गुजरात गंगा स्वरुप योजना 2020 की शुरुआत की गई

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गुजरात गंगा स्वरुप योजना 2020:-

गुजरात सरकार ने विधवाओं को पेंशन प्रदान करने के लिए गुजरात गंगा स्वरुप योजना 2020 (Gujrat Ganga Swarupa Yojana 2020) की शुरुआत की | राज्य सरकार ने पहले से चल रही विधवा सहायता योजना का नाम बदलकर गंगा स्वरूप बहनो ने सहायता योजना रखा है | यह विधवा पेंशन योजना पहल गुजरात सरकार की संवेदनशीलता और पारदर्शिता दिखाने का एक प्रयास है |

गुजरात गंगा स्वरुप योजना 2020 (Gujrat Ganga Swarupa Yojana 2020) में, प्रत्येक लाभार्थी को पेंशन के रूप में 1250 रुपये प्रति माह प्रदान किए जाएंगे | मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने केंद्र सरकार के राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) पोर्टल को लॉन्च किया है | यह नया पोर्टल राज्य के 33 जिलों में 3.70 लाख विधवाओं, बुजुर्गों और विकलांग महिलाओं को सीधे मासिक पेंशन के प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) की सुविधा प्रदान करेगा | प्रत्येक माह के पहले सप्ताह में विधवा लाभार्थियों के बैंक खातों में 1250 रुपये की पेंशन राशि जमा किए जाएंगे |

गुजरात गंगा स्वरुप योजना 2020 से जुडी मुख्य बातें:-

गुजरात गंगा स्वर्ण योजना 2020-21 के तहत राज्य सरकार 1250 रुपये प्रति माह की पेंशन राशि प्रदान करना शुरू कर दिया है | गुजरात मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने विधवा महिलाओं के खाते में पेंशन के DBT हस्तांतरण की सुविधा के लिए NSAP पोर्टल भी शुरू किया है | राशि एक साथ एक क्लिक के साथ लक्षित महिला समूह के कार्यालय खातों को सीधे हस्तांतरित की जाएगी | यह कार्यक्रम गुजरात सरकार के महिला और बाल विकास विभाग द्वारा राज्य में लागू किया गया है |

राज्य सरकार की पहले की “विधवा सहायता योजना” का नाम बदलकर “गंगा स्वरुप योजना” कर दिया गया था ताकि लाभार्थियों को सम्मान दिया जा सके | गुजरात सरकार ने अप्रैल 2019 से मासिक पेंशन राशि 1,000 रुपये से 1,250 रुपये बढ़ा दी थी | गंगा स्वरुप योजना हर महीने के 1 सप्ताह में जमा की गई राशि को सुनिश्चित करेगी |

गुजरात राज्य सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं के लिए उनकी वार्षिक आय पात्रता मानदंड को 47,000 रुपये से दोगुना से अधिक 1,20,000 रुपये कर दिया है | इसके अलावा, सरकार शहरी क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं के लिए उनकी वार्षिक आय पात्रता मानदंड को 68,000 रुपये से दोगुना से अधिक 1,50,000 रुपये कर दिया है | इससे लाभार्थियों की संख्या 1.64 लाख से 3.70 लाख हो गई |

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