12 पूर्व मुख्यमंत्री जो मोदी लहर के आगे टिक न सके

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12 Former Chief Minister

12 Former Chief Minister लोकसभा चुनाव 2019:-

23 मई 2019 को आए नतीजों में साफ़ हो गया की देश का मिजाज क्या है | देश की जनता ने मोदी सरकार को प्रचंड बहुमत से जिता कर साफ़ कर दिया है की अब देश जाति, धर्म के नाम पर नहीं बल्कि विकास के मुद्दों पर सरकार का चयन करना चाहती है | NDA की इस जीत का पूरा श्रेय पार्टी के कार्यकर्ताओं को और नेताओं को जाता है जिन्होंने देश में फिर एक बार मोदी लहर लाने में सफलता हासिल की |

मोदी लहर जो वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में आई थी और कांग्रेस सरकार को उड़ा ले गई थी | एक बार वर्ष 2019 में फिर देश में लोकसभा चुनाव आयोजित हुए | वर्ष बदला चुनावी मुद्दे बदले लेकिन result नहीं बदला | एक बार फिर मोदी लहर आई और फिर एक बार कांग्रेस सरकार को उड़ा ले गई | बस फर्क इतना था की इस बार की मोदी लहर और भयावह थी |

यही कारण है कि इस बार भाजपा के नेतृत्व वाली NDA सरकार और अधिक मजबूत नजर आ रही है | वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार इस लोकसभा चुनाव 2019 के पश्चात और कमजोर दिख रही है | जहाँ भाजपा अकेले इस लोकसभा चुनाव में 300 से ज्यादा सीटें लाने में सफल हुई वहीं कांग्रेस 10-12 राज्यों में खता तक नहीं खोल पाई |

इस लोकसभा चुनाव में मोदी लहर कुछ ऐसी थी कि क्या राजा क्या महाराजा, राज्यों के पूर्व मुख्यमंत्री भी इस आंधी में अपना किला नहीं बचा सके | UPA सरकार के 12 पूर्व मुख्यमंत्री जो इस लोकसभा चुनाव में अपना किला बचाने में असफल रहे उनमे 9 तो केवल कांग्रेस पार्टी के हैं |

12 पूर्व मुख्यमंत्री(12 Former Chief Minister) जो असफल रहे:-

लोकसभा चुनाव में असफल रहे 12 पूर्व मुख्यमंत्रियों (12 Former Chief Minister) में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता हरीश रावत, मेघालय के पूर्व मुख्यमंत्री मुकुल संगमा और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, अरुणाचल के पूर्व मुख्यमंत्री नबाम तुकी, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चह्वाण और सुशील शिंदे शामिल हैं |

इसके अलावा JDS नेता और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री H D Deve Gowda भी अपना किला बचाने में असफल रहे | वहीं झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता शिबु सोरेन, झारखंड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) के नेता और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मंराडी ने भी अपनी सीट गंवा दी | साथ ही बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता जीतन राम मांझी को भी हार का सामना करना पड़ा |

भूपेंद्र सिंह हुड्डा:-

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा इस लोकसभा चुनाव में सोनीपत लोकसभा सीट से लड़ रहे थे | उनके सामने भाजपा के रमेश चंद्र कौशिक थे | जहाँ रमेश चंद्र कौशिक को 587664 वोट मिले तो वहीं भूपेंद्र सिंह हुड्डा को 422800 वोटों से ही संतोष करना पड़ा | इसके साथ ही रमेश चंद्र कौशिक ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर 164864 वोटों की एक बड़ी जीत हासिल की |

हरीश रावत:-

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत इस लोकसभा चुनाव में नैनीताल लोकसभा सीट से लड़ रहे थे | उनके सामने भाजपा के अजय भट्ट थे | जहाँ अजय भट्ट को 772195 वोट मिले तो वहीं भूपेंद्र सिंह हुड्डा को 433099 वोटों से ही संतोष करना पड़ा | इसके साथ ही अजय भट्ट ने हरीश रावत पर 339096 वोटों की एक बड़ी जीत हासिल की |

मुकुल संगमा:-

मेघालय के पूर्व मुख्यमंत्री मुकुल संगमा इस लोकसभा चुनाव में तुरा लोकसभा सीट से लड़ रहे थे | उनके सामने नेशनल पीपुल्स पार्टी की अगाथा संगमा थी | जहाँ अगाथा संगमा को 303895 वोट मिले तो वहीं मुकुल संगमा को 240123 वोटों से ही संतोष करना पड़ा | इसके साथ ही अगाथा संगमा ने मुकुल संगमा पर 63772 वोटों की एक बड़ी जीत हासिल की |

एचडी देवगौड़ा :-

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी देवगौड़ा इस लोकसभा चुनाव में तुमकुर लोकसभा सीट से लड़ रहे थे | उनके सामने भाजपा के जीएस बासवाराज थी | जहाँ जीएस बासवाराज को 596127 वोट मिले तो वहीं एचडी देवगौड़ा को 582788 वोटों से ही संतोष करना पड़ा | इसके साथ ही जीएस बासवाराज ने एचडी देवगौड़ा पर 13339 वोटों की जीत हासिल की |

शिबु सोरेन:-

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबु सोरेन इस लोकसभा चुनाव में दुमका लोकसभा सीट से लड़ रहे थे | उनके सामने भाजपा के सुनील सोरेन थे | जहाँ सुनील सोरेन को 484923 वोट मिले तो वहीं शिबु सोरेन को 437333 वोटों से ही संतोष करना पड़ा | इसके साथ ही सुनील सोरेन ने शिबु सोरेन पर 47590 वोटों की एक बड़ी जीत हासिल की |

बाबूलाल मरांडी:-

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी इस लोकसभा चुनाव में कोडरमा लोकसभा सीट से लड़ रहे थे | उनके सामने भाजपा की अन्नपूर्णा देवी थी | जहाँ अन्नपूर्णा देवी को 753016 वोट मिले तो वहीं बाबूलाल मरांडी को 297416 वोटों से ही संतोष करना पड़ा | इसके साथ ही अन्नपूर्णा देवी ने बाबूलाल मरांडी पर 455600 वोटों की एक बड़ी जीत हासिल की |

शीला दीक्षित:-

दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित इस लोकसभा चुनाव में उत्तर-पूर्व दिल्ली लोकसभा सीट से लड़ रहे थे | उनके सामने भाजपा के मनोज तिवारी थे | जहाँ मनोज तिवारी को 787799 वोट मिले तो वहीं शीला दीक्षित को 421697 वोटों से ही संतोष करना पड़ा | इसके साथ ही मनोज तिवारी ने शीला दीक्षित पर 366102 वोटों की एक बड़ी जीत हासिल की |

दिग्विजय सिंह:-

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह इस लोकसभा चुनाव में भोपाल लोकसभा सीट से लड़ रहे थे | उनके सामने भाजपा की प्रज्ञा सिंह ठाकुर थी | जहाँ प्रज्ञा सिंह ठाकुर को 866482 वोट मिले तो वहीं दिग्विजय सिंह को 501660 वोटों से ही संतोष करना पड़ा | इसके साथ ही प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने दिग्विजय सिंह पर 364822 वोटों की एक बड़ी जीत हासिल की |

नबाम तुकी:-

अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नबाम तुकी इस लोकसभा चुनाव में अरुणाचल वेस्ट लोकसभा सीट से लड़ रहे थे | उनके सामने भाजपा के किरेन रिजिजु थे | किरेन रिजिजु ने नबाम तुकी पर 1 लाख 40 हजार से ज्यादा मतों के अंतर से एक बड़ी जीत हासिल की |

अशोक चह्वाण:-

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चह्वाण इस लोकसभा चुनाव में नांदेड़ लोकसभा सीट से लड़ रहे थे | उनके सामने भाजपा के प्रतापराव पाटिल चिखालिकर थे | प्रतापराव पाटिल चिखालिकर ने अशोक चह्वाण पर 40148 वोटों की जीत हासिल की |

सुशील शिंदे:-

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री सुशील शिंदे इस लोकसभा चुनाव में सोलापुर लोकसभा सीट से लड़ रहे थे | उनके सामने भाजपा के जय सिद्धेश्वर एस महास्वामीजी थे | जय सिद्धेश्वर एस महास्वामीजी ने सुशील शिंदे पर 158608 वोटों की जीत हासिल की |

जीतन राम मांझी:-

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी इस लोकसभा चुनाव में गया लोकसभा सीट से लड़ रहे थे | उनके सामने जदयू के विकास कुमार थे | विकास कुमार ने जीतन राम मांझी पर 152426 वोटों की जीत हासिल की |

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