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कृषि कानून वापसी: कृषि कानून वापसी पर मोदी जी की 18 मिनट की स्पीच में 1430 शब्द :

1067 शब्द तक कृषि कानून वापसी की भूमिका बांधी, 19 शब्द में ऐलान किया :

कृष‌ि कानूनों को वापस लेने के लिए दिए गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 18 मिनट के संबोधन में 1430 शब्द थे। कानून वापसी घोषणा से पहले भूमिका बांधने में 1067 शब्द, घोषणा करने में 86 और घोषणा की वजह बताने में 277 शब्द कहे।

enterhindi.com में आप सभी लोगो का स्वागत है, तो आइए जानते है कि 18 मिनट के भाषण में कृषि कानून वापसी पर प्रधान मंत्री मोदी जी ने क्या कहा|

सबसे पहले वो 86 शब्द जानिए, जो पीएम मोदी 59 सेकेंड में बोले-

“साथियों, मैं देशवासियों से क्षमा मांगते हुए, सच्चे मन से और पवित्र हृदय से कहना चाहता हूं कि शायद हमारी तपस्या में ही कोई कमी रह गई होगी, जिसके कारण दिए के प्रकाश जैसा सत्य, कुछ किसान भाइयों को हम समझा नहीं पाया। आज गुरु नानकदेव जी का प्रकाश पर्व है। यह समय किसी को भी दोष देने का नहीं है। आज मैं आपको, पूरे देश को ये बताने आया हूं कि हमने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का, Repeal करने का निर्णय लिया है।

इसमें उन्होंने क्षमा मांगा, सच्चे मन, पवित्र हृदय, तपस्या में कोई रह गई और यह समय किसी को भी दोष देने का नहीं है कहने बाद मोदी ने 19 शब्द बोले, “ये बताने आया हूं कि हमने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का, Repeal करने का निर्णय लिया है।”

अपने 50 साल के सार्वजनिक जीवन का हवाला देते हुए 41 बार किसान-किसान बोलते रहे:

ये पहली बार था जब पीएम मोदी किसी सरकारी फैसले को वापस लेने का ऐलान कर रहे थे और इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल कर रहे थे।

पीएम मोदी ने अपने भाषण में जिन शब्दों का इस्तेमाल अधिक बार किया उनकी लिस्ट नीचे देखिए-

पीएम बार-बार किसान शब्द का प्रयोग रहे थे। उन्होंने कहा, “अपने पांच दशक के सार्वजनिक जीवन में मैंने किसानों की परेशानियों को, उनकी चुनौतियों को बहुत करीब से देखा है, महसूस किया है। इसलिए, जब देश ने मुझे 2014 में प्रधान मंत्री के रूप में सेवा का अवसर दिया तो हमने कृषि विकास, किसान कल्‍याण को सर्वोच्‍च प्राथमिकता दी।”

ऐलान के बाद मोदी सिर्फ 277 शब्द बोल सके:

कृषि कानून की वापसी के बाद जो शब्द पीएम मोदी ने बोला, उसमें सिर्फ एक बार उन्होंने ‘आंदोलनरत किसान साथियों’ का जिक्र किया। आंदोलन शब्द उन्होंने एक बार भी नहीं बोला।

लेकिन उन्होंने किसानों से एक विनती की, ‘मैं आज अपने सभी आंदोलनरत किसान साथियों से आग्रह कर रहा हूं, आज गुरु पर्व का पवित्र दिन है। अब आप अपने-अपने घर लौटें, अपने खेत में लौटें, अपने परिवार के बीच लौटें। आइए एक नई शुरूआत करते हैं। नए सिरे से आगे बढ़ते हैं।’

Guru Nanak Jayanti 2021 Special: गुरु नानक देव के अनमोल वचन

Guru Nanak Jayanti 2021:-

गुरुनानक जयंती सिखों (Sikh) का सबसे बड़ा त्‍योहार माना जाता है | सिख धर्म में कार्तिक मास की पूर्णिमा को गुरु नानक जयंती (Guru Nanak Jayanti 2021) मनाया जाता है | इस दिन सिख धर्म को मानने वाले भजन कीर्तन करते हैं और वाहेगुरु का जाप करते हैं | बता दें कि इस साल आगामी 19 नवंबर को गुरु नानक जयंती है|

गुरु नानक जयंती को प्रकाश पर्व (Prakash parv), गुरु पर्व (Guru Parv), गुरु पूरब (Guru Gurpurab) भी कहते हैं | प्रकाश पर्व (prakash parav) हर साल कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि के दिन गुरु नानक जयंती मनाई जाती है | गुरु नानक देव जी ने ही सिख धर्म की स्थापना की थी | प्रकाश पर्व (Prakash Parv) के दिन गुरुद्वारों में धार्मिक अनुष्ठानों सुबह से ही शुरू हो जाते हैं जो देर रात तक चलते रहते हैं | इस दिन लोग गुरुवाणी का पाठ भी करते हैं | प्रकाश पर्व (Prakash Parv) के दिन शाम को लंगर का आयोजन भी किया जाता है | जिसमें अनुयायी भोजन ग्रहण करते हैं |

गुरु नानक देव के अनमोल वचन (Guru Nanak Jayanti Quotes ) :-

गुरु नानक एक धार्मिक गुरु (शिक्षक), एक आध्यात्मिक उपचारक थे | उनका मानना था की यह संसार ईश्वर द्वारा बनाया गया है और हम सब ईश्वर के ही सन्तान है और ईश्वर का निवास हर किसी के नजदीक ही है जो हमे गलत सही का बोध कराते है,आइये जानते हैं कुछ खास, Guru Nanak Dev Quotes |

“भगवान पर वही विश्वास कर सकता है जिसे खुद पर विश्वास हो “

“ये दुनिया एक नाटक है जिसे सपनो में प्रस्तुत करना होता है “

” हमेसा दुसरे के मदद के लिए आगे रहो “

Guru Nanak Dev Quotes

“ईश्वर सर्वत्र विद्यमान है ,हम सबका “पिता” वही है इसलिए सबके साथ प्रेम पूर्वक रहना चाहिए “

“माया (धन) को जेब में ही स्थान देना चाहिए, अपने हृदय में नहीं “

“शांति से अपने ही घर में खुद का विचार करे तब आपको मृत्यु का दूत छु भी नही पायेगा “

“सिर्फ और सिर्फ वहि वाणी बोले जो शब्द आपको सम्मानित करते है “

“वे लोग जिनके पास प्यार है, वे उन लोगो में से है जिन्होंने भगवान को ढूंढ लिया “

“तुम्हारी दया ही मेरा सामाजिक दर्जा है “

“आप चाहे किसी भी प्रकार के बीज बोये, लेकिन उसे उचित मौसम में ही तैयार करे, यदि आप ध्यान से इन्हें देखोंगे तो पाएंगे की बीज के गुण ही उन्हें ऊपर लाते है “

“योगी को किस बात का डर होना चाहिए? पेड़, पौधे सभी उसी के अंदर और बाहर होते है “

“सब धर्मो और जातियों के लोग एक है “

“सदैव परोपकार करो “

“उसकी चमक से सबकुछ प्रकाशमान है”

“धन-समृद्धि से युक्त बड़े बड़े राज्यों के राजा-महाराजों की तुलना भी उस चींटी से नहीं की जा सकती है जिसमे में ईश्वर का प्रेम भरा हो “

“तेरी हजारों आँखें हैं और फिर भी एक आंख भी नहीं ; तेरे हज़ारों रूप हैं फिर भी एक रूप भी नहीं “

“ना मैं एक बच्चा हूँ , ना एक नवयुवक, ना ही मैं पौराणिक हूँ, ना ही किसी जाति का हूँ “

Guru Nanak Dev Quotes
illustration of Happy Gurpurab, Guru Nanak Jayanti festival of Sikh celebration background

“कोई उसे तर्क द्वारा नहीं समझ सकता, भले वो युगों तक तर्क करता रहे “

“भगवान एक है, लेकिन उसके कई रूप हैं. वो सभी का निर्माणकर्ता है और वो खुद मनुष्य का रूप लेता है “

“बंधुओं ! हम मौत को बुरा नहीं कहते, यदि हम जानते कि वास्तव में मरा कैसे जाता है “

“ये पूरी दुनिया कठनाइयो में है. वह जिसे खुद पर भरोसा है वही विजेता कहलाता है “

“प्रभु के लिए खुशियों के गीत गाओ, प्रभु के नाम की सेवा करो, और उसके सेवकों के सेवक बन जाओ “

Guru Nanak Dev Quotes
image of Happy Gurpurab, Guru Nanak Jayanti festival of Sikh celebration background

“अहंकार मनुष्य को मनुष्य नहीं रहने देता अतः अहंकार कभी नहीं करना चाहिए. विनम्र हो सेवाभाव से जीवन गुजारना चाहिए “

“मेरा जन्म नहीं हुआ है; भला मेरा जन्म या मृत्यु कैसे हो सकती है “

“चिंता-मुक्त रहकर अपने कर्म करने चाहिए “


“दुनिया में किसी भी व्यक्ति को भ्रम में नहीं रहना चाहिए. बिना गुरु के कोई भी दुसरे किनारे तक नहीं जा सकता है “

Guru Nanak Jayanti 2021: इस दिन मनाई जाएगी गुरु नानक जयंती, जानिए इस पावन पर्व के बारे में सबकुछ

Guru Nanak Jayanti 2021:-

गुरुनानक जयंती सिखों (Sikh) का सबसे बड़ा त्‍योहार माना जाता है | सिख धर्म में कार्तिक मास की पूर्णिमा को गुरु नानक जयंती (Guru Nanak Jayanti 2021) मनाया जाता है | इस दिन सिख धर्म को मानने वाले भजन कीर्तन करते हैं और वाहेगुरु का जाप करते हैं | बता दें कि इस साल आगामी 19 नवंबर को गुरु नानक जयंती है |

गुरु नानक जयंती को प्रकाश पर्व (Prakash parv), गुरु पर्व (Guru Parv), गुरु पूरब (Guru Gurpurab) भी कहते हैं | प्रकाश पर्व (prakash parav) हर साल कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि के दिन गुरु नानक जयंती मनाई जाती है | गुरु नानक देव जी ने ही सिख धर्म की स्थापना की थी | प्रकाश पर्व (Prakash Parv) के दिन गुरुद्वारों में धार्मिक अनुष्ठानों सुबह से ही शुरू हो जाते हैं जो देर रात तक चलते रहते हैं | इस दिन लोग गुरुवाणी का पाठ भी करते हैं | प्रकाश पर्व (Prakash Parv) के दिन शाम को लंगर का आयोजन भी किया जाता है | जिसमें अनुयायी भोजन ग्रहण करते हैं |

गुरु नानक जयंती का इतिहास:- Guru Nanak Jayanti 2021

गुरु नानक देव सिख धर्म के पहले गुरु थे | गुरु नानक देव जी का जन्म 1469 ई. को हुआ था | नानक जी का जन्म 1469 में कार्तिक पूर्णिमा को पंजाब (पाकिस्तान) क्षेत्र में रावी नदी के किनारे स्थित तलवंडी नाम गांव में हुआ | हालांकि अब गुरु नानक जी का ये जन्म स्थल अब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में मौजूद ननकाना साहिब में है | गुरु नानक देव बचपन से ही आध्यात्मिक ज्ञान के प्रवर्तक थे | उनका मानना था की यह संसार ईश्वर द्वारा बनाया गया है और हम सब ईश्वर के ही सन्तान है और ईश्वर का निवास हर किसी के नजदीक ही है जो हमे गलत सही का बोध कराते है |

गुरु नानक एक धार्मिक गुरु (शिक्षक), एक आध्यात्मिक उपचारक थे जिन्होंने 15 वीं शताब्दी में सिख धर्म की स्थापना की थी | उन्होंने 974 भजनों का योगदान देकर गुरु ग्रंथ साहिब की रचना शुरू की | गुरु ग्रंथ साहिब की मुख्य शिक्षाएं एक रचनाकार के दर्शन पर आधारित हैं | 22 सितंबर 1539 को करतारपुर पाकिस्तान में गुरु नानक की मृत्यु हो गई |

image of Happy Gurpurab, Guru Nanak Jayanti festival of Sikh celebration background

अब इस जगह का नाम नानक देव के नाम से जाना जाता है | यहां देश विदेश से लोग चर्चित गुरुद्वारा ननकाना साहिब (Gurdwara Nankana Sahib) के दर्शन के लिए आते हैं | कहते हैं कि सिख साम्राज्य के राजा महाराजा रणजीत सिंह (Maharaja Ranjit Singh) ने यह गुरुद्वारा ‘ननकाना साहिब’ बनवाया था |

गुरू नानक देव का जीवन और शिक्षाएं:-

गुरू नानक देव जी सिख धर्म के संस्थापक और सिखों के पहले गुरू थे | उनका जीवन और शिक्षाएं न केवल धर्म विशेष के लिए बल्की पूरी मानव जाति को सही दिशा दिखाती हैं | इसलिए ही उनके जन्म दिवस को प्रकाश पर्व के नाम से जाना जाता है | गुरू नानक देव जी का जन्म कार्तिक पूर्णिमा के दिन 1469 ई. में हुआ था | उनका जन्म स्थान वर्तमान में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में तलवंडी नामक स्थान पर हुआ था | जहां पर आज ननकाना साहिब नाम का गुरू द्वारा है | ननकाना साहिब गुरूद्वारे का निर्माण महाराजा रणजीत सिंह ने करवाया था | गुरू नानक देव ने मूर्ति पूजा का विरोध करते हुए, एक निराकार ईश्वर की उपासना का संदेश दिया था | उन्होंने तात्कालिक समाज की बुराईयों और कुरीतियों को दूर करने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया |

गुरु नानक देव के प्रसिद्ध कथन:-

  • ईश्वर एक ही है और उसका नाम सत्य है |
  • अपने घर की शांति में ध्यान मग्न रहो तो मृत्यु के दूत तुम्हें कभी नहीं छुएंगे |
  • वह व्यक्ति जिसे खुद पर विश्वास नहीं, उसे ईश्वर पर कभी भी विश्वास नहीं हो सकता |
  • हमें सिर्फ वहीं बातें बोलनी चाहिए जिनसे सम्मान मिले |
  • ये संसार एक नाटक है, जो हमारे सपनों में रचाया गया है |

Kartik Purnima 2021: कब है कार्तिक पूर्णिमा, जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व

Kartik Purnima 2021 कब है?

हर महीने की शुक्ल पक्ष की आखिरी तिथि को पूर्णिमा होती है | इस दिन चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है इसलिए इसे पूर्णिमा कहा जाता है | इस बार कार्तिक माह की पूर्णिमा तिथि 19 नवंबर 2021, शुक्रवार के दिन पड़ रही है | कार्तिक मास की पूर्णिमा का विशेष महत्व है | इतना ही नहीं, इस दिन स्नान और दान आदि का विशेष महत्व है | पूर्णिमा का दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है | इस दिन चंद्रमा के साथ-साथ भगवान विष्णु जी की पूजा भी की जाती है |

कार्तिक माह के आखिरी दिन पूर्णिमा तिथि होती है, जिसे कार्तिक पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है | इस साल 19 नवंबर के दिन कार्तिक पूर्णिमा पड़ रही है | 20 नवंबर से मार्गशीर्ष का महीना शुरु हो जाएगा | कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरारी पूर्णिमा (Tripurari Purnima 2021) के नाम से भी जाना जाता है | इस दिन भगवान भोलेनाथ ने त्रिपुरासुर राक्षस का अंत किया था | इसी खुशी में देवताओं मे दीप जलाकर खुशियां मनाई थी | इसे देव दिवाली के रूप में जाना जाता है | इतना ही नहीं, इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने और दान आदि से पुण्य की प्राप्ति होती है | वहीं, आज के दिन श्री हरि का पूजन आदि से सौभाग्य प्राप्त होता है |

कार्तिक पूर्णिमा शुभ मुहूर्त- Kartik Purnima 2021 कब है?

कार्तिक पूर्णिमा तिथि आरंभ- 18 नवंबर 2021दोपहर 12:00 बजे से
कार्तिक पूर्णिमा तिथि समाप्त- 19 नवंबर 2021 दोपहर 02:26 पर
कार्तिक पूर्णिमा पर चंद्रोदय का समय- 17:28:24

कार्तिक पूर्णिमा का महत्व:-

सभी पूर्णिमा में कार्तिक पूर्णिमा का विशेष महत्व है | इस दिन स्नान और दीपदान करना शुभ और पुण्य प्रदान करने वाला माना गया है | यही कारण है कार्तिक पूर्णिमा पर पवित्र नदियों में बड़ी संख्या में लोग स्नान और दान आदि का कार्य करते है | इस दिन पूजा, हवन, जाप और तप का भी विशेष महत्व है |

कार्तिक पूर्णिमा पूजन विधि:-

कार्तिक पूर्णिमा को देव दीपावली के नाम से भी जाना जाता है | इसलिए आज के दिन किसी नही, सरोवर या धर्म स्थान पर दीपदान अवश्य करना चाहिए | कहते हैं कि इस दिन किसी पवित्र स्नान पर ब्रह्ममुहूर्त में स्नान करें या फिर घर में ही गंगाजल डालकर स्नान करना चाहिए | वहीं इस दिन व्रत का संकल्प लेकर भगवान विष्णु के समक्ष शुद्ध देसी घी का दीपक प्रज्वलित करना चाहिए | श्री हरि को तिलक करके धूप, दीप, फल, फूल, और नैवेद्य से पूजा आदि करें | शाम के समय फिर से भगवान विष्णु का पूजन करें | भगवान को देसी घी में भूनकर आटे का सूखा कसार और पंचामृता का भोग लगाएं | इसमें तुलसी पक्ष जरूर शामिल करें | इसके बाद विष्णु जी के साथ मां लक्ष्मी का भी पूजन और आरती करें | रात के समय चंद्रमा निकलने के बाद अर्घ्य दें और फिर व्रत का पारण करें |

कार्तिक पूर्णिमा पर करें ये काम:-

  • पूर्णिमा स्न्नान का महत्व शास्त्रों में वर्णित है | इसलिए इस दिन किसी पवित्र नदी में ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना चाहिए और उदयगामी सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए |
  • पूर्णिमा तिथि को दान का विशेष महत्व होता है | इस दिन हर व्यक्ति को अपनी सामर्थ्य अनुसार दान करना चाहिए | मान्यता है कि इस दिन चावल का दान करने से चंद्रमा मजबूत होता है |
  • कार्तिक पूर्णिमा के दिन दीपदान का विशेष महत्व होता है | मान्यता है कि इस दिन दीपदान करने से देवी-देवता प्रसन्न होते हैं |
  • कार्तिक पूर्णिमा पर तुलसी जी की पूजा अवश्य करनी चाहिए | इसके साथ ही विष्णु भगवान के शालीग्राम अवतार की पूजा करनी चाहिए | मान्यता है ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है |
  • कार्तिक पूर्णिमा पर घर के द्वार पर आम के पत्तों और फूलों से तोरण बनाएं | इस दिन सत्यनारायण कथा सुननी चाहिए | मान्यता है ऐसा करने भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी प्रसन्न होते हैं |

पूर्णिमा तिथि पर न करें ये काम:-

  • इस दिन वाद-विवाद से बचना चाहिए |
  • मांस-मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए |
  • किसी का अपमान नहीं करना चाहिए |

MPPEB: MPPEB MP DAHET और MP PV&FT परीक्षाओं के एडमिट कार्ड जारी, यहाँ करें डाउनलोड

MPPEB: MPPEB MP DAHET और MP PV&FT प्रवेश पत्र 2021 (Admit card) व्यावसायिक परीक्षा बोर्ड, भोपाल द्वारा अपनी आधिकारिक वेबसाइट – peb.mp.gov.in पर जारी किए गए हैं। बोर्ड एमपी प्री-वेटरिनरी एंड फिशरीज एंट्रेंस टेस्ट-2021(PV&FT) और एमपी डिप्लोमा इन एनिमल हसबेंडरी एंट्रेंस टेस्ट-2021 (DAHET) शैक्षणिक वर्ष 2021 के लिए मत्स्य विज्ञान (BFSc.), पशु चिकित्सा विज्ञान और पशुपालन स्नातक (बीवीएससी और एएच) और पशुपालन में डिप्लोमा के लिए क्रमशः के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित करने वाला है।

MP DAHET और MP PV&FT प्रवेश पत्र 2021 कैसे डाउनलोड करें?

STEP1:आधिकारिक वेबसाइट – http://peb.mp.gov.in पर जाएं

MP DAHET

STEP2:नवीनतम अपडेट के तहत, पर क्लिक करें:

MP DAHET

STEP3:अपना आवेदन संख्या, जन्म तिथि दर्ज करें और Search  पर क्लिक करें

STEP4:प्रवेश पत्र डाउनलोड करें और आगे के संदर्भ के लिए एक प्रिंटआउट लें|

MP DAHET प्रवेश पत्र 2021 Link

http://peb.mp.gov.in/tacs/tac_2021/DAHET_TAC21/default_tac.htm

MP PV&FT प्रवेश पत्र 2021 Link

http://peb.mp.gov.in/tacs/tac_2021/PVFT_TAC21/default_tac.htm

उम्मीदवार को परीक्षा केंद्र में प्रवेश करने के लिए मूल फोटो-आईडी लाना चाहिए। UIDAI द्वारा सत्यापित होने पर ही ई-आधार कार्ड मान्य होगा।’ आधिकारिक वेबसाइट पर एक नोट पढ़ें। इसलिए उम्मीदवारों को परीक्षा हॉल में परेशानी मुक्त सत्यापन और प्रवेश के लिए एडमिट कार्ड के साथ एक मूल फोटो-आईडी जैसे मतदाता पहचान पत्र, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, आधार कार्ड आदि ले जाना चाहिए।

Kartarpur registration 2021: जाना चाहते हैं करतारपुर साहिब, तो ऐसे करें ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन

Kartarpur Corridor Registration:-

भारत और पाकिस्तान की केंद्र सरकार ने भारतीय सिख तीर्थयात्रियों को पाकिस्तान में पवित्र दरबार साहिब तीर्थ की यात्रा करने की अनुमति देने के लिए करतारपुर कॉरिडोर (Kartarpur Corridor) के संचालन के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं | अब लोग श्री करतारपुर साहिब कॉरिडोर पंजीकरण आधिकारिक वेबसाइट https://prakashpurb550.mha.gov.in/kpr/ पर कर सकते हैं | तीर्थ यात्रा के लिए आवेदन करने के लिए भारतीय और OCI कार्ड धारक डेरा बाबा नानक ऑनलाइन आवेदन पत्र भर सकते हैं |

पाकिस्तान सरकार ने भारत को लंगर (सामुदायिक रसोई) और प्रसाद के वितरण के लिए पर्याप्त प्रावधान करने का आश्वासन दिया है | गृह मंत्रालय ने तीर्थयात्रियों के लिए क्या करें और क्या न करें की सोची जारी किया है | करतारपुर साहिब कॉरिडोर के लिए यात्रा और वापसी के लिए आवेदन करने से पहले इन दिशानिर्देशों की जांच करें |

Dera Baba Nanak – Sri Kartarpur Sahib:-

ग्राम करतारपुर रावी नदी के पश्चिमी तट पर स्थित है जहाँ श्री गुरु नानक देव जी ने अपने जीवन के अंतिम 18 वर्ष बिताए थे | गुरुद्वारा डेरा बाबा नानक भारत-पाकिस्तान सीमा से लगभग 1 किमी और रावी नदी के पूर्वी तट पर स्थित है | नदी के पश्चिम में करतारपुर, पाकिस्तान का शहर स्थित है | गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब पाकिस्तान के नरोवाल जिले में डेरा बाबा नानक के ऐतिहासिक शहर के पास अंतरराष्ट्रीय सीमा से, जिला गुरदासपुर, पंजाब से लगभग 4.5 किमी दूर पड़ता है |

डेरा बाबा नानक भारत के पंजाब राज्य के गुरदासपुर जिले में स्थित एक शहर है | श्री गुरु नानक देव जी के अनुयायियों ने शहर का निर्माण किया और अपने महान पूर्वज के नाम पर इसका नाम डेरा बाबा नानक रखा |

Dera Baba Nanak to Kartarpur Distance:-

  • अमृतसर से दूरी NH354B द्वारा 45 किमी
  • बटाला से दूरी जिला सड़क द्वारा 24 किमी
  • गुरदासपुर से दूरी NH354 द्वारा 30 किमी
  • जालंधर से दूरी बटाला होते हुए 112 किमी |
Kartarpur Registration 2021

Kartarpur Sahib Corridor Booking Latest Update:-

करतारपुर साहिब मार्ग, जो पाकिस्तान के सबसे पवित्र सिख स्थलों में से एक की ओर जाता है, 17 नवंबर 2021 को फिर से खुल गया | Corridor पाकिस्तान के गुरुद्वारा दरबार साहिब और पंजाब के डेरा बाबा नानक मंदिर को जोड़ता है, जो सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव का अंतिम विश्राम स्थल है | पहले सिख गुरु, गुरु नानक के जन्मदिन, गुरपुरब से दो दिन पहले Corridor खुलता है |

COVID-19 महामारी के कारण, तीर्थयात्रियों के लिए खोले जाने के ठीक चार महीने बाद मार्च 2020 में मार्ग को बंद कर दिया गया था | सभी तीर्थयात्रियों के पास एक Negative RTPCR रिपोर्ट होनी चाहिए जो 72 घंटे से अधिक पुरानी न हो, साथ ही साथ COVID-19 टीकाकरण प्रमाण पत्र भी होना चाहिए | 18 नवंबर को, पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने घोषणा की कि पूरा राज्य मंत्रिमंडल करतारपुर साहिब में श्रद्धांजलि अर्पित करेगा |

ऐसे करें Kartarpur Sahib Corridor के लिए बुकिंग:-

  • सबसे पहले गृह मंत्रालय की वेबसाइट https://prakashpurb550.mha.gov.in/kpr/ पर लॉग इन करें |
  • बुकिंग शुरू करने से पहले रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरने से संबंधित निर्देशों को पढ़ें |
  • वेब पेज के टॉप पर मौजूद ‘Apply Online‘ पर क्लिक करें |
  • श्री करतारपुर साहिब कॉरिडोर पंजीकरण करने के लिए, लोगों को पहले भारतीय या विदेशी (केवल OCI कार्ड धारक) के रूप में अपनी ‘Nationality‘ दर्ज करनी होगी और ‘Journey date‘ का चयन करना होगा |
Kartarpur Registration 2021
  • यहां उम्मीदवार श्री करतारपुर साहिब कॉरिडोर यात्रा के लिए अपने उपयुक्त स्लॉट का चयन कर सकते हैं | फिर करतारपुर कॉरिडोर ऑनलाइन पंजीकरण फॉर्म खोलने के लिए “Continue” बटन पर क्लिक करें जैसा कि नीचे दिखाया गया है:-
Kartarpur Registration 2021
  • यहां उम्मीदवार पासपोर्ट प्रकार, पासपोर्ट संख्या, जारी करने की तिथि, समाप्ति की तारीख, जारी करने का स्थान, व्यक्तिगत विवरण दर्ज कर सकते हैं और “Save & Continue” बटन पर क्लिक कर सकते हैं | शेष अनुभागों को पूरा करें |
  • एक बार जब आप समाप्त कर लेंगे तो आपको एक पंजीकरण संख्या और फॉर्म की एक पीडीएफ कॉपी मिल जाएगी | पंजीकरण संख्या को अपने पास सुरक्षित रखें और भविष्य के संदर्भ के लिए पीडीएफ फाइल को सेव करें |
  • यात्रा की तारीख से तीन से चार दिन पहले तीर्थयात्रियों को उनके पंजीकरण की पुष्टि करने वाला एक एसएमएस और एक ई-मेल मिलेगा |

Vir Das: जानें कौन है, जिसने अमेरिका में जाकर भारत को किया बदनाम

Vir Das Biography in Hindi

मैं उस भारत से आता हूं, जहां दिन में औरतों की पूजा होती हैं और रात में गैंगरेप” | ये बयान कॉमेडियन वीर दास (Vir Das) का है | फेमस स्टैंडअप कॉमेडियन वीर दास अपनी एक कविता ‘टू इंडियाज‘ को लेकर विवादों से घिर गए हैं | वीर दास ने अमेरिका के वाशिंगटन डीसी में स्टैंडअप कॉमेडी के दौरान ‘टू इंडियाज’ नाम की एक कविता पढ़ी | वो भी वॉशिंगटन डीसी (Washington DC) में | जहां जॉन एफ कैनेडी सेंटर द परफॉर्मिंग आर्ट्स में उन्होंने परफॉर्म किया, जिसका 6 मिनट का वीडियो भी बनाया गया है | वीडियो में अमेरिकी के लोगों के सामने भारत को लेकर ऐसा बयान दिया गया | वीर का सोशल मीडिया (Social Media) पर जमकर विरोध हो रहा है | मुंबई में FIR भी दर्ज हो गई है | हालांकि जब विवाद बढ़ा तो उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर माफी मांगी है |

यह पहली बार नहीं है, जब अपने बयान के चलते वीर दास विवादों में हैं | इससे पहले भी कई बार वो विवादों में घिर चुके हैं | रिपोर्ट्स की मानें तो दिल्ली में अपने एक स्टैंडअप शो के दौरान वीर दास को डॉ. अब्दुल कलाम के बारे में टिप्पणी करने पर बीच शो में ही रोक दिया गया था | ऑडियंस मेंबर ने पुलिस में उनकी शिकायत दर्ज कराई थी |

कौन है वीर दास:- Vir Das Biography in Hindi

Vir Das Biography in Hindi

वीर दास का जन्म 31 मई 1979 को देहरादून में हुआ | पालन-पोषण नाइजीरिया में हुआ | उन्होंने नाइजीरिया के लागोस में भारतीय भाषा स्कूल के साथ-साथ द लॉरेंस स्कूल में पढ़ाई की | उन्होंने नॉक्स कॉलेज से ग्रेजुएशन किया | उन्होंने अक्टूबर 2014 में अपनी गर्लफ्रेंड शिवानी माथुर से शादी की | अगर इनके करियर की बात करें तो 35 नाटकों, 100 से अधिक स्टैंडअप कॉमेडी शो, 18 फिल्मों, 8 टीवी शो और 6 कॉमेडी स्पेशल में काम किया है | उन्होंने फेमिना और तहलका जैसी मैग्जीन में आर्टिकल भी लिखे हैं |

42 साल के वीर दास ने साल 2014 में शिवानी माथुर से शादी की | ये शादी श्रीलंका में हुई थी | वीर दास नेटफ्लिक्स के कॉमेडी स्पेशल, एब्रॉड अंडरस्टैंडिंग को साइन करके वाले पहले भारतीय भी हैं |

वीर दास के स्टैंडअप कॉमेडी शोज को दुनिया भर में खासी लोकप्रियता मिली है। वो कॉमेडियन होने के साथ-साथ एक्टर भी हैं | उन्होंने ‘Go Goa Gone’, ‘बदमाश कंपनी’, कंगना रणौत के साथ Revolver Rani, Delhi Belly जैसी फिल्में की हैं |

वीर दास का विवादों से है पुराना नाता:-

ऐसा पहली बार नहीं है कि वीर दास पर FIR हुई | इसके पहले भी वो अपनी जोक्स और शो को लेकर ये समस्या झेल चुके हैं | इसके पहले भी कई ऐसे मामलों में उनपर एफआईआर दर्ज हुई थी | नजर डालते हैं इनके 4 विवादित मामलों पर:

  • वीर दास के शो हंसमुख को लेकर उनको 10 लीगल नोटिस का सामना करना पड़ा था | ये शो नेटफिलिक्स पर आया था जिसमें वकीलों को आहत करने की खबर सामने आई थी |
  • मस्तीजादे को लेकर भी दास और सनी लिओनी पर FIR दर्ज हुआ था |
  • 2015 में दर्जन भर पुलिस ने दास को एक शो करने से रोक दिया था | वीर एक एक्ट करने वाले थे जो कि देश के पूर्व राष्ट्रपति कलाम पर आधारित था |
  • ट्रांस जेंडर कम्युनिटी पर जोक्स करने के लिए भी वीर दास पर कार्रवाई हो चुकी है |

पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे: अब दिल्ली से गाजीपुर तक का सफर 10 घंटे में, जानिए क्या है इसकी खासियत |

पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे:-

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार दोपहर सुल्तानपुर के कूरेभार पहुंचकर उत्तर प्रदेश के 9 जिलों को जोड़ने वाले पूर्वांचल एक्सप्रेस का लोकार्पण किया | जनता को समर्पित होते ही यूपी वासियों में इसे लेकर खुशी की लहर दौड़ पड़ी है |

कार्यक्रम के लिए पीएम मोदी एक्सप्रेसवे पर बनाई गई हवाई पट्टी पर भारतीय वायुसेना के मालवाहक विमान सी-130जे हरक्युलिस से पहुंचे थे | राज्यपाल आनंदीबेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनकी अगवानी की, जिसके बाद कार्यक्रम की शुरूआत की गई |

पीएम मोदी का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का शिलान्यास तीन साल पहले किया गया था और आज सिर्फ 36 महीने में 341 किलोमीटर का एक्सप्रेसवे जनता को समर्पित होने जा रहा है | यह एक्सप्रेसवे पूर्वांचल के विकास को नई ऊंचाइयां देने वाला साबित होगा |

इसके लोकार्पण के साथ ही अपेक्षाकृत पिछड़े इलाके पूर्वांचल को विकास के पंख लग जाएंगे | एक्सप्रेस-वे के नजदीकी क्षेत्रों में उद्योगों के विकास के साथ शैक्षणिक व स्वास्थ्य संस्थान, वाणिज्यिक केंद्र खुलने से विकास के साथ रोजगार की नई राह भी खुलेगी |

पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे : एक नजर में

  • लंबाई : 340.824 किमी
  • सड़क : 120 मीटर चौड़ी
  • गति : 100 किमी/घंटा, 120 किमी/घंटा की रफ्तार के लिए डिजाइन किया गया है |
  • हवाई पट्टी : सुल्तानपुर में 3.20 किमी लंबा व 34 मीटर चौड़ा एयर स्ट्रिप लड़ाकू विमानों के लिए |
  • 8 स्थानों पर फ्यूल पंप और 4 स्थानों पर सीएनजी स्टेशन |
  • 8 प्रसाधन ब्लॉक और 8 जनसुविधा परिसर |
  • हर 500 मीटर पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग पिट का प्रावधान |
  • 4.5 लाख पौधों का रोपण |

लागत का 90.71 प्रतिशत खर्च

  • परियोजना की कुल लागत (भूमि समेत) : 22497 करोड़
  • अब तक खर्च : 20408 करोड़ (90.71 प्रतिशत)

दिल्ली से गाजीपुर तक का सफर:-

जगहकहां तकदूरीएक्सप्रेस-वे
दिल्ली (निजामुद्दीन)नोएडा25 किमीदिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे
नोएडाआगरा165 किमीयमुना एक्सप्रेस-वे
आगरा लखनऊ302 किमी आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे
लखनऊगाजीपुर341 किमी पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे

पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे की अहम बातें:-

यह एक्सप्रेसवे 22,494 करोड़ की लागत से बनकर तैयार हुआ है | यह एक्‍सप्रेस वे पूर्वांचल के विकास में नई इबारत लिखने जा रहा है | पूर्वांचल एक्सप्रेस से यूपी में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे | एक तरफ पूर्वांचल एक्‍सप्रेस वे प्रदेश में आवागमन को आसान बनाएगा, वहीं दूसरी तरफ उपेक्षित स्‍थानों की प्रगति का मार्ग भी प्रशस्‍त करेगा | हालांकि, भाजपा और सपा के बीच इस एक्सप्रेसवे का श्रेय लेने की होड़ मची है | जानिए इस एक्सप्रेसवे की खास बातें-

  • एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के समय 3.2 किलोमीटर हवाई पट्टी पर सुखोई-30 एमकेआई, जगुआर और मिराज-200 लड़ाकू विमान अपने पराक्रम एवं शौर्य का प्रदर्शन करेंगे | 
  • करीब 341 किलोमीटर लंबा यह एक्‍सप्रेस वे गाजीपुर के बाद मऊ, आजमगढ़, अंबेडकर नगर, अयोध्‍या, सुल्‍तानपुर, अमेठी, बाराबंकी से होकर गुजरेगा | दिल्ली से गाजीपुर जाने में अब 10 घंटे का समय लगेगा |
  • इस एक्सप्रेसवे से पूर्वांचल में विकास को रफ्तार मिलेगी | यूपी की सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ से आजमगढ़ होते हुए गाजीपुर तक छह लेन के पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का निर्माण शुरू करवाया था | इस एक्सप्रेसवे की लम्बाई 340.824 किमी है | इसे भविष्य में आठ लेन करने की योजना है | 
  • इस एक्सप्रेस-वे के अंतर्गत कुल 18 फ्लाईओवर, 07 आरओबी, 07 दीर्घ सेतु, 118 लघु सेतु, 13 इण्टरचेंज, 271 अंडरपास तथा 503 पुलियों का निर्माण किया गया है | 
  • एक्‍सप्रेस-वे के आसपास के क्षेत्र को औद्योगिक विकास के नजरिए से विकसित किया जाएगा और इसके दोनों तरफ औद्योगिक गलियारा बनाया जाएगा | इन गलियारों में खाद्य प्रसंस्‍करण, एमएसएमई इकाइयां, वेयरहाउस और लॉजिस्टिक पार्क बनाने की योजना पर काम हो रहा है | 
  • आपातकालीन स्थिति में इस एक्सप्रेसवे पर भारतीय वायुसेना के फाइटर प्‍लेन उतारे जा सकेंगे | इस एक्‍सप्रेस वे पर अयोध्‍या जनपद में 3.20 किलोमीटर लंबी हवाई पट्टी पर लड़ाकू विमान के टेक ऑफ और लैंडिंग कर पाएंगे | 
  • गाजीपुर के हैदरिया गांव से शुरू होने वाला यह एक्‍सप्रेस लखनऊ में चांद सराय गांव पर जाकर खत्‍म होगा | 340 किलोमीटर लंबा यह एक्‍सप्रेस वे छह लेन का होगा, जिस पर दूरी लगभग तीन घंटे में पूरी की जा सकेगी |

उत्तराखंड मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना 2021 हेतु ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?

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उत्तराखंड मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना 2021:-

कोरोना वायरस संक्रमण के कारण देशभर में कई नागरिकों की मृत्यु हुई है | देश में कई बच्चे ऐसे हैं जिन्होंने कोरोना वायरस संक्रमण के कारण अपने माता पिता को खो दिया है | उत्तराखंड के ऐसे सभी बच्चों के लिए उत्तराखंड सरकार द्वारा मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना (Mukhyamantri Vatsalya Yojana) आरंभ की गई है | इस योजना के माध्यम से सभी बच्चों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी |

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री तीरथ सिंह रावत द्वारा मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना (Mukhyamantri Vatsalya Yojana) प्रदेश के उन बच्चों के लिए आरंभ की गई है जिनके माता-पिता या अभिभावक की मृत्यु कोरोना वायरस संक्रमण के कारण हुई है | इस योजना के माध्यम से ऐसे सभी बच्चों को ₹3000 प्रतिमाह की आर्थिक सहायता भरण-पोषण भत्ता के रूप में प्रदान की जाएगी | यह आर्थिक सहायता बच्चों को 21 वर्ष की आयु तक प्रदान की जाएगी | जिससे कि वह अपना भरण पोषण कर सकें और आत्मनिर्भर बन सके | यह आर्थिक सहायता सभी पात्र बच्चों के खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी जाएगी | इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए बच्चे का बैंक में खाता होना अनिवार्य है |

Mukhyamantri Vatsalya Yojana के माध्यम से सरकार द्वारा बच्चों की शिक्षा का भी ध्यान रखा जाएगा | सरकार द्वारा यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बच्चे आर्थिक तंगी के कारण शिक्षा प्राप्त करने से वंचित ना रहे | यदि आप भी मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना का लाभ प्राप्त करना चाहते हैं तो आप जल्द से जल्द आवेदन करवा लें |

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मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना का शुभारंभ:-

राज्य में कोविड-19 के कारण अनाथ हुए बच्चों को मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना का लाभ प्रदान किया जाएगा | इस योजना का लाभ लाभार्थियों के खाते में सीधे डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित किया जाएगा | इस योजना का शुभारंभ 2 अगस्त 2021 को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री द्वारा किया गया है | प्रदेश के कई बच्चे ऐसे हैं जो अनाथ हो गए हैं एवं कई बच्चे ऐसे हैं जिन्होंने माता-पिता में से किसी एक को खो दिया है | विभाग द्वारा ऐसे 2311 बच्चों को चिन्हित किया गया है | लेकिन अभी केवल 27% बच्चों को ही इस योजना का लाभ प्रदान किया जा रहा है | इस योजना का लाभ बच्चों को पहुंचाने के लिए जिलाधिकारी द्वारा सत्यापन किया जाएगा |

अब तक कुल 640 बच्चों की सत्यापन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और बाकी बच्चों के सत्यापन की प्रक्रिया अभी चल रही है | इन सभी बच्चों का अकाउंट भी खोल दिया गया है | जैसे ही अन्य बच्चों की सत्यापन प्रक्रिया पूरी होती रहेगी वैसे ही चिन्हित किए गए अन्य बच्चों को लाभ मिलना शुरू हो जाएगा |

मार्च 2020 से  मार्च 2021 तक कुल 2347 बच्चों का चयन किया गया है | इन सभी बच्चों को इस योजना से जोड़ा जाएगा | देहरादून में 561 बच्चो का चयन किया गया है जबकि टिहरी गढ़वाल में 249, उधमसिंह नगर में 242, हरिद्वार में 230, पौड़ी गड़वाल में 213, नैनीताल में 185, उत्तरकाशी में 120 बच्चे चिन्हित गए हैं | अन्य जिलों में भी कई बच्चों का चयन किया गया है जिनकी सत्यापन प्रक्रिया अभी चल रही है |

मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना का कार्यान्वयन:-

  • वह सभी बच्चे जो मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के पात्र हैं उनको चुनने की जिम्मेदारी नोडल अधिकारी की होगी |
  • नोडल अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रत्येक लाभार्थी बच्चे को इस योजना का लाभ प्रदान किया जा रहा है |
  • क्षेत्र में पंचायती राज संस्थान, पंचायत समिति, ग्राम पंचायत स्तरीय, बाल संरक्षण, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता शिक्षा गढ़ आदि नोडल अधिकारी का अपने क्षेत्र में बच्चों का चयन करने में सहयोग करेंगे |
  • सभी पात्र बच्चों की सूची तैयार की जाएगी |
  • सूची तैयार होने के बाद नोडल अधिकारी द्वारा सभी पात्र बच्चों को इस योजना का लाभ प्रदान किया जाएगा |
  • नोडल अधिकारी द्वारा यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज समय से तैयार कर लिए जाएं |
  • सभी पात्र बच्चों की सूची का रिकॉर्ड तहसील स्तर पर भी जमा किया जाएगा |

मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना 2021 का उद्देश्य:-

मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना को प्रदेश के उन बच्चों के लिए आरंभ किया गया है जिनके माता पिता की मृत्यु कोरोना वायरस संक्रमण के कारण हो गई है | इस योजना को आरंभ करने का मुख्य उद्देश्य सभी बच्चों को आर्थिक सहायता प्रदान करना है | जिससे कि वह अपना भरण-पोषण कर सकें | इस योजना के माध्यम से उत्तराखंड सरकार द्वारा ₹3000 की आर्थिक सहायता प्रतिमाह बच्चे की 21 वर्ष की आयु होने तक प्रदान की जाएगी | Mukhyamantri Vatsalya Yojana की वजह से अब प्रदेश के बच्चों को अपने भरण-पोषण के लिए दूसरों पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी | वे आत्मनिर्भर एवं सशक्त बन सकेंगे |

मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना 2021 के अंतर्गत प्रदान किए जाने वाले अन्य लाभ:-

जैसे कि आप सभी लोग जानते हैं मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के माध्यम से उत्तराखंड सरकार द्वारा उन सभी बच्चों को ₹3000 की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी जिनके माता-पिता या अभिभावकों की मृत्यु कोरोनावायरस संक्रमण के कारण हुई है | उत्तराखंड सरकार द्वारा ऐसे सभी बच्चों को शिक्षा एवं रोजगार प्राप्त करने में भी सहायता की जाएगी | इन सभी बच्चों को रोजगार प्रदान करने के लिए सरकारी नौकरियों में 5% का कोटा भी रखा जाएगा | इसके अलावा बच्चों की पैतृक संपत्ति के लिए भी सरकार द्वारा कुछ नियम बनाए जाएंगे | जिसके अंतर्गत बच्चों की पैतृक संपत्ति को बेचने का अधिकार बच्चे की वयस्क हो जाने तक किसी को भी नहीं होगा | इस बात की जिम्मेदारी जिले के जिला अधिकारी को दी जाएगी | इसके अलावा Mukhyamantri Vatsalya Yojana के अंतर्गत बच्चों को रोजगार के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की जाएगी |

मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के अंतर्गत इन परिस्थितियों में प्रदान किया जाएगा योजना का लाभ:-

  • वह बच्चे जिनके माता पिता की मृत्यु 1 मार्च 2020 से 31 मार्च 2022 के बीच कोविड-19 महामारी या अन्य बीमारी से हुई हो |
  • यदि माता-पिता में से किसी एक का पूर्व में देहांत हो चुका हो और एक की मृत्यु कोविड-19 महामारी से हुई हो |
  • 1 मार्च 2020 से 31 मार्च 2022 तक परिवार के एक लौते कमाऊ सदस्य की मृत्यु होने की स्थिति में |
  • यदि बच्चे के माता-पिता की मृत्यु पूछ लो हो चुकी हो एवं बच्चे के संरक्षक की मृत्यु 1 मार्च 2020 से लेकर 31 मई 2022 के बीच कोविड-19 या किसी अन्य बीमारी के कारण हुई हो |

Mukhyamantri Vatsalya Yojana 2021 के लाभ तथा विशेषताएं:-

  • मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री तीरथ सिंह रावत द्वारा आरंभ किया गया है |
  • इस योजना के माध्यम से उन सभी बच्चों की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी जिनकी कोरोना वायरस संक्रमण के कारण माता-पिता या अभिभावक की मृत्यु हो गई हो |
  • इस योजना के माध्यम से प्रतिमाह ₹3000 की आर्थिक सहायता बच्चे की 21 वर्ष की आयु होने तक भरण-पोषण भत्ता के रूप में प्रदान की जाएगी |
  • यह आर्थिक सहायता सभी पात्र बच्चों के खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से भेजी जाएगी |
  • Mukhyamantri Vatsalya Yojana 2021 का लाभ प्राप्त करने के लिए बच्चे का बैंक में खाता होना अनिवार्य है |
  • इसके अलावा उत्तराखंड सरकार द्वारा ऐसे सभी बच्चों की शिक्षा एवं रोजगार प्राप्त करने में भी सहायता की जाएगी |
  • सरकार द्वारा ऐसे सभी बच्चों के लिए सरकारी नौकरी में 5% का कोटा भी रखा जाएगा |
  • इस योजना के अंतर्गत बच्चे की पैतृक संपत्ति को बेचने का अधिकार बच्चे के वयस्क होने तक किसी को भी नहीं दिया जाएगा |
  • इस बात की जिम्मेदारी संबंधित जिले के जिला अधिकारी को दी जाएगी |
  • इसके अलावा इस योजना के अंतर्गत बच्चों को रोजगार के लिए प्रशिक्षण प्रदान करने की व्यवस्था भी की जाएगी |

मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना 2021 की पात्रता:-

  • आवेदक उत्तराखंड का स्थाई निवासी होना चाहिए |
  • उम्मीदवार का बैंक में खाता होना अनिवार्य है |
  • आवेदक के माता-पिता या अभिभावक की मृत्यु कोरोनावायरस संक्रमण के कारण हुई हो |

उत्तराखंड मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना 2021 के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज:-

  • आधार कार्ड
  • बैंक खाता विवरण
  • राशन कार्ड
  • जन्म प्रमाण पत्र
  • आय प्रमाण पत्र
  • पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ
  • मोबाइल नंबर
  • माता पिता का मृत्यु प्रमाण पत्र

मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के अंतर्गत आवेदन करने की प्रक्रिया:-

  • सर्वप्रथम आपको वुमन एंपावरमेंट एंड चाइल्ड डेवलपमेंट, गवर्नमेंट ऑफ उत्तराखंड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा |
उत्तराखंड मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना
  • अब आपके सामने होम पेज खुल कर आएगा |
  • होम पेज पर आपको Recent Update के विकल्प पर क्लिक करना होगा |
मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना
Mukhyamantri Vatsalya Yojana
Mukhyamantri Vatsalya Yojana Form
  • अब आपको इस फॉर्म को डाउनलोड करके इसका प्रिंट निकालना होगा |
  • इसके पश्चात आपको इस फॉर्म में पूछे गए सभी महत्वपूर्ण जानकारी जैसे कि बच्चे का नाम, जन्मतिथि, धर्म, जाति, आधार कार्ड नंबर, स्थानीय पता, वर्तमान पता, शैक्षिक योग्यता विद्यालय का नाम आदि दर्ज करना होगी |
  • इसके पश्चात आपको सभी महत्वपूर्ण दस्तावेजों को इस जो से अटैच करना होगा |
  • अब आपको इस फॉर्म को संबंधित विभाग में जमा करना होगा |
  • इस प्रकार आप मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के अंतर्गत आवेदन कर पाएंगे |

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मानुषी छिल्लर का जीवन परिचय: जिन्होंने पृथ्वीराज चौहान फिल्म के साथ बॉलीवुड में एंट्री ली

मानुषी छिल्लर (Manushi Chhillar):-

चीन के सन्या मे आयोजित  मिस वर्ल्ड 2017 (Miss World 2017) के कॉमपिटीशन मे भारत की मानुषी छिल्लर (Manushi Chhillar) ने जीत हासिल कर अपने देश को गोरवान्वित किया | मानुषी भारत के हरियाणा स्टेट से ताल्लुक रखती हैं | इसी वर्ष 2017 मे इन्होंने फेमिना मिस इंडिया 2017 (Femina Miss India 2017) का खिताब हासिल किया और आज देश की छठवी मिस वर्ल्ड के रूप मे अपना नाम इतिहास के पन्नो मे दर्ज कराया |

मानुषी छिल्लर भारत की “मिस वर्ल्ड प्रियंका चोपड़ा” के बाद छठीं बार मिस वर्ल्ड का ताज भारत वापस लाने में सफल हुई है | महज 20 वर्ष उम्र की मानुषी एक मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई करती है, जिनके मिस वर्ल्ड का ख़िताब जीतने के बाद भारत ने सबसे ज्यादा बार मिस वर्ल्ड का ताज अपने नाम करने वाले देश वेनेजुएला की बराबरी कर ली है | भारत में हरियाणा राज्य के लिंगानुपात मामले पिछड़े होने के बावजूद भी मानुषी ने अपने राज्य को ही नहीं बल्कि पूरे भारत का नाम रोशन किया है |

मानुषी छिल्लर ने मिस वर्ल्ड का ख़िताब चीन के सान्या नामक शहर में 18th नवम्बर 2017 को जीता. इस कॉमपिटीशन के आखरी चरण ने पाँच देशो की सुंदरियों ने अपनी जगह बनाई, जिनमे से एक थी मानुषी | वे पाँच देश थे भारत, इंग्लैंड, फ्रांस, केन्या और मैक्सिको | इसके 17 वर्ष पहले यही अवार्ड प्रियंका चोपड़ा ने 18th जुलाई 2000, को लन्दन में होने वाली मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में हासिल किया था | भारत नेमिस वर्ल्ड का ख़िताब क्रमशः सन् 1966, 1994, 1997, 1999, 2000, 2017 में कुल 6 बार जीता है |

मानुषी छिल्लर का जन्म एवं शिक्षा:-

मानुषी छिल्लर का जन्म सोनीपत, में 14th मई सन् 1997 में एक जाट परिवार में हुआ था | मानुषी छिल्लर की प्राथमिक शिक्षा नई दिल्ली में सेंट थॉमस स्कूल से पूरी हुई |  इसके बाद मानुषी भगत फूल सिंह मेडिकल कॉलेज जो कि सिर्फ महिलाओं के लिए है वहीँ पर मेडिकल की शिक्षा प्राप्त कर रही है |

Manushi Chhillar Biography in Hindi

मानुषी छिल्लर के परिवार के अधिकतर लोग डॉक्टर है, इनके पिता डॉ. मित्र बासु छिल्लर भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन में एक वैज्ञानिक की भूमिका में कार्यरत है दूसरी तरफ इनकी माँ डॉ. नीलम छिल्लर भी ‘इंस्टीटूट ऑफ़ ह्यूमन बेहेवियर एंड अलाइड साइंस’ में न्यूरोकेमिस्ट्री विभाग की सह प्राध्यापक है | इनके भाई का नाम दलमित्र छिल्लर एवं इनकी बहन देवांगना छिल्लर एल एल बी कर रही है |

मानुषी छिल्लर के शौक:-

  • मानुषी छिल्लर मॉडल होने के साथ साथ कुचीपुड़ी नृत्य की प्रशिक्षित डांसर है | इसके आलावा इनको अभिनय, चित्रकला,एवं गायन में भी विशेष रुचि है |
  • मानुषी की अभिनय में रुचि होने पर इन्होने अभी हाल में ही नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा में अपने आपको शामिल किया है |
  • मानुषी की कुचिपुड़ी नृत्य की शिक्षा राजा और राधा रेड्डी एवं कौशल्या रेड्डी जैसे महान कुचिपुड़ी नृत्यकार की देख रेख में संपन्न हुयी है |

मानुषी छिल्लर की पसंद:-

  • वैसे तो मानुषी को उनकी माँ ही दुनिया में सबसे ज्यादा पसंद है, मानुषी के अनुसार उनकी माँ ने ही उन्हें हर कदम पर प्रोत्साहन एवं हर कठिन परिस्थिति से निकलने का साहस दिया है |
  • मानुषी कहतीं है, कि उन्हें लगता है की ऋतिक रोशन दुनिया के सबसे सेक्सिएस्ट जीवित आदमी है | हालांकि इनके पसंदीदा अभिनेता ह्यू जैकमैन और लियोनार्डो डिकैप्रियो एवं पसंदीदा अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा हैं |
  • मानुषी की सबसे पसंदीदा मूवी आमिर खान की दंगल है | ये सोचती है कि आकाश की तरह हमारे सपने भी असीमित है, इसलिए हमे कभी भी अपनी प्रतिभा पर शक नहीं करना चाहिए |

मानुषी छिल्लर का करियर:-

मानुषी छिल्लर (Miss World Manushi Chillar) ने मिस वर्ल्ड का खिताब जीत अन्य एक्ट्रेस की तरह बॉलीवुड में आने की जल्दबाजी नहीं की और सही वक्त का इंतजार किया | आखिरकार मानुषी के हाथ सुपरस्टार अक्षय कुमार (Akshay Kumar) के साथ पृथ्वीराज चौहान लगी | मानुषी फिल्म में अक्षय के साथ लीड किरदार निभाकर बॉलीवुड में अपना डेब्यू करने जा रही हैं |

मानुषी छिल्लर को प्राप्त अवार्ड:-

  • मानुषी ने भारत में होने वाली प्रतियोगिता टॉप मॉडल पीपल चॉइस में सेमीफाइनलिस्ट रहते हुए ‘ब्यूटी विथ अ परपज’ में सह विजेता रही | इन्होने करीबन 20 गांव की महिलाओं को मासिक रक्त श्राव के बारे में जागरूक किया |
  • 25 जून 2017 में मानुषी छिल्लर ने फेमिना मिस इंडिया की प्रतियोगिता में हिस्सा लेते हुए “मिस फोटोजेनिक” का ताज अपने नाम किया | इसके साथ ही अभी 18 नवम्बर को विश्व सुंदरी का ख़िताब जीतकर पूरे विश्व में भारत का परचम लहराया |

मानुषी से मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता के दौरान पूछा गया सवाल:-

  • सवाल: मानुषी से मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता के दौरान पूछा गया कि संसार में किस प्रोफेशन को सबसे ज्यादा वेतन दिया जाना चाहिए और क्यों?
  • जवाब: मानुषी ने अपने जवाब से पूरी दुनिया को आश्चयचकित कर दिया, इन्होने कहा कि “मैं अपनी माँ के ज्यादा करीब रही हूँ, मुझे लगता है सबसे ज्यादा सम्मान माँ को ही मिलना चाहिए, लेकिन अगर वेतन की बात करें तो इसे मैं कैश से नहीं बल्कि मिलने वाले सम्मान और प्यार से जोड़ती हूँ | मेरी माँ ही मेरे लिए प्रेरणा रही है. मुझे लगता है दुनिया की सभी मातायें अपने बच्चों के लिए बहुत त्याग करती हैं, इसलिए अगर किसी भी प्रोफेशन को अधिकतम वेतन, प्यार और सम्मान मिलना हो तो वो माँ होनी चाहिए |”

T20 World Cup: जानें इस विश्व कप में किसने बनाए सबसे ज्यादा रन, किसने लगाए सबसे ज्यादा छक्के

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T20 World Cup:

ICC T20 World Cup का अंत हो चुका है | फाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने न्यूजीलैंड को हराकर ट्रॉफी अपने नाम की | इस टूर्नामेंट में पाकिस्तान के बाबर आजम और इंग्लैंड के जोस बटलर ने बल्ले से शानदार प्रदर्शन किया | वहीं, गेंदबाजी में श्रीलंका के वानिंदु हसारंगा और एडम जाम्पा का दबदबा रहा | आइये जानते हैं इस टूर्नामेंट के टॉप-10 सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज, सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले बल्लेबाजों, और विकेटटेकर्स के बारे में |

सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज:- T20 World Cup 2021 Most Runs

इस विश्व कप में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों में बाबर आजम और मोहम्मद रिजवान का नाम सबसे ऊपर है | इसके बाद इंग्लैंड के जोस बटलर का नाम है | पाकिस्तान के बल्लेबाजों ने इस विश्व कप में शानदार बल्लेबाजी की है | टॉप 11 में भारत के केएल राहुल हैं |

POSखिलाड़ीमैचINNSरनऔसतस्ट्राइक रेट4S6S
1Babar Azam (PAK)6630360.60126.25285
2David Warner (AUS)7728948.17146.703210
3Mohammad Rizwan (PAK)6628170.25127.732312
4Jos Buttler (ENG)6626989.67151.122213
5Charith Asalanka (SL)6623146.20147.13239
6David Wiese (Namibia)8822745.40127.531311
7Pathum Nissanka (SL)8822127.62117.55195
8Kane Williamson (NZ)7721643.20115.51205
9Daryl Mitchell (NZ)7720834.67140.541510
10Martin Guptill (NZ)7720829.71120.93218

सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज:- T20 World Cup 2021 Most Wickets

POSखिलाड़ी मैच OVERSBALLSविकेटAVGरन दिए4-FERS5-FERS
1Wanindu Hasaranga (SL)830.0180169.75156
2Adam Zampa (AUS)727.01621312.081571
3Trent Boult (NZ)727.41661313.31173
4Shakib Al Hasan (BAN)622.01321111.181231
5Josh Hazlewood (AUS)724.01441115.911751
6Anrich Nortje (SA)519.2116911.56104
7Shadab Khan (PAK)623.0138915.331381
8Adil Rashid (ENG)622.2134916.221461
9Dwaine Pretorius (SA)514.488911.22101
10Josh Davey (Scotland)517.3105913.671231

विश्व कप में सर्वश्रेष्ठ स्कोर:- T20 World Cup

इस विश्व कप में सिर्फ एक शतक लगा है | जोस बटलर ने यह शतक श्रीलंका के खिलाफ लगाया था | यही इस विश्व कप का सर्वश्रेष्ठ स्कोर भी है | बटलर ने 101 नाबाद रन की पारी खेली थी | दूसरा सर्वश्रेष्ठ स्कोर 94 का है, जो दक्षिण अफ्रीका के वान डर डुसेन ने इंग्लैंड के खिलाफ बनाया था |

खिलाड़ीरनगेंद खेलींखिलाफ
जोस बटलर (ENG)101*67श्रीलंका
वान डर डुसेन (SA)94*60इंग्लैंड
मार्टिन गुप्टिल (NZ)9356स्कॉटलैंड
डेविड वार्नर (AUS)89*56वेस्टइंडीज
केन विलियमसन (NZ)8548ऑस्ट्रेलिया
शिमरॉन हेटमायर (WI)81*54श्रीलंका
चरिथ असालंका (SL)80*49बांग्लादेश
मोहम्मद रिजवान (PAK)79*55भारत
मोहम्मद रिजवान (PAK)79*50नामीबिया
रोहित शर्मा (IND)7447अफगानिस्तान
जतिंदर सिंह (OMAN)73*42पापुआ न्यू गिनी

विश्व कप में सबसे ज्यादा छक्के:-

इंग्लैंड के जोस बटलर ने विश्व कप में सबसे ज्यादा छक्के लगाने का रिकॉर्ड अपने नाम रखा | उन्होंने टूर्नामेंट में कुल 13 छक्के लगाए | दूसरे नंबर पर 12 छक्कों के साथ मोहम्मद रिजवान और तीसरे नंबर पर 11 छक्कों के साथ नामीबिया के डेविड वीज हैं |

खिलाड़ीमैच4s6s
जोस बटलर (ENG)62213
मोहम्मद रिजवान (PAK)62312
डेविड वीज (NAM)81311
डेरिल मिचेल (NZ)71510
डेविड वार्नर (AUS)73210
एडेन मार्कराम (SA)599
चरिथ असालंका (SL)6239
शोएब मलिक (PAK)648
मिचेल मार्श (AUS)6178
नजीबुल्लाह जादरान (AFG)5158
मार्टिन गुप्टिल (NZ)7218

विश्व कप में सबसे तेज गेंद:-

इस विश्व कप में सबसे तेज गेंद फेंकने का रिकॉर्ड पाकिस्तान के हरीस रऊफ के नाम है | उन्होंने 153 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद फेंकी है | हरीस रऊफ ने भारत समेत कई मैचों में शानदार गेंदबाजी भी की थी | हालांकि, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल मैच में उन्होंने अच्छी गेंदबाजी नहीं की थी | इसका खामियाजा टीम को भुगतना पड़ा था |

  • हारिस रऊफ (पाकिस्तान) और एनरिक नॉर्टजे (दक्षिण अफ्रीका): 153 किमी/घंटा
  • शाहीन अफरीदी (पाकिस्तान): 151 किमी/घंटा
  • दुष्मंत चमीरा (श्रीलंका): 150 किमी/घंटा

बाबासाहेब पुरंदरे का जीवन परिचय: जानें कौन थे बाबासाहेब पुरंदरे?

बाबासाहेब पुरंदरे:-

भारत के प्रसिद्ध इतिहासकार-लेखक और पद्म विभूषण पुरस्कार से सम्मानित बलवंत मोरेश्वर पुरंदरे यानी बाबासाहेब पुरंदरे का सोमवार तड़के पुणे के दीनानाथ मंगेशकर मेमोरियल अस्पताल में निधन हो गया, वे 99 साल के थे | वे पुणे के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे | पुरंदरे को महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार से भी नवाजा गया था | उन्होंने आज सुबह 05:07 बजे अंतिम सांस ली। अस्पताल ने कहा है कि उन्हें निमोनिया भी हुआ था | उनके पार्थिव शरीर को पार्वती स्थित उनके आवास पर कुछ देर रखने के बाद पुणे स्थित वैकुंठ धाम ले जाया गया है | कुछ देर में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा | महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे उन्हें श्रध्दांजलि देने उनके आवास पर पहुंचे हैं |

बताया गया था कि बाबा पुरंदरे अपने घर में बाथरूम में गिर गए थे | इसके बाद उन्हें अस्पताल लाया गया था | उनके निधन की खबरों के बाद देशभर में उनके चाहने वालों ने शोक व्यक्त किया है | महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने बाबासाहेब के लिए राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की घोषणा की है | वहीं, पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के साथ भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी बाबासाहेब के निधन पर दुख जताया |

कौन थे बाबासाहेब पुरंदरे:-

बाबा साहब का जन्म 29 जुलाई 1922 को हुआ था | उन्हें महाराष्ट्र में शिवशहर के नाम से जाना जाता है | ऐसा माना जाता है कि बाबासाहेब ने महान नाटक जाणता राजा (जनता का राजा) के माध्यम से छत्रपति शिवाजी महाराज के इतिहास को घर-घर पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी | यह महानाट्य न केवल महाराष्ट्र में बल्कि आंध्र प्रदेश, गोवा और देश के अन्य हिस्सों में भी प्रसिद्ध हुआ |

बाबासाहेब पुरंदरे ने छत्रपति शिवाजी महाराज पर कई किताबें लिखी हैं और अपना जीवन इतिहास और शोध के लिए समर्पित कर दिया था | उन्हें 2019 में भारत के दूसरे सबसे बड़े नागरिक पुरस्कार पद्म विभूषण और 2015 में महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया था | उन्होंने न केवल शिवराय (छत्रपति) का इतिहास लिखा, बल्कि पेशवाओं के इतिहास को भी दुनिया के सामने रखा |

प्रधानमंत्री मोदी-गृह मंत्री शाह ने शोक व्यक्त किया :-

प्रधानमंत्री मोदी ने पुरंदरे के साथ अपनी एक तस्वीर ट्वीट करते हुए कहा, ‘सुनकर बहुत दुख हुआ | शिवशहर बाबासाहेब पुरंदरे का निधन इतिहास और संस्कृति की दुनिया में एक बड़ा शून्य छोड़ गया है | उन्हीं की बदौलत आने वाली पीढ़ियां छत्रपति शिवाजी महाराज से और जुड़ेंगी | उनके अन्य कार्यों को भी याद किया जाएगा |’ बाबासाहेब के निधन पर CM उद्धव ठाकरे के ऑफिस ने लिखा है,’मुख्यमंत्री उद्धव बालासाहेब ठाकरे ने शिवशहर बाबासाहेब पुरंदरे का राजकीय अंतिम संस्कार से अंतिम संस्कार करने के निर्देश दिया है |”

उधर गृह मंत्री अमित शाह ने बाबासाहेब के साथ अपनी फोटो शेयर कर कहा, “कुछ वर्ष पूर्व बाबासाहेब पुरंदरे जी से भेंट कर एक लम्बी चर्चा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। उनकी ऊर्जा और विचार सचमुच प्रेरणीय थे। उनका निधन एक युग का अंत है। उनके परिजनों व असंख्य प्रशंसकों के प्रति संवदेनाएँ व्यक्त करता हूँ। प्रभु उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दें। ॐ शांति।”

बिरसा मुंडा कौन थे? जिनकी जयंती ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के तौर पर मनाई जाएगी

बिरसा मुंडा का इतिहास, Birsa Munda Jayanti 2021:-

इस वर्ष 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को “जनजातीय गौरव दिवस” के रूप में मनाया जाएगा | यह दिवस जनजातीय नायकों को और उनके योगदान को याद करने का बेहद ही अनूठा प्रयास है | जनजातीय मामलों के केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने बताया कि मंत्रालय के प्रस्ताव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज हुई कैबिनेट की बैठक में पारित कर दिया गया |

उन्होंने बताया कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समुदाय का उल्लेखनीय योगदान रहा है | आगामी 15 से 22 नवंबर तक “आजादी के अमृत महोत्सव” के तहत पूरे देश में जनजातीय महोत्सव मनाया जाएगा | इसके तहत जनजातीय समुदाय के स्वतंत्रता सेनानियों के कृतित्व, उनकी कला और संस्कृति पर कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 नवंबर को भोपाल में “जनजातीय गौरव दिवस” पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे |

देश इस समय आजादी के 75 साल का महोत्सव मना रहा है और इस अवसर पर यह निर्णय जनजातीय समुदाय के लिए भी गौरव की बात है | 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने के निर्णय के लिए पूरे जनजातीय समुदाय की ओर से प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त करते हैं |

बिरसा मुंडा कौन थे:- बिरसा मुंडा का इतिहास

बिरसा मुंडा का इतिहास- आदिवासियों के महानायक बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को झारखंड के आदिवासी दम्पति सुगना और करमी के घर हुआ था | भारतीय इतिहास में बिरसा मुंडा एक ऐसे नायक थे, जिन्होंने भारत के झारखंड में अपने क्रांतिकारी चिंतन से उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में आदिवासी समाज की दशा और दिशा बदलकर नवीन सामाजिक और राजनीतिक युग का सूत्रपात किया | बिरसा मुंडा ने साहस की स्याही से पुरुषार्थ के पृष्ठों पर शौर्य की शब्दावली रची | उन्होंने हिन्दू धर्म और ईसाई धर्म का बारीकी से अध्ययन किया तथा इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि आदिवासी समाज मिशनरियों से तो भ्रमित है ही हिन्दू धर्म को भी ठीक से न तो समझ पा रहा है, न ग्रहण कर पा रहा है |

बिरसा मुंडा ने महसूस किया कि आचरण के धरातल पर आदिवासी समाज अंधविश्वासों की आंधियों में तिनके-सा उड़ रहा है तथा आस्था के मामले में भटका हुआ है | उन्होंने यह भी अनुभव किया कि सामाजिक कुरीतियों के कोहरे ने आदिवासी समाज को ज्ञान के प्रकाश से वंचित कर दिया है | धर्म के बिंदु पर आदिवासी कभी मिशनरियों के प्रलोभन में आ जाते हैं, तो कभी ढकोसलों को ही ईश्वर मान लेते हैं |

भारतीय जमींदारों और जागीरदारों तथा ब्रिटिश शासकों के शोषण की भट्टी में आदिवासी समाज झुलस रहा था | बिरसा मुंडा ने आदिवासियों को शोषण की नाटकीय यातना से मुक्ति दिलाने के लिए उन्हें तीन स्तरों पर संगठित करना आवश्यक समझा |

  • पहला तो सामाजिक स्तर पर ताकि आदिवासी-समाज अंधविश्वासों और ढकोसलों के चंगुल से छूट कर पाखंड के पिंजरे से बाहर आ सके | इसके लिए उन्होंने ने आदिवासियों को स्वच्छता का संस्कार सिखाया। शिक्षा का महत्व समझाया | सहयोग और सरकार का रास्ता दिखाया।सामाजिक स्तर पर आदिवासियों के इस जागरण से जमींदार-जागीरदार और तत्कालीन ब्रिटिश शासन तो बौखलाया ही, पाखंडी झाड़-फूंक करने वालों की दुकानदारी भी ठप हो गई। यह सब बिरसा मुंडा के खिलाफ हो गए | उन्होंने बिरसा को साजिश रचकर फंसाने की काली करतूतें प्रारंभ की | यह तो था सामाजिक स्तर पर बिरसा का प्रभाव | काले कानूनों को चुनौती देकर बर्बर ब्रिटिश साम्राज्य को सांसत में डाल दिया |
  • दूसरा था आर्थिक स्तर पर सुधार ताकि आदिवासी समाज को जमींदारों और जागीरदारों क आर्थिक शोषण से मुक्त किया जा सके | बिरसा मुंडा ने जब सामाजिक स्तर पर आदिवासी समाज में चेतना पैदा कर दी तो आर्थिक स्तर पर सारे आदिवासी शोषण के विरुद्ध स्वयं ही संगठित होने लगे। बिरसा मुंडा ने उनके नेतृत्व की कमान संभाली | आदिवासियों ने ‘बेगारी प्रथा‘ के विरुद्ध जबर्दस्त आंदोलन किया | परिणामस्वरूप जमींदारों और जागीरदारों के घरों तथा खेतों और वन की भूमि पर कार्य रूक गया |
  • तीसरा था राजनीतिक स्तर पर आदिवासियों को संगठित करना | चूंकि उन्होंने सामाजिक और आर्थिक स्तर पर आदिवासियों में चेतना की चिंगारी सुलगा दी थी, अतः राजनीतिक स्तर पर इसे आग बनने में देर नहीं लगी | आदिवासी अपने राजनीतिक अधिकारों के प्रति सजग हुए |

बिरसा मुंडा सही मायने में पराक्रम और सामाजिक जागरण के धरातल पर तत्कालीन युग के एकलव्य और स्वामी विवेकानंद थे | बिरसा मुंडा की गणना महान देशभक्तों में की जाती है | ब्रिटिश हुकूमत ने इसे खतरे का संकेत समझकर बिरसा मुंडा को गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया। वहां अंग्रेजों ने उन्हें धीमा जहर दिया था | जिस कारण वे 9 जून 1900 को शहीद हो गए |

Dev Uthani Ekadashi 2021: देवउठनी एकादशी व्रत पर क्या करें क्या न करें ?

देवउठनी एकादशी 2021 Dev Uthani Ekadashi:-

देवउठनी एकादशी 2021 हिंदू धर्म में सबसे शुभ और पुण्यदायी मानी जाने वाली एकादशी, कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष को मनाई जाती है | यह देवउठनी एकादशी 14 नवंबर, रविवार को है, जिसे हरिप्रबोधिनी और देवोत्थान एकादशी के नाम से भी जाना जाता है | पौराणिक मान्यता के अनुसार आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी के बीच श्रीविष्णु क्षीरसागर में शयन करते हैं और फिर भादों शुक्ल एकादशी को करवट बदलते हैं |  पुण्य की वृद्धि और धर्म-कर्म में प्रवृति कराने वाले श्रीविष्णु कार्तिक शुक्ल एकादशी को निद्रा से जागते हैं |

इसी कारण से सभी शास्त्रों इस एकादशी का फल अमोघ पुण्यफलदाई बताया गया है | देवउठनी एकादशी दिवाली के बाद आती है | इस एकादशी पर भगवान विष्णु निद्रा के बाद उठते हैं इसलिए इसे देवोत्थान एकादशी कहा जाता है | मान्यता है कि भगवान विष्णु चार महीने के लिए क्षीर सागर में निद्रा करने के कारण चातुर्मास में विवाह और मांगलिक कार्य थम जाते हैं | फिर देवोत्थान एकादशी पर भगवान के जागने के बाद शादी- विवाह जैसे सभी मांगलिक कार्य आरम्भ हो जाते हैं | इसके अलावा इस दिन भगवान शालिग्राम और तुलसी विवाह का धार्मिक अनुष्ठान भी किया जाता है |

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार श्रीहरि विष्णु इसी दिन राजा बलि के राज्य से चातुर्मास का विश्राम पूरा करके बैकुंठ लौटे थे, इस एकादशी को कई नामों से जाना जाता है जिनमें देवोत्थान एकादशी, देवउठनी ग्यारस, प्रबोधिनी एकादशी प्रमुख हैं | इस साल देवउठनी एकादशी 14 नवंबर, रविवार को है | इस दिन से सभी मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं | इस एकादशी तिथि को तुलसी विवाह किया जाता है |

देवउठनी एकादशी 2021 व्रत में क्या न करें :-

  • एकादशी पर किसी भी पेड़-पौधों की पत्तियों को नहीं तोड़ना चाहिए |
  • एकादशी वाले दिन पर बाल और नाखून नहीं कटवाने चाहिए |
  • एकादशी वाले दिन पर संयम और सरल जीवन जीने का प्रयास करना चाहिए | इस दिन कम से कम बोलने की किसी कोशिश करनी चाहिए और भूल से भी किसी को कड़वी बातें नहीं बोलनी चाहिए |
  • हिंदू शास्त्रों में एकादशी के दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए |
  • एकादशी वाले दिन पर किसी अन्य के द्वारा दिया गया भोजन नहीं करना चाहिए |
  • एकादशी पर मन में किसी के प्रति विकार नहीं उत्पन्न करना चाहिए |
  • इस तिथि पर गोभी, पालक, शलजम आदि का सेवन न करें |
  • देवउठनी एकादशी का व्रत रखने वाले व्यक्ति को बिस्तर पर नहीं सोना चाहिए |

देवउठनी एकादशी व्रत में क्या करें?

  • देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने दीपक अवश्य जलाना चाहिए |
  • देवउठनी एकादशी के दिन आपको सूर्योदय से पहले उठ जाना चाहिए |
  • देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के नाम का कीर्तन भी करना चाहिए |  
  • देवउठनी एकादशी के दिन निर्जल व्रत रखना चाहिए |
  • देवउठनी एकादशी के दिन किसी गरीब और गाय को भोजन अवश्य कराना चाहिए |

Dev Uthani Ekadashi 2021: आज है देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्‍व

Dev Uthani Ekadashi 2021:- देवउठनी एकादशी 2021 का शुभ मुहूर्त

Dev Uthani Ekadashi 2021: हिंदू धर्म में सबसे शुभ और पुण्यदायी मानी जाने वाली एकादशी, कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष को मनाई जाती है | यह देवउठनी एकादशी 14 नवंबर, रविवार को है, जिसे हरिप्रबोधिनी और देवोत्थान एकादशी के नाम से भी जाना जाता है | पौराणिक मान्यता के अनुसार आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी के बीच श्रीविष्णु क्षीरसागर में शयन करते हैं और फिर भादों शुक्ल एकादशी को करवट बदलते हैं |  पुण्य की वृद्धि और धर्म-कर्म में प्रवृति कराने वाले श्रीविष्णु कार्तिक शुक्ल एकादशी को निद्रा से जागते हैं |

इसी कारण से सभी शास्त्रों इस एकादशी का फल अमोघ पुण्यफलदाई बताया गया है | देवउठनी एकादशी दिवाली के बाद आती है | इस एकादशी पर भगवान विष्णु निद्रा के बाद उठते हैं इसलिए इसे देवोत्थान एकादशी कहा जाता है | मान्यता है कि भगवान विष्णु चार महीने के लिए क्षीर सागर में निद्रा करने के कारण चातुर्मास में विवाह और मांगलिक कार्य थम जाते हैं | फिर देवोत्थान एकादशी पर भगवान के जागने के बाद शादी- विवाह जैसे सभी मांगलिक कार्य आरम्भ हो जाते हैं | इसके अलावा इस दिन भगवान शालिग्राम और तुलसी विवाह का धार्मिक अनुष्ठान भी किया जाता है |

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार श्रीहरि विष्णु इसी दिन राजा बलि के राज्य से चातुर्मास का विश्राम पूरा करके बैकुंठ लौटे थे, इस एकादशी को कई नामों से जाना जाता है जिनमें देवोत्थान एकादशी, देवउठनी ग्यारस, प्रबोधिनी एकादशी प्रमुख हैं | इस साल देवउठनी एकादशी 14 नवंबर, रविवार को है | इस दिन से सभी मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं | इस एकादशी तिथि को तुलसी विवाह किया जाता है |

देवउठनी एकादशी 2021 का शुभ समय:- देवउठनी एकादशी 2021 का शुभ मुहूर्त

ग्रेगोरियन चंद्र कैलेंडर के अनुसार, देवउठनी एकादशी बुधवार, 14 नवंबर को पड़ रही है।

एकादशी तिथि शुरू होती है: 14 नवंबर, 2021 सुबह 05 बजकर 48 मिनट से

एकादशी तिथि समाप्त: 15 नवंबर, 2021 को सुबह 06 बजकर 39 मिनट तक

देवउठनी एकादशी 2021 का शुभ मुहूर्त

देवउठनी एकादशी का महत्व:-

प्रबोधिनी एकादशी को पापमुक्त एकादशी के रूप में भी जाना जाता है | धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राजसूय यज्ञ करने से भक्तों को जिस पुण्य की प्राप्ति होती है, उससे भी अधिक फल इस दिन व्रत करने पर मिलता है | भक्त ऐसा मानते हैं कि देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा-अराधना करने से मोक्ष को प्राप्त करते हैं और मृत्युोपरांत विष्णु लोक की प्राप्ति होती है |

कैसे करें एकादशी की पूजा:

  • इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है | इस दिन को विष्णु को जगाने के लिए कहा जाता है |
  • इस दिन, भक्त सुबह जल्दी उठते हैं, नए या साफ कपड़े पहनते हैं | फिर, भगवान विष्णु का व्रत मनाया जाता है |
  • जब घर के आंगन में विष्णु के पैर बनाए जाते हैं |
  • जब ओखली में गेरू से पेंटिंग बनाई जाती है और आटा को फल, मिठाई, अनुभवी फल और गन्ना लगाकर कवर किया जाता है |
  • दीपों को रात में घर के बाहर जलाया जाता है और जहां इसकी पूजा की जाती है |

तुलसी विवाह का है विधान:- देवउठनी एकादशी 2021 का शुभ मुहूर्त

इस दिन कई स्थानों पर शालिग्राम तुलसी विवाह का भी प्रावधान है | बता दें कि शालिग्राम भगवान विष्णु का ही एक स्वरूप है | मान्यता है कि इस बात का जिक्र मिलता है कि जलंधर नाम का एक असुर था | उसकी पत्नी का नाम वृंदा था जो बेहद पवित्र व सती थी | उनके सतीत्व को भंग किये बगैर उस राक्षस को हरा पाना नामुमकिन था | ऐसे में भगवान विष्णु ने छलावा करके वृंदा का सतीत्व भंग कर दिया और राक्षस का संहार किया |

इस धोखे से कुपित होकर वृंदा ने श्री नारायण को श्राप दिया, जिसके प्रभाव से वो शिला में परिवर्तित हो गए | इस कारण उन्हें शालिग्राम कहा जाता है | वहीं, वृंदा भी जलंधर के समीप ही सती हो गईं | अगले जन्म में तुलसी रूप में वृंदा ने पुनः जन्म लिया | भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दिया कि बगैर तुलसी दल के वो किसी भी प्रसाद को ग्रहण नहीं करेंगे |

पौराणिक कथा के अनुसार भगवान विष्णु ने कहा कि कालांतर में शालिग्राम रूप से तुलसी का विवाह होगा | देवताओं ने वृंदा की मर्यादा और पवित्रता को बनाए रखने के लिए भगवान विष्णु के शालिग्राम रूप का विवाह तुलसी से कराया | इसलिए प्रत्येक वर्ष कार्तिक शुक्ल एकादशी तिथि के दिन तुलसी विवाह कराया जाता है |

कैसे करें तुलसी विवाह:

  • तुलसी जी का विवाह कर रहे हैं तो पूजा के समय मां तुलसी को सुहाग का सामान और लाल चुनरी जरूर चढ़ाएं |
  • गमले में शालिग्गराम को साथ रखें और तिल चढ़ाएं |
  • तुलसी और शालिग्राम को दूध में भीगी हल्दी का तिलक लगाएं |
  • पूजा के बाद किसी भी चीज के साथ 11 बार तुलसी जी की परिक्रमा करें |
  • मिठाई और प्रसाद का भोग लगाएं। मुख्य आहार के साथ ग्रहण और वितरण करें |
  • पूजा खत्म होने पर शाम को भगवान विष्णु से जागने का आह्वान करें |