Shardiya Navratri 2021: कब है शारदीय नवरात्रि? जानें तिथि और घटस्थापना का शुभ मुहूर्त

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Chaitra Navratri 2023
Chaitra Navratri 2023

Shardiya Navratri 2021:-

हिंदी पंचाग के अनुसार साल में नवरात्रि 4 बार मनाई जाती है. दो बार गुप्त नवरात्रि और दो नवरात्रि को मुख्य रूप से मनाया जाता है | इसमें चैत्र और शारदीय मुख्य नवरात्रि हैं, जिसे देशभर में पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है | नवरात्रि का मतलब है नौ रातें. नौ दिन तक चलने वाले शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है | देवी मां के पावन 9 दिन का पर्व शारदीय नवरात्रि आश्विन मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को 7 अक्टूबर 2021 से आरंभ होगा |

14 अक्टूबर तक चलने वाले इन दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है | 15 अक्टूबर को धूमधाम के साथ विजयदशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा | इसी दिन दुर्गा विसर्जन भी किया जाएगा | शास्त्रों में मां दुर्गा के नौ रूपों का बखान किया गया है | नवरात्र के दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने से विशेष पुण्य मिलता है | मान्यता है कि मां दुर्गा अपने भक्तों के हर कष्ट हर लेती हैं |

नवरात्रि मां दूर्गा की उपासना का त्योहार है, जहां हिंदू धर्म में इसे नवरात्रि कहा जाता है, वहीं बंगाली धर्म में ये नौ दिन दूर्गा जी की पूजा की जाती है | प्रथम दिन उनकी स्थापना और समापन पर विसर्जन किया जाता है | हर साल श्राद्ध के बाद ही नवरात्रि की शुरुआत होती है | सब जगह वातावरण भक्तिमय हो जाता है | नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में हर दिन अलग-अलग देवी को समर्पित है |

शुरुआत के तीन दिनों में मां दुर्गा की शक्ति और ऊर्जा की पूजा की जाती है | इसके बाद के तीन दिन यानी चौथा, पांचवा और छठे दिन जीवन में शांति देने वाली माता लक्ष्मी जी को पूजा जाती है | सातवें दिन कला और ज्ञान की देवी को पूजा जाता है | वहीं आठवां दिन देवी महागौरी को समर्पित होता है | इस दिन महागौरी की पूजा की जाती है | आखिरी दिन यानी नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री देवी की पूजा की जाती है |

घटस्थापना का शुभ मुहूर्त:-

नवरात्रि के प्रथम दिन घटस्थापना के साथ नौ दिन के लिए देवी मां का पूजन शुरू किया जाता है | घटस्थापना के कुछ विशेष नियम हैं, जिनका पालन करना जरूरी है | घटस्थापना के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष रूप से ध्यान रखें | 7 अक्टूबर को घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 17 मिनट से सुबह 7 बजकर 7 मिनट तक का है | इसी समय घटस्थापना करने से नवरात्रि फलदायी होते हैं |

Shardiya Navratri 2021

जानें घटस्थापना का महत्व:-

शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि का पहला दिन बहुत महत्वपूर्ण है | प्रतिपदा तिथि यानी नवरात्रि के पहले दिन ही कलश की स्थापना की जाती है | ऐसी मान्यता है कि कलश को भगवान विष्णु का रूप माना जाता है | इसलिए नवरात्रि पूजा से पहले घटस्थापना यानी कलश की स्थापना की जाती है | 

घटस्थापना विधि:-

घटस्थापना या कलश स्थापित करने के लिए सवेरे उठकर स्नान करके साफ कपड़ें पहन लें | मंदिर की साफ-सफाई करके एक सफेद या लाल कपड़ा बिछाएं | इसके बाद उसके ऊपर एक चावल की ढेरी बनाएं | एक मिट्टी के बर्तन में थोड़े से जौ बोएं और इसका ऊपर जल से भरा हुआ कलश स्थापित करें | कलश पर रोली से स्वास्तिक बनाएं, कलावा बांधे | एक नारियल लेकर उसके ऊपर चुन्नी लपेटें और कलावे से बांधकर कलश के ऊपर स्थापित करें | कलश के अंदर एक साबूत सुपारी, अक्षत और सिक्का डालें | अशोक के पत्ते कलश के ऊपर रखकर नारियल रख दें | नारियल रखते हुए मां दुर्गा का आवाह्न करना न भूलें | अब दीप जलाकर कलश की पूजा करें | स्थापना के समय आप सोना, चांदी, तांबा, पीतल या मिट्टी किसी भी कलश का इस्तेमाल कर सकते हैं |

शारदीय नवरात्रि की तिथियां:-

  • शारदीय नवरात्रि का प्रारंभ: 07 अक्टूबर, दिन गुरुवार |
    • घट स्थापना या कलश स्थापना: 07 अक्टूबर को |
    • घटस्थापना मुहूर्त: प्रात: 06 बजकर 17 मिनट से सुबह 07 बजकर 07 मिनट के मध्य |
  • नवरात्रि का दूसरा दिन: 08 अक्टूबर, दिन शुक्रवार |
  • नवरात्रि का तीसरा दिन: 09 अक्टूबर, दिन शनिवार |
  • नवरात्रि का चौथा दिन: 10 अक्टूबर, दिन रविवार |
  • नवरात्रि का पांचवा दिन: 11 अक्टूबर, दिन सोमवार |
  • नवरात्रि का छठा दिन: 12 अक्टूबर, दिन मंगलवार |
  • नवरात्रि का सातवां दिन: 13 अक्टूबर, दिन बुधवार |
  • नवरात्रि का आठवां दिन: 14 अक्टूबर, दिन गुरुवार |
  • नवरात्रि का दसवां दिन: 15 अक्टूबर, दिन शुक्रवार |

कन्या पूजन: नवरात्रि में व्रत के साथ कन्या पूजन का बहुत महत्व होता है | जो लोग नवरात्रि के 9 दिनों का व्रत रहते हैं या फिर पहले दिन और दुर्गा अष्टमी का व्रत रखते हैं, वे लोग कन्या पूजन करते हैं | कई स्थानों पर कन्या पूजन दुर्गा अष्टमी के दिन होता है और कई स्थानों पर यह महानवमी के दिन होता है | 01 से लेकर 09 वर्ष की कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरुप माना जाता है, इसलिए उनकी पूजा की जाती है |

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