विक्रम साराभाई का जीवन परिचय: जानें कौन थे भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक

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Vikram Sarabhai Biography in Hindi
Vikram Sarabhai Biography in Hindi

विक्रम साराभाई :- vikram sarabhai biography in hindi

आपने यह तो सुना ही होगा कि Sony LIV OTT Platform पर 4 फरवरी 2022 से रॉकेट ब्वॉयज (Rocket Boys) नामक web series के पहले season की streaming शुरू हो गयी है | Release होते ही web series की स्टोरी और इसके कलाकार चर्चा में हैं |

हों भी क्यों न जिसके जीवन पर आधारित है वो कोई आम लोग नहीं भारतीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के जनक डॉ. होमी जहांगीर भाभा और भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की संकल्पना करने वाले डॉ. विक्रम साराभाई की है |

लेकिन क्या आप जानते हैं आखिर कौन है विक्रम साराभाई? तो हम आपको बता दें कि विक्रम साराभाई एक ऐसा नाम है, जिसे भारतीय अंतरिक्ष के प्रत्येक कार्यक्रमों में जनक की उपाधि दी गई है | इनके जीवन के बारे में पूरी जानकारी आज हम आपको देने वाले हैं |

डॉ. विक्रम अंबालाल साराभाई भारत के प्रमुख वैज्ञानिक थे | इन्होंने 86 वैज्ञानिक शोध पत्र लिखे एवं 40 संस्थान खोले | इनको विज्ञान एवं अभियांत्रिकी के क्षेत्र में सन 1966 में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था | डॉ. विक्रम साराभाई के नाम को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम से अलग नहीं किया जा सकता | यह जगप्रसिद्ध है कि वह विक्रम साराभाई ही थे जिन्होंने अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भारत को अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर स्थान दिलाया | लेकिन इसके साथ-साथ उन्होंने अन्य क्षेत्रों जैसे वस्त्र, भेषज, आणविक ऊर्जा, इलेक्ट्रानिक्स और अन्य अनेक क्षेत्रों में भी बराबर का योगदान किया |

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बिंदु (Point)जानकारी (Information)
नाम (Name)विक्रम अंबालाल साराभाई
जन्म दिनांक (Date of Birth)12 अगस्त 1919
जन्म स्थान (Birth Place)अहमदाबाद, गुजरात
पिता का नाम (Father Name)अंबालाल साराभाई
माता का नाम (Mother Name)सरला साराभाई
पेशा (Profession)वैज्ञानिक
धर्म (Religion)जैन
मृत्यु (Death)30 दिसंबर 1971

डॉक्टर विक्रम साराभाई का जन्म एवं परिवार:- vikram sarabhai biography in hindi

भारत में एक महान वैज्ञानिक डॉक्टर विक्रम साराभाई ने अहमदाबाद की धरती पर जन्म लिया, वह तिथि सन 1919 में अगस्त महीने की 12 तारीख थी | डॉक्टर साराभाई किसी ऐसे वैसे गरीब परिवार से नहीं बल्कि अहमदाबाद के एक सबसे बड़े उद्योगपति परिवार के सुपुत्र थे | उनके पिता अंबालाल साराभाई कई उद्योगों के मालिक थे | वे भारतीय स्वतंत्रता में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे चुके थे, साथ ही वह एक भारतीय वैज्ञानिक, भौतिक विज्ञानी और खगोल शास्त्र भी थे |

डॉ विक्रम साराभाई की माता श्रीमती सरला देवी ने मांटेसरी पद्धति की प्रक्रिया का पालन करते हुए निजी स्कूल बनाया | उनका उद्देश्य केवल बच्चों के लिए पूरे संभव विकास का था, क्योंकि वे सिर्फ किताबी ज्ञान ही नहीं बल्कि बच्चों को और कई प्रकार की शिक्षा देना चाहती थी | विक्रम अपने आठ भाई बहनों में से एक इकलौते ऐसे थे, जिन्होंने भारत को सम्माननीय और गर्व से भरा देश बनाने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया |

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डॉक्टर विक्रम साराभाई का शुरूआती जीवन एवं शिक्षा:-

बचपन से ही विज्ञान के प्रति उनका लगाव बहुत अधिक था, जिसने बाद में ऐसा रुप लिया कि वे भारत के महान वैज्ञानिक के रूप में उभर कर आए | विक्रम साराभाई ने अपनी शिक्षा भारत में ही रह कर नहीं बल्कि विदेशों में भी जाकर पूरी की | उन्होंने भारत में रहकर अपनी प्राथमिक एवं माध्यमिक परीक्षा उत्तीर्ण की, और फिर अपनी आगे की पढ़ाई यानि मैट्रिक्स की पढ़ाई के लिए कैंब्रिज विश्वविद्यालय के सेंट जॉन कॉलेज से जुड़ने के लिए इंग्लैंड पहुंच गए |

विज्ञान के प्रति उनका गहरा जुड़ाव होने की वजह से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वे सन 1947 में भारत लौट आए | जब वे भारत लौटे थे उस समय भारत अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हुआ था | डॉ विक्रम साराभाई भारत के स्वतंत्रता सेनानी रह चुके कुछ प्रसिद्ध हस्तियों से प्रेरित हुए और उनके साथ उन्होंने अपने जीवन में बहुत बड़े-बड़े काम किए, जिनमें से मुख्य कृष्णमूर्ति, मोतीलाल नेहरू, श्रीनिवास, शास्त्री जवाहरलाल नेहरू, सरोजिनी नायडू, मौलाना आजाद, सीवी रमन और महात्मा गांधी जी आदि थे | इसके बाद वे एक नवीन प्रवर्तक उद्योगपति और दूरदर्शी भी बने |

डॉक्टर विक्रम साराभाई का व्यक्तिगत जीवन:-

विक्रम साराभाई का विवाह 1942 में हुआ | उन्होंने एक शास्त्रीय नृत्यांगना मृणालिनी के साथ विवाह किया और उसे अपना जीवनसाथी बनाया | उन दोनों की शादी भारत के चेन्नई शहर में हुई | बाद में उनके दो बच्चे भी हुए, जिसमें से बेटी का नाम मालिका और उनके बेटा कार्तिकेय था |

बेटी ने अपने करियर में अभिनेत्री और प्रसिद्ध कार्यकर्ता के रूप में अपनी पहचान बनाई, वहीं उनका बेटा विज्ञान क्षेत्र में महारथ हासिल कर चुका था |  हालांकि उनकी पत्नी मृणालिनी के साथ उनका वैवाहिक जीवन लंबे समय तक नहीं चल पाया | बाद में डॉक्टर कमला चौधरी के साथ उनके प्रेम संबंध रहे |

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विक्रम साराभाई के कार्य:-

  • भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की स्थापना उनकी प्रमुख उपलब्धियों में से एक है | उन्होंने भारत जैसे विकासशील देश के लिए अंतरिक्ष कार्यक्रम के महत्व के बारे में सरकार को राज़ी किया | डॉ साराभाई विज्ञान में अधिक दिलचस्पी रखते थे और 1966 में सामुदायिक विज्ञान केंद्र की स्थापना अहमदाबाद में की | आज इस केंद्र को विक्रम साराभाई सामुदायिक विज्ञान केंद्र के नाम से जाना जाता है |
  • डॉ साराभाई ने भारतीय उपग्रहों के परिपालन के लिए परियोजना बनाई, जिसके परिणामस्वरूप प्रथम भारतीय उपग्रह, आर्यभट्ट रुसी कॉस्मोड्रोम से 1975 में कक्षा में स्थापित किया गया | उन्होंने कास्मिक किरणों के समय परिवर्तन पर भी अनुसंधान किये और बयाया कि “अवशिष्ट परिवर्तन विस्तृत और विश्वव्यापी है तथा यह सौर क्रियाकलापों के परिवर्तन से संबंधित है |”
  • भारत में उन्होंने अंतर-भूमंडलीय अंतरिक्ष, भू-चुम्बकत्व और सौर-भूमध्यरेखीय संबंध पर अध्ययन किया | डॉ. विक्रम साराभाई ने 86 वैज्ञानिक शोध पत्र भी लिखे. उन्होंने अनेक संस्थानों की स्थापना में सहयोग किया | देश में विज्ञान के क्षेत्र में उन्होंने हर संभव मदद की | अहमदाबाद में भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला की स्थापना में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई | इस संस्थान के लिए जब धन की आवश्यकता थी तो उन्होंने अपने परिवार और मित्रों को इस अनुसंधान संस्थान को धन देने के लिए राज़ी किया था |
  • 11 नवंबर 1947 को अहमदाबाद में विक्रम साराभाई ने भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला की नीवं रखी | उस समय उनकी उम्र केवल 28 वर्ष थी | भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला इस दिशा में उनका पहला क़दम था | साराभाई ही संस्थानों के निर्माता और संवर्धक थे | विक्रम साराभाई ने 1966 से 1971 तक भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला में कार्य किया |

डॉक्टर विक्रम साराभाई को इसरो का पिता क्यों कहा जाता हैं:-

नई सोच से उन्होंने भारतीय सरकार को इस बात का आश्वासन दिलाया कि भारत में अंतरिक्ष सेंटर होने से भारत के विकास को गति मिलेगी और हमारी आने वाली पीढ़ी अंतरिक्ष से जुड़ी बातों के बारे में आसानी से जान पाएगी जिसके लिए आवश्यक है कि भारत में एक स्पेस सेंटर खोला जाए | उनके विचारों से प्रभावित होकर भारतीय सरकार ने भारत में अंतरिक्ष सेंटर खोलने की अनुमति दी जिसकी वजह से डॉक्टर साराभाई को स्पेस सेंटर खोलने के लिए प्रेरणा मिली | स्पेस सेंटर की नीव रखने वाले डॉक्टर साराभाई को इसीलिए इसरो का पिता कहा जाता है |

विक्रम साराभाई के पुरस्कार:-

  • पद्मभूषण (1966)
  • शांतिस्वरूप भटनागर पुरस्कार (1962)
  • पद्म विभूषण, मरणोपरांत (1972)

डॉ. साराभाई द्वारा स्थापित संस्थान:-

  • भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (PRL), अहमदाबाद
  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट (IIM), अहमदाबाद
  • कम्यूनिटी साइंस सेंटर, अहमदाबाद
  • दर्पण अकाडेमी फ़ॉर परफ़ार्मिंग आर्ट्स, अहमदाबाद (अपनी पत्नी के साथ मिल कर)
  • विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र, तिरुवनंतपुरम
  • स्पेस अप्लीकेशन्स सेंटर, अहमदाबाद (यह संस्थान साराभाई द्वारा स्थापित छह संस्थानों/केंद्रों के विलय के बाद अस्तित्व में आया)
  • फ़ास्टर ब्रीडर टेस्ट रिएक्टर (FBTR), कल्पकम
  • वेरिएबल एनर्जी साइक्लोट्रॉन प्रॉजेक्ट, कोलकाता
  • इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड (ECIL), हैदराबाद
  • यूरेनियम कार्पोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड (UCIL),जादूगुडा, बिहार

डॉक्टर विक्रम साराभाई की मृत्यु:-

डॉ साराभाई ने अपने कार्यकाल में बहुत बड़े-बड़े काम किए अंत में रूचि रॉकेट के लॉन्च के बाद ठीक उसी दिन पहले थुम्बा रेलवे स्टेशन की आधारशिला उन्होंने रखी थी | उसके बाद 30 दिसंबर 1971 को मात्र 52 साल की उम्र में हार्ट अटैक की वजह से अचानक उनकी मृत्यु हो गई |

डॉक्टर विक्रम साराभाई से जुड़े रोचक तथ्य:-

  • इस महान वैज्ञानिक के सम्मान में तिरूवनंतपुरम में स्थापित थुम्बा इक्वेटोरियल रॉकेट लाँचिंग स्टेशन (Thumba Equatorial Rocket Launching Station) और सम्बध्द अंतरिक्ष संस्थाओं का नाम बदल कर विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केन्द्र (Vikram Sarabhai Space Centre) रख दिया गया |
  • उनके पिता अंबालाल साराभाई एक संपन्न उद्योगपति थे |
  • भारत में इंटरमीडिएट विज्ञान की परीक्षा उत्‍तीर्ण करने के बाद विक्रम साराभाई इंंग्‍लैंड चले गये और ‘केम्ब्रिज विश्वविद्यालय’ के सेंट जॉन कॉलेज में भर्ती हुए |
  • अहमदाबाद में ‘भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला’ की स्थापना में उन्होंने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी |
  • ‘भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन’ (Indian Space Research Organisation) की स्थापना विक्रम साराभाई की महान उपलब्धियों में एक थी |
  • इनको विज्ञान एवं अभियांत्रिकी के क्षेत्र में सन 1966 में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था |
  • विक्रम साराभाई को सन 1966 में पद्म भूषण एवम 1972 में पद्म विभूषण से नवाजा गया था |
  • Thiruvananthapuram के Thumba स्थित पहला rocket launching station Dr. Homi Jahangir Bhabha और साराभाई के सहायता से स्थापित किया गया था |
  • इनकी शादी एक प्रसिद्ध classical dancer मृणालिनी से हुआ और इनकी शादी में इनके कोई भी family member नहीं थे |

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