Rte Proposal 2022-23

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Rte Proposal
RTE 2022

RTE proposal 2020-21 : निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार नियम, 2011 के नियम 12(1)(ब) अन्र्तगत गैर अनुदान मान्यता प्राप्त प्रायवेट स्कूलों में वंचित समूह एवं कमजोर वर्ग के बच्चों को कक्षा 1 या प्री-स्कूल की प्रथम प्रवेषित कक्षा मे न्यूनतम 25 प्रतिशत सीटों पर निःशुल्क प्रवेश का प्रावधान है। इन प्रवेषित बच्चों की फीस प्रतिपूर्ति राज्य शासन द्वारा निर्धारित प्रति बालक व्यय अथवा स्कूल द्वारा ली जाने वाली वास्तविक शुल्क मे से जो भी न्यूनतम हो, का भुगतान जिले से सीधे स्कूल को किया जाता है। 

फीस प्रतिपूर्ति की प्रक्रिया को पूर्ण पारदर्शी करने के उद्वेश्य से आरटीई के तहत प्रायवेट स्कूलों में निःशुल्क अध्ययनरत समस्त बच्चों का आधार तथा बायोमेट्रिक मशीन से आधार सत्यापन प्रारंभ किया जा रहा है। आधार की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिये राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा पूर्व में ही पत्र के माध्यम से सूचित किया जा चुका है।

आरटीई के तहत निःशुल्क हेतु पात्र वंचित समूह एवं कमजोर वर्ग व वंचित समूह:-

वंचित समूह – वंचित समूह में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, विमुक्त जाति, वनभूमि के पट्टाधारी परिवार और 40 प्रतिशत से अधिक निःशक्तता वाले बच्चे शामिल।

कमजोर वर्ग – कमजोर वर्ग में गरीबी रेखा के नीचे के परिवार शामिल।

HIV ग्रस्त बच्चे

वंचित समूह, कमजोर वर्ग तथा HIV ग्रस्त वर्ग का प्रमाण –

  • वंचित समूह में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, विमुक्त जाति के लिए राशन कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, वनभूमि के पट्टाधारी परिवार के लिए संबंधित पट्टा या वन अधिकार अधिनियम के तहत जारी अधिकार पत्र, निःशक्तता वाले बच्चों के लिए 40 प्रतिशत से अधिक निःशक्तता का चिकित्सीय प्रमाण पत्र या उपरोक्त सभी के लिए किसी अन्य शासकीय दस्तावेज में दर्ज जानकारी के आधार पर प्रवेश।
  • कमजोर वर्ग के लिए बी.पी.एल./ अंतयोदय कार्ड मान्य।
  • महिला एवं बाल विकास अधिकारी द्वारा पंजीकृत अनाथ बच्चे
  • HIV ग्रस्त केटेगरी का है तो जिला मेडिकल वोर्ड द्वारा जारी प्रमाण पत्र
  • कोविड-19 से माता-पिता/अभिभावक की मृत्यु के कारण अनाथ बच्चे

Right To Education Act (RTE) :

Right To Education Act :- किसी भी देश की ताकत और भविष्य उस देश के बच्चे होते है। ऐसे में बच्चो के बालपन में उनका अच्छे से शिक्षण मिलना बहुत जरूरी है, ताकि आगे आने वाले समय में देश के लिए अच्छे नागरिक बन सके। पहले के जमाने में शिक्षण का स्तर बिगड़ चुका था। अमीर के बच्चे ही अच्छी पढ़ाई कर पाते थे तो वहीं दूसरी ओर गरीब बच्चो को पढ़ाई नहीं हो पा रही थी। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार ने एक एक्ट जारी किया और इस एक्ट का नाम दिया RTE (Right To Education) Act.

RTE Act, 2009 ( शिक्षा का अधिकार अधिनियम,2009) :- RIGHT OF CHILDREN TO FREE AND COMPULSORY EDUCATION ACT, 2009

Right To Education Act (RTE) भारत की संसद का एक अधिनियम है जिसे 4 अगस्त 2009 को अधिनियमित किया गया था। बाद में 1 अप्रैल 2010 से प्रभावी रूप से लागू किया गया। जिसमे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21A के तहत भारत में 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का महत्व पूर्ण आधिकार देता है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम को लागू करने वाला, और हर एक बच्चे को शिक्षा का अधिकार देने वाला भारत दुनिया के 135 देशों में शामिल हुआ।

शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 सभी जातियों के बालक तथा बालिकाओं को जो 6 से 14 वर्ष के हो उन्हें नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार प्रदान करता है।

शिक्षा का अधिकार कानून :-

वंचित समूह और कमज़ोर वर्ग के बच्चों का प्रायवेट स्कूलों की प्रथम कक्षा में निःशुल्क प्रवेश की व्यवस्था:-

  • निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत बनाये गये नियम दिनांक- 26 मार्च 2011 से लागू। नियम अंतर्गत वंचित समूह एवं कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए प्रायवेट स्कूलों तथा केन्द्रीय विद्यालयों में प्रवेश की प्रक्रिया निर्धारित।
  • शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत गैर अनुदान मान्यता प्राप्त प्रायवेट स्कूलों में कक्षा 1 में अथवा प्री स्कूल की शिक्षा से प्रारंभ होने वाले प्रायवेट स्कूलों की प्रवेशित कक्षा में, न्यूनतम 25 प्रतिशत सीटों पर वंचित समूह एवं कमजोर वर्ग के बच्चों को निःशुल्क प्रवेश देना अनिवार्य। शासन द्वारा नियमानुसार फीस की प्रतिपूर्ति की व्यवस्था।
  • स्कूल की पड़़ोस की बसाहटों में निवासरत् इन वर्गों के परिवार के बच्चें उपरोक्त सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।
  • प्रवेश के बाद संबंधित स्कूल में कक्षा 8 तक निःशुल्क अध्ययन की सुविधा।

शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के महत्वपूर्ण बिंदु –

1- Right To Education Act 2009 के अंतर्गत देश में सरकारी स्कूल में 6-14 वर्ष की आयु के बच्चों को मुफ्त शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी|

2- इसके अलावा प्राइवेट स्कूलों में 6-14 वर्ष की उम्र वाले 25% गरीब बच्चों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान करनी होगी। यदि उपर बताए गए रूल्स को कोई स्कूल फॉलो नहीं करने पर वसूली गयी फीस से 10 गुना अधिक जुर्माना तथा स्कूल की मान्यता भी रद्द की जा सकती है।

3- मान्यता रद्द होने के बाद भी स्कूल संचालित करने पर एक लाख रूपये तथा इसके बाद रोज़ाना दस हजार रुपए जुर्माने का प्रावधान है। Right To Education (RTE) Act ( के तहत देश के बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने की ज़िम्मेदारी केंद्र तथा राज्य के हाथों में होगी। हर स्कूल में लड़कों और लड़कियों के लिए स्वच्छ और अलग शौचालय होना चाहिए। स्कूलों को मुफ्त में पीने का पानी उपलब्ध कराना चाहिए।

4- कई बार ऐसा हो जाता है कि किसी कारण से बच्चे का एडमिशन नहीं हो पाता है लेकिन Right To Education (RTE) Act की मदद से किसी बच्चे का एडमिशन नहीं हुआ है तो वो अपनी उम्र के अनुसार प्रवेश ले सकते है|

5- Right To Education (RTE) Act में विकलांग बच्चों का भी विशेष ध्यान दिया गया है इस एक्ट के तहत जो विकलांग बच्चों के लिए मुफ्त शिक्षा की उम्र को 14 से बढ़ाकर 18 वर्ष की गयी है| इस एक्ट में शिक्षकों का भी उल्लेख किया है। Right To Education (RTE) Act अधिनियम के अनुसार कोई भी सरकारी शिक्षक स्कूल के अलावा अपना खुद का प्राइवेट ट्यूशन नहीं चला सकते है।

शिक्षकों के लिए RTE Act के नियम और कानून – RTE Act Rules and Regulations For Teachers:-

Right To Education Act के अनुसार यह प्रयास किया गया है कि देश के प्रत्येक राज्य, जिला, तालुका और गाव में शिक्षकों की संख्या अच्छी हो। सभी बच्चों को सही से शिक्षा मिल सके उस प्रयास से बच्चो और शिक्षकों की संख्या इस प्रकार रहे की सभी बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल पाए।

पहले के जमाने में देखा गया था कि ज्यादातर शिक्षक सिर्फ शहर में पढ़ना चाहते है, और गाव में ये संख्या बहुत कम होती जा रही थी। तो RTI Act देश में शहर और गाव के दोनों क्षेत्रों में शिक्षकों की समान संख्या में पोस्टिंग करता है। इसके अलावा Right To Education Act उचित रूप से अच्छे और काबिल शैक्षणिक योग्यता वाले शिक्षकों की नियुक्ति करता है।

सत्र 2020-21 एवं 2021 – 22 की फीस प्रतिपूर्ति हेतु अशासकीय स्कूल द्वारा की जाने वाली प्रक्रियाः- 

अशासकीय स्कूल द्वारा सत्र 2020-21 एवं 2021 – 22 की फीस प्रपोजल तैयार करने के प्रक्रिया निम्ननानुसार होगी :

अशासकीय स्कूल सर्व प्रथम सत्र 2020 -21 का प्रपोजल तैयार कर लॉक करे इसके पश्चात सत्र 2021 – 22 का प्रपोजल तैयार करने की कार्यवाही करना होगा |

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सर्वप्रथम सत्र 2020 -21 चुने और निम्नांकित कार्यवाही करना होगा :

  1. बैंक विवरण दर्ज करे :

स्कूल द्वारा खाता धारक का नाम, IFSC कोड एवं खाता क्रमांक दर्ज करना है , स्कूल द्वारा बैंक पासबुक को देखकर ही जानकारी दर्ज करना है अन्यथा गलत खाते में राशि जाने की सम्भावना अथवा पेमेंट फेल हो जायेगा |

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  • ऑनलाइन कक्षाओं के सम्बन्ध में जानकारी दर्ज करे :
    • यदि स्कूल द्वारा क्या ऑनलाइन कक्षाये संचालित की गयी हैं :- ऑप्शन हाँ चुना जाता है तो शपथ पत्र अपलोड ऑप्शन में – ऑनलाइन कक्षा संचालित किये जाने सम्बन्धी स्कूल द्वारा (100 रुपये के स्टाम्प पेपर पर ) संलग्न प्रारूप में शपथ पत्र अपलोड किया जाना अनिवार्य है |
    • ऑनलाइन कक्षा संचालित नहीं सेलेक्ट करने की स्तिथि में अथवा शपथ पत्र अपलोड नहीं करने की स्थिति में स्कूल को फीस प्रतिपूर्ति की पात्रता नहीं होगी |
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3. स्कूल फीस प्रबंधन :

स्कूल द्वारा अन्य बच्चो से ली जाने वाली वार्षिक फीस का विवरण स्कूल द्वारा दर्ज किया जाये | स्कूल का फीस स्ट्रक्चर अपलोड करे ऑप्शन में स्कूल का कक्षावार फीस स्ट्रक्चर अपलोड किया जाना अनिवार्य है | सत्र का फीस स्ट्रक्चर तथा अन्य बच्चो से ली जाने वाली प्रत्येक कक्षा की फीस की एक एक रसीद की एक पीडीऍफ़ फाइल बनाकर पोर्टल पर अपलोड किया जाना अनिवार्य है , स्कूल द्वारा यदि गलत फीस दर्ज की जाती है तो स्कूल के विरुद्ध वैधानिक कार्यवाही होगी | स्कूल कृपया ध्यान रखे की फीस चुने हुए सत्र की दर्ज की जाना है मासिक फीस दर्ज नहीं किया जाना है |

4. स्कूल सीट प्रबधन :

शाला द्वारा सत्र 2020 -21 में कक्षावार कुल सीटें एवं आरटीई के तहत अध्ययनरत बच्चों की संख्या दर्ज की जाये। स्कूल द्वारा कुल सीट एवं आरटीई के तहत अध्ययनरत बच्चों की संख्या को दर्ज किया जाना है। सत्र 2021 -22 में प्रवेश हेतु जिन स्कूलों द्वारा इन सीटो को भरा गया है वह कक्षा इसमें प्रर्दषित नही होगी।

5. छात्र पंजीयन :

इसमें शाला में आरटीई के तहत निःशुल्क अध्ययनरत बच्चो की जानकारी दर्ज की जाये| सत्र चुनने के बाद इस ऑप्शन में दो ऑप्शन चुनने हेतु प्रदर्शित होंगे |

नवीन प्रवेश : इसमें सत्र में ऑनलाइन लाटरी के माध्यम से चयनित तथा स्कूल द्वारा मोबाइल ऍप के माध्यम से एडमिशन रिपोर्टिंग किये गए बच्चो की सूची प्रदर्शित होगी | सूची में प्रदर्शित हो रहे बच्चो के नाम के सम्मुख ऑप्शन चुनने पर बच्चे का स्कॉलर नंबर एवं क्रमांक दर्ज किया जाये | सत्र 2020 -21 के लिए ऑनलाइन लाटरी के माध्यम से प्रवेश लिए गए बच्चो का वास्तविक प्रवेश सत्र 2021 -22 में तथा नोशनल एडमिशन सत्र 2020 -21 के लिए हुआ था | इन बच्चो की जानकारी स्कूल द्वारा दर्ज की जाएगी परन्तु वास्तविक रूप से यह सत्र 2020 -21 में अध्ययन नहीं किया है | अतः सत्र 2020 -21 के लिए सत्र 2021 -22 में ऑनलाइन लाटरी के माध्यम से प्रवेश लिए बच्चो की फीस प्रतिपूर्ति नहीं होगी | केवल सत्र 2021 -22 हेतु ऑनलाइन लाटरी के माध्यम से नवीन प्रवेश लिए गए बच्चो की फीस प्रतिपूर्ति की पात्रता होगी |

पूर्व से अध्ययन रत बच्चे : स्कूल में पूर्व सत्र 2019 -20 के बच्चे समग्र आई दी दर्ज कर प्रदर्शित होंगे | यदि बच्चे के नाम या अन्य कोई जानकारी में विसंगति है तो समग्र की जानकारी स्थानीय निकाय में जाकर पालक द्वारा संसोधन करा लिया जाये | यदि पिता / माता का नाम समग्र आईडी के साथ दर्ज नहीं है तो बच्चे का माता /पिता का नाम समग्र में अपडेट करना अनिवार्य होगा | समग्र आईडी दर्ज करने के उपरांत प्रदर्शित हो रहर बच्चे के नाम एवं अन्य विवरण का मिलान होने के उपरांत बच्चे का स्कॉलर नंबर दर्ज करे |

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6 . बच्चे को अगली कक्षा में प्रदोन्नत करना अथवा शाला छोड़ने की स्थिति का कारण दर्ज करना :

बच्चो को अगली कक्षा में प्रदोन्नत करते हुए प्रदोन्नत किये बच्चो का वार्षिक परीक्षा परिणाम (उत्तीर्णता का प्रतिशत अथवा ग्रेड) दर्ज करे | यदि बच्चे द्वारा किसी कारण से स्कूल छोड़ दिया गया है तो शाला छोड़ने का कारण दर्ज किया जाकर लॉक किया जाये |

7. छात्र का फोटो अपलोड करे :-

बच्चे का नवीनतम फोटो JPEG फॉर्मेट में अपलोड कर लॉक किया जायेगा |

8. छात्र का आधार सत्यापन :-

चूँकि कोविड -19 के कारण स्कूलों का भौतिक सञ्चालन बंद रहा है एवं कोविड के कारन कई परिवार अन्यत्र भी चले गए हैं इसलिए फीस प्रतिपूर्ति केवल वास्तविक बच्चो की हो इसलिए सत्र में स्कूल में अध्ययनरत समस्त बच्चो का आधार सत्यापन केवल बायोमैट्रिक मशीन से किया जाना अनिवार्य किया गया है एवं इस प्रक्रिया से आधार सत्यापित होने वाले बच्चे ही फीस प्रतिपूर्ति हेतु पात्र होंगे |

बायोमैट्रिक मशीन के माध्यम से यदि किसी बच्चे का आधार सटेपन नहीं हो रहा है तो बच्चे का आधार अपडेट आधार सेंटर में जाकर करना होगा | 05 वर्ष की आयु के पूर्व यदि किसी बच्चे का आधार बना है एवं यदि उसकी आयु 05 वर्ष पूर्ण हो गयी है तो बच्चे का आधार अपडेशन करना अनिवार्य होता है | आधार नामांकन पर्ची में बच्चे की फिंगर प्रदर्शित होती है उसमे जिस फिंगर में सही का निशान लगा है उस फिंगर का रखकर आधार सत्यापन किया जायेगा तो आसानी से होगा |

9. छात्र की उपस्थिति दर्ज करना :-

आधार सत्यापन के उपरांत कक्षा लगने के कुल दिवस तथा बच्चे की वार्षिक उपस्थिति दर्ज की जाएगी | स्कूल द्वारा केवल उन्ही बच्चो की उपस्थिति दर्ज की जाये कि यदि भविष्य में किसी पालक द्वारा ऑनलाइन कक्षा नहीं लगने के सम्बब्ध में अवगत कराया जाना पाया जाता है तो सम्बंधित स्कूल के विरुद्ध वैधानिक कार्यवाही की जाये | सत्र 2020 -21 की फीस प्रतिपूर्ति प्रपोजल बनाते समय नवीन प्रवेशित (नोशनल एडमिशन ) बच्चो की उपस्थिति 0 (जीरो) अंकित की जाये |

10. फीस प्रतिपूर्ति प्रस्ताव बनाये :-

बच्चो के आधार सत्यापन तथा सत्र में 75 प्रतिशत से अधिक उपस्थिति होने पर बच्चे का नाम फीस प्रतिपूर्ति तैयार करने हेतु प्रदर्शित होगा | स्कूल के प्रधानाध्यापक द्वारा OTP दर्ज कर फीस प्रतिपूर्ति प्रपोजल लॉक किया जायेगा | ध्यान रखा जाये की स्कूल द्वारा सर्वप्रथम 2020 -21 का प्रपोजल तैयार किया जाये | सत्र 2020 – 21 समस्त बच्चो का प्रपोजल लॉक करने के उपरांत ही सत्र 2021 – 22 का प्रपोजल तैयार किया जाये |

11. सत्र 2020 -21 की फीस पप्रतिपूर्ति हेतु स्कूल द्वारा अधिकतम 02 ही प्रपोजल तैयार सकेंगे | इसी प्रकार सत्र 2021 -22 हेतु अधिकतम 02 बार ही प्रपोजल तैयार किया जा सकेगा | अतः अशासकीय स्कूल ध्यान रखे की समस्त पात्र बच्चो का प्रपोजल अधिकतम 02 प्रपोजल में सम्मलित हो जाये अन्यथा स्कूल द्वारा फीस प्रतिपूर्ति हेतु सेष रह गए बच्चो का प्रपोजल तैयार नहीं हो सकेगा |

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