आखिर क्या है भगोड़ा आर्थिक अपराधी विधेयक 2018 ?

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भगोड़ा आर्थिक अपराधी विधेयक 2018:-

कर चोरी और बैंकों के ऋण घोटाले के आर्थिक अपराधियों को देश छोड़कर भागने की स्थिति में उनकी सम्पत्ति जब्त करने और उन्हें सजा देने के प्रावधान वाले “भगोड़ा आर्थिक अपराधी विधेयक 2018″ को 25 जुलाई 2018 को राज्यसभा से पारित कर दिया गया | लोकसभा ने “भगोड़ा आर्थिक अपराधी विधेयक 2018″ को 20 जुलाई 2018 को ही पारित कर दिया था |

यह विधेयक “भगोड़ा आर्थिक अपराधी अध्यादेश 2018” के स्थान पर लाया गया है | विधेयक में सरकार को बैंकों के ऋण घोटाले वाले धोखेबाजों की संपत्ति तथा बिना कर्ज चुकाए देश छोड़कर भागने वाले अपराधियों की संपत्ति को ज़ब्‍त करने का अधिकार दिया गया है |

भगोड़ा आर्थिक अपराधी विधेयक 2018 का उद्देश्य:-

कर चोरी और बैंकों के ऋण घोटाले के आर्थिक अपराधी भारतीय न्यायालयों में अपने खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई प्रारंभ होने की संभावना में या कभी-कभी कार्यवाहियों के लम्बे समय तक लंबित रहने के दौरान भारतीय न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र से भाग जाते हैं. और किसी दुसरे देश में पनाह ले लेते हैं | जिससे न्यायालयों की कार्यवाही में परेशानी होती है और न्यायालयों का कीमती समय भी खराब होता है |

ऐसे आर्थिक अपराधी जो न्यायालयों की कार्यवाही से बचने के लिए देश से भाग जाते हैं और भगोड़े बन जाते हैं उन्हें देश में वापस लाकर उनके खिलाफ मुकदमा चला कर उनकी संपत्ति को जब्त करना ही इस विधेयक का उद्देश्य है |

भगोड़ा आर्थिक अपराध का प्रभाव:-

आर्थिक अपराधों द्वारा बैंक के कर्जों को न चुकाने से संबंधित मामलों के कारण भारत में बैंकिंग क्षेत्र की वित्तीय स्थिति खराब हो रही है | विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी जैसे कारोबारियों ने बैंकों से हजारों करोड़ रुपये का कर्ज लेने के बाद देश छोड़कर किसी अन्य देश में पनाह ले ली जिससे बैंकिंग क्षेत्रों के साथ-2 देश की economy भी प्रभावित हुई है |

वर्तमान सिविल एवं न्यायिक उपबंध इस समस्या से संपूर्ण रूप से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं है | धन-शोधन निवारण अधिनियम को और प्रभावी बनाने के लिए ये कानून बनाया गया है |

भगोड़ा आर्थिक अपराधी कौन हैं:-

भगोड़ा आर्थिक अपराधी ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने अनुसूचित अपराध किया है अर्थात ऐसे अपराध किए हैं जिनमें 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक की रकम सम्मिलित है और वे भारत छोड़कर भाग गए हैं या भारत में न्यायालयों द्वारा उन पर चलने वाले दंडात्मक अभियोजन से बचने के लिए या उसका सामना करने के लिए भारत आने से इंकार करते हैं |

इस विधेयक में भगोड़ा आर्थिक अपराधी की सम्पत्ति की कुर्की का उपबंध किया गया है | जिसके अनुसार किसी भी भगोड़े आर्थिक अपराधी को कोई सिविल दावा पेश करने या बचाव करने की हकदारी नहीं होगी | ऐसे मामलों में विशेष न्यायालयों द्वारा जारी आदेशों के विरुद्ध उच्च न्यायालय में अपील की जा सकती है |

भगोड़ा आर्थिक अपराधी विधेयक 2018 के महत्वपूर्ण बिंदु:-

  • संसद की मंजूरी के बाद यह विधेयक कानून के रूप में ऐसे मामलों में लागू होगा जहाँ अपराध 100 करोड़ से अधिक का हो |
  • यह विधेयक भारतीय न्यायालयों की कार्यवाही से बचने के लिए देश से भाग जाने वाले भगोड़ों पर अंकुश लगाएगा |
  • यह विधेयक सरकार को बैंकों के ऋण घोटाले वाले धोखेबाजों की संपत्ति तथा बिना कर्ज चुकाए देश छोड़कर भागने वाले अपराधियों की संपत्ति को ज़ब्‍त करने का अधिकार देता है |
  • यह विधेयक Financial Intelligence Unit को आर्थिक अपराधियों को भगोड़ा घोषित करने की अनुमति देता है |
  • Financial Intelligence Unit वित्त मंत्रालय के अधीन एक तकनीकी Intelligence Unit है |

 

 

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