Budget 2022: क्या होता है बजट, और देश के लिए क्यों जरुरी होता है, आईये जानते हैं इससे जुडी रोचक जानकारी

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क्या होता है बजट
बजट क्या होता है

क्या होता है बजट- सभी दोस्तों का हमारे इस आर्टिकल में स्वागत है, हमारे देश में बहुत से ऐसे लोग हैं जो सिर्फ बजट का नाम सुनते हैं जो कि हर साल पेश किया जाता है | पर ये नहीं जानते है कि आखिर क्या होता है बजट, और क्यों बनाया जाता है बजट हर साल, और इस बजट को हर साल क्यों पेश किया जाता है | मै आज आप सभी लोगो के लिए बजट से जुडी हुई रोचक जानकारी लेकर आया हूं, जिसमे हम सभी लोग जानेगे की बजट होता क्या है, और क्यों बनाया और पेश किया जाता है और क्यों बजट देश के लिए बहुत जरुरी होता है|

अभी दो दिन पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज बजट पेश कर रही थी, जिस पर पर पूरे देश की नजरें टिकी हुए थी, जिसको लगभग सभी लोगो ने सुना और पेपर और इंटरनेट के माध्यम से पढ़ा भी होगा| जिसको सुनकर या पढ़कर बहुत से लोग खुश हुए होंगे और कुछ लोग निराश| बजट हमारे देश के लिए बहुत ही जरुरी होता है क्योंकि क्योंकि इससे न केवल सरकार देश की आर्थिक स्थिति का लेखा-जोखा पेश करती है, बल्कि इसी से देश के आर्थिक भविष्य की रूपरेखा भी तय की जाती है। इस साल का बजट ऐसे समय में आया है जबकि देश कोरोना की तीसरी लहर से जूझ रहा है, ऐसे में ये आम के लिए और भी महत्वपूर्ण है।

तो फिर आइये जानते हैं कि क्या होता है बजट और देश के लिए क्यों जरुरी होता है, बजट से जुडी कुछ रोचक जानकारी|

क्या होता है बजट?

  • भारतीय संविधान के आर्टिकल 112 के अनुसार, केंद्रीय बजट देश का सालाना फाइनेंशियल लेखा-जोखा होता है।
  • केंद्रीय बजट किसी खास वर्ष के लिए सरकार की कमाई और खर्च का अनुमानित विवरण होता है। सरकार बजट के जरिए विशेष वित्तीय वर्ष के लिए अपनी अनुमानित कमाई और खर्च का विवरण पेश करती है।
  • यूं कहें कि किसी वर्ष के लिए केंद्र सरकार के वित्तीय ब्योरे को केंद्रीय बजट कहते हैं। सरकार को हर वित्त वर्ष की शुरुआत में बजट पेश करना होता है।
  • भारत में वित्त वर्ष का पीरियड 1 अप्रैल से 31 मार्च तक होता है। देश का केंद्रीय बजट इसी अवधि के लिए पेश किया जाता है।
  • दरअसल, बजट के जरिए सरकार यह तय करने का प्रयास करती है कि आगामी वित्त वर्ष में वह अपनी कमाई की तुलना में किस हद तक खर्च कर सकती है।

बजट में हुए अब के सबसे बड़े बदलाव :

  1. 1955 तक बजट केवल अंग्रेजी में छपता था|
  2. 1956 से हिंदी में भी छपने लगा बजट |
  3. 2016 तक फरवरी के आखरी दिन पेश होता था बजट|
  4. 2017 में बजट पेश करने का दिन 1 फरवरी किया गया |
  5. 2016 तक रेल बजट अलग से पेश किया जाता था |
  6. 2017 में रेल बजट को आम बजट में मिला दिया गया |
  7. 1999 से पहले तक आम बजट शाम 5 बजे तक पेश होता था |
  8. 1999 से आम बजट सुबह 11 बजे पेश होने लगा |

बजट के लिए राजकोषीय घाटे का भी लक्ष्य तय करना होता है :

किसी साल के बजट के लिए GDP के अलावा राजकोषीय घाटे का लक्ष्य तय करना भी जरूरी होता है। राजकोषीय घाटा GDP के अनुपात में तय किया जाता है। राजकोषीय घाटे के तय लेवल के अनुसार ही सरकार उस साल कर्ज लेती है। अगर GDP ज्यादा होगी तो सरकार खर्च के लिए मार्केट से ज्यादा लोन ले पाएगी।

बजट की प्रमुख बाते :

सीधे – सादे शब्दों में कहे तो आम बजट सरकार की कमाई और खर्च का ब्योरा होता है। सरकार के प्रमुख खर्चों में नागरिकों की कल्याण योजनाओं पर खर्च, आयात पर खर्च, डिफेंस पर खर्च और वेतन और कर्ज पर दिया जाने वाला ब्याज हैं। वहीं सरकार को होने वाली कमाई के हिस्से में टैक्स, सार्वजनिक कंपनियों की कमाई और बॉन्ड जारी करने से होने वाली कमाई शामिल हैं।

केंद्रीय बजट को दो हिस्सों में बांटा जा सकता है, रेवेन्यू बजट और कैपिटल बजट:

रेवेन्यू बजट: ये बजट सरकार की कमाई और खर्च का लेखा-जोखा होता है। इसमें सरकार को मिलने वाला रेवेन्यू प्राप्ति या कमाई और रेवेन्यू खर्च शामिल होते हैं।सरकार को मिलने वाला रेवेन्यू प्राप्ति, या कमाई दो तरह की होती है- टैक्स और नॉन-टैक्स रेवेन्यू से होने वाली कमाई।

रेवेन्यू खर्च : सरकार के रोज के कामकाज और नागरिकों को दी जाने वाली सर्विसेज पर होने वाला खर्च है।यदि सरकार का रेवेन्यू खर्च उसकी रेवेन्यू प्राप्ति से ज्यादा होता है, तो सरकार को राजस्व घाटा या रेवेन्यू डेफिसिट होता है।

कैपिटल बजट या पूंजी बजट: इसमें में सरकार की कैपिटल रिसीट या पूंजीगत प्राप्तियां और उसकी ओर से किए गए भुगतान शामिल होते हैं।सरकार की कैपिटल रिसीट या प्राप्तियों में जनता से लिया गया लोन (बॉन्ड के रूप में), विदेशी सरकारों और भारतीय रिजर्व बैंक से लिए गए लोन का विवरण होता है।वहीं कैपिटल एक्सपेंडिचर या पूंजीगत खर्च में सरकार का मशीनरी, उपकरण, घर, स्वास्थ्य सुविधाओं, शिक्षा पर होने वाला खर्च शामिल होता है।

राजकोषीय घाटा :

सरकार को राजकोषीय घाटा तब होता है जब सरकार का कुल खर्च उसकी कुल कमाई से ज्यादा हो जाता है।

किस वित्त मंत्री में सबसे जयादा बार पेश किया बजट :

वित्त मंत्री कितने बार पेश किया बजट
मोरार जी देसाई 10 बार
पी. चिदंबरम 9 बार
प्रणव मुखर्जी 9 बार
यशवंत राव चाहाण 7 बार
सीडी देशमुख 7 बार
यशवंत सिन्हा 7 बार
मनमोहन सिंह 6 बार
टीटी कृष्णमाचारी 6 बार

इतने दिन पहले शुरू हो जाती है बजट की तैयारी:

बजट बनाने की तैयारी करीब 6 महीने पहले, यानी आमतौर पर सिंतबर में ही शुरू हो जाती है।

  • सितंबर में मंत्रालयों, विभागों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सर्कुलर जारी कर आने वाले वित्तीय वर्ष के लिए उनके खर्चों का अनुमान लगाते हुए उसके लिए जरूरी फंड का डेटा देने को कहा जाता है।
  • इन आंकड़ों के आधार पर ही बाद में बजट में जनकल्याण योजनाओं के लिए अलग-अलग मंत्रालयों को फंड एलोकेट होते हैं।
  • बजट बनाने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद वित्त मंत्री, वित्त सचिव, राजस्व सचिव और व्यय सचिव की हर दिन बैठक होती है।
  • अक्टूबर-नवंबर तक वित्त मंत्रालय दूसरे मंत्रालयों-विभागों के अधिकारियों के साथ मीटिंग करके ये तय करते हैं कि किस मंत्रालय या विभाग को कितना फंड दिया जाए।
  • बजट बनाने वाली टीम को पूरी प्रक्रिया के दौरान प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री और योजना आयोग के उपाध्यक्ष के इनपुट लगातार मिलते रहे हैं। बजट टीम में अलग-अलग क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल होते हैं।
  • बजट बनाने और इसे पेश करने से पहले कई इंडस्ट्री ऑर्गनाइजेशन और इंडस्ट्री के जानकारों से भी वित्त मंत्री चर्चा करती हैं।
  • बजट से जुड़ी सारी चीजें फाइनल होने के बाद एक ब्लूप्रिंट तैयार किया जाता है। बजट को लेकर सब कुछ तय होने के बाद बजट दस्तावेज प्रिंट होता है।
  • 2020 से ही देश में पेपरलेस बजट पेश किया जा रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 2020 और 2021 में पेपरलेस बजट पेश कर चुकी हैं।

ब्रीफकेस से पेपरलेस बजट तक की कहानी :

  1. 2018 तक वित्त मंत्री बजट दस्तावेज को ब्रीफकेस में लाते थे|
  2. 2019 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फाइल में बजट दस्तावेज लेकर आई थी | इस फाइल पर राष्ट्रीय प्रतीक बना था, इसे बही खाता कहा गया|
  3. 2020 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक टेबलेट से अपना बजट भाषण पढ़ा था|

राष्ट्रपति के अभिभाषण से शुरू होता है बजट सत्र:

देश का बजट सत्र राष्ट्रपति के अभिभाषण से शुरू होता है। दरअसल, किसी भी सत्र की शुरुआत या नई सरकार के गठन के बाद संसद का पहला सत्र राष्ट्रपति के संबोधन से शुरू होता है। बजट 2022 सत्र की शुरुआत भी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण से हुई। संसद में बजट पेश करने से पहले राष्ट्रपति की मंजूरी लेनी जरूरी होती है। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद इसे कैबिनेट के सामने रखा जाता है और उसके बाद संसद के दोनों सदनों में इसे पेश किया जाता है।

1 अप्रैल से लागू होता है बजट:

बजट पेश होने के बाद इसे संसद के दोनों सदनों, यानी लोकसभा और राज्यसभा, से पास कराना जरूरी होता है। दोनों सदनों से पास होने के बाद बजट आगामी वित्त वर्ष के पहले दिन, यानी 1 अप्रैल, से लागू हो जाता है। देश में मौजूदा वित्त वर्ष की अवधि 1 अप्रैल से 31 मार्च तक होती है।

पहली बार किस महिला वित्त मंत्री ने बजट पेश किया:

1970 में इंदिरा गाँधी ने पहली महिला वित्तमंत्री के तौर पर बजट पेश किया था क्योंकि उस समय प्रधानमंत्री के अलावा वित्त मंत्रालय का भी प्रभार था |

सबसे लम्बा और सबसे छोटा छोटा बजट भाषण :

  • 2020 में वित्तमंत्री सीतारमण का बजट भाषण 2 घंटे 40 मिनट का था |
  • 1977 में एच एम पटेल ने 800 शब्दों का अंतरिम बजट पेश किया था |

बजट को लेकर बरती जाती है पूरी गोपनीयता:

बजट दस्तावेज को वित्त मंत्रालय के चुनिंदा अफसर तैयार करते हैं। बजट दस्तावेज लीक न होने पाए इसके लिए इसमें यूज होने वाले सभी कंम्प्यूटरों को दूसरे नेटवर्क से डीलिंक कर दिया जाता है। बजट पर काम करने वाले अफसरों और कर्मचारियों को दो से तीन हफ्ते तक नॉर्थ ब्लॉक के दफ्तरों में ही रहना होता है। इस दौरान उन्हें बाहर जाने की इजाजत नहीं होती है।

बजट से जुडी कुछ रोचक जानकारी :

  1. स्वतंत्र भारत का पहला बजट षणमुखम चेट्टी ने 26 नवंबर 1947 को पेश किया था |
  2. षणमुखम चेट्टी के बाद वित्त मंत्री जॉन मथाई ने पहला संयुक्त भारत बजट पेश किया था| इसमें सिर्फ इकोनॉमी का रिव्यु किया गया था और कोई टैक्स नहीं लगाया गया था|
  3. इसमें रजवाड़ो के तहत आने वाले विभिन्न राज्यों का वित्तीय व्यौरा भी पेश किया गया था |
  4. 1947 से लेकर अब तक देश में 73 आम बजट पेश हो चुके हैं |

इस बार हलवा की जगह मिठाई बांटी गई :

नॉर्थ ब्लॉक में बजट छपाई की शुरुआत हर साल हलवा सेरेमनी के साथ होती है। वित्त मंत्रालय में एक बड़ी कढ़ाही में हलवा बनाया जाता है। वित्त मंत्री और वित्त मंत्रालय के सभी अफसर इस कार्यक्रम में शामिल होते हैं। वहां मौजूद लोगों में हलवा बांटा जाता है। हालांकि, इस बार कोरोना महामारी की वजह से हलवा सेरेमनी नहीं हुई। बजट टीम में शामिल लोगों की मिठाई दी गई।

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