ITR Forms 2023: कौन सा आईटीआर फॉर्म्स भरना है आपको? जाने यहाँ पर..

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ITR Forms

ITR Forms 2023: इनकम टैक्स रिटर्न भरने के लिए  आईटीआर फॉर्म्स नोटिफाई हो चुके हैं इनकम टैक्स रिटर्न ऐसा फॉर्म होता है, जिसमें टैक्सपेयर्स अपनी इनकम और ऐप्लीकेबल टैक्स के बारे में जानकारी देते हैं. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट कई तरह के आईटीआर फॉर्म जारी करता है.

कुछ तो आईटीआर फॉर्म होते हैं, कुछ ऐसे फॉर्म भी होते हैं, जो आईटीआर फॉर्म के साथ लगाए जाते हैं. लेकिन एक कंफ्यूजन रहती है कि किसको कौन सा फॉर्म भरना है आज इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको इनके बारे में विस्तार से बता रहे हैं|

ITR Form

ITR Form 1 या आईटीआर सहज :

वो भारतीय नागरिक जिनकी सालाना कमाई 50 लाख रुपए तक है, वो फॉर्म 1 को भरते हैं. 50 लाख तक की कमाई में आपकी सैलरी, पेंशन या किसी अन्‍य सोर्स को भी शामिल किया जाता है. 5000 रुपए तक की कृषि आय को भी इसमें शामिल किया जाता है. लेकिन अगर आप किसी कंपनी के डायरेक्‍टर है, किसी अनलिस्‍टेड कंपनी में निवेश किया हो, कैपिटल गेन्‍स से कमाते हों, एक से ज्यादा हाउस या प्रॉपर्टी से इनकम आती हो या फिर बिजनेस से कमाई करते हैं, तो ये फॉर्म आप नहीं भर सकते हैं|

ITR Form 2:

अगर आपकी कमाई 50 लाख रुपए से ज्‍यादा है तो  आपको ये फॉर्म भरना होगा. इसके तहत एक से ज्यादा आवासीय संपत्ति, इन्वेस्टमेंट पर हुए कैपिटल गेन या लॉस, 10 लाख रुपए से ज्यादा की डिविडेंड इनकम और खेती से हुई 5000 रुपए से ज्यादा की कमाई के बारे में बताना होता है. इसके अलावा अगर पीएफ से ब्‍याज के तौर पर कमाई हो रही है, तब भी ये फॉर्म भरा जाता है|

ITR Form 3:

बिजनेसमैन, इक्विटी अनलिस्टेड शेयर में निवेश किया हो, किसी कंपनी में पार्टनर के तौर पर कमाई कर रहे हों, तो आप ITR Form 3 भर सकते हैं. इसके अलावा ब्याज, सैलरी, बोनस से आमदनी, कैपिटल गेन्‍स, हॉर्स रेसिंग, लॉटरी, एक से ज्यादा प्रॉपर्टी से किराए की इनकम होती है, तो भी आप ये फॉर्म भर सकते हैं|

ITR Form 4 या आईटीआर- सुगम:

इंडिविजुअल और HUF (हिंदू अविभाजित परिवार) के लिए होता है. अगर आपकी इनकम अपने बिजनेस या किसी पेशे से होती है जैसे डॉक्‍टर-वकील की आमदनी, पार्टनरशिप फर्म्स (LLP के अलावा) चलाने वाले, धारा 44AD और 44AE के तहत इनकम करने वाले और सैलरी या पेंशन से 50 लाख से ज्‍यादा की कमाई करने वाले लोग इस फॉर्म को भरते हैं. अगर आप फ्रीलांसर हैं लेकिन सालाना कमाई 50 लाख से ज्‍यादा है, तो भी ये फॉर्म आप भर सकते हैं|

ITR Form 5:

आईटीआर 5 उन संस्थाओं के लिए होता है, जिन्होंने खुद को फर्म, LLPs, AOPs, BOIs के रूप में रजिस्टर्ड करा रखा है. एसोसिएशन ऑफ पर्सन्स और बॉडी ऑफ इंडिविजुअल्स के लिए भी इसी फॉर्म का इस्तेमाल किया जाता है|

ITR Form 6 और 7:

जिन कंपनियों को इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 11 के तहत (धर्मार्थ या धार्मिक उद्देश्य वाली प्रॉपर्टी से हुई आय) छूट नहीं मिलती है, उनके लिए ITR Form 6 होता है. इसे बस इलेक्ट्रॉनिकली ही फाइल किया जा सकता है|

ITR Form 7:

जिन टैक्सपेयर्स को 139(4A) या सेक्शन 139(4B) या सेक्शन 139(4C) या सेक्शन 139(4D) के तहत रिटर्न दाखिल करना होता है, उन कंपनियों और लोगों को ITR Form 7 भरने की जरूरत होती है.

Form 16:

फॉर्म 16 टैक्स रिटर्न फाइल करते हुए देना होता है, ये भी काफी अहम दस्तावेज है. ये एक तरीके से आपका सैलरी सर्टिफिकेट होता है, जिसमें आपकी सैलरी, टैक्स डिडक्शन वगैरह की जानकारी होती है. ये फॉर्म आपकी कंपनी जारी करती है. इसमें दो पार्ट होते हैं- A और B|

Form-16A/ Form-16B/ Form- 16C:

Form-16A टीडीएस सर्टिफिकेट होता है. इसकी जरूरत तब पड़ती है, जब आपको फिक्स्ड डिपॉजिट, रिकरिंग डिपॉजिट वगैरह से मिली इनकम पर टीडीएस कटता है. Form-16B तब देना होता है जब आप कोई प्रॉपर्टी खरीदते हैं. अगर कोई प्रॉपर्टी 50 लाख से ज्यादा अमाउंट पर बेची जाती है, तो उस पर टीडीएस डिडक्शन अनिवार्य है. वहीं Form- 16C ऐसे मकान मालिकों को देना होता है, जो 50,000 रुपये से ज्यादा की इनकम किराये से पाते हैं|

Form 26AS:

फॉर्म 26AS एक समेकित विवरण है जो प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए पैन नंबर के आधार पर कर संबंधी सभी जानकारी जैसे टीसीएस, टीडीएस, और धनवापसी आदि का रिकॉर्ड रखता है। इसमें प्रासंगिक वित्तीय वर्ष के दौरान प्राप्त किसी भी धनवापसी का विवरण भी शामिल है। फॉर्म 26AS में आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 203AA, नियम 31AB के तहत वार्षिक कर विवरण होता है। विवरण में सरकार द्वारा प्राप्त की गई कर राशि का पता चलता है। इसमें किसी व्यक्ति के आय स्रोतों के बारे में जानकारी भी शामिल है जिसमें मासिक वेतन, निवेश से आय, पेंशन, पेशेवर सेवाओं के लिए आय आदि शामिल हैं। इसके अलावा, नियोक्ता द्वारा आपकी ओर से कर कटौती,बैंक और अन्य वित्तीय संस्थान जिसमें आपने अचल संपत्ति की बिक्री/खरीद, निवेश या किराया किया है।

आयकर रिटर्न AY 2023-2024 के संदर्भ में बार बार पूछे जाने वाले प्रश्न :

1.इनकम टैक्स रिटर्न का मतलब क्या होता है?

इनकम टैक्स रिटर्न एक फॉर्म जिसके अन्दर व्यक्ति को वित्त वर्ष के दौरान हुये अपनी आय की जानकारी, आय का विवरण आयकर विभाग में जमा करवानी होती है

2. 2023 का रिटर्न कब भरा जाएगा?

वित्त वर्ष 2022-2023 का रिटर्न निर्धारण वर्ष 2023-2034 में 31 जुलाई 2023 से पहले भरना है.

3.इनकम टैक्स में कितने लाख तक छूट है?

आयकर अधिनियम के अनुसार व्यक्ति की आय २.५ लाख रुपयो के अन्दर है तो कोई टैक्स नहीं लगता|

4. ITR कौन कौन भर सकता है?

प्रत्येक व्यक्ति जो भारत का रहिवासी है, पैन धारक है, और उसकी वित्त वर्ष के दौरान आय करमुक्त सीमा से अधिक है, तो वह व्यक्ति ITR भर सकता है

5. इनकम टैक्स में रिफंड कैसे प्राप्त करें?

इनकम टैक्स में रिफंड प्राप्त करने के लिये व्यक्ति को अपना आयकर विवरण फाइल करना होता है, और अगर उसका काटा गया टीडीएस आयकर विवरण के अनुसार लगने वाले टैक्स से अधिक है, तो उस व्यक्ती को रिफंड मिलेगा

6. इनकम टैक्स कब भरना पड़ता है?

आयकर अधिनियम के अनुसार अगर किसी व्यक्ती की आय सम्पूर्ण वित्त वर्ष के दौरान करमुक्त सीमा से अधिक है, और आय से चैप्टर VIA की सारी छुट कम करने के बाद टैक्स निकल रहा है, तो इनकम टैक्स भरना होता है

7. क्या मैं बिना सीए के अपना आईटीआर खुद फाइल कर सकता हूं?

आईटीआर फॉर्म आयकर नियमो में होता है, आईटीआर फॉर्म के प्रत्येक अनुसूची और कॉलम पर नियम लगे हुवे है, और नियमो का उल्लंघन करने पर आयकर विभाग नोटिस देता है. तो अगर आप आयकर अधिनियम और आयकर नियमो को अच्छी तरह से समझते है, तो आप आपका आईटीआर खुद फाइल कर कर सकते हैं.

8. भारत के कितने लोग आईटीआर फाइल करते हैं?

15-01-2023 तक आयकर विभाग के अधिकृत पोर्टल के अनुसार निर्धारण वर्ष 2022-2023 के लिये 7,52,23,983 आयकर रिटर्न्स फाइल हुवे है

9. आईटीआर क्यों करना चाहिए?

आयकर अधिनियम के अनुसार अगर व्यक्ति की सम्पूर्ण वित्त वर्ष के दौरान करमुक्त सीमा से अधिक है, तो व्यक्ति को आईटीआर फाइल करना होता है. ऐसा नहीं करने पर आयकर विभाग द्वारा पेनल्टी लगाई जाती है

10.इनकम टैक्स 87A क्या है?

अगर किसी Individual की कुल आय ५ लाख रुपयों से कम है, तो उसे धारा 87A के अंतर्गत कर छुट मिलती है. इस धारा के अंतर्गत कुल आय ५ लाख रुपयों से कम है तो कोई टैक्स नहीं लगता|

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