Ruturaj Gaikwad Biography :अपने हुनर से ऋतुराज गायकवाड़ ने बनाई अपनी पहचान

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Ruturaj gaikwad biography in hindi- Who is Ruturaj Gaikwad:-

यह नाम आपके लिए भले ही नया हो, लेकिन क्रिकेट जगत के जानकारों के लिए यह नाम नया नहीं है, पिछले 3 से 4 साल में यह खिलाड़ी सबके सामने उभरा है और अपने बल्ले से सभी को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है | रुतुराज गायकवाड़ दाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज हैं और वह भारतीय क्रिकेट के मास्टर रोहित शर्मा की तरह बल्लेबाजी करते हैं | यह वही खिलाड़ी हैं जिन्होंने 2018-19 में सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में अपनी घरेलू टीम की और से सबसे अधिक रन बनाए थे |

भारत में क्रिकेट एक ऐसा खेल बन चुका है जिसके फैन आपको हर कोने में देखने को मिल जाते हैं | क्रिकेट की दीवानगी का अंदाजा आप इस बात से भी लगा सकते हैं कि जब क्रिकेट शुरू होता है तो लोग अपने कई जरुरी काम भी छोड़ देते हैं और इसे देखने में जुट जाते हैं | रुतुराज गायकवाड़ भारत के एक प्रतिभाशाली क्रिकेटर हैं | रुतुराज गायकवाड़, अपने दिलचस्प और रिस्क-फ्री खेल की वजह से जाने जाते है | आज के मोर्डन क्रिकेट में इसी तरह का खेल सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है, निडरता के साथ खेलने वाले क्रिकेटरों को जल्दी लोकप्रियता मिलना सामान्य सी बात है|

IPL ने भारतीय क्रिकेट टीम को काफी अच्छे-अच्छे खिलाड़ी दिए है, जिसमें कई बड़े नाम शामिल है जैसे, हार्दिक पंड्या, क्रुणाल पंड्या, ऋषभ पंत पर कई खिलाड़ी ऐसे भी है जो अपने घरेलु क्रिकेट से निखरकर आते है, उनमे से एक नाम रुतुराज गायकवाड़ भी है | रुतुराज गायकवाड़ कोई रहस्यमय लड़का या आईपीएल सनसनी या सोशल मीडिया पर पसंद किए जाने वाले खिलाड़ी नहीं हैं, बल्कि रुतुराज गायकवाड़ एक ऐसे खिलाड़ी हैं जो अपनी मेहनत और क्षमता के दम पर चमके हैं |

रुतुराज गायकवाड़ का शुरूआती जीवन:- Ruturaj gaikwad biography in hindi

रुतुराज गायकवाड़ का जन्म 31 जनवरी 1997 को पुणे, महाराष्ट्र, भारत में हुआ था | उनके पिता श्री दशरथ गायकवाड़ हैं और उनकी माता सविता गायकवाड़ हैं | रुतुराज का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ था जो शिक्षा को बहुत महत्व देता है | उनके पिता एक रक्षा अनुसंधान विकास अधिकारी हैं, जबकि उनकी मां एक नगरपालिका स्कूल में पढ़ाती हैं | एक संयुक्त परिवार में पले-बढ़े, ऋतुराज कई चचेरे भाइयों के साथ बड़े हुए, जिनमें से किसी ने भी खेल में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई | इतना सब होने के बावजूद आज उन्हें एक अच्छा खिलाड़ी बनाने में ऋतुराज के परिवार ने अहम भूमिका निभाई है |

रुतुराज ने 5 साल की उम्र में लेदर बॉल क्रिकेट खेलना शुरू किया था | रुतुराज ने 11 साल की उम्र में पुणे वेंगसरकर क्रिकेट अकादमी को जॉइन किया | इसी के चलते वे अपने अच्छे क्रिकेट की बदोलत जल्द ही महाराष्ट्र अंडर-14 और अंडर-16 टीमो में शामिल हो गये | रुतुराज 2003 में पुणे नेहरू स्टेडियम में न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच मैच देखने गए थे, जब ब्रेंडन मैकुलम उस मैच में ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज को स्कूप करते हुए देखा गया था, इस दृश्य ने रुतुराज को क्रिकेट के लिए प्रेरित किया |

रुतुराज का क्रिकेटिंग करियर:-

इन्होने अपने अंडर-19 के दिनों में लोगो का अपनी तरफ खूब ध्यान खीचा | 2014-15 कूच बिहार ट्राफी में रुतुराज दुसरे ऐसे खिलाडी बने जिसने इस टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाएं हो | उन्होंने 6 मैचों में तीन शतक और एक अर्धशतक के साथ 826 रन बनाए थे | उन्होंने अगले टूर्नामेंट में तिहरा शतक भी जड़ा, लगातार हो रहे उनके बेहतरीन प्रदर्शन की बदोलत, उन्हें 2016 के अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप के लिए भारत की अंडर-19 टीम में चुना गया |

वर्ल्डकप में रुतुराज का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा, पर उन्होंने इस असफलता से हार नहीं मानी और एक बार फिर अपने आप को घरेलु क्रिकेट में साबित किया | उन्होंने फिर कूच बिहार ट्राफी में 7 मैचो में 4 शतक और 3 अर्धशतक के साथ टूर्नामेंट में कुल 875 रन बनाएं |

रुतुराज गायकवाड़ का घरेलू क्रिकेट करियर:-

  • रुतुराज ने 2016-17 में महाराष्ट्र की रणजी टीम के लिए 19 साल की उम्र में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण किया था |
  • 8 हफ्ते के आराम के बाद रुतुराज एक बार फिर विजय हजारे ट्रॉफी में नजर आए, जहां उन्होंने सिर्फ एक मैच खेला। अगले सीज़न में, रुतुराज को अपनी टीम का ओपनर घोषित किया गया। इस युवा खिलाड़ी ने हिमाचल प्रदेश की टीम के खिलाफ 110 गेंदों में 132 रन बनाकर लिस्ट-ए क्रिकेट का अपना पहला शतक बनाया। उसके बाद ऋतुराज महाराष्ट्र टीम के नियमित खिलाड़ी बन गए।
  • 2018-19 का घरेलू सत्र रुतुराज के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ क्योंकि रणजी और विजय हजारे ट्रॉफी दोनों में उनके प्रदर्शन ने इस युवा खिलाड़ी के लिए भारत-ए टीम के लिए दरवाजे खोल दिए। रुतुराज ने रणजी ट्रॉफी के 11 मैचों में 456 और विजय हजारे ट्रॉफी में 365 रन बनाए।
  • 2019 में, रुतुराज ने इंग्लैंड लायंस के खिलाफ बोर्ड प्रेसिडेंट्स इलेवन के लिए खेलते हुए शतक बनाया।
  • अपने चयनकर्ताओं को सही ठहराते हुए रुतुराज ने अपने पहले मैच में 136 गेंदों में नाबाद 187* रन और दूसरे मैच में नाबाद 125* रन बनाकर अपना हुनर ​​दिखाया।
  • श्रीलंका के खिलाफ असाधारण प्रदर्शन के बावजूद, रितुराज गायकवाड़ का नाम शुरुआत में वेस्टइंडीज के भारत-ए दौरे के लिए नहीं था, लेकिन भाग्य हमेशा बहादुर का साथ देता है, और कुछ ऐसा ही रुतुराज के साथ हुआ।
  • पृथ्वी शॉ को चोटिल होने के कारण टीम से बाहर होना पड़ा और उनकी जगह रुतुराज ने कैरेबियन का पहला दौरा किया।

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