 24 नवंबर 2021 तक
नामांकन पत्रों की जाँच
27 नवंबर 2021 तक
नाम वापसी की अंतिम तिथि
29 नवंबर 2021 तक
चुनाव चिन्ह आवंटन
29 नवंबर 2021
मतदान की तिथि
12 दिसंबर 2021
मतगणना की तिथि
14 दिसंबर 2021 और 15 दिसंबर 2021
नामांकन के लिए जरूरी दस्तावेज:-
नाम निर्देश पत्र यानी फॉर्म 06
पंचायती राज अधिनियम की जानकारी संबंधी शपथ पत्र
मतदाता सूची में नाम अंकित होने संबंधी शपथ पत्र
आपराधिक मामलों की जानकारी, शैक्षणिक योग्यता व संपत्ति का ब्योरा
अभ्यर्थी का बायोडाटा
नाजिर रशीद
मूल जाति प्रमाण पत्र
अभ्यर्थी का दो फोटो |
पंचायत चुनाव में संपत्ति का गलत ब्योरा देने वालों पर कार्रवाई होगी | खासकर वैसे लोग जो अपने शपथ पत्र में सपंत्ति के बारे में गलत जानकारी देंगे | सरकार ऐसे लोगों पर लोक प्रहरी के माध्यम से कार्रवाई करेगी | जो भी इस बार चुनाव में नामांकन का पर्चा दाखिल करेंगे, उन्हें संपत्ति की घोषणा करनी होगी | अगर गलत संपत्ति की घोषणा की तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी | गलत संपत्ति की घोषणा करने पर सरकार नियम 18 (5) के तहत कार्रवाई करेगी | ऐसे पंचायत प्रतिनिधियों की बर्खास्तगी भी होगी |
बिहार पंचायत चुनाव 2021:- CEO Bihar Voter List 2021
राज्य सरकार द्वारा बिहार में पंचायत चुनाव की घोषणा कर दी गई है | यह चुनाव 11 चरणों में कराए जाएंगे | इसके साथ ही बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है | इस बात की जानकारी राज्य निर्वाचन आयुक्त डॉ दीपक प्रसाद द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से 24 अगस्त 2021 को प्रदान की गई | उनके द्वारा यह भी जानकारी प्रदान की गई थी 8072 पंचायतों में 255022 पदों के लिए चुनाव आयोजित किए जाएंगे |
जिसमें 6 करोड़ 38 लाख 94 हजार 737 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे | इनमे से 33580487 पुरुष मतदाता है एवं 30311779 महिला मतदाता हैं एवं 2471 अन्य मतदाता है | इसके अलावा उनके द्वारा यह भी जानकारी दी गई कि पश्चिमी चंपारण का बोतिया प्रखंड संपूर्ण रूप से नगरपालिका में शामिल हो गया है | जिससे पंचायत चुनाव के प्रखंड की संख्या 533 हो गई है |
शिवहर के तरियानी, लखीसराय के सूरजगढ़, शेखपुर के शेखपुर, खगड़िया के परवक्ता, गोगरी के खगड़िया एवं अलौली का चुनाव जिला परिषद प्रदेशिक निर्वाचन क्षेत्र के आधार पर दो चरणों में निर्धारित है | जिससे कि कुल 540 प्रखंडों में चुनाव होंगे | चुनाव में 187105 ईवीएम और 208514 बैलट बॉक्स का इस्तेमाल किया जाएगा। बिहार में 113891 मतदाता केंद्रों में मतदान किया जाएगा | राज्य के सभी बाढ़ प्रभावित जिलों में पहले चरण में चुनाव नहीं रखा गया है |
बिहार पंचायत चुनाव 2021 का शिड्यूल:- CEO Bihar Voter List 2021
पहला चरण
सूचना का प्रकाशन
1 सितम्बर 2021
नामांकन की तिथि
2 सितम्बर 2021 to 8 सितम्बर 2021
नामांकन पत्रों की जाँच
11 सितम्बर 2021 तक
नाम वापसी की अंतिम तिथि
13 सितम्बर 2021 तक
चुनाव चिन्ह आवंटन
13 सितंबर 2021
मतदान की तिथि
24 सितंबर 2021
मतगणना की तिथि
26 सितंबर 2021 और 27 सितंबर 2021
दूसरा चरण
सूचना का प्रकाशन
6 सितंबर 2021
नामांकन की तिथि
7 सितंबर 2021 से 13 सितंबर 2021
नामांकन पत्रों की जाँच
16 सितंबर 2021 तक
नाम वापसी की अंतिम तिथि
18 सितंबर 2021 तक
चुनाव चिन्ह आवंटन
18 सितंबर 2021
मतदान की तिथि
29 सितंबर 2021
मतगणना की तिथि
1 अक्टूबर 2021 और 2 अक्टूबर 2021
तीसरा चरण
सूचना का प्रकाशन
15 सितंबर 2021
नामांकन की तिथि
16 सितंबर 2021 से 22 सितंबर 2021 तक
नामांकन पत्रों की जाँच
25 सितंबर 2021 तक
नाम वापसी की अंतिम तिथि
27 सितंबर 2021 तक
चुनाव चिन्ह आवंटन
27 सितंबर 2021
मतदान की तिथि
8 अक्टूबर 2021
मतगणना की तिथि
10 अक्टूबर 2021 और 11 अक्टूबर 2021
चौथा चरण
सूचना का प्रकाशन
24 सितंबर 2021
नामांकन की तिथि
25 सितंबर 2021 से 1 अक्टूबर 2021
नामांकन पत्रों की जाँच
4 अक्टूबर 2021
नाम वापसी की अंतिम तिथि
6 अक्टूबर 2021 तक
चुनाव चिन्ह आवंटन
6 अक्टूबर 2021
मतदान की तिथि
20 अक्टूबर 2021
मतगणना की तिथि
22 अक्टूबर 2021 और 23 अक्टूबर 2021
पाँचवा चरण
सूचना का प्रकाशन
29 सितंबर 2021
नामांकन की तिथि
30 सितंबर 2021 से 6 अक्टूबर 2021
नामांकन पत्रों की जाँच
9 अक्टूबर 2021 तक
नाम वापसी की अंतिम तिथि
11 अक्टूबर 2021 तक
चुनाव चिन्ह आवंटन
11 अक्टूबर 2021
मतदान की तिथि
24 अक्टूबर 2021
मतगणना की तिथि
26 अक्टूबर 2021 और 27 अक्टूबर 2021
छठा चरण
सूचना का प्रकाशन
4 अक्टूबर 2021
नामांकन की तिथि
5 अक्टूबर 2021 से 11 अक्टूबर 2021 तक
नामांकन पत्रों की जाँच
16 अक्टूबर 2021 तक
नाम वापसी की अंतिम तिथि
18 अक्टूबर 2021 तक
चुनाव चिन्ह आवंटन
18 अक्टूबर 2021
मतदान की तिथि
3 नवंबर 2021
मतगणना की तिथि
13 नवंबर 2021 और 14 नवंबर 2021
सातवाँ चरण
सूचना का प्रकाशन
18 अक्टूबर 2021
नामांकन की तिथि
19 अक्टूबर 2021 से 25 अक्टूबर 2021 तक
नामांकन पत्रों की जाँच
28 अक्टूबर 2021 तक
नाम वापसी की अंतिम तिथि
30 अक्टूबर 2021 तक
चुनाव चिन्ह आवंटन
30 अक्टूबर 2021
मतदान की तिथि
15 नवंबर 2021
मतगणना की तिथि
17 नवंबर 2021 और 18 नवंबर 2021
आठवाँ चरण
सूचना का प्रकाशन
20 अक्टूबर 2021
नामांकन की तिथि
21 अक्टूबर 2021 से 27 अक्टूबर 2021 तक
नामांकन पत्रों की जाँच
30 अक्टूबर 2021 तक
नाम वापसी की अंतिम तिथि
1 नवंबर 2021 तक
चुनाव चिन्ह आवंटन
1 नवंबर 2021
मतदान की तिथि
24 नवंबर 2021
मतगणना की तिथि
26 नवंबर 2021 और 27 नवंबर 2021
नौवाँ चरण
सूचना का प्रकाशन
22 अक्टूबर 2021
नामांकन की तिथि
23 अक्टूबर 2021 से 29 अक्टूबर 2021 तक
नामांकन पत्रों की जाँच
1 नवंबर 2021 तक
नाम वापसी की अंतिम तिथि
3 नवंबर 2021 तक
चुनाव चिन्ह आवंटन
3 नवंबर 2021
मतदान की तिथि
29 नवंबर 2021
मतगणना की तिथि
1 दिसंबर 2021 और 2 दिसंबर 2021
दसवाँ चरण
सूचना का प्रकाशन
25 अक्टूबर 2021
नामांकन की तिथि
26 अक्टूबर 2021 से 1 नवंबर 2021 तक
नामांकन पत्रों की जाँच
5 नवंबर 2021 तक
नाम वापसी की अंतिम तिथि
8 नवंबर 2021 तक
चुनाव चिन्ह आवंटन
8 नवंबर 2021
मतदान की तिथि
8 दिसंबर 2021
मतगणना की तिथि
10 दिसंबर 2021 और 11 दिसंबर 2021
ग्यारहवां चरण
सूचना का प्रकाशन
17 नवंबर 2021
नामांकन की तिथि
18 नवंबर 2021 से 24 नवंबर 2021 तक
नामांकन पत्रों की जाँच
27 नवंबर 2021 तक
नाम वापसी की अंतिम तिथि
29 नवंबर 2021 तक
चुनाव चिन्ह आवंटन
29 नवंबर 2021
मतदान की तिथि
12 दिसंबर 2021
मतगणना की तिथि
14 दिसंबर 2021 और 15 दिसंबर 2021
बिहार पंचायत चुनाव 2021 के कुछ मुख्य तथ्य:-
जिलों की संख्या
38
प्रखंड की संख्या
534
ग्राम पंचायत की संख्या
8072
ग्रामीण जनसंख्या
92809194
कुल मतदाता केंद्र
113891
कुल ग्रामीण मतदाता
63894737
पुरुष मतदाता
33580487
महिला मतदाता
30311779
अन्य मतदाता
2471
बिहार पंचायत चुनाव 2021 के पदों की संख्या:-
ग्राम पंचायत मुखिया
8072
ग्राम पंचायत सदस्य
113307
पंचायत समिति सदस्य
11104
जिला परिषद सदस्य
1160
ग्राम कचहरी सरपंच
8072
ग्राम कचहरी सरपंच
113307
कुल
255022
बिहार पंचायत चुनाव 2021 के चरण:-
चरण
तिथि
जिला
प्रखंड
पहला चरण
24 सितंबर 2021
10 जिले
12 प्रखंड
दूसरा चरण
29 सितंबर 2021
34 जिले
48 प्रखंड
तीसरा चरण
8 अक्टूबर 2021
35 जिले
50 प्रखंड
चौथा चरण
20 अक्टूबर 2021
36 जिले
53 प्रखंड
पांचवा चरण
24 अक्टूबर 2021
38 जिले
58 प्रखंड
छठा चरण
3 नवंबर 2021
37 जिले
57 प्रखंड
सातवा चरण
15 नवंबर 2021
37 जिले
63 प्रखंड
आठवां चरण
24 नवंबर 2021
36 जिले
55 प्रखंड
नवा चरण
29 नवंबर 2021
35 जिले
53 प्रखंड
दसवां चरण
8 दिसंबर 2021
34 जिले
54 प्रखंड
11 चरण
12 दिसंबर 2021
20 जिले
38 प्रखंड
Bihar Voter List 2021:- CEO Bihar Voter List 2021
CEO बिहार मतदाता सूची 2021 PDF मतदाता सूची http://ceobihar.nic.in/पर डाउनलोड करने के लिए उपलब्ध है | लोग अब ई-रोल या ऑनलाइन मतदाता सूची में अपना नाम खोज सकते हैं और अपना मतदाता पहचान पत्र भी डाउनलोड कर सकते हैं | चुनाव आयोग ने बिहार में पंचायत चुनाव की घोषणा कर दी है |
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO), बिहार पूरे राज्य में चुनाव के सफल संचालन के लिए जिम्मेदार है | CEO चुनाव से पहले बिहार वोटर लिस्ट पीडीएफ (Electoral Roll) प्रकाशित और अपडेट करते हैं | तदनुसार, लोग फोटो के साथ CEO बिहार अंतिम मतदाता सूची 2021 में अपना नाम खोज सकते हैं और http://sec.bihar.gov.in/या http://ceobihar.nic.in/ पर चुनाव से पहले मतदाता पहचान पत्र डाउनलोड कर सकते हैं | लोग अपने फोटो के साथ बिहार के जिला वाइज / पंचायत वार मतदाता सूची में अपना नाम देख सकते हैं |
जैसे-जैसे पंचायत चुनाव नजदीक आ रहे हैं, बिहार के नागरिक ऑनलाइन पंजीकरण करा सकते हैं और निर्वाचन क्षेत्रों के सदस्यों का चुनाव करने के लिए वोट का अधिकार पाने के लिए वोटर आईडी कार्ड के लिए अपना नाम जोड़ सकते हैं |
इसके अलावा, लोग पूरी मतदाता सूची पीडीएफ फाइल (पंचायत / नगर पालिका वाइज) डाउनलोड कर सकते हैं या सीधे बिहार के मतदाता सूची में अपना नाम पा सकते हैं। लोग सीईओ मतदाता सूची पीडीएफ में मैनुअल खोज कर सकते हैं | इसके अलावा, लोग एक परेशानी मुक्त प्रक्रिया को अपना सकते हैं और अपने नामों की ऑनलाइन जांच कर सकते हैं, क्योंकि ऑनलाइन प्रक्रिया से चीजें आसान हो जाती हैं |
मतदाता सूची में अपना नाम खोजने की प्रक्रिया:-
Step 1: सबसे पहले बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट http://ceobihar.nic.in/पर जाएं |
Step 2: उस पृष्ठ को नीचे स्क्रॉल करें जिसके अंत में “Important Links” अनुभाग मौजूद है | यहां आवेदक “Search in E-Roll” लिंक पर क्लिक कर सकते हैं जैसा कि यहां दिखाया गया है या सीधेhttp://ceobihar.nic.in/search/roll पर क्लिक करें |
Step 3: उपर्युक्त लिंक पर क्लिक करने पर, एक नया “Search Electoral in Roll” पेज ceobihar वेबसाइट पर खुल जाएगा जैसा कि नीचे दिखाया गया है |
Step 4: तदनुसार, एक नया Bihar Final Roll PDF या CEO Bihar Voter List 2021 डाउनलोड पेज खुलेगा जैसा कि नीचे दिखाया गया है | यहां तक कि नीचे दिखाए गए पेज को खोलने के लिए लोग सीधे लिंक http://ele.bihar.gov.in/pdfsearch/ पर भी क्लिक कर सकते हैं |
Step 5: यहां लोग assembly segment, part number का चयन कर सकते हैं और दिखाए गए अनुसार कैप्चा दर्ज कर सकते हैं और फिर “View” बटन पर क्लिक करें |
Step 6: बाद में, CEO Bihar Voter List 2021 Final PDF Electoral Roll असेंबली वार दिखाई देगा |
Step 7: लोग इस पूर्ण सीईओ बिहार वोटर लिस्ट 2021 (PDF Electoral Roll) को अपने संबंधित विधानसभा क्षेत्र के लिए डाउनलोड कर सकते हैं |
बिहार के डाउनलोड किए गए PDF मतदाता सूची 2021 में, उम्मीदवारों को मैन्युअल रूप से अपना नाम खोजना होगा | अपने निर्वाचन क्षेत्र के सदस्य के चुनाव के लिए 2021 में अपना महत्वपूर्ण वोट डालने के लिए क्रम संख्या (मातदता परची) पर ध्यान दें |
Bihar Voter ID Card Download:-
बिहार मतदाता पहचान पत्र ऑनलाइन डाउनलोड करने के लिए, आवेदक “Search Electoral in Roll” पृष्ठ पर जा सकते हैं जैसा कि ऊपर Step 3 में वर्णित है | यहां आवेदक “Search E-Roll” नाम के दूसरे विकल्प पर क्लिक कर सकते हैं या सीधे नाम खोज पेज खोलने के लिए https://electoralsearch.in/ पर क्लिक कर सकते हैं |
यहां लोग अपना नाम ऑनलाइन बिहार बिहार वोटर लिस्ट 2021 में या तो अपने विवरण से या अपने चुनावी फोटो पहचान पत्र (EPIC नंबर) के माध्यम से देख सकते हैं | लोग तब अपना विवरण Save कर सकते हैं और अपना बिहार Voter ID Card ऑनलाइन डाउनलोड कर सकते हैं |
बिहार पंचायत मतदाता सूची PDF:-
उपर्युक्त प्रक्रिया के समान, सभी उम्मीदवार बिहार राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा प्रकाशित पंचायत मतदाता सूची को भी डाउनलोड कर सकते हैं | बिहार पंचायत मतदाता सूची 2021 डाउनलोड करने का सीधा लिंक नीचे दिया गया है |
Bihar Panchayat Wise Electoral Roll Final PDF Download page निम्नानुसार दिखाई देगा |
यहां उम्मीदवारों को District, Block, Panchayat, Ward का नाम दर्ज करना होगा और फिर बिहार पंचायत अंतिम मतदाता सूची (PDF) डाउनलोड करने के लिए “Download” बटन पर क्लिक करना होगा | फिर उम्मीदवार मैन्युअल रूप से फोटो के साथ पंचायत मतदाता सूची में अपना नाम खोज सकते हैं |
बिहार नगर पालिका मतदाता सूची पीडीएफ के लिए, लिंक पर क्लिक करें – http://sec.bihar.gov.in/USearchInFFinalPdf.aspx
Bihar Voters Search in E-Roll (Panchayat / Nagar Palika):-
पिछली प्रक्रियाओं में पहले आपको पीडीएफ की पूरी सूची डाउनलोड करनी थी, फिर आप उस सूची में अपना नाम ढूंढने में सक्षम थे | लेकिन अगर आप Voter List Final PDF डाउनलोड किए बिना मतदाता सूची में नाम ऑनलाइन खोजना चाहते हैं, तो आपको नीचे दिए गए इन चरणों का पालन करना होगा: –
सबसे पहले, आधिकारिक वेबसाइट http://sec.bihar.gov.in/ पर जाएं |
भारत में लोग गणेश चतुर्थी को बहुत उत्साह के साथ मनाते हैं | इस साल यह 10 सितंबर को मनाया जाएगा | 11 दिनों तक चलने वाले इस उत्सव का समापन 21 सितंबर को होगा | इस दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है | यह त्यौहार मुख्य रूप से महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है | बहुत सारे लोग इस त्योहार के दौरान भगवान गणेश की मूर्ति को अपने घर लाते हैं | अनंत चतुर्दशी पर भगवान गणेश को विदाई दी जाती है | विदाई के दिन लोग उनसे अगले साल लौटने की दुआ भी करते हैं | कुछ लोग इस त्योहार को सिर्फ दो दिन के लिए मनाते हैं तो कुछ इसे पूरे दस दिनों तक मनाते हैं | इसे गणेश महोत्सव भी कहते हैं |
भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है | सनातन धर्म में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले गणेश जी की पूजा की जाती है | इसलिए गणेश चतुर्थी का भी विशेष महत्व है | इस वर्ष ‘चतुर्थी तिथि’ 10 सितंबर को सुबह 12:17 बजे शुरू होगी और रात 10 बजे तक चलेगी | इस दिन लोगों को जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए, फिर घर में मंदिर की सफाई करनी चाहिए | फिर ‘दूर्वा घास’, ‘लड्डू’ और ‘मोदक’ भगवान गणेश को अर्पित किए जाते हैं | भगवान गणेश की पूजा ‘आरती’ के साथ पूरी होती है |
ऐसा माना जाता है कि भगवान गणेश की विधिवत पूजा करने से सभी समस्याओं का समाधान होता है | भगवान गणेश की मूर्ति, पानी का बर्तन, ‘पंचामृत’, लाल कपड़ा, ‘रोली’, ‘अक्षत’, ‘कलावा जनेऊ’, इलायची, नारियल, ‘चंडी का वर्क’, ‘सुपारी’, ‘लौंग’, पंचमेवा, ‘घी’ पूजा को पूरा करने के लिए कपूर’, ‘चौकी’ और ‘गंगाजल’ इकट्ठा करने की जरूरत है |
लोग जितना हर साल अपने घर में भगवान गणेश का स्वागत करना पसंद करते हैं, उतना ही उनके जाने पर उन्हें दुख भी होता है, लेकिन उनका स्वागत और विदाई दोनों ही दिल में उतनी ही भक्ति भाव से की जाती है | भगवान गणेश को आमतौर पर ‘विघ्नहर्ता’ के रूप में जाना जाता है, जिसका अर्थ है सभी बाधाओं को दूर करने वाले |
Happy Ganesh Chaturthi 2021 Quotes:-
A new sunrise, a new start
Oh Lord Ganesha, keep loving me as your part.
Happy Ganesh Chaturthi.
Hoping this Ganesh Chaturthi
will be the start of the year that
brings happiness for you.
Ganpati Bappa Morya…Mangal Murti Morya. Here’s wishing you and your family, a very Happy Ganesh Chaturthi
Ganesh Ji ka aashirwad aap par sada bana rahe. Ganesh Chaturthi ke pavan avsar par meri or se aap sabhi ko dheron shubh kamnayein
On the joyous day of Ganesh Chaturthi, here’s extending my heartfelt greetings to everyone at home.
This Ganesh Chaturthi, may Lord Ganesha shower you with his choicest blessings. Ganpati Bappa Morya!
Nothing can replace the peace and happiness that Ganesha brings to our homes each year. Here’s celebrating the birth anniversary of the adorable son of Shiva and Parvati. Happy Ganesh Chaturthi.
There’s something magical about this festival. It transforms the ordinary into the extraordinary, darkness into light and agony into ecstasy. Lord Ganesha brings along with him unparalleled energy, happiness and joy. Here’s wishing you and your family, a very Happy Ganesh Chaturthi.
This Ganesh Chaturthi, may you get rid of all the troubles and sorrow. May your life be filled with good health, wealth, peace and prosperity. Let us celebrate Ganesha and all the goodness that he represents. A very happy Ganesh Chaturthi to you and your family.
Jai Ganesh Jai Ganesh Jai Ganesh Deva, Mata Jaaki Parvati Pita Mahadeva. A very Happy Ganesh Chaturthi to you and your family.
With the blessings of Ganpati Bappa, may you achieve success in all your endeavours. A very Happy Ganesh Chaturthi to you and your family.
May the Lord, whose brilliance resembles a billion suns, bless you with lots of good luck and prosperity. Happy Ganesh Chaturthi to you and your family!
May Ganpati remove all your troubles and bless you with a delightful time ahead. I wish a very Happy Ganesh Chaturthi to your family!
Vakratunda Mahakaaya, Surya Koti Samaprabaha…Nirvighnam Kurumedeva Sarva Karyeshu Sarvada. Here’s wishing you a very Happy Ganesha Chaturthi. May you be blessed with good health, wealth, happiness, peace, and prosperity.
Lord Ganesha epitomises wisdom, knowledge and learning. This Ganesh Chaturthi, I hope and pray that he showers you with his countless blessings
On the joyous day of Ganesh Chaturthi, here’s extending my heartfelt greetings to everyone at home.
This Ganesh Chaturthi, may Lord Ganesha shower you with his choicest blessings. Ganpati Bappa Morya!
May Lord Ganesha shower you with success in all your endeavours. Happy Ganesh Chaturthi.
Meri or se aapko aur aapke pariwar ko Ganesh Chaturthi ki dheron shubh kamnayein.
Happy Ganesh Chaturthi– भारत में लोग गणेश चतुर्थी को बहुत उत्साह के साथ मनाते हैं | इस साल यह 10 सितंबर को मनाया जाएगा | 11 दिनों तक चलने वाले इस उत्सव का समापन 21 सितंबर को होगा | इस दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है | यह त्यौहार मुख्य रूप से महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है | बहुत सारे लोग इस त्योहार के दौरान भगवान गणेश की मूर्ति को अपने घर लाते हैं | अनंत चतुर्दशी पर भगवान गणेश को विदाई दी जाती है | विदाई के दिन लोग उनसे अगले साल लौटने की दुआ भी करते हैं | कुछ लोग इस त्योहार को सिर्फ दो दिन के लिए मनाते हैं तो कुछ इसे पूरे दस दिनों तक मनाते हैं | इसे गणेश महोत्सव भी कहते हैं |
भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है | सनातन धर्म में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले गणेश जी की पूजा की जाती है | इसलिए गणेश चतुर्थी का भी विशेष महत्व है | इस वर्ष ‘चतुर्थी तिथि’ 10 सितंबर को सुबह 12:17 बजे शुरू होगी और रात 10 बजे तक चलेगी | इस दिन लोगों को जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए, फिर घर में मंदिर की सफाई करनी चाहिए | फिर ‘दूर्वा घास’, ‘लड्डू’ और ‘मोदक’ भगवान गणेश को अर्पित किए जाते हैं | भगवान गणेश की पूजा ‘आरती’ के साथ पूरी होती है |
ऐसा माना जाता है कि भगवान गणेश की विधिवत पूजा करने से सभी समस्याओं का समाधान होता है | भगवान गणेश की मूर्ति, पानी का बर्तन, ‘पंचामृत’, लाल कपड़ा, ‘रोली’, ‘अक्षत’, ‘कलावा जनेऊ’, इलायची, नारियल, ‘चंडी का वर्क’, ‘सुपारी’, ‘लौंग’, पंचमेवा, ‘घी’ पूजा को पूरा करने के लिए कपूर’, ‘चौकी’ और ‘गंगाजल’ इकट्ठा करने की जरूरत है |
लोग जितना हर साल अपने घर में भगवान गणेश का स्वागत करना पसंद करते हैं, उतना ही उनके जाने पर उन्हें दुख भी होता है, लेकिन उनका स्वागत और विदाई दोनों ही दिल में उतनी ही भक्ति भाव से की जाती है | भगवान गणेश को आमतौर पर ‘विघ्नहर्ता’ के रूप में जाना जाता है, जिसका अर्थ है सभी बाधाओं को दूर करने वाले |
गणेश चतुर्थी की कथा:- Happy Ganesh Chaturthi Pooja
पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक एक दिन भगवान शिव भोगवती नामक स्थान पर गए | देवी पार्वती कैलाश पर अकेली थीं | उस समय उनके मन में संतान की इच्छा उत्पन्न हुई। उन्होंने अपने शरीर का मैल एकत्र किया | उस मैल से एक बालक का शरीर बना कर उसकी प्राण प्रतिष्ठा की | देवी ने उस बालक को कहा कि आज से तुम मेरे पुत्र हो | अब मैं स्नान के लिए अंदर गुफा में जा रही हूं | तुम किसी भी पुरुष को भीतर ना आने देना |
देवी पार्वती की आज्ञा मानकर गणेश गुफा के बाहर पहरा देने लगे | तभी भगवान शिव भोगवती से लौटकर कैलाश आए | जब भगवान शिव ने गुफा के भीतर जाना चाहा तो गणेश ने उनका रास्ता रोका | देवी पार्वती से मिलने से रोकने के कारण भगवान शिव गणेश पर क्रोधित हो गए | गणेश से कहा कि मुझे भीतर जाने दो वरना मैं तुम्हारा शीश तुम्हारे शरीर से अलग कर दूंगा | इसके बावजूद गणेश जी भगवान शिव का रास्ता रोक कर खड़े रहे |
भगवान शिव ने इससे क्रोधित हो अपने त्रिशूल से गणेश जी का शीश उनके शरीर से अलग कर दिया | देवी पार्वती को जब इस घटना की सूचना मिली तो वह रोती हुई भगवान शिव के पास आईं और बोली – हे भगवन, आपकी अनुपस्थिति में मैंने अपने मैल से एक बालक की रचना की थी | आपने उसका शीश क्यों काट दिया |
भगवान शिव को जब यह पता चला तो उन्होंने अपने गणों को आज्ञा दी कि जो भी माता अपने बालक की ओर पीठ कर सो रही हो | उसके बालक का शीश ले आओ | जंगल में एक हथिनी अपने बच्चे की ओर पीठ कर सो रही थी | भगवान शिव के गण हाथी का शीश लेकर कैलाश पहुंच गए | तब हाथी का शीश लगाकर भगवान शिव ने गणेश चतुर्थी जी को जीवित किया | तब से ही भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी मनाई जाती है |
गणेश चतुर्थी पूजन विधि:- Happy Ganesh Chaturthi Pooja
स्नानादि कर पवित्र हो जाएं |
जिस स्थल पर प्रतिमा विराजमान करनी है, उसे साफ करें। गंगाजल डाल कर पवित्र करें।
भगवान गणेश की प्रतिमा को चौकी पर पीले रंग का कपड़ा बिछाकर विराजमान करें।
धूप, दीप और अगरबत्ती जलाएं। ध्यान रखें कि जब तक गणेश जी आपके घर में रहेंगे तब तक अखंड दीपक जलाकर रखें।
गणेश जी के मस्तक पर कुमकुम का तिलक लगाएं।
फिर चावल, दुर्वा घास और पुष्प अर्पित करें।
गणेश जी का स्मरण कर गणेश स्तुति और गणेश चालीसा का पाठ करें।
इसके बाद ॐ गं गणपते नमः का जप करें।
भगवान गणेश की आरती करें।
आरती के बाद गणेश जी को फल या मिठाई आदि का भोग लगाएं। संभव हो तो मोदक का भोग जरूर लगाएं। भगवान गणेश को मोदक प्रिय हैं।
रात्रि जागरण करें।
गणेश जी को जब तक अपने घर में रखें, उन्हें अकेला न छोड़ें। कोई न कोई व्यक्ति हर समय गणेश जी की प्रतिमा के पास रहे |
गणेश चतुर्थी शुभ मुहूर्त:-
मध्याहन गणेश पूजा मुहूर्त – 11 बजकर 06 मिनट सुबह से दोपहर 01 बजकर 42 मिनट तक
वर्जित चंद्र दर्शन का समय – सुबह 09 बजकर 07 मिनट से रात 09:26 तक
चतुर्थी तिथि आरंभ – 21 अगस्त, शुक्रवार – रात 11 बजकर 02 मिनट से
चतुर्थी तिथि समाप्त – 22 अगस्त, शनिवार – शाम 07 बजकर 57 मिनट तक |
गणेश चतुर्थी पूजन सामग्री:-
दीपक
ज्योत
घी
अगरबत्ती
नारियल
कलश
फूलों की माला
जनेऊ
कुमकुम
चावल
कलावा
दुर्वा घास
पांच तरह की मिठाई
पांच तरह के मेवे
पांच तरह के फल
पान का पत्ता
सुपारी
लौंग
इलायची
आम के पत्ते
गंगाजल |
गणेश चतुर्थी पूजन विधि:- Happy Ganesh Chaturthi Pooja
स्नानादि कर पवित्र हो जाएं |
जिस स्थल पर प्रतिमा विराजमान करनी है, उसे साफ करें। गंगाजल डाल कर पवित्र करें।
भगवान गणेश की प्रतिमा को चौकी पर पीले रंग का कपड़ा बिछाकर विराजमान करें।
धूप, दीप और अगरबत्ती जलाएं। ध्यान रखें कि जब तक गणेश जी आपके घर में रहेंगे तब तक अखंड दीपक जलाकर रखें।
गणेश जी के मस्तक पर कुमकुम का तिलक लगाएं।
फिर चावल, दुर्वा घास और पुष्प अर्पित करें।
गणेश जी का स्मरण कर गणेश स्तुति और गणेश चालीसा का पाठ करें।
इसके बाद ॐ गं गणपते नमः का जप करें।
भगवान गणेश की आरती करें।
आरती के बाद गणेश जी को फल या मिठाई आदि का भोग लगाएं। संभव हो तो मोदक का भोग जरूर लगाएं। भगवान गणेश को मोदक प्रिय हैं।
रात्रि जागरण करें।
गणेश जी को जब तक अपने घर में रखें, उन्हें अकेला न छोड़ें। कोई न कोई व्यक्ति हर समय गणेश जी की प्रतिमा के पास रहे |
गणेश चतुर्थी शुभ मुहूर्त:-
मध्याहन गणेश पूजा मुहूर्त – 11 बजकर 06 मिनट सुबह से दोपहर 01 बजकर 42 मिनट तक
वर्जित चंद्र दर्शन का समय – सुबह 09 बजकर 07 मिनट से रात 09:26 तक
चतुर्थी तिथि आरंभ – 21 अगस्त, शुक्रवार – रात 11 बजकर 02 मिनट से
चतुर्थी तिथि समाप्त – 22 अगस्त, शनिवार – शाम 07 बजकर 57 मिनट तक |
जिला परिषद, पंचायती राज व्यवस्था में जिला स्तर की सबसे उच्च संस्था है जो ग्राम पंचायत एवं पंचायत समितियों के नीति-निर्धारण व मार्गदर्शन का काम करती है | 73वें संविधान संशोधन के अन्तर्गत त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था में सभी राज्यों के जिले स्तर पर जिला-परिषद के गठन का प्रावधान किया गया है | जिसे कई राज्यों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है |
जैसे- उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में ‘जिला पंचायत’ तो राजस्थान, बिहार, झारखंड जैसे राज्यों इसे ‘जिला परिषद‘ के नाम से जाना जाता है | जिला परिषद का नाम उस जिले के नाम पर होता है | जैसे-उत्तर प्रदेश में जिला पंचायत-आगरा और राजस्थान में जिला परिषद- अजमेर |
जिला परिषद का गठन:- पंचायत व्यवस्था की तीसरी इकाई
जिला परिषद का गठन जिला परिषद के निर्वाचित सदस्यों द्वारा की जाती है | इसके अलावा उस जिले के अंतर्गत लोकसभा और विधानसभा के निर्वाचित सदस्य भी शामिल होते हैं | लेकिन ये सदस्य जिला परिषद के अध्यक्ष के निर्वाचन में शामिल नहीं होते हैं | इन सदस्यों को स्थाई सदस्य न कहकर पदेन सदस्य कहा जाता है |
जिला पंचायत के सदस्य का चुनाव: जिला परिषद के चुनाव के लिए जिला परिषद को छोटे-छोटे ऐसे निर्वाचन क्षेत्रों में बांटा जाता है जिसकी आबादी लगभग 50,000 होती है | इन सदस्यों का चुनाव भी ग्रामीण मतदाता करते हैं | जिला पंचायत के सदस्य के रूप में चुने जाने के लिए जरूरी है कि प्रत्याशी की उम्र 21 साल से कम नहीं हो | यह भी जरूरी है कि चुनाव में खड़े होने वाले सदस्य का नाम उस जिले की मतदाता सूची में शामिल हो |
जिला पंचायत के अध्यक्षका चुनाव: राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार जिला परिषद के निर्वाचित सदस्य यथाशीघ्र जिला परिषद अध्यक्ष का चुनाव करते हैं | जिला परिषद में कुल चुने जाने वाले सदस्यों में से यदि किसी सदस्य का चुनाव किसी कारण से नहीं भी होता है तो भी अध्यक्ष पद के लिए चुनाव नहीं रूकता और चुने गए जिला परिषद सदस्य अपने में से एक अध्यक्ष और एक उपाध्यक्ष का चुनाव कर लिया जाता है |
यदि कोई व्यक्ति संसद या विधान सभा का सदस्य हो, किसी नगर निगम का अध्यक्ष या उपाध्यक्ष हो, नगरपालिका का अध्यक्ष या उपाध्यक्ष हो या किसी नगर पंचायत का अध्यक्ष या उपाध्यक्ष हो तो वह जिला परिषद अध्यक्ष या उपाध्यक्ष नहीं बन सकता |
जिला परिषद का कार्यकाल पहली बैठक की तारीख से 5 वर्षों तक का होता है | यदि किसी कारणवश जिला पंचायत को उसके निर्धारित कार्यकाल से पहले भंग कर दिया जाए तो 6 महीने के भीतर उसका चुनाव कराना जरूरी होगा | नए सदस्यों का कार्यकाल भी बाकी बचे समय के लिए ही होगा |
जिला परिषद के कार्य:-
जिला परिषद का वार्षिक बजट तैयार करना |
राज्य सरकार द्वारा जिलों को दिए गए अनुदान को पंचायत समितियों में वितरित करना |
प्राकृतिक संकट के समय राहत – कार्य का प्रबन्ध करना |
पंचायत समितियों द्वारा तैयार की योजनाओं का समन्वय करना |
पंचायत समितियों तथा ग्राम पंचायतों के कार्यों का समन्वय तथा मूल्यांकन करना |
ग्रामीण और कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहन देना |
कृषि का विकास करना |
लघु सिंचाई, मत्स्य पालन तथा जलमार्ग का विकास करना |
अनुसूचित जाति, जनजाति तथा पिछड़े वर्गों के कल्याण की योजना बनाना |
शिक्षा का प्रसार करना |
जिला परिषद के अंतर्गत कार्य करने वाले अधिकारी:-
मुख्य विकास अधिकारी
जिला पूर्ति अधिकारी
उप क्षेत्रीय विपणन अधिकारी
जिला वन अधिकारी
अधिशासी अभियन्ता- लोक निर्माण विभाग
अधिशासी अभियन्ता- विद्युत विभाग
सामान्य प्रबन्धक- जिला उद्योग केन्द्र
जिला अर्थ एवं संख्यिकी अधिकारी
जिला परिषद में आरक्षण:-
जिला परिषद के अध्यक्ष और जिला परिषद सदस्यों के पदों पर आरक्षण लागू होगा | पंचायती राज अधिनियम के अनुसार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़ी जाति के लोगों के लिए आरक्षण उनकी जनसंख्या के अनुपात पर निर्भर करता है | इसके अलावा सभी पदों पर एक तिहाई (33प्रतिशत) सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रखने का प्रावधान है | वर्तमान समय में कई राज्यों में महिलाओं के लिए यह आरक्षण बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है | अर्थात् इन राज्यों में पंचायती राज का प्रत्येक दूसरा पद महिलाओं के लिए आरक्षित है | ये सीटें चक्रानुक्रम या रोस्टर व्यवस्था के अनुसार आरक्षित की जाती है |
अनुसूचित, अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़े वर्ग के लोग अनारक्षित सीट पर भी चुनाव लड़ सकते हैं | इसी तरह से अगर कोई सीट महिलाओं के लिए आरक्षित नहीं की गई है तो वे भी उस सीट से चुनाव लड़ सकती हैं |
पंचायत राज की त्रिस्तरीय संरचना में ग्राम स्तर से ऊपर अर्थात मध्यवर्ती स्तर पर पंचायत समिति होती है | जो ग्राम पंचायत एवं जिला परिषद के बीच कड़ी का कार्य करता है | पंचायती राज की इस संस्था को ‘क्षेत्र समिति’ या ‘आंचलिक परिषद्’ भी कहते हैं | इस समिति का गठन भी सभी राज्यों में एक समान नहीं है | इस मध्यवर्ती स्तर को आंध्रप्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, ओडिशा और राजस्थान में ‘पंचायत समिति‘ कहा जाता है | उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में इसे ‘क्षेत्र समिति’ असम में ‘आंचलिक पंचायत समिति’, पश्चिम बंगाल में ‘आंचलिक परिषद्’, गुजरात में ‘तालुका परिषद्’, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में ‘जनपद पंचायत’ कर्नाटक में ‘पंचायत संघ परिषद्’ कहा जाता है |
पंचायत समिति की संरचना:- पंचायत व्यवस्था की दूसरी इकाई
राज्य सरकारें विकास कार्यों में सुलभता के लिए प्रत्येक जिले को ब्लॉक/खण्डों में बांटती है | इस ब्लॉक को विकास खण्ड भी कहा जाता है | 73वें संविधान संशोधन के अनुसार प्रत्येक विकास खण्ड में पंचायत समिति के गठन का प्रावधान है | इन विकास खंडों में जनसंख्या के आधार पर पंचायत समिति के सदस्यों की संख्या का निर्धारण किया जाता है | लगभग 5000 की आबादी पर एक पंचायत समिति सदस्य को चुनने का प्रावधान है | इन सदस्यों का निर्वाचन ग्राम पंचायतों के सदस्यों की तरह ही प्रत्यक्ष रूप से जनता करती है | इन्हीं पंचायत समिति के सदस्यों द्वारा ब्लॉक स्तर पर ब्लॉक प्रमुख/पंचायत समिति के अध्यक्ष का चुनाव किया जाता है |
प्रत्येक पंचायत समिति में चुनकर आए हुए सदस्यों के अतिरिक्त उस क्षेत्र से प्रतिनिधित्व करने वाले लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा के सदस्य भी पदेन सदस्य के रूप में शामिल होते हैं | पंचायत समिति क्षेत्र के अंतर्गत ब्लॉक के वह क्षेत्र शामिल नहीं होते है, जो किसी नगर निगम, नगरपालिका, अधिसूचित क्षेत्र या कैन्टोनमेंट बोर्ड के अंतर्गत आता है |
पंचायत समिति के पदाधिकारी:-
पंचायत समिति के कार्यों के संपादन व संचालन के लिए राज्य सरकार द्वारा कई अधिकारी और कर्मचारियों की नियुक्ति की जाती है | पंचायत समिति के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी को खंड विकास अधिकारी(BDO) कहते हैं | इस पदाधिकारी के नीचे भी कई सहायक विकास अधिकारी होते हैं जो कृषि, सहकारिता, पशुपालन इत्यादि के विशेषज्ञ होते हैं | पंचायत समिति की बैठकों में संबंधित पदाधिकारियों का उपस्थित रहना अनिवार्य होता है, जो बैठक के संचालन में भी हिस्सा लेते हैं |
पंचायती राज अधिनियम के अनुसार पंचायत समिति में सदस्यों और अध्यक्ष के पदों पर भी आरक्षण व्यवस्था का प्रावधान है | SC/ST/OBC वर्ग के लोगों के लिए आरक्षण उनकी जनसंख्या के अनुपात पर निर्भर करता है | इसके अलावा सभी पदों पर एक तिहाई (33%) सीट महिलाओं के लिए आरक्षित रखने का प्रावधान है | वर्तमान समय में कई राज्यों में महिलाओं के लिए यह आरक्षण बढ़ाकर 50% कर दिया गया है | इन राज्यों में पंचायतों का प्रत्येक दूसरा पद महिलाओं के लिए आरक्षित है | लेकिन, यह आरक्षण प्रणाली चक्रानुक्रम/रोस्टर के अनुसार आवंटित किए जाते हैं |
पंचायत व्यवस्था की दूसरी इकाई
पंचायत समिति के कार्य एवं दायित्व:-
केन्द्र तथा राज्य सरकार एवं जिला परिषद द्वारा सौंपे गए कार्य करना |
सभी ग्राम पंचायत के वार्षिक योजनाओं पर विचार विमर्श एवं समेकन करना तथा समेकित योजनाओं को जिला परिषद में प्रस्तुत करना |
पंचायत समिति का वार्षिक योजना बजट पेश करना |
कृषि एवं उद्यान की उन्नति एवं विकास करना |
खेती के उन्नत तरीको का प्रचार प्रसार करना, किसानों के प्रशिक्षण का इंतजाम करना |
सरकार के भूमि विकास एवं भूसंरक्षण कार्यकलापों के कार्यान्वयन में सरकार और जिला परिषद की सहायता करना |
लघु सिंचाई कार्यों के निर्माण एवं अनुरक्षण में सरकार और जिला परिषद् की सहायता करना |
गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम एवं स्कीमों का आयोजन और कार्यान्वयन करना |
पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा का विकास एवं विस्तार करना |
खादी ग्राम एवं कुटीर उद्योग को प्रोत्साहित करना |
ग्रामीण आवास योजनाओं का कार्यान्वयन तथा आवास स्थल का वितरण करना |
ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं का कार्यान्वयन, मरम्मत एवं संरक्षण करना |
शिक्षा के अन्तर्गत प्राथमिक विद्यालय भवनों का निर्माण मरम्मत एवं संरक्षण आदि कार्य करना |
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के अन्तर्गत स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण कार्यक्रमों का संचालित करना |
महिलाओं एवं बच्चो के कार्यक्रम को कार्यान्वयन करना तथा इनके विकास हेतु कार्यक्रम का निर्माण करना |
समाज कल्याण, जिसमें शारीरिक तथा मानसिक रूप से नि:शक्त लोगों के कल्याण हेतु कार्यक्रम तैयार करना तथा सरकार द्वारा चलाये जा रहे योजनाओं को कार्यान्वयन कराना |
कमजोर वर्गो विशेषकर SC/ST वर्ग के लोगों का कल्याण हेतु सरकार द्वारा चालायी गई योजनाओं का कार्यान्वयन करना |
पंचायत समिति का कार्यकाल:-
पंचायत समिति का कार्यकाल पहली बैठक की तारीख से 5 सालों तक का होगा | पंचायत समिति के सदस्यों का कार्यकाल यदि किसी खास कारणों से उनके नियत कार्यकाल से पहले भंग कर दिया जाता है तो 6 महीने के भीतर उसका चुनाव कराना जरूरी होगा | संक्षेप में कहें तो पंचायत समिति विकास खंड स्तर पर त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण कड़ी है जो ग्राम पंचायत और जिला पंचायत के बीच एक सम्वन्यक की भूमिका अदा करती है |
ग्ग्रम विकास की पहली इकाई है | ग्रामसभा के सदस्य ही ग्राम पंचायत का गठन करते हैं | जिसका मुखिया सरपंच होता है | यदि देखा जाए तो भारत में शासन व्यवस्था की स्थापना केंद्र के बाद राज्यों से होकर जिला और इसके बाद सबसे निचले स्तर पर पंचायत तक होती है | यही कारण है कि सन् 1992 के बाद शासन में निचले स्तर पर भी ज्यादा से ज्यादा लोगों की भागीदारी और अधिकार प्रदान करने के लिए कानून बनाया गया |
पंचायती राज अधिनियम-1992 में पंचायतों को भी विकेंद्रीकरण कर इसे ग्राम, ब्लॉक और जिला स्तर पर अधिकार दिए गए जिससे ग्रामीण भारत का विकास तीनों स्तरों पर हो सके | पंचायती राज व्यवस्था में सबसे निचले स्तर पर पंचायत होती है। जिसका चुनाव गाँव के वयस्क मतदातों (ग्रामसभा) द्वारा किया जाता है | सबसे दिलचस्प है कि पंचायती राज संस्था एक स्वायत्त निकाय है | यह एक स्वशासन की संस्था है जो अपने आप में विधायिका भी है, कार्यपालिका भी है और न्यायपालिका भी | यहाँ ग्राम पंचायत अपने आप में गाँव की सरकार है जिसे ग्राम स्वराज के लिए काम करना होता है | जिसके लिए पंचायत स्तर पर ग्रामसभा के साथ-साथ ग्राम-कचहरी का प्रावधान है |
कैसे होता है ग्राम पंचायत का गठन:-
ग्राम पंचायत के सदस्य अर्थात् सरपंच, वार्डपंच गाँव के मतदाताओं द्वारा बहुमत के आधार पर चुने जाते हैं | एक गाँव में प्रायः पाँच सौ की आबादी पर एक वार्ड का गठन होता है और प्रत्येक वार्ड से एक वार्डपंच चुने जाते हैं | इसके अलावा चुने हुए वार्ड पंचों से एक उपसरपंच का चुनाव होता है जो सरपंच के सहायक के रुप में या उसके अनुपस्थिति में पंचायत का काम करता है | इस प्रकार सरपंच, उपसरपंच और सभी वार्ड सदस्यों को मिलाकर एक ग्राम पंचायत पंचायत का गठन होता है | पंचायती राज-व्यवस्था के नियमों के अनुसार किसी पंचायत के सदस्यों की संख्या उस ग्राम पंचायत की आबादी पर निर्भर होगी |
500 तक की जनसंख्या पर – 05 सदस्य/वार्डपंच
501 से 1000 तक की जनसंख्या पर – 07 सदस्य/वार्डपंच
1001 से 2000 तक की जनसंख्या पर – 09 सदस्य/वार्डपंच
2001 से 3000 तक की जनसंख्या पर – 11 सदस्य/वार्डपंच
3001 से 5000 तक की जनसंख्या पर – 13 सदस्य/वार्डपंच
5000 से अधिक की जनसंख्या पर – 15 सदस्य/वार्डपंच
ग्राम पंचायत चुनाव प्रणाली:-
पंचायत के सदस्यों और सरपंच का चुनाव गाँव के ही मतदाताओं द्वारा 5 वर्ष के लिए किया जाता है अर्थात् प्रत्येक 5 वर्ष बाद राज्य चुनाव आयोग पंचायत चुनाव आयोजित करती है | यदि पंचायत के सामान्य चुनाव में सरपंच का चुनाव नहीं हो पाता है और पंचायत के लिए दो-तिहाई से कम सदस्य ही चुने जाते हैं | तो इस दशा में सरकार एक प्रशासनिक समिति बनाकर पंचायतों के कार्यों को संचालित करती है | इसके लिए राज्य निर्वाचन आयोग एक प्रशासक भी नियुक्त कर सकता है | लेकिन प्रशासनिक समिति व प्रशासक का कार्यकाल 6 माह से अधिक नहीं होता है | इस अवधि के दौरान पंचायत, उसकी समितियों तथा सरपंच के सभी अधिकार इसमें निहित होते हैं | लोकसभा, विधानसभा की तरह ही पंचायतों के विघटन बाद इसका चुनाव भी 6 माह के भीतर कराने का प्रावधान है |
पंचायतों का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है | जिसकी गणना पंचायत की पहली बैठक से की जाती है | यदि पंचायत को उसके कार्यकाल से पहले भंग किया जाता है तो 6 माह के अंदर पुन: चुनाव कराया जाता है | परन्तु इस नवनिर्वाचित पंचायत का कार्यकाल केवल शेष बचे हुए समय के लिए ही होता है |
ग्राम पंचायत में आरक्षण:-
किसी भी पंचायत में आरक्षण का प्रावधान पंचायती राज अधिनियम-1992 के नियमानुसार की जाती है | चुनाव आयोग निर्वाचन नवीनतम जनगणना आंकड़ो के आधार पर सामान्य वर्ग, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या के अनुपात में उस निर्वाचन क्षेत्र में उनकी सीट आरक्षित करती है |
कमजोर वर्गों की भाँति महिलाओं को भी स्थानीय शासन में कुछ भी बोलने का अधिकार नहीं था | 73वाँ संविधान संशोधन अधिनियम के तहत महिलाओं को उचित स्थान दिया गया | पंचायतों में सभी सीटों पर महिलाओं के लिए (अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं सहित) एक तिहाई स्थान आरक्षित किए गए।यह आरक्षण व्यवस्था प्रत्येक पाँच वर्ष बाद चक्रानुक्रम/रोस्टर के अनुसार आवंटित किए जाते हैं |
पंचायत के कार्य एवं शक्तियाँ:-
पंचायतों को संविधान की 11वीं अनुसूची में 29 विषयों पर निर्णय लेकर कार्य करने की शक्तियाँ प्रदान की गई हैं | जो पहले राज्य सूची में थे | इससे पहले तक पंचायतों को कार्य-योजना बनाने का कोई अधिकार नहीं था | जिसका विवरण निम्न है-
इस सूची में शामिल विषयों के अन्तर्गत आर्थिक विकास, सामाजिक न्याय और विकास योजनाओं को अमल में लाने का दायित्व पंचायतों का होगा |
संविधान की 11वीं अनुसूची के अन्तर्गत पंचायतों की कुछ जिम्मेदारियां सुनिश्चित की गई है |
प्रत्येक पंचायत अपने कार्यों का संपादन निष्ठापूर्वक करेगी |
पंचायत के कार्य
पंचायत क्षेत्र के विकास के लिए वार्षिक योजना बनाना |
वार्षिक बजट बनाना। प्राकृतिक संकट में सहायता कार्य करना |
लोक संपत्ति से अतिक्रमण हटाना |
गाँवों के आवश्यक आँकड़ों को तैयार करना |
सरपंच के कार्य:
ग्रामसभा की बैठक बुलाना और उसकी अध्यक्षता करना |
ग्रामीणों की अपेक्षाओं को जिला परिषद्, पंचायत समिति व जिला प्रशासन से लेकर राज्य सरकार तक पहुंचाना व ग्राम पंचायत की सार्वजनिक सम्पत्ति का सदुपयोग करवाना |
हर महीने ग्राम पंचायत की बैठक पंचायत कार्यालय पर बुलाना व पिछली बैठक में लिए गए निर्णयों पर की गई कार्यवाही की रिपोर्ट पढ़कर सबके सामने रखना |
ग्राम सचिव के कार्य:
प्रत्येक ग्राम पंचायत में सरकार द्वारा नियुक्त एक ग्राम सचिव होता है | जो पंचायत तथा सरकार के बीच एक कड़ी के रूप मे कार्य करता है |
पंचायत द्वारा पारित प्रस्तावों का रिकार्ड रखना और क्रियान्वयन में सहायता करना इत्यादि |
पंचायत की कार्यवाही को विवरण पुस्तिका में दर्ज करना |
पंचायती राज व्यवस्था का इतिहास:- (Panchayati Raj Vyavastha)
पंचायत हमारी भारतीय सभ्यता और संस्कृति की पहचान है | यह हमारी गहन सूझ-बुझ के आधार पर व्यवस्था-निर्माण करने की क्षमता की परिचायक है | यह हमारे समाज में स्वाभाविक रूप से समाहित स्वावलम्बन, आत्मनिर्भरता एवं संपूर्ण स्वंतत्रता के प्रति निष्ठा व लगाव का घोतक है | शुरू -शुरू में , ‘महाभारत’ और ‘रामायण’ काल से भी पहले, पंचायत किसी क्षेत्र में चुने पांच प्रतिष्ठित व्यक्तियों की एक निकाय होती थी |
इसका निश्चित क्षेत्र एक गाँव हुआ करता था | गाँव इसलिए कि यह एक स्वाभाविक और मूल इकाई थी | गाँव इसलिए भी कि इसके ऊपर की सभी इकाइयों का रूप बदलता रहता | देश और राज्य की सीमाएं बड़ी-छोटी होती रहीं | भाषा और सत्ता के आधार पर देश और राज्य की व्यवस्था में परिवर्तन होता रहा, पर गाँव आज भी एक स्थिर इकाई बना रहा | भौगिलिक एवं सामाजिक दोनों तरह से यह इन सभी बदलावों से अछुता रहा |
पंचायत के पंच के रूप में पांच व्यक्तियों को चुनने के लिए भी एक निश्चित मापदंड था | वे गाँव के ऐसे पांच प्रतिष्ठित व्यक्ति होते जो अपने अलग-अलग गुणों के लिए जाने जाते थे | वे पांच गुणों वाले व्यक्ति थे-सोच-समझ कर काम करने वाले, दूसरों की रक्षा में हमेशा आगे आने वाले, किसी भी काम को व्यवस्थित ढंग से करने वाले, किसी भी शारीरिक श्रम वाले काम में अधिक रूचि रखने वाले, तथा वे जो घर-गृहस्थी त्याग कर गाँव के बाहर सन्यासी की तरह जीना पसंद करते थे | ऐसे पांच अलग-अलग गुणों वाले बुजुर्ग व्यक्तियों को समाज में आदरभाव से देखा जाता |
ये पंचायत के रूप में गाँव में रहने वाले लोगों के बीच का मतभेद दूर करने, गाँव की रक्षा, गाँव का विकास, समुदायपरक समाधान निकलते जो सबको मान्य होता | मुगलों के शासनकाल तक अनवरत चलती रही | परन्तु अंग्रेजों के आते ही इसमें रुकावट आने लगी | उन्हें इसके स्वायत्त इकाई का स्वरुप बिल्कुल अनुकूल नहीं लगा अतः इसके साथ उन्होंने छेड़-छाड़ शुरू कर दी |
आजादी के बाद पंचायती राज व्यवस्था का गठन:-
सन् 1952 में भारत सरकार ने ग्रामीण विकास पर विशेष ध्यान दिया और इसके लिए केन्द्र में पंचायती राज एवं सामुदायिक विकास मंत्रालय की स्थापना की गई | 2 अक्टूबर, 1952 को इस उद्देश्य के साथ ‘सामुदायिक विकास कार्यक्रम’ प्रारम्भ किया गया | इस कार्यक्रम के अधीन खण्ड(ब्लॉक) को इकाई मानकर इसके विकास हेतु सरकारी कर्मचारियों के साथ सामान्य जनता को विकास की प्रक्रिया से जोड़ने का प्रयास तो किया, लेकिन जनता को अधिकार नहीं दिया गया | जिससे यह सरकारी अधिकारियों तक ही सीमित रह गया |
2 अक्टूबर, 1953 को ‘राष्ट्रीय प्रसार सेवा’ को प्रारम्भ किया गया | यह कार्यक्रम भी असफल रहा जिसके बाद समय-समय पर पंचायतों के विकास के लिए विभिन्न समितियों का गठन किया गया |
इसके बाद 1957 में निर्वाचित प्रतिनिधियों को भागीदारी देने तथा प्रशासन की भूमिका केवल कानूनी सलाह देने तक सीमित रखने से सम्बन्धित सुझाव दिए | पंचायती राज का शुभारम्भ भी यहीं से माना जाता है जब लोगों को स्थानीय शासन में भागीदारी देने की बात की गई |
इसी क्रम में पंचायती राज व्यवस्था का उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 2 अक्टूबर 1959 को नागौर जिले के बगदरी गाँव से किया |
आधुनिक भारत में राजस्थान को पहला राज्य होने का गौरव है, जहाँ पहली बार पंचायती राज की स्थापना की गई | 2 सितंबर 1959 को राजस्थान सरकार ने ‘पंचायत समिति एवं जिला परिषद अधिनियम-1959’ पारित कर पंचायती राज व्यवस्था की शुरूआत की |
भारत में केवल नागालैंड को छोड़कर लगभग सभी राज्यों में पंचायती राज प्रणाली सुचारू रुप से चल रही है, कहीं एकस्तरीय, कहीं द्विस्तरीय, तो कहीं त्रिस्तरीय | जैसे- आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा, इत्यादि राज्यों में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था संचालित की जा रही है | हरियाणा, तमिलनाडु में द्विस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था लागू है | जबकि केरल, मणिपुर, सिक्किम, त्रिपुरा जैसे राज्यों में एक स्तरीय ग्राम पंचायतें लागू है | इसके अलावा पेसा कानून-1996 के अंतर्गत मेघालय, नागालैंड और मिजोरम जैसे राज्यों में एक स्तरीय जनजातीय परिषद् लागू है |
समितियों का गठन और उनकी भूमिका:-
इसके बाद देश में पंचायती राज को सशक्त बनाने, व्यवस्थित विकास की जिम्मेदारी देने और इसे लोकप्रिय बनाने के लिए कई समितियों का गठन किया गया | इनमें सर्वाधिक महत्वपूर्ण बलवंत राय मेहता समिति, अशोक मेहता समिति, सिंधवी समिति और वी.एन गाडगिल समिति थी, इन्हीं की सिफारिशों के आधार पर पंचायती राज अधिनियम-1992 बन सका | सबसे पहले वर्ष 1957 में योजना आयोग के द्वारा ‘सामुदायिक विकास कार्यक्रम’ और ‘राष्ट्रीय विस्तार सेवा कार्यक्रम’ के अध्ययन के लिए ‘बलवंत राय मेहता समिति’ का गठन किया गया |
बलवंत राय मेहता समिति:-
सामुदायिक विकास कार्यक्रम के क्रियान्वयन हेतु बलवंत राय मेहता की अध्यक्षता में 1957 ई. में एक समिति का गठन किया गया, इस समिति ने सामुदायिक विकास कार्यक्रम और सत्ता की विकेंद्रीकरण का अध्ययन कर पंचायती राज के त्रिस्तरीय मॉडल को पेश किया |
इस समिति ने ग्राम स्तर पर ग्राम पंचायत, खंड (ब्लॉक) स्तर पर पंचायत समिति और जिला स्तर पर ज़िला परिषद् बनाने का सुझाव दिया | इस समिति की सिफारिशों को 1 अप्रैल 1958 को मान्यता दी गई और इसी के आधार पर 2 अक्टूबर 1959 में राजस्थान के नागौर जिले से पंचायती राज व्यवस्था का शुभारंभ किया गया | इसके बाद 1959 में ही आंध्र प्रदेश ने पंचायती राज अधिनियम को पारित किया | परन्तु वित्तीय व्यवस्थाओं और चुनाव में एकरुपता न होने के कारण यह असफल रहा |
अशोक मेहता समिति:-
बलवंत राय मेहता समिति की कमियों को दूर करने और एक सुव्यवस्थित पंचायती राज स्थापित करने के लिए सरकार ने अशोक मेहता समिति का गठन 1977 में किया | इस समिति ने 1978 में 132 सिफारिशें प्रस्तुत की | इस समिति ने त्रिस्तरीय पंचायती राज प्रणाली को द्विस्तरीय स्तर करने का सुझाव दिया |
जिला परिषद,
मंडल पंचायत
मेहता समिति ने अपनी सिफारिशों में ग्राम पंचायतों की जगह मंडल पंचायत की स्थापना की सिफारिश की |
जी.वी.के. राव समिति:-
जी.वी.के. राव की अध्यक्षता में 1985 में ग्रामीण विकास और गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों के लिए प्रशासनिक प्रबंधन विषय पर एक समिति का गठन किया गया | इस समिति ने भी सत्ता की विकेंद्रीकरण की बात की | राज्य स्तर पर राज्य विकास परिषद, जिला स्तर पर जिला विकास परिषद, मंडल स्तर पर मंडल पंचायत तथा ग्राम स्तर पर ग्रामसभा की सिफारिश की |
एल. एम. सिंघवी समिति:-
राजीव गाँधी सरकार ने 1986 में एल. एम. सिंघवी की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया, जिसका मुख्य उद्देश्य प्रजातांत्रिक विकेंद्रीकरण में वृद्धि और पंचायतों का फिर से सशक्तिकरण करना था |
वी.एन. गाडगिल समिति:-
वर्ष 1988 में वी.एन. गाडगिल की अध्यक्षता में पंचायतों को और बेहतर बनाने के लिए इस समिति का गठन किया गया |
64वाँ संशोधन विधेयक:-
गाडगिल और एल.एम.सिंघवी समितियों की सिफारिशों के फलस्वरूप ही तत्कालीन राजीव गांधी सरकार ने जुलाई 1989 में 64वाँ संविधान (संशोधन) विधेयक संसद में पेश किया ताकि पंचायती राज संस्थानों को और अधिक सशक्त बनाया जा सके | लोकसभा ने इस विधेयक को अगस्त 1989 में पारित कर दिया, लेकिन कांग्रेस के पास राज्यसभा में बहुमत नहीं होने के कारण यहाँ विधेयक पास नहीं हो सका | वर्ष 1989 में 64वां संविधान संशोधन विधेयक राज्यसभा में असफल होने के बाद पीवी नरसिम्हा राव सरकार के दौरान 1992 के 73वें संविधान संशोधन द्वारा पंचायतों को संवैधानिक दर्जा मिला | विधेयक को संसद द्वारा पारित होने के बाद 20 अप्रैल, 1993 को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली और 24 अप्रैल, 1993 से इसे देशभर में लागू कर दिया गया | इसके फलस्वरूप 24 अप्रैल को देशभर में ‘राष्ट्रीय पंचायत दिवस’ के रूप में मनाया जाता है |
Jio का नया स्मार्टफोन 10 सितम्बर को लांच होने जा रहा है। जिसकी कीमत 3499 रुपये के आस पास हो सकती है। Jio का ये नया फ़ोन Jio Phone 3 या फिर Jio Phone Next के नाम से आ सकता है।
Jio का ये नया स्मार्टफोन गूगल के एंड्राइड पर आधारित होगा। Jio ने ये स्मार्टफोन गूगल के साथ मिलकर बनाया है। Jio Phone Next को दुनिया का सबसे सस्ता स्मार्टफोन कहा जा रहा है। Jio Phone Next भारत में जियो और गूगल की साझेदारी में 10 सितंबर से उपलब्ध होगा। Jio Phone Next को लेकर कई तरह की बातें वायरल हो रही हैं।
किसी रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि Jio Phone Next को महज 500 रुपये में उपलब्ध कराया जाएगा और बाकि पैसे ईएमआई के तौर पर दिए जाएंगे। किसी रिपोर्ट का दावा है कि जियो फोन नेक्स्ट को कीमत की महज 10 फीसदी राशि देकर खरीदा जा सकेगा। तमाम रिपोर्ट में एक बात सामान्य है कि Jio Phone Next की कीमत 5,000 रुपये से कम होगी।
Jio Phone Next
Jio Phone Next ऐंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम के ऑप्टिमाइज्ड वर्जन से पावर्ड है, जिसे खासतौर से इंडियन मार्केट के लिए Jio और Google ने मिलकर डिवेलप किया है। जियो फोन नेक्स्ट में वॉइस असिस्टेंट, लैंग्वेज ट्रांसलेशन, ऑटोमैटिक रीड-अलाउड ऑफ स्क्रीन टेक्स्ट और एग्युमेंटेड रियल्टी फिल्टर्स के साथ स्मार्ट कैमरा जैसे लेटेस्ट फीचर होंगे।
JioPhone Next की कीमत 3,499 रुपये हो सकती है। इस स्मार्टफोन के दाम को कम करने के लिए रिलायंस जियो और ऑफर्स दे सकता है। जियो फोन नेक्स्ट को क्वॉलकॉम स्नैपड्रैगन 215 के साथ लॉन्च किया जा सकता है, जो कि 4G नेटवर्क को सपोर्ट करेगा। स्मार्टफोन में HD रेजॉलूशन के साथ 5.5 इंच का डिस्प्ले दिया जा सकता है।
Jio Phone Next Specification-
JioPhone Next में एंड्रॉयड 11 का गो एडिशन मिलेगा। इसके अलावा फोन में 5.5 इंच की HD डिस्प्ले मिलेगी। फोन में क्वॉलकॉम का QM215 प्रोसेसर, 2 या 3 जीबी रैम और 16 या 32 जीबी की स्टोरेज मिलेगी। ग्राफिक्स के लिए Adreno 308 GPU मिलेगा।
JioPhone Next में 13 मेगापिक्सल का रियर कैमरा और 8 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा मिल सकता है। साथ ही फोन में 4G VoLTE के साथ डुअल सिम सपोर्ट और 2500mAh की बैटरी मिलेगी।फोन में X5 LTE मोडेम का सपोर्ट होगा और कनेक्टिविटी के लिए ब्लूटूथ v4.2, GPS मिलेगा। Jio Phone Next के कैमरे के साथ गूगल लेंस का सपोर्ट मिलेगा।
इसके अलावा कई तरह के फिल्टर्स मिलेंगे। कैमरे के साथ पोट्रेट मोड भी मिलेगा। कैमरे के साथ स्नैपचैट का फिल्टर भी मिलेगा। जियो फोन नेक्स्ट का गूगल असिस्टेंट आपके इशारे पर म्यूजिक प्ले करेगा और माय जियो एप भी ओपन करेगा। Jio Phone Next को सभी तरह के सॉफ्टवेयर और सिक्योरिटी अपडेट भी मिलेंगे। फोन में फिजिकल बटन सिर्फ पावर और वॉल्यूम के लिए मिलेंगे। JioPhone Next में हॉटस्पॉट भी मिल सकता है।
Jio Smartphone
Jio Phone Next भारत में 10 सितंबर या फिर गणेश चतुर्थी को लॉन्च किया जाएगा। इस फोन का ऐलान जून महीने में 44th Reliance Industries AGM के दौरान किया गया था। यह अल्ट्रा-अफोर्डेबल 4जी स्मार्टफोन है, जिसे Reliance Jio और Google द्वारा डेवलप किया गया था। जियोफोन नेक्स्ट की कीमत और स्पेसिफिकेशन की जानकारी फिलहाल आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन कुछ लीक्स के जरिए यह सामने आ चुकी है। जियोफोन नेक्स्ट गूगल प्ले स्टोर का एक्सेस प्रदान करता है और इसमें वॉयस असिस्टेंट, ऑटोमैटिक री-अलाउड ऑफ स्क्रीन टेक्स्ट और लैंग्वेज ट्रांसलेशन जैसे फीचर्स मौजूद होंगे।
इस फोन में वॉयस असिस्टैंट, ऑटोमैटिक रीड-अलाउड ऑफ स्क्रीन टेक्स्ट, भाषा ट्रांसलेशन, ऑग्मेंटेड रियल्टी फिल्टर्स के साथ स्मार्ट कैमरा जैसे फीचर्स हैं। एजीएम के दौरान आरआईएल के शेयरधारकों को संबोधित करते हुए गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने कहा था कि फोन भाषा और ट्रांसलेशन फीचर्स, एक शानदार कैमरा, और नवीनतम एंड्रॉयड अपडेट्स के लिए सपोर्ट की पेशकश करेगा।
नया जियोफोन नेक्स्ट यूजर्स को एक बटन के टैप के साथ कंटेंट को अपनी भाषा में पढ़ने की सुविधा देगा। यूजर्स गूगल असिस्टैंट को जियो सावन पर संगीत बजाने या माई जियो पर अपना बैलेंस जानने का भी निर्देश दे सकते हैं। इसके अलावा वह ताजा क्रिकेट स्कोर या मौसम की जानकारी भी फोन पर गूगल असिस्टैंट के जरिये प्राप्त कर सकते हैं। जियोफोन नेक्स्ट के कैमरा में एचडीआर मोड जैसा फीचर भी होगा।
पनी का कहना है कि यह दोनों ही नए फीचर्स वेबपेज, ऐप्स, मैसेज और फोटोज़ पर इस्तेमाल किए जा सकते हैं। फोन में गूगल असिस्टेंट सपोर्ट भी मिलेगा। Google ने फोन के कैमरे में India-specific स्नैपचैट लेंस को इंटीग्रेड करने के लिए Snap के साथ साझेदारी की है। इसके अलावा, फोन में Google Play store व Google Play Protect प्रीलोडेड मिलेंगे।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर 3500 रुपए से कम कीमत में 4G स्मार्टफोन मौजूद हैं। आईटेल IT 1508 की कीमत 3,449 रुपए और आईटेल विश IT 1512 की कीमत 3,490 रुपए है। जबकि जियोफोन नेक्स्ट की कीमत 3,499 रुपए बताई जा रही है। यानी आईटेल के दोनों मॉडल की कीमत जियोफोन नेक्स्ट से कम है। फिर भी देखते हैं की जिओ क्या नया लेकर आता है।
UP भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार श्रमिक पंजीयन कैसे करेंगे
यदि अभी तक आपने पंजीयन नहीं किया है तो UP भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार श्रमिक पंजीयन एवं संसोधन करने के लिए सबसे पहले पंजीयन कैसे करना है ये जानना होगा जिसके लिए आप हमारे पंजीयन प्रक्रिया के बारे में बताये हुए लेख को यहाँ से पढ़ें
UPBOCW पंजीयन या आवेदन संख्या कैसे जाने?
1. आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ
UP भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार श्रमिक पंजीयन पंजीयन या आवेदन संख्या जानने के लिए सबसे पहले UP भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट https://upbocw.in/index.aspx पर जाएं | मुख्य पृष्ठ के मीनू में श्रमिक फिर लिस्ट में अपनी पंजीयन या आवेदन संख्या जाने लिंक पर क्लिक करें |
2. आधार और मोबाइल नंबर से ढूंढे
अपनी आवेदन / पंजीयन संख्या जाने जानने के लिए आधार क्रमांक और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर दर्ज करें यदि आपने आवेदन नहीं किया होगा तो आधार संख्या पंजीकृत नहीं है| ऐसा एरर मैसेज डिस्प्ले होगा लेकिन आप पंजीकृत हैं तो आवेदन / पंजीयन संख्या की जानकारी आपको स्क्रीन पर मिल जाएगी
3. और खोजे लिंक
यदि आपको आधार नंबर से पंजीयन संख्या को खोजने में किसी भी प्रकार की समस्या हो रही है तो और खोजे लिंक पर क्लिक करके एडवांस सर्च विकल्प के माध्यम से पंजीयन संख्या की जानकारी हासिल कर सकते हैं।
UP भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार श्रमिक पंजीयन कैसे करेंगे
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UP भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार श्रमिक पंजीयन या आवेदन संख्या कैसे जाने
यदि आपने अभी तक श्रमिक पंजीयन नहीं किया है या किया है और आवेदन संख्या नहीं जानते हैं तो ऊपर दी हुई लिंक्स के माध्यम से विस्तृत लेख पढ़ सकते हैं जहाँ पर आपको पंजीयन से सम्बंधित जानकारी मिल जाएगी। और पंजीयन संख्या की जानकारी के लिए क्रमशः स्टेप्स को फॉलो करें। इसके लिए सबसे पहले आप आधिकारिक वेबसाइट पर https://upbocw.in/index.aspx जाये | मुख्य पृष्ठ के मीनू में श्रमिक फिर लिस्ट में पंजीयन की स्थिति लिंक पर क्लिक करें |
2. पंजीयन संख्या/आवेदन संख्या दर्ज करें
पंजीयन संख्या या आवेदन संख्या के माध्यम से से आप अपने पंजीयन की स्थति जानने के लिए पंजीयन संख्या/आवेदन संख्या दिए हुए बॉक्स में दर्ज करें और सर्च करें यदि आप अपनी पंजीयन संख्या/आवेदन संख्या नहीं जानते हैं तो यहाँ क्लिक करें
3. पंजीयन या आवेदन की स्थिति जाने
सर्च करते ही आवेदन की पूरी जानकारी स्क्रीन पे होगी जहा पर आपको आवेदन से सम्बंधित सभी जानकारी एक ही पेज पर मिल जाएगी जिसका प्रिंट भी आप लेकर अपने पास सुरक्षित रख सकते हैं
UP भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार श्रमिक पंजीयन एवं संसोधन
1. आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ
UP भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार श्रमिक पंजीयन एवं संसोधन करने के लिए सबसे पहले UP भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट https://upbocw.in/index.aspx पर जाएं | मुख्य पृष्ठ के मीनू में श्रमिक फिर लिस्ट में श्रमिक पंजीयन/संसोधन लिंक पर क्लिक करें |
2. पंजीयन का आवेदन/संसोधन मांगी में गयी जानकारी दर्ज दरें
यदि आपने पूर्व में ही श्रमिक पंजीयन करा चुके हैं या या श्रमिक पंजीयन धारक हैं तो अपना आधार क्रमांक और मोबाइल नंबर डालकर अपना आवेदन या पंजीयन सुधार सकते हैं लेकिन यदि आप नया पंजीयन कर रहे हैं तो केवल आधार क्रमांक दर्ज करें और मंडल एवं जनपद का चुनाव करते हुए मोबाइल नंबर प्रविष्ट करें जिसमे OTP प्राप्त हो सके|
3. OTP वेरीफाई करें
अब यहाँ पर मोबाइल में प्राप्त OTP को वेरीफाई करते हुए अगले स्टेप्स के लिए आगे बढ़ें
4. आधार के अनुसार फॉर्म भरें
अब यहाँ पर आप अपने आधार के अनुसार मांगी गयी सभी जरुरी जानकारी को दर्ज करें और आधार वेरिफिकेशन हेतु घोषणा पत्र पर क्लिक करें।
5. आवेदक अपनी जानकारी दर्ज करें
घोषणा पत्र पर क्लिक करते ही फिर से एक फॉर्म ओपन होगा जिसमें जिसमे विस्तृत रूप से आवेदक से संबधित जानकारी आवेदक को भरनी होगी तथा आवश्यक दस्तावेजों की स्कैन प्रति लगनी होगी। पूरा आवेदन फॉर्म भरने के पश्चात सब्मिट करने से पहले आवेदन को पूरी तरह से पढ़ लें और चेक करे की कोई त्रुटि तो नहीं इसके बाद ही सबमिट करें
6. आवेदन की स्थिति चेक करें
आवेदन के सफलतापूर्वक सब्मिट होने के उपरांत इसे सम्बंधित विभाग के पास प्रमाणित होने के लिए भेज दिया जाता है जिससे आप समय समय पर आवेदन की स्थिति लिंक पर जाकर चेक करते रहें