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समग्र पोर्टल : समग्र आई डी में ऑनलाइन नाम कैसे सुधारे?

Samagra ID में नाम सुधार कैसे करें: मध्य प्रदेश राज्य सरकार की किसी भी सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए परिवार के सभी सदस्यों को समग्र पोर्टल में पंजीकृत होना जरुरी होता है । या कह सकते हैं समग्र आईडी के माध्यम से ही आप सरकारी अनुदान प्राप्त कर सकते हैं ।

यदि आप मध्य प्रदेश के निवासी है तो समग्र आईडी से परिचित ही होंगे हमने पहले भी समग्र आईडी के बारे में अपने लेखों के माध्यम से आपको अवगत कराया है जैसे की अपने या परिवार की समग्र आईडी निकलना, समग्र आईडी ढूंढना, आधार, मोबाइल नंबर और नाम के माध्यम से समग्र आईडी पता करना आदि जिसकी जानकारी के लिए आप यहाँ क्लिक करें ।

हमने अधिकतर समग्र आई डी में पाया है कि समग्र आईडी में नाम, लिंग, उम्र, पिता, माता का नाम जैसी कई गलतियां हैं, कुछ गलतियां ऑपरेटर द्वारा की जाती हैं। कोई भी समग्र आईडी ऐसी नहीं होगी जिसमें गलतियाँ न हों और कभी-कभी हम उनकी गलतियों के कारण बहुत परेशानी का सामना कर सकते हैं।

आपको यह जानकर ख़ुशी होगी की अब ऑनलाइन ही नाम, जन्मतिथि, और लिंग में परिवर्तन किया जा सकता है जिसमे लगभग २ से ३ कार्य दिवसों में सुधार की प्रक्रिया पूर्ण हो जाती है ऑनलाइन नाम, जन्मतिथि, और लिंग में परिवर्तन करना बहुत ही आसान है जिसके बारे में हम यहाँ आपको बताने जा रहे हैं

आवश्यक दिशा निर्देश : समग्र आईडी में ऑनलाइन नाम सुधार हेतु:

  1. You would need an active Mobile No to register a request (अनुरोध पंजीकृत करने के लिए आपको एक सक्रिय मोबाइल नंबर की आवश्यकता होगी)
  2. When you submit the Request for Change please exercise due caution and diligence. (जब आप परिवर्तन के लिए अनुरोध करते हैं तो कृपया सावधानी बरतें और ध्यान से करें।)
  3. After your request is submitted you would receive an 6 digit PIN on the mobile No. This OTP is required to verify your identity. (आपका अनुरोध जमा होने के बाद आपको मोबाइल नंबर पर 6 अंकों का पिन प्राप्त होगा। इस ओटीपी के माध्यम से पहचान सत्यापित करने की आवश्यकता है।)

आवश्यक दस्तावेज

इन दस्तावेज़ों में से एक संलग्न करें | (Document size should be less than 100KB.)

  • कक्षा १०वी की मार्कशीट
  • आधार कार्ड
  • मतदाता पहचान पत्र
  • राशन कार्ड
  • पैनकार्ड
  • पासपोर्ट
  • ड्राइविंग लाइसेंस
  • Official introduction letter (शासकीय परिचय पत्र)
  • Identity card issued by public sector unit (सावजनिक क्षेत्र की ईकाई द्वारा जारी परिचय पत्र)
  • Certificate of disability issued by the Medical Board (मेडिकल बोर्ड द्वारा जारी निःशक्तता का प्रमाण पत्र)

समग्र आईडी में नाम सुधार कैसे करे :

समग्र आई डी  में नाम सुधार के लिए नीचे दिए गए चरणों का पालन करना पड़ेगा |

स्टेप 1: समग्र आईडी में सुधार करने के लिए सबसे पहले आप समग्र पोर्टल की वेबसाइट http://samagra.gov.in/ पर जाएं।

स्टेप 2: अब समग्र नागरिक सेवा अनुभाग में जाकर ‘नाम अपडेट करें‘ लिंक पर क्लिक करें।

स्टेप3: जिस सदस्य का नाम समग्र आईडी में सही किया जाना है, उसकी 9 अंकों की समग्र आईडी दर्ज करें।

स्टेप 4: अब सदस्य विवरण प्राप्त करें बटन पर क्लिक करें।

स्टेप 5:सदस्य विवरण प्राप्त करें बटन पर क्लिक करते ही दर्ज किए गए समग्र आईडी नंबर के अनुसार, विवरण आपकी स्क्रीन पर आ जाएगा।

स्टेप 6: नाम सुधार की प्रक्रिया के लिए, आपको अपने दस्तावेज़ों के अनुसार सही नाम दर्ज करना होगा।

स्टेप 7: संबंधित निर्देशों के अनुसार दस्तावेजों का प्रमाण भी अपलोड करना होगा।

स्टेप 8: अपलोड करने के बाद मोबाइल नंबर पर OTP प्राप्त होगा।

स्टेप 9: सत्यापन के बाद आपका अनुरोध भेजा जाएगा।

आपके अनुरोध को स्वीकार करने के बाद, दस्तावेजों के सत्यापन के बाद नाम सुधार की प्रक्रिया आमतौर पर अधिकारियों द्वारा दो से तीन कार्य दिवसों में पूरी की जाती है, जिसके बाद आप पूरी आईडी को चेक कर और प्रिंट ले सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

1. समग्र आईडी में सुधार कैसे करें?

आपको समग्र आईडी में सुधार करने के लिए आवश्यक दस्तावेजों की स्कैन कॉपी के साथ आपको नीचे दिए गए लिंक पर जाना होगा।
http://samagra.gov.in/Citizen/RFC/NameChangeRequest.aspx आपको वहां अपनी समग्र आईडी दर्ज करके अपना अनुरोध ऑनलाइन करना होगा।

समग्र आईडी में नाम अपडेट करने की प्रक्रिया क्या है?

आप घर बैठे समग्र में अपना नाम अपडेट या सही कर सकते हैं, इसके लिए आप http://samagra.gov.in/Citizen/RFC/NameChangeRequest.aspx आपको वहां अपनी समग्र आईडी दर्ज करके अपना अनुरोध ऑनलाइन करना होगा।

Sharda Mata Maihar – माँ शारदा माता, मैहर के बारे में जाने सब कुछ

माँ शारदा माता- मंदिर की खोज के बाद आल्हा ने इस मंदिर में 12 साल तक तपस्या कर देवी को प्रसन्न किया. भक्त की तपस्या से खुश होकर मां ने आल्हा को अमरता का वरदान दे दिया. मां शारदा के मंदिर प्रांगण में फूलमती माता का मंदिर आल्हा की कुल देवी का है. आस्था है कि हर दिन ब्रह्म मुहुर्त में खुद आल्हा द्वारा मां की पूजा-अर्चना की जाती है. 

मां के मंदिर की तलहटी में आज भी आल्हा देव के अवशेष हैं, उनकी तलवार और खड़ाऊ आम भक्तों के दर्शन के लिए रखी गई है. यहां आल्हा तालाब भी है, जिसे प्रशासन ने संरक्षित कर रखा है. सूचना बोर्ड में इस तालाब के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्त्व का वर्णन किया गया है, यहां आल्हा-उदल अखाड़ा भी है. 

देशभर में शारदीय नवरात्र की शुरुआत हो चुकी है . मां दुर्गा के 51 शक्तिपीठों में से एक मध्य प्रदेश के सतना जिले में भी स्थित है मैहर , मैहर में पहाड़ों पर बसे इस शक्तिपीठ में हर नवरात्रि के अवसर पर मेला लगता है, इस दौरान लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं. हर सुबह 4 बजे माता की आरती होती है इसमें लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं .आज हम आप को माँ शारदा माता मैहर (मैहर शक्तिपीठ) के इतिहास से जुडी जानकरी दे रहे हैं , अतः आप सभी से अनुरोध है कि आर्टिकल को पूरा पढ़े |

मैहर :

मैहर  मध्य प्रदेश की एक तहसील है । यह एक प्रसिद्ध  हिन्दू तीर्थ स्थल है। यह सतना जिले में है| मैहर में शारदा माँ का प्रसिद्ध मन्दिर है जो नैसर्गिक रूप से समृद्ध कैमूर तथा विंध्य की पर्वत श्रेणियों की गोद में अठखेलियां करती तमसा के तट पर त्रिकूट पर्वत की पर्वत मालाओं के मध्य 600 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। यह ऐतिहासिक मंदिर 108 शक्ति पीठो में से एक है। यह पीठ सतयुग के प्रमुख अवतार नृसिंह भगवान के नाम पर ‘नरसिंह पीठ’ के नाम से भी विख्यात है। ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर  आल्हखंड के नायक  आल्हा  व  दोनों भाई मां शारदा के अनन्य उपासक थे। पर्वत की तलहटी में आल्हा का तालाब व अखाड़ा आज भी विद्यमान है।

यहाँ प्रतिदिन हजारों दर्शनार्थी आते हैं किंतु वर्ष में दोनों नवरात्रो में यहां मेला लगता है जिसमें लाखों दर्शनार्थी मैहर आते हैं। मां शारदा के बगल में प्रतिष्ठापित नरसिंहदेव जी की पाषाण मूर्ति आज से लगभग 1500 वर्ष पूर्व की है। देवी शारदा का यह प्रसिद्ध शक्तिपीठ स्थल देश के लाखों भक्तों के आस्था का केंद्र है माता का यह मंदिर धार्मिक तथा ऐतिहासिक है। वर्तमान में यहां पर आर्थिक दृष्टि से सीमेंट की तीन फैक्ट्रियां कार्यरत हैं। के जे एस के पास इच्छापूर्ति मंदिर पर्यटकों का दर्शनीय स्थल है ।

मैहर में लगता है हर साल मेला :

मैहर में मां शारदा का मंदिर है, यहां हर साल शारदीय नवरात्रि और चैत्र नवरात्रि में मेला लगता है. देश-विदेश से मां के भक्त अपनी इच्छाएं लेकर मंदिर पहुंचते हैं. मां शारदा उन देवियों में से हैं, जिन्होंने कलयुग में भी अपने भक्त आल्हा की तपस्या से प्रसन्न होकर उसे अमरता का वरदान दिया था. माना जाता है कि नवरात्रि में आज भी देवी मां की पहली पूजा आल्हा देव ही करते हैं |

विंध्य की पर्वत श्रेणियों में बसा है माँ शारदा का मंदिर : माँ शारदा माता

आदि शक्ति मां शारदा देवी का मंदिर मैहर नगर के पास विंध्य पर्वत श्रेणियों के बीच त्रिकूट पर्वत पर स्थित है. मां भवानी के 51 शक्तिपीठों में से एक इस मंदिर में मान्यता है कि यहां मां शारदा की पहली पूजा आदि गुरु शंकराचार्य ने की थी. मैहर स्थित पर्वत का नाम प्राचीन धर्म ग्रंथों में भी मिलता है, इसका उल्लेख भारत के अन्य पर्वतों के साथ ही पुराणों में भी कई बार आया है. माता के इस मंदिर तक जाने के लिए भक्तों को 1063 सीढ़ियां चढ़कर जाना पड़ता है, हर दिन यहां हजारों श्रद्धालु आते हैं|

इस कारण बना मैहर शक्तिपीठ :

माँ शारदा माता, मैहर

माँ शारदा के लाइव दर्शन करने के लिए यहाँ क्लिक करे|

माता के इस मंदिर तक जाने के लिए भक्तों को 1063 सीढ़ियां चढ़कर जाना पड़ता है, हर दिन यहां हजारों श्रद्धालु आते हैं. मंदिर के बारे माना जाता है कि दक्ष प्रजापति की पुत्री सती भगवान शिव से विवाह करना चाहती थी. लेकिन राजा दक्ष को यह इच्छा मंजूर नहीं थी, बावजूद इसके माता सती ने जिद कर भगवान शिव से विवाह कर लिया |

माता सती ने किया था देह त्याग

माता सती और भगवान शिव के विवाह के बाद राजा दक्ष ने एक यज्ञ करवाया, जिसमें उन्होंने ब्रह्मा, विष्णु, इंद्र और अन्य देवी-देवताओं को आमंत्रित किया. भगवान शिव को नहीं बुलाया गया, यज्ञ स्थल पर सती ने अपने पिता दक्ष से शंकर जी को आमंत्रित ना करने का कारण पूछा, इस पर राजा दक्ष ने भगवान शंकर को अपशब्द कह दिए. इस अपमान से दुखी होकर माता सती ने यज्ञ अग्नि कुंड में कूद कर अपने प्राण त्याग दिए|

‘माई का हार’ बन गया ‘मैहर’

सती के देह त्याग के बारे में भगवान शिव को पता चलते ही क्रोध में आकर उनका तीसरा नेत्र खुल गया, माना जाता है कि ब्रह्मांड की भलाई के लिए भगवान विष्णु ने सती के शरीर को 51 भागों में विभाजित कर दिया. जहां भी सती के अंग गिरे वहां शक्तिपीठों का निर्माण हुआ, माना जाता है कि सतना के पास माता सती का हार गिरा था, जिस कारण जगह का नाम ‘माई का हार’ पड़ गया लेकिन अपभ्रंश होकर इसका नाम मैहर हो गया, इसी कारण इसे भी शक्तिपीठ माना गया |

आल्हाखंड ने ढूंढ निकाला मंदिर :

त्रिकूट पर्वत की चोटी पर स्थित यह मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र बन चुका है. देश-विदेश से पर्यटक यहां सिर्फ मां शारदा की एक झलक देखने के लिए पहुंचते हैं. मंदिर का ऐतिहासिक महत्व भी है, बताया जाता है कि आल्हाखंड के नायक दो सगे भाई आल्हा और उदल मां शारदा के अनन्य उपासक थे. आल्हा-उदल ने ही सबसे पहले जंगल के बीच मां शारदा देवी के इस मंदिर की खोज की थी |

मां ने आल्हा को दे दिया अमरता का आशीर्वाद :

मंदिर की खोज के बाद आल्हा ने इस मंदिर में 12 वर्ष तक तपस्या कर माँ शारदा देवी को प्रसन्न किया, भक्त की तपस्या से खुश होकर मां ने आल्हा को अमरता का वरदान दे दिया. मां शारदा के मंदिर प्रांगण में फूलमती माता का मंदिर आल्हा की कुल देवी का है. आस्था है कि हर दिन ब्रह्म मुहुर्त में खुद आल्हा द्वारा मां की पूजा-अर्चना की जाती है. 

मां के मंदिर की तलहटी में आज भी आल्हा देव के अवशेष हैं, उनकी तलवार और खड़ाऊ आम भक्तों के दर्शन के लिए रखी गई है. यहां आल्हा तालाब भी है, जिसे प्रशासन ने संरक्षित कर रखा है. सूचना बोर्ड में इस तालाब के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्त्व का वर्णन किया गया है, यहां आल्हा-उदल अखाड़ा भी है. 

कौन थे आल्हा?

आल्हा और ऊदल दो भाई थे. ये बुन्देलखण्ड के महोबा के वीर योद्धा और परमार के सामंत थे. कालिंजर के राजा परमार के दरबार में जगनिक नाम के एक कवि ने आल्हा खण्ड नामक एक काव्य रचा था. उसमें इन वीरों की गाथा वर्णित है. इस ग्रंथ में दों वीरों की 52 लड़ाइयों का रोमांचकारी वर्णन है. आखरी लड़ाई उन्होंने पृथ्‍वीराज चौहान के साथ लड़ी थी. मां शारदा माई के भक्त आल्हा आज भी मां की पूजा और आरती करते हैं. 

आल्हाखण्ड ग्रंथ :

आल्हाखण्ड में गाया जाता है कि इन दोनों भाइयों का युद्ध दिल्ली के तत्कालीन शासक पृथ्वीराज चौहान से हुआ था. पृथ्‍वीराज चौहान को युद्ध में हारना पड़ा था लेकिन इसके पश्चात आल्हा के मन में वैराग्य आ गया और उन्होंने संन्यास ले लिया था. कहते हैं कि इस युद्ध में उनका भाई वीरगति को प्राप्त हो गया था. गुरु गोरखनाथ के आदेश से आल्हा ने पृथ्वीराज को जीवनदान दे दिया था. पृथ्वीराज चौहान के साथ उनकी यह आखरी लड़ाई थी. मान्यता है कि मां के परम भक्त आल्हा को मां शारदा का आशीर्वाद प्राप्त था, लिहाजा पृथ्वीराज चौहान की सेना को पीछे हटना पड़ा था. मां के आदेशानुसार आल्हा ने अपनी साग (हथियार) शारदा मंदिर पर चढ़ाकर नोक टेढ़ी कर दी थी. जिसे आज तक कोई सीधा नहीं कर पाया है. मंदिर परिसर में ही तमाम ऐतिहासिक महत्व के अवशेष अभी भी आल्हा व पृथ्वीराज चौहान की जंग की गवाही देते हैं.

मंदिर के रहस्यों को वैज्ञानिक भी नहीं सुलझा पाए :

मध्यप्रदेश के सतना जिले में मैहर तहसील के पास त्रिकूट पर्वत पर स्थित माता के इस मंदिर को मैहर देवी का शक्तिपीठ कहा जाता है. मैहर का मतलब है मां का हार. माना जाता है कि यहां मां सती का हार गिरा था| माँ शारदा के इस मंदिर की ऐसी मान्यता है कि शाम की आरती होने के बाद जब मंदिर के कपाट बंद करके सभी पुजारी नीचे आ जाते हैं, तब देर रात्रि यहां मंदिर के अंदर से घंटी और पूजा करने की आवाज आती है. लोग कहते है कि मां के भक्त ”आल्हा” अभी भी पूजा करने आते हैं. अक्सर सुबह की आरती वे ही करते हैं, और रोज जब मंदिर के पट खुलते है तब कुछ न कुछ रहस्यमय अजूबे के दर्शन होते है. कभी मन्दिर के गर्भगृह रोशनी से सरोबार रहता है तो कभी अद्भुत खुशबू से. अक्सर मन्दिर के गर्भगृह में मां शारदा के ऊपर अद्भुत फूल चढ़ा मिलता है. मैहर माता के मंदिर में लोग अपनी मनमांगी मुरादे पाने के लिए साल भर आते है. ऐसी मान्यता है कि शारदा माता इंसान को अमर होने का वर प्रदान करती है.

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माँ शारदा मंदिर का इतिहास :

विन्ध्य पर्वत श्रेणियों के मध्य त्रिकूट पर्वत पर स्थित इस मंदिर के बारे मान्यता है कि मां शारदा की प्रथम पूजा आदिगुरु शंकराचार्य द्वारा की गई थी. मैहर पर्वत का नाम प्राचीन धर्मग्रंथ ”महेन्द्र” में मिलता है. इसका उल्लेख भारत के अन्य पर्वतों के साथ पुराणों में भी आया है. मां शारदा की प्रतिमा के ठीक नीचे के न पढ़े जा सके शिलालेख भी कई पहेलियों को समेटे हुए हैं. सन्‌ 1922 में जैन दर्शनार्थियों की प्रेरणा से तत्कालीन महाराजा ब्रजनाथ सिंह जूदेव ने शारदा मंदिर परिसर में जीव बलि को प्रतिबंधित कर दिया था.

पिरामिडाकार त्रिकूट पर्वत में विराजीं मां शारदा का यह मंदिर 522 ईसा पूर्व का है. कहते हैं कि 522 ईसा पूर्व चतुर्दशी के दिन नृपल देव ने यहां सामवेदी की स्थापना की थी, तभी से त्रिकूट पर्वत में पूजा-अर्चना का दौर शुरू हुआ. ऐतिहासिक दस्तावेजों में इस तथ्य का प्रमाण प्राप्त होता है कि सन्‌ 539 (522 ईपू) चैत्र कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नृपलदेव ने सामवेदी देवी की स्थापना की थी|

कैसे पहुंचे माँ शारदा माता, मैहर :

वायु मार्ग:

मैहर तक पहुंचने के लिए निकटतम हवाई अड्डा, जबलपुर, खजुराहो और इलाहाबाद है। इन हवाई अड्डों से आप ट्रेन, बस या टैक्सी से आसानी से मैहर तक पहुंच सकते हैं। जबलपुर से मैहर दूरी 150 किलोमीटर खजुराहो से मैहर दूरी 130 किलोमीटर इलाहाबाद से मैहर दूरी 200 किलोमीटर |

ट्रेन द्वारा

आम तौर पर सभी ट्रेनों में मैहर स्टेशन पर रोक नहीं होती है, लेकिन नवरात्र उत्सवों के दौरान ज्यादातर ट्रेनें मैहर पर रुकती हैं। सभी ट्रेनों के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन जंक्शन – सतना स्टेशन से मैहर स्टेशन की दूरी 36 किलोमीटर है मैहर स्टेशन से कटनी स्टेशन की दूरी 55 किलोमीटर है|

सड़क मार्ग

मैहर शहर अच्छी तरह से राष्ट्रीय राजमार्ग 7 के साथ सड़क से जुड़ा हुआ है . आप आसानी से निकटतम प्रमुख शहरों से मैहर शहर के लिये नियमित बसें पा सकते हैं।

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माँ शारदा मंदिर रोप वे ई टिकट बुक करने के लिए यहाँ क्लिक करे|

माँ शारदा मंदिर वैन ई टिकट के लिए यहाँ क्लिक करे

माँ शारदा मंदिर में हवन, मुंडन , कथा की टिकट के लिए यहाँ क्लिक करे|

माँ शारदा मंदिर में विजिटर पास के यहाँ क्लिक करे|

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Shardiya Navratri 2022 का पहला दिन : मां शैलपुत्री की कैसे करें पूजा

Shardiya Navratri 2022:-

नवरात्र के नौ दिनों में मां के अलग-अलग स्वरूप की पूजा की जाती है | पहला दिन माता शैलपुत्री को समर्पित होता है | इसके बाद क्रमशः ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री की आराधना होती है | नवरात्रि का पहला दिन देवी शैलपुत्री की उपासना का दिन है | देवी, पर्वतों के राजा शैल की सुपुत्री थीं इसलिए इनको शैलपुत्री नाम दिया गया | माता प्रकृति की देवी हैं इसलिए नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है | मां शैलपुत्री को देवी पार्वती का अवतार माना जाता हैं | पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण इनका नाम ‘शैलपुत्री’ पड़ा | नवरात्र-पूजन में प्रथम दिवस इन्हीं की पूजा और उपासना की जाती है |

देवी मां के पावन दिन का पर्व शारदीय नवरात्रि आश्विन मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को 26 सितम्बर 2022 से आरंभ होगा |अक्टूबर तक चलने वाले इन दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है | अक्टूबर को धूमधाम के साथ विजयदशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा | इसी दिन दुर्गा विसर्जन भी किया जाएगा | शास्त्रों में मां दुर्गा के नौ रूपों का बखान किया गया है | नवरात्र के दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने से विशेष पुण्य मिलता है | मान्यता है कि मां दुर्गा अपने भक्तों के हर कष्ट हर लेती हैं |

माँ शैलपुत्री – पहले नवरात्र की व्रत कथा:-

एक बार प्रजापति दक्ष ने एक बहुत बड़ा यज्ञ किया | इसमें उन्होंने सारे  देवताओं को अपना-अपना यज्ञ-भाग प्राप्त करने के लिए निमंत्रित किया, किन्तु शंकर जी को उन्होंने इस यज्ञ में निमंत्रित नहीं किया | सती ने जब सुना कि उनके पिता एक अत्यंत विशाल यज्ञ का अनुष्ठान कर रहे हैं, तब वहाँ जाने के लिए उनका मन विकल हो उठा |

अपनी यह इच्छा उन्होंने शंकरजी को बताई | सारी बातों पर विचार करने के बाद उन्होंने कहा- प्रजापति दक्ष किसी कारणवश हमसे रुष्ट हैं | अपने यज्ञ में उन्होंने सारे देवताओं को निमंत्रित किया है | उनके यज्ञ-भाग भी उन्हें समर्पित किए हैं, किन्तु हमें जान-बूझकर नहीं बुलाया है | कोई सूचना तक नहीं भेजी है | ऐसी स्थिति में तुम्हारा वहाँ जाना किसी प्रकार भी श्रेयस्कर नहीं होगा |’

शंकर जी के इस उपदेश से सती का प्रबोध नहीं हुआ | पिता का यज्ञ देखने, वहाँ जाकर माता और बहनों से मिलने की उनकी व्यग्रता किसी प्रकार भी कम न हो सकी | उनका प्रबल आग्रह देखकर भगवान शंकरजी ने उन्हें वहाँ जाने की अनुमति दे दी |

सती ने पिता के घर पहुँचकर देखा कि कोई भी उनसे आदर और प्रेम के साथ बातचीत नहीं कर रहा है | सारे लोग मुँह फेरे हुए हैं | केवल उनकी माता ने स्नेह से उन्हें गले लगाया | बहनों की बातों में व्यंग्य और उपहास के भाव भरे हुए थे |

परिजनों के इस व्यवहार से उनके मन को बहुत क्लेश पहुँचा | उन्होंने यह भी देखा कि वहाँ चतुर्दिक भगवान शंकरजी के प्रति तिरस्कार का भाव भरा हुआ है | दक्ष ने उनके प्रति कुछ अपमानजनक वचन भी कहे | यह सब देखकर सती का हृदय क्षोभ, ग्लानि और क्रोध से संतप्त हो उठा | उन्होंने सोचा भगवान शंकर जी की बात न मान, यहाँ आकर मैंने बहुत बड़ी गलती की है |

वे अपने पति भगवान शंकर के इस अपमान को सह न सकीं | उन्होंने अपने उस रूप को तत्क्षण वहीं योगाग्नि द्वारा जलाकर भस्म कर दिया | वज्रपात के समान इस दारुण-दुःखद घटना को सुनकर शंकर जी ने क्रुद्ध हो अपने गणों को भेजकर दक्ष के उस यज्ञ का पूर्णतः विध्वंस करा दिया |

सती ने योगाग्नि द्वारा अपने शरीर को भस्म कर अगले जन्म में शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया | इस बार वे ‘शैलपुत्री’ नाम से विख्यात हुर्ईं | पार्वती, हैमवती भी उन्हीं के नाम हैं | उपनिषद् की एक कथा के अनुसार इन्हीं ने हैमवती स्वरूप से देवताओं का गर्व-भंजन किया था |

देवी वाहन बैल है:-

मां शैलपुत्री के दाएं हाथ में डमरू और बाएं हाथ में त्रिशूल है | देवी का वाहन बैल है | मां शैलपुत्री के मस्तक पर अर्ध चंद्र विराजित है | माता शैलपुत्री मूलाधार चक्र की देवी मानी जाती हैं | माता शैलपुत्री योग की शक्ति द्वारा जागृत कर मां से शक्ति पाई जा सकती है | दुर्गा के पहले स्वरूप में शैलपुत्री मानव के मन पर नियंत्रण रखती हैं | चंद्रमा पर नियंत्रण रखने वाली शैलपुत्री उस नवजात शिशु की अवस्था को संबोधित करतीं हैं जो निश्चल और निर्मल है और संसार की सभी मोह-माया से परे है |

पूजा विधि:-

सबसे पहले मां शैलपुत्री की तस्वीर स्थापित करें और उसके नीचे लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं | इसके ऊपर केशर से ‘शं’ लिखें और उसके ऊपर मनोकामना पूर्ति गुटिका रखें | तत्पश्चात् हाथ में लाल पुष्प लेकर शैलपुत्री देवी का ध्यान करें |

मंत्र इस प्रकार है-

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे ॐ शैलपुत्री देव्यै नम:।

मंत्र के साथ ही हाथ के पुष्प मनोकामना गुटिका एवं मां के तस्वीर के ऊपर छोड़ दें | इसके बाद प्रसाद अर्पित करें तथा मां शैलपुत्री के मंत्र का जाप करें | इस मंत्र का जप कम से कम 108 करें |

मंत्र – ॐ शं शैलपुत्री देव्यै: नम:।

मंत्र संख्या पूर्ण होने के बाद मां दुर्गा के चरणों में अपनी मनोकामना व्यक्त करके मां से प्रार्थना करें तथा आरती एवं कीर्तन करें | मंत्र के साथ ही हाथ के पुष्प मनोकामना गुटिका एवं मां के तस्वीर के ऊपर छोड़ दें | इसके बाद भोग अर्पित करें तथा मां शैलपुत्री के मंत्र का जाप करें | यह जप कम से कम 108 होना चाहिए |

Shardiya Navratri 2022 का तीसरा दिन : मां चंद्रघंटा की कैसे करें पूजा

मां चंद्रघंटा:-

नवरात्रि के तीसरे दिन दुर्गा मां के चंद्रघंटा रूप की पूजा की जाती है | नौ दिनों तक चलने वाली नवरात्रि के दौरान मां के नौ रूपों की पूजा की जाती है | मां चंद्रघंटा राक्षसों का वध करने के लिए जानी जाती हैं | मान्यता है कि वह अपने भक्तों के दुखों को दूर करती हैं इसलिए उनके हाथों में धनुष, त्रिशूल, तलवार और गदा होता है | चंद्रघंटा माता का शिवदूती स्वरूप है | इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है | इनका रंग सोने के समान चमकीला है | इनकी मुद्रा युद्ध के लिए तैयार रहने जैसी है | इनके घंटे की भयानक ध्वनि से अत्याचारी दानव, दैत्य आदि सभी डरते हैं | असुरों के साथ युद्ध में देवी चंद्रघंटा ने घंटे की टंकार से असुरों का नाश कर दिया था |

देवी मां के पावन दिन का पर्व शारदीय नवरात्रि आश्विन मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को 26 सितम्बर 2022 से आरंभ होगा |अक्टूबर तक चलने वाले इन दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है | अक्टूबर को धूमधाम के साथ विजयदशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा | इसी दिन दुर्गा विसर्जन भी किया जाएगा | शास्त्रों में मां दुर्गा के नौ रूपों का बखान किया गया है | नवरात्र के दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने से विशेष पुण्य मिलता है | मान्यता है कि मां दुर्गा अपने भक्तों के हर कष्ट हर लेती हैं |

चंद्रघंटा माता का स्वरूप देवी पार्वती के सुहागन रूप को दर्शाता है | भगवान शिव से विवाह के बाद पार्वती देवी ने अपने माथे पर आधा चंद्रमा धारण करना शुरू कर दिया जिसके कारण उनके इस रूप को चंद्रघंटा के नाम से जाना जाने लगा | माता चंद्रघंटा ने अपने माथे पर घंटे के आकार का आधा चंद्रमा धारण किया हुआ है, चंद्रघंटा माता की 10 भुजाएं हैं, जिनमें से 8 भुजाओं में कमल, कमंडल और विभिन्न अस्त्र-शस्त्र हैं |

चंद्रघंटा माता की कथा:-

देवताओं और असुरों के बीच लंबे समय तक युद्ध चला | असुरों का स्‍वामी महिषासुर था और देवाताओं के इंद्र | महिषासुर ने देवाताओं पर विजय प्राप्‍त कर इंद्र का सिंहासन हासिल कर लिया और स्‍वर्गलोक पर राज करने लगा | इसे देखकर सभी देवतागण परेशान हो गए और इस समस्‍या से निकलने का उपाय जानने के लिए त्र‍िदेव ब्रह्मा, विष्‍णु और महेश के पास गए | देवताओं ने बताया कि महिषासुर ने इंद्र, चंद्र, सूर्य, वायु और अन्‍य देवताओं के सभी अधिकार छीन लिए हैं और उन्‍हें बंधक बनाकर स्‍वयं स्‍वर्गलोक का राजा बन गया है |

देवाताओं ने बताया कि महिषासुर के अत्‍याचार के कारण अब देवता पृथ्‍वी पर विचरण कर रहे हैं और स्‍वर्ग में उनके लिए स्‍थान नहीं है | यह सुनकर ब्रह्मा, विष्‍णु और भगवान शंकर को अत्‍यधिक क्रोध आया | क्रोध के कारण तीनों के मुख से ऊर्जा उत्‍पन्‍न हुई | देवगणों के शरीर से निकली ऊर्जा भी उस ऊर्जा से जाकर मिल गई | यह दसों दिशाओं में व्‍याप्‍त होने लगी |

तभी वहां एक देवी का अवतरण हुआ | भगवान शंकर ने देवी को त्र‍िशूल और भगवान विष्‍णु ने चक्र प्रदान किया | इसी प्रकार अन्‍य देवी देवताओं ने भी माता के हाथों में अस्‍त्र शस्‍त्र सजा दिए | इंद्र ने भी अपना वज्र और ऐरावत हाथी से उतरकर एक घंटा दिया | सूर्य ने अपना तेज और तलवार दिया और सवारी के लिए शेर दिया | देवी अब महिषासुर से युद्ध के लिए पूरी तरह से तैयार थीं | उनका विशालकाय रूप देखकर महिषासुर यह समझ गया कि अब उसका काल आ गया है | महिषासुर ने अपनी सेना को देवी पर हमला करने को कहा | अन्‍य दैत्य और दानवों के दल भी युद्ध में कूद पड़े |

देवी ने एक ही झटके में ही दानवों का संहार कर दिया | इस युद्ध में महिषासुर तो मारा ही गया, साथ में अन्‍य बड़े दानवों और राक्षसों का संहार मां ने कर दिया | इस तरह मां ने सभी देवताओं को असुरों से अभयदान दिलाया |

पूजा विधि:-

नवरात्रि के तीसरे दिन माता दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप की​ विधि विधान से इस मंत्र

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता।।

ऊँ चं चं चं चंद्रघंटायेः ह्रीं नम:।

का जाप कर आराधना करनी चाहिए | इसके बाद मां चंद्रघंटा को सिंदूर, अक्षत्, गंध, धूप, पुष्प आदि अर्पित करें | आप देवी मां को चमेली का पुष्प अथवा कोई भी लाल फूल अर्पित कर सकते हैं | साथ ही साथ, दूध से बनी किसी मिठाई का भोग लगाएं | पूजा के दौरान दुर्गा चालीसा का पाठ और दुर्गा आरती का गान करें |

Shardiya Navratri 2022 का चौथा दिन : मां कूष्‍मांडा की कैसे करें पूजा

मां कूष्‍मांडा:- Shardiya Navratri 2022 का चौथा दिन

Shardiya Navratri 2022 का चौथा दिन- नवरात्रि के चौथे दिन शक्ति की देवी मां दुर्गा के चौथे स्‍वरूप माता कूष्‍मांडा की पूजा की जाती है | हिन्‍दू मान्‍यताओं के अनुसार जब इस संसार में सिर्फ अंधकार था तब देवी कूष्‍मांडा ने अपने ईश्‍वरीय हास्‍य से ब्रह्मांड की रचना की थी | यही वजह है क‍ि देवी को सृष्टि के रचनाकार के रूप में भी जाना जाता है |

देवी मां के पावन दिन का पर्व शारदीय नवरात्रि आश्विन मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को 26 सितम्बर 2022 से आरंभ होगा |अक्टूबर तक चलने वाले इन दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है | अक्टूबर को धूमधाम के साथ विजयदशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा | इसी दिन दुर्गा विसर्जन भी किया जाएगा | शास्त्रों में मां दुर्गा के नौ रूपों का बखान किया गया है | नवरात्र के दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने से विशेष पुण्य मिलता है | मान्यता है कि मां दुर्गा अपने भक्तों के हर कष्ट हर लेती हैं |

इसी के चलते इन्‍हें ‘आदिस्‍वरूपा’ या ‘आदिशक्ति’ कहा जाता है | नवरात्र के चौथे दिन मां कूष्‍मांडा के पूजन का विशेष महत्‍व है | पारंपरिक मान्‍यताओं के अनुसार जो भी भक्‍त सच्‍चे मन से नवरात्र के चौथे दिन मां कूष्‍मांडा की पूजा करता है उसे आयु, यश और बल की प्राप्‍ति होती है |

मां कूष्मांडा की आठ भुजाएं हैं, उनकी पूजा करने से व्यक्ति के समस्त कष्टों, दुखों और विपदाओं का नाश होता है | मां कूष्मांडा को गुड़हल का फूल या लाल फूल बहुत प्रिय है, इसलिए उनकी पूजा में गुड़हल का फूल अर्पित करें | इससे मां कूष्मांडा जल्द प्रसन्न होती हैं | मां दुर्गा ने असुरों का संहार करने के लिए कूष्मांडा स्वरूप धारण किया था |

कौन हैं मां कूष्‍मांडा:-

‘कु’ का अर्थ है ‘कुछ’, ‘ऊष्‍मा’ का अर्थ है ‘ताप’ और ‘अंडा’ का अर्थ है ‘ब्रह्मांड’ | शास्‍त्रों के अुनसार मां कूष्‍मांडा ने अपनी दिव्‍य मुस्‍कान से संसार में फैले अंधकार को दूर किया था | चेहरे पर हल्की मुस्कान लिए माता कूष्‍मांडा को सभी दुखों को हरने वाली मां कहा जाता है |

इनका निवास स्थान सूर्य है | यही वजह है माता कूष्‍मांडा के पीछे सूर्य का तेज दर्शाया जाता है | मां दुर्गा का यह इकलौता ऐसा रूप है जिन्हें सूर्यलोक में रहने की शक्ति प्राप्त है | देवी को कुम्‍हड़े की बलि प्रिय है | 

Shardiya Navratri 2020 का चौथा दिन

मां कूष्‍मांडा का रूप:-

चेहरे पर हल्‍की मुस्‍कान लिए मां कूष्‍मांडा की आठ भुजाएं हैं | इसलिए इन्‍हें अष्‍टभुजा भी कहा जाता है | इनके सात हाथों में क्रमशः कमंडल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, कलश, चक्र और गदा है | आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जप माला है | देवी के हाथ में जो अमृत कलश है उससे वह अपने भक्‍तों को दीर्घायु और उत्तम स्‍वास्‍थ्‍य का वरदान देती हैं | मां कूष्‍मांडा सिंह की सवारी करती हैं जो धर्म का प्रतीक है |

मां कूष्‍मांडा की पूजा विधि :-

  • नवरात्रि के चौथे दिन सुबह-सवेरे उठकर स्‍नान कर हरे रंग के वस्‍त्र धारण करें |
  • मां की फोटो या मूर्ति के सामने घी का दीपक जलाएं और उन्‍हें तिलक लगाएं |
  • अब देवी को हरी इलायची, सौंफ और कुम्‍हड़े का भोग लगाएं |
  • अब ‘ऊं कूष्‍मांडा देव्‍यै नम:’ मंत्र का 108 बार जाप करें |
  • मां कूष्‍मांडा की आरती उतारें और क‍िसी ब्राह्मण को भोजन कराएं या दान दें |
  • इसके बाद स्‍वयं भी प्रसाद ग्रहण करें |

Shardiya Navratri 2022 का पांचवा दिन : मां स्कंदमाता की कैसे करें पूजा

माँ स्कंदमाता:-

नवरात्रि के पांचवे दिन दुर्गा मां के स्कंदमाता रूप की पूजा की जाती है | शास्त्रों के अनुासर, इनकी कृपा से मूढ़ भी ज्ञानी हो जाता है | पहाड़ों पर रहकर सांसारिक जीवों में नवचेतना का निर्माण करने वालीं देवी हैं स्कंदमाता |

हिंदी पंचाग के अनुसार साल में नवरात्रि 4 बार मनाई जाती है | दो बार गुप्त नवरात्रि और दो नवरात्रि को मुख्य रूप से मनाया जाता है | इसमें चैत्र और शारदीय मुख्य नवरात्रि हैं, जिसे देशभर में पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है | नवरात्रि का मतलब है नौ रातें | नौ दिन तक चलने वाले शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है |

देवी मां के पावन दिन का पर्व शारदीय नवरात्रि आश्विन मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को 26 सितम्बर 2022 से आरंभ होगा | अक्टूबर तक चलने वाले इन दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है | अक्टूबर को धूमधाम के साथ विजयदशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा | इसी दिन दुर्गा विसर्जन भी किया जाएगा | शास्त्रों में मां दुर्गा के नौ रूपों का बखान किया गया है | नवरात्र के दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने से विशेष पुण्य मिलता है | मान्यता है कि मां दुर्गा अपने भक्तों के हर कष्ट हर लेती हैं |

स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता के कारण इन्हें स्कंदमाता नाम से भी जाना जाता है | इनकी उपासना से भक्त की सारी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं | भक्त को मोक्ष मिलता है| वहीं, मान्‍यता ये भी है कि इनकी पूजा करने से संतान योग की प्राप्‍ति होती है |

स्कंदमाता की पूजा करने से शत्रुओं और विकट परिस्थितियों पर विजय प्राप्त होता है, वहीं, नि:संतान दंपत्तियों को संतान सुख मिलता है | जो मोक्ष की कामना करते हैं, उनको देवी मोक्ष प्रदान करती हैं | माता को पहली प्रसूता भी कहा जाता है | 

मां दुर्गा के पंचम स्वरूप को स्कंदमाता के रूप में पूजते हैं | माता स्कंदमाता शेर पर सवार रहती हैं |उनकी चार भुजाएं हैं | ये दाईं तरफ की ऊपर वाली भुजा से स्कंद को गोद में पकड़े हुए हैं | नीचे वाली भुजा में कमल का पुष्प धारण किए हुए हैं | मां का ऐसा स्वरूप भक्तों के लिए कल्याण कारी है |

कहते हैं कि सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी की पूजा से तेज और कांति की प्राप्ति होती है | वात्सल्य की देवी मां कमल आसान पर विराजमान होकर अपनी चार भुजाओं में से एक में भगवान स्कन्द को गोद लिए हैं | दूसरी व चौथी भुजा में कमल का फूल, तीसरी भुजा से आशीर्वाद दे रही है | इनको इनके पुत्र के नाम से भी पुकारा जाता है |

कौन हैं माँ स्कंदमाता:-

पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार देवी स्‍कंदमाता ही हिमालय की पुत्री हैं और इस वजह से इन्‍हें पार्वती कहा जाता है | महादेव की पत्‍नी होने के कारण इन्‍हें माहेश्‍वरी भी कहते हैं | इनका वर्ण गौर है इसलिए इन्‍हें देवी गौरी के नाम से भी जाना जाता है |

मां कमल के पुष्प पर विराजित अभय मुद्रा में होती हैं इसलिए इन्‍हें पद्मासना देवी और विद्यावाहिनी दुर्गा भी कहा जाता है | भगवान स्कंद यानी कार्तिकेय की माता होने के कारण इनका नाम स्‍कंदमाता पड़ा | स्‍कंदमाता प्रसिद्ध देवासुर संग्राम में देवताओं की सेनापति बनी थीं | इस वजह से पुराणों में कुमार और शक्ति कहकर इनकी महिमा का वर्णन किया गया है |

माँ स्कंदमाता

पूजा विधि:- माँ स्कंदमाता

नवरात्रि के पांचवे दिन स्नान आदि से निवृत हो जाएं और फिर स्कंदमाता का स्मरण करें | इसके पश्चात स्कंदमाता को अक्षत्, धूप, गंध, पुष्प अर्पित करें | उनको बताशा, पान, सुपारी, लौंग का जोड़ा, किसमिस, कमलगट्टा, कपूर, गूगल, इलायची आदि भी चढ़ाएं। फिर स्कंदमाता की आरती करें | स्कंदमाता की पूजा करने से भगवान कार्तिकेय भी प्रसन्न होते हैं |

स्कंदमाता की पूजा का श्रेष्ठ समय है दिन का दूसरा पहर | इनकी पूजा चंपा के फूलों से करनी चाहिए | इन्हें मूंग से बने मिष्ठान का भोग लगाएं | श्रृंगार में इन्हें हरे रंग की चूडियां चढ़ानी चाहिए | इनकी उपासना से मंदबुद्धि व्यक्ति को बुद्धि व चेतना प्राप्त होती है, पारिवारिक शांति मिलती है, इनकी कृपा से ही रोगियों को रोगों से मुक्ति मिलती है तथा समस्त व्याधियों का अंत होता है | देवी स्कंदमाता की साधना उन लोगों के लिए सर्वश्रेष्ठ है जिनकी आजीविका का संबंध मैनेजमेंट, वाणिज्य, बैंकिंग अथवा व्यापार से है |

Happy Navratri Wishes in Hindi, Download WhatsApp Status 2022

Happy Navratri Wishes in Hindi 2022

Happy Navratri Wishes in Hindi– ग्राहकों से गुलजार दुकानें, बाजार रोशनी और सजे हुए पंडालों से सुसज्जित हैं, नवरात्रि एक शुभ नौ दिनों का उत्सव है जिसके दौरान देवी दुर्गा की पूजा की जाती है। प्रत्येक दिन देवी के एक विशेष अवतार को समर्पित है। शैलपुत्री के साथ शुरू और सिद्धिदात्री के साथ समाप्त, इन नौ दिनों, देवी दुर्गा पृथ्वी पर माना जाता है।

पहले दिन, लोग देवी शैलपुत्री की पूजा करते हैं, जबकि दूसरे दिन देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। तीसरा दिन देवी चंद्रघंटा को समर्पित है जबकि चौथा दिन देवी कूष्मांडा के लिए है; पाँचवें दिन देवी स्कंदमाता की पूजा की जाती है और छठे दिन देवी कात्यायनी देवी की पूजा करते हैं। सातवें दिन देवी कालरात्रि की पूजा की जाती है और आठवें दिन देवी महागौरी के लिए होती है। अंतिम और अंतिम दिन, लोग देवी दुर्गा, माँ सिद्धिदात्री के नौवें अवतार की पूजा करते हैं।

आज हम आपके लिए ले कर आये हैं, Best Happy navratri wishes in hindi जिनको की आप अपने दोस्तों और परिवार वालों के साथ शेयर कर सकते हैं, और उन्हें भी Happy navratri 2022 की बधाई दे सकते हैं। नवरात्रि के इस पावन मौके पर आप अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को बेहतरीन कोट्स और मैसेज भेजकर विश कर सकते हैं और उन्हें ढेर सारी शुभकामनाएं भी दे सकते हैं।

Happy Navratri Wishes in Hindi Download images 2022

पग-पग में आपके फूल खिलें;

ख़ुशी आप सबको इतनी मिले;

कभी ना हो दुखों का सामना;

यही है आपको हमारी तरफ से नवरात्रि की शुभकामना।

मां की दुआओं में इतना असर हो जाए ,

कि कोरोना का कहर खत्म हो जाए।।

आपको हमारी तरफ से नवरात्रि की शुभकामना।

शेर पर सवार होकर,

खुशियों का वरदान लेकर,

हर घर में विराजी अंबे माँ,

हम सबकी जगदंबे माँ।।

नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं!

Happy Navratri Wishes in Hindi, Download WhatsApp Status 2020

रूठी है तो मना लेंगे

पास अपने बुला लेंगे,

मइया है वो दिल की भोली

बातों में उसे रिझा लेंगे,

Navratri 2020 Ki Hardik shubhkamnaye

सारा जहान है जिसकी शरण में

नमन है उस मां के चरण में,

हम हैं मां के चरणों की धूल

आओ मां को चढ़ाएं श्रद्धा के फूल

हैप्‍पी नवरात्रि 2020

तेरी दुनिया में भय से जब सिमट जाऊं,

चारों ओर अंधेरा ही अँधेरा घना पाऊं,

बन के रोशनी तुम राह दिखा देना।।

आपको सहपरिवार नवरात्रि की शुभकामनाएं!

गौर वर्ण और वृषभ सवारी,

अक्षय पुण्यों की हे अधिकारी,

शस्त्र त्रिशूल माँ श्वेताम्बरी,

ऐश्वर्य प्रदायिनी जय माँ महागौरी।

Happy Navratri iamges in Hindi, Download WhatsApp Status 2020

हो जाओ तैयार, माँ अम्बे आने वाली हैं,

सजा लो दरबार माँ अम्बे आने वाली हैं।

तन, मन और जीवन हो जायेगा पावन,

माँ के कदमो की आहट से, गूँज उठेगा आँगन।

शुभ नवरात्री

हे मां तुमसे विश्वास ना उठने देना
बन के रोशनी तुम राह दिखा देना,
और बिगड़े काम बना देना
नवरात्रि 2020 की शुभकामनाएं

सारा जहां है जिसकी शरण में,
नमन है उस माँ के चरण में,
हम है उस माँ के चरणों की धूल,
आओ मिलकर माँ को चढ़ाएं श्रद्धा के फूल।।
आपको एवं आपके समस्त परिजनों को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं!

सारा जहां है जिसकी शरण में,

नमन है उस माँ के चरण में,

हम है उस माँ के चरणों की धूल,

आओ मिलकर माँ को चढ़ाएं श्रद्धा के फूल।।

शुभ नवरात्रि, Happy Navratri 2020

Happy Navratri Wishes in Hindi, Download WhatsApp Status 2020

सारा जहां है जिसकी शरण में,

नमन है उस मां के चरण में,

हम हैं उस मां के चरणों की धूल,

आओ मिलकर मां को चढ़ाएं श्रद्धा के फूल!

शुभ नवरात्रि

खुशी आप सबको इतनी मिले
कभी ना हो दुखों का सामना,
यही है हमारी तरफ से
आपको नवरात्रि की शुभकामना…
हैप्‍पी नवरात्रि 2020

तुम्ही दुर्गा, तुम्ही लक्ष्मी, तुम्ही महाकाली हो,

इस सम्पूर्ण सृष्टि का संचालन करने वाली हो,

शुम्भ,निशुम्भ मारे तुमने रक्तबीज संहारे है,

विक्राल रूप अपना धरकर महिसासुर भी उद्धारे हैं,

आज सम्स्त सृष्टि पाप के बोझ तले चीख रही है,

हे काली खप्पर भर लो,आस बस तेरी दीख रही है..!

Happy Navratri Wishes in Hindi, Download WhatsApp Status 2020

हो जाओ तैयार, मां अंबे आने वाली हैं,

सजा लो दरबार मां अंबे आने वाली हैं,

तन,मन और जीवन हो जाएगा पावन,

मां के कदमो की आहट से गूंज उठेगा आंगन..

हम पर अपनी कृपा बरसाओ माँ

एक बार फिर दर अपने बुलाओ माँ ।

जयकारे फिर गूंजे, बजे ढोल मंजीरे,

विपदा बड़ी है, चमत्कार दिखाओ माँ

तेरी शक्ति अपरंपार, तू जीवनदायिनी,

अपने आँचल में हमको छुपाओ माँ ।

करके सिंह सवारी, धरती पर आओ माँ

तेरी जय जय कार करें हम,

आपदा से बचाओ माँ ।

माँ दुर्गा के आशीर्वाद से आपका और

आपके परिवार का जीवन सदा हँसता और मुस्कुराता रहे,

प्रेम से बोलो जय माता दी।

नवरात्री की हार्दिक शुभकामनाएं।

हमको था इंतजार वो घड़ी आ गई;

होकर सिंह पर सवार माता रानी आ गई;

होगी अब मन की हर मुराद पूरी;

हरने सारे दुख माता अपने द्वार आ गई..

नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं!

सजा हे दरबार, एक ज्योति जगमगाई है,

सुना हे नवरात्रि का त्योहार आया हैं,

वो देखो मंदिर में मेरी माता मुस्करायी है… जय माँ दुर्गा..

पहले माँ की पूजा, उसके बाद कोई काम दूजा,

आए हैं शुभ दिन मेरी माँ के, माँ ने मेरी हर मनोकामना पूरी की हैं..!

कुमकुम भरे कदमों से आए मां दुर्गा आपके द्वार,
सुख संपत्ति मिले आपको अपार,मेरी तरफ से नवरात्रि की एडवांस में शुभकामनाएं करें स्वीकार….

हाथ कमल और जप की माला,

गोद में जिसके शिव के लल्ला,

स्कन्द की माता,हे चेतना दाता,

कमल आसन,चतुर्हस्त माता,

जय शिव संगिनी स्कन्दमाता ।

Happy Navratri

नव दीप जले;

नव फूल खिले;

नित नयी बहार मिले;

नवरात्रि के इस पावन अवसर पर

आपको माता रानी का आशीर्वाद मिले.

हैप्पी नवरात्रि!

किस दिन कौन सी देवी की होगी पूजा
किस दिन कौन सी देवी की होगी पूजा Navratri 2020

माता का जब पर्व आता है,

ढेरों खुशियां लाता है,

इस बार मां आपको वो सब कुछ दे,

जो आपका दिल चाहता हैं.

नवरात्र की ढेर सारी शुभकामनाएं

वर्णों को रचने वाली,

१०८ नामो वाली।

श्री मंगला भद्रकाली दुखो को हरने वाली।

पापो का नाश करने वाली शक्ति दो मां कालिका काली।

चंड – मुंड विनाशिनी,

हैं!! महिषासुर घातिनी।

रक्षम रक्षम रक्षा करो मां रक्षा – रक्षा रक्षा करो मां खप्पर वाली।

Happy Navratri

हमको था जिसका इंतजार वो घड़ी आ गई,
होकर सिंह पर सवार माता रानी आ गई
शारदीय नवरात्रि की पावन शुभकामनाएं…

वो जग को चलाने वाली है,हम सबकी पालनहारी है,

कोई कहता है दुर्गा उसको, कोई कहता उसको काली है,

एक बेटी बनकर जन्म लिया, माँ-बाप कि राजदुलारी है,

एक बेटी बनकर इस घर के, आँगन की शान बढ़ा रही है,

अब निकल पड़ी है डोली उसकी, पहचान भी उसकी बदल रही है,

पापा की लाडो थी जो कभी,ये नया घर अब उसकी जिम्मेदारी है,

यू काट दिया जीवन उसने,सोचा की यही तकदीर हमारी है,

जग ने हराना चाहा हरकदम उसे, हर घडी वजूद बचा रही है,

वो जग को चलाने वाली है, वो सबला ही ये नारी है!

शुभ-नवरात्रि

Shardiya Navratri 2022 Day 2: नवरात्रि के दूसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा कैसे करें

Shardiya Navratri 2022 Day 2

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा कैसे करें- हिंदी पंचाग के अनुसार साल में नवरात्रि 4 बार मनाई जाती है | दो बार गुप्त नवरात्रि और दो नवरात्रि को मुख्य रूप से मनाया जाता है | इसमें चैत्र और शारदीय मुख्य नवरात्रि हैं, जिसे देशभर में पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है | नवरात्रि का मतलब है नौ रातें | नौ दिन तक चलने वाले शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है |

देवी मां के पावन 9 दिन का पर्व शारदीय नवरात्रि आश्विन मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को 26 सितम्बर 2022 से आरंभ होगा | 4 अक्टूबर तक चलने वाले इन दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है | 5 अक्टूबर को धूमधाम के साथ विजयदशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा | इसी दिन दुर्गा विसर्जन भी किया जाएगा | शास्त्रों में मां दुर्गा के नौ रूपों का बखान किया गया है | नवरात्र के दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने से विशेष पुण्य मिलता है | मान्यता है कि मां दुर्गा अपने भक्तों के हर कष्ट हर लेती हैं |

नवरात्र के नौ दिनों में मां के अलग-अलग स्वरूप की पूजा की जाती है | दूसरा दिन माता ब्रह्मचारिणी को समर्पित होता है | इसके पहले मां शैलपुत्री और इसके बाद क्रमशः चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री की आराधना होती है | नवरात्रि का दूसरा दिन देवी ब्रह्मचारिणी की उपासना का दिन है | ब्रह्मचारिणी नवदुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से ज्ञान और वैराग्य की प्राप्ति होती है | मां पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कई हजार वर्षों तक ब्रह्मचारी रहकर घोर तपस्या की थी | उनकी इस कठिन तपस्या के कारण उनका नाम तपश्चारिणी अर्थात्‌ ब्रह्मचारिणी पड़ गया | वे श्वेत वस्त्र पहनती है, उनके दाएं हाथ में जपमाला तथा बाएं हाथ में कमंडल विराजमान है |

माँ ब्रह्मचारिणी की कथा:-

पूर्वजन्म में इस देवी ने हिमालय के घर पुत्री रूप में जन्म लिया था और नारदजी के उपदेश से भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी | इस कठिन तपस्या के कारण इन्हें तपश्चारिणी अर्थात्‌ ब्रह्मचारिणी नाम से जाना गया | एक हजार वर्ष तक इन्होंने केवल फल-फूल खाकर बिताए और सौ वर्षों तक केवल जमीन पर रहकर शाक पर निर्वाह किया |

कुछ दिनों तक कठिन उपवास रखे और खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप के घोर कष्ट सहे | तीन हजार वर्षों तक टूटे हुए बिल्व पत्र खाए और भगवान शंकर की आराधना करती रहीं | इसके बाद तो उन्होंने सूखे बिल्व पत्र खाना भी छोड़ दिए | कई हजार वर्षों तक निर्जल और निराहार रह कर तपस्या करती रहीं | पत्तों को खाना छोड़ देने के कारण ही इनका नाम अपर्णा नाम पड़ गया |

कठिन तपस्या के कारण देवी का शरीर एकदम क्षीण हो गया | देवता, ऋषि, सिद्धगण, मुनि सभी ने ब्रह्मचारिणी की तपस्या को अभूतपूर्व पुण्य कृत्य बताया, सराहना की और कहा- हे देवी आज तक किसी ने इस तरह की कठोर तपस्या नहीं की | यह आप से ही संभव थी | आपकी मनोकामना परिपूर्ण होगी और भगवान चंद्रमौलि शिवजी तुम्हें पति रूप में प्राप्त होंगे | अब तपस्या छोड़कर घर लौट जाओ | जल्द ही आपके पिता आपको लेने आ रहे हैं | मां की कथा का सार यह है कि जीवन के कठिन संघर्षों में भी मन विचलित नहीं होना चाहिए | मां ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से सर्व सिद्धि प्राप्त होती है |

पूजा विधि:-

देवी ब्रह्मचारिणी जी की पूजा में सर्वप्रथम माता की फूल, अक्षत, रोली, चंदन, से पूजा करें तथा उन्हें दूध, दही, शर्करा, घृत, व मधु से स्नान करायें व देवी को प्रसाद अर्पित करें | प्रसाद के पश्चात आचमन और फिर पान, सुपारी भेंट कर इनकी प्रदक्षिणा करें | कलश देवता की पूजा के पश्चात इसी प्रकार नवग्रह, दशदिक्पाल, नगर देवता, ग्राम देवता, की पूजा करें |

देवी की पूजा करते समय सबसे पहले हाथों में एक फूल लेकर प्रार्थना करें-

इधाना कदपद्माभ्याममक्षमालाक कमण्डलु

देवी प्रसिदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्त्मा

इसके पश्चात् देवी को पंचामृत स्नान करायें और फिर भांति भांति से फूल, अक्षत, कुमकुम, सिन्दुर, अर्पित करें देवी को अरूहूल का फूल व कमल बेहद प्रिय होते हैं अत: इन फूलों की माला पहनायें, घी व कपूर मिलाकर देवी की आरती करें |

Shardiya Navratri 2022 Day 7: नवरात्रि के सातंवे दिन मां कालरात्रि की पूजा कैसे करें

Shardiya Navratri 2022 Day 7

नवरात्रि का सातवां दिन मां दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित होता है | आज के दिन मां की पूजा करने से व्यक्ति को शुभ फल की प्राप्ति होती है | मां कालरात्रि की पूजा करने से आकस्मिक संकटों से रक्षा होती है |

हिंदी पंचाग के अनुसार साल में नवरात्रि 4 बार मनाई जाती है | दो बार गुप्त नवरात्रि और दो नवरात्रि को मुख्य रूप से मनाया जाता है | इसमें चैत्र और शारदीय मुख्य नवरात्रि हैं, जिसे देशभर में पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है | नवरात्रि का मतलब है नौ रातें | नौ दिन तक चलने वाले शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है |

देवी मां के पावन दिन का पर्व शारदीय नवरात्रि आश्विन मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को 26 सितम्बर 2022 से आरंभ होगा | अक्टूबर तक चलने वाले इन दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है | अक्टूबर को धूमधाम के साथ विजयदशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा | इसी दिन दुर्गा विसर्जन भी किया जाएगा | शास्त्रों में मां दुर्गा के नौ रूपों का बखान किया गया है | नवरात्र के दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने से विशेष पुण्य मिलता है | मान्यता है कि मां दुर्गा अपने भक्तों के हर कष्ट हर लेती हैं |

शक्ति का यह रूप शत्रु और दुष्‍टों का संहार करने वाला है | मान्‍यता है कि मां कालरात्रि ही वह देवी हैं जिन्होंने मधु कैटभ जैसे असुर का वध किया था | देवी भागवत पुराण के अनुसार, नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की पूजा की जाती है। मां कालरात्रि सदैव अपने भक्‍तों पर कृपा करती हैं और शुभ फल देती है। इसलिए मां का एक नाम ‘शुभंकरी’ भी पड़ा |

देवी कालरात्रि का शरीर रात के अंधकार की तरह काला है | इनकी श्‍वास से अग्नि निकलती है | मां के बाल बिखरे हुए हैं इनके गले में दिखाई देने वाली माला बिजली की भांति चमकती है | इन्हें तमाम आसरिक शक्तियां का विनाश करने वाला बताया गया है |

मां कालरात्रि की कथा

कथा के अनुसार एक बार तीनों लोकों में शुम्भ निशुम्भ और रक्तबीज तीनों राक्षसों ने आतंक मचा रखा था | इससे परेशान होकर सभी देवता भगवान शिव के पास इस समस्या के समाधान के लिए पहुंचे | तब भगवान शिव ने मां आदिशक्ति से उन तीनों का संहार करके अपने भक्तों को रक्षा के लिए कहा | इसके बाद माता पार्वती ने उन दुष्टों के संहार के लिए मां दुर्गा का रूप धारण कर लिया | मां ने शुम्भ और निशुम्भ से युद्ध करके उनका अंत कर दिया |

लेकिन जैसे ही मां ने रक्तबीज पर प्रहार किया उसके रक्त से अनेकों रक्तबीज उत्पन्न हो गए | यह देखकर मां दुर्गा ने कालरात्रि का रूप धारण कर लिया | इसके बाद मां ने रक्तबीज पर प्रहार करना शुरु कर दिया और उसके रक्त को अपने मुंह में भर लिया और रक्तबीज का गला काट दिया |

मां का शरीर रात से भी ज्यादा काला है | देवी कालरात्रि के बाल बिखरे हुए हैं और मां के गले में नर मुंडों की माला विराजित है | मां के चार हाथ हैं जिनमें से एक हाथ में कटार और दूसरे में लोहे का कांटा है | देवी के तीन नेत्र हैं और इनकी सांस से अग्नि निकलती है | मां का वाहन गधा है |

मां की उपासना से लाभ

  • शत्रु और विरोधियों को नियंत्रित करनेके लिए इनकी उपासना अत्यंत शुभ होती है |
  • इनकी उपासना से भय,दुर्घटना तथा रोगों का नाश होता है |
  • इनकी उपासना से नकारात्मक ऊर्जा का ( तंत्र मंत्र) असर नहीं होता |
  • ज्योतिष में शनि नामक ग्रह को नियंत्रित करने के लिए इनकी पूजा करना अदभुत परिणाम देता है |

मां का सम्बन्ध किस चक्र से है:-

  • मां व्यक्ति के सर्वोच्च चक्र, सहस्त्रार को नियंत्रित करती हैं |
  • यह चक्र व्यक्ति को अत्यंत सात्विक बनाता है और देवत्व तक ले जाता है |
  • इस चक्र तक पहुच जाने पर व्यक्ति स्वयं ईश्वर ही हो जाता है |
  • इस चक्र पर गुरु का ध्यान किया जाता है |
  • इस चक्र का दरअसल कोई मंत्र नहीं होता |
  • नवरात्रि के सातवें दिन इस चक्र पर अपने गुरु का ध्यान अवश्य करें |

मां का मंत्र-

ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै ऊं कालरात्रि दैव्ये नम:
क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं हूं हूं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं हूं हूं स्वाहा .

Ayushman Card: आयुष्मान कार्ड में नाम ऑनलाइन कैसे जोड़े, जानिए यहाँ पर

आयुष्मान भारत योजना :

आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत देश के गरीब तथा पिछड़े परिवारों को स्वास्थ्य सम्बन्धी बड़ी समस्याओ को दूर करने के लिए भारत सरकार द्वारा आर्थिक रूप से स्वास्थ बीमा प्रदान किया जा रहा है प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने 14 अप्रैल 2018 को बाबा भीम राव अम्बेडकर जयंती के दिन छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में की गयी थी और पंडित दीनदयाल  उपाध्याय के जन्मदिन के दिन 25 सितम्बर 2018 को पूरे देश में लागू कर दी गयी है | PMJAY योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार देश के गरीब परिवारों को सालाना 5 लाख रूपये के स्वास्थ्य बीमा की सहायता प्रदान कर रही है |

आयुष्मान में ऑनलाइन नाम जोड़े :

यदि आपके घर के किसी सदस्य का नाम आयुष्मान कार्ड में नहीं जुड़ा है तो और उसका नाम जोड़ना चाहते है तो हमारा ये आर्टिकल सिर्फ आपके लिए है क्योंकि हम अपने इस आर्टिकल मे, आपको विस्तार से आयुष्मान कार्ड में सदस्य का नाम जोडने की पूरी प्रोसेस की जानकारी प्रदान करेंगे।

हम, आपको बता दें कि, आयुष्मान कार्ड को परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्धारा जारी किया जाता है जिसके तहत प्रत्येक आयुष्मान कार्डधारक को प्रतिवर्ष 5 लाख रुपयो का स्वास्थ्य बीमा प्रदान किया जाता है ताकि उनका व उनके परिवार का स्वास्थ्य विकास हो सकें और यही इस कार्ड का मौलिक लक्ष्य है |

अंततः हमारे सभी आयुष्मान कार्ड धारक परिवार सीधे इस लिंक – https://setu.pmjay.gov.in/setu/index पर क्लिक करके अपना रजिस्ट्रैशन करके अपने आयुष्मान कार्ड में घर के किसी भी सदस्य का नाम जोड़ सकते है।

आयुष्मान कार्ड से सम्बंधित जानकारी :

विभाग का नामस्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालयभारत सरकार
योजना का नामप्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना
आर्टिकल का नामAyushman Card Name Kaise Jode?
आर्टिकल का प्रकारसदस्य का नाम कैसे जोड़े
आयुष्मान कार्ड का लाभसभी आयुष्मान कार्ड धारक परिवारो को प्रतिवर्ष कुल 05 लाख रुपयो का स्वास्थ्य बीमा प्रदान करके उनका स्वास्थ्य विकास किया जायेगा।
आयुष्मान कार्ड कौन बनवा सकता हैवो सभी परिवार व नागरिक अपना – अपना आय़ुष्मान कार्ड बनवा सकते है जिनका नाम SECC – 2011 की लिस्ट में होगा।
Direct Link of RegistrationClick Here
Official WebsiteClick Here

अपने इस आर्टिकल में, अपने सभी पाठक साथियो का स्वागत करते हुए आपको बताना चाहते है कि, यदि आप भी आयुष्मान कार्ड में अपने घर के किसी सदस्य का नाम जोड़ना चाहते है तो इसके लिए हम, आपको विस्तार से इस आर्टिकल में आयुष्मान कार्ड में नाम कैसे जोड़े ?, की  पूरी जानकारी व पूरी स्टेप बाय स्टेप  जानकारी प्रदान करेगे।

स्टेप बाय स्टेप प्रोसेस :

हमारे सभी नागरिक व सामाजिक व आर्थिक तौर पर पिछड़े वर्ग के परिवार आसानी से आयुष्मान कार्ड में अपन नाम जोड़ सकते है जिसकी पूरी प्रक्रिया कुछ इस प्रकार से हैं –

STEP 1 – Registration :

  • आयुष्मान कार्ड में सदस्य का नाम जोड़ने के लिए सर्वप्रथम ऑफिसियल वेबसाइट पर जाना होगा|
Ayushman Card
  • इस पेज पर आने के बाद आपको Click Here का विकल्प मिलेगा जिस पर आपको क्लिक करना होगा|
Ayushman Card
  • क्लिक करने के बाद आपके सामने इसका रजिस्ट्रैशन फॉर्म खुलेगा जो कि, चित्र में दिखाए अनुसार होगा|
Ayushman Card
  • अब यहां पर आपको अपनाआधार कार्ड व मोबाइन नंबर को दर्ज करके OTP Verfication  करना होगा|
  • इसके बाद आपके सामनेरजिस्ट्रैशन फॉर्म खुलेगा जिसे आपको ध्यान से भरना होगा |
  • अन्त मे,आपकोसबमिट के विकल्प पर क्लिक कर देना होगा और लॉगिन आई.डी व पासवर्ड को प्राप्त कर लेना होगा आदि।

Step 2 – Login in the Portal

  • रजिस्ट्रैशन करने के बाद आप सभी उम्मीदवारो को होम – पेज पर वापस आना होगा जो कि, इस प्रकार होगा|
Ayushman Card
  • अब यहां पर आपकोअपना मोबाइल नंबर को दर्ज करके साइन – अप करना होगा|
  • इसके बाद आपको OTP Verfication करना होगा जिसके बाद आपके सामने इसका डैशबोर्ड खुलेगा|
  • यहां पर सबसे पहलेलाभार्थी की खोज करनी होगी और इसके लिए आपको शहरी व ग्रामीण का चयन करना होगा|
  • इसके बाद आपकोअपने राज्य, जिले, ब्लॉक व गांव का चयन करना होगा और सर्च के विकल्प पर क्लिक करना होगा|
  • अब आपको आपका नाम लिस्ट में दिखा दिया जायेगा जिसके आगे ही आपको व्यू (View) का विकल्प मिलेगा जिस पर आपको क्लिक करना होगा|
  • क्लिक करने के बाद आपके सामने एक नया पेज खुलेगा जहां पर आपको Download Card and Add Member का विकल्प मिलेगा जिसमें से आपको Add Member के विकल्प पर क्लिक करना होगा,
  • इसके बाद आपके सामने इसकानये सदस्य का नाम जोड़ने का फॉर्म खुलेगा जिसे आपको ध्यान से भरना होगा,
  • अब आप घर के जिस सदस्य का नामजोड़ रहे है उसका नाम यदि राशन कार्ड मे है तो उसे स्कैन करके अपलोड करना होगा,
  • इसके बाद आपको OTP Verfication करना होगा  और
  • अन्त मे, आपकोसबमिट के विकल्प पर क्लिक कर देना होगा जिसके बाद आपके द्धारा जोड़े गये नये सदस्य के नाम का सत्यापन किया जायेगा और इस प्रकार आप आसानी से घर के किसी भी सदस्य का नाम, आयुष्मान कार्ड मे जोड़ सकते है आदि।

आयुष्मान भारत योजना की मुख्य विशेषताएं:-

  • 5 लाख रुपये प्रति परिवारः इस मिशन का परिभाषित लाभ कवर 5 लाख रुपये प्रति परिवार प्रति वर्ष होगा |
  • इसमें सभी प्रकार के द्वितीयक व अधिकांश तृतीयक देखभाल प्रक्रिया शामिल हो जाएगी |
  • इस योजना के लाभ से कोई वंचित नहीं रह जाये (खासकर महिला, बच्चे एवं बुजुर्ग), इसलिए परिवार के आकार एवं उम्र की कोई सीमा नहीं होगी |
  • लाभ कवर में पूर्व व उतर अस्पताल व्यय में शामिल होगा |
  • लाभार्थियों को परिभाषित अस्पताल में भर्ती होने के प्रत्येक समय का परिवहन भत्ता भी प्रदान किया जाएगा |
  • देश भर में Portable: यह योजना संपूर्ण देश में पोर्टेबल होगी | साथ ही लाभार्थियों को देशभर के सरकारी/निजी अस्पतालों में नकदरहित लाभ उठाने की अनुमति होगी |
  • यह पात्रता आधारित स्कीम होगी जिसका निर्धारण सामाजिक-आर्थिक जनगणना होगी |

आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थी:-

  • ग्रामीण क्षेत्र के विभिन्न लाभार्थी परिवारों में शामिल होंगे; केवल एक कमरे का कच्ची दीवार व कच्चा छत वाला मकान, परिवार में 16 से 59 वर्ष के बीच का कोई वयस्क सदस्य नही हो, महिला के अभिभावकत्व वाला परिवार जिसमें 16 से 59 वर्ष के बीच कोई वयस्क पुरुष सदस्य नहीं हो, दिव्यांग सदस्य वाला व परिवार में कोई गैर-विकलांग वयस्क सदस्य नहीं हो, एससी/एसटी परिवार, भूमिहीन परिवार जिनकी आय का बड़ा स्रोत अनौपचारिक श्रम है |
  • इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्र के वे सभी परिवार योजना में स्वतः शामिल होंगे जो; आवासविहीन, आश्रयहीन, भिक्षा पर निर्भर, मैला ढ़ोने वाले, आदिम आदिवासी समूह, कानून रूपी से मुक्त कराये गये बंधुआ मजदूर |
  • शहरी क्षेत्र में 11 परिभाषित पेशा से जुड़े लोगों को योजना का लाभ मिलेगा |
  • इस स्कीम के तहत लाभार्थी सभी सरकारी अस्पतालों तथा पैनल में शामिल निजी अस्पतालों में स्कीम का लाभ उठा सकेंगे | बेड उपलब्ध होने की दशा में ESIC के अस्पताल भी स्कीम में शामिल हो सकेंगे |

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Shardiya Navratri 2022 Day 3 : नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा कैसे करें ?

Shardiya Navratri 2022 Day 3

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा कैसे करें- हिंदी पंचाग के अनुसार साल में नवरात्रि 4 बार मनाई जाती है | दो बार गुप्त नवरात्रि और दो नवरात्रि को मुख्य रूप से मनाया जाता है | इसमें चैत्र और शारदीय मुख्य नवरात्रि हैं, जिसे देशभर में पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है | नवरात्रि का मतलब है नौ रातें | नौ दिन तक चलने वाले शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है |

देवी मां के पावन 9 दिन का पर्व शारदीय नवरात्रि आश्विन मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को 26 सितम्बर 2022 से आरंभ होगा | 4 अक्टूबर तक चलने वाले इन दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है | 5 अक्टूबर को धूमधाम के साथ विजयदशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा | इसी दिन दुर्गा विसर्जन भी किया जाएगा | शास्त्रों में मां दुर्गा के नौ रूपों का बखान किया गया है | नवरात्र के दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने से विशेष पुण्य मिलता है | मान्यता है कि मां दुर्गा अपने भक्तों के हर कष्ट हर लेती हैं |

नवरात्रि के तीसरे दिन दुर्गा मां के चंद्रघंटा रूप की पूजा की जाती है | नौ दिनों तक चलने वाली नवरात्रि के दौरान मां के नौ रूपों की पूजा की जाती है | मां चंद्रघंटा राक्षसों का वध करने के लिए जानी जाती हैं | मान्यता है कि वह अपने भक्तों के दुखों को दूर करती हैं इसलिए उनके हाथों में धनुष, त्रिशूल, तलवार और गदा होता है | चंद्रघंटा माता का शिवदूती स्वरूप है | इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है | इनका रंग सोने के समान चमकीला है | इनकी मुद्रा युद्ध के लिए तैयार रहने जैसी है | इनके घंटे की भयानक ध्वनि से अत्याचारी दानव, दैत्य आदि सभी डरते हैं | असुरों के साथ युद्ध में देवी चंद्रघंटा ने घंटे की टंकार से असुरों का नाश कर दिया था |

चंद्रघंटा माता का स्वरूप देवी पार्वती के सुहागन रूप को दर्शाता है | भगवान शिव से विवाह के बाद पार्वती देवी ने अपने माथे पर आधा चंद्रमा धारण करना शुरू कर दिया जिसके कारण उनके इस रूप को चंद्रघंटा के नाम से जाना जाने लगा | माता चंद्रघंटा ने अपने माथे पर घंटे के आकार का आधा चंद्रमा धारण किया हुआ है, चंद्रघंटा माता की 10 भुजाएं हैं, जिनमें से 8 भुजाओं में कमल, कमंडल और विभिन्न अस्त्र-शस्त्र हैं |

 नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा कैसे करें

चंद्रघंटा माता की कथा:-

देवताओं और असुरों के बीच लंबे समय तक युद्ध चला | असुरों का स्‍वामी महिषासुर था और देवाताओं के इंद्र | महिषासुर ने देवाताओं पर विजय प्राप्‍त कर इंद्र का सिंहासन हासिल कर लिया और स्‍वर्गलोक पर राज करने लगा | इसे देखकर सभी देवतागण परेशान हो गए और इस समस्‍या से निकलने का उपाय जानने के लिए त्र‍िदेव ब्रह्मा, विष्‍णु और महेश के पास गए | देवताओं ने बताया कि महिषासुर ने इंद्र, चंद्र, सूर्य, वायु और अन्‍य देवताओं के सभी अधिकार छीन लिए हैं और उन्‍हें बंधक बनाकर स्‍वयं स्‍वर्गलोक का राजा बन गया है |

देवाताओं ने बताया कि महिषासुर के अत्‍याचार के कारण अब देवता पृथ्‍वी पर विचरण कर रहे हैं और स्‍वर्ग में उनके लिए स्‍थान नहीं है | यह सुनकर ब्रह्मा, विष्‍णु और भगवान शंकर को अत्‍यधिक क्रोध आया | क्रोध के कारण तीनों के मुख से ऊर्जा उत्‍पन्‍न हुई | देवगणों के शरीर से निकली ऊर्जा भी उस ऊर्जा से जाकर मिल गई | यह दसों दिशाओं में व्‍याप्‍त होने लगी |

तभी वहां एक देवी का अवतरण हुआ | भगवान शंकर ने देवी को त्र‍िशूल और भगवान विष्‍णु ने चक्र प्रदान किया | इसी प्रकार अन्‍य देवी देवताओं ने भी माता के हाथों में अस्‍त्र शस्‍त्र सजा दिए | इंद्र ने भी अपना वज्र और ऐरावत हाथी से उतरकर एक घंटा दिया | सूर्य ने अपना तेज और तलवार दिया और सवारी के लिए शेर दिया | देवी अब महिषासुर से युद्ध के लिए पूरी तरह से तैयार थीं | उनका विशालकाय रूप देखकर महिषासुर यह समझ गया कि अब उसका काल आ गया है | महिषासुर ने अपनी सेना को देवी पर हमला करने को कहा | अन्‍य दैत्य और दानवों के दल भी युद्ध में कूद पड़े |

देवी ने एक ही झटके में ही दानवों का संहार कर दिया | इस युद्ध में महिषासुर तो मारा ही गया, साथ में अन्‍य बड़े दानवों और राक्षसों का संहार मां ने कर दिया | इस तरह मां ने सभी देवताओं को असुरों से अभयदान दिलाया |

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा कैसे करें? पूजा विधि:-

नवरात्रि के तीसरे दिन माता दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप की​ विधि विधान से इस मंत्र

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता।।

ऊँ चं चं चं चंद्रघंटायेः ह्रीं नम:।

का जाप कर आराधना करनी चाहिए | इसके बाद मां चंद्रघंटा को सिंदूर, अक्षत्, गंध, धूप, पुष्प आदि अर्पित करें | आप देवी मां को चमेली का पुष्प अथवा कोई भी लाल फूल अर्पित कर सकते हैं | साथ ही साथ, दूध से बनी किसी मिठाई का भोग लगाएं | पूजा के दौरान दुर्गा चालीसा का पाठ और दुर्गा आरती का गान करें |

Shardiya Navratri 2022 Day 4: नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्‍मांडा की पूजा कैसे करें ?

Shardiya Navratri 2022 Day 4

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्‍मांडा की पूजा कैसे करें- हिंदी पंचाग के अनुसार साल में नवरात्रि 4 बार मनाई जाती है | दो बार गुप्त नवरात्रि और दो नवरात्रि को मुख्य रूप से मनाया जाता है | इसमें चैत्र और शारदीय मुख्य नवरात्रि हैं, जिसे देशभर में पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है | नवरात्रि का मतलब है नौ रातें | नौ दिन तक चलने वाले शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है |

देवी मां के पावन 9 दिन का पर्व शारदीय नवरात्रि आश्विन मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को 26 सितम्बर 2022 से आरंभ होगा | 4 अक्टूबर तक चलने वाले इन दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है | 5अक्टूबर को धूमधाम के साथ विजयदशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा | इसी दिन दुर्गा विसर्जन भी किया जाएगा | शास्त्रों में मां दुर्गा के नौ रूपों का बखान किया गया है | नवरात्र के दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने से विशेष पुण्य मिलता है | मान्यता है कि मां दुर्गा अपने भक्तों के हर कष्ट हर लेती हैं |

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है | यह मां दुर्गा का चौथा स्वरूप हैं | पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवी कूष्मांडा ने ही इस सृष्टि की रचना की थी | इसी के चलते इन्हें सृष्टि की आदिस्वरूपा और आदिशक्ति भी कहा जाता है | मान्यता है कि शुरुआत में हर ओर अंधेरा व्याप्त था | तब देवी ने ब्रह्मांड की रचना अपनी मंद हंसी से की थी | अष्टभुजा देवी अपने हाथों में धनुष, बाण, कमल-पुष्प, कमंडल, जप माला, चक्र, गदा और अमृत से भरपूर कलश रखती हैं |

पौराणिक मान्यता के अनुसार, मां कूष्मांडा से तात्पर्य है कुम्हड़ा | कहा जाता है कि मां कूष्मांडा ने संसार को दैत्यों के अत्याचार से मुक्त करने के लिए ही अवतार लिया था | इनका वाहन सिंह है | हिंदू संस्कृति में कुम्हड़े को कुष्मांड कहते हैं इसलिए इस देवी को कुष्मांडा | पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था देवी ने ही ब्रह्मांड की रचना की थी | इन्हें आदि स्वरूपा और आदिशक्ति भी कहा जाता है | मान्यता है कि इनका निवास सूर्यमंडल के भीतर के लोक में स्थित है | इस दिन मां कूष्मांडा की उपासना से आयु, यश, बल, और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है |

मां कूष्मांडा की आठ भुजाएं हैं, उनकी पूजा करने से व्यक्ति के समस्त कष्टों, दुखों और विपदाओं का नाश होता है | मां कूष्मांडा को गुड़हल का फूल या लाल फूल बहुत प्रिय है, इसलिए उनकी पूजा में गुड़हल का फूल अर्पित करें | इससे मां कूष्मांडा जल्द प्रसन्न होती हैं | मां दुर्गा ने असुरों का संहार करने के लिए कूष्मांडा स्वरूप धारण किया था |

कौन हैं मां कूष्‍मांडा:-

‘कु’ का अर्थ है ‘कुछ’, ‘ऊष्‍मा’ का अर्थ है ‘ताप’ और ‘अंडा’ का अर्थ है ‘ब्रह्मांड’ | शास्‍त्रों के अुनसार मां कूष्‍मांडा ने अपनी दिव्‍य मुस्‍कान से संसार में फैले अंधकार को दूर किया था | चेहरे पर हल्की मुस्कान लिए माता कूष्‍मांडा को सभी दुखों को हरने वाली मां कहा जाता है |

इनका निवास स्थान सूर्य है | यही वजह है माता कूष्‍मांडा के पीछे सूर्य का तेज दर्शाया जाता है | मां दुर्गा का यह इकलौता ऐसा रूप है जिन्हें सूर्यलोक में रहने की शक्ति प्राप्त है | देवी को कुम्‍हड़े की बलि प्रिय है | 

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्‍मांडा

मां कूष्‍मांडा का रूप:-

चेहरे पर हल्‍की मुस्‍कान लिए मां कूष्‍मांडा की आठ भुजाएं हैं | इसलिए इन्‍हें अष्‍टभुजा भी कहा जाता है | इनके सात हाथों में क्रमशः कमंडल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, कलश, चक्र और गदा है | आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जप माला है | देवी के हाथ में जो अमृत कलश है उससे वह अपने भक्‍तों को दीर्घायु और उत्तम स्‍वास्‍थ्‍य का वरदान देती हैं | मां कूष्‍मांडा सिंह की सवारी करती हैं जो धर्म का प्रतीक है |

मां कूष्‍मांडा की पूजा विधि:- नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्‍मांडा की पूजा कैसे करें?

  • नवरात्रि के चौथे दिन सुबह-सवेरे उठकर स्‍नान कर हरे रंग के वस्‍त्र धारण करें |
  • मां की फोटो या मूर्ति के सामने घी का दीपक जलाएं और उन्‍हें तिलक लगाएं |
  • अब देवी को हरी इलायची, सौंफ और कुम्‍हड़े का भोग लगाएं |
  • अब ‘ऊं कूष्‍मांडा देव्‍यै नम:’ मंत्र का 108 बार जाप करें |
  • मां कूष्‍मांडा की आरती उतारें और क‍िसी ब्राह्मण को भोजन कराएं या दान दें |
  • इसके बाद स्‍वयं भी प्रसाद ग्रहण करें |

Shardiya Navratri 2022 Day 5: नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा कैसे करें ?

Shardiya Navratri 2022 Day 5

नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा कैसे करें – हिंदी पंचाग के अनुसार साल में नवरात्रि 4 बार मनाई जाती है | दो बार गुप्त नवरात्रि और दो नवरात्रि को मुख्य रूप से मनाया जाता है | इसमें चैत्र और शारदीय मुख्य नवरात्रि हैं, जिसे देशभर में पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है | नवरात्रि का मतलब है नौ रातें | नौ दिन तक चलने वाले शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है | देवी मां के पावन 9 दिन का पर्व शारदीय नवरात्रि आश्विन मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को 26 सितम्बर 2022 से आरंभ होगा |

4 अक्टूबर तक चलने वाले इन दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है | 5 अक्टूबर को धूमधाम के साथ विजयदशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा | इसी दिन दुर्गा विसर्जन भी किया जाएगा | शास्त्रों में मां दुर्गा के नौ रूपों का बखान किया गया है | नवरात्र के दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने से विशेष पुण्य मिलता है | मान्यता है कि मां दुर्गा अपने भक्तों के हर कष्ट हर लेती हैं |

नवरात्रि के पांचवे दिन दुर्गा मां के स्कंदमाता रूप की पूजा की जाती है | शास्त्रों के अनुासर, इनकी कृपा से मूढ़ भी ज्ञानी हो जाता है | पहाड़ों पर रहकर सांसारिक जीवों में नवचेतना का निर्माण करने वालीं देवी हैं स्कंदमाता | स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता के कारण इन्हें स्कंदमाता नाम से भी जाना जाता है | इनकी उपासना से भक्त की सारी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं | भक्त को मोक्ष मिलता है| वहीं, मान्‍यता ये भी है कि इनकी पूजा करने से संतान योग की प्राप्‍ति होती है |

स्कंदमाता की पूजा करने से शत्रुओं और विकट परिस्थितियों पर विजय प्राप्त होता है, वहीं, नि:संतान दंपत्तियों को संतान सुख मिलता है | जो मोक्ष की कामना करते हैं, उनको देवी मोक्ष प्रदान करती हैं | माता को पहली प्रसूता भी कहा जाता है | मां दुर्गा के पंचम स्वरूप को स्कंदमाता के रूप में पूजते हैं | माता स्कंदमाता शेर पर सवार रहती हैं |उनकी चार भुजाएं हैं | ये दाईं तरफ की ऊपर वाली भुजा से स्कंद को गोद में पकड़े हुए हैं | नीचे वाली भुजा में कमल का पुष्प धारण किए हुए हैं | मां का ऐसा स्वरूप भक्तों के लिए कल्याण कारी है |

कहते हैं कि सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी की पूजा से तेज और कांति की प्राप्ति होती है | वात्सल्य की देवी मां कमल आसान पर विराजमान होकर अपनी चार भुजाओं में से एक में भगवान स्कन्द को गोद लिए हैं | दूसरी व चौथी भुजा में कमल का फूल, तीसरी भुजा से आशीर्वाद दे रही है | इनको इनके पुत्र के नाम से भी पुकारा जाता है |

नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा कैसे करें

मां स्कंदमाता की कथा: नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा कैसे करें ?

कार्तिकेय को देवताओं का कुमार सेनापति भी कहा जाता है | कार्तिकेय को पुराणों में सनत-कुमार, स्कन्द कुमार आदि नामों से भी जाता है | मां अपने इस रूप में शेर पर सवार होकर अत्याचारी दानवों का संहार करती हैं | पर्वतराज की बेटी होने के कारण इन्हें पार्वती भी कहते हैं और भगवान शिव की पत्नी होने के कारण इनका एक नाम माहेश्वरी भी है |

इनके गौर वर्ण के कारण इन्हें गौरी भी कहा जाता है | मां को अपने पुत्र से अधिक प्रेम है इसलिए इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है जो अपने पुत्र से अत्याधिक प्रेम करती हैं | मां कमल के पुष्प पर विराजित अभय मुद्रा में होती हैं इसलिए इन्‍हें पद्मासना देवी और विद्यावाहिनी दुर्गा भी कहा जाता है |

मां कमल के पुष्प पर विराजित अभय मुद्रा में होती हैं इसलिए इन्‍हें पद्मासना देवी और विद्यावाहिनी दुर्गा भी कहा जाता है | भगवान स्कंद यानी कार्तिकेय की माता होने के कारण इनका नाम स्‍कंदमाता पड़ा | स्‍कंदमाता प्रसिद्ध देवासुर संग्राम में देवताओं की सेनापति बनी थीं | इस वजह से पुराणों में कुमार और शक्ति कहकर इनकी महिमा का वर्णन किया गया है |

पूजा विधि माँ स्कंदमाता

नवरात्रि के पांचवे दिन स्नान आदि से निवृत हो जाएं और फिर स्कंदमाता का स्मरण करें | इसके पश्चात स्कंदमाता को अक्षत्, धूप, गंध, पुष्प अर्पित करें | उनको बताशा, पान, सुपारी, लौंग का जोड़ा, किसमिस, कमलगट्टा, कपूर, गूगल, इलायची आदि भी चढ़ाएं। फिर स्कंदमाता की आरती करें | स्कंदमाता की पूजा करने से भगवान कार्तिकेय भी प्रसन्न होते हैं |

स्कंदमाता की पूजा का श्रेष्ठ समय है दिन का दूसरा पहर | इनकी पूजा चंपा के फूलों से करनी चाहिए | इन्हें मूंग से बने मिष्ठान का भोग लगाएं | श्रृंगार में इन्हें हरे रंग की चूडियां चढ़ानी चाहिए | इनकी उपासना से मंदबुद्धि व्यक्ति को बुद्धि व चेतना प्राप्त होती है, पारिवारिक शांति मिलती है

इनकी कृपा से ही रोगियों को रोगों से मुक्ति मिलती है तथा समस्त व्याधियों का अंत होता है | देवी स्कंदमाता की साधना उन लोगों के लिए सर्वश्रेष्ठ है जिनकी आजीविका का संबंध मैनेजमेंट, वाणिज्य, बैंकिंग अथवा व्यापार से है |

Shardiya Navratri 2022 Day 8: नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा कैसे करें ?

Shardiya Navratri 2022 Day 8

हिंदी पंचाग के अनुसार साल में नवरात्रि 4 बार मनाई जाती है | दो बार गुप्त नवरात्रि और दो नवरात्रि को मुख्य रूप से मनाया जाता है | इसमें चैत्र और शारदीय मुख्य नवरात्रि हैं, जिसे देशभर में पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है | नवरात्रि का मतलब है नौ रातें | नौ दिन तक चलने वाले शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है | देवी मां के पावन 9 दिन का पर्व शारदीय नवरात्रि आश्विन मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को 26 सितम्बर 2022 से आरंभ होगा | 4 अक्टूबर तक चलने वाले इन दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है | 5 अक्टूबर को धूमधाम के साथ विजयदशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा | इसी दिन दुर्गा विसर्जन भी किया जाएगा | शास्त्रों में मां दुर्गा के नौ रूपों का बखान किया गया है | नवरात्र के दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने से विशेष पुण्य मिलता है | मान्यता है कि मां दुर्गा अपने भक्तों के हर कष्ट हर लेती हैं |

नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा का विधान है | मान्यता है कि महाष्टमी या दुर्गाष्टमी के दिन मां महागौरी की विधि-विधान से पूजा करने से भक्तों के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं | नवरात्रि की अष्टमी तिथि को कन्या पूजन भी किया जाता है | मान्यता है कि अष्टमी व नवमी तिथि में कन्या पूजन करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है |

देवीभागवत पुराण के अनुसार, मां के नौ रूप और 10 महाविद्याएं सभी आदिशक्ति के अंश और स्वरूप हैं लेकिन भगवान शिव के साथ उनकी अर्धांगिनी के रूप में महागौरी सदैव विराजमान रहती हैं | इनकी शक्ति अमोघ और सद्यः फलदायिनी है | नवरात्र की अष्टमी तिथि को विशेष महत्व रखती है क्योंकि कई लोग इस दिन कन्या पूजन कर अपना व्रत खोलते हैं |

देवीभागवत पुराण के अनुसार, महागौरी वर्ण पूर्ण रूप से गौर अर्थात सफेद हैं और इनके वस्त्र व आभूषण भी सफेद रंग के हैं | मां का वाहन वृषभ अर्थात बैल है | मां के दाहिना हाथ अभयमुद्रा में है और नीचे वाला हाथ में दुर्गा शक्ति का प्रतीक त्रिशुल है |  महागौरी के बाएं हाथ के ऊपर वाले हाथ में शिव का प्रतीक डमरू है | डमरू धारण करने के कारण इन्हें शिवा भी कहा जाता है | मां के नीचे वाला हाथ अपने भक्तों को अभय देता हुआ वरमुद्रा में है | माता का यह रूप शांत मुद्रा में ही दृष्टिगत है | इनकी पूजा करने से सभी पापों का नष्ट होता है |

नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा कैसे करे

मां महागौरी की कथा:- नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा कैसे करें?

देवीभागवत पुराण के अनुसार, देवी पार्वती का जन्म राजा हिमालय के घर हुआ था | देवी पार्वती को मात्र 8 वर्ष की उम्र में अपने पूर्वजन्म की घटनाओं का आभास हो गया और तब से ही उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए तपस्या शुरू कर दी थी | अपनी तपस्या के दौरान माता केवल कंदमूल फल और पत्तों का आहार करती थीं | बाद में माता ने केवल वायु पीकर तप करना आरंभ कर दिया | तपस्या से देवी पार्वती को महान गौरव प्राप्त हुआ था इसलिए उनका नाम महागौरी पड़ा | इस दिन दुर्गा सप्तशती के मध्यम चरित्र का पाठ करना विशेष फलदायी माना जाता है |

माता की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनसे गंगा स्नान करने के लिए कहा | जिस समय मां पार्वती स्नान करने गईं तब देवी श्याम वर्ण का एक स्वरूप के साथ प्रकट हुईं, जो कौशिकी कहलाईं और एक स्वरूप उज्जवल चंद्र के समान प्रकट हुआ, जो महागौरी कहलाईं | गौरी रूप में माता अपने हर भक्त का कल्याण करती हैं और उनको समस्याओं से मुक्त करती हैं | जो व्यक्ति किन्हीं कारणों से नौ दिन तक उपवास नहीं रख पाते हैं, उनके लिए नवरात्र में प्रतिपदा और अष्टमी तिथि को व्रत रखने का विधान है | इससे नौ दिन व्रत रखने के समान फल मिलता है |

भोग में मां महागौरी को चढ़ाएं यह चीज:-

देवीभागवत पुराण के अनुसार, नवरात्र की अष्टमी तिथि को मां को नारियल का भोग लगाने की पंरपरा है | भोग लगाने के बाद नारियल को या तो ब्राह्मण को दे दें अन्यथा प्रशाद रूप में वितरण कर दें | जो भक्त आज के दिन कन्या पूजन करते हैं, वह हलवा-पूड़ी, सब्जी और काले चने का प्रसाद विशेष रूप से बनाया जाता है | महागौरी को गायन और संगती अतिप्रिय है | भक्तों को पूजा करते समय गुलाबी रंग के वस्त्र पहनना चाहिए | गुलाबी रंग प्रेम का प्रतीक है | एक परिवार को प्रेम के धागों से ही गूथकर रखा जा सकता हैं, इसलिए नवरात्र की अष्टमी को गुलाबी रंग पहनना शुभ माना जाता है |

मां महागौरी का ध्यान मंत्र:-

श्वेते वृषेसमारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः |
महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा ||

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ महागौरी रूपेण संस्थिता |
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः||

Shardiya Navratri 2022 Day 9: नवरात्रि के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा कैसे करें ?

Shardiya Navratri 2022 Day 9

हिंदी पंचाग के अनुसार साल में नवरात्रि 4 बार मनाई जाती है | दो बार गुप्त नवरात्रि और दो नवरात्रि को मुख्य रूप से मनाया जाता है | इसमें चैत्र और शारदीय मुख्य नवरात्रि हैं, जिसे देशभर में पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है | नवरात्रि का मतलब है नौ रातें | नौ दिन तक चलने वाले शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है | देवी मां के पावन 9 दिन का पर्व शारदीय नवरात्रि आश्विन मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को 26 सितम्बर 2022 से आरंभ होगा | 4 अक्टूबर तक चलने वाले इन दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है | 5 अक्टूबर को धूमधाम के साथ विजयदशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा | इसी दिन दुर्गा विसर्जन भी किया जाएगा | शास्त्रों में मां दुर्गा के नौ रूपों का बखान किया गया है | नवरात्र के दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने से विशेष पुण्य मिलता है | मान्यता है कि मां दुर्गा अपने भक्तों के हर कष्ट हर लेती हैं |

नवरात्रि के नौवें दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा और अर्चाना का विधान है | जैसा कि इनके नाम से स्पष्ट हो रहा है कि मां सभी प्रकार की सिद्धी और मोक्ष को देने वाली हैं | मां सिद्धिदात्री की पूजा देव, यक्ष, किन्नर, दानव, ऋषि-मुनि, साधक और गृहस्थ आश्रम में जीवनयापन करने वाले पूजा करते हैं | नवरात्र के अंतिम दिन मां की पूजा पूरे विधि विधान के साथ करने वाले उपासक की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं | साथ ही यश, बल और धन की भी प्राप्ति होती है |

देवी भागवत पुराण के अनुसार, महालक्ष्मी की तरह मां सिद्धिदात्री कमल पर विराजमान रहती हैं और इनके चार हाथ हैं | जिनमें वह शंख, गदा, कमल का फूल तथा चक्र धारण किए रहती हैं | सिद्धिदात्री देवी सरस्वती का भी स्वरूप हैं, जो श्वेत वस्त्रालंकार से युक्त महाज्ञान और मधुर स्वर से अपने भक्तों को सम्मोहित करती हैं |

नवरात्रि के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा कैसे करें ?

भगवान शिव ने इनके लिए की थी तपस्या:-

इस दिन शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले साधक को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है | सृष्टि में कुछ भी उसके लिए अगम्य नहीं रह जाता है | ब्रह्मांड पर पूर्ण विजय प्राप्त करने की सामर्थ्य उसमें आ जाती है | मार्कण्डेय पुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व- ये आठ सिद्धियां होती हैं | ब्रह्मवैवर्तपुराण के श्रीकृष्ण जन्म खंड में यह संख्या अठारह बताई गई है | इनके नाम इस प्रकार हैं –

  • अणिमा
  • लघिमा
  • प्राप्ति
  • प्राकाम्य
  • महिमा
  • ईशित्व,वाशित्व
  • सर्वकामावसायिता
  • सर्वज्ञत्व
  • दूरश्रवण
  • परकायप्रवेशन
  • वाक्‌सिद्धि
  • कल्पवृक्षत्व
  • सृष्टि
  • संहारकरणसामर्थ्य
  • अमरत्व
  • सर्वन्यायकत्व
  • भावना
  • सिद्धि

पुराणों के अनुसार, भगवान शिव ने भी इन्ही देवी की कठिन तपस्या कर इनसे आठों सिद्धियों को प्राप्त किया था | साथ ही मां सिद्धिदात्री की कृपा से महादेव का आधा शरीर देवी की हो गई थी और वह अर्धनारीश्वर कहलाए | नवरात्र के नौवें दिन इनकी पूजा के बाद ही नवरात्र का समापन माना जाता है | नवें दिन सिद्धिदात्री की पूजा करने के लिए नवाहन का प्रसाद और नवरस युक्त भोजन और नौ प्रकार के फल फूल आदि का अर्पण करके नवरात्र का समापन करना चाहिए |

इस तरह करें कन्या पूजन:-

मां सिद्धिदात्री की पूजा के बाद कुंवारी कन्याओं का घर बुलाकर उनके पैर धोकर आशीर्वाद लेना चाहिए और फिर मंत्र द्वारा पंचोपचार पूजन करना चाहिए | इसके बाद सभी कन्याओं को हलवा-पूरी, चने और सब्जी दें | भोजन कराने के बाद उनका लाल चुनरी उड़ाएं और फिर रोली-तिलक लगाकर कलावा बांधें | फिर समार्थ्यनुसार कोई भेंट व दक्षिणा देकर चरण स्पर्श करते हुए विदा करना चाहिए | जो भक्त कन्या पूजन कर नवरात्र के व्रत का समापन करता है, उसे धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है |

मां सिद्धिदात्री का ध्यान मंत्र:-

वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
कमलस्थितां चतुर्भुजा सिद्धीदात्री यशस्वनीम्॥

सिद्धगंधर्वयक्षाद्यै:, असुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात्, सिद्धिदा सिद्धिदायिनी।।

अर्थात सिद्ध, गंधर्व, यक्ष, असुर और अमरता प्राप्त देवों के द्वारा भी पूजित किए जाने वाली और सिद्धियों को प्रदान करने की शक्ति से युक्त मां सिद्धिदात्री हमें भी आठों सिद्धियां प्रदान करें और अपना आशीर्वाद हमेशा हम पर बनाए रखें |