राष्ट्रीय युवा दिवस 2021: क्यों मनाया जाता है 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस?

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International Youth Day

राष्ट्रीय युवा दिवस 2021:-

राष्ट्रीय युवा दिवस 2021 (National Youth Day) प्रत्येक वर्ष 12 जनवरी के दिन मनाया जाता है | भारत सरकार द्वारा वर्ष 1984 में इसे राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी | यह दिन महान दार्शनिक और आध्यात्मिक गुरू स्‍वामी विवेकानंद जी की जयंती का दिन है |

स्वामी विवेकानंद का जीवन और विचार दोनों ही प्रेरणा के स्त्रोत हैं | इसे मानाने का मुख्य उद्देश्य भारत के महानतम समाज सुधारक, विचारक और दार्शनिक स्वामी विवेकानंद जी के आदर्शों और विचारों को देश भर के भारतीय युवाओं को प्रोत्साहित किया जाना है और ताकि वो इन्हें अपने जीवन में शामिल कर सकें |

स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda) के विचारों पर चलकर लाखों युवाओं के जीवन में बदलाव आया | विवेकानंद जी ने अमेरिका स्थित शिकागो में सन् 1893 में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था | उन्होंने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की थी जो आज भी अपना काम कर रहा है | वे रामकृष्ण परमहंस के सुयोग्य शिष्य थे |

इसे आधुनिक भारत के निर्माता स्वामी विवेकानंद के जन्म दिवस को याद करने के लिये मनाया जाता है | राष्ट्रीय युवा दिवस के रुप में स्वामी विवेकानंद के जन्म दिवस को मनाने के लिये वर्ष 1984 में भारतीय सरकार द्वारा इसे पहली बार घोषित किया गया था | तब से (1985), पूरे देश भर में राष्ट्रीय युवा दिवस के रुप में इसे मनाने की शुरुआत हुई |

राष्ट्रीय युवा दिवस का इतिहास:-

यह सर्वज्ञात है कि 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद के जन्म दिवस पर हर वर्ष राष्ट्रीय युवा दिवस मनाने के लिये भारतीय सरकार ने घोषित किया था | स्वामी विवेकानंद का दर्शन और उनके आदर्श की ओर देश के सभी युवाओं को प्रेरित करने के लिये भारतीय सरकार द्वारा ये फैसला किया गया था |

स्वामी विवेकानंद के विचारों और जीवन शैली के द्वारा युवाओं को प्रोत्साहित करने के द्वारा देश के भविष्य को बेहतर बनाने के लक्ष्य को पूरा करने के लिये राष्ट्रीय युवा दिवस के रुप में स्वामी विवेकानंद के जन्म दिवस को मनाने का फैसला किया गया था |

इसे मनाने का मुख्य लक्ष्य भारत के युवाओं के बीच स्वामी विवेकानंद के आदर्शों और विचारों के महत्व को फैलाना है | भारत को विकसित देश बनाने के लिये उनके बड़े प्रयासों के साथ ही युवाओं के अनन्त ऊर्जा को जागृत करने के लिये यह बहुत अच्छा तरीका है |

राष्ट्रीय युवा दिवस 2021

विवेकानंद जी के बारे में मुख्य बातें:

  • स्‍वामी विवेकानंद का जन्‍म कलकत्ता के कायस्‍थ परिवार में हुआ था | उनके बचपन का नाम नरेंद्र नाथ दत्त था | उनके पिता व‍िश्‍वनाथ दत्त कलकत्ता हाईकोर्ट के वकील थे, जबकि मां भुवनेश्वरी देवी धार्मिक विचारों वाली महिला थीं |
  • नरेंद्र नाथ 1871 में आठ साल की उम्र में स्कूल गए | 1879 में उन्‍होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज की प्रवेश परीक्षा में पहला स्‍थान हास‍िल क‍िया |
  • नरेंद्र नाथ दत्त 25 साल की उम्र में घर-बार छोड़कर सन्यासी बन गए थे | संन्यास लेने के बाद इनका नाम विवेकानंद पड़ा |
  • रामकृष्‍ण परमहंस और स्‍वामी विवेकानंद की मुलाकात 1881 कलकत्ता के दक्षिणेश्वर के काली मंदिर में हुई थी | परमहंस ने उन्हें शिक्षा दी कि सेवा कभी दान नहीं, बल्कि सारी मानवता में निहित ईश्वर की सचेतन आराधना होनी चाहिए |
  • विवेकानंद जब रामकृष्‍ण परमहंस से मिले तो उन्होंने वही सवाल किया जो वो औरों से कर चुके थे, ‘क्या आपने भगवान को देखा है?’ रामकृष्ण परमहंस ने जवाब दिया- ‘हां मैंने देखा है, मैं भगवान को उतना ही साफ देख रहा हूं जितना कि तुम्हें देख सकता हूं | फर्क सिर्फ इतना है कि मैं उन्हें तुमसे ज्यादा गहराई से महसूस कर सकता हूं.’
  • अमेरिका में हुई धर्म संसद में जब स्‍वामी विवेकानंद ने ‘अमेरिका के भाइयों और बहनों’ के संबोधन से भाषण शुरू किया तो पूरे दो मिनट तक आर्ट इंस्टीट्यूट ऑफ शिकागो में तालियां बजती रहीं | 11 सितंबर 1893 का वो द‍िन हमेशा-हमेशा के ल‍िए इतिहास में दर्ज हो गया |
  • स्‍वामी विवेकानंद ने 1 मई 1897 में कलकत्ता में रामकृष्ण मिशन और 9 दिसंबर 1898 को गंगा नदी के किनारे बेलूर में रामकृष्ण मठ की स्थापना की |
  • स्‍वामी विवेकानंद के जन्‍म दिन यानी कि 12 जनवरी को भारत में हर साल राष्‍ट्रीय युवा द‍िवस मनाया जाता है | इसकी शुरुआत 1985 से हुई थी |
  • स्वामी विवेकानंद को दमा और शुगर की बीमारी थी | उन्‍होंने कहा भी था, ‘ये बीमार‍ियां मुझे 40 साल भी पार नहीं करने देंगी.’ अपनी मृत्‍यु के बारे में उनकी भव‍िष्‍यवाणी सच साबित हुई और उन्‍होंने 39 बरस की बेहद कम उम्र में 4 जुलाई 1902 को बेलूर स्थित रामकृष्‍ण मठ में ध्‍यानमग्‍न अवस्‍था में महासमाध‍ि धारण कर प्राण त्‍याग द‍िए |
  • स्वामी विवेकानंद का अंतिम संस्‍कार बेलूर में गंगा तट पर किया गया | इसी गंगा तट के दूसरी ओर उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस का अन्तिम संस्कार हुआ था |

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