जय प्रकाश नारायण जयंती: सत्‍ता की कुर्सी से दूर रहकर भी बने लोकनायक

0
902
जय प्रकाश नारायण जयंती
जय प्रकाश नारायण जयंती

जय प्रकाश नारायण जयंती:

एक नाम जो किसी के आगे नहीं झुका, वह है लोकनायक जयप्रकाश नारायण | आजादी के पहले और बाद उर्फ़ जेपी आजीवन भारत को बेहतर राष्ट्र बनाने के लिए लड़ते रहे | अन्याय के खिलाफ आजाद भारत के सबसे बड़े जनांदोलन के प्रतीक पुरुष रहे जेपी ने सत्ता की कुर्सी से दूर रहकर भी जो अलख जगाई, वह आज भी इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है |

अपने जीवन में संतों जैसा प्रभामंडल केवल दो नेताओं ने प्राप्त किया | एक महात्मा गांधी थे तो दूसरे जयप्रकाश नारायण | इसलिए जब सक्रिय राजनीति से दूर रहने के बाद वे 1974 में ‘सिंहासन खाली करो जनता आती है’ के नारे के साथ वे मैदान में उतरे तो सारा देश उनके पीछे चल पड़ा, जैसे किसी संत महात्मा के पीछे चल रहा हो |

11 अक्टूबर, 1902 को जन्मे जयप्रकाश नारायण भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता थे | वे समाज-सेवक थे, जिन्हें ‘लोकनायक’ के नाम से भी जाना जाता है | 1999 में उन्हें मरणोपरांत ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया | इसके अतिरिक्त उन्हें समाजसेवा के लिए 1965 में मैगससे पुरस्कार प्रदान किया गया था | पटना के हवाई अड्डे का नाम उनके नाम पर रखा गया है | दिल्ली सरकार का सबसे बड़ा अस्पताल ‘लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल’ भी उनके नाम पर है |

जय प्रकाश नारायण का जीवन परिचय:-

जयप्रकाश की 119वीं जयंती सोमवार, 11 अक्‍टूबर को मनाई जाएगी | 11 अक्टूबर 1902 को सिताबदियारा में विजयादशमी के दिन लोकनायक जयप्रकाश नारायण का जन्म हुआ था | माता फुलरानी व पिता हरसुदयाल के सुपुत्र की प्रारंभिक शिक्षा गांव से ही शुरू हुई | उच्च शिक्षा के लिए वे पटना चले गए और बापू के असहयोग आंदोलन से प्रभावित होकर पटना कॉलेज की पढ़ाई छोड़ दी और विद्यापीठ में दाखिला ले लिए | 1920 में प्रभावती के साथ उनकी शादी हुई | जेपी आठ अक्टूबर 1979 को 4:30 बजे इहलोक से ही विदा हो गए |

जय प्रकाश नारायण जयंती

आजादी की लड़ाई में सफर:-

जेपी ने पढ़ाई के दौरान ही अंग्रेजों के खिलाफ जंग भी छेड़ दी थी। अंग्रेज सरकार की ओर से वित्तपोषित होने की वजह से जेपी ने कॉलेज को बीच में ही छोड़ दिया और बिहार कांग्रेस की ओर से चलाए गए बिहार विद्यापीठ को जॉइन किया था | 

1922 में वे कैलिफोर्निया गए और जनवरी 2023 में ब्रार्कले में दाखिला लिया | समाजशास्त्र की पढ़ाई करते हुए उन्होंने अपना खर्च वहन करने के लिए गैराज में काम किया | पढ़ाई के दौरान ही वह रूसी क्रांति और मार्क्सवाद से प्रभावित हुए | 1929 में वह एक मार्क्सवादी के रूप में अमेरिका से भारत वापस लौटे और उसी साल कांग्रेस में शामिल हो गए |

आजादी की लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभा रहे जेपी को 1932 में गिरफ्तार कर लिया गया | जेल में उन्हें काफी यातनाएं दी गईं | जेल से बाहर आने के बाद वह भारत छोड़ो आंदोलन में शामिल हुए | इसी दौरान कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी का गठन हुआ और जेपी इसके महासचिव बनाए गए |

1954 में उन्होंने बिहार में बिनोवा भावे के सर्वोदल आंदोलन के लिए काम करने की घोषणा की थी | 1957 में उन्होंने राजनीति छोड़ने का भी फैसला कर लिया था | हालांकि, 1960 के दशक के अंत में एक बार फिर वे राजनीति में सक्रिय हो गए थे | उन्होंने किसानों के आंदोलनों की भी अगुआई की | 

इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा चुनाव में अयोग्य ठहराए जाने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 को देश में आपातकाल की घोषणा कर दी थी | विपक्ष के सभी बड़े नेताओं को जेल में ठूस दिया गया और अभिव्यक्ति की आजादी पर भी पहरा लगा दिया गया | जयप्रकाश नारायण ने उस समय देश को एकजुट किया और उनके जनआंदोलन का ही परिणाम था कि करीब 21 महीने बाद 21 मार्च 1977 को आपताकाल खत्म हो गया |

जयप्रकाश नारायण प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की प्रशासनिक नीतियों के खिलाफ थीं | 1974 में पटना में छात्रों ने आंदोलन छेड़ा था | आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से अंजाम देने की शर्त पर उन्होंने इसकी अगुआई की। इसी दौरान देश में सरकार विरोधी माहौल बना तो इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा कर दी थी | जेपी भी जेल गए और करीब सात महीनों तक सलाखों के पीछे रहे | उनकी तबीयत भी उन दिनों खराब थी, लेकिन जो संप्रूण क्रांति का नारा दिया, उसने देश में लोकतंत्र की बहाली दोबारा सुनिश्चित कर दी |

जेपी आंदोलन में छात्र नेता में शामिल हुए कई नेता जैसे लालू प्रसाद यादव, मुलायम सिंह यादव, नीतीश कुमार, राम विलास पासवान, केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद सुशील मोदी जैसे दर्जनों नेता बाद में वर्षों तक सत्ता में रहे | आपातकाल की लड़ाई में मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हिस्सा लिया था |

आपातकाल के बाद देश में चुनाव हुए तो कांग्रेस पार्टी की करारी हार हुई और केंद्र में पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार का गठन हुआ | खुद इंदिरा गांधी और उनके बेटे संजय गांधी चुनाव हार गए थे | 8 अक्टूबर 1979 को दिल की बीमारी और डायबिटीज के कारण पटना में जेपी का निधन हो गया | 1999 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया था |

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here