28 जनवरी 2021: लाला लाजपत राय की 156वीं जयंती

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लाला लाजपत राय की 156वीं जयंती:-

इतिहास में आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है | आज ही के दिन महान स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय (Lala Lajpat Rai) का जन्म हुआ था | आज लाला लाजपत राय की 155वीं जयंती है | लाला लाजपत राय का जन्म 28 जनवरी 1865 को पंजाब के मोंगा जिले में हुआ था | लाला लाजपत राय को पंजाब केसरी यानी पंजाब का शेर कहा जाता था |

देश के स्वतंत्रता आंदोलन में लाला लाजपतराय का महत्वपूर्ण योगदान रहा | वो अपनी रचनाओं से भी लोगों को देशप्रेम और स्वतंत्रता के लिए प्रेरित करते रहते थे | भारत को स्वाधीनता दिलाने में उनका त्याग, बलिदान तथा देशभक्ति अद्वितीय और अनुपम थी | उनका साहित्य-लेखन एक महत्वपूर्ण आयाम है | वे ऊर्दू तथा अंग्रेजी के समर्थ रचनाकार थे |

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किशोरावस्था में स्वामी दयानंद सरस्वती से मिलने के बाद आर्य समाजी विचारों ने उन्हें प्रेरित किया साथ ही वे आजादी के संग्राम में तिलक के राष्ट्रीय चिंतन से भी बेहद प्रभावित रहे | आगे चलकर लाला लाजपत राय ने स्वतंत्रता आंदोलन में कई बड़े आंदोलनों का नेतृत्व किया |

3 फरवरी 1928 को जब साइमन कमीशन भारत आया था तो उसके विरोध में पूरे देश में आग भड़की थी | लाला लाजपतराय ने इसके विरोध में लाहौर में आयोजित बड़े आंदोलन का नेतृत्व किया और अंग्रेजी की हुकूमत को हिला दिला | इस आंदोलन में अंग्रेजों ने जनता पर लाठियां बरसाई | लाठियों के वार के कारण लाला लाजपतराय 17 नवंबर 1928 को शहीद हो गए थे |

लाला लाजपत राय की प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा:-

लाला लाजपत राय ने 1880 में कलकत्ता तथा पंजाब विश्वविद्यालय से एंट्रेंस की परीक्षा एक वर्ष में पास की और आगे पढ़ने के लिए लाहौर आए | 1982 में एफए की परीक्षा पास की और इसी दौरान वे आर्यसमाज के सम्पर्क में आए और उसके सदस्य बन गये |

लाला लाजपत राय का राजनीतिक सफर:-

1885 में स्थापना के वक्त से ही कांग्रेस में प्रमुख स्थान रखने वाले लाजपत राय 1888 में पहली बार कांग्रेस के इलाहाबाद अधिवेशन में सम्मिलित हुए, जिसकी अध्यक्षता मिस्टर जॉर्ज यूल ने की थी | 1894 में अंग्रेजों से लड़ने के लिए आर्थिक मजबूती के मकसद से पंजाब नेशनल बैंक और लक्ष्मी बीमा कंपनी की शुरुआत की तो 1905 में जब अंग्रेजों ने बंगाल का विभाजन कर दिया, तब लालाजी ने सुरेंद्रनाथ बनर्जी, लोकमान्य तिलक और विपिन चंद्र पाल जैसे आंदोलनकारियों से हाथ मिला कांग्रेस में उग्र विचारों की जगह बनाई |

लाला लाजपत राय का इंग्लैंड का दौरा :-

लाला जी के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन पंजाब में पूरी तरह से सफल रहा, जिस कारण लाला लाजपत राय को पंजाब का शेरपंजाब केसरी के नाम से पुकारा जाने लगा | प्रथम विश्वयुद्ध (1914-18) के दौरान लाला लाजपत राय एक प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के रूप में इंग्लैंड गए और देश की आजादी के लिए प्रबल जनमत जागृत किया |

वहां से वे जापान होते हुए अमेरिका चले गए और स्वाधीनता-प्रेमी अमेरिकावासियों के समक्ष भारत की स्वाधीनता का पथ प्रबलता से प्रस्तुत किया | लाला लाजपत राय युवाओं के प्रेरणास्रोत थे | उनसे प्रेरित हो भगत सिंह, उधम सिंह, राजगुरु, सुखदेव आदि देशभक्तों ने अंग्रेजों से लोहा लिया था |

अंग्रेजो वापस जाओ का नारा दिया :-

साइमन कमीशन का विरोध करते हुए लालाजी ने ‘अंग्रेजो वापस जाओ’ का नारा दिया और कमीशन का डटकर विरोध जताया | 3 फरवरी 1928 को जब साइमन कमीशन भारत आया तो उसके विरोध में पूरे देश में आग भड़की थी | 30 अक्टूबर 1928 को लाहौर में साइमन कमीशन के खिलाफ आयोजित प्रदर्शन में लाठीचार्ज के चलते लाला जी बुरी तरह से घायल हो गए |

18 दिन जख्मों से लड़ते हुए आखिर 17 नवंबर 1928 को जीवन की डोर टूट गई | लाठीचार्ज के ठीक एक महीने बाद 17 दिसंबर को ब्रिटिश पुलिस के अफसर सांडर्स को गोली से उड़ा दिया गया, जिसके लिए राजगुरु, सुखदेव और भगतसिंह को फांसी की सजा सुनाई गई |

गरम दल के तीन प्रमुख नेताओं लाल-बाल-पाल में से एक :-

लाला लाजपत राय ने पंजाब में पंजाब नेशनल बैंक और लक्ष्मी बीमा कंपनी की स्थापना भी की थी | वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में गरम दल के तीन प्रमुख नेताओं लाल-बाल-पाल में से एक थे | इन्होंने एक मुख्तार के रूप में भी काम किया, वहीं 1892 तक रोहतक और हिसार में एक सफल वकील के रूप में रहे | इसके बाद लाहौर चले गए और आर्य समाज के अतिरिक्त्त राजनैतिक आंदोलन के साथ जुड़ गए |

आर्य समाज को पंजाब में लोकप्रिय बनाया:-

लाला लाजपत राय ने स्वामी दयानन्द सरस्वती के साथ मिलकर आर्य समाज को पंजाब में लोकप्रिय बनाया | लाला हंसराज के साथ दयानन्द एंग्लो वैदिक विद्यालयों का प्रसार किया, लोग जिन्हें आजकल डीएवी स्कूल्स व कालेज के नाम से जाना जाता है | लालाजी ने अनेक स्थानों पर अकाल में शिविर लगाकर लोगों की सेवा भी की थी |

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