Shardiya Navratri 2022 का पांचवा दिन : मां स्कंदमाता की कैसे करें पूजा

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माँ स्कंदमाता
माँ स्कंदमाता 2020 puja

माँ स्कंदमाता:-

नवरात्रि के पांचवे दिन दुर्गा मां के स्कंदमाता रूप की पूजा की जाती है | शास्त्रों के अनुासर, इनकी कृपा से मूढ़ भी ज्ञानी हो जाता है | पहाड़ों पर रहकर सांसारिक जीवों में नवचेतना का निर्माण करने वालीं देवी हैं स्कंदमाता |

हिंदी पंचाग के अनुसार साल में नवरात्रि 4 बार मनाई जाती है | दो बार गुप्त नवरात्रि और दो नवरात्रि को मुख्य रूप से मनाया जाता है | इसमें चैत्र और शारदीय मुख्य नवरात्रि हैं, जिसे देशभर में पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है | नवरात्रि का मतलब है नौ रातें | नौ दिन तक चलने वाले शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है |

देवी मां के पावन दिन का पर्व शारदीय नवरात्रि आश्विन मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को 26 सितम्बर 2022 से आरंभ होगा | अक्टूबर तक चलने वाले इन दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है | अक्टूबर को धूमधाम के साथ विजयदशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा | इसी दिन दुर्गा विसर्जन भी किया जाएगा | शास्त्रों में मां दुर्गा के नौ रूपों का बखान किया गया है | नवरात्र के दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने से विशेष पुण्य मिलता है | मान्यता है कि मां दुर्गा अपने भक्तों के हर कष्ट हर लेती हैं |

स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता के कारण इन्हें स्कंदमाता नाम से भी जाना जाता है | इनकी उपासना से भक्त की सारी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं | भक्त को मोक्ष मिलता है| वहीं, मान्‍यता ये भी है कि इनकी पूजा करने से संतान योग की प्राप्‍ति होती है |

स्कंदमाता की पूजा करने से शत्रुओं और विकट परिस्थितियों पर विजय प्राप्त होता है, वहीं, नि:संतान दंपत्तियों को संतान सुख मिलता है | जो मोक्ष की कामना करते हैं, उनको देवी मोक्ष प्रदान करती हैं | माता को पहली प्रसूता भी कहा जाता है | 

मां दुर्गा के पंचम स्वरूप को स्कंदमाता के रूप में पूजते हैं | माता स्कंदमाता शेर पर सवार रहती हैं |उनकी चार भुजाएं हैं | ये दाईं तरफ की ऊपर वाली भुजा से स्कंद को गोद में पकड़े हुए हैं | नीचे वाली भुजा में कमल का पुष्प धारण किए हुए हैं | मां का ऐसा स्वरूप भक्तों के लिए कल्याण कारी है |

कहते हैं कि सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी की पूजा से तेज और कांति की प्राप्ति होती है | वात्सल्य की देवी मां कमल आसान पर विराजमान होकर अपनी चार भुजाओं में से एक में भगवान स्कन्द को गोद लिए हैं | दूसरी व चौथी भुजा में कमल का फूल, तीसरी भुजा से आशीर्वाद दे रही है | इनको इनके पुत्र के नाम से भी पुकारा जाता है |

कौन हैं माँ स्कंदमाता:-

पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार देवी स्‍कंदमाता ही हिमालय की पुत्री हैं और इस वजह से इन्‍हें पार्वती कहा जाता है | महादेव की पत्‍नी होने के कारण इन्‍हें माहेश्‍वरी भी कहते हैं | इनका वर्ण गौर है इसलिए इन्‍हें देवी गौरी के नाम से भी जाना जाता है |

मां कमल के पुष्प पर विराजित अभय मुद्रा में होती हैं इसलिए इन्‍हें पद्मासना देवी और विद्यावाहिनी दुर्गा भी कहा जाता है | भगवान स्कंद यानी कार्तिकेय की माता होने के कारण इनका नाम स्‍कंदमाता पड़ा | स्‍कंदमाता प्रसिद्ध देवासुर संग्राम में देवताओं की सेनापति बनी थीं | इस वजह से पुराणों में कुमार और शक्ति कहकर इनकी महिमा का वर्णन किया गया है |

माँ स्कंदमाता

पूजा विधि:- माँ स्कंदमाता

नवरात्रि के पांचवे दिन स्नान आदि से निवृत हो जाएं और फिर स्कंदमाता का स्मरण करें | इसके पश्चात स्कंदमाता को अक्षत्, धूप, गंध, पुष्प अर्पित करें | उनको बताशा, पान, सुपारी, लौंग का जोड़ा, किसमिस, कमलगट्टा, कपूर, गूगल, इलायची आदि भी चढ़ाएं। फिर स्कंदमाता की आरती करें | स्कंदमाता की पूजा करने से भगवान कार्तिकेय भी प्रसन्न होते हैं |

स्कंदमाता की पूजा का श्रेष्ठ समय है दिन का दूसरा पहर | इनकी पूजा चंपा के फूलों से करनी चाहिए | इन्हें मूंग से बने मिष्ठान का भोग लगाएं | श्रृंगार में इन्हें हरे रंग की चूडियां चढ़ानी चाहिए | इनकी उपासना से मंदबुद्धि व्यक्ति को बुद्धि व चेतना प्राप्त होती है, पारिवारिक शांति मिलती है, इनकी कृपा से ही रोगियों को रोगों से मुक्ति मिलती है तथा समस्त व्याधियों का अंत होता है | देवी स्कंदमाता की साधना उन लोगों के लिए सर्वश्रेष्ठ है जिनकी आजीविका का संबंध मैनेजमेंट, वाणिज्य, बैंकिंग अथवा व्यापार से है |

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