Police Commissioner System क्या है? जानिए पुलिस कमिश्नर सिस्टम से जुडी हुई पूरी जानकारी की

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Police Commissioner System
Police Commissioner System Kya hai Hindi

क्या आप भी जानना चाहते हैं की Police Commissioner System क्या है? और पुलिस कमिश्नर सिस्टम कैसे काम करेगा तो आज इस लेख में हम आपको इसके बारे में पूरी जानकारी देने वाले हैं।

मध्यप्रदेश के भोपाल-इंदौर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू हो गया है। इसके बाद लोगों के मन में सवाल लाजिमी है कि आखिर इस सिस्टम से क्या फायदा होने वाला है। कुछ अनुमतियों के लिए अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सिर्फ पुलिस की परमिशन से ही काम चल जाएगा।

यानी प्रशासन के कुछ पावर पुलिस के पास भी होंगे। इसके अलावा इस Police Commissioner System में और क्या-क्या बदला है? कैसे काम करता है? मध्यप्रदेश के दो पूर्व DGP से इस सिस्टम के बारे में सबकुछ।

Police Commissioner System क्या है?

Police Commissioner System को आसान भाषा में समझें तो फिलहाल पुलिस अधिकारी कोई भी फैसला लेने के लिए स्वतंत्र नहीं होते। वो आकस्मिक परिस्थितियों में कलेक्टर (DM), संभागीय आयुक्त या शासन के दिए निर्देश पर ही काम करते हैं। पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू होने के बाद अब जिला अधिकारी और एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के कुछ अधिकार पुलिस अधिकारियों को भी मिल गए हैं। शहर में धरना प्रदर्शन की अनुमति देना, दंगे के दौरान लाठी चार्ज या कितना बल प्रयोग हो, ये निर्णय सीधे पुलिस ही करेगी।

आजादी से पहले अंग्रेजों के दौर में कमिश्नर प्रणाली लागू थी। इसे आजादी के बाद भारतीय पुलिस ने अपनाया। इस सिस्टम में पुलिस कमिश्नर का सर्वोच्च पद होता है। अंग्रेजों के जमाने में ये सिस्टम कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में हुआ करता था। इसमें ज्यूडिशियल पावर कमिश्नर के पास होता है। यह व्यवस्था पुलिस प्रणाली अधिनियम, 1861 पर आधारित है।

police commissioner system in hindi

यह जिले का सर्वोच्च पुलिस अफसर होगा। इसे अब हम पुलिस कप्तान भी कह सकते हैं, जो पहले भोपाल-इंदौर जैसे शहरों में IG हुआ करते थे। यह एकमात्र पद होगा।

2 ACP : अतिरिक्त पुलिस आयुक्त दो होंगे। ये सीधे पुलिस कमिश्नर को रिपोर्ट करेंगे। इनकी जिम्मेदारियां अलग-अलग होंगी। ये DIG रेंज के अफसर होंगे। एक ACP लॉ एंड ऑर्डर के साथ सिस्टम देखेंगे तो दूसरे क्राइम और हेडक्वार्टर का जिम्मा।

8 DCP : शहर में आठ DCP यानी आठ SP हो जाएंगे। अभी ये तीन हुआ करते थे लेकिन डायरेक्ट फील्ड में दो ही रहते थे। आठ SP होने पर यातायात, क्राइम, हेडक्वार्टर, इन्फॉरमेशन, सिक्योरिटी आदि की जिम्मेदारी अलग-अलग DCP के पास होगी।

12 Add. DCP : शहर में एडीशनल SP लेवल के 12 अफसरों की पोस्टिंग एडीशनल DCP के रूप में हो जाएगी। ये अलग-अलग मामलों को लेकर DCP को रिपोर्ट करेंगे। इनसे यातायात, क्राइम, हेडक्वार्टर संबंधी काम, आम लोगों के लिए जागरुकता कार्यक्रम, सिक्योरिटी, ST SC महिलाओं से जुड़े अपराध देखने होंगे।

30 सहायक पुलिस आयुक्त : CSP लेवल के 29 सहायक पुलिस आयुक्त होंगे। ये एडिशनल एसपी को रिपोर्ट करेंगे। इनमें से 29 फील्ड ऑफिसर होंगे जबकि 1 रेडियो का जिम्मा संभालेंगे।

Police Commissioner System से जनता को क्या फायदा होगा?

  • वर्तमान में ट्रैफिक सिस्टम के लिए ट्रैफिक पुलिस को नगर निगम, रोड कंस्ट्रक्शन एजेंसियों के भरोसे रहना पड़ता था। लैटर कम्युनिकेशन और परमिशन में वक्त लगता था। अब पुलिस का ट्रैफिक डिपार्टमेंट यह व्यवस्थाएं करेगा। इससे शहर का ट्रैफिक बेहतर होगा। वाहनों की स्पीड लिमिट भी पुलिस तय करेगी।
  • लोगों में खौफ पैदा करने वाले गुंडों, आदतन क्रिमिनल्स को पुलिस जिला बदर कर सकेगी। इससे लोगों को गुंडों के खौफ से मुक्ति मिलेगी।
  • वर्तमान शहर में दो SP थे, अब आठ होंगे। साथ ही, अन्य लेवल के अफसरों की संख्या बढ़ गई है। इसका फायदा शहर की चौकसी में होगा। इससे शहर में क्राइम भी कम होगा।

इससे ट्रैफिक में तो सुधार होगा ही। इसके साथ, आरोपियों पर कार्रवाई भी हो सकेगी। पहली चीज ट्रैफिक में भी सुधार आएगा। अभी इसके लिए डीएम पर निर्भर रहना होता है, लेकिन अब सीधे पुलिस डिसीजन ले पाएगी। SDM के पावर पुलिस के पास आ जाएंगे। इसमें माफिया में भी डर का माहौल पैदा होगा। उन्हें जेल में डालकर अपने हिसाब से निर्णय लिया जाएगा। लॉ एंड ऑर्डर में भी मौके पर फैसला लिया जाएगा।

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