पंचायती राज व्यवस्था : जानें त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था की पहली इकाई ग्राम पंचायत के बारे में

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ग्राम पंचायत
ग्राम पंचायत व्यवस्था की पहली इकाई ग्राम पंचायत के बारे में

ग्राम पंचायत:-

ग्ग्रम विकास की पहली इकाई है | ग्रामसभा के सदस्य ही ग्राम पंचायत का गठन करते हैं | जिसका मुखिया सरपंच होता है | यदि देखा जाए तो भारत में शासन व्यवस्था की स्थापना केंद्र के बाद राज्यों से होकर जिला और इसके बाद सबसे निचले स्तर पर पंचायत तक होती है | यही कारण है कि सन् 1992 के बाद शासन में निचले स्तर पर भी ज्यादा से ज्यादा लोगों की भागीदारी और अधिकार प्रदान करने के लिए कानून बनाया गया |

पंचायती राज अधिनियम-1992 में पंचायतों को भी विकेंद्रीकरण कर इसे ग्राम, ब्लॉक और जिला स्तर पर अधिकार दिए गए जिससे ग्रामीण भारत का विकास तीनों स्तरों पर हो सके | पंचायती राज व्यवस्था में सबसे निचले स्तर पर पंचायत होती है। जिसका चुनाव गाँव के वयस्क मतदातों (ग्रामसभा) द्वारा किया जाता है | सबसे दिलचस्प है कि पंचायती राज संस्था एक स्वायत्त निकाय है | यह एक स्वशासन की संस्था है जो अपने आप में विधायिका भी है, कार्यपालिका भी है और न्यायपालिका भी | यहाँ ग्राम पंचायत अपने आप में गाँव की सरकार है जिसे ग्राम स्वराज के लिए काम करना होता है | जिसके लिए पंचायत स्तर पर ग्रामसभा के साथ-साथ ग्राम-कचहरी का प्रावधान है |

कैसे होता है ग्राम पंचायत का गठन:-

ग्राम पंचायत के सदस्य अर्थात् सरपंच, वार्डपंच गाँव के मतदाताओं द्वारा बहुमत के आधार पर चुने जाते हैं | एक गाँव में प्रायः पाँच सौ की आबादी पर एक वार्ड का गठन होता है और प्रत्येक वार्ड से एक वार्डपंच चुने जाते हैं | इसके अलावा चुने हुए वार्ड पंचों से एक उपसरपंच का चुनाव होता है जो सरपंच के सहायक के रुप में या उसके अनुपस्थिति में पंचायत का काम करता है | इस प्रकार सरपंच, उपसरपंच और सभी वार्ड सदस्यों को मिलाकर एक ग्राम पंचायत पंचायत का गठन होता है | पंचायती राज-व्यवस्था के नियमों के अनुसार किसी पंचायत के सदस्यों की संख्या उस ग्राम पंचायत की आबादी पर निर्भर होगी |

  • 500 तक की जनसंख्या पर  – 05 सदस्य/वार्डपंच 
  • 501 से 1000 तक की जनसंख्या पर  – 07 सदस्य/वार्डपंच 
  • 1001 से 2000 तक की जनसंख्या पर – 09 सदस्य/वार्डपंच 
  • 2001 से 3000 तक की जनसंख्या पर – 11 सदस्य/वार्डपंच  
  • 3001 से 5000 तक की जनसंख्या पर – 13 सदस्य/वार्डपंच 
  • 5000 से अधिक की जनसंख्या पर – 15 सदस्य/वार्डपंच

ग्राम पंचायत चुनाव प्रणाली:-

ग्राम पंचायत

पंचायत के सदस्यों और सरपंच का चुनाव गाँव के ही मतदाताओं द्वारा 5 वर्ष के लिए किया जाता है अर्थात् प्रत्येक 5 वर्ष बाद राज्य चुनाव आयोग पंचायत चुनाव आयोजित करती है | यदि पंचायत के सामान्य चुनाव में सरपंच का चुनाव नहीं हो पाता है और पंचायत के लिए दो-तिहाई से कम सदस्य ही चुने जाते हैं | तो इस दशा में सरकार एक प्रशासनिक समिति बनाकर पंचायतों के कार्यों को संचालित करती है | इसके लिए राज्य निर्वाचन आयोग एक प्रशासक भी नियुक्त कर सकता है | लेकिन प्रशासनिक समिति व प्रशासक का कार्यकाल 6 माह से अधिक नहीं होता है | इस अवधि के दौरान पंचायत, उसकी समितियों तथा सरपंच के सभी अधिकार इसमें निहित होते हैं | लोकसभा, विधानसभा की तरह ही पंचायतों के विघटन बाद इसका चुनाव भी 6 माह के भीतर कराने का प्रावधान है |

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पंचायतों का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है | जिसकी गणना पंचायत की पहली बैठक से की जाती है | यदि पंचायत को उसके कार्यकाल से पहले भंग किया जाता है तो 6 माह के अंदर पुन: चुनाव कराया जाता है | परन्तु इस नवनिर्वाचित पंचायत का कार्यकाल केवल शेष बचे हुए समय के लिए ही होता है |

ग्राम पंचायत में आरक्षण:-

किसी भी पंचायत में आरक्षण का प्रावधान पंचायती राज अधिनियम-1992 के नियमानुसार की जाती है | चुनाव आयोग निर्वाचन नवीनतम जनगणना आंकड़ो के आधार पर सामान्य वर्ग, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या के अनुपात में उस निर्वाचन क्षेत्र में उनकी सीट आरक्षित करती है |

कमजोर वर्गों की भाँति महिलाओं को भी स्थानीय शासन में कुछ भी बोलने का अधिकार नहीं था | 73वाँ संविधान संशोधन अधिनियम के तहत महिलाओं को उचित स्थान दिया गया | पंचायतों में सभी सीटों पर महिलाओं के लिए (अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं सहित) एक तिहाई स्थान आरक्षित किए गए।यह आरक्षण व्यवस्था प्रत्येक पाँच वर्ष बाद चक्रानुक्रम/रोस्टर के अनुसार आवंटित किए जाते हैं |

पंचायत के कार्य एवं शक्तियाँ:-

पंचायतों को संविधान की 11वीं अनुसूची में 29 विषयों पर निर्णय लेकर कार्य करने की शक्तियाँ प्रदान की गई हैं | जो पहले राज्य सूची में थे | इससे पहले तक पंचायतों को कार्य-योजना बनाने का कोई अधिकार नहीं था | जिसका विवरण निम्न है-

  • इस सूची में शामिल विषयों के अन्तर्गत आर्थिक विकास, सामाजिक न्याय और विकास योजनाओं को अमल में लाने का दायित्व पंचायतों का होगा |
  • संविधान की 11वीं अनुसूची के अन्तर्गत पंचायतों की कुछ जिम्मेदारियां सुनिश्चित की गई है |
  • प्रत्येक पंचायत अपने कार्यों का संपादन निष्ठापूर्वक करेगी |

पंचायत के कार्य

  • पंचायत क्षेत्र के विकास के लिए वार्षिक योजना बनाना |
  • वार्षिक बजट बनाना। प्राकृतिक संकट में सहायता कार्य करना |
  • लोक संपत्ति से अतिक्रमण हटाना |
  • गाँवों के आवश्यक आँकड़ों को तैयार करना |

सरपंच के कार्य:

  • ग्रामसभा की बैठक बुलाना और उसकी अध्यक्षता करना | 
  • ग्रामीणों की अपेक्षाओं को जिला परिषद्, पंचायत समिति व जिला प्रशासन से लेकर राज्य सरकार तक पहुंचाना व ग्राम पंचायत की सार्वजनिक सम्पत्ति का सदुपयोग करवाना |
  • हर महीने ग्राम पंचायत की बैठक पंचायत कार्यालय पर बुलाना व पिछली बैठक में लिए गए निर्णयों पर की गई कार्यवाही की रिपोर्ट पढ़कर सबके सामने रखना |

ग्राम सचिव के कार्य:

  • प्रत्येक ग्राम पंचायत में सरकार द्वारा नियुक्त एक ग्राम सचिव होता है | जो पंचायत तथा सरकार के बीच एक कड़ी के रूप मे कार्य करता है |
  • पंचायत द्वारा पारित प्रस्तावों का रिकार्ड रखना और क्रियान्वयन में सहायता करना इत्यादि |  
  • पंचायत की कार्यवाही को विवरण पुस्तिका में दर्ज करना |

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