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Pitru Paksha 2021: आज से श्राद्ध पक्ष शुरू, 16 दिन तक भूलकर भी न करें ये काम

श्राद्ध पक्ष Pitru Paksha 2021:-

पौराणिक ग्रंथों में वर्णित किया गया है कि देवपूजा से पहले जातक को अपने पूर्वजों की पूजा करनी चाहिए | पितरों के प्रसन्न होने पर देवता भी प्रसन्न होते हैं | यही कारण है कि भारतीय संस्कृति में जीवित रहते हुए घर के बड़े बुजुर्गों का सम्मान और मृत्योपरांत श्राद्ध कर्म किये जाते हैं | इसके पीछे यह मान्यता भी है कि यदि विधिनुसार पितरों का तर्पण न किया जाये तो उन्हें मुक्ति नहीं मिलती और उनकी आत्मा मृत्युलोक में भटकती रहती है | पितृ पक्ष को मनाने का ज्योतिषीय कारण भी है | ज्योतिषशास्त्र में पितृ दोष काफी अहम माना जाता है | जब जातक सफलता के बिल्कुल नजदीक पंहुचकर भी सफलता से वंचित होता हो, संतान उत्पत्ति में परेशानियां आ रही हों, धन हानि हो रही हों तो ज्योतिष शास्त्र पितृदोष से पीड़ित होने की प्रबल संभावनाएं होती हैं | इसलिये पितृदोष से मुक्ति के लिये भी पितरों की शांति आवश्यक मानी जाती है |

भाद्रपद मास की पूर्णिमा से पितृ पक्ष की शुरुआत हो जाती है | आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि तक पितृ पक्ष रहता है | हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का बहुत अधिक महत्व होता है | पितृ पक्ष को श्राद्ध पक्ष के नाम से भी जाना जाता है | पितृ पक्ष में पितरों का श्राद्ध और तर्पण किया जाता है | इस पक्ष में विधि- विधान से पितर संबंधित कार्य करने से पितरों का आर्शावाद प्राप्त होता है और पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है | इस साल 20 सितंबर 2021 से पितृ पक्ष आरंभ हो जाएगा और 6 सितंबर 2021 को पितृ पक्ष का समापन हो जाएगा |

हिंदू धर्म में पितृ पक्ष में पूर्वजों को याद कर उन्हें आभार व्यक्त करने की परंपरा है, पितृ पक्ष में उन्हें सम्मान प्रदान किया जाता है | पितृ पक्ष यानि श्राद्ध का समापन अमावस्या की तिथि में किया जाता है | इस दिन को किया जाने वाला श्राद्ध सर्वपितृ अमावस्या या महालय अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है | पितृ पक्ष में महालय अमावस्या सबसे महत्वपूर्ण माना गया है |

पितृ पक्ष में श्राद्ध की तिथियां-

  • पूर्णिमा श्राद्ध – 20 सितंबर 2021-  
  • प्रतिपदा श्राद्ध – 21 सितंबर 2021
  • द्वितीया श्राद्ध – 22 सितंबर 2021
  • तृतीया श्राद्ध – 23 सितंबर 2021
  • चतुर्थी श्राद्ध – 24 सितंबर 2021,
  • पंचमी श्राद्ध – 25 सितंबर 2021
  • षष्ठी श्राद्ध – 27 सितंबर 2021
  • सप्तमी श्राद्ध – 28 सितंबर 2021
  • अष्टमी श्राद्ध- 29 सितंबर 2021
  • नवमी श्राद्ध – 30 सितंबर 2021  
  • दशमी श्राद्ध – 1 अक्तूबर 2021
  • एकादशी श्राद्ध – 2 अक्तूबर 2021
  • द्वादशी श्राद्ध- 3 अक्तूबर 2021
  • त्रयोदशी श्राद्ध – 4 अक्तूबर 2021
  • चतुर्दशी श्राद्ध- 5 अक्तूबर 2021
  • अमावस्या (सर्वपितृ) श्राद्ध- 6 अक्तूबर 2021

पितृ पक्ष में मृत्यु की तिथि के अनुसार श्राद्ध किया जाता है | अगर किसी मृत व्यक्ति की तिथि ज्ञात न हो तो ऐसी स्थिति में अमावस्या तिथि पर श्राद्ध किया जाता है | इस दिन सर्वपितृ श्राद्ध योग माना जाता है | इस साल 26 सितंबर को श्राद्ध तिथि नहीं है |

पितृपक्ष के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें:-

यह माना जाता है कि इन 16 दिनों की अवधि के दौरान सभी पूर्वज अपने परिजनों को आशीर्वाद देने के लिए पृथ्वी पर आते हैं | उन्हें प्रसन्न करने के लिए तर्पण, श्राद्ध और पिंड दान किया जाता है | इन अनुष्ठानों को करना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे किसी व्यक्ति के पूर्वजों को उनके इष्ट लोकों को पार करने में मदद मिलती है | वहीं जो लोग अपने पूर्वजों का पिंडदान नहीं करते हैं उन्हें पितृ ऋण और पितृदोष सहना पड़ता है | इसलिए श्राद्धपक्ष के दौरान यदि आप अपने पितरों का श्राद्ध कर रहे हैं तो इन बातों के बारे में खास ध्यान रखना चाहिए:

शास्त्रों के अनुसार बड़े पुत्र और सबसे छोटे पुत्र को श्राद्ध करने का अधिकार है, इसके अलावा विशेष परिस्थिति में किसी भी पुत्र को श्राद्ध करने का अधिकार है | पितरों का श्राद्ध करने से पूर्व स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। कुश घास से बनी अंगूठी पहनें | इसका उपयोग पूर्वजों का आह्वान करने के लिए किया जाता है | पिंड दान के एक भाग के रूप में जौ के आटे, तिल और चावल से बने गोलाकार पिंड को भेंट करें |

शास्त्रसम्मत मान्यता यही है कि किसी सुयोग्य विद्वान ब्राह्मण द्वारा ही श्राद्ध कर्म (पिंड दान, तर्पण) करवाना चाहिये | श्राद्ध कर्म में पूरी श्रद्धा से ब्राह्मणों को तो दान दिया ही जाता है साथ ही यदि किसी गरीब, जरूरतमंद की सहायता भी आप कर सकें तो बहुत पुण्य मिलता है | इसके साथ-साथ गाय, कुत्ते, कौवे आदि पशु-पक्षियों के लिये भी भोजन का एक अंश जरुर डालना चाहिये |

श्राद्धपक्ष के दौरान न करें ये काम:-

  • शास्त्रों के अनुसार पितृपक्ष के दिनों में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
  • इस दौरान कोई वाहन या नया सामान न खरीदें |
  • इसके अलावा, मांसाहारी भोजन का सेवन बिलकुल न करें | श्राद्ध कर्म के दौरान आप जनेऊ पहनते हैं तो पिंडदान के दौरान उसे बाएं की जगह दाएं कंधे पर रखें |
  • श्राद्ध कर्मकांड करने वाले व्यक्ति को अपने नाखून नहीं काटने चाहिए | इसके अलावा उसे दाढ़ी या बाल भी नहीं कटवाने चाहिए |
  • तंबाकू, धूम्रपान सिगरेट या शराब का सेवन न करें | इस तरह के बुरे व्यवहार में लिप्त न हों | यह श्राद्ध कर्म करने के फलदायक परिणाम को बाधित करता है |
  • यदि संभव हो, तो सभी 16 दिनों के लिए घर में चप्पल न पहनें |
  • ऐसा माना जाता है कि पितृ पक्ष के पखवाड़े में पितृ किसी भी रूप में आपके घर में आते हैं | इसलिए, इस पखवाड़े में, किसी भी पशु या इंसान का अनादर नहीं किया जाना चाहिए | बल्कि, आपके दरवाजे पर आने वाले किसी भी प्राणी को भोजन दिया जाना चाहिए और आदर सत्कार करना चाहिए |
  • पितृ पक्ष में श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को ब्रह्मचर्य का सख्ती से पालन करना चाहिए |
  • पितृ पक्ष में कुछ चीजों को खाना मना है, जैसे- चना, दाल, जीरा, काला नमक, लौकी और खीरा, सरसों का साग आदि नहीं खाना चाहिए |
  • अनुष्ठान के लिए लोहे के बर्तन का उपयोग न करें | इसके बजाय अपने पूर्वजों को खुश करने के लिए सोने, चांदी, तांबे या पीतल के बर्तन का उपयोग  करें |
  • यदि किसी विशेष स्थान पर श्राद्ध कर्म किया जाता है तो यह विशेष फल देता है | कहा जाता है कि गया, प्रयाग, बद्रीनाथ में श्राद्ध करने से पितरों को मोक्ष मिलता है | जो किसी भी कारण से इन पवित्र तीर्थों पर श्राद्ध कर्म नहीं कर सकते हैं वे अपने घर के आंगन में किसी भी पवित्र स्थान पर तर्पण और पिंड दान कर सकते हैं |
  • श्राद्ध कर्म के लिए काले तिल का उपयोग करना चाहिए | पिंडदान करते वक्त तुलसी जरूर रखें |
  • श्राद्ध कर्म शाम, रात, सुबह या अंधेरे के दौरान नहीं किया जाना चाहिए |
  • पितृ पक्ष में, गायों, कुत्तों, चींटियों और ब्राह्मणों को यथासंभव भोजन कराना चाहिए |
  • इस प्रकार विधि विधान से श्राद्ध पूजा कर जातक पितृ ऋण से मुक्ति पा लेता है व श्राद्ध पक्ष में किये गये उनके श्राद्ध से पितर प्रसन्न होते हैं व आपके घर परिवार व जीवन में सुख, समृद्धि होने का आशीर्वाद देते हैं |

Frequently Asked Questions (FAQ):-

श्राद्ध में चावल की खीर ही क्यों बनाई जाती है?

पितृ पक्ष में पके हुआ अन्न दान का विशेष महत्व है | चावल को हविष्य अन्न यानी देवताओं का अन्न माना जाता है | इसलिए चावल की ही खीर बनाई जाती है | धान यानी चावल ऐसा अनाज है, जो पुराना होने पर भी खराब नहीं होता | जितना पुराना होता है, उतना ही अच्छा माना जाता है | चावल के इसी गुण के कारण इसे जन्म से मृत्यु तक के संस्कारों में शामिल किया जाता है |

चावल, जौ और काले तिल से ही क्यों बनाए जाते हैं पिंड?

चावल को हविष्य अन्न माना गया है | हविष्य यानी हवन में इस्तेमाल होने वाला। देवताओं और पितरों को चावल प्रिय है | इसलिए यह पहला भोग होता है | अगर चावल न हो तो जौ के आटे के पिंड बना सकते हैं | ये भी न हो तो काले तिल से पिंड बनाकर पितरों को अर्पित कर सकते हैं | ये तीनों ही हवन में उपयोग होते हैं |

श्राद्ध में कौए-गाय को भोजन क्यों दिया जाता है?

सभी पितरों का वास पितृलोक और कुछ समय यमलोक भी रहता है | पितृ पक्ष में यम बलि देने का विधान है | यम बलि कौए को भोजन के रूप में दी जाती है | कौए को यमराज का संदेश वाहक माना गया है | उन्हीं की वजह से कौए को भोजन दिया जाता है | गाय में सभी देवी-देवताओं का वास है | इस वजह से गाय को भी भोजन दिया जाता है |

Pitru Paksha 2021: कोरोना काल में जिनका अंतिम संस्कार ठीक से नहीं हो पाया, उनकी शांति के लिए घर में कैसे करें श्राद्ध

Pitru Paksha 2021:-

भाद्रपद मास की पूर्णिमा से पितृ पक्ष की शुरुआत हो जाती है | आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि तक पितृ पक्ष रहता है | हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का बहुत अधिक महत्व होता है | पितृ पक्ष को श्राद्ध पक्ष के नाम से भी जाना जाता है | पितृ पक्ष में पितरों का श्राद्ध और तर्पण किया जाता है | इस पक्ष में विधि- विधान से पितर संबंधित कार्य करने से पितरों का आर्शावाद प्राप्त होता है और पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है | इस साल 20 सितंबर 2021 से पितृ पक्ष आरंभ हो जाएगा और 6 सितंबर 2021 को पितृ पक्ष का समापन हो जाएगा |

हिंदू धर्म में पितृ पक्ष में पूर्वजों को याद कर उन्हें आभार व्यक्त करने की परंपरा है, पितृ पक्ष में उन्हें सम्मान प्रदान किया जाता है | पितृ पक्ष यानि श्राद्ध का समापन अमावस्या की तिथि में किया जाता है | इस दिन को किया जाने वाला श्राद्ध सर्वपितृ अमावस्या या महालय अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है | पितृ पक्ष में महालय अमावस्या सबसे महत्वपूर्ण माना गया है |

पितृ पक्ष में श्राद्ध की तिथियां-

  • पूर्णिमा श्राद्ध – 20 सितंबर 2021-  
  • प्रतिपदा श्राद्ध – 21 सितंबर 2021
  • द्वितीया श्राद्ध – 22 सितंबर 2021
  • तृतीया श्राद्ध – 23 सितंबर 2021
  • चतुर्थी श्राद्ध – 24 सितंबर 2021,
  • पंचमी श्राद्ध – 25 सितंबर 2021
  • षष्ठी श्राद्ध – 27 सितंबर 2021
  • सप्तमी श्राद्ध – 28 सितंबर 2021
  • अष्टमी श्राद्ध- 29 सितंबर 2021
  • नवमी श्राद्ध – 30 सितंबर 2021  
  • दशमी श्राद्ध – 1 अक्तूबर 2021
  • एकादशी श्राद्ध – 2 अक्तूबर 2021
  • द्वादशी श्राद्ध- 3 अक्तूबर 2021
  • त्रयोदशी श्राद्ध – 4 अक्तूबर 2021
  • चतुर्दशी श्राद्ध- 5 अक्तूबर 2021
  • अमावस्या (सर्वपितृ) श्राद्ध- 6 अक्तूबर 2021

पितृ पक्ष में मृत्यु की तिथि के अनुसार श्राद्ध किया जाता है | अगर किसी मृत व्यक्ति की तिथि ज्ञात न हो तो ऐसी स्थिति में अमावस्या तिथि पर श्राद्ध किया जाता है | इस दिन सर्वपितृ श्राद्ध योग माना जाता है | इस साल 26 सितंबर को श्राद्ध तिथि नहीं है |

श्राद्ध में जरूरी चीजें:-

श्राद्ध में तर्पण, पिंडदान और ब्राह्मण भोजन, ये तीन चीजें खास तौर से होती हैं | पूजा पाठ की सभी जरूरी चीजों के अलावा तर्पण के लिए खास तौर से साफ बर्तन, जौ, तिल, चावल, कुशा घास, दूध और पानी की जरूरत होती है | पिंडदान के लिए तर्पण में बताई गई चीजों के साथ ही चावल और उड़द का आटा भी जरूरी होता है | वहीं, ब्राह्मण भोजन के लिए बिना लहसुन-प्याज और कम तेल, मिर्च-मसाले का सात्विक भोजन बनाना चाहिए | जिसमें हविष्य अन्न यानी चावल जरूर होने चाहिए, इसलिए श्राद्ध पक्ष में खीर बनाई जाती है |

  • रोली
  • सिंदूर
  • छोटी सुपारी
  • रक्षा सूत्र
  • चावल
  • जनेऊ
  • कपूर
  • हल्दी
  • देसी घी
  • माचिस
  • शहद
  • काला तिल
  • तुलसी पत्ता
  • पान का पत्ता
  • जौ
  • हवन सामग्री
  • गुड़
  • मिट्टी का दीया
  • रुई बत्ती
  • अगरबत्ती
  • दही
  • जौ का आटा
  • गंगाजल
  • खजूर
  • केला
  • सफेद फूल
  • उड़द
  • गाय का दूध
  • घी
  • खीर
  • स्वांक के चावल
  • मूंग
  • गन्ना

घर पर श्राद्ध करने की विधि:

  • घर पर ही श्राद्ध करने के लिए श्राद्ध वाली तिथि पर सूर्योदय से पहले उठकर नहाएं |
  • साफ़ कपडे पहन कर पितरों की तृप्ति के लिए श्राद्ध और दान का संकल्प लें | श्राद्ध होने तक कुछ न खाएं |
  • दिन के आठवें मुहूर्त यानी कुतुप काल में श्राद्ध करें जो की 11:36 से 12:24 तक होता है |
  • दक्षिण दिशा में मुँह रखकर बाएं पैर को मोड़कर घुटने को जमीन पर टिका कर बैठ जाएँ |
  • तांबे के चौड़े बर्तन में जौ, तिल, चावल, गाय का कच्चा दूध, गंगाजल, सफ़ेद फूल और पानी डालें |
  • हाथ में कुशा, घास रखें और उस जल को हाथों में भरकर सीधे हाथ के अंगूठे से उसी बर्तन में गिराएं। इस तरह ११ बार करते हुए पितरों का ध्यान करें |
  • पितरों के लिए अग्नि में खीर अर्पण करें। इसके बाद पंचबलि यानी देवता, गाय, कुत्ते, कौए और चीटीं के लिए अलग से भोजन निकल लें |
  • ब्राह्मण भोजन कराएं और श्रद्धा के अनुसार दक्षिणा और अन्य चीजों का दान करें |

महामारी में मृत लोगों के लिए सूर्य अर्ध्य:-

कोरोना महामारी की वजह से कई लोगों का अंतिम संस्कार विधि विधान से नहीं हो पाया है उनके लिए पुत्तल-दाह की क्रिया बताई गई है |

  • इसमें श्राद्ध पक्ष के दौरान मृत व्यक्ति की मृत्यु तिथि पर उड़द के आटे से उस व्यक्ति का पुतला बनाकर पूरे विधि विधान से दाह संस्कार किया जाता है |
  • फिर उसके लिए पिंडदान भी किया जाता है। इसके बाद सर्वपितृ अमावस्या पर उस व्यक्ति के लिए श्राद्ध भी किया जा सकता है |
  • जिन लोगों का अंतिम संस्कार विधि विधान से न हो पाया हो उनकी आत्मा की शान्ति के लिए ग्रंथों में सूर्य पूजा बताई गई है |
  • इसके लिए तांबे के लोटे में जल भरकर श्राद्धपक्ष में हर दिन उगते हुए सूरज को जल चढ़ाएं और यमराज से मृतक की आत्मशांति की कामना करनी चाहिए | ऐसा करने से राजा याम प्रसन्न होते हैं |

Frequently Asked Questions (FAQ):-

श्राद्ध में चावल की खीर ही क्यों बनाई जाती है?

पितृ पक्ष में पके हुआ अन्न दान का विशेष महत्व है | चावल को हविष्य अन्न यानी देवताओं का अन्न माना जाता है | इसलिए चावल की ही खीर बनाई जाती है | धान यानी चावल ऐसा अनाज है, जो पुराना होने पर भी खराब नहीं होता | जितना पुराना होता है, उतना ही अच्छा माना जाता है | चावल के इसी गुण के कारण इसे जन्म से मृत्यु तक के संस्कारों में शामिल किया जाता है |

चावल, जौ और काले तिल से ही क्यों बनाए जाते हैं पिंड?

चावल को हविष्य अन्न माना गया है | हविष्य यानी हवन में इस्तेमाल होने वाला। देवताओं और पितरों को चावल प्रिय है | इसलिए यह पहला भोग होता है | अगर चावल न हो तो जौ के आटे के पिंड बना सकते हैं | ये भी न हो तो काले तिल से पिंड बनाकर पितरों को अर्पित कर सकते हैं | ये तीनों ही हवन में उपयोग होते हैं |

श्राद्ध में कौए-गाय को भोजन क्यों दिया जाता है?

सभी पितरों का वास पितृलोक और कुछ समय यमलोक भी रहता है | पितृ पक्ष में यम बलि देने का विधान है | यम बलि कौए को भोजन के रूप में दी जाती है | कौए को यमराज का संदेश वाहक माना गया है | उन्हीं की वजह से कौए को भोजन दिया जाता है | गाय में सभी देवी-देवताओं का वास है | इस वजह से गाय को भी भोजन दिया जाता है |

Pitru Paksha 2021: आज है पितृपक्ष का पहला दिन, पिंडदान और तर्पण से करें पितरों के मोक्ष की कामना

Pitru Paksha 2021:-

भाद्रपद मास की पूर्णिमा से पितृ पक्ष की शुरुआत हो जाती है | आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि तक पितृ पक्ष रहता है | हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का बहुत अधिक महत्व होता है | पितृ पक्ष को श्राद्ध पक्ष के नाम से भी जाना जाता है | पितृ पक्ष में पितरों का श्राद्ध और तर्पण किया जाता है | इस पक्ष में विधि- विधान से पितर संबंधित कार्य करने से पितरों का आर्शावाद प्राप्त होता है और पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है | इस साल 20 सितंबर 2021 से पितृ पक्ष आरंभ हो जाएगा और 6 सितंबर 2021 को पितृ पक्ष का समापन हो जाएगा |

हिंदू धर्म में पितृ पक्ष में पूर्वजों को याद कर उन्हें आभार व्यक्त करने की परंपरा है, पितृ पक्ष में उन्हें सम्मान प्रदान किया जाता है | पितृ पक्ष यानि श्राद्ध का समापन अमावस्या की तिथि में किया जाता है | इस दिन को किया जाने वाला श्राद्ध सर्वपितृ अमावस्या या महालय अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है | पितृ पक्ष में महालय अमावस्या सबसे महत्वपूर्ण माना गया है |

पितृ पक्ष में श्राद्ध की तिथियां-

  • पूर्णिमा श्राद्ध – 20 सितंबर 2021-  
  • प्रतिपदा श्राद्ध – 21 सितंबर 2021
  • द्वितीया श्राद्ध – 22 सितंबर 2021
  • तृतीया श्राद्ध – 23 सितंबर 2021
  • चतुर्थी श्राद्ध – 24 सितंबर 2021,
  • पंचमी श्राद्ध – 25 सितंबर 2021
  • षष्ठी श्राद्ध – 27 सितंबर 2021
  • सप्तमी श्राद्ध – 28 सितंबर 2021
  • अष्टमी श्राद्ध- 29 सितंबर 2021
  • नवमी श्राद्ध – 30 सितंबर 2021  
  • दशमी श्राद्ध – 1 अक्तूबर 2021
  • एकादशी श्राद्ध – 2 अक्तूबर 2021
  • द्वादशी श्राद्ध- 3 अक्तूबर 2021
  • त्रयोदशी श्राद्ध – 4 अक्तूबर 2021
  • चतुर्दशी श्राद्ध- 5 अक्तूबर 2021
  • अमावस्या (सर्वपितृ) श्राद्ध- 6 अक्तूबर 2021

पितृ पक्ष में मृत्यु की तिथि के अनुसार श्राद्ध किया जाता है | अगर किसी मृत व्यक्ति की तिथि ज्ञात न हो तो ऐसी स्थिति में अमावस्या तिथि पर श्राद्ध किया जाता है | इस दिन सर्वपितृ श्राद्ध योग माना जाता है | इस साल 26 सितंबर को श्राद्ध तिथि नहीं है |

पितृ पक्ष का महत्व:-

शास्त्र अनुसार बताया जाता है कि मान्यता के अनुसार जो हमारे पूर्वज अपनी देह का त्याग कर देते है, उनकी आत्मा की शांति के लिए पितृ पक्ष में तर्पण किया जाता है, इस क्रिया को श्राद्ध भी कहा जाता है | श्राद्ध का अर्थ होता है, श्रद्धा पूर्वक | माना जाता है कि पितृ पक्ष यानि श्राद्ध के दिनों में मृत्युलोक के देवता यमराज पूर्वजों की आत्मा को मुक्त देते हैं, ताकि वे अपने परिजनों के यहां जाकर तर्पण ग्रहण कर सकें |

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पितृ पक्ष में पितरों का तर्पण करने से पितृ दोष दूर होता है | जिस व्यक्ति की जन्म कुंडली में पितृ दोष होता है उसे जीवन में परेशानियों का सामना करना पड़ता है, मान सम्मान प्राप्त नहीं होता है, धन की बचत नहीं होती है, रोग और बाधाएं उसका पीछा नहीं छोड़ती हैं, इसलिए पितृ पक्ष में पितरों का तर्पण और मोक्षनगरी गयाजी में पिंडदान करने से पितृ दोष दूर होता है और परेशानियों से मुक्ति मिलती है |

पितर पक्ष में अपने पितरों के लिए श्रीमद्भागवत कथा का पाठ भी कराये | भागवत जी के पाठ से भी पितर प्रशन्न होते है धनधान्य, सुख शांति का आशीर्वाद देते हैं | पितर पक्ष में पितर गायत्री, त्रिपिंडी श्राद,नारायणबलि श्राद्ध गयाजी में पित्रदोष पूजा दान यह कार्य शुभ रहते है |

मोक्षधाम गयाजी बिहार की विशेषता:-

श्राद्ध कर्म या तर्पण करने के भारत में कई स्थान है, लेकिन पवित्र फल्गु नदी के तट पर बसे प्राचीन गया शहर के देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी पिंडदान को लेकर अलग पहचान है | पुराणों के अनुसार पितरो के लिए खास मोक्षधाम गयाजी आकर पिंडदान एवं तर्पण करने से पितरो को मोक्ष की प्राप्ति होती है और माता -पिता समेत सात पीढ़ियों का उद्धार होता है | पितृ श्रेणी में मृत पूर्वजों माता -पिता दादा -दादी नाना -नानी सहित सभी पूर्वज शामिल होते है व्यापक दृष्टि से मृत गुरु और आचार्य भी पितृ की श्रेणी में आते है |

गयाजी में कूल 54 स्थान है, जहां पर पिंडदान करें श्रद्धालु जिसमे विष्णुपद मंदिर, फल्गु नदी के किनारे और अक्षयवट पर पिंडदान करना जरूरी माना जाता है, इसके अतिरिक्त प्रेतशिला ब्रह्मकुंड, रामशिला, रामकुंड, कागबलि तीर्थ, सीताकुंड, रामगया और बैतरणी सरोवर आदि भी पिंडदान के प्रमुख स्थान है | यही कारण है कि देश में श्राद्ध के लिए 55 स्थानों को महत्वपूर्ण माना गया है, जिसमे बिहार के गयाजी का स्थान सर्वोपरि है |

तर्पण क्या है:-

पितरों के लिए श्रद्धा से किए गए मुक्ति कर्म को श्राद्ध कहते हैं | वहीं, तृप्त करने की क्रिया और देवताओं, ऋषियों या पितरों को तंडुल या तिल मिश्रित जल अर्पित करने की क्रिया को तर्पण कहते हैं | श्राद्ध पक्ष का माहात्म्य उत्तर व उत्तर-पूर्व भारत में ज्यादा है | तमिलनाडु में आदि अमावसाई, केरल में करिकडा वावुबली और महाराष्ट्र में इसे पितृ पंधरवडा नाम से जानते हैं |

Frequently Asked Questions (FAQ):-

श्राद्ध में चावल की खीर ही क्यों बनाई जाती है?

पितृ पक्ष में पके हुआ अन्न दान का विशेष महत्व है | चावल को हविष्य अन्न यानी देवताओं का अन्न माना जाता है | इसलिए चावल की ही खीर बनाई जाती है | धान यानी चावल ऐसा अनाज है, जो पुराना होने पर भी खराब नहीं होता | जितना पुराना होता है, उतना ही अच्छा माना जाता है | चावल के इसी गुण के कारण इसे जन्म से मृत्यु तक के संस्कारों में शामिल किया जाता है |

चावल, जौ और काले तिल से ही क्यों बनाए जाते हैं पिंड?

चावल को हविष्य अन्न माना गया है | हविष्य यानी हवन में इस्तेमाल होने वाला। देवताओं और पितरों को चावल प्रिय है | इसलिए यह पहला भोग होता है | अगर चावल न हो तो जौ के आटे के पिंड बना सकते हैं | ये भी न हो तो काले तिल से पिंड बनाकर पितरों को अर्पित कर सकते हैं | ये तीनों ही हवन में उपयोग होते हैं |

श्राद्ध में कौए-गाय को भोजन क्यों दिया जाता है?

सभी पितरों का वास पितृलोक और कुछ समय यमलोक भी रहता है | पितृ पक्ष में यम बलि देने का विधान है | यम बलि कौए को भोजन के रूप में दी जाती है | कौए को यमराज का संदेश वाहक माना गया है | उन्हीं की वजह से कौए को भोजन दिया जाता है | गाय में सभी देवी-देवताओं का वास है | इस वजह से गाय को भी भोजन दिया जाता है |

सिर्फ मोबाइल नंबर से धान या खरीफ फसल का पंजीयन कैसे निकालें

EUPARJAN DHAN PANJIYAN STATUS:

MOBILE NUMBER SE MP EUPARJAN KISAN PANJIYAN STATUS जून जुलाई में बोई जाने वाली खरीफ फसल जैसे धान की खरीदी कृषि उपज मंडियों के माध्यम से प्रारम्भ हो चुकी है सभी किसानों को मैसेज के माध्यम से सूचित भी किया जा चुका है जिसके लिए से रजिस्टर्ड मोबाइल या किसान कोड के माध्यम से ऑनलाइन पावती निकलकर आपको उपज मंडी में जमा करना होता है.

कुछ किसान बंधू विचलित हो जाते हैं और परेशान हो जाते है की आखिर ये है क्या चीज़ कहाँ से और किस प्रकार मिलेगी । हम ये तो नहीं कह सकते की सभी किसान बंधू ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैं और वो इस आर्टिकल को पढ़ सकते हैं लेकिन उनके घर में जरूर कोई न कोई होगा जो की इंटरनेट का उपयोग करता होगा यदि आप भी उन्ही में से हैं तो इस पोस्ट को पढ़ें और उनकी मदद करें की कैसे वो ऑनलाइन पंजीयन सम्बंधित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.

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Mpeuparjan (EUPARJAN DHAN PANJIYAN STATUS:)

Google में search करें Mpeuparjan और पहली लिंक पर जाएँ या सीधे Mpeuparjan की वेबसाइट पर जाने के लिए इस लिंक http://mpeuparjan.nic.in का उपयोग करें |अब खरीफ वाले टैब में खरीफ किसान पंजीयन 2021-22 वाली लिंक पर क्लिक करें ।

EUPARJAN DHAN PANJIYAN STATUS

KHARIF PROCURMENT MONITORING SYSTEM 2021-22

STEP 1: अब KHARIF PROCURMENT MONITORING SYSTEM में किसान कोड से पंजीयन सम्बंधित जानकारी प्राप्त करे लिंक पर क्लिक करें ।

EUPARJAN DHAN PANJIYAN STATUS

मोबाइल नंबर या किसान कोड दर्ज करें 

STEP 2 :किसान भाई इस बार मोबाइल नंबर, किसान कोड (रजिस्ट्रेशन के समय प्राप्त हुआ नंबर) के साथ ही किसान की समग्र आईडी के माध्यम से अपना पंजीयन निकाल सकते हैं तथा प्रिंट कर सकते हैं ।

अब आप अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर  एंटर करें इसके बाद सुरक्षा कोड को सामने वाले टेक्स्ट बॉक्स में लिखें और जानकारी देखें बटन पर क्लिक करें ।

STEP 3: अब जैसे ही दिए गए पैरामीटर के हिसाब से आप किसान की जानकारी सर्च करते हैं तो इस प्रकार किसान की कुछ जानकारी स्क्रीन पर प्रदर्शित होने लगेगी।

पंजीयन पर्ची प्रिंट करने के लिए क्लिक करे लिंक पर क्लिक करके आप रजिस्ट्रेशन स्लिप (EUPARJAN DHAN PANJIYAN STATUS:) देख व् प्रिंट कर सकते हैं ।

MP E Uparjan 2021| धान रजिस्ट्रेशन। खरीफ फसल पंजीयन। किसान कोड। आवश्यक दस्तावेज आदि की जानकारी

MP E Uparjan Kharif Procurment Monitoring System 2021-22

MP E Uparjan Kharif Procurment Monitoring System- न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीफ फसल की कृषि उपज मंडियों के माध्यम से खरीदी के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया जल्द ही आरम्भ होने वाली है न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) वह दर है जिस पर सरकार किसानों से फसल खरीदती है। फसल गिरदावरी होने के उपरांत कुछ समय के अंदर हर वर्ष MP E Uparjan पोर्टल के माध्यम से रजिस्ट्रेशन कराया जाता है जिसमे किसान भाई पंजीयन के बाद निर्धारित समय में अपनी फसल खरीदी केंद ले जाकर अपनी फसल की बिक्री करते हैं जिसका भुगतान मध्य प्रदेश सरकार द्वार सीमित समयावधि में DBT के माध्यम से किसान को किया जाता है।

किसान भाइयों के लिए विशेष रूप से इस लेख को लिखा गया है और इस लेख के माध्यम से पंजीयन से लेकर भुगतान मिलने तक होने वाली सभी प्रक्रियाओं में शामिल चरणों को स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है। इसलिए आप से अनुरोध है की इस पोस्ट को सभी किसान भाई तक पहुँचाने का प्रयास करें और आपको लगता है की हमसे कोई चूक हुयी है जिसके बारे में हम आपकी परेशानी को स्पष्ट रूप से दूर नहीं कर प् रहे हैं तो कमेंट के माध्यम से हमें जरूर बताएं ताकि हम इस लेख में सुधार कर सकें।

फसल गिरदावरी से भुगतान प्राप्ति तक के चरण- MP E Uparjan Kharif Procurment Monitoring System

STEP 1: फसल गिरदावरी | FASAL GIRDAWARI
फसल गिरदावरी प्रतिवर्ष की जाने वाली एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जिसमे कृषि भूमि में बोई जाने वाली फसल का जिक्र होता है पटवारी अपने अपने क्षेत्रों में जाकर कृषिभूमि का अवलोकन करते हैं और बोई गयी फसल की प्रविष्टि ऑनलाइन फसल गिरदावरी एप के माध्यम से करते हैं। यह प्रक्रिया फसल बीमा, प्राकृतिक आपदा, से हुए नुकसान की भरपाई, बैंक ऋण, योजनाओं के लाभ लेने आदि में अति महत्वपूर्ण होती है | फसल गिरदावरी की अधिक जानकारी https://saara.mp.gov.in/ से ले जा सकती है|
STEP 2: फसल रजिस्ट्रेशन या ऑनलाइन पंजीयन
फसल गिरदवरी के बाद का दूसरा चरण होता है किसान या फसल पंजीयन जिसमे किसान फसल केंद्र या ऑनलाइन https://mpeuparjan.nic.in/ पोर्टल के माध्यम से अपनी फसल का पंजीयन कराते हैं| फसल रजिस्ट्रेशन या ऑनलाइन पंजीयन कैसे करना है इसकी जानकारी इस पोस्ट के माध्यम से ले सकते हैं
STEP 3: पंजीयन पावती या रसीद की प्राप्ति
फसल का ऑनलाइन पंजीयन कराने के पश्चात जरुरी है की आप पंजीयन की पावती को निकाल कर उसका अवलोकन करें और भरी हुई जानकारी जैसे आपका नाम, आधार क्रमांक, बैंक की जानकारी, फसल की जानकारी आदि प्रविष्टियों को ध्यान से अपने दस्तावेजों से मिलाकर देखें और त्रुटि होने परसुधार हेतु अग्रिम कार्यवाही करें अन्यथा आपके भुगतान में विलम्ब हो सकता है जिससे आपको परेशान होना पड़ सकता है | पंजीयन की पावती कैसे निकाल सकते हैं इस पोस्ट में स्पष्ट रूप से बताया गया है
STEP 4: खरीदी के लिए मैसेज द्वारा सूचना की प्राप्ति
फसल रजिस्ट्रेशन और सुधार के उपरांत किसान भाईओं को रजिस्टर्ड मोबाइल में अपनी फसल बिक्री हेतु मैसेज भेजा जाता है जिसमें निर्धारित फसल बिक्री केंद्र, सीमिति समयवधि का जिक्र होता है उस समयावधि के अंदर किसान को अपनी फसल उस निर्धारित केंद्र में लाना होता है ताकि उसकी तुलाई की जा सके।
STEP 5: फसल बिक्री हेतु खरीदी केंद्र फसल ले जाना
प्राप्त मैसेज के आधार पर फसल को निर्धारित केंद्र में ले जाकर फसल की तुलाई कराई जाती है बिक्री पश्चात आपको एक रसीद दी जाती है जिसमे आपके द्वारा लायी फसल की मात्रा और होने वाले भुगतान का जिक्र रहता है।
STEP 6: भुगतान प्राप्ति DBT के माध्यम से
बिक्री पश्चात सामान्यतः 7 से 15 दिनों के अंदर किसान को उसके द्वारा ऑनलाइन दर्ज कराये गए बैंक खाते में भुगतान की राशि सीधे DBT के माध्यम से ट्रांसफर कर दी जाती है इस तरह पूरी प्रक्रिया छह चरणों में संपन्न होती है और यह प्रक्रिया हर वर्ष इन्ही चरणों में पूरी की जाती है

फसल पंजीयन क्यों कराना चाहिए

प्रतिवर्ष न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी हेतु सरकार MSP तय करती है जो लागत का लगभग डेढ़ गुना होती है। किसानो की आय बढ़ाने हेतु ने MSP तय कर रखा है ताकि किसानो की आय बढ़ सके किसानो को भी पंजीयन कराने पर शुद्ध लाभ होता है समय की बचत होती है, आय बढ़ती है साथ सी बारबार की भागम-भाग से छुटकारा मिलता है, पूरी राशि एक साथ DBT के माध्यम से किसान के बैंक में जमा हो जाती है आदि इसलिए जरुरी है की किसान समय से अपना पंजीयन कराएं और समय और धन दोनों की बचत करें

MP E Uparjan 2021| धान रजिस्ट्रेशन के लिए आवश्यक दस्तावेज

आपको सलाह दी जाती है की पूरे दस्तावेजों की प्रतिलिपि करा लें ताकि जल्दबाजी में आपको बार बार पंजीयन के वक्त परेशानी का सामना न करना पड़े। किसान या फसल पंजीयन हेतु आवश्यक दस्तावेज इस प्रकार हैं।

  1. रजिस्ट्रेशन फॉर्म
  2. बैंक पासबुक प्रतिलिपि
  3. ऋण पुस्तिका की प्रतिलिपि या खसरा या B1 की प्रतिलिपि
  4. आधार कार्ड
  5. समग्र आईडी
  6. भूमि यदि किराये पर ली गयी है तो अनुबंध की प्रतिलिपि

MP E Uparjan पंजीयन के लिए आवश्यक दिशा निर्देश


1.किसान अपना पंजीयन आधार नंबर एवं समग्र आई डी के आधार पर कर सकते है|
2.पंजीयन के लिए आधार अथवा समग्र आई डी का होना अनिवार्य है |
4.यदि किसान के पास आधार नं और समग्र आई डी दोनों उपलब्ध नहीं है, तो कृपया नजदीकी ग्राम पंचायत से संपर्क करें|
5.किसान अपनी परिवार समग्र आई डी से सदस्य समग्र आई डी खोज सकते है| 
यहाँ से खोजे
6.बैंक खाता क्रमांक पासबुक मे से देख कर सही प्रविष्ट करें|
7.यदि आधार नंबर लोड नहीं हो रहा हो तो समग्र आई डी से अपना पंजीयन करें|
8.पंजीयन के पश्चात् पावती प्रिंट करें तथा खरीदी के समय पावती ले जाना अनिवार्य है|
9.पंजीयन के लिए मोबाइल नंबर होना अनिवार्य है|

MP E Uparjan पोर्टल में किसान या फसल पंजीयन कैसे करें

खरीफ फसल बिक्री हेतु ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया की पूरी जानकारी के लिए हमारे लेख का अध्ययन जरूर करें यहाँ पर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को बड़े ही आसान शब्दों में बताने का प्रयास किया गया है साथ ही होने वाली परेशानिओं का भी जिक्र किया गया है। यदि आप भी पंजीयन कर रहे हैं तो किसी भी प्रकार की परेशानी से बचने के लिए इस पोस्ट को जरूर पढ़ें

किसान कोड से पंजीयन की जानकारी कैसे लें

ऑनलाइन पंजीयन की पश्चात प्रत्येक किसान को एक किसान कोड दिया जाता है जिसकी जानकारी आपको आपके पंजीयन पावती में मिल जाती है या रजिस्ट्रेशन के वक्त ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करने वाले व्यक्ति से भी किसान कोड की मांग कर सकते हैं किसान कोड से पंजीयन की पूरी जानकारी कैसे लेंगे हमने अपने लेख के माध्यम से स्टेप बाय स्टेप बताये है किसान कोड से पंजीयन की जानकारी के लिए क्लिक करें

मोबाइल नंबर से पंजीयन की जानकारी कैसे देखें

ऑनलाइन पंजीयन की समय दिए हुए मोबाइल नंबर के माध्यम से किसान पंजीयन की जानकारी आप निकाल सकते हैं। किसान कोड पता न होने की स्थिति में भी आप केवल मोबाइल नंबर से पंजीयन की जानकारी डाउनलोड कर सकते हैं लेकिन कैसे इस बारे में जानने के लिए इस पोस्ट को जरूर पढ़ें सिर्फ मोबाइल नंबर से धान या खरीफ फसल का पंजीयन कैसे निकालें ।

समग्र आईडी से पंजीयन कैसे निकालें

अक्सर हमने देख है है किसान भाइयों को न ही किसान कोड की जानकारी होती है न यह ही उन्होंने कोण सा मोबाइल नंबर पंजीयन के समय दिया था जिससे वो परेशां हो जाते हैं तो आपको चिंतित होने की जरुरत नहीं है क्योंकि फसल पंजीयन की जानकारी अपनी समग्र आईडी के माध्यम से भी जान सकते हैं समग्र आईडी से पंजीयन की जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें

MP E Uparjan App डाउनलोड कैसे करें

द्वारा उसका एंड्राइड एप्लीकेशन भी लांच किया गया है जिसके माध्यम से पंजीयन किया जा सकता है तथा पंजीयन की जानकारी ली जा सकती हैं। इस एप को डाउनलोड करने के लिए आप अपने प्ले स्टोर पे जाएँ और सर्च करें और एप्लीकेशन डाउनलोड करें आप इस डारेक्ट लिंक के माध्यम से भी एप डाउनलोड कर सकते हैं https://play.google.com/store/apps/details?id=in.gov.mapit.kisanapp

MP E Uparjan 2021-22: समग्र नंबर से धान या खरीफ फसल का पंजीयन कैसे निकालें ।

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समग्र नंबर से धान या खरीफ फसल का पंजीयन कैसे निकालें Samagra ID se Kisan Panjiyan Kaise Nikalen: जून जुलाई में बोई जाने वाली खरीफ फसल जैसे धान की खरीदी कृषि उपज मंडियों के माध्यम से प्रारम्भ हो चुकी है सभी किसानों को मैसेज के माध्यम से सूचित भी किया जा चुका है जिसके लिए से रजिस्टर्ड मोबाइल या किसान कोड के माध्यम से ऑनलाइन पावती निकलकर आपको उपज मंडी में जमा करना होता है कुछ किसान बंधू विचलित हो जाते हैं और परेशान हो जाते है की आखिर ये है क्या चीज़ कहाँ से और किस प्रकार मिलेगी ।

हम ये तो नहीं कह सकते की सभी किसान बंधू ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैं और वो इस आर्टिकल को पढ़ सकते हैं लेकिन उनके घर में जरूर कोई न कोई होगा जो की इंटरनेट का उपयोग करता होगा यदि आप भी उन्ही में से हैं तो इस पोस्ट को पढ़ें और उनकी मदद करें की कैसे वो ऑनलाइन पंजीयन सम्बंधित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं

Also Read:- मध्यप्रदेश जनकल्याण पोर्टल में श्रमिक पंजीयन की स्थिति कैसे जाने

Mpeuparjan (EUPARJAN DHAN PANJIYAN STATUS:) समग्र नंबर से धान या खरीफ फसल का पंजीयन कैसे निकालें

Google में search करें Mpeuparjan और पहली लिंक पर जाएँ या सीधे Mpeuparjan की वेबसाइट पर जाने के लिए इस लिंक http://mpeuparjan.nic.in का उपयोग करें |अब खरीफ वाले टैब में खरीफ किसान पंजीयन 2021-22 वाली लिंक पर क्लिक करें ।

Samagra ID se Kisan Panjiyan Kaise Nikalen समग्र नंबर से धान या खरीफ फसल का पंजीयन कैसे निकालें

KHARIF PROCURMENT MONITORING SYSTEM 2021-22

STEP 1: अब KHARIF PROCURMENT MONITORING SYSTEM में किसान कोड से पंजीयन सम्बंधित जानकारी प्राप्त करे लिंक पर क्लिक करें ।

समग्र नंबर से धान या खरीफ फसल का पंजीयन कैसे निकालें

मोबाइल नंबर या किसान कोड दर्ज करें 

STEP 2 :किसान भाई इस बार मोबाइल नंबर, किसान कोड (रजिस्ट्रेशन के समय प्राप्त हुआ नंबर) के साथ ही किसान की समग्र आईडी के माध्यम से अपना पंजीयन निकाल सकते हैं तथा प्रिंट कर सकते हैं ।

अब आप अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर या किसान कोड या की किसान की समग्र आईडी एंटर करें इसके बाद सुरक्षा कोड को सामने वाले टेक्स्ट बॉक्स में लिखें और जानकारी देखें बटन पर क्लिक करें ।

Samagra ID se Kisan Panjiyan Kaise Nikalen

STEP 3: अब जैसे ही दिए गए पैरामीटर के हिसाब से आप किसान की जानकारी सर्च करते हैं तो इस प्रकार किसान की कुछ जानकारी स्क्रीन पर प्रदर्शित होने लगेगी।

EUPARJAN DHAN PANJIYAN STATUS

पंजीयन पर्ची प्रिंट करने के लिए क्लिक करे लिंक पर क्लिक करके आप रजिस्ट्रेशन स्लिप (EUPARJAN DHAN PANJIYAN STATUS:) देख व् प्रिंट कर सकते हैं ।

UP BEd JEE Counselling 2021: आज से शुरू हो रही है फेज़ 1 की काउंसलिंग, ऐसे करें रजिस्‍ट्रेशन

UP BEd JEE Counselling 2021:-

लखनऊ यूनिवर्सिटी ने उत्तर प्रदेश बैचलर ऑफ एजुकेशन, UP BEd JEE Counselling 2021 आज 17 सितंबर 2021 से शुरू कर दी है | काउंसलिंग कुल 4 चरणों में होगी जिसका पहला चरण आज (17 सितंबर 2021) से शुरू होगा | UP BEd JEE Counselling के लिए उम्‍मीदवारों को यूनिवर्सिटी की आधिकारिक वेबसाइट https://www.lkouniv.ac.in/en पर रजिस्‍ट्रेशन भी करना होगा | योग्य एवं इच्छुक उम्मीदवार 20 सितंबर 2021 तक राउंड 1 काउंसलिंग के लिए अपना रजिस्‍ट्रेशन करा सकेंगे |

केवल वे उम्मीदवार जिनकी रैंक 1 से 75000 के भीतर है, वे राउंड 1 काउंसलिंग के लिए उपस्थित हो सकेंगे | यूनिवर्सिटी 25 सितंबर को चरण 1 के लिए सीट अलॉटमेंट लिस्‍ट जारी करेगा | उम्मीदवारों को अपनी सीटें लॉक करनी होंगी और 26 से 28 सितंबर तक लागू शुल्क का भुगतान करना होगा |

यह आनलाइन काउन्सिलिंग प्रक्रिया तीन चक्रों (Main Counselling, Pool Counselling एवं सीधे प्रवेश) में सम्पन्न करायी जायेगी | प्रवेश परीक्षा प्रक्रिया में प्रदेश के 16 राज्य विश्वविद्यालयों के अन्तर्गत 2479 राजकीय, सहायता प्राप्त महाविद्यालय, स्ववित्तपोषित महाविद्यालय सम्मिलित हैं | इन विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के अन्तर्गत बीएड में प्रवेश के लिए सीटों की कुल संख्या 2,35,310 है | इनमें से 7,830 सीटें विश्वविद्यालय, राजकीय, सहायता प्राप्त महाविद्यालयों की हैं जबकि 2,27,480 सीटें स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों की हैं |

इसके अतिरिक्त प्रत्येक महाविद्यालय में आर्थिक रुप से कमजोर वर्ग के अभ्यर्थियों हेतु 10 प्रतिशत अतिरिक्त सीटें उपलब्ध होंगी | ई.डब्ल्यू.एस. की सुविधा सरकारी, अनुदानित, गैर अनुदानित एवं स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में होगी किन्तु अल्पसंख्यक संस्थानों में यह सुविधा नही होगी | काउन्सिलिंग प्रक्रिया के लिए विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों का सम्पूर्ण विवरण एवं प्रवेश प्रक्रिया सम्बन्धी पूरी जानकारी लखनऊ विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है |

UP BEd JEE Counselling 2021: ऐसे करें रजिस्‍ट्रेशन

  • स्‍टेप 1: आधिकारिक वेबसाइट https://www.lkouniv.ac.in/en पर जाएं |
  • स्‍टेप 2: होमपेज पर JEE BEd 2021-23 काउंसलिंग के लिंक पर जाएं |
  • स्‍टेप 3: अब काउंसलिंग लॉगिन पर क्लिक करें और लॉगिन पेज पर जाएं |
  • स्‍टेप 4: अपने क्रेडेंशियल्‍स दर्ज करें और लॉगिन कर एप्लिकेशन पेज पर जाएं |
  • स्‍टेप 5: एप्लिकेशन फॉर्म भरें और फीस जमा करें |
  • स्‍टेप 6: जरूरी डॉक्‍यूमेंट्स अपलोड करें और सब्मिट कर दें |

काउंसलिंग के लिए आवेदन शुल्‍क 5750 रुपये है जिसमें एडवांस कॉलेज फीस भी शामिल है | यदि उम्‍मीदवार को कोई सीट अलॉट नहीं होती है, तो उसे उसके रजिस्‍टर्ड अकाउंट नंबर में फीस रीफंड कर दी जाएगी | बता दें कि भर्ती परीक्षा 06 अगस्त को आयोजित हुई थी जिसमें 5 लाख से अधिक उम्मीदवार शामिल हुए थे | काउंसलिंग के संबंध में कोई भी अन्‍य जानकारी पाने के लिए उम्‍मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर नज़र रखें |

PM Narendra Modi Birthday Special:-जानिए उनके जीवन से जुड़ी अनसुनी कहानियां

PM Narendra Modi का 71वां जन्मदिन:

Narendra Modi भारत के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिनका जन्म देश को आजादी मिलने के बाद हुआ | आज वही नरेंद्र दामोदर दास मोदी 71 बरस के हो गए | प्रधानमंत्री के रूप में मोदी कई रिकॉर्ड तोड़ चुके हैं | वो सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री पद पर रहने वाले पहले गैर कांग्रेसी नेता हैं | आज वो प्रधानमंत्री के रूप में 7 साल 113 दिन पूरे कर लेंगे | लगातार दो बार बहुमत के साथ गैर कांग्रेसी सरकार बनाने का श्रेय भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जाता है |

बतौर गुजरात के मुख्यमंत्री मोदी पर अमेरिका आने की रोक लगाई गई थी तो 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद वो सबसे ज्यादा 7 बार अमेरिका जाने वाले प्रधानमंत्री बन गए | 24 सितंबर को वो 8वीं बार अमेरिका का दौरा करेंगे | बीजेपी इस दौरान पीएम मोदी के सार्वजनिक कार्यालय में दो दशक पूरा करने का जश्न भी मनाएगी | पीएम मोदी 13 साल तक गुजरात के सीएम रहे और अब 7 साल से पीएम हैं |

कोविड-19 (Covid-19) के खिलाफ 21 जून को 88.09 लाख और 27 अगस्त को 1.03 करोड़ के रिकॉर्ड टीकाकरण के बाद आज पीएम मोदी के 71वें जन्मदिन  पर भी रिकॉर्ड वैक्सीनेशन का लक्ष्य रखा गया है | इस मौके पर 20 दिन की मेगा इवेंट करवाई जा रही है, जिसका नाम है सेवा और समर्पण अभियान | ये अभियान 7 अक्टूबर को खत्म होगा |

इसके अलावा जन्मदिन के मौके पर देशभर में रिकॉर्ड डेढ़ करोड़ कोरोना के टीके लगाने की तैयारी की गई है | इसके साथ ही कई जगह बल्ड डोनेशन कैंप लगाए गए हैं | साथ ही बीजेपी इस दौरान पीएम मोदी के सार्वजनिक कार्यालय में दो दशक पूरा करने का जश्न भी मनाएगी | 7 अक्टूबर तक चलने वाले 20-दिवसीय मेगा कार्यक्रम के दौरान पार्टी बड़े पैमाने पर स्वच्छता और रक्तदान अभियान चलाएगी | प्रधानमंत्री को उनके प्रयासों के लिए बधाई देने के लिए पांच करोड़ पोस्टकार्ड भेजेगी | उत्तर प्रदेश में, जहां अगले साल चुनाव होने हैं, वहां पार्टी कार्यकर्ता 71 स्थानों पर गंगा नदी को साफ करने के लिए अभियान चलाएंगे |

PM मोदी के जीवन से जुड़ी अनसुनी कहानियां:- Narendra Modi

श्यामजी कृष्ण वर्मा से जुड़ी अनसुनी कहानी:

स्वतंत्रता सेनानी श्यामजी कृष्ण वर्मा, विदेशी धरती पर भारतीय क्रांतिकारियों का सबसे बड़ा मददगार, मेंटर जिसकी अस्थियां लेने के लिए मोदी स्विटजरलैंड गए, इतना ही नहीं उनकी याद में एक शानदार इमारत भी उन्हीं के गांव में बनाई | श्यामजी कृष्ण वर्मा ने अपने जीवन भर की कमाई से लंदन में ‘इंडिया हाउस’ बनवाया था और भारतीय क्रांतिकारी युवाओं को लंदन में पढ़ने के लिए कई सारी स्कॉलरशिप्स शुरू कीं, उनको इंडिया हाउस में वो रुकने का ठिकाना देते थे | उनकी स्कॉलरशिप से ही वीर सावरकर जैसे क्रांतिकारी लंदन पहुंचे | मदन लाल धींगरा जैसे कई क्रांतिकारियों को वहां शरण मिली और वहीं से सावरकर ने इंग्लैंड और यूरोप के क्रांतिकारियों को एकजुट किया और भारत के क्रांतिकारियों को तमाम तरह की मदद की |

श्यामजी कृष्ण वर्मा 1907 में सावरकर को इंडिया हाउस की जिम्मेदारी देकर पेरिस निकल गए और प्रथम विश्व युद्ध में फ्रांस और ब्रिटेन की दोस्ती हो गई तो वहां से पत्नी भानुमति के साथ वो स्विटजरलैंड चले आए, वहां उन्होंने एक अस्थि बैंक ‘सेंट जॉर्ज सीमेट्री’ में फीस जमा करवाकर उनसे अनुबंध किया कि वो पति-पत्नी दोनों की अस्थियों को संभालकर रखेंगे, आजादी के बाद कोई देशभक्त आएगा और उनकी अस्थियां देश की सरजमीं पर ले जाएगा | लेकिन आजादी के बाद आई सरकारें उन्हें भूल गईं | 22 अगस्त 2003 को लगभग 56 साल बाद मोदी जेनेवा से उन दोनों की अस्थियां लेकर आए | तब वो गुजरात के सीएम थे |

फिर श्यामजी कृष्ण वर्मा के जन्मस्थान मांडवी में उनकी याद में वैसा ही इंडिया हाउस बनवाया, जिसे नाम दिया गया ‘क्रांति तीर्थ’ | लोग मानते हैं कि पीएम मोदी का दाढ़ी वाला लुक श्यामजी कृष्ण वर्मा से ही प्रेरित है, सच मोदी बेहतर जानते हैं | आप ये जानकर हैरत में होंगे कि जब 30 मार्च 1930 को श्यामजी की मृत्यु हुई थी, तो भगत सिंह ने लाहौर जेल में साथियों के साथ शोक सभा रखी थी |

राजा महेंद्र प्रताप से जुड़ी अनसुनी कहानी:-

एक अनोखा किस्सा जो जुड़ा है जाट राजा महेंद्र प्रताप, यूपी में हाथरस के मुरसान निवासी से | जिस जाट राजा ने अटल बिहारी बाजपेयी जैसे दिग्गज भाजपा नेता को इतनी बड़ी शिकस्त दी थी, कि लोकसभा चुनावों में वोटों की गिनती में वे नंबर वन आए थे , उस चुनाव में अटलजी की जमानत जब्त हो गई थी और वो चौथे नंबर पर आए थे | इस जाट राजा की मोदी खुलकर तारीफ करते हैं, वो भी काबुल की संसद में |

राजा महेंद्र प्रताप आजकल इसलिए चर्चा में रहते हैं क्योंकि अब लोगों को पता चला है कि उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी के लिए अपनी जमीन 99 साल के लिए पट्टे पर दी थी | लेकिन देश के इतिहास में राजा को इसलिए जाना जाता है क्योंकि उन्होंने पहली बार देश की अनिर्वासित सरकार का ऐलान किया था, ये सरकार अफगानिस्तान के काबुल में बनाई गई थी | बाकायदा कैबिनेट मंत्रियों के साथ पूरी सरकार बनाई गई थी, जिसके राष्ट्रपति वो खुद थे | नोबेल पुरस्कार के इतिहास में 2 ही बार ऐसा मौका आया है, जब वो स्थगित हुए हैं, एक बार महात्मा गांधी को नॉमिनेट किया गया था, दूसरी बार राजा महेंद्र प्रताप को |

आजादी के बाद राजा महेंद्र प्रताप मथुरा लोकसभा सीट से 1952 में निर्दलीय जीते थे, 1957 में उनके सामने युवा जनसंघ नेता अटल बिहारी बाजपेयी थे, राजा दोबारा जीते और अटलजी चौथे नंबर पर आए | संयोग देखिए, 25 दिसंबर 2015 को अटल बिहारी बाजपेयी का जन्मदिन था, मोदी काबुल की संसद में जाकर ‘अटल ब्लॉक’ का उदघाटन करते हैं और संसद में अपने भाषण में अटलजी के जन्मदिन के मौके पर उनको हराने वाले राजा महेंद्र प्रताप की जमकर तारीफ करते हैं | फिर लौटते हुए पाकिस्तान में नवाज शरीफ का जन्मदिन भी मनाते हैं, लेकिन शायद उस वक्त उनको भी अटलजी का राजा महेंद्र प्रताप से कनेक्शन नहीं पता था |

सेवा भारती प्रताप से जुड़ी अनसुनी कहानी:-

आप राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ को हमेशा राजनीतिक संगठन के रूप में देखते आए हैं, लेकिन इसी आरएसएस ने जब कोरोना काल के दौरान अपने सेवा कार्यों के आंकड़े बताए तो लोग हैरान रह गए, प्रतिदिन संघ कार्यकर्ता लाखों लोगों को खाना पहुंचा रहे थे, दवाइयां, मास्क, राशन आदि भी | करीब 20 तरह की हैल्पलाइन उन्होंने शुरू की थीं, स्टूडेंट्स, बुजर्ग, महिला और यहां तक कि भूखे जानवरों तक के लिए हैल्पलाइन |

दरअसल, संघ का संगठन है सेवा भारती, आज भी उनकी वेबसाइट देखेंगे तो वर्तमान में चल रहे पूरे 2 लाख सेवाकार्यों की जानकारी पाएंगे | लेकिन इतने बड़े संगठन की नींव रखने से मोदी जुड़े हैं, ये बहुत कम लोग जानते हैं | ये 1979 की बात है, जब मोरवी (गुजरात) में मच्छू नदी पर बने बांध में दरार आ गई, बांध टूट गया और भयंकर बाढ़ आ गई | उस दौरान करीब 20 हजार लोगों की मौत हो गई थी, नरेंद्र मोदी उस दिन चेन्नई में थे | फौरन दिल्ली आए, वहां से वाया मुंबई राजकोट पहुंचे | दिल्ली में उन्होंने उन दिनों संघ के वरिष्ठ नेता नानाजी देशमुख से मुलाकात की और चर्चा की कि कैसे सेवा कार्यों के लिए संघ को संगठित तौर से करना चाहिए |

उस बाढ़ के लिए तो एक बाढ़ राहत समिति बनाई ही गई, ट्रस्ट को रजिस्टर्ड करवाया गया और 50 लाख रुपए का चंदा इकट्ठा किया गया | ये सब नरेंद्र मोदी ने किया. बाढ़ पीड़ितों की तमाम तरीके से मदद के अलावा मोरबी में उनके लिए एक कॉलोनी भी बनवाई गई | ये वो योजना थी, जिसे बाद में संघ ने सेवा भारती जैसा संगठन बनाकर अपना लिया | आज संघ से बिना स्वार्थ के इतने स्वंयसेवक जुड़े रहते हैं, तो काफी कुछ वजह सेवा भारती के लगातार गरीबों के लिए चलने वाले सेवा कार्य ही हैं |

RSS सरसंघचालक गुरु गोलवलकर से जुड़ी अनसुनी कहानी:-

नरेंद्र मोदी के जीवन की ये पहली बड़ी घटना थी, जिससे वो सीधे राष्ट्रीय पदाधिकारियों की नजर में आ गए थे | संघ परिवार में सबसे ज्यादा ताकतवर पदाधिकारी होते हैं सरसंघचालक | उन दिनों गुरु गोलवलकर आरएसएस के सरसंघचालक थे | विश्व हिंदू परिषद को 1964 में शुरू किया गया था, ऐसे में उस संगठन को खड़ा करने में संघ के बड़े पदाधिकारी भी जुटे हुए थे | उन्हीं दिनों 1972 में विश्व हिंदू परिषद का विशाल सम्मेलन होना था, जो गुजरात के सिद्धपुर में होना तय हुआ था |

उस सम्मेलन के आयोजन से जुड़े थे नरेंद्र मोदी | व्यवस्था की काफी जिम्मेदारी थी नरेंद्र मोदी की, उस सम्मेलन में चार शंकराचार्यों को एक साथ लाना और सरसंघचालक गुरु गोलवलकर की नजरों में चढ़ना, आसान काम नहीं था, लेकिन मोदी ने ये कर दिखाया | पहली बार इस सम्मेलन के जरिए नरेंद्र मोदी संघ के वरिष्ठतम अधिकारियों की नजरों में आए थे | मोदी को आज भले ही विरोधी उन्हें ‘इवेंट मैनेजर’ कहते हों, लेकिन देखा जाए तो ढंग से व्यवस्था करना, वो भी समय से आसान काम थोड़े ही होता है, वो भी तब जब हजारों व्यक्ति उस आयोजन से जुड़े हों |

मोदी बने इतिहासकार:-

इमरजेंसी के दिनों में नरेंद्र मोदी भी सक्रिय थे, सिख के रोल में आपने उनकी फोटो देखी ही होगी | इमरजेंसी में संघ, जनता पार्टी और बाकी विपक्षी नेताओं की एक कॉर्डिनेशन कमेटी बनाई गई, नरेंद्र मोदी को गुजरात का सचिव बनाया गया था | मोदी के जिम्मे 2 काम थे, एक ऐसे सेफ हाउसेज को ढूंढना, जिसमें दिल्ली से आ रहे बड़े नेताओं को ठहराना, छुपाना और दूसरा काम था संघ के जो कार्यकर्ता जेलों में ठूंस दिए गए थे, उनके परिजनों को आर्थिक मदद देना, दिलासा देना |

मोदी ने दोनों ही काम बड़ी तत्परता से किए | इसलिए वो खुद गिरफ्तारी से बचते रहे, उन्होंने इसलिए ही सिख रूप लिया था, सिख रूप में ही सुब्रह्मण्यम स्वामी को भी ठहराया, जॉर्ज फर्नांडीज को भी गुजरात में मदद की | तमाम जेल में बंद कार्यकर्ताओं के परिजनों को भी मदद पहुंचाते रहे | उसके बाद उन्होंने योजना बनाई एक किताब लिखने की, उस किताब के लिए वो दिल्ली भी आए और यहां भी शोध किया, किताब का नाम था, ‘आपात काल में गुजरात’ | इसी लगन के चलते वो दिल्ली के राष्ट्रीय नेताओं के करीब आ गए थे |

PM मोदी का 71वां जन्मदिन: भाजपा चलाएगी “सेवा और समर्पण” अभियान

PM मोदी का 71वां जन्मदिन:

नरेंद्र मोदी भारत के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिनका जन्म देश को आजादी मिलने के बाद हुआ | आज वही नरेंद्र दामोदर दास मोदी 71 बरस के हो गए | प्रधानमंत्री के रूप में मोदी कई रिकॉर्ड तोड़ चुके हैं | वो सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री पद पर रहने वाले पहले गैर कांग्रेसी नेता हैं | आज वो प्रधानमंत्री के रूप में 7 साल 113 दिन पूरे कर लेंगे | लगातार दो बार बहुमत के साथ गैर कांग्रेसी सरकार बनाने का श्रेय भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जाता है |

बतौर गुजरात के मुख्यमंत्री मोदी पर अमेरिका आने की रोक लगाई गई थी तो 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद वो सबसे ज्यादा 7 बार अमेरिका जाने वाले प्रधानमंत्री बन गए | 24 सितंबर को वो 8वीं बार अमेरिका का दौरा करेंगे | बीजेपी इस दौरान पीएम मोदी के सार्वजनिक कार्यालय में दो दशक पूरा करने का जश्न भी मनाएगी | पीएम मोदी 13 साल तक गुजरात के सीएम रहे और अब 7 साल से पीएम हैं |

कोविड-19 (Covid-19) के खिलाफ 21 जून को 88.09 लाख और 27 अगस्त को 1.03 करोड़ के रिकॉर्ड टीकाकरण के बाद आज पीएम मोदी के 71वें जन्मदिन  पर भी रिकॉर्ड वैक्सीनेशन का लक्ष्य रखा गया है | इस मौके पर 20 दिन की मेगा इवेंट करवाई जा रही है, जिसका नाम है सेवा और समर्पण अभियान | ये अभियान 7 अक्टूबर को खत्म होगा |

इसके अलावा जन्मदिन के मौके पर देशभर में रिकॉर्ड डेढ़ करोड़ कोरोना के टीके लगाने की तैयारी की गई है | इसके साथ ही कई जगह बल्ड डोनेशन कैंप लगाए गए हैं | साथ ही बीजेपी इस दौरान पीएम मोदी के सार्वजनिक कार्यालय में दो दशक पूरा करने का जश्न भी मनाएगी | 7 अक्टूबर तक चलने वाले 20-दिवसीय मेगा कार्यक्रम के दौरान पार्टी बड़े पैमाने पर स्वच्छता और रक्तदान अभियान चलाएगी | प्रधानमंत्री को उनके प्रयासों के लिए बधाई देने के लिए पांच करोड़ पोस्टकार्ड भेजेगी | उत्तर प्रदेश में, जहां अगले साल चुनाव होने हैं, वहां पार्टी कार्यकर्ता 71 स्थानों पर गंगा नदी को साफ करने के लिए अभियान चलाएंगे |

PM मोदी का 71वां जन्मदिन मोदी के जीवनकाल के महत्वपूर्ण बिंदु:-

PM मोदी का 71वां जन्मदिन
  • 17 सितंबर 1950 को गुजरात के मेहसाणा जिले के वडनगर में जन्मे नरेंद्र दामोदर दास मोदी ने 60 के दशक के आखिरी वर्षों में RSS की स्थायी सदस्यता ली | वह तभी अहमदाबाद के मणिनगर इलाके में संघ के क्षेत्रीय मुख्यालय में रहने चले गए | वहां वे प्रांत प्रचारक लक्ष्मणराव ईनामदार के सहायक के रूप में काम करते थे |
  • युवा नरेंद्र मोदी RSS में प्रांत प्रचारक लक्ष्मणराव ईनामदार के सहायक बने | लक्ष्मणराव नरेंद्र मोदी को मानस पुत्र मानते थे, वहीं मोदी भी उन्हें अपना संरक्षक मानते थे | मोदी 1972 में प्रचारक बनाए गए। इसके अगले साल से वह गुजरात में भ्रष्टाचार के खिलाफ छात्रों के नवनिर्माण आंदोलन में शामिल हो गए |
  • 1980 के शुरुआती सालों की इस तस्वीर में नरेंद्र मोदी RSS के स्वयंसेवकों के साथ नजर आ रहे हैं | मोदी को 1978 में विभाग प्रचारक बनाया गया और इसके बाद सूरत और बड़ौदा का संभाग प्रचारक बनाया गया | 1981 में उन्हें प्रांत प्रचारक बनाया गया | इस दौरान उन्हें संघ के अलग-अलग संगठनों के बीच समन्वय का काम सौंपा गया |
  • 1980 के मध्य तक एक आयोजक के रूप में मोदी की चर्चा फैल चुकी थी | यहीं से उनकी भाजपा में एंट्री की शुरुआत हुई |
  • 1986 में जब लालकृष्ण आडवाणी भाजपा के अध्यक्ष बने तो उन्होंने नरेंद्र मोदी को पार्टी में शामिल करने का फैसला किया | इसके बाद 1987 में मोदी को गुजरात में भाजपा के संगठन मंत्री की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई |
  • भाजपा में एंट्री के बाद नरेंद्र मोदी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा | कहा जाता है कि मोदी ने ही संगठन मंत्री के पद के साथ राजनीति को मिलाना शुरू किया | जन संघ के प्रमुख दीनदयाल उपाध्याय ने 1950 में संगठन मंत्री का पद बनाया था | तब से ही यह पद भाजपा के संगठन की रीढ़ की हड्डी रहा है |
  • 1975 की इमरजेंसी नरेंद्र मोदी के राजनीतिक करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुई | इसी दौरान वे लालकृष्ण आडवाणी के संपर्क में आए और उनके करीबी हो गए |
  • नरेंद्र मोदी को 1990 में लालकृष्ण आडवाणी की चर्चित रथयात्रा का गुजरात वाला हिस्सा आयोजित कराने की जिम्मेदारी मिली थी | गुजरात में रथयात्रा के हर महत्वपूर्ण पड़ाव के दौरान मोदी की तस्वीर लालकृष्ण आडवाणी के साथ दिखाई दी |
  • संघ प्रचारक नरेंद्र मोदी 90 के दशक की शुरुआत से ही राजनीति में सक्रिय होने लगे थे | 1991 में मोदी उस समय भाजपा के टॉप तीन नेताओं में गिने जाने वाले मुरली मनोहर जोशी के साथ एकता यात्रा के अंत में श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराया था |
  • नरेंद्र मोदी शुरुआत से ही मीडिया की ताकत को पहचानते थे | वो हमेशा अपनी बातें लोगों तक सीधे पहुंचाने पर भरोसा करते थे | 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने रेडियो पर ‘मन की बात’ शुरू की तो अपने राजनीतिक करियर के शुरुआत में भी वो लोगों से संवाद करते नजर आते थे |
  • 1983 में भाजपा ने पहली बार गुजरात के राजकोट में हुए म्यूनिसिपल इलेक्शन में जीत दर्ज की | इसके चार साल बाद अहमदाबाद म्युनिसिपल इलेक्शन भी भाजपा जीत गई | इस चुनाव के प्रचार अभियान की कमान नरेंद्र मोदी के पास थी | ऐसे ही एक चुनाव अभियान के दौरान हुई नुक्कड़ सभा में बोलते युवा मोदी |
  • गुजरात में RSS की नींव रखने वालों में शामिल रहे लक्ष्मणराव ईनामदार के साथ नरेंद्र मोदी | लक्ष्मणराव वकील साहब नाम से लोकप्रिय थे | कहा जाता है कि लक्ष्मणराव ही मोदी को संघ में लेकर आए थे |
  • गुजरात की राजनीति में मोदी को लाने का श्रेय केशुभाई पटेल को ही जाता है | हालांकि 2001 में उन्हें हटाकर भाजपा ने मोदी को CM बना दिया था |
  • अपनी राजनीति के शुरुआती दिनों में मोदी वाघेला के करीबी रहे, लेकिन 1996 में मोदी के विरोध के चलते ही वाघेला को CM पद छोड़ना पड़ा था |
  • मोदी को पतंग से काफी लगाव रहा है। पहले वे अक्सर पतंगबाजी करते नजर आते थे। अहमदाबाद में हर साल मकर संक्रांति पर काइट फेस्टिवल का आयोजन किया जाता है |
  • गुजरात वाइब्रेंट समिट 2011 के उद्घाटन समारोह के दौरान मोदी एक अलग अंदाज में दिखे। मोदी ने गुजरात में नई इंडस्ट्रीज को लाने के लिए 2003 में इस समिट की शुरुआत की थी। तब से लेकर अब तक 9 बार गुजरात वाइब्रेंट समिट आयोजित हो चुका है |
  • जब मोदी ने अहमदाबाद में तीन दिन का सद्भावना उपवास रखा था | संयोग से तब उनका 62वां जन्मदिन भी था | तब उन्होंने कहा था कि उनका उपवास सभी को जोड़ने के लिए है |
  • साल 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा को पूर्ण बहुमत मिला। प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद जब मोदी पहली बार लोकसभा पहुंचे तो सदन की चौखट को झुककर प्रणाम किया था |
  • साल 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद सदन में अपनी पहली स्पीच के दौरान मोदी की आंखों से आंसू छलक गए थे | तब लालकृष्ण आडवाणी की एक बात पर उन्होंने कहा था कि भाजपा मेरी मां है |
  • प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने सितंबर 2014 में अमेरिका की पहली बार यात्रा की थी। तब से लेकर अब तक मोदी 7 बार अमेरिका का दौरा कर चुके हैं |
  • 16 अगस्त 2018 को भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का निधन हुआ | उनकी अंतिम यात्रा में प्रधानमंत्री मोदी भी शामिल हुए | तब वे प्रोटोकॉल और अपना सुरक्षा घेरा तोड़ते हुए पैदल ही निकल पड़े थे |
  • साल 2019 के लोकसभा चुनाव में लगातार दूसरी बार संसदीय दल का नेता चुने जाने के बाद नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन से पहले भारतीय संविधान के आगे सिर झुकाया | जब वे पहली बार प्रधानमंत्री बने थे तो उन्होंने संसद की सीढ़ियों को प्रणाम किया था |
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 फरवरी 2018 को चुनावी राज्य (उस वक्त) कर्नाटक में भाजपा की 90 दिनों की यात्रा की समाप्ति के मौके पर बेंगलुरु में एक रैली को संबोधित करने पहुंचे। यह परिवर्तन यात्रा रैली थी जिसका नाम ‘नव कर्नाटक निर्माण यात्रा’ था | रैली स्थल पर जब मोदी पहुंचे तो उन्हें मैसूर पगड़ी पहनाई गई, जिसे मैसूर पेटा कहते हैं | यह पगड़ी वहां की पारंपरिक टोपी है | इस रैली में PM मोदी ने बीएस येदियुरप्पा को सम्मानित किया था |
  • साल 2014 से लेकर 2021 तक स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब भी लालकिले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हैं, हर बार उनका अंदाज निराला होता है। खासकर उनका ‘साफा’ लोगों का ध्यान अपनी तरफ जरूर खींचता है | PM मोदी ने 15 अगस्त 2019 को टाई एंड डाई व लहरिया प्रिंट से तैयार साफा पहना था | पहली बार PM के साफे में कई तरह के रंग देखे गए थे | इसमें पीला, लाल, बैंगनी, हरा, नीला जैसे कई रंग शामिल थे |

TIME मैगजीन की 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में पीएम मोदी, ममता, अदार पूनावाला, मुल्ला बरादर का नाम

TIME 100 Most Influential People 2021:-

Time Magazine ने बुधवार को 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की अपनी सालाना सूची को जारी किया है | टाइम की इस सूची में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के CEO अदार पूनावाला का नाम भी शामिल है | 2021 के सबसे प्रभावशाली नेताओं की सूची में सबसे चौंकाने वाला नाम तालिबान के सह-संस्थापक मुल्ला अब्दुल गनी बरादर का है | अफगानिस्तान की वर्तमान तालिबान सरकार में बरादर को उपप्रधानमंत्री का पद दिया गया है |

बुधवार को जारी 2021 के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन, उपराष्ट्रपति कमला हैरिस, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ड्यूक और डचेस ऑफ ससेक्स प्रिंस हैरी और मेघन शामिल हैं | इसके अलावा अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, इजरायल के प्रधानमंत्री नेफ्टाली बेनेट, ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी और टेस्ला के CEO एलन मस्क के नाम शामिल हैं |

नरेंद्र मोदी :-‘टाइम’ द्वारा दिए गए मोदी के परिचय में कहा गया है कि एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में भारत के 74 सालों में, तीन प्रमुख नेता रहे हैं – जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और नरेंद्र मोदी। “नरेंद्र मोदी तीसरे नेता हैं जो देश की राजनीति में प्रभावी हैं…।”

ममता बनर्जी :- उनके परिचय में कहा गया है, “बनर्जी के बारे में कहा जाता है, वह अपनी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस का नेतृत्व नहीं करती हैं – वही पार्टी हैं। सड़क पर उतरकर जुझारू तेवर दिखाने वाली भावना और पितृसत्तात्मक संस्कृति में स्व-निर्मित जीवन उन्हें औरों से अलग बनाता है।”

अदार पूनावाला:- पूनावाला के परिचय में कहा गया है कि covid-19 महामारी की शुरुआत से, दुनिया के सबसे बड़े टीका निर्माता के 40 वर्षीय प्रमुख ने “इस पल की जरूरत को पूरा करने की कोशिश की |” इसमें कहा गया, “महामारी अभी खत्म नहीं हुई है, और पूनावाला अब भी इसे समाप्त करने में मदद कर सकते हैं | टीका असमानता गंभीर है, और दुनिया के एक हिस्से में टीकाकरण में देरी के वैश्विक परिणाम हो सकते हैं – जिसमें और अधिक खतरनाक रूपों के उभरने का जोखिम भी शामिल है |”

मुल्ला अब्दुल गनी बरादर:- तालिबान के सह-संस्थापक बरादर का परिचय देते हुए टाइम ने उन्हें ऐसा शांत, रहस्यमय व्यक्ति बताया जो शायद ही कभी सार्वजनिक बयान या साक्षात्कार देते हों |

TIME मैगजीन की 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की पूरी सूची:-

ICONS:

  • Prince Harry and Meghan, The Duke and Duchess of Sussex
  • Naomi Osaka
  • Alexei Navalny
  • Britney Spears
  • Sherrilyn Ifill
  • Dolly Parton
  • Shohei Ohtani
  • Cathy Park Hong
  • Luis Manuel Otero Alcántara
  • Nasrin Sotoudeh
  • Manjusha P. Kulkarni, Russell Jeung and Cynthia Choi
  • Muna El-Kurd and Mohammed El-Kurd

PIONEERS:

  • Billie Eilish
  • Ben Crump
  • Adi Utarini
  • Sunisa Lee
  • Felwine Sarr and Bénédicte Savoy
  • Fatih Birol
  • Aurora James
  • Adar Poonawalla
  • Phyllis Omido
  • Frans Timmermans
  • Indyra Mendoza and Claudia Spellmant
  • Roger Cox
  • Olimpia Coral Melo Cruz
  • Dorottya Redai
  • Esther Ze Naw Bamvo and Ei Thinzar Maung

TITANS:

  • Simone Biles
  • Tim Cook
  • Shonda Rhimes
  • Timbaland and Swizz Beatz
  • Nikole Hannah-Jones
  • Tom Brady
  • Youn Yuh Jung
  • Allyson Felix
  • Angélique Kidjo
  • Kenneth C. Frazier and Kenneth I. Chenault
  • Luiza Trajano

ARTISTS:

  • Kate Winslet
  • Bad Bunny
  • Chloé Zhao
  • Jason Sudeikis
  • Scarlett Johansson
  • Lil Nas X
  • Jessica B. Harris
  • Bowen Yang
  • Tracee Ellis Ross
  • Mark Bradford
  • N.K. Jemisin
  • Steven Yeun
  • Daniel Kaluuya
  • Omar Sy
  • Barbara Kruger
  • Kane Brown

Leaders:

  • Ngozi Okonjo-Iweala
  • Joe Biden
  • Xi Jinping
  • Liz Cheney
  • Kamala Harris
  • Mario Draghi
  • Tucker Carlson
  • Naftali Bennett
  • Stacey Abrams
  • Nayib Bukele
  • Donald Trump
  • Narendra Modi
  • Mahbouba Seraj
  • Joe Manchin
  • Ebrahim Raisi
  • Rochelle Walensky
  • Mamata Banerjee
  • Ron Klain
  • Elisa Loncon Antileo
  • Abdul Ghani Baradar

INNOVATORS:

Jensen Huang
Elon Musk
Adrienne Banfield Norris, Willow Smith, and Jada Pinkett Smith
Katalin Kariko
Mary Barra
John Nkengasong
MiMi Aung
Vitalik Buterin
Viya
Barney Graham
Friederike Otto and Geert Jan van Oldenborgh
Kengo Kuma
Sara Menker
Lidia Morawska

Vishwakarma Jayanti 2021: विश्वकर्मा जयंती कब है, जानें तिथि, पूजा विधि और महत्व

Vishwakarma Jayanti 2021:-

हिंदू धर्म के अनुसार भगवान विश्वकर्मा को निर्माण और सृजन का देवता माना गया है | विश्वकर्मा जयंती के दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है | इस दिन फैक्ट्री और कारखानों में भगवान विश्वकर्मा की पूजा होती है | कहा जाता है कि इस दिन भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था | इस साल विश्वकर्मा जयंती (Vishwakarma Jayanti), 17 सितंबर को मनाई जाएगी | इसी दिन कन्या संक्रांति भी मनाई जाती है | धार्मिक मान्यता है कि इस भगवान विश्वकर्मा की विधिवत्त पूजा-अर्चना करने से व्यापार में बढ़ोतरी होती है और व्यक्ति खूब तरक्की करता है |

धार्मिक मान्यता के अनुसार, विश्वकर्मा जयंती हर साल कन्या संक्रांति के दिन मनाई जाती है | इस दिन सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करते हैं | भगवान विश्वकर्मा को दुनिया का सबसे पहला इंजीनियर और वास्तुकार कहा जाता है | धार्मिक मान्यता है कि इन्होंने ही इंद्रपुरी, द्वारिका, हस्तिनापुर, स्वर्गलोक, लंका, जगन्नाथपुरी, भगवान शंकर का त्रिशुल, विष्णु का सुदर्शन चक्र का निर्माण किया था | माना जाता है कि विश्वकर्मा वास्तु देव के पुत्र हैं |

धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विश्वकर्मा की विधिवत्त पूजा-अर्चना करने से व्यापार में बढ़ोतरी होती है और मुनाफा होता है | विश्वकर्मा को दुनिया का पहला इंजीनियर माना जाता है | उन्होंने ही ब्रह्मा जी के साथ मिलकर सृष्टि रचाई थी | पौराणिक कथाओं के अनुसार विश्वकर्मा भगवान ने ही देवताओं के लिए अस्त्र, शस्त्र, भवनों और मंदिरों का निर्माण किया था | बता दें कि विश्वकर्मा भगवान की पूजा सभी कलाकारों, शिल्पकारों और औद्योगिक घरानों से जुड़े लोग करते हैं |

विश्वकर्मा की पौराणिक कथा:-

पौराणिक कथाओं के अनुसार इस समस्त ब्रह्मांड की रचना भी विश्वकर्मा जी के हाथों से हुई है | ऋग्वेद के 10वे अध्याय के 121वे सूक्त में लिखा है कि विश्वकर्मा जी के द्वारा ही धरती, आकाश और जल की रचना की गई है | विश्वकर्मा पुराण के अनुसार आदि नारायण ने सर्वप्रथम ब्रह्मा जी और फिर विश्वकर्मा जी की रचना की |

कहा जाता है कि सभी पौराणिक संरचनाएं, भगवान विश्वकर्मा द्वारा निर्मित हैं | भगवान विश्वकर्मा के जन्म को देवताओं और राक्षसों के बीच हुए समुद्र मंथन से माना जाता है | पौराणिक युग के अस्त्र और शस्त्र, भगवान विश्वकर्मा द्वारा ही निर्मित हैं | वज्र का निर्माण भी उन्होंने ही किया था | माना जाता है कि भगवान विश्वकर्मा ने ही लंका का निर्माण किया था |

भगवान शिव ने माता पार्वती के लिए एक महल का निर्माण करने के बारे में विचार किया | इसकी जिम्मेदारी शिवजी ने भगवान विश्वकर्मा दी तब भगवान विश्वकर्मा ने सोने के महल को बना दिया | इस महल की पूजा करने के लिए भगवान शिव ने रावण का बुलाया | लेकिन रावण महल को देखकर इतना मंत्रमुग्ध हो गया कि उसने पूजा के बाद दक्षिणा के रूप में महल ही मांग लिया |

भगवान शिव ने महल को रावण को सौंपकर कैलाश पर्वत चले गए | इसके अलावा भगवान विश्वकर्मा ने पांडवों के लिए इंद्रप्रस्थ नगर का निर्माण भी किया था | कौरव वंश के हस्तिनापुर और भगवान कृष्ण के द्वारका का निर्माण भी विश्वकर्मा ने ही किया था |

विश्‍वकर्मा पूजा का महत्‍व:-

विश्‍वकर्मा जयंती के दिन सभी कारखानों और औद्योगिक संस्थानों में भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है। कहा जाता है कि इस दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं | साथ ही व्यापार में तरक्की और उन्नति होती है | मान्‍यता है तकनीकी क्षेत्र से जुड़े जो भी लोग हर साल विश्‍वकर्मा जयंती पर अपने औजारों और अस्‍त्रों की पूजा करते हैं, पूरे साल उनके हथियार और औजार बिना किसी बाधा के अच्‍छी तरह से काम करते हैं |

कलयुग में भगवान विश्‍वकर्मा की पूजा हर व्‍यक्ति के लिए जरूरी और लाभप्रद बताई गई है | कलयुग का संबंध कलपुर्जों से माना जाता है और आज के युग में कलपुर्जे का प्रयोग हर शख्‍स कर रहा है | लैपटॉप, मोबाइल फोन और टैबलेट भी एक प्रकार की मशीन हैं और इनके बिना आज के युग में रह पाना बहुत मुश्किल है | इसलिए भगवान विश्‍वकर्मा की पूजा करना हम सबके लिए बेहद शुभफलदायी मानी जा रही है |

विश्वकर्मा पूजा विधि:-

विश्वकर्मा जयंती हर साल तब मनाई जाती है, जब सूर्यदेव सिंह राशि से कन्या राशि में प्रवेश करते हैं | इस दिन पूजा करने के लिए सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहन लें | फिर भगवान विश्वकर्मा की पूजा करें | पूजा में हल्दी, अक्षत, फूल, पान, लौंग, सुपारी, मिठाई, फल, दीप और रक्षासूत्र शामिल करें | पूजा में घर में रखा लोहे का सामान और मशीनों को शामिल करें | पूजा करने वाली चीजों पर हल्दी और चावल लगाएं | इसके बाद पूजा में रखे कलश को हल्दी लगा कर रक्षासूत्र बांधे | इसके बाद पूजा शुरु करें और मंत्रों का उच्चारण करते रहें | पूजा खत्म होने के बाद लोगों में प्रसाद बांट दें |

भगवान विश्वकर्मा की पूजा में ‘ॐ आधार शक्तपे नम: और ॐ कूमयि नम:’, ‘ॐ अनन्तम नम:’, ‘पृथिव्यै नम:’ मंत्र का जप करना चाहिए | रुद्राक्ष की माला से जप करना अच्छा रहता है |

उत्तर प्रदेश धान खरीद हेतु किसान पंजीकरण विपणन वर्ष: 2021-22

उत्तर प्रदेश धान खरीदी 2021, किसान पंजीकरण हेतु महत्वपूर्ण जानकारी :-

  1. किसान पंजीकरण हेतु आवेदन करने के लिये उपरोक्त स्टेप 1. से स्टेप 5. तक पालन करना अनिवार्य है।
  2. कृपया ऑनलाईन किसान पंजीकरण करने से पूर्व “स्टेप 1. पंजीकरण प्रारूप” डाउनलोड करके प्रिंट कर लें एवं प्रिंट किये गये प्रारूप की जाँच करके आवश्यक सूचनायें भर लें।
  3. ऑनलाईन टोकन प्राप्त करने सम्बन्धी महत्वपूर्ण जानकारी स्टेप 6 में दी गयी है।
  4. किसान पंजीकरण में फसल (धान) हेतु उपयोग की जाने वाली सभी भूमियों का विवरण देना अनिवार्य है। इसके साथ गन्ना एवं अन्य फसल के रकबे को भी दर्ज करना होगा।
  5. भूमि विवरण के साथ खतौनी/खाता संख्या, प्लाट/खसरा संख्या, भूमि का रकबा (हेक्टेयर में) एवं फसल (धान/गन्ना/अन्य) का रकबा (हेक्टेयर में) भरना अनिवार्य है।
  6. आधार कार्ड व राजस्व अभिलेखों का सही विवरण दर्ज करें।
  7. नये किसान हेतु इसी पेज पर “नये किसान पंजीकरण हेतु यहाँ क्लिक करें” पर क्लिक कर ऑनलाईन आवेदन दर्ज कर लें।
  8. पंजीकरण प्रपत्र के बिन्दु 02 में दी गयी सूची से अपने उस निकट सम्बन्धी (माता/पिता, पति/पत्नी. पुत्र/पुत्री, दमाद/पुत्रवधु, सगा भाई/सगी बहन) का विवरण दें, जो आपकी अनुपस्थिति में आधार प्रमाणीकरण कर क्रय केन्द्र पर धान विक्रय कर सकें। बिन्दु 02 अनिवार्य है।
  9. ऑनलाईन आवेदन दर्ज होने पर “पंजीकरण संख्या“ नोट कर लें एवं “स्टेप 3. पंजीकरण ड्राफ्ट“ से ड्राफ्ट आवेदन पत्र प्रिंट कर लें।
  10. पंजीकरण ड्राफ्ट में दर्ज सभी बिन्दुओं का पुनः निरीक्षण कर लें। पंजीकरण संख्या / आधार संख्या देकर पंजीकरण ड्राफ्ट पुनः प्रिंट किया जा सकता है।
  11. आवेदन में दर्ज सभी बिन्दुओं का निरीक्षण करने के पश्चात् यदि किसी संशोधन की आवश्यकता है तो “स्टेप 2. पंजीकरण संशोधन“ से पंजीकरण संख्या / आधार संख्या देकर आवेदन में संशोधन किया जा सकता है।
  12. यदि आवेदन का निरीक्षण करने के बाद कोई त्रुटि नहीं पाई जाती है तो “स्टेप 4. पंजीकरण लॉक“ के विकल्प से पंजीकरण संख्या / आधार संख्या डालकर आवेदन लॉक कर दें। आवेदन लॉक करने के लिये भी आधार लिंक्ड मोबाइल नम्बर पर ओ0टी0पी0 प्राप्त होगा।
  13. आवेदन लॉक हो जाने के पश्चात् उसमें कोई संशोधन किसी भी स्तर से सम्भव नहीं होगा।
  14. आवेदन लॉक हो जाने के पश्चात् “स्टेप 5. पंजीकरण फाइनल प्रिंट“ के विकल्प से आवेदन का फाइनल प्रिंट ले कर सुरक्षित रख लें।
  15. जब तक आवेदन लॉक नहीं किया जाता है, किसान पंजीकरण स्वीकार नहीं किया जायेगा।
  16. इस वर्ष आधार लिंक्ड मोबाइल नम्बर पर ओ0टी0पी0 OTP आधारित पंजीकरण की व्यवस्था की गयी है, जिसके लिये किसान बन्धु पंजीकरण के समय अपने आधार से लिंक्ड मोबाइल नम्बर ही अंकित करायें ताकि एस0एम0एस0 द्वारा प्रेषित ओ0टी0पी0 OTP को भरकर पंजीकरण प्रक्रिया को पूरा किया जा सकें।
  17. आधार में पंजीकृत मोबाइल नम्बर जाँचने हेतु लिंक इस प्रकार है https://resident.uidai.gov.in/verify
  18. कृपया अपने आधार में पंजीकृत मोबाइल नम्बर को अवश्य जाँच लें क्योंकि किसान पंजीकरण करते समय मात्र 03 बार ही ओ0टी0पी0 24 घण्टे में आधार में पंजीकृत मोबाइल नम्बर पर प्राप्त हो सकेगा।
  19. किसान पंजीकरण का शत प्रतिशत सत्यापन उपजिलाधिकारी / ए0डी0एम0 लॉगिन से किया जायेगा।
  20. किसान अपने खतौनी में दर्ज नाम का पंजीकरण में सही-सही दर्ज कराये, खतौनी में उल्लेखित (बाये तरफ) समस्त नामों में अपना नाम चुने जाने के विकल्प उन्हें ऑनलाईन ड्राप डाउन मे उपलब्ध रहेगा। नाम से भिन्नता की स्थिति में उपजिलाधिकारी द्वारा ऑनलाईन सत्यापन किया जायेगा।
  21. किसान अपना आधार संख्या, आधार कार्ड में अंकित अपना नाम, लिंग, तथा आधार से लिंक्ड मोबाइल नम्बर सही-सही अंकित करें। कृषक बन्धुओं को विभिन्न प्रकार की महत्वपूर्ण जानकारी यथा क्रय, भुगतान आदि आधार लिंक्ड मोबाइल नम्बर पर ही प्राप्त होगा।
  22. किसान अपना बैंक खाता सी0बी0एस0 युक्त बैंक शाखा में खाता खुलवाये तथा बैंक खाते को आधार से लिंक करवायें। धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का भुगतान आधार से लिंक बैंक खाते में ही किया जायेगा ।
  23. किसान बन्धु कृपया अपना खाता जाँचकर यह सुनिश्चित कर लें कि जितनी मात्रा का विक्रय किया जाना है उसके सापेक्ष धनराशि किसान के खाते में ऑनलाईन व्यवस्था द्वारा अन्तरित की जा सकती हो। उदाहरण स्वरूप पी0पी0एफ0 खाता, जनधन खाता आदि बैंक खातों में एक निश्चित धनराशि से ज्यादा का अन्तरण नहीं किया जा सकता है। जब तक भुगतान प्राप्त नहीं हो जाता है तब तक अपना बैंक खाता बन्द न करें।
  24. कृषक द्वारा बैंक खाता अपने आधार से लिंक न करने की दशा में भुगतान नहीं किया जा सकेगा अत: कृषक बंधुओं से अनुरोध है कि तत्परता से अपने बैंक खाते को आधार से लिंक कराएँ।
  25. धान विक्रय के समय पंजीयन प्रपत्र के साथ आधार कार्ड एवं आधार में पंजीकृत मोबाइल नंबर एवं खतौनी के छायाप्रति साथ लाये।
  26. धान विक्रय के उपरान्त केन्द्र प्रभारी से पावती पत्र अवश्य प्राप्त कर लें।

धान खरीद हेतु किसान पंजीकरण कैसे करें- उत्तर प्रदेश धान खरीदी 2021

1. VISIT OFFICIAL PORTAL
धन खरीदी हेतु किसान पंजीकरण के लिए किसान उत्तर प्रदेश इ उपार्जन की आधिकारिक वेबसाइट https://eproc.up.gov.in/Uparjan/Home_Reg.aspx पर विजिट करें और मुख्या पृष्ठ में धान खरीद हेतु किसान पंजीकरण लिंक पर क्लिक करें
उत्तर प्रदेश धान खरीदी 2021
2. दिशानिर्देशों को ध्यान से पढ़ें
दूसरे चरण में आपको पेज में किसान पंजीयन हेतु दिशा निर्देश दिए गए हैं उन्हें पंजीकरण से पूर्व ध्यान से पढ़ें और समझने के बाद पंजीकरण हेतु आगे बढ़ें उन्ही दिशा निर्देशों को हमने इस लेख में पहले ही स्पष्ट कर दिया है जैसा की आप पढ़ और देख सकते हैं
3. नवीन पंजीकरण
कृषक बंधुओं को नया पंजीकरण करने से पहले सभी महत्वपूणण दिशादनिेशों को पढ़ लेना आवश्यक है, कृषक को आधार पर अंकित अंग्रेजी नाम व आधार संख्या ही भरना होगा, कृषक को अपने भूमि का जिला ही चुनना होगा क्योंकि भूमि इस जिले की मान्य होगी। कृषक बंधुओं को आधार में पंजीकृत मोबाइल नंबर पर ही OTP प्राप्त होगी, OTP का सफल सत्यापन के उपरान्त ही पंजीकरण किया जा सकता है, जो की नीचे चित्र में दर्शाया गया है
उत्तर प्रदेश धान खरीदी 2021
5. AADHAR OTP VERIFICATION
आधार से रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर प्राप्त OTP को यहाँ पर अंकित करें। ध्यान रहे OTP वेरिफिएक्शन केवल आधार से लिंक्ड मोबाइल पर ही होगा यदि आपका आधार मोबाइल नंबर लिंक नहीं है तो पास के आधार सेण्टर में जाकर आधार से मोबाइल नंबर जरूर लिंक कराएं अन्यथा आप ऑनलाइन पंजीयन नहीं कर पाएंगे
उत्तर प्रदेश धान खरीदी 2021
4. कृषक का व्यक्तिगत व् भूमि का विवरण
यहाँ पर किसानों को व्यक्तिगत व् भूमि का विवरण भरना होता है, सभी जानकारियों को ध्यान से और प्रमाणित जानकारी ही भरें अन्यथा आपका सत्यापन निरस्त हो सकता है
उत्तर प्रदेश धान खरीदी 2021
5. ड्राफ्ट प्रिंट
कृषक बन्धु कृपया ड्राफ्ट प्रिंट को भली-भांति जांच लें। यदि किस प्रविष्टि में संशोधन की आवश्यकता हो तो ” स्टेप 2. पंजीकरण संशोधन ” के विकल्प से प्रविष्टियों को सही कर लें। तत्पश्चात पूर्णतः संतुष्ट पर ” स्टेप 4. पंजीकरण लॉक ” के विकल्प से आवेदन को लॉक करके पंजीकरण प्रक्रिया को पूर्ण कर लें। बिना लॉक किये गए आवेदन स्वीकार नहीं किया जायेगा। आवेदन लॉक करने के पश्चात किसी भी प्रकार का संशोधन नहीं किया जा सकता।
उत्तर प्रदेश धान खरीदी 2021
6. पंजीकरण लॉक
स्टेप 4 के माध्यम से अब पंजीयन को लॉक किया जा सकता है लॉक करने के लिए फिर से OTP की आवश्यता होगी। पंजीयन लॉक होने के पश्चात किसी बी ही प्रकार का संसोधन नहीं किया जा सकता इसलिए आपको सलाह दी जाती है की लॉक करने पूर्व भली भांति पंजीयन में किये हुए प्रविष्टियों की जाँच कर लें
7. पंजीयन प्रिंट
पंजीयन लाक होने के उपरांत किसान बंधू फाइनल पंजीयन प्रिंट प्राप्त कर सकते हैं

किसान पंजीयन का यूजर मैनुअल देखने के लिए यहाँ क्लिक करें

Frequently Asked Questions (FAQ):-

धान बिक्री के लिए ऑनलाइन पंजीकरण कैसे करें?

धान बिक्री के लिए रजिस्ट्रेशन करने के लिए सबसे पहले आपको उत्तर प्रदेश खाद्य एवं रसद विभाग कि ऑफिसियल वेबसाइट पर आ जाना है और यहाँ पर आपको खरीद हेतु किसान पंजीकरण लिखा दिखेगा इस पर क्लिक कर आप ऑफिसियल वेबसाइट पर पहुँच जायेंगे, यही से आप धान बिक्री के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते है |

धान का रजिस्ट्रेशन कब से शुरू होगा?

धान खरीद किसान का रजिस्ट्रेशन पश्चिमी उत्तर प्रदेश एवं बुंदेलखंड में दिनांक 01/10/2021 से शुरू होगा तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश में दिनांक 01/11/2021 से शुरू होंगे |

ऑनलाइन किसान पंजीकरण कैसे करें?

ऑनलाइन किसान धान पंजीकरण करने के लिए आप उत्तर प्रदेश खाद्य एवं रसद विभाग कि ऑफिसियल वेबसाइट पर जाकर कर सकते है |

धान खरीद किसान पंजीकरण में संशोधन (Correction) कैसे करे?

धान खरीद किसान पंजीकरण फॉर्म में संशोधन करने के लिए आपको खाद्य एवं रसद विभाग उत्तर प्रदेश ई क्रय प्रणाली कि ऑफिसियल वेबसाइट पर आ जाना है यहाँ पर आपको स्टेप 4 पंजीकरण संशोधन बटन पर क्लिक कर संशोधन कर सकते है |

धान खरीद हेतु किसान पंजीकरण लास्ट डेट (Last Date)

धान खरीद किसान रजिस्ट्रेशन पश्चिमी उत्तर प्रदेश एवं बुंदेलखंड कि लास्ट डेट 31/01/2022 है तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश में दिनांक 28/02/2022 लास्ट डेट है |

धान खरीद किसान पंजीकरण ऑनलाइन कैसे करे?

धान खरीद किसान पंजीकरण ऑनलाइन करने के लिए आपको खाद्य एवं रसद विभाग उत्तर प्रदेश ई क्रय प्रणाली कि ऑफिसियल वेबसाइट पर जाकर आप ऑनलाइन अप्लाई कर सकते है |

iPhone 13 और iPhone 13 Mini हुए लॉन्च, जानें कीमत और खूबियां

iPhone 13 price in india-

Apple Event 2021:- iphone 13 mini price in india

iPhone 13 iPhone 13 Mini को Apple Event 2021 में लॉन्च कर दिया गया है। iPhone 12 और iPhone 12 Mini के मुकाबले आईफोन 13 और आईफोन 13 मिनी में कई बदलाव किए गए हैं। ये बदलाव डिजाइन से लेकर डिस्प्ले और परफॉर्मेंस तक में देखने को मिलेंगे। कंपनी ने कहा है कि इनमें कई ऐसी चीजों का इस्तेमाल किया गया है, जिन्हें रिसाइकल किया जा सकता है।

आईफोन 13 और मिनी का डिस्प्ले पहले के मुकाबले 28 पर्सेंट ज्यादा ब्राइट है। आईफोन 13 में 6.1 इंच और आईफोन 13 मिनी में 5.4 इंच का डिस्प्ले दिया गया है। दोनों फोन में A15 बायोनिक चिप का इस्तेमाल किया गया है।

पुराने डिजाइन के साथ कंपनी ने iPhone 13 लॉन्च किआ। Iphone 13 में एप्पल की नयी चिप A15 Bionic Chip के साथ लांच किआ है। जिसमे 6 core का CPU दिया गया है। नए आईफोन में नया प्रोसेसर दिया गया है और पहले से ज्यादा डिस्प्ले ब्राइटनेस है।

iPhone 13 price in India

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iPhone 13 मिनी की कीमत 699 डॉलर- 69 हज़ार से शुरू होती है और आईफोन 13 की यूएस में कीमत 799 डॉलर- 7 हज़ार से शुरू होती है। दोनों फोन का शुरुआती वेरिएंट अब 64GB के बजाय 128GB स्टोरेज के साथ आता है।

iPhone 13 mini prices in India:

Rs. 69,900 – 128GB
Rs. 79,900 – 256GB
Rs. 99,900 – 512 GB

iPhone 13 prices in India:

Rs. 79,900 – 128GB
Rs. 89,900 – 256GB
Rs. 109,900 – 512GB

iPhone 13 Pro की बात करें तो कंपनी ने प्रो मॉडल के कैमरा सिस्टम में अबतक का सबसे बड़ा बदलाव किया है। इसमें टेलीफोटो, वाइड और एक अन्य कैमरा सेंसर शामिल है। इसमें 77mm टेलिफोटो कैमरा, अल्ट्रा वाइड और वाइड कैमरा दिया गया है।

Pro मॉडल में 4 फिनिश में उपलब्ध होंगे। कंपनी ने इसके फ्रंट को पूरी तरह से नया डिजाइन दिया है, नॉच पहले से काफी छोटा किया गया है। इनसाइड में भी पूरी तरह नया डिजाइन मिलता है

iPhone 13 Pro की कीमत 999 डॉलर है। वहीं, iPhone 13 Pro Max की कीमत 1099 है। इनके प्री-ऑर्डर इस शुक्रवार यानी 17 सितंबर से शुरू हो जाएंगे।

Amazon Career Day- 8 हजार लोगों को नौकरी दे रहा है Amazon, 16 सिंतबर से शुरू होगा जॉब फेयर, ऐसे करें अप्लाई!

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क्या आप जानना चाहते हैं की, Amazon Career Day क्या है, क्या आप भी amazon में job करना चाहते हैं। Amazon India Jobs- दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन इस साल 35 शहरों में 8000 लोगों को नौकरियां देने की तैयारी कर रहा है। आप भी अमेजन के साथ मिलकर कमाई कर सकते हैं।

जॉब फेयर इवेंट के लिए रजिस्ट्रेशन करने के लिए आपको Amazon की Jobs वेबसाइट पर जाना होगा। यहां मौजूद ‘Register’ ऑप्शन पर क्लिक कर आप फॉर्म को भर सकते हैं। आज हम आपको बतायेंगे की कैसे आप Amazon Career Day में Amazon Jobs के लिए Apply कर सकते हैं।

अमेजन की एचआर प्रमुख (कॉर्पोरेट, एशिया-प्रशांत, और पश्चिम एशिया एवं उत्तर अफ्रीका) दीप्ति वर्मा ने बताया कि हमारे पास देश के 35 शहरों में 8,000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर हैं. इन शहरों में बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, गुड़गांव, मुंबई, कोलकाता, नोएडा, अमृतसर, अहमदाबाद, भोपाल, कोयंबटूर, जयपुर, कानपुर, लुधियाना, पुणे, सूरत जैसे शहर शामिल हैं।

Amazon Career Day

Amazon Career Day 16 सितंबर, 2021 को सुबह 10:00 बजे आईएसटी पर एक फ्री इवेंट है. कंपनी ने एक बयान में कहा कि ये इंटरैक्टिव एक्सपीरियंस सभी नौकरी चाहने वालों के लिए है, चाहे आपके एक्सपीरियंस का लेवल, प्रोफेशनल फील्ड या बैकग्राउंड कुछ भी हो, चाहे आप अमेजन या दूसरे जगहों पर काम करने में रुचि रखते हों।

Amazon ने खुलासा किया है कि 16 सितंबर को वह भारत में अपना पहला करियर डे मनाएगा। घोषणा के अनुसार “यह वर्चुअल और इंटरेक्टिव इवेंट अमेज़ॅन नेतृत्व और कर्मचारियों को एक साथ लाएगा जो अमेज़ॅन को एक रोमांचक कार्यस्थल बनाता है, यहां काम करना कैसा लगता है और कंपनी भारत में अपनी वास्तविक क्षमता को उजागर करने में मदद करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता में कैसे दृढ़ है।

Amazon ने 55,000 से ज्यादा भर्ती निकाली है, जिसके लिए आप भी आवेदन कर सकते हैं। ई-कॉमर्स दिग्गज को दुनिया भर में बड़े पैमाने पर कॉर्पोरेट व टेक्नोलॉजी से संबंधित लोगों की तलाश है। ये संख्या गूगल के एक तिहाई और Facebook के कुल कर्मचार्रियों के आसपास है। इतनी बड़ी भर्ती का खुलासा खुद Amazon के नए CEO ने किया है। बता दें, एंडी जेसी (Andy Jassy) ने जुलाई महीने में Amazon के नए चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) का पद संभाला था।

इन सेक्टर्स में मिलेंगे मौके।

‘ये नौकरियां कॉर्पोरेट, प्रौद्योगिकी, ग्राहक सेवा और संचालन भूमिकाओं से जुड़ी हैं. दीप्ति ने कहा कि कंपनी का लक्ष्य 2025 तक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह की 20 लाख नौकरियों का सृजन करना है, और वह पहले ही भारत में 10 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियों का सृजन कर चुकी है।

रिटेल, क्लाउड और एडवर्टाइजमेंट (विज्ञापन) सहित दूसरे बिजनेस में मांग को पूरा करने के लिए कंपनी को और मैन पावर की जरूरत है। उन्होंने जानकारी दी कि इन 55 हजार नौकरियों में से 40 हजार से ज्यादा अमेरिका में होंगी, जबकि बाकी लोग भारत, जर्मनी और जापान जैसे देशों से हायर किए जाएंगे। बताते चलें कि Amazon जल्द भारत में अपना जॉब फेयर शुरू करेगी, जिसका नाम ‘अमेजन करियर डे’ (Amazon Career Day) रखा गया है। सभी भर्तियां इसी दिन शुरू की जाएंगी।

Amazon Career Day 2021 Registration

Amazon Career Day 2021 में आप ऑनलाइन जॉब के लिए अप्लाई कर सकते हैं। निचे बताये जा रहे स्टेप्स को फॉलो करें और जाने की कैसे आप Amazon Career Day 2021 recruitment के लिए अप्लाई कर सकते हैं।

1- Amazon Career Day में अप्लाई करने के लिए आपको सबसे पहले Amazon Career Day Registration पेज में जाना होगा।- https://register.amazoncareerday.com/page/1876519/india?lang=en

2- वेबसाइट में जाने के बाद अब आपको Register वाली बटन में क्लिक करना है, जैसा की आप निचे स्क्रीनशॉट में देख सकते हैं।

2- इसके बाद आपको आपका नाम और ईमेल डालना है, और फिर टर्म्स एंड कंडीशन में सलेक्ट करके Register वाली बटन में क्लिक करदेना है। जिसके बाद आपका रजिस्ट्रेशन होजायेगा।

यहां मौजूद ‘Register’ ऑप्शन पर क्लिक कर आप फॉर्म को भर सकते हैं। ध्यान रहें कि Amazon Career Day 2021 में भाग लेने के लिए रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं है, लेकिन Amazon के HR के साथ करियर कोचिंग सेशन में हिस्सा लेने के लिए रजिस्ट्रेशन करना जरूरी होगा।

उत्तरप्रदेश पोस्ट ऑफिस GDS के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे करें

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UP Post Office GDS Online Registration: उत्तरप्रदेश पोस्टल सर्किल के लिए 4264 ग्रामीण डाक सेवक (BRANCH POSTMASTER (BPM), ASSISTANT BRANCH POSTMASTER (ABPM))पदों हेतु भर्ती की अधिसूचना जारी की गयी है इच्छुक एवं पात्र अभ्यर्थी अंतिम तिथि 22 सितंबर 2021 से पहले ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं शैक्षणिक योग्यता एवं विस्तृत जानकारी के लिए जारी अधिसूचना को पढ़ें Click Here

जरुरी डॉक्युमेंट्स और फॉर्म भरने की जानकारी के लिए नीचे बताई गयी प्रक्रिया को फॉलो करें जिससे आप खुद फॉर्म भर सकेंगे |

जरुरी डाक्यूमेंट्सUP Post Office GDS Online Registration

फॉर्म भरने से पहले कुछ जरुरी डाक्यूमेंट्स जिन्हे स्कैन कर के आपको रख लेना चाहिए:-

  • पासपोर्ट फोटो
  • हस्ताक्षर
  • 10 मार्कशीट (DOB PROOF)
  • जाति प्रमाण पत्र
  • कम्प्यूटर सर्टिफिकेट (यदि हो)

NOTE : ऑनलाइन आवेदन करने के तीन स्टेज हैं पहला रजिस्ट्रेशन दूसरा फीस भुगतान तीसरा आवेदन जिसे हमें स्टेप बाय स्टेप पूरा करना है

STEP 1: REGISTRATION:- ऑनलाइन आवेदन करने के लिए सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट https://appost.in/gdsonline/ जाएँ में मेनू में रजिस्ट्रेशन लिंक पर क्लिक करें |रजिस्ट्रेशन फॉर्म में आवेदक अपनी बेसिक जानकारी भरें फोटो तथा सिग्नेचर संलग्न करें और सबमिट करें सबमिट करते ही रजिस्ट्रेशन नंबर स्क्रीन में आ जायेगा साथ ही मैसेज में प्राप्त हो जायेगा जिसे सेव करके रखें |

UP Post Office GDS Online Registration

STEP 2: FEES PAYMENT :- प्राप्त रजिस्ट्रेशन नंबर की सहायता से फीस का भुगतान करें महिला, अनुसूचित जाति, जनजाति तथा दिव्यांगों हेतु फी में छूट दी गयी है अतः इन्हे भुगतान नहीं करना है सीधे तीसरा स्टेप फॉलो करें।

UP Post Office GDS Online Registration

STEP 3: APPLY:- रजिस्ट्रेशन नंबर और OTP डाल कर फॉर्म में मांगी गयी सभी जानकारी ध्यान से भरें तथा दस्तावेज अपलोड करें

UP Post Office GDS Online Registration

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रजिस्ट्रेशन करते समय सर्वर चला गया अब दूसरा रजिस्ट्रशन करने पर already registered बता रहा है

इस कंडीशन में आप सबसे पहले अपने मोबाइल मैसेज बॉक्स में चेक करें रजिस्ट्रेशन नंबर आया है की नहीं यदि आया है तो उसी से आगे की प्रक्रिया करें यदि नहीं आया है तो दूसरा मोबाइल नंबर डालकर फिर से रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं|

Employee NOC विकल्प में क्या चयन करें।

यदि आप पहले से गवर्नमेंट नौकरी में हैं तो आपको NOC लेना होगा तो आप YES का ऑप्शन चुनेंगे यदि नहीं हैं तो NO विकल्प का चयन करें

मार्कशीट अपलोड नहीं हो रही हैं एरर आ रहा है

मार्कशीट अपलोड करने से पहले ध्यान रखें सभी डॉक्यूमेंट JPEG फॉर्मेट में और साइज 200KB के अंदर होना चाहिए यदि ऐसा है तो मार्कशीट अपलोड करने में कोई प्रॉब्लम नहीं होगी |